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सरकार की सौगात: अब वाराणसी से दिल्ली दौड़ेगी बुलेट रेल

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2014 लोकसभा चुनाव के प्रचार से ही देश में बुलेट ट्रेन प्रधानमंत्री मोदी के मुख्य कार्यों में से एक था। उनके भाषणों में बुलेट ट्रेन की बातों से इस बात का अंदाज़ा लगाया जा सकता है। अगले साल यूपी में विधानसभा चुनाव को देखते हुए सरकार पीएम मोदी की संसदीय सीट वाराणसी को दिल्ली से जोड़ने के लिए इस महत्वाकांक्षी योजना का ऐलान कर दिया गया है। मुंबई-अहमदाबाद कॉरिडोर के बाद अब दूसरी बुलेट ट्रेन दिल्ली-वाराणसी के बीच चलेगी। 782 किलोमीटर का यह सफर केवल दो घंटे चालिस मिनट में पूरा होगा।  प्रोजेक्ट पर तेजी से काम करने के पीछे पीएम मोदी की रणनीति का एक हिस्सा हो सकता है, ताकि यूपी में लोगों के बीच उनकी विकास करने वाली सरकार के रूप में छवि बने।  एक अधिकारी के हवाले से रिपोर्ट में लिखा गया है कि भारतीय रेलवे ने प्रोजेक्ट के लिए एक स्पेनिश कंपनी से बातचीत की है। रेलवे कॉरिडोर के लिए काम करने वाली यह कंपनी नवंबर तक अपनी फाइनल रिपोर्ट जमा करा देगी।

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रिपोर्ट के मुताबिक दिल्ली से लखनऊ (506 किलोमीटर) का सफर 1.45 घंटे में पूरा होगा। दिल्ली से कोलकाता (1513) का सफर 4.56 घंटे में पूरा होगा। दिल्ली वाराणसी रूट पर 43 हजार करोड़ और दिल्ली-कोलकाता रूट पर 84 हजार करोड़ रुपए का खर्च आएगा।

स्वामी का विवादित बोल, रघुराम राजन को बताया कांग्रेसी एजेंट

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राज्यसभा सदस्य और भाजपा नेता सुब्रमण्यम स्वामी एक बार फिर से अपने विवादित बयान की वजह से चर्चा का केंद्र बने हुए हैं। स्वामी ने ट्वीट कर रघुराम राजन पर फिर से निशाना साधा है। अपने ट्वीट में उन्होंने राजन को कंग्रेसी एजेंट बताया है। उन्होंने कहा कि राजन का फैसला उनके आरोप को सिद्ध भी करता है।

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उन्होंने आरबीआई गवर्नर के उस फैसले पर टिप्पणी कहा कि, राजन ने कार्यकाल खत्म हो जाने के बाद फिर से शिक्षा के क्षेत्र में लौट जाए। स्वामी ने कहा, ‘बीजेपी के सरकार में आने के बाद से ही राजन कांग्रेस के एजेंट के तौर पर काम कर रहे थे और उनका यह फैसला मेरे इश शक को सही साबित करता है।’

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कैराना मामले पर योगी आदित्यनाथ ने उगला ज़हर, कहा ’60 फीसदी आबादी हुई है कम।’

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ओवैसी का भाजपा से सवाल, “मुज़फ्फरनगर दंगे के बाद 50,000 मुसलमानों ने किया पलायन, कौन है ज़िम्मेदार?”

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कैराना पलायन मामले से उत्तर प्रदेश राजनीति ही नहीं राष्ट्रीय राजनीति में एक हलचल पैदा हो गया है। हुकुम सिंह ने जब अपना ‘हुकुम का इक्का’ फेंका तो उन्हें भी अंदाज़ा नहीं रहा होगा की उनके इस कदम से प्रदेश की सियासत किस तरह से प्रभावित होगी।

साल 2013 के मुजफ्फरनगर दंगों के बाद 50,000 मुसलमानों के पलायन करने का दावा करते हुए एआईएमआईएम प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी ने शनिवार (18 जून) को भाजपा से कहा कि क्या वह वहां एक तथ्यान्वेषी टीम भेजेगी, जैसा कि इसने हिंदुओं के कथित पलायन के मुद्दे पर कैराना भेजी है। हैदराबाद से लोक सभा सदस्य ने उत्तर प्रदेश के कैराना से कथित तौर पर पलायन करने वाले 346 परिवारों की सूची को ‘फर्जी’ बताया है। उन्होंने कहा कि इस मुद्दे पर नाटक करना भाजपा और सपा दोनों के हितों के अनुकूल बैठता है।
ओवैसी ने दावा किया कि मुजफ्फरनगर दंगों के बाद 50,000 से अधिक लोगों ने अपना मूल स्थान छोड़ दिया जहां वे पीढ़ियों से रहते आ रहे थे। उन्होंने इसे देश की आजादी के बाद अल्पसंख्यकों को सामूहिक रूप से हटाने का कार्य बताया। उन्होंने कहा, ‘क्या भाजपा एक तथ्यान्वेषी टीम भेजेगी ? (मुजफ्फरनगर दंगों के बाद) विस्थापित हुए 50,000 लोगों के साथ क्या हुआ उसका पता लगाने के लिए क्या भाजपा कोई समय निकालेगी?’

कैराना मामले पर योगी आदित्यनाथ ने उगला ज़हर, पढ़ें पूरी खबर

ओवैसी ने दावा किया कि मूल रूप से उसके (भाजपा) पास कोई और मुद्दा नहीं है और यह (कैराना मुद्दा) भाजपा का असली चेहरा उजागर करता है जो सबका साथ सबका विकास की बात करती है। उन्होंने कहा कि यह भाजपा और सपा दोनों के लिए उपयुक्त बैठता है, भाजपा बहुसंख्यक समुदाय के बीच डर की भावना पैदा करना चाहती है। सपा मुसलमानों को यह संदेश देना चाहती है कि यदि आप सपा को नहीं चुनते हैं तो आप असुरक्षित हैं। इस तरह यह नाटक भाजपा और सपा, दोनों के अनुकूल बैठता है।
उन्होंने कहा कि जब ऐसा मुद्दा सामने आता है तो सपा खुश होती है क्योंकि इसे अपने मकसद में नाकाम रहने और कुशासन पर सवालों का जवाब नहीं देना पड़ता है। ओवैसी ने कहा कि एआईएमआईएम अगले साल के शुरुआत में उत्तर प्रदेश में होने वाले विधानसभा चुनाव लड़ेगा। उन्होंने कहा कि उनकी पार्टी ने उत्तर प्रदेश में एक गठबंधन बनाने के लिए विकल्प खुले रखे हैं।

भारत माता बनी व्यक्ति के शिक्षित और अशिक्षित होने का मापदंड

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Smriti Zubin Irani, HRD Minister of India and BJP leader.

केंद्रीय मानव संसाधन विकास मंत्री स्मृति ईरानी ने यहां शुक्रवार को कहा कि कि भारत को मां मानने वाला ही शिक्षित कहा जाएगा। टुकड़े करने की बात करने वाला कतई नहीं। भारतीय शिक्षा पद्धति मनुष्य का निर्माण करती है और ऐसा नागरिक तैयार करती है, जिसमें राष्ट्र के प्रति समर्पण भाव होता है। स्मृति ने ये बातें लखनऊ के इंदिरा गांधी प्रतिष्ठान में आयोजित एक संगोष्ठी में कही।

उन्होंने कहा, “कुछ अंग्रेजी पढ़े बुद्धिजीवी भारतीय शिक्षा पद्धति को संस्कृत का गुणगान कहते हैं तो कुछ पत्रकार इसे भगवाकरण, पर इससे शिक्षा में संस्कार भरने के लिए उठे कदम रुकने वाले नहीं हैं।” स्मृति ने यूथ इन एक्शन द्वारा आयोजित इस संगोष्ठी में राष्ट्रीय और भारतीय शिक्षा पद्धति पर व्याख्यान दिया। संगोष्ठी के दौरान स्मृति ईरानी ने कहा कि केंद्र की योजनाएं यूपी में जमीन पर नहीं उतर रहीं। साथ ही उन्होंने यूपी में महिला सुरक्षा पर भी चिंता जताई।

इंदिरा गांधी प्रतिष्ठान में शुक्रवार को ईरानी ने जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (JNU) प्रकरण की ओर इशारा करते हुए लोगों से पूछा, “आप ही बताइए, भारत के टुकड़े करने वाला शिक्षित है या जननी जन्मभूमिश्च की अवधारणा मानने वाला। क्या ऐसा करने वाले भारतीय शिक्षा पद्धति से परिचित होंगे या जो भारत को माता के रूप में पूजते हैं।” स्मृति ने भारतीय शिक्षा पद्धति को समाज को एकजुट करने वाला बताते हुए कहा, “ऐसे उद्देश्य को लेकर दी जाने वाली शिक्षा ही समाज को एकसूत्र में बांधती है। देश को विकास पथ पर अग्रसर करती है।”

अपने विरोधियों व पत्रकारों पर चुटकी लेते हुए उन्होंने कहा, “समाज के कुछ बौद्धिक लोग मुझे संस्कृत का गुणगान करने वाला कहते हैं। इसमें पत्रकारों का एक गुट शिक्षा के भगवाकरण करने का आरोप लगाता है। शायद इन्हें भारतीय शिक्षा पद्धति का ज्ञान ही नहीं है। अब आप ही बताइए, शिक्षित कौन? डिग्रीधारी, भौतिक जीवन जीने वाला या फिर समाज की एकता के लिए मानवीय रूप अख्तियार करने वाला।”

मौलाना मोदी और मौलाना मुलायम!! ये क्या कह गए ओवैसी, पढ़ें पूरी खबर…

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अपने बड़बोलेपन के लिए मशहूर अस्सद्दुदीन ओवैसी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और सपा प्रमुख मुलायम सिंह को मौलाना से संबोधित कर के एक नया बखेड़ा खड़ा कर दिया है। हालांकि अब तक विपक्षी दलों से इस पर प्रतिक्रिया नहीं मिली है पर यह देखना दिलचस्प होगा की इस संबोधन को भारतीय जनता पार्टी और समाजवादी पार्टी कैसे लेते हैं।

हैदराबाद के सांसद और एआईएमआईएम चीफ असदुद्दीन ओवैसी ने कहा है कि मौलाना नरेंद्र मोदी और मौलाना मुलायम सिंह यादव के बीच में फंस गए हैं। यह बात उन्‍होंने एक इंटरव्यू में कही। उनसे पूछा गया था कि वे यूपी में ‘मौलाना’ मुलायम सिंह यादव से कैसे निपटेंगे ? बता दें कि ओवैसी भी यूपी चुनाव 2017 के लिए अपनी तैयारियों में जुटे हुए हैं। वे मुसलमान और दलित वोटों के सहारे अपनी चुनावी नैया पार लगाने की कोशिश कर रहे हैं। दूसरी ओर, मुलायम हमेशा से खुद को मुसलमानों के हितैषी के तौर पर पेश करते रहे हैं।
मुलायम से निपटने के सवाल पर ओवैसी ने कहा, ‘देखा जाए तो मैं मौलाना नरेंद्र मोदी और मौलाना मुलायम सिंह यादव के बीच फंस गया हूं। आखिर मोदी खुद को एक बड़े सूफी विचारक समझते हैं। जहां तक हमारी बात है, हम लोगों के पास मुस्‍ल‍िमों और दलितों की तरक्‍की की बात लेकर जा रहे हैं। हम समाजवादी पार्टी के उन वादों का पर्दाफाश करेंगे जिनमें उन्‍होंने कहा था कि झूठे आरोपों में जेलों में बंद निर्दोष मुसलमानों को बाहर निकाला जाएगा। यूपी में कोई तरक्‍की नहीं हुई है।’

तो ये होंगी उत्तर प्रदेश चुनाव में कांग्रेस का चेहरा, प्रियंका गांधी पर है महत्वपूर्ण ज़िम्मेदारी

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उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनावों की बिसात बिछना शुरू हो गई है। कांग्रेस ने भी लगभग उत्तर प्रदेश चुनावों के लिए अपने ब्राह्मण चेहरे का चुनाव कर लिया है। कांग्रेस के अधिकारिक सूत्रों के मुता‌बिक आज दिल्ली की पूर्व मुख्यमंत्री शीला दीक्षित कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी और उपाध्यक्ष राहुल गांधी से मिलेंगी। बताया जा रहा है कि उत्तर प्रदेश चुनाव के लिए शीला दीक्षित कांग्रेस की तरफ उम्मीदवार हो सकती हैं। कांग्रेस के एक वरिष्ठ नेता ने बताया कि 78 वर्षीय शीला दीक्षित उत्तर प्रदेश में कांग्रेस का चेहरा हो सकती है।

कांग्रेस के लिए उत्तर प्रदेश चुनावों की रणनीति तैयार करने वाले प्रशांत किशोर ने पार्टी को सलाह दी थी कि उत्तर प्रदेश में पार्टी का मुख्यमंत्री पद के लिए एक ब्राह्मण चेहरा उतारना चा‌हिए।

यूपी चुनाव में प्रियंका गांधी की क्या होगी भूमिका

सूत्रों के हवाले से खबर मिली है कि, प्रियंका गांधी को उत्तर प्रदेश में चुनाव प्रचार की जिम्मेदारी भी दी जा सकती है। उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनावों में कांग्रेस पार्टी का जनाधार, समाजवादी पार्टी, बहुजन समाज पार्टी और भारतीय जनता पार्टी से बहुत पीछे है। प्रियंका गांधी ने खुद को अभी तक अमेठी और रायबरेली तक ही ‌सीमित रखा और यहीं पर चुनाव प्रचार किया है। यह दोनों संसदीय क्षेत्र कांग्रेस के खाते में आते हैं। कांग्रेस के वरिष्ठ नेता गुलाम नबी आजाद ने कहा कि पार्टी की मांग है और समय आ गया है कि प्रियंका गांधी पार्टी का प्रचार अन्य राज्यों में भी करें। उत्तर प्रदेश विधानसभा की 404 सीटों में से कांग्रेस के खाते में मात्र 30 सीट ही हैं।

राज ठाकरे ने ओवैसी के फ़ोटो वाला केक काटा कहा, “जो महाराष्ट्र के खिलाफ बोलेगा उसे काट देंगे।”

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महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना के प्रमुख राज ठाकरे के  अपने जन्मदिन पर एमआईएम के मुखिया असदुद्दीन ओवैसी का फोटो बना केक काटकर विवाद को न्योता दे दिया। आज राज ठाकरे का जन्मदिन है इसी मौके पर उन्होंने केक काटा।

MNS के कार्यकर्ता ओवैसी की तस्वीर वाला केक लेकर आए थे। कार्यकर्ताओं की गुजारिश पर राज ठाकरे ने इस केक के एक कोने को चाकू से काटा। इसके बाद सभी कार्यकर्ताओं ने केक खाया। इस मौके पर राज ठाकरे ने गरजते हुए कहा कि, “जो महाराष्ट्र के खिलाफ बोलेगा उसे काट डालेंगे।”

जबकि एमएनएस कार्यकर्ताओं ने कहा कि ओवैसी शैतान है, हैवान है। जो हिंदू के खिलाफ बात करते हैं, महाराष्ट्र के टुकड़े करने की बात करते हैं, उनके लिए राज साहब ने जो आदेश दिया है, हम उसका पालन करेंगे।

कैराना मामले में आया एक नया मोड़, राजनीतिक लाभ के लिए भाजपा सांसद करा रहे थे सांप्रदायिक ध्रुवीकरण !!

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उत्तर प्रदेश के कैराना मामले में डीआईजी एके राघव ने डीआईजी मुख्यालय को एक रिपोर्ट भेजी है जिसने इस पूरे मामले में एक नया मोड़ दे दिया है। इस रिपोर्ट में कई खुलासे हुए हैं। इसमें कहा गया है कि, कथित पलायन करने वाले हिंदुओं की लिस्ट बनाने वाले भाजपा सांसद हुकुम सिंह ने ये सब सिर्फ इसलिए किया क्योंकि वो यूपी चुनाव में अपनी बेटी को लड़वाना चाहते हैं, जिसके लिए वो अपनी बेटी को जीत दिलाने के लिए साम्प्रदायिक ध्रुवीकरण करवा रहे हैं।
ये ज्ञात हो की हुकुम सिंह ने ही एक लिस्ट जारी की थी जिसमे उन्होंने इस बात का ज़िक्र किया कि किसी विशेष समुदाय के डर और उनकी दहशत से भारी संख्या में हिंदुओं का वहां से पलायन हुआ है।

11 जून को डीजीपी हेडक्वार्टर को भेजी गई रिपोर्ट में डीआईजी ने बताया कि शामली जिले के कैराणा, झिंझाना, कांधला कस्बे में हिंदू और मुस्लिम दोनों समुदाय के लोग रहते हैं। यहां 85 फीसदी मुस्लिम और 15 फीसदी हिंदू आबादी है। आने वाले चुनाव में फायदा उठाने के लिए भाजपा और अन्य सहोयगी दल सांप्रदायिक माहौल बना रहे हैं। साथ ही रिपोर्ट में बड़ी सांप्रदायिक घटना की भी संभावना जताई है। रिपोर्ट में कहा गया है कि ये छोटी घटनाएं तुल देने की वजह से बड़ा रूप धारण कर सकती हैं।

बुंदेलखंड में सूखे से 10,000 से ज्यादा गाय मरी, इन मौतों का ‘अकलाख’ कौन है ??

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देश में कुछ राजनीतिक दल गोहत्या को ले कर कितने संवेदनशील हैं इस बात का अंदाज़ा गाय पर हो रही राजनीति से लगाया जा सकता है। देश की राजनीति का काला पन्ना दादरी काण्ड में कैसे गोहत्या के अफवाह में एक व्यक्ति की जान कैसे जाती है इसका साक्षी देश रहा। गोहत्या का मुद्दा दादारीकंड से शुरू हो कर आज फिर से उसी मुहाने पर खड़ा है। यह मुद्दा दुबारा तब गरमाया जब फॉरेंसिक जांच की रिपोर्ट सामने आई।  वहीं स्वराज अभियान के संस्थापक सदस्य व सामाजिक कार्यकर्ता योगेंद्र यादव ने दावा किया है कि सूखा प्रभावित क्षेत्र में लगभग 3 लाख मवेशी अकेले मई महीने में मारे गए हैं, जिनमें से 10 हजार गाय हैं.

योगेंद्र यादव ने बीजेपी पर निशाना साधते हुए कहां कि जहां राष्ट्रीय पार्टी का राष्ट्रीय नेतृत्व गाय को राष्ट्रमाता बनाने और बीफ बिक्री को लेकर डिबेट में उलझा रहता है. वहीं भीषण सूखे से गुजर रहे बुंदेलखंड में कम से कम 3 लाख मवेशी मर चुके हैं.

उत्तर प्रदेश और मध्य प्रदेश के 13 जिले मवेशियों के शव से पटे पड़े हैं

योगेंद्र यादव ने बताया कि यूपी और मध्यप्रदेश के 13 जिलों में मवेशियों के शव पटे पड़े हैं. क्षेत्र में भयानक दुर्गंध फैली हुई है जो बड़े पैमाने पर बीमारी का कारण बन सकती है. वहीं भाजपा के यूपी प्रवक्ता चंद्र मोहन ने राज्य सरकार को इसके लिए दोषी ठहराया है, उनका कहना है कि बुंदेलखंद की बर्बादी के लिए राज्य की समाजवादी सरकार जिम्मेदार है.

वहीं हम केंद्रीय स्तर पर सभी बुंदेलखंड के सांसद इन सूखा प्रभावित इलाकों में जाकर लोगों की मदद कर रहे हैं। एनजीओ के अनुसार उत्तर प्रदेश और मध्यप्रदेश के बुंदेलखंड क्षेत्र में 11,065 गांव हैं, सभी गांवों में औसत 10 से 100 मवेशियों की मृत्यु मई में हुई है इस हिसाब से अकेले मई में पूरे क्षेत्र में कम से कम तीन लाख मवेशियों की मौत हुई है.

योगेन्द्र यादव ने सरकार के नियत और नीति पर प्रश्नचिन्ह उठाते हुए आरोप लगाया कि, सूखाग्रस्त क्षेत्रों में चारों की कमी हर तरफ है। चारा बैंक स्किम केवल पेपर पर है। लोगों को इस स्किम के बारे में पता भी नहीं है। इस योजना से केवल नेताओं और उनके रिश्तेदारों को लाभ मिल रहा है, जिनके पास मवेशी हैं भी नहीं। वो इन योजनाओं का लाभ उठा कर पैसों को हड़पते हैं।