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अमेरिकी कांग्रेस में मोदी के भाषण का सच आया सामने, आप भी जाने सच

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अमेरिका में हुए मोदी दौरे का मुख्य आकर्षण केंद्र रहा अमेरिकी कांग्रेस में प्रधानमंत्री मोदी का अंग्रेजी में दिया हुआ भाषण। आम तौर पर हिंदी में बोलने वाले मोदी अपनी बातों से लोगों का दिल जीत लेते हैं। पर बिना देखे लगातार 40 मिनट तक अंग्रेजी में दिए अपने भाषण से उन्होंने दुनिया भर में वाहवाही लूटी है।
प्रधानमंत्री के भाषण के बाद एक फ़ोटो सोशल मीडिया पर बहुत तेज़ी से वायरल हुई है। इस फ़ोटो से यह समझ में आता है कि अपने भाषण के लिए उन्होंने टैलिप्राम्प्टर का सहारा लिया है। देश की मीडिया रिपोर्ट की माने तो यह खबर और तस्वीर सच्ची और सही है।

इस तकनीक से भाषण पढ़ने में माहिर हैं मोदी। आम तौर पर इस तकनीक से भाषण पढ़ना काफी मुश्किल होता है, क्योंकि टैलिप्राम्प्टर पर पढ़ना और उस बात को दर्शकों तक पहुँचना, दर्शकों को समझाना काफी मुश्किल होता है। टैलिप्राम्प्टर और दर्शकों दोनों में सामंजस्य बनाना सबसे बड़ी चुनौती होती है। इस तकनीक में मोदी को महारत हांसिल है। वह अपनी बात को प्रभावित ढंग से कहते हैं और दर्शकों तक उनकी बात भी पहुँचती है।

जानिए कैसे काम करता है टैलिप्राम्प्टर

दर्शकों को टैलिप्राम्प्टर नज़र नहीं आता है, क्योंकि एक तरफ से यह पारदर्शी होता है। वक्ता जैसे जैसे टैलिप्राम्प्टर पर लिखे वाक्यों को पढ़ता है, पढ़े हुए वाक्य नीचे स्क्रॉल होते जाते हैं। पारदर्शी स्क्रीन होने के कारण ऐसा लगता है जैसे वक्ता दर्शकों की ओर देख के बोल रहा है

जब मोदी भी खा गए धोखा

2015 में श्रीलंका दौरे पर श्रीलंकाई राष्ट्रपति मैत्रिपाल सिरिसेना के स्वागत भाषण में प्रधानमंत्री मोदी ने टैलिप्राम्प्टर का इस्तेमाल किया था। शब्द दर शब्द पढ़ने के चक्कर में प्रधानमंत्री ने आखिर वो गलती कर ही दी, जो अक्सर किसी टैलिप्राम्प्टर पढ़ने वाले से हो जाती है। उन्होंने मैत्रिपाला की पत्नी Mrs. Sirisena को एमआरएश सिरिसेना बोल दिया था।

प्रधानमंत्री मोदी की गुगली से बौखलाया हाफ़िज़ सईद, दिया ड्रोन उड़ाने की धमकी

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भारत-अमेरिका की बढ़ती नजदीकियों से अब आतंकवादियों की बौखलाहट बढ़ने लगी हैं। आतंकवादी संगठन जमात उद-दावा प्रमुख और 2008 के मुंबई हमलों के साजिशकर्ता हाफिज सईद का कहना है कि अगर पाकिस्तानी सरजमीं में अमेरिका का कोई भी ड्रोन दिखता है तो उसे तुरंत मार गिराया जाए क्योंकि अमेरिका और भारत दोनों ही पाकिस्‍तान के खिलाफ दुश्‍मनी का भाव रखते हैं। उसने कहा कि भारत को अमेरिका का समर्थन हासिल है इसलिए अमेरिकी ड्रोन को पाक में नहीं घुसने देना चाहिए।

शुक्रवार की नमाज के बाद हाफिज ने भीड़ से कहा कि हम आर्मी चीफ से आग्रह करते हैं और वायुसेना प्रमुख से कहते हैं कि यह उनकी ड्यूटी है कि अगर कोई भी ड्रोन पाकिस्‍तानी सीमा में आता है तो वे उसे मार गिराएं और उसका माकूल जवाब दें।

बता दें कि अफगान तालिबान चीफ मुल्‍ला मंसूर को मारने के लिए अमेरिका ने पाकिस्‍तान की सरजमीं पर 21 मई को जो ड्रोन हमला किया था, उसके खिलाफ हाफिज का संगठन जमात उद-दावा पाकिस्‍तान के प्रमुख शहरों में विरोध प्रदर्शन करने वाला है। इस दौरान वो  भाषण भी देगा।

तोगड़िया ने हिंदुओं की मर्दानगी को ललकारा, कहा ‘घर जा के अपनी मर्दानगी की पूजा करो।’ मर्दानगी बढ़ाने के लिए बताए नुस्ख़े

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विश्व हिंदू परिषद (VHP) के नेता प्रवीण तोगड़िया ने अपनी रैली में विवादित बयान दिया है। तोगड़िया ने हिंदुओं की लगातार कम हो रही जनसंख्या के लिए हिंदुओं में बढ़ती नामर्दी को वजह बताया है। उन्होंने अपनी बनाई दवाई दिखाते हुए कहा कि हिंदू मर्दों को घर जाकर अपनी मर्दानगी की पूजा करनी चाहिए। यह रैली गुजरात के बरुच जिले में हुई थी।
प्रवीण तोगड़िया ने मुसलमानों से मुकाबला करने के लिए जनसंख्या बढ़ाने पर जोर भी दिया। उन्होंने कहा, ‘अब हिंदू घटेगा नहीं, बढ़ेगा, धर्मांतरण को ना और घर वापसी हो हां, लव जिहाद को ना और यूनिफॉर्म सिविल कोड को हां, बांग्लादेशी मुस्लिम को ना और हिंदू घरों में बच्चे पैदा करो।’

इसके बाद प्रवीण ने युवाओं को तंबाकू से दूर रहने की सलाह देते हुए कहा कि यह नामर्दी का सबसे बड़ी वजह है। डॉक्टर की पढ़ाई कर चुके तोगड़िया ने अपनी दवाई दिखाते हुए आगे कहा, ‘यह मेरी बनाई चीज है। यह 600 रुपए में मिलती है पर मैं यहां 500 में दे दूंगा। इसे ले जाकर अपनी पत्नी को देना और कहना की इसको आपके खाने में मिलाकर दे। आप शक्तिशाली बने रहेंगे और बच्चे पैदा करते रहेंगे।’

बीजेपी पर शंकराचार्य का बड़ा हमला, कहा ‘सरकार का दलित प्रेम केवल दिखावा, कर रहे हैं राजनीति।’

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भाजपा अध्यक्ष अमित शाह पर निशाना साधते हुए शंकराचार्य स्वरूपानंद सरस्वती ने गुरुवार (8 जून) को दलितों के प्रति भाजपा के प्रेम को झूठा करार दिया और कहा कि दलित परिवारों के साथ नेताओं का भोजन करना विशुद्ध रूप से राजनैतिक कृत्य है। द्वारकापीठ और शारदापीठ के शंकराचार्य ने कहा, ‘बिना पूर्व सूचना के वो क्यों नहीं उनके साथ भोजन करते हैं।’
उन्होंने कहा, ‘राजनैतिक फायदे के लिए दलितों के साथ उज्जैन में क्षिप्रा नदी में स्नान करने की एक नयी परंपरा स्थापित की गई। नदियों, मंदिरों और धार्मिक स्थलों पर जाति, धर्म या वर्ण के आधार पर कोई भेदभाव नहीं है।’ दलितों के प्रति भाजपा के प्रेम को झूठा करार देते हुए उन्होंने कहा कि दलित परिवारों के साथ भोजन करना विशुद्ध रूप से राजनैतिक कृत्य है।
वहीं, बिसहड़ा मामले में रिपोर्ट सामने आने के बाद की स्थिति पर स्वरूपानंद ने कहा कि बेशक, जिन लोगों ने कानून हाथ में लिया, उन्हें ऐसा नहीं करना चाहिए था। उन्होंने बेहद तीखे शब्दों में कहा, ‘जब कोई ब्राह्मण मरता है, तो सरकार को सहिष्णुता नहीं दिखाती। लेकिन जब कोई अल्पसंख्यक मरता है तो चिल्लाने लगते हैं।’  उन्होंने कहा कि सवाल यह है कि सरकार अपनी जिम्मेदारी क्यों नहीं पूरी करती। जब गौहत्या पर प्रतिबंध है, तो फिर कोई ऐसा क्यों करता है।
उन्होंने आरोप लगाया, ‘अभी भी आए दिन उत्तर प्रदेश व हरियाणा के एक बड़े हिस्से से असम व पश्चिम बंगाल को निरंतर गायों की तस्करी की जा रही है। उनका खुलेआम वध किया जा रहा है। गौहत्या बंद होने के बावजूद अगर सरकार रोकथाम नहीं कर पाती तो निश्चित ही यह उसकी विफलता का सूचक है।’

रेल यात्रा में महिलाओं की सुरक्षा के लिए मोदी सरकार की अब तक की सबसे बड़ी योजना!

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महिलाओं की सुरक्षा के मदद नज़र मोदी सरकार एक महत्वपूर्ण कदम उठाने वाली है। रेल यात्रा के दौरान महिलाओं के सुरक्षा के मद्देनजर, देश के 1000 रेलवे स्टेशनों पर 35000 से ज्यादा कैमरों को लगाने की योजना बन रही है। यह भारतीय रेलवे का सबसे बड़ा सिक्यूरिटी सर्विलांस सिस्टम होगा।

बीते महीने प्रधानमंत्री कार्यालय में एक अहम बैठक हुई। रेलवे के अधिकारियों को बताया गया कि पीएम चाहते हैं कि रेलवे को महिलाओं के लिए सुरक्षित बनाया जाए। इसमें केंद्र सरकार के निर्भया फंड को इस्‍तेमाल करने का फैसला किया गया है। इस प्रोजेक्‍ट की अहमियत को समझते हुए वित्‍त मंत्रालय ने भी मीटिंग के तीन दिन बाद ही रिकॉर्ड समय में प्रोजेक्‍ट को मंजूरी दे दी। साथ ही इस वित्‍त वर्ष के लिए 200 करोड़ रुपए जारी कर दिया ताकि काम तुरंत शुरू हो सके। बाकी की रकम अगले साल दी जाएगी। सूत्रों ने द इंडियन एक्‍सप्रेस से इस बात की पुष्‍टि‍ की कि रेलवे ने इस काम को अपनी सर्वोच्‍च प्राथमिकता में रखा है। रेलवे बोर्ड के चेयरमैन खुद इस प्रोजेक्‍ट पर नजर रख रहे हैं।

बिहार: जानिए बिहार में कैसे बने फ़र्ज़ी टॉपर

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बिहार के इंटरमीडिएट एग्जाम के रिजल्ट के बाद एक टीवी इंटरव्यू में आर्ट्स और विज्ञान विषय के टॉपरों का का पर्दाफाश हुआ है, इस मामले में हो रहे रोज़ नए खुलासों से बिहार शिक्षा बोर्ड की नींद हराम हो गई है। इस काण्ड में अभी तक पांच छात्रों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई है।  वही बिहार बोर्ड के अध्यक्ष लालकेश्वर सिंह और बिशुन राय कॉलेज के संचालक बच्चा राय अभी तक फरार हैं।

पुलिस लगातार अपने तफ़तीस में लगी हुई है। घोटाले और गिरफ्तारियों की कड़ियों को जोड़ कर मामले की तह तक पहुँचने की कोशिश की जा रही है। इस पुरे घटना की छानबीन करने के लिए एसआईटी का गठन किया गया है, जिसने हाजीपुर स्थित बिसुन राय कॉलेज में गुरुवार शाम छापामारी भी की।

वहीं टॉपरों को लेकर देश में अपनी तरह के इस पहले घोटाले के बीच बड़ा सवाल ये है कि आखिर इन छात्रों ने टॉप किया कैसे? क्या इसके लिए कुछ छात्रों को विशेष तौर पर नकल करवाई गई या फिर बोर्ड के सेंटर लगवाने में हेराफेरी की गई या इन सबसे इतर कोई अन्य तरीका अपनाया गया।

अभी तक की जांच में टॉप करवाने का जो सच सामने आया है वो थोड़ा चौंकाने वाला है। तो चलिए आपको तफशील से बताते हैं वो सच जिससे जुड़ा है टॉपर बनाने का वो खेल जिसने बिहार की पूरी माध्यमिक शिक्षा व्यवस्‍था पर कालिख पोत दी है।

आइए जाने कैसे होती थी कॉपियों की हेरा फेरी

परीक्षाओं में पास कराने या टॉप करने की हेराफेरी के जितने भी मामले सामने आते हैं उनमें ज्यादातर मामले नकल या सामूहिक नकल कराने के ही होते हैं। लेकिन बिहार में टॉप कराने के मामले में बिल्कुल अलग तरीका अपनाया गया जिससे कहीं पर भी शक की गुंजाइश न रहे और न ही चोरी पकड़ में आ सके।

असल में फर्जीवाड़े का यह सारा खेल बच्चा राय और बोर्ड अधिकारियों की शह पर खेला जाता था। बच्चा राय अपने कालेज विशुन राय कालेज का सेंटर अपनी मर्जी से लगवाता था। इसके बाद कॉपियां कहां चेक होनी हैं ये भी वह खुद ही तय करता था। परीक्षा होने के बाद जब सारी कॉपियां जांच होने के लिए केंद्र पर पहुंच जाती थी तब ये सारा खेल शुरू होता था।

सूत्रों के अनुसार जिन छात्रों को टॉप करवाना या नंबर अच्छे रखवाने होते थे उनकी कॉपियां बंडल में से ढूंढकर निकाल ली जाती ‌थी। फिर उन कॉपियों के ऊपर के पिन खोलकर अंदर के पेज निकाल लिए जाते थे, फ्रंट पेज पहले वाला ही रखा जाता था।

इसी बीच एक व्यक्ति या छात्र इत्‍मीनान से सही सवालों के जवाब खाली उत्तर पुस्तिका में लिखते थे जिसके ऊपर का पेज उतारकर वापस पुरानी वाली कॉपी के फ्रंट पेज के अंदर डाल दिया जाता था। यह सारा काम इतने शातिर तरीके से किया जाता था कि कॉपी से छेड़छाड़ का अंदाजा लगाना मुश्किल होता था।

बिहार: सरकार के आदेश पर मारे गए 250 नीलगाय, केंद्र के दो मंत्री आए आमने सामने

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बिहार के मोकामा में हुए 250 से ज्यादा नीलगायों की हत्या ने एक अलग सियासी बवंडर उठा दिया है। केंद्र ने बिहार सरकार के आग्रह पर हैदराबाद से दो शार्प शूटरों को बिहार में भेजा है।

बिहार के मोकामा में करीब 250 नीलगायों की गोली मारकर हत्या के मामले में केंद्र के दो मंत्री आमने-सामने आ गए हैं। केंद्रीय महिला और बाल विकास मंत्री मेनका गांधी ने इसके लिए पर्यावरण मंत्री प्रकाश जावड़ेकर को जिम्मेदार ठहराया है। वहीं जावड़ेकर का कहना है कि राज्यों के आग्रह के बाद ही जानवरों को मारने का आदेश दिया गया है।

मेनका गांधी ने तल्ख लहजे में कहा कि बिहार में पहली बार इतना बड़ा नरसंहार (नीलगायों का) हुआ है। यहां कोई इस काम के लिए तैयार नहीं हुआ तो बाहर से लोगों को बुलाया गया। इन्हें मारने की जरूरत क्यों है। जंगली जानवरों को मारना शर्म की बात है। इस घिनौने काम के लिए क्यों इजाजत दी गई है।

प्रकाश जावड़ेकर ने मेनका के बयान पर कहा, ‘किसने क्या कहा उस पर मैं प्रतिक्रया नहीं देता। जब किसानों को नुकसान होता है. ..बहुत तकलीफ होती है। अगर राज्य सरकार प्रस्ताव भेजती है तो ही हम किसी विशेष कार्य के लिए साइंटिफिक मैनेजमेंट के लिए राज्य सरकार के प्रस्ताव को मंजूरी दी जाती है। ये केंद्र का कार्यक्रम नहीं है। यह पहले से बने कानून के हिसाब से हो रहा है।

मेनका ने कहा कि पर्यावरण मंत्रालय हर राज्य को लिख रहा है कि आप बताओ किसको मारना है। हम इजाजत दे देंगे। बंगाल में उन्होंने कह दिया कि हाथी को मारें। हिमाचल को कहा कि हाथी को मारें। गोवा में कह दिया कि मोर को। अब कोई जानवर नहीं छूटा। चांदपुर में इतना अनर्थ हो रहा है कि उन्होंने 53 जंगली सुअर मारे हैं। अभी और 50 की इजाजत दी है। इस घटना के लिए पर्यावरण मंत्रालय जिम्मेदार है।

पर्यावरण मंत्री प्रकाश जावड़ेकर ने कहा कि राज्य सरकार प्रस्ताव देती है तो हम राज्य सरकार को मंजूरी देते हैं। ये केंद्र सरकार का नहीं राज्य सरकार का काम है। इसके लिए पहले से ही कानून बना हुआ है।

विदेशी यात्रा करने में मोदी से पिछड़े ओबामा

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2014 मई में कार्यभार सँभालने के बाद प्रधानमंत्री मोदी लगातार विदेशी यात्रायें करते रहे। विदेशी संबंधो, विदेशी निवेश द्विपक्षीय व्यापार जैसे अनेक महत्वपूर्ण बिंदु रहे जिनके लिहाज से ये यात्रायें बहुत ज़रूरी भी रही।
अपने तीन दिवसीय दौरे के तहत वो अमेरिका से मेक्सिको पहुचें, इसी के साथ वो अमेरिका के राष्ट्रपति बराक ओबामा से भी ज्यादा विदेशी यात्रा करने वाले राष्ट्राध्यक्ष बन गए।

विमान यात्रा के लॉग के अनुसार नरेंद्र मोदी ने अपने कार्यकाल के शुरुआत होने से अब तक कुल 35 देशों की यात्राएं की हैं और इस दौरान उन्होंने दुनिया के दो तिहाई राष्ट्राध्यक्षों से मुलाकात भी की है। दुनिया के अन्य देशों के साथ कूटनीतिक संबंधों को और ज्यादा मजबूत करने के इरादे से मोदी ने ये हवाई यात्राएं की है।

हिंदुस्तान टाइम्स में छपी एक खबर के मुताबिक जहां एक ओर मोदी ने कुल 35 देशों की यात्राएं की हैं वहीं ओबामा ने अपने दूसरे कार्यकाल के पहले दो सालों (जनवरी 2009 से जनवरी 2011 तक) के भीतर महज 25 देशों की यात्राएं की है। जहां मोदी ने मई 2014 से मई 2016 के बीच 1,64,187 किमी की हवाई दूरी तय की है वहीं ओबामा ने महज 1,56,336 किमी की। ये आंकड़े दोनों राष्ट्राध्यक्षों के कार्यकाल के पहले दो वर्षों के हवाई यात्राओं का तुलनात्मक अध्ययन है।

उड़ता पंजाब: ‘मुझे मोदी का चमचा होने पर गर्व है।’- पहलाज निहलानी

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‘कोई माफ़ी नहीं, कोई इस्तीफ़ा नहीं।’ ये कहना है सेंसर बोर्ड के प्रमुख पहलाज निहलानी का। पहलाज निहलानी आज देश भर में चर्चा के केंद्र इस वजह से बन गए, क्योंकि उनका ये आरोप है कि अनुराग कश्यप की निर्देशित फ़िल्म ‘ उड़ता पंजाब’ में आम आदमी पार्टी का पैसा लगा है। हालाँकि फ़िल्म निर्देशक अनुराग कश्यप फ़िल्म पर हो रही राजनीति से बहुत दुखी नज़र आए, कई बार उनका गुस्सा सार्वजनिक तौर पर भी सामने आया। उन्होंने इसकी सफाई भी दी, कि उनकी फ़िल्म और राजनीति से दूर दूर तक कोई नाता नहीं है। पहलाज निहलानी के इस आरोप का बॉलीवुड जगत के साथ साथ सोशल मीडिया पर भी जम के विरोध हुआ। पर इन विरोधों का असर बोर्ड प्रमुख पर नहीं दिखा। वह अभी भी अपने आरोपों को ले के अड़े हैं, उनका कहना है कि,  ‘ मैंने जो सुना, वही कहा।’

बॉलीवुड के कई लोगों ने ऐलान किया की वे इस लड़ाई में अनुराग कश्यप के साथ खड़े है। इन सभी लोगों का दावा है कि पहलाज निहलानी ने इस फ़िल्म से उन सीनों को हटाना चाहते हैं, जो पंजाब और चुनाव की तरफ इशारा कर रही है। जिसके बाद फ़िल्म में कुल 89 कट लगाए गए हैं। निहलानी के इस कदम का फ़िल्म जगत में भारी विरोध हो रहा है। कई लोगों का मानना है कि इस तरह की हरकतें ना सिर्फ फ़िल्म का अपमान कर रही हैं, बल्कि यह ‘ फ़िल्म जगत’ का भी अपमान है। अपने गुस्से को ज़ाहिर करते हुए लोगों ने ना सिर्फ निहलानी से माफ़ी मांगने की मांग की है, बल्कि फ़िल्म रोकने का आरोप लगाते हुए उनके इस्तीफे की भी मांग की है।

इधर निहलानी ने इन सभी आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि, ‘केंद्र कभी सेंसर बोर्ड के कामों में दखल नहीं देती। इस तरह को कोई राजनैतिक दबाव नहीं था।’
निहलानी ने आगे कहा, ‘जैसा की अनुराग कश्यप ने कहा की मैं मोदी का चमचा हूँ। हाँ, मुझे गर्व है की मैं मोदी का चमचा हूँ। ये किसी इटली के प्रधानमंत्री का चमचा होने से अच्छा है।’
पहलाज निहलानी ने इन बातों का भी खंडन किया की उन्होंने फ़िल्म निर्माताओं को फ़िल्म के नाम से पंजाब शब्द को हटाने की बात कही है। निहलानी ने इस बात को भी बताने से इंकार किया कि फ़िल्म के किन दृश्यों को हटाया गया है। पहलाज अपने फैसले पर टिके हुए हैं, उनका कहना है कि, ‘जब कोई पूरी फ़िल्म देखेगा तब उसे समझ आएगा की क्यों पंजाब शब्द हटाना चाहिए।’

जानिए प्रधानमंत्री मोदी के भाषण के महत्वपूर्ण 36 बिंदुओं को, जिनके बाद तालियों से गूँज उठा अमेरिकी कांग्रेस

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NewBuzzIndia: NewBuzz Exclusive

जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अमरीकी कांग्रेस को संबोधित कर रहे थे तब दुनिया भर की नज़रे उन पर टिकी थी साथ ही साथ इस दौरे से देश के लोगों की उम्मीदें भी लगी हुई थीं।

आइए जाने की प्रधानमंत्री के भाषण के 36 महत्वपूर्ण बिंदु क्या रहे।

1. दोनों देशों के रिश्ते की नई धुन है ये ।

2. लंबे और अच्छे भविष्य के लिए हमें जुड़ना होगा।

3. आतंकवाद का कोई धर्म नहीं, इसे धर्म से अलग करना होगा।

4. हम बेहतर भविष्य के लिए काम कर रहे हैं।

5. सोलर ऊर्जा के लिए अमेरिका की मदद ज़रूरी।

7. UN शांति मोर्चे में भारत का अहम् योगदान।

8. बिना नाम लिए पाकिस्तान पर साधा निशाना, कहा ‘ भारत के पड़ोस में पनप रहा ऐ आतंकवाद।’

9. आतंकवाद का ख़ात्मा हर हाल में ज़रूरी।

10. सभी को एक साथ मिल कर आतंकवाद के खिलाफ लड़ने की ज़रूरत है।

11. आतंकवाद पर भाषण देने वालों को कड़ा संदेश मिलना चाहिए।

12. भारत के पश्चिमी सिमा से अफ्रीका तक आतंकवाद के कई नाम।

13. आतंकवाद सबसे बड़ा खतरा है।

14. अफगानिस्तान में अमेरिका का रोले काबिल-ए-तारीफ़।

15. एशिया से अफ्रीका तक शांति चाहता है भारत।

16. हिन्द महासागर में भारत अपना रोले निभाने को तैयार।

17. दोनों देशों का जुड़ना ज़रूरी, अलग होने से बात नहीं बनेगी।

18. साईबर आतंकवाद बहुत तेज़ी से बढ़ रहा है।

19. अमेरिकी कंपनियों के लिए भारत पसंदीदा जगह।

20. भारत का 7.6% विकास दर दुनिया भर के लिए अवसर।

21. अमेरिका की सामरिक रणनीति के लिए भारत अहम् है।

22. 2022 तक भारत को आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनाना है।

23. एक अरब लोगों को मिलेगी ब्रॉडबैंड की सुविधा।

24. अमेरिका के विकास में भारतीयों का बहुत बड़ा योगदान है।

25. भारत में सामाजिक- आर्थिक बदलाव का दौर।

26. अमेरिका की ताक़त हमारे लिए गर्व की बात है।

27. हर क्षेत्र के भारतीय अमरीका में मौज़ूद हैं।

28. योग दोनों देशों को जोड़ता है।

29. भारत का सबसे ज्यादा कारोबार अमरीका के साथ।

30. साझा कारोबार से दोनों देशों का फायदा हुआ।

31. नॉर्मन बोरलैंग् की हरित क्रांति में महत्वपूर्ण भूमिका रही है।

32. हमारे रिश्तें इतिहास के हिचकिचाहट से ऊपर उठ गए हैं।

33. हमारा इतिहास अलग, हमारी मान्यताएँ एक जैसी।

34. अमेरिकी संविधान का असर बाबा साहेब अंबेडकर में दिखा।

35. अमेरिका बुरे वक़्त में भारत के साथ रहा।

36. गांधी जी की अहिंसा ने मार्टिन लूथर किंग को प्रेरणा दी।

प्रधानमंत्री के शानदार उद्बोधन के बाद अमरीकी कांग्रेस में तालियों की गड़गड़ाहट थमने का नाम नहीं ले रही थी। यह उत्साह मात्र औपचारिकता भर के लिए नहीं था बल्कि प्रधानमंत्री के शब्द दर शब्द पर अमरीकी नेताओं की सहमति को भी दर्शा रहा था।

अब देखने वाली बात यह होगी की आने वाले समय में भारत अमेरिका से उन मुद्दों पर कैसे फायदा उठा सकता है जिन पर आज दोनों की सहमति बनी है।