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बिहार के मोकामा में हुए 250 से ज्यादा नीलगायों की हत्या ने एक अलग सियासी बवंडर उठा दिया है। केंद्र ने बिहार सरकार के आग्रह पर हैदराबाद से दो शार्प शूटरों को बिहार में भेजा है।
बिहार के मोकामा में करीब 250 नीलगायों की गोली मारकर हत्या के मामले में केंद्र के दो मंत्री आमने-सामने आ गए हैं। केंद्रीय महिला और बाल विकास मंत्री मेनका गांधी ने इसके लिए पर्यावरण मंत्री प्रकाश जावड़ेकर को जिम्मेदार ठहराया है। वहीं जावड़ेकर का कहना है कि राज्यों के आग्रह के बाद ही जानवरों को मारने का आदेश दिया गया है।
मेनका गांधी ने तल्ख लहजे में कहा कि बिहार में पहली बार इतना बड़ा नरसंहार (नीलगायों का) हुआ है। यहां कोई इस काम के लिए तैयार नहीं हुआ तो बाहर से लोगों को बुलाया गया। इन्हें मारने की जरूरत क्यों है। जंगली जानवरों को मारना शर्म की बात है। इस घिनौने काम के लिए क्यों इजाजत दी गई है।
प्रकाश जावड़ेकर ने मेनका के बयान पर कहा, ‘किसने क्या कहा उस पर मैं प्रतिक्रया नहीं देता। जब किसानों को नुकसान होता है. ..बहुत तकलीफ होती है। अगर राज्य सरकार प्रस्ताव भेजती है तो ही हम किसी विशेष कार्य के लिए साइंटिफिक मैनेजमेंट के लिए राज्य सरकार के प्रस्ताव को मंजूरी दी जाती है। ये केंद्र का कार्यक्रम नहीं है। यह पहले से बने कानून के हिसाब से हो रहा है।
मेनका ने कहा कि पर्यावरण मंत्रालय हर राज्य को लिख रहा है कि आप बताओ किसको मारना है। हम इजाजत दे देंगे। बंगाल में उन्होंने कह दिया कि हाथी को मारें। हिमाचल को कहा कि हाथी को मारें। गोवा में कह दिया कि मोर को। अब कोई जानवर नहीं छूटा। चांदपुर में इतना अनर्थ हो रहा है कि उन्होंने 53 जंगली सुअर मारे हैं। अभी और 50 की इजाजत दी है। इस घटना के लिए पर्यावरण मंत्रालय जिम्मेदार है।
पर्यावरण मंत्री प्रकाश जावड़ेकर ने कहा कि राज्य सरकार प्रस्ताव देती है तो हम राज्य सरकार को मंजूरी देते हैं। ये केंद्र सरकार का नहीं राज्य सरकार का काम है। इसके लिए पहले से ही कानून बना हुआ है।
