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बिहार: अब विधायक की डिग्री आई घेरे में,12 वर्ष की उम्र में ग्रेजुएशन और 13 वर्ष में कर चुकी थी बी.एड.

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बिहार आज कल लगातार अपने शिक्षा के बदहाल स्तर को ले कर देश भर में चर्चा का केंद्र बना हुआ है। अभी बिहार बोर्ड टॉपर्स फर्ज़ीवाड़े के कारण विवाद में घिरा हुआ है की एक और नयी मुसीबत सामने आ खड़ी हुई है। बिहार शिक्षा बोर्ड के पूर्व अध्यक्ष लालेश्वर प्रसाद तथा उनकी पत्नी उषा सिन्हा जो की जनता दल(यू) की पूर्व विधायक भी है सरकार के लिए नई फजीहत बन गए। उषा सिन्हा का शैक्षिक रिकॉर्ड उनके लिए समस्या का कारण बन गया है।

उषा सिंह ने 2010 में बिहार विधानसभा चुनाव के लिए उन्होंने जो हलफनामा दिया था, उसके अनुसार उन्होंने महज 8 वर्ष की उम्र में ही दसवीं पास कर लिया था, 10 वर्ष की उम्र में 12वीं पास, 12 वर्ष की उम्र में अपनी ग्रेजुएशन की डिग्री तो 13 वर्ष की उम्र में बीएड भी कर लिया था।

बिहार बोर्ड व विवि सूत्र बताते हैं कि जिस उम्र में ऊषा सिन्हा के उपरोक्त परीक्षाओं के उत्तीर्ण होने की बात कही जा रही है, वह कतई संभव नहीं है। इस बाबत बिहार बोर्ड के अधिकारी कुछ भी बोलने से कतरा रहे हैं, लेकिन उन्हें इस बात से इंकार नहीं कि अगर मामले की जांच हो तो उम्र या डिग्री का कोई नया घोटाला सामने आने की आशंका है। ऊषा सिन्हा फिलहाल फरार हैं, इसलिए इस बाबत उनका पक्ष ले पाना संभव नहीं हो सका।

कैराना मामले में आया एक नया मोड़, राजनीतिक लाभ के लिए भाजपा सांसद करा रहे थे सांप्रदायिक ध्रुवीकरण !!

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उत्तर प्रदेश के कैराना मामले में डीआईजी एके राघव ने डीआईजी मुख्यालय को एक रिपोर्ट भेजी है जिसने इस पूरे मामले में एक नया मोड़ दे दिया है। इस रिपोर्ट में कई खुलासे हुए हैं। इसमें कहा गया है कि, कथित पलायन करने वाले हिंदुओं की लिस्ट बनाने वाले भाजपा सांसद हुकुम सिंह ने ये सब सिर्फ इसलिए किया क्योंकि वो यूपी चुनाव में अपनी बेटी को लड़वाना चाहते हैं, जिसके लिए वो अपनी बेटी को जीत दिलाने के लिए साम्प्रदायिक ध्रुवीकरण करवा रहे हैं।
ये ज्ञात हो की हुकुम सिंह ने ही एक लिस्ट जारी की थी जिसमे उन्होंने इस बात का ज़िक्र किया कि किसी विशेष समुदाय के डर और उनकी दहशत से भारी संख्या में हिंदुओं का वहां से पलायन हुआ है।

11 जून को डीजीपी हेडक्वार्टर को भेजी गई रिपोर्ट में डीआईजी ने बताया कि शामली जिले के कैराणा, झिंझाना, कांधला कस्बे में हिंदू और मुस्लिम दोनों समुदाय के लोग रहते हैं। यहां 85 फीसदी मुस्लिम और 15 फीसदी हिंदू आबादी है। आने वाले चुनाव में फायदा उठाने के लिए भाजपा और अन्य सहोयगी दल सांप्रदायिक माहौल बना रहे हैं। साथ ही रिपोर्ट में बड़ी सांप्रदायिक घटना की भी संभावना जताई है। रिपोर्ट में कहा गया है कि ये छोटी घटनाएं तुल देने की वजह से बड़ा रूप धारण कर सकती हैं।

बुंदेलखंड में सूखे से 10,000 से ज्यादा गाय मरी, इन मौतों का ‘अकलाख’ कौन है ??

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देश में कुछ राजनीतिक दल गोहत्या को ले कर कितने संवेदनशील हैं इस बात का अंदाज़ा गाय पर हो रही राजनीति से लगाया जा सकता है। देश की राजनीति का काला पन्ना दादरी काण्ड में कैसे गोहत्या के अफवाह में एक व्यक्ति की जान कैसे जाती है इसका साक्षी देश रहा। गोहत्या का मुद्दा दादारीकंड से शुरू हो कर आज फिर से उसी मुहाने पर खड़ा है। यह मुद्दा दुबारा तब गरमाया जब फॉरेंसिक जांच की रिपोर्ट सामने आई।  वहीं स्वराज अभियान के संस्थापक सदस्य व सामाजिक कार्यकर्ता योगेंद्र यादव ने दावा किया है कि सूखा प्रभावित क्षेत्र में लगभग 3 लाख मवेशी अकेले मई महीने में मारे गए हैं, जिनमें से 10 हजार गाय हैं.

योगेंद्र यादव ने बीजेपी पर निशाना साधते हुए कहां कि जहां राष्ट्रीय पार्टी का राष्ट्रीय नेतृत्व गाय को राष्ट्रमाता बनाने और बीफ बिक्री को लेकर डिबेट में उलझा रहता है. वहीं भीषण सूखे से गुजर रहे बुंदेलखंड में कम से कम 3 लाख मवेशी मर चुके हैं.

उत्तर प्रदेश और मध्य प्रदेश के 13 जिले मवेशियों के शव से पटे पड़े हैं

योगेंद्र यादव ने बताया कि यूपी और मध्यप्रदेश के 13 जिलों में मवेशियों के शव पटे पड़े हैं. क्षेत्र में भयानक दुर्गंध फैली हुई है जो बड़े पैमाने पर बीमारी का कारण बन सकती है. वहीं भाजपा के यूपी प्रवक्ता चंद्र मोहन ने राज्य सरकार को इसके लिए दोषी ठहराया है, उनका कहना है कि बुंदेलखंद की बर्बादी के लिए राज्य की समाजवादी सरकार जिम्मेदार है.

वहीं हम केंद्रीय स्तर पर सभी बुंदेलखंड के सांसद इन सूखा प्रभावित इलाकों में जाकर लोगों की मदद कर रहे हैं। एनजीओ के अनुसार उत्तर प्रदेश और मध्यप्रदेश के बुंदेलखंड क्षेत्र में 11,065 गांव हैं, सभी गांवों में औसत 10 से 100 मवेशियों की मृत्यु मई में हुई है इस हिसाब से अकेले मई में पूरे क्षेत्र में कम से कम तीन लाख मवेशियों की मौत हुई है.

योगेन्द्र यादव ने सरकार के नियत और नीति पर प्रश्नचिन्ह उठाते हुए आरोप लगाया कि, सूखाग्रस्त क्षेत्रों में चारों की कमी हर तरफ है। चारा बैंक स्किम केवल पेपर पर है। लोगों को इस स्किम के बारे में पता भी नहीं है। इस योजना से केवल नेताओं और उनके रिश्तेदारों को लाभ मिल रहा है, जिनके पास मवेशी हैं भी नहीं। वो इन योजनाओं का लाभ उठा कर पैसों को हड़पते हैं।

अमेरिकी कांग्रेस में मोदी के भाषण का सच आया सामने, आप भी जाने सच

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अमेरिका में हुए मोदी दौरे का मुख्य आकर्षण केंद्र रहा अमेरिकी कांग्रेस में प्रधानमंत्री मोदी का अंग्रेजी में दिया हुआ भाषण। आम तौर पर हिंदी में बोलने वाले मोदी अपनी बातों से लोगों का दिल जीत लेते हैं। पर बिना देखे लगातार 40 मिनट तक अंग्रेजी में दिए अपने भाषण से उन्होंने दुनिया भर में वाहवाही लूटी है।
प्रधानमंत्री के भाषण के बाद एक फ़ोटो सोशल मीडिया पर बहुत तेज़ी से वायरल हुई है। इस फ़ोटो से यह समझ में आता है कि अपने भाषण के लिए उन्होंने टैलिप्राम्प्टर का सहारा लिया है। देश की मीडिया रिपोर्ट की माने तो यह खबर और तस्वीर सच्ची और सही है।

इस तकनीक से भाषण पढ़ने में माहिर हैं मोदी। आम तौर पर इस तकनीक से भाषण पढ़ना काफी मुश्किल होता है, क्योंकि टैलिप्राम्प्टर पर पढ़ना और उस बात को दर्शकों तक पहुँचना, दर्शकों को समझाना काफी मुश्किल होता है। टैलिप्राम्प्टर और दर्शकों दोनों में सामंजस्य बनाना सबसे बड़ी चुनौती होती है। इस तकनीक में मोदी को महारत हांसिल है। वह अपनी बात को प्रभावित ढंग से कहते हैं और दर्शकों तक उनकी बात भी पहुँचती है।

जानिए कैसे काम करता है टैलिप्राम्प्टर

दर्शकों को टैलिप्राम्प्टर नज़र नहीं आता है, क्योंकि एक तरफ से यह पारदर्शी होता है। वक्ता जैसे जैसे टैलिप्राम्प्टर पर लिखे वाक्यों को पढ़ता है, पढ़े हुए वाक्य नीचे स्क्रॉल होते जाते हैं। पारदर्शी स्क्रीन होने के कारण ऐसा लगता है जैसे वक्ता दर्शकों की ओर देख के बोल रहा है

जब मोदी भी खा गए धोखा

2015 में श्रीलंका दौरे पर श्रीलंकाई राष्ट्रपति मैत्रिपाल सिरिसेना के स्वागत भाषण में प्रधानमंत्री मोदी ने टैलिप्राम्प्टर का इस्तेमाल किया था। शब्द दर शब्द पढ़ने के चक्कर में प्रधानमंत्री ने आखिर वो गलती कर ही दी, जो अक्सर किसी टैलिप्राम्प्टर पढ़ने वाले से हो जाती है। उन्होंने मैत्रिपाला की पत्नी Mrs. Sirisena को एमआरएश सिरिसेना बोल दिया था।

प्रधानमंत्री मोदी की गुगली से बौखलाया हाफ़िज़ सईद, दिया ड्रोन उड़ाने की धमकी

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भारत-अमेरिका की बढ़ती नजदीकियों से अब आतंकवादियों की बौखलाहट बढ़ने लगी हैं। आतंकवादी संगठन जमात उद-दावा प्रमुख और 2008 के मुंबई हमलों के साजिशकर्ता हाफिज सईद का कहना है कि अगर पाकिस्तानी सरजमीं में अमेरिका का कोई भी ड्रोन दिखता है तो उसे तुरंत मार गिराया जाए क्योंकि अमेरिका और भारत दोनों ही पाकिस्‍तान के खिलाफ दुश्‍मनी का भाव रखते हैं। उसने कहा कि भारत को अमेरिका का समर्थन हासिल है इसलिए अमेरिकी ड्रोन को पाक में नहीं घुसने देना चाहिए।

शुक्रवार की नमाज के बाद हाफिज ने भीड़ से कहा कि हम आर्मी चीफ से आग्रह करते हैं और वायुसेना प्रमुख से कहते हैं कि यह उनकी ड्यूटी है कि अगर कोई भी ड्रोन पाकिस्‍तानी सीमा में आता है तो वे उसे मार गिराएं और उसका माकूल जवाब दें।

बता दें कि अफगान तालिबान चीफ मुल्‍ला मंसूर को मारने के लिए अमेरिका ने पाकिस्‍तान की सरजमीं पर 21 मई को जो ड्रोन हमला किया था, उसके खिलाफ हाफिज का संगठन जमात उद-दावा पाकिस्‍तान के प्रमुख शहरों में विरोध प्रदर्शन करने वाला है। इस दौरान वो  भाषण भी देगा।

तोगड़िया ने हिंदुओं की मर्दानगी को ललकारा, कहा ‘घर जा के अपनी मर्दानगी की पूजा करो।’ मर्दानगी बढ़ाने के लिए बताए नुस्ख़े

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विश्व हिंदू परिषद (VHP) के नेता प्रवीण तोगड़िया ने अपनी रैली में विवादित बयान दिया है। तोगड़िया ने हिंदुओं की लगातार कम हो रही जनसंख्या के लिए हिंदुओं में बढ़ती नामर्दी को वजह बताया है। उन्होंने अपनी बनाई दवाई दिखाते हुए कहा कि हिंदू मर्दों को घर जाकर अपनी मर्दानगी की पूजा करनी चाहिए। यह रैली गुजरात के बरुच जिले में हुई थी।
प्रवीण तोगड़िया ने मुसलमानों से मुकाबला करने के लिए जनसंख्या बढ़ाने पर जोर भी दिया। उन्होंने कहा, ‘अब हिंदू घटेगा नहीं, बढ़ेगा, धर्मांतरण को ना और घर वापसी हो हां, लव जिहाद को ना और यूनिफॉर्म सिविल कोड को हां, बांग्लादेशी मुस्लिम को ना और हिंदू घरों में बच्चे पैदा करो।’

इसके बाद प्रवीण ने युवाओं को तंबाकू से दूर रहने की सलाह देते हुए कहा कि यह नामर्दी का सबसे बड़ी वजह है। डॉक्टर की पढ़ाई कर चुके तोगड़िया ने अपनी दवाई दिखाते हुए आगे कहा, ‘यह मेरी बनाई चीज है। यह 600 रुपए में मिलती है पर मैं यहां 500 में दे दूंगा। इसे ले जाकर अपनी पत्नी को देना और कहना की इसको आपके खाने में मिलाकर दे। आप शक्तिशाली बने रहेंगे और बच्चे पैदा करते रहेंगे।’

बीजेपी पर शंकराचार्य का बड़ा हमला, कहा ‘सरकार का दलित प्रेम केवल दिखावा, कर रहे हैं राजनीति।’

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भाजपा अध्यक्ष अमित शाह पर निशाना साधते हुए शंकराचार्य स्वरूपानंद सरस्वती ने गुरुवार (8 जून) को दलितों के प्रति भाजपा के प्रेम को झूठा करार दिया और कहा कि दलित परिवारों के साथ नेताओं का भोजन करना विशुद्ध रूप से राजनैतिक कृत्य है। द्वारकापीठ और शारदापीठ के शंकराचार्य ने कहा, ‘बिना पूर्व सूचना के वो क्यों नहीं उनके साथ भोजन करते हैं।’
उन्होंने कहा, ‘राजनैतिक फायदे के लिए दलितों के साथ उज्जैन में क्षिप्रा नदी में स्नान करने की एक नयी परंपरा स्थापित की गई। नदियों, मंदिरों और धार्मिक स्थलों पर जाति, धर्म या वर्ण के आधार पर कोई भेदभाव नहीं है।’ दलितों के प्रति भाजपा के प्रेम को झूठा करार देते हुए उन्होंने कहा कि दलित परिवारों के साथ भोजन करना विशुद्ध रूप से राजनैतिक कृत्य है।
वहीं, बिसहड़ा मामले में रिपोर्ट सामने आने के बाद की स्थिति पर स्वरूपानंद ने कहा कि बेशक, जिन लोगों ने कानून हाथ में लिया, उन्हें ऐसा नहीं करना चाहिए था। उन्होंने बेहद तीखे शब्दों में कहा, ‘जब कोई ब्राह्मण मरता है, तो सरकार को सहिष्णुता नहीं दिखाती। लेकिन जब कोई अल्पसंख्यक मरता है तो चिल्लाने लगते हैं।’  उन्होंने कहा कि सवाल यह है कि सरकार अपनी जिम्मेदारी क्यों नहीं पूरी करती। जब गौहत्या पर प्रतिबंध है, तो फिर कोई ऐसा क्यों करता है।
उन्होंने आरोप लगाया, ‘अभी भी आए दिन उत्तर प्रदेश व हरियाणा के एक बड़े हिस्से से असम व पश्चिम बंगाल को निरंतर गायों की तस्करी की जा रही है। उनका खुलेआम वध किया जा रहा है। गौहत्या बंद होने के बावजूद अगर सरकार रोकथाम नहीं कर पाती तो निश्चित ही यह उसकी विफलता का सूचक है।’

बिहार: जानिए बिहार में कैसे बने फ़र्ज़ी टॉपर

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बिहार के इंटरमीडिएट एग्जाम के रिजल्ट के बाद एक टीवी इंटरव्यू में आर्ट्स और विज्ञान विषय के टॉपरों का का पर्दाफाश हुआ है, इस मामले में हो रहे रोज़ नए खुलासों से बिहार शिक्षा बोर्ड की नींद हराम हो गई है। इस काण्ड में अभी तक पांच छात्रों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई है।  वही बिहार बोर्ड के अध्यक्ष लालकेश्वर सिंह और बिशुन राय कॉलेज के संचालक बच्चा राय अभी तक फरार हैं।

पुलिस लगातार अपने तफ़तीस में लगी हुई है। घोटाले और गिरफ्तारियों की कड़ियों को जोड़ कर मामले की तह तक पहुँचने की कोशिश की जा रही है। इस पुरे घटना की छानबीन करने के लिए एसआईटी का गठन किया गया है, जिसने हाजीपुर स्थित बिसुन राय कॉलेज में गुरुवार शाम छापामारी भी की।

वहीं टॉपरों को लेकर देश में अपनी तरह के इस पहले घोटाले के बीच बड़ा सवाल ये है कि आखिर इन छात्रों ने टॉप किया कैसे? क्या इसके लिए कुछ छात्रों को विशेष तौर पर नकल करवाई गई या फिर बोर्ड के सेंटर लगवाने में हेराफेरी की गई या इन सबसे इतर कोई अन्य तरीका अपनाया गया।

अभी तक की जांच में टॉप करवाने का जो सच सामने आया है वो थोड़ा चौंकाने वाला है। तो चलिए आपको तफशील से बताते हैं वो सच जिससे जुड़ा है टॉपर बनाने का वो खेल जिसने बिहार की पूरी माध्यमिक शिक्षा व्यवस्‍था पर कालिख पोत दी है।

आइए जाने कैसे होती थी कॉपियों की हेरा फेरी

परीक्षाओं में पास कराने या टॉप करने की हेराफेरी के जितने भी मामले सामने आते हैं उनमें ज्यादातर मामले नकल या सामूहिक नकल कराने के ही होते हैं। लेकिन बिहार में टॉप कराने के मामले में बिल्कुल अलग तरीका अपनाया गया जिससे कहीं पर भी शक की गुंजाइश न रहे और न ही चोरी पकड़ में आ सके।

असल में फर्जीवाड़े का यह सारा खेल बच्चा राय और बोर्ड अधिकारियों की शह पर खेला जाता था। बच्चा राय अपने कालेज विशुन राय कालेज का सेंटर अपनी मर्जी से लगवाता था। इसके बाद कॉपियां कहां चेक होनी हैं ये भी वह खुद ही तय करता था। परीक्षा होने के बाद जब सारी कॉपियां जांच होने के लिए केंद्र पर पहुंच जाती थी तब ये सारा खेल शुरू होता था।

सूत्रों के अनुसार जिन छात्रों को टॉप करवाना या नंबर अच्छे रखवाने होते थे उनकी कॉपियां बंडल में से ढूंढकर निकाल ली जाती ‌थी। फिर उन कॉपियों के ऊपर के पिन खोलकर अंदर के पेज निकाल लिए जाते थे, फ्रंट पेज पहले वाला ही रखा जाता था।

इसी बीच एक व्यक्ति या छात्र इत्‍मीनान से सही सवालों के जवाब खाली उत्तर पुस्तिका में लिखते थे जिसके ऊपर का पेज उतारकर वापस पुरानी वाली कॉपी के फ्रंट पेज के अंदर डाल दिया जाता था। यह सारा काम इतने शातिर तरीके से किया जाता था कि कॉपी से छेड़छाड़ का अंदाजा लगाना मुश्किल होता था।

बिहार: सरकार के आदेश पर मारे गए 250 नीलगाय, केंद्र के दो मंत्री आए आमने सामने

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बिहार के मोकामा में हुए 250 से ज्यादा नीलगायों की हत्या ने एक अलग सियासी बवंडर उठा दिया है। केंद्र ने बिहार सरकार के आग्रह पर हैदराबाद से दो शार्प शूटरों को बिहार में भेजा है।

बिहार के मोकामा में करीब 250 नीलगायों की गोली मारकर हत्या के मामले में केंद्र के दो मंत्री आमने-सामने आ गए हैं। केंद्रीय महिला और बाल विकास मंत्री मेनका गांधी ने इसके लिए पर्यावरण मंत्री प्रकाश जावड़ेकर को जिम्मेदार ठहराया है। वहीं जावड़ेकर का कहना है कि राज्यों के आग्रह के बाद ही जानवरों को मारने का आदेश दिया गया है।

मेनका गांधी ने तल्ख लहजे में कहा कि बिहार में पहली बार इतना बड़ा नरसंहार (नीलगायों का) हुआ है। यहां कोई इस काम के लिए तैयार नहीं हुआ तो बाहर से लोगों को बुलाया गया। इन्हें मारने की जरूरत क्यों है। जंगली जानवरों को मारना शर्म की बात है। इस घिनौने काम के लिए क्यों इजाजत दी गई है।

प्रकाश जावड़ेकर ने मेनका के बयान पर कहा, ‘किसने क्या कहा उस पर मैं प्रतिक्रया नहीं देता। जब किसानों को नुकसान होता है. ..बहुत तकलीफ होती है। अगर राज्य सरकार प्रस्ताव भेजती है तो ही हम किसी विशेष कार्य के लिए साइंटिफिक मैनेजमेंट के लिए राज्य सरकार के प्रस्ताव को मंजूरी दी जाती है। ये केंद्र का कार्यक्रम नहीं है। यह पहले से बने कानून के हिसाब से हो रहा है।

मेनका ने कहा कि पर्यावरण मंत्रालय हर राज्य को लिख रहा है कि आप बताओ किसको मारना है। हम इजाजत दे देंगे। बंगाल में उन्होंने कह दिया कि हाथी को मारें। हिमाचल को कहा कि हाथी को मारें। गोवा में कह दिया कि मोर को। अब कोई जानवर नहीं छूटा। चांदपुर में इतना अनर्थ हो रहा है कि उन्होंने 53 जंगली सुअर मारे हैं। अभी और 50 की इजाजत दी है। इस घटना के लिए पर्यावरण मंत्रालय जिम्मेदार है।

पर्यावरण मंत्री प्रकाश जावड़ेकर ने कहा कि राज्य सरकार प्रस्ताव देती है तो हम राज्य सरकार को मंजूरी देते हैं। ये केंद्र सरकार का नहीं राज्य सरकार का काम है। इसके लिए पहले से ही कानून बना हुआ है।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सैलरी जान कर हैरान रह जाएंगे आप!!

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हर वो इंसान जो सरकारी काम में कार्यरत है, जो जनता की सेवा करता है, उसे देश के नागरिकों के टैक्स, रेवेन्यु और भी तरह तरह के सरकारी वसूली के तहत इक्कठा किए गए पैसों से सैलरी मिलती है। इसी कड़ी में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी जनता के सेवक हैं, जिनका काम जनता की सेवा करना है।
आप लोगों को हैरानी होगी यह जान कर कि हमारे प्रधानमंत्री की सैलरी कितनी है।

सैलरी के मामले में हमारे प्रधानमंत्री विश्व में 11वें स्थान पर हैं। प्रधानमंत्री मोदी की सलाना सैलरी है 19 लाख रुपये।

आइए हम बताते हैं दुनिया के और राष्ट्राध्यक्षों की सैलरी के बारे में।
1. सबसे ज्यादा सैलरी है अमेरिका के राष्ट्रपति की। राष्ट्रपति ओबामा की सैलरी करीब ढाई करोड़ रूपये।

2. दूसरे स्थान पर कनाडा के प्रधानमंत्री स्टीफन हार्पर, इनकी सैलरी 1.62 करोड़ रूपये।

3. 1.46 करोड़ की सैलरी के साथ, जर्मनी की चांसलर मोर्केल आती हैं तीसरे स्थान पर।

4. दक्षिण अफ्रीका के राष्ट्रपति 1.39 करोड़ की सैलरी के साथ चौथे स्थान पर हैं।

5. ब्रिटिश प्रधानमंत्री डेविड कैमरून 1.34 करोड़ के साथ पांचवे स्थान पर हैं।

6. जापान के प्रधानमंत्री शिंजो आबे छठे स्थान पर करीब 1.28 करोड़ रुपयों के साथ।

7. सातवें स्थान पर फ्रांस के राष्ट्रपति फ्रांसोआ ओलांद हैं। इनकी सैलरी 1.21 करोड़ है।

8. रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन 85 लाख रुपयों की सैलरी के साथ आठवें स्थान पर हैं।

9. इटली के प्रधानमंत्री मेतिओ रेंजी 77 लाख रुपयों के साथ नौवें स्थान पर हैं।

10. 74 लाख रुपयों की सैलरी के साथ ब्राज़ील की राष्ट्रपति डीलेमा रुसेफ दसवें स्थान पर हैं।

11. भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 19 लाख रुपयों की सैलरी के साथ ग्यारहवें स्थान पर हैं।

12. चीन के राष्ट्रपति सी जिनपिंग 13 लाख रुपयों की सैलरी के साथ बारहवें स्थान पर हैं।