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अस्पताल प्रबंधन ने सबूत मिटाने के लिए ले ली 5 मरीजो की जान

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सिटी अस्पताल के संचालक सरबजीत सिंह मोखा के मामले में एक महिला ने गम्भीर आरोप लगाते हुए एसपी ऑफिस में शिकायत की है। आरोप है कि पुलिस रेड से पहले सिटी हॉस्पिटल के आईसीयू में भर्ती 5 मरीज जिन्हें रेमडेसिविर लगे थे उनकी हत्या कर दी गई ताकि वे पुलिस के सामने बयान न दे सकें।महिला ने आरोप लगाया है कि उसके पति का इलाज सिटी हॉस्पिटल में चल रहा था। उसके पति को भी नकली रेमडीसीवीर इंजेक्शन लगाए गए जिससे उसकी मौत हो गई। और उस दिन पुलिस के आने की कुछ घंटे पहले ही आईसीयू में भर्ती कम से कम पांच मरीजों की अचानक एक साथ बेहद संदिग्ध तरीके से मौत हो गई थी।

पीड़ित महिला ने आरोप लगाया है कि उसके पति का इलाज सिटी हॉस्पिटल में चल रहा था। उसके पति को भी नकली रेमडीसीवीर इंजेक्शन लगाए गए जिससे उसकी मौत हो गई। और उस दिन पुलिस के आने की कुछ घंटे पहले ही आईसीयू में भर्ती कम से कम पांच मरीजों की अचानक एक साथ बेहद संदिग्ध तरीके से मौत हो गई थी।

पीड़ित महिला ने जानकरी देते हुए कहा कि उसके पति को 1 मई को कोरोना के इलाज के लिए भर्ती कराया गया था और 7 मई तक उसकी वीडियो काल के माध्यम से लगातार बात हो रही थी। फिर 9 मई को अस्पताल प्रबंधन ने बताया उसके पति की मौत हो गई है। इसके बाद अस्पताल प्रबंधन ने इस संबंध में उसे कोई जानकारी नहीं दी बल्कि इलाज के नाम पर साढे तीन लाख रुपए भी ले लिए।

दरअसल पीड़ित महिला ने सरबजीत सिंह मोखा के खिलाफ हत्या के तहत मामला दर्ज करने की मांग की है। इस मामले को देख रहे एडिशनल एसपी रोहित काशवानी ने पीड़ित महिला को उचित जांच का आश्वासन दिया है।

मध्यप्रदेश के इस अस्पताल को इम्पैनल्ड अस्पतालों की सूची से हटाया

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मध्य प्रदेश में नकली रेमडेसिविर इंजेक्शन मामले में गिरफ्तार जबलपुर के सिटी हॉस्पिटल संचालक सरबजीत सिंह मोखा पर प्रशासन का शिकंजा कसता ही जा रहा है। और ऐसे में केंद्र सरकार ने भी सिटी अस्पताल पर कड़ी कार्रवाई करते हुए इम्पैनल्ड अस्पतालों की सूची से हटा दिया है।

दरअसल मंगलवार को नकली इंजेक्शन मामले में सरबजीत को जबलपुर पुलिस ने गिरफ्तार किया था। इस दौरान केंद्र सरकार के सीजीएचएस के अपर निदेशक ने सिटी अस्पताल पर कार्रवाई करते हुए इम्पैनल्ड हॉस्पिटल की सूची से हटा दिया है।

बता दे कि सिटी हॉस्पिटल में सीजीएचएस योजना के तहत लगभग 170 कोरोना संक्रमित मरीजों का इलाज हुआ है। ऐसे में इस योजना के तहत जिन मरीजों को भर्ती किया गया है उन सबका इलाज होगा। लेकिन अब इस योजना से जुड़े मरीजों की भर्ती पर रोक लगा दी गई है।

मध्यप्रदेश की जबलपुर पुलिस ने किया सरबजीत सिंह मोखा को गिरफ्तार

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मध्य प्रदेश के जबलपुर में नकली रेमडेसिविर इंजेक्शन मामले में पुलिस ने सिटी अस्पताल संचालक एवं मुख्य आरोपी सरबजीत सिंह को गिरफ्तार कर लिया है। इस मामले में मुख्य आरोपी सरबजीत सिंह के साथ पुलिस एनएसए (NSA) के तहत कार्रवाई करेगी।

दरअसल पुलिस की दी गई जानकारी के हिसाब से सरबजीत सिंह मोखा की गिरफ्तार के बाद कई आरोपी इस मामले में सामने आ सकते है। वहीं पुलिस अब मुख्य आरोपी को जांच के लिए कई ठिकानों पर ले जाएगी। साथ ही कोर्ट में भी पुलिस आरोपी के रिमांड करने की बात कर रही है।

बता दे कि नकली रेमडेसिविर इंजेक्शन मामले में आरोपी बनाए जाने के बाद विश्व हिंदू परिषद(VHP) ने सरबजीत सिंह मोखा को जिला अध्यक्ष पद से हटा दिया गया है। इसका निर्णय विहिप की उच्च स्तरीय बैठक में लिया गया है।

विश्व हिन्दू परिषद अध्यक्ष और सिटी अस्पताल का मालिक ही निकला नकली रेमडेसिविर इंजेक्शन का सरगना

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मध्य प्रदेश के जबलपुर में नकली रेमडेसिविर इंजेक्शन मामले में पुलिस ने मुख्य आरोपी सरबजीत सिंह मोखा की पुलिस ने तलाश खत्म कर उसे गिरफ्तार कर लिया है। पुलिस को फरार आरोपी अपने ही सिटी अस्पताल में छिपा बैठा मिला।

दरअसल पुलिस को आरोपी के सिटी अस्पताल के कोविड वार्ड में छिपे होने की जानकारी मिली थी। वह खुद को कोरोना संक्रमित बता रहा था। हालांकि पुलिस अपने स्तर पर मंगलवार को सरबजीत सिंह की कोविड जांच कराएगी।

बीते दिनों इस मामले में अन्य आरोपियों के गिरफ्तारी के बाद पुलिस को मोखा की तलाश थी, लेकिन वह फरार चल रहा था। इस दौरान सोमवार को मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान की फटकार के बाद कुछ घंटों ही आरोपी को पुलिस ने गिरफ्त कर लिया।

बता दें कि आरोपी सरबजीत सिंह मोखा शहर वीएचपी अध्यक्ष होने के अलावा जबलपुर में सिटी अस्पताल का मालिक भी है। नकली रेमडेसिविर इंजेक्शन मामले में जबलपुर पुलिस ने सिटी हॉस्पिटल के संचालक सरबजीत सिंह मोखा समेत अस्पताल के देवेश चौरसिया और भगवती फार्मा के संचालक सपन जैन पर मामला दर्ज किया गया है। दरअसल मोखा पर 500 नकली इंजेक्शन मरीजों को लगाने का आरोप है।

मध्यप्रदेश में नहीं रुक रही रेमडिसीवीर इंजेक्शन की कालाबाजारी

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मध्य प्रदेश में रेमडेसिविर के कालाबाजारी का फिर एक मामला सामने आया है। मध्य प्रदेश पुलिस के विशेष कार्य बलने कोरोना वायरस से संक्रमित मरीजों के लिए कारगर रेमडिसीवीर इंजेक्शन की कालाबाजारी के आरोप में निजी अस्पताल के दो चिकित्सकों सहित पांच लोगों को गिरफ्तार किया।

एसटीएफ (जबलपुर) के पुलिस अधीक्षक नीरज सोनी ने बताया कि इंजेक्शन की कालाबाजारी करते हुए दो चिकित्सकों और तीन अन्य लोगों को गिरफ्तार किया गया है। उन्होंने कहा कि गिरफ्तार किये गये आरोपियों में डॉ. जीतेन्द्र सिंह ठाकुर , डॉ. नीरज साहू , सुधीर सोनी , राहुल विश्वकर्मा और राकेश मालवीय शामिल हैं।

नीरज सोनी ने कहा कि डॉ. जीतेन्द्र ‘लाइफ मेडिसिटी हॉस्पिटल’ में है जबकि डॉ. नीरज आशीष अस्पताल में काम करते है। बाकी तीनों शंकरधानी अस्पताल में काम करते है। उन्होंने ये भी कहा कि आरोपियों के पास से चार रेमडिसीवीर इंजेक्शन, छह मोबाइल फोन, एक चार पहिया वाहन एवं 10,400 रूपये नगद बरामद किए गए हैं।

जबलपुर में जीआरपी पुलिस की देखी गई लापरवाही

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मध्य प्रदेश में कोरोना का कहर बढ़ता ही जा रहा है। हालांकि, एक ऐसा मामला सामने आया है जिससे साफ है कि राज्य में कोरोना नियमों की किस तरह धज्जियां उड़ाई जा रही हैं। ऐसे में देखा गया कि जबलपुर में जीआरपी पुलिस एक कोरोना पॉजिटिव आरोपी को दूसरे नेगेटिव आरोपी के साथ सड़क पर पैदल चलवाकर जेल तक ले जा रही है।

बताया गया है कि इन दोनों पर चोरी का आरोप था।जीआरपी के एक अधिकारी ने इस मामले को लेकर बताया कि , ‘कोर्ट में पेशी के बाद दोनों का कोरोना टेस्ट करवाया गया था। इनमें से एक की रिपोर्ट पॉजिटिव आई। हमारी गाड़ी रास्ते में ही खराब हो गई थी इसलिए हम उन्हें पैदल जेल तक ले गए।’

मध्य प्रदेश में 13 अप्रैल को 8,998 लोगो की संक्रमण की पुष्टि हुई। वहीं 40 लोगों ने कोरोना से लड़ते हुए दम तोड़ दिया। प्रदेश में सबसे ज्यादा इंदौर में 1552, भोपाल में 1456, ग्वालियर में 576 और जबलपुर में 552 कोरोना पॉजिटिव मरीज मिले।