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कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष कमलनाथ ने वचन पत्र में भी अपने मित्र संजय गांधी को याद रखा है

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mp congress released manifesto for mp legislative election

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी द्वारा सरदार वल्लभ भाई पटेल की उपेक्षा को लेकर लगातार कांग्रेस पर किए जा रहे हमलों के बाद कांग्रेस अभी पूरी तरह से गांधी-नेहरू से बाहर तो नहीं निकल पाई है लेकिन, उसने पटेल के अलावा देवी अहिल्या बाई, स्वामी विवेकानंद, और टंटया भील जैसे नामों को भी अपनाना शुरू कर दिया है। मध्यप्रदेश कांग्रेस कमेटी द्वारा विधानसभा चुनाव के लिए जारी किए गए घोषणा पत्र में किसानों की कर्ज माफी, बेरोजगारी भत्ता पर खास तौर पर जोर दिया गया है।


कांग्रेस  ने अपने चुनावी घोषणा पत्र को वचन पत्र का नाम दिया है। इस वचन पत्र में प्रदेश कांगे्रस अध्यक्ष कमलनाथ ने अपने मित्र संजय गांधी को भी जगह दी है। संजय गांधी की विधवा मेनका गांधी के सास इंदिरा गांधी का घर छोड़ दिए जाने के बाद कांगे्रस ने भी संजय गांधी का नाम लेना बंद कर दिया था। वचन पत्र में विधानसभा की कार्यवाही को हंगामे से बचाने के लिए कार्यबाधित होने पर सदस्यों को उस दिन का भत्ता न देने प्रावधान लागू करने की घोषणा की गई है। जनता भी विधानसभा में मंत्रियों से सीधे सवाल पूछ सके,इसके लिए जनता प्रहर शुरू करने का एलान किया गया है।

किसानों के सिर्फ दो लाख रूपए तक के कर्ज ही माफ होंगे

मध्यप्रदेश कांग्रेस कमेटी के शिवाजी नगर स्थित कार्यालय में चुनाव का वचन पत्र जारी करने के लिए प्रदेश कांग्रेस के सभी दिग्गज नेता मौजूद थे। चुनाव प्रचार समिति के अध्यक्ष एवं सांसद ज्योतिरादित्य सिंधिया ने इस वचन पत्र पर कहा कि इसमें दर्ज एक-एक अक्षर घोषणा नहीं है, कांग्रेस का वचन है। हर वचन को सरकार बनने के बाद समय-सीमा में पूरा किया जाएगा। वचन पत्र में कांग्रेस ने किसानों के सिर्फ दो लाख रूपए तक के कर्ज माफ करने का वादा किया है। यहां उल्लेखनीय है कि कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी देश भर में घूम-घूमकर अपनी सभाओं में किसानों का पूरा कर्जा दस दिन में माफ करने की बात कह रहे हैं। राहुल गांधी की इस मंशा के अनुरूप ही छत्तीसगढ़ राज्य ने अपने चुनावी घोषणा पत्र में किसानों के कर्ज माफी की कोई सीमा निर्धारित नहीं की है। दस दिन का वादा भी किया है। मध्यप्रदेश कांग्रेस कमेटी के वचन पत्र में दस दिन की समय-सीमा का उल्लेख भी नहीं किया गया है। यद्यपि उस कर्ज को भी माफ करने का वचन कांग्रेस ने दिया है, जो कालातीत हो चुका है। किसानों का बिजली का बिल आधा किए जाने के लिए दस हॉर्सपावर की सीमा निर्धारित की गई है। लगभग डेढ़ दर्जन फसलों के अलावा दूध पर भी पांच रूपए प्रति लीटर का बोनस दिए जाने का वचन दिया गया है। किसानों को फसल बीमा का लाभ ग्रामसभा की अनुशंसा पर दिलाए जाने का वचन भी दिया गया है। राज्य कृषि विकास आयोग का गठन किए जाने का उल्लेख भी किया गया है। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष कमलनाथ ने कहा कि किसानोंे को उनकी उपज को मंडियों में समर्थन मूल्य से नीचे नहीं बिकने दिया जाएगा।

सरकारी नौकरयों में नहीं घुस सकेंगे दूसरे राज्यों के बेरोजगार

कांग्रेस ने अपने वचन पत्र में युवाओं को नौकरी न दिला पाने की स्थिति में बेरोजगारी भत्ता देने का कोई सीधा वादा नहीं किया है। युवाओं को उद्योगों में रोजगार मिल सके इसके लिए उद्योगपतियों को वेतन अनुदान दिए जाने की योजना का एलान किया गया है। इस योजना का लाभ उन उद्योगपतियों को दिया जाएगा, जो पचास करोड़ के निवेश से नया उद्योग लगाएगें अथवा उद्योग का विस्तार कर प्रदेश के युवाओं को रोजगार देंगे। सरकार रोजगार के एवज में वेतन का पच्चीस प्रतिशत अथवा दस हजार रूपए प्रतिमाह, जो भी कम उद्योगपति को देगी। सरकारी नौकरियों में राज्य के बाहर के उम्मीदवारों का चयन रोकने के लिए कांग्रेस ने अपने वचन पत्र में कहा है कि वे ही लोग शासकीय अथवा सार्वजनिक उपक्रमों में नौकरी के लिए पात्र होंगे, जिन्होंने दसवीं अथवा बारहवीं की बोर्ड परीक्षा मध्यप्रदेश से उत्तीण की हो। कांग्रेस ने व्यापमं को बंद कर इसके स्थान पर राज्य कर्मचारी चयन आयोग के गठन का एलान किया है। परिवार की छह लाख से कम बार्षिक आय होने पर चयन परीक्षा शुल्क से छूट देने का वादा किया गया है। अधिकतम आयु सीमा में दो साल की वृद्धि देने का भी उल्लेख वचन पत्र में है। अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर प्रतिभागी रहे खिलाड़ियों को सरकारी नौकरी न दे पाने की स्थिति में हर माह पंद्रह हजार रूपए सम्मान निधि देने का उल्लेख भी वचन पत्र में है।

लड़कियों की पीएचड़ी तक की शिक्षा मुफ्त

मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान की सरकार द्वारा शिक्षा के क्षेत्र में लड़कियों के लिए चलाई जा रहीं विभिन्न योजनाओं के जवाब में कांग्रेस ने अपने वचन पत्र में एक लाइन में लिखा है कि कन्याओं को स्कूल से पीएचड़ी तक नि:शुल्क शिक्षा दी जाएगी। कॉलेज जाने वाली छात्राओं को दो पहिया वाहन के लिए रियायती ब्याज दर पर ऋण दिलाए जाने का भी वचन दिया गया है। महिला अपराधों को रोकने के लिए सिर्फ ठोस कानून बनाने की बात कही गई है। ज्ञातव्य है कि महिला अपराधों के मामले में देश में मध्यप्रदेश का पहला नंबर होने पर कांग्रेस लगातार शिवराज सिंह चौहान पर हमले कर रही है। महिला अपराधों को कांग्रेस ने चुनाव का मुद्दा भी बनाया है। कांग्रेस का वचन पत्र 75 महत्वपूर्ण बिंदुओं पर आधारित है। इसमें रामपथ गमन का निर्माण और पंचायत स्तर पर गौशालाएं खोलना भी शामिल है। सपाक्स की चुनौती से निपटने के लिए कांग्रेस ने सरकार में आने पर सामान्य वर्ग आयोग के गठन का भी एलान किया है। राज्य के असंतुष्ट कांग्रेस ी नेताओं को साधने के लिए कांग्रेस ने एक बार फिर विधान परिषद के गठन का कार्ड खेला है। डीजल, पेट्रोल एवं रसोई गैस सस्ता करने का वचन भी दिया गया है।

वचन पत्र में नेहरू नहीं संजय गांधी का उल्लेख है

कमलनाथ के प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष बनने के बाद कांग्रेस भवन में टंगी तस्वीरों में भी बदलाव देखा गया था। इंदिरा-राजीव के साथ-साथ कमलनाथ ने संजय गांधी की तस्वीर को भी कांग्रेस के दफ्तर में जगह दी है। कांग्रेस के वचन पत्र में पंडित जवाहर लाल नेहरू के उल्लेख कहीं नहीं है। लेकिन, इंदिरा-राजीव के साथ संजय गांधी का उल्लेख किया गया है। संजय गांधी के नाम पर पर्यावरण मिशन शुरू करने की बात वचन पत्र में कही गई है। समग्र सामाजिक सुरक्षा परिवार कार्यक्रम को वैधानिक मान्यता हेतु राजीव गांधी स्व निराकरण सेवा नाम से अधिनियम बनाया जाएगा। राजीव गांधी स्मार्टकार्ड देने की योजना भी प्रस्तावित है। इंदिरा गृह ज्योति योजना के तहत सौ यूनिट तक बिजली सौ रूपए प्रतिमाह की दर पर दिए जाने की घोषणा की गई है। वर्तमान में शिवराज सिंह चौहान की सरकार दो सौ रूपए प्रतिमाह की निश्चित दर पर एक हजार वॉट पर बिजली दे रही है। घोषणा पत्र में सरदार वल्लभ भाई पटेल के नाम पर किसान पुत्र स्वावलंबन योजना की घोषणा की गई है। विवेकानंद के नाम पर युवा शक्ति निर्माण मिशन शुरू करने की घोषणा है। देवी अहिल्या बाई होल्कर के नाम पर लड़कियों की नि:शुल्क शिक्षा योजना शुरू की जाएगी। रानी दुर्गावती के नाम से महिला पुलिस बटालियन बनाने की घोषणा की गई है।

विधायकों ने रोकी सदन की कार्यवाही तो नहीं मिलेगा भत्ता

मध्यप्रदेश कांग्रेस ने अपने वचन पत्र में सबसे महत्वपूर्ण पहल सदन को जवाबदेह बनाने की दिशा में की है। सदन की कार्यवाही बिना बाधा के चले इसके लिए कांग्रेस ने अपने वचन पत्र में स्पष्ट तौर पर कहा है कि विधायकों द्वारा सदन की कार्यवाही बाधित किए जाने की स्थिति में उस दिन का भत्ता सदस्यों को नहीं दिया जाएगा। देश में कहीं भी अब तक इस तरह की व्यवस्था लागू नहीं है। राज्यसभा और लोकसभा में भी कार्यवाही बाधित होने पर भी भत्ता नहीं रोका जाता। विधायकों एवं मंत्रियों को प्रतिवर्ष अपनी चल-अचल संपत्ति का विवरण पटल पर रखना होगा। विधानसभा में जनता सीधे मंत्रियों से सवाल पूछ सके इसके लिए जनता पहर की व्यवस्था शुरू करने की घोषणा की गई है। इस तरह की व्यवस्था भी देश में कहीं भी प्रचलन में नहीं है।

MP Congress Manifesto: मध्यप्रदेश कांग्रेस का घोषणा पत्र

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कृषि एवं किसान सशक्तिकरण

भारतीय जनता पार्टी की सरकार में किसानों की आर्थिक स्थिति कमजोर हुई है, डीजल, खाद, बीज के भाव बढ़ने से लागत बढ़ी है, उस अनुपात में उपज के दाम नहीं मिले हैं। कर्ज बढ़ा है, इन तनावों के चलते आत्‍महत्‍याएं बढ़ी हैं, भाजपा सरकार का किसानों की आय कोदो गुना करने का सपना खोखला साबित हुआ है। म.प्र. में कांग्रेस सरकार बनने पर कांग्रेस पार्टी वचन देती है कि-

1.1 सभी किसानों का 2.00 लाख तक कर्जमाफ करेंगे। जिसमें सहकारी बैंक एवं राष्‍ट्रीकृत बैंकों का चालू एवं कालातीत कर्ज शामिल रहेगा।

1.2 किसानों को शून्‍य ब्‍याज योजना का वास्‍तविक लाभ देने के लिए भुगतान की नई तिथि रबी फसल हेतु 31 मई तक और खरीफ फसल हेतु 31 दिसम्‍बर रखेंगे।

1.3 स्‍वामीनाथन आयोग की स्‍थापना यूपीए सरकार के समय हुई थी उनकी सिफारिशें किसानोंके हित में थीं, लेकिन भाजपा सरकार ने नहीं माना है। हमारी कांग्रेस सरकार बनने पर किसानोंको उनकी उपज का उचित मूल्‍य दिलायेंगे। मंडियों में समर्थन मूल्‍य से नीचे फसल नहीं बिकनेदेंगे , कांग्रेस सरकार किसानों को – गेहूँ, धान, ज्‍वार, बाजरा, मक्‍का, सोयाबीन, सरसों,कपास, अरहर, मूंग, चना मसूर, उड़द, लहसुन, प्‍याज, टमाटर तथा गन्‍ने पर बोनसदेगी।

1.4 ‘’इन्दिरा किसान ज्‍योति योजना’’ इस नई योजना के अंतर्गत 10 हॉर्सपावर तक के कृषिप्रयोजन के लिए आधी दर पर विद्युत प्रदाय करेंगे। अंत्‍योदय परिवार को पूर्वकी भांति पूरीछू ट रहेगी।

  • 10 हॉर्सपावर तक के अस्‍थायी विद्युत कनेक्‍शन में 50 प्रतिशत की छू ट दी जायेगी तथा कृषक इसे फसल की थ्रेशिग हेतु इस्‍तेमाल कर सकेगा।
  • किसानों को 3 फ़े स की बिजली प्रतिदिन 12 घंटे देना सुनिश्चित करेंगे, जिसमें कम से कम 8 घण्‍टे दिन का समय रहेगा। 1.5 नवीन फसल बीमा योजन कांग्रेस सरकार नवीन फसल बीमा योजना लायेगी, फसल बीमा की इकाई खेत रहेगा, जो किसान स्‍वेच्‍छा से इससे पृथक रहना चाहते हैं, उन्‍हे अनुमति रहेगी। बीमा कम्‍पनियों द्वाराकिसानों को बीमा पॉलिसी एवं प्रीमियम राशि की रसीद देना सुनिश्चित किया जायेगा।
  • नई फसल आने के पूर्व फसल क्‍लेम का वितरण करायेंगे।
  • ग्रामसभा की अनुशंसा पर फसल बीमा का लाभ किसान को देंगे ।
  • फसल बीमा से वंचित किसानों की फसल नुकसानी पर मुआवजा हेतु भू-राजस्‍व परिपत्र 6-4 में संशोधन करेंगे।
  • बिना कर्ज लिये खेती करने वाले कृषक को भी फसल बीमा से जोड़ेंगे।

1.6 कृषकों का जीवन एवं स्‍वास्‍थ्‍य बीमा किया जायेगा ।

1.7 किसानों को क्रेडिट कार्ड देंगे एवं क्रेडिट कार्डकी लिमिट बढ़ाने के लिए केन्‍द्र को लिखेंगे।

1.8 भूमि अधिग्रहण एक्‍ट 2014 (UPA सरकार के समय का मूल एक्ट) को अक्षरश: लागू किया जायेगा।

1.9 किसान आंदोलन के समय किसानों पर दर्ज आपराधिक व राजनैतिक आंदोलनों में दर्ज सभी प्रकरण वापिस लिये जायेंगे।

1.10 मंदसौर गोलीकांड लाठीचार्जकांड की पुन: न्‍यायायिक जांच माननीय उच्‍च न्‍यायालय के न्‍यायाधीश से कराने के लिए माननीय मुख्‍य न्‍यायाधीश से अनुरोध करेंगे।

1.11 किसान को उपज का भुगतान तीन दिन के भीतर जिस तरह किसान चाहेगा उस तरह करेंगे। आयकर विभाग द्वारा नगद भुगतान की निर्धारित सीमा को इस प्रयोजन हेतु बढ़ाने के लिए प्रयास करेंगे।

1.12 मंडियों में इलेक्‍ट्रॉनिक धर्मकांटा लगवायेंगे।

1.13 मंडी कमेटियों का पुनर्गठन करेंगे, मंडी अधिनियम में संशोधन करेंगे तथा प्रदेश एवं देश की अन्‍य मंडियों से जोड़ेंगे ।

1.14 मण्‍डी शुल्‍कों का युक्तियुक्‍तकरण करेंगे ।

1.15 मंडियों में ग्रेडिग प्‍लांट के लिए किसानों के स्‍वसहायता समूह/ समितियों को रिक्‍त भूमि आवंटित की जायेगी।

1.16 सूचना एवं परामर्शकेन्‍द्र खोलेंगे तथा मंडियों में ठहरने एवं रियायती दर पर भोजन की व्‍यवस्‍था करेंगे।

1.17 राज्‍य कृ षि विकास आयोग की स्‍थापना की जायेगी।

1.18 सरदार वल्‍लभ भाई पटेल किसान पुत्र स्‍वावलंबन योजना पात्रता- कृषक परिवार के शिक्षित बेरोजगार जो स्‍नातक हैं और वह स्वयं कृषि विकास एवं विस्‍तार तथा कृषि आधारित उद्योग, खाद्य प्रसंस्करण, सहायक कृषि उद्योग जैसे पशुपालन, डेयरी विकास, कुक्‍कुट पालन, आदि करने के इच्‍छुक हैं, जिनकी आयु सीमा 25 से 50 वर्षहै और वे ग्रामीण क्षेत्र के मूल निवासी हैं तथा अन्‍य किसी व्‍यवसाय/नौकरी से उनकी आय नहीं है, वे पात्र होंगे। इस कार्यक्रम के अंतर्गत सुविधाएं:-

  •  रियायती ब्याज दर पर 5 वर्षके लिए रूपये 1 करोड़ तक का ऋण बैंक से उपलब्‍ध कराएंगे।
  •  कृषि प्रयोजन के लिए विद्युत में 25 प्रतिशत की छू ट देंगे।
  • सिंचाई कर में छू ट देंगे।
  • उपज के विक्रय की स्‍वतंत्रता तथा मंडी कर से छू ट देंगे।

1.19 गुणवत्‍तायुक्‍त और प्रमाणित बीज समय पर उपलब्‍ध करायेंगे, बीज उत्‍पादन सहकारी समिति और स्‍वसहायता समूह को जोड़ेंगे।

1.20 सहायक कृषि आधारित उद्योग जैसे- पशुपालन, डेयरी विकास, कुक्‍कुट पालन, म‍त्‍स्‍य पालन, उद्यानिकी के लाभ के लिए किसानों को प्रोत्साहन देंगे, रियायती ब्याज दर पर बैंक से 5 वर्ष का ऋण उपलब्‍ध कराएंगे।

1.21 दूध उत्‍पादक कृषक को दुग्‍ध संघ के माध्‍यम से प्रति लीटर 5 रूपये बोनस देंगे। दुधारू पशुओं का बीमा/ चिकित्‍सा सुविधा नि:शुल्क करेंगे।

1.22 खाद, बीज, कीटनाशक, कृषि यंत्र, सिंचाई आदि में कर/शुल्‍क की दरों बढ़ोतरी नहीं करेंगे ।

1.23 कृषि यंत्र तथा किसानी के उपयोग की वस्‍तुओं व पशुआहार पर 0 प्रतिशत जीएसटी हेतु जीएसटी काउंसिल (भारत सरकार) को अनुशंसा भेजेंगे ।

1.24 अमानक खाद, बीज तथा कीटनाशक बेचने वाले विक्रेताओं के विरूद्ध दण्‍डात्‍मक कार्यवाही के लिए कानून बनायेंगे । खाद की आपूर्ति समय पर सहकारी समितियों के माध्‍यम से करायेंगे।

1.25 मिट्टी एवं बीज परीक्षण नि:शुल्क सुविधा प्रदाय करेंगे।

1.26 मेरा खेत मेरा तालाब – ग्रामीण क्षेत्रों में भू-जल स्‍तर को बनाये रखने के लिए रियायती ब्याज दर पर ऋण बैंक से उपलब्‍ध कराएंगे।

1.27 सिंचाई के साधन की अनुदान राशि में बढ़ोतरी करेंगे।

1.28 कृषि पर आधारित उद्योगों को बढ़ावा देने के लिए नई नीति बनाएंगे, पूंजी उपलब्‍ध करायेंगे। उद्योग विभाग के अनुदान की पात्र सूची में कृषि आधारित उद्योगों को जोड़ेंगे।

1.29 फसल की अनुकू लता के आधार पर स्‍पेशल एग्रीकल्‍चर ज़ोन स्‍थापित करेंगे। 1.30 200 से 500 हेक्टर विशेष कृषि प्रक्षेत्र विकसित किये जायेंगे, जिसमें एक ही स्‍थान पर कृषि उपकरण, सिंचाई, विद्युत, बीजोपचार, मिट्टी परीक्षण, ग्रेडिग, भण्‍डारण की सुविधा रहेगी, इन क्षेत्रों को मण्‍डी कर से मुक्‍त रखेंगे।

1.31 कृ षि भूमि की रजिस्‍ट्री में छूट’- प्रदेश के किसानों को खेती के विस्‍तार हेतु पटवारी हल्‍के में कृषि भूमि खरीदने पर स्‍टाम्‍प 6 प्रतिशत तथा कृषक महिलाओं के लिए 3 प्रतिशत स्‍टाम्‍प शुल्‍क रहेगा। इसमें शर्त यह रहेगी कि संबंधित व्‍यक्ति की प्रमुख आय खेती से हो। कृषि भूमि की रजिस्‍ट्री के आधार पर ही स्‍वत: नामांतरण एवं सीमांकन की व्‍यवस्‍था करेंगे। पारिवारिक बंटवारे के अंतर्गत स्‍टाम्‍प शुल्‍क 1 प्रतिशत की दर से पंजीकृत करने की व्‍यवस्‍था करेंगे।

1.32 गौशाला- प्रत्‍येक ग्राम पंचायत में गौशाला खोलेंगे एवं चिन्हित क्षेत्रों में गौ अभ्‍यारण्‍य बनाएंगे, इनके संचालन एवं रख रखाव के लिये सरकार अनुदान देगी ।

  • गौशाला में गोबर खाद, कण्‍डा व गौमूत्र एवं अन्‍य वस्‍तुओं का व्‍यावसायिक स्‍तर पर उत्‍पादन करायेंगे ।
  •  मुख्‍य मार्गों पर गौवंश के संरक्षण एवं देखभाल के लिए अस्‍थायी शिविर की व्‍यवस्‍था, दुर्घटना में घायल गायों का उपचार एवं मृत गायों के अंतिम संस्‍कार की व्‍यवस्‍था करेंगे।

1.33 पशुओं से फसल क्षति पर मुआवजा वितरण की प्रक्रिया को सरलीकरण करेंगे तथा वन/ राजस्‍व विभाग को जवाबदेह बनायेंगे।

1.34 कृषकों की निजी भूमि पर छोटे-बड़े झाड़ लगे हैं जिनको काटने की अनुमति नहीं मिलती और न ही कृषक कृषि एवं अन्‍य कार्यकर पाता है, ऐसे जटिल प्रावधानों को शिथिल करेंगे।

1.35 कृषकों की कन्‍याओं के विवाहों के लिए ‘’कृषक कन्‍या विवाह सहायता योजना’’ प्रारंभ करेंगे। प्रोत्‍साहन राशि 51,000 रु. दी जायेगी। इस लाभ के लिए 2.5 एकड़ तक के खाताधारक भी पात्र होंगे।

1.36 आधुनिक कृषि उपकरणों का अधिक से अधिक उपयोग किसान करें, इसके लिए प्रशिक्षण, प्रदर्शन, प्रोत्‍साहन कार्यक्रम चलायेंगे।

1.37 आधुनिक कृषियंत्र जिनकी लागत दो लाख तक है उस पर 50 प्रतिशत अनुदान देंगे।

1.38 बंजर, बीहड़ एवं दुर्गम क्षेत्र की भूमि को कृषि योग्‍य बनाने एवं एक फसली क्षेत्र को दो फसली, दो फसली क्षेत्र को तीन फसली क्षेत्र बनाने के लिए विशेष कार्यक्रम चलायेंगे।

1.39 जैविक कृ षि उत्‍पाद – जैविक कृषि उत्‍पाद के प्रमाणीकरण के लिए केन्‍द्र स्‍थापित करेंगे तथा जैविक उत्‍पाद की ब्रांडिग करेंगे।

  • जैविक खेती के लिए प्रशिक्षण, प्रमाणित बीज एवं विपणन हेतुविशेष पैके ज देंगे।

1.40 किसानों को आधुनिक तकनीकी के आधार पर सब्‍जी, मसाला, औषधि फसल एवं फूल उत्‍पादन आदि के लिये पॉलीहाउस एवं ग्रीनहाउस की वर्तमान योजना के साथ-साथ छोटे आकार 1 हजार से 5 हजार वर्गफीट की यूनिट भी बनायेंगे तथा रियायती ब्याज दर पर बैंक से उपलब्‍ध कराएंगे।

1.41 किसानों के लिए नई सामाजिक सुरक्षा पेंशन योजना प्रारंभ करेंग, इसके अंतर्गत 1000 रु. मासिक पेंशन देंगे, जिसके अंतर्गत 60 वर्षके एवं 2.5 एकड़ से कम भूमिधारक तथा अन्य किसी स्रोतों से आय न होने वाले किसान पात्र होंगे।

40 दिन 40 साल: कमलनाथ ने किसानों की मौत को लेकर पूछा पंद्रहवां सवाल

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madhya pradesh congress chief kamalnath

40 दिन 40 साल पूछने की कड़ी में कांग्रेस मध्यप्रदेश अध्यक्ष कमलनाथ ने शिवराज सरकार से पंद्रहवां सवाल पूछा है. पंद्रहवें सवाल में कमलनाथ ने पूछा कि, ‘शिवराज जी, किसानों को तो उतार दिया मौत के घाट, अब खेती को क्यों पहुँचा रहे हो आघात ?’

सवाल नंबर पंद्रह –

मध्यप्रदेश में खेती पर संकट के बादल छा रहे हैं ,
मोदी जी अपनी रिपोर्ट में बता रहे हैं ।
शिवराज जी, किसानों को तो उतार दिया मौत के घाट ,
अब खेती को क्यों पहुँचा रहे हो आघात ?

1) मोदी सरकार ने मध्यप्रदेश की खेती पर 24 सितंबर 2018 को एक रिपोर्ट जारी की है। उसके मुताबिक मध्यप्रदेश में 2011 से 15 के बीच किसानों की संख्या 11लाख़ 31 हज़ार ,अर्थात 12.74% बढ़ गई ,और खेती का रकबा 1 लाख़ 66 हज़ार हेक्टेयर कम हो गया ।

2) मप्र में गंभीर संकट यह पैदा हुआ कि 1 हेक्टेयर से कम खेती करने वाले छोटे किसान 24.25 % बढ़ गए और छोटी खेती अर्थात 1 हेक्टेयर से छोटे खेत 23.85% बढ़ गए

3) मप्र में अनुसूचित जाति के बड़े किसान मामा राज में बीते पाँच सालों में 36% कम हो गए और उनकी खेती का रकबा 35 % कम हो गया

4) आदिवासी भाइयों में बड़े किसानों की संख्या 26% कम हो गई और उनकी खेती का रकबा 28% कम हो गया ।

5) मध्यप्रदेश में छोटे और मंझोले किसानों का प्रतिशत बढ़कर 75.57% हो गया,जो बेहद चिंता जनक है ।

6) मध्यप्रदेश में छोटी और मझौली खेती चिंताजनक रूप से 34% से बढ़कर 39% हो गई है, अर्थात किसानों की लागत का बढ़ना और मुनाफ़ा कम होना।

7) मध्यप्रदेश में मार्जिनल किसान के पास एवरेज खेत मात्र 0.49 हेक्टेयर है,जो बेहद चिंताजनक है ।

8)यह तथ्य रोंगटे खड़े कर देने वाला है कि व्यक्तिगत खेती की श्रेणी में मप्र के मार्जिनल किसानों के पास खेती का रकबा मात्र 0.38 हेक्टेयर है और साझा खेती में यह मात्र 0.40 हेक्टेयर है
9)मामा,की किसान पुत्र के रूप में जैसे जैसे ब्रांडिंग हुई,वैसे वैसे खेती और किसान समाप्त होते गए

-40 दिन 40 सवाल-

“मोदी सरकार के मुँह से जानिए,
मामा सरकार की बदहाली का हाल।”

“हार की कगार पर मामा सरकार”

40 दिन 40 सवाल- ‘मामाजी , क्या विदेश यात्राओं में सिर्फ खर्च किया सरकारी कैश ? क्यों नही आया कोई विदेशी निवेश ?’

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40 दिन 40 सवाल पूछने के अभियान को लेकर कांग्रेस मध्यप्रदेश अध्यक्ष कमल नाथ ने शिवराज सरकार से तेरहवां सवाल पूछा है। तेरहवें सवाल में कमल नाथ ने पूछा, ‘मामाजी , क्या विदेश यात्राओं में सिर्फ खर्च किया सरकारी कैश ? क्यों नही आया कोई विदेशी निवेश ?’

सवाल नंबर तेरह –

मोदी जी की निगाह से देखिए मामा जी की विदेशी यात्राओं का कमाल,
निवेश में मध्यप्रदेश ठन ठन गोपाल ।
मामाजी , क्या विदेश यात्राओं में सिर्फ खर्च किया सरकारी कैश ?
क्यों नही आया कोई विदेशी निवेश ?

प्रत्यक्ष विदेशी निवेश का शिवराज ब्रांड झूठ ।

12 सालों से शिवराज जी देश विदेश में चमक-धमक के साथ इन्वेस्टर्स मीट कर रहे हैं। कहते हैं कि 40 लाख़ करोड़ रुपए के अनुबंध भी हुए हैं। सच क्या है? सच 23 जुलाई 2018 को लोकसभा में बताया गया।

1.वर्ष 2103-14 में भारत में कुल 24299.33 मिलियन डॉलर का विदेशी निवेश आया।

इसमें से केवल 118.85 मिलियन डॉलर (यानी 0.49%) का निवेश मध्यप्रदेश और छतीसगढ़ में आया। इतने में से पूरा भी मप्र में नहीं आया।

2.वर्ष 2014-15 में भारत में कुल 30930.50मिलियन डाॅलर का विदेशी निवेश आया। इसमें से केवल 100.13 मिलियन डाॅलर (यानी 0.32%) मप्र और छतीसगढ़ में आया।

3.वर्ष 2015-16 में भारत में कुल 4000000मिलियन डाॅलर का विदेशी निवेश भारत में आया। इसमें से केवल 80.02 मिलियन डाॅलर (यानी 0.20%) मध्यप्रदेश और छतीसगढ़ में आया।

4.वर्ष 2016-17में भारत में 43478.27मिलियन डाॅलर का विदेशी निवेश भारत में आया।

इसमें से केवल 76.10 मिलियन डाॅलर ही (यानी 0.17%) मध्यप्रदेश और छतीसगढ़ में आया।

5.वर्ष 2017-18 में भारत में कुल 44856.75 मिलियन डाॅलर का विदेशी निवेश आया। इसमें से केवल 28.16 मिलियन डाॅलर (यानी 0.06%) मध्यप्रदेश और छतीसगढ़ में आया।

शिवराज जी, सरकारी खज़ाने से विदेश यात्रायें करने के बाद भी कोई निवेश करने क्यों नहीं आया?
क्योंकि निवेशक शिवराज सरकार के भ्रष्टाचार से भयभीत रहे।

शिवराज ब्राँड झूठ
सबसे ज्यादा विदेशी निवेश कर्नाटक, तमिलनाडु, आँध्रप्रदेश में आया, जहाँ भाजपा की सरकारें नहीं हैं।

40 दिन 40 सवाल-
“मोदी सरकार के मुँह से जानिए,

मामा सरकार की बदहाली का हाल।”

40 दिन 40 सवाल: कमल नाथ ने पूछा बारहवां सवाल- ‘मामा जी, क्या गौ माता नहीं, गोल्फकोर्स से है प्यार ?’

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40 दिन 40 सवाल पूछने के सिलसिले में मध्य प्रदेश अध्यक्ष कमल नाथ ने शिवराज सरकार से बारहवां सवाल पूछा है. बारहवें सवाल में कमल नाथ ने गौ माता पर हो रहे अत्याचार को लेकर सवाल किया है. उन्होंने ट्वीट करते हुए लिखा, मोदी जी ने बताया मामा जी के मुखौटे में नहीं है दम, मप्र में गौ माता हो गईं कम। मामा जी, क्या गौ माता नहीं, गोल्फकोर्स से है प्यार ? गौ माता के भोजन पर भी क्यों करते हैं वार ?

सवाल नंबर बारह

1)बीजेपी के लोग गौ-माता के नाम पर ख़ूब हल्ला मचाते हैं।
हम हर पंचायत में गौशाला खोलने का वचन दें, तो इनके पेट दुख जाते हैं ।
आइए,देखिए मामा जी गौ माता की कितनी अनदेखी किए जाते हैं:

2) मामा सरकार की पोल खोल रही है मोदी सरकार की लाइव स्टॉक सेंसस की रिपोर्ट ,जो यह बताती है कि:
18 वीं सेंसस में मध्यप्रदेश में गौ -धन की संख्या में भारी कमी आई है। मध्यप्रदेश में 18 वीं सेंसस में 2 करोड़ 19 लाख़ गौधन था ,जो 5 सालों में कम होकर 1करोड़96 लाख़ रह गया ।

3) यानी मामा के शासनकाल में 23 लाख़ 13 हज़ार गौ-धन खत्म हो गया ।
4) शिवराज जी, जवाब दीजिए? 23लाख़ 13हज़ार गौ-धन कहाँ गया ?
5)भैंसों की संख्या 91लाख़ 29हज़ार से कम होकर 81लाख़ 87हज़ार रह गई। शिवराज जी, जवाब दीजिए 9 लाख़ 41 हज़ार भैंसें कहाँ गायब हो गयीं?

6) सभी तरह के पशुधन में 43लाख़ 62 हज़ार की कमी आई है । क्या मध्यप्रदेश में अवैध कत्लखाने चल रहे हैं ?
7) इतना ही नहीं, शिवराज सिंह की सरकार ने हमारे राज्य की देशी प्रजातियों को खत्म करने का काम किया है। मध्यप्रदेश में 26 लाख़ 79 हज़ार देशी प्रजाति के पशु खत्म हो गए।

8) क्या यह सही है कि आपने प्रावधान तो गौ शाला के लिए प्रति गाय लगभग 17 रु किया, मगर 2 रु भी ख़र्च नहीं किये ?
2013-14 में सालाना 608 रुपए अऩुदान दिया गया,प्रतिदिन के हिसाब से महज़ 1 रु 66 पैसे
-2014-15 में सालाना 635 रु अऩुदान दिया गया,प्रतिदिन के हिसाब से महज़ 1 रुपए 73 पैसे

-2015-16 में सालाना 591 रुपए अनुदान दिया गया, प्रतिदिन के हिसाब से महज़ 1 रुपए 61 पैसे।
-2016-17 में सालाना 577 रुपए अनुदान दिया गया, प्रतिदिन के हिसाब से महज़ 1 रुपए 58 पैसे।
-2017-18 में सालाना 679 रुपए अनुदान दिया गया, प्रतिदिन के हिसाब से महज 1 रुपए 86 पैसे

9) मामा जी,क्या गौ माता का खाना भी भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ गया ?

-40 दिन 40 सवाल-
“मोदी सरकार के मुँह से जानिए,

मामा सरकार की बदहाली का हाल।”

40 दिन 40 सवाल: कमल नाथ ने पूछा ग्यारहवां सवाल

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40 दिन 40 सवाल पूछने के अभियान में मध्य प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष कमल नाथ ने शिवराज सरकार से पूछा ग्यारहवां सवाल . ग्यारहवें सवाल में कमल नाथ ने ट्वीट करते हुए पूछा, ‘मोदी जी बता रहे हैं मनरेगा की बात, मामा जी ने मेहनतकशों से किया कुठाराघात । रोज़गार का कानूनी अधिकार मामा, क्यों किया बेकार ?

ग्यारहवां सवाल-

1) मध्यप्रदेश में 68.35 लाख़ मनरेगा के जॉब कार्ड्स हैं,अर्थात लगभग 3 करोड़ 41 लाख़ 75 हज़ार लोग प्रत्यक्ष अप्रत्यक्ष रूप से मज़दूरी के माध्यम से जीवन यापन कर रहे हैं ।

2) कांग्रेस ने यह तय किया था कि एक साल में 100 दिनों का रोज़गार इस योजना के तहत दिया जाएगा ।

मप्र में मनरेगा में पंजीकृत लोगों मे से
वर्ष 2014-15 में 100 दिन का पूरा रोज़गार पाने वाले परिवार – 1,58,776 (2.33%)।
वर्ष 2015-16 में 100 दिन का पूरा रोज़गार पाने वाले परिवार – 2,25,502 (3.30%)।
वर्ष 2016-17 में 100 दिन का पूरा रोज़गार पाने वाले परिवार -1,40,990 (2.1%)।

वर्ष 2017-18 में 100 दिन का पूरा रोज़गार पाने वाले परिवार – 1,34,724 (1.97%) ।

3) कांग्रेस द्वारा बनाए गए क़ानून में कहा गया था कि हर मज़दूर को काम करने के एक सप्ताह के भीतर मज़दूरी का भुगतान हो जाएगा; और यदि नहीं हुआ तो सरकार देरी से मज़दूरी के भुगतान का मुआवजा देगी।

4)शिवराज जी ने वर्ष 2013-14 से सितम्बर 2018-19 तक 6हज़ार 167 करोड़ रुपए की मज़दूरी का देरी से भुगतान किया।
हज़ारों मज़दूरों को अब भी उनकी मेहनत की कमाई नहीं दी गई। क़ानून के मुताबिक देरी से भुगतान पर सरकार को 10 % के मान से कम से कम 610 करोड़ रुपए का मुआवजा देने का अनुमान था,

मगर मामा ने दिये लगभग केवल 3 करोड़ रुपए।
2013-14- देरी से दिये 1706 करोड़ रुपए ।
2014-15- देरी से दिये 1740 करोड़ रुपये।
2015-16 – देरी से दिये 1326 करोड़ रुपए।
2016-17- देरी से दिये 787 करोड़ रुपए।
2017-18- देरी से दिये 434करोड़ रुपये।
2018-19-देरी से1734करोड़ रुपये।

Total- 6167 करोड़ -देरी से दिया गया भुगतान ।

5) मामा सरकार द्वारा मुहैया कराया गया एवरेज रोजगार: 2014-15मात्र 42 दिन ,2015-16 मात्र 45 दिन 2016-17 मात्र 40 दिन ,2017-18मात्र 46 दिन और 2018 -19 मात्र 38 दिन ।

6)मामा सरकार द्वारा मुहैया कराई गई एवरेज मजदूरी प्रतिदिन :
2014-15 मात्र 149रु ,2015-16 मात्र 149 रु 2016-17 मात्र 155रु ,2017-18मात्र165रु और
2018 -19 मात्र 170रु।

40 दिन 40 सवाल-

“मोदी सरकार के मुँह से जानिए,
मामा सरकार की बदहाली का हाल।”

“हार की कगार पर, मामा सरकार”

40 दिन 40 सवाल: पंचायती राज और पिछड़े जिलों का दिवाला होने को लेकर कमलनाथ ने पूछा दसवां सवाल

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40 दिन 40 सवाल पूछने के अभियान में कांग्रेस मध्यप्रदेश अध्यक्ष कमलनाथ ने शिवराज सरकार से दसवां सवाल पूछा। अपने दसवें सवाल में कमल नाथ ने पंचायती राज और पिछड़े जिलों का दिवाला होने को लेकर किया।

सवाल नंबर दस

मोदी जी ने निकाला पंचायती राज और पिछड़े जिलों का दिवाला,
मामा क्यों डाला मुँह पर ताला ? शर्म करो शिवराज ।
मनमोहन जी के समय ‘धरना-धर’ और उपवास का स्वाँग,
अब क्यों नही उठाते बासमती की माँग ?

1) कांग्रेस सरकार ने पंचायती राज को सशक्त करने के लिए पंचायती राज मंत्रालय स्थापित किया था। मोदी सरकार ने नियोजित रूप से पंचायती राज का गला घोंट कर उसे समाप्त प्रायः कर दिया । इस मंत्रालय के 2014-15 के 7000 करोड़(BE) के बजट को 2015-16 में 94 करोड़(BE) कर दिया गया ।

2) इस मंत्रालय के तहत दो प्रमुख कार्यक्रम चलाए जाते थे।
पहला- देश के पिछड़े जिलों का विकास BRGF) और दूसरा पंचायतों को सशक्त करने के लिये राजीव गांधी पंचायत सशक्तिकरण अभियान (RGPSA)। मोदी सरकार ने दोनों कार्यक्रमों को 2015-16 के बाद बंद कर दिया।

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3) कांग्रेस सरकार ने मध्यप्रदेश के 30 पिछड़े जिलों को आगे लाने के लिए पिछड़ा क्षेत्र अनुदान निधि ( BRGF) कार्यक्रम 2006-07 से प्रारंभ किया था । जिसके तहत 2013 -14 तक मध्यप्रदेश पर 2995.59 करोड़ रु खर्च किए ।
4)अलीराजपुर ,अनूपपुर ,अशोकनगर,बालाघाट ,बड़वानी
,बैतूल,बुरहानपुर ,झाबुआ ,मंडला, टीकमगढ,डिंडोरी, श्योपुर इत्यादि पिछड़े 30 जिलों का अनुदान बंद ।

5) मोदी जी ने आने के बाद 2015 -16 से मध्यप्रदेश को यह(BRGF) अनुदान बंद कर दिया ।आखरी साल 2014 – 15 के लिए मोदी जी ने 647.20 करोड़ रु प्रावधानित किए ,मगर जारी किए सिर्फ़ 221.22 करोड़ और मामा जी ने ख़र्च किए मात्र 197.52 करोड़ ।

6) इसी प्रकार मध्यप्रदेश की पंचायतों के सशक्तिकरण के लिए राजीव गांधी पंचायत सशक्तिकरण अभियान को भी अनुदान बंद कर दिया । मोदी जी ने आखरी वर्ष 2015-16 में इस हेतु प्रावधानित किए मात्र 41.63 करोड़ और दिए सिर्फ़ 10.8 करोड़ ।

7)शिवराज जी फरवरी 2014 को तत्कालीन प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह जी को पत्र लिखकर धरने पर बैठे थे कि मध्यप्रदेश के बासमती चावल की पहचान,जो जियोग्राफिकल इंडिकेशन (GI) ने स्वीकारी है,को एपीडा द्वारा स्वीकारा नहीं जा रहा है।ये मध्यप्रदेश के किसानों के साथ कांग्रेस सरकार का अन्याय है

8) अब क्या हुआ मामा जी , जब मोदी सरकार ने फरवरी 2016 में आपकी मांग को ठुकरा कर आदेश दिया कि मध्यप्रदेश के किसान अपने चावलों को बासमती की पहचान नहीं दे सकेंगे ?

9) मध्यप्रदेश में 2 लाख़ हेक्टेयर के 13 जिलों,विदिशा ,सीहोर होशंगाबाद ,नरसिंहपुर ,जबलपुर, गुना ,शिवपुरी, ग्वालियर, दतिया ,भिंड ,श्योपुर, मुरैना,रायसेन के किसानों को मोदी जी ने कहा कि वे अपने चावल बासमती के नाम से नहीं बेच सकेंगे ।

10)मामा जी,मप्र के बासमती चावल उत्पादक किसानो के लिए अब धरने का स्वाँग भी नही करोगे?अब क्या मोदी सरकार से डर लगता है या कांग्रेस सरकार के समय दिखावा कर रहे थे?
सोर्स -केंद्रीय पंचायतीराज मंत्रालय,कृषि और प्रसंस्कृत खाद्य उत्पाद निर्यात विकास प्राधिकरण
धरना-धर मामा का स्वाँग

40 दिन 40 सवाल-

“मोदी सरकार के मुँह से जानिए,
मामा सरकार की बदहाली का हाल।”

“हार की कगार पर, मामा सरकार”

40 दिन 40 सवाल: कमल नाथ ने आठवें सवाल में पूछा, ‘शहरों को सपने बेचे हज़ार, मगर उम्मीदों को क्यों किया तार -तार ?’

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सोशल मीडिया के जरिये 40 दिन 40 सवाल अभियान के तहत कांग्रेस मध्य प्रदेश अध्यक्ष कमल नाथ ने मोदी सरकार और शिवराज सरकार से आठवां सवाल पूछा है. कमल नाथ ने अपने आठवें सवाल में शहर को विकास बनाने को लेकर झूठे भाषण पर तंज कसा है. उन्होंने केंद्रीय शहरी विकास मंत्रालय,पिनाकी मिश्रा कमेटी रिपोर्ट के सोर्स का हवाला देते हुए एक के बाद एक 8 ट्वीट्स के जरिये सवाल पूछा है.

आठवां सवाल-

मोदी और मामा ने कहा,”मिलेगा शहरी विकास का मौका”,
मगर ऊँट के मुँह में जीरा झोंका।
मामा, शहरों को सपने बेचे हज़ार, मगर उम्मीदों को क्यों किया तार -तार ?

1) अमृत ( AMRUT ) -25-6-2015 को लॉन्च किया गया।
2015 से 2018-
प्रोजेक्ट स्वीकृत 6200.62 करोड़, भेजे सिर्फ़ 528.31 करोड़, मामा ने ख़र्च किये सिर्फ़ 389.75 करोड़ ।
वर्ष 2015-16 – (134 cr ),2016-17-(172cr) ,2017-18(211.61cr)

2) स्मार्ट सिटी -25-6-2015 को लॉन्च किया।
मध्यप्रदेश की योजना के लिए स्वीकृत किये 12,685 करोड़, केंद्र से जारी किए मात्र1020 करोड़।
2015-16 में जारी किए -386करोड़ , 2016-17में जारी किए 394करोड़ 2017-18 में जारी किए मात्र 240 करोड़।

3) स्वच्छ भारत का पीटा सिर्फ़ ढिंढोरा। मध्यप्रदेश में कुल ख़र्च किए सिर्फ 721- करोड़।
वर्ष 2015-16 में 135.80करोड़ ,वर्ष 2016-17 में 270 करोड़ वर्ष 2017-18 में मात्र 293 करोड़।

4) प्रधानमंत्री आवास योजना –
केंद्र ने स्वीकृत किये 7007.38करोड़, केंद्र ने भेजे 1488.64 करोड़ ,घर बनने थे -4लाख 59हजार 395, घर पूरे हुए –33 हजार765 ।

5)मोदी-मामा एक समान,
भाषणों के अलावा दूजा नहीं काम।
ख़ुद मोदी सरकार की पार्लियामेंट्री स्टैंडिंग कमेटी की रिपोर्ट कहती है कि मोदी सरकार ने शहरी विकास के उनके ड्रीम प्रोजेक्ट में अब तक मात्र 21.6% राशि ही ख़र्च की है ।

अमृत(AMRUT) -में राशि खर्च मात्र – 28%
हृदय (HRIDAY)-में राशि खर्च मात्र – 13.58%
स्मार्ट सिटी -में तो राशि ख़र्च मात्र – 1.38%
स्वच्छ भारत -में राशि खर्च मात्र – 38.01%
पीएम आवास योजना -में राशि खर्च मात्र-20.78%

40 दिन 40 सवाल-

“मोदी सरकार के मुँह से जानिए,
मामा सरकार की बदहाली का हाल।”
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दतिया में नरोत्तम मिश्रा के खिलाफ कांग्रेस को नहीं मिल रहा दमदार उम्मीदवार

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मध्यप्रदेश भारतीय जनता पार्टी के दिग्गज नेता राज्य के जनसंपर्क मंत्री नरोत्तम मिश्रा को पटखनी देने वाला उम्मीदवार कांग्रेस को अब तक नहीं मिला है। दिल्ली में जब कांग्रेस की स्क्रीनिंग कमेटी उम्मीदवारों के नाम पर सहमति बनाने का काम कर रही थी, ठीक उसी वक्त दतिया में कांग्रेस आस्तीनें चढ़ा पेराशूट नेताओं का विरोध कर रहे थे। अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी द्वारा दतिया जिले के लिए नियुक्त किए गए पर्यवेक्षक हरियाण के विधायक उदयभान जाटव को नेताओं की आपसी लड़ाई देखकर कहना पड़ा कि सीट जीतोगे सरकार तब ही बन पाएगी। आपस में लड़ने सरकार नहीं बन सकती।

तीन सीट,तीन सौ दावेदार

दतिया जिला में विधानसभा की कुल तीन सीटें हैं। दतिया,सेंवढ़ा और भांडेर। तीनों सीटों पर अभी भारतीय जनता पार्टी का कब्जा है। राज्य के जनसंपर्क मंत्री नरोत्तम मिश्रा दतिया विधानसभा क्षेत्र का प्रतिनिधित्व करते हैं। पिछले चुनाव में पेड न्यूज के आरोप के चलते चुनाव आयोग ने मिश्रा को चुनाव लड़ने के लिए अयोग्य घोषित कर दिया था। हाईकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट तक मामला पहुंचा। चुनाव आयोग के आदेश को निरस्त कर दिया गया है।

पिछले एक दशक में नरोत्तम मिश्रा ने दतिया अपनी जड़े काफी मजबूत कर ली हैं। कांग्रेस में उन्हें चुनौती देने वाला कोई नेता भी सामने नहीं है। कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने ग्वालियर संभाग की अपनी यात्रा की शुरूआत दतिया के पीतांबरा पीठ के दर्शन कर की थी। राहुल गांधी की इस यात्रा का मकसद दतिया सीट वापस कांग्रेस की झोली में लाने का था। लेकिन, दतिया में कांग्रेस एक नहीं हो पा रहे हैं।

राहुल गांधी की रैली के लिए 50-50 हजार रुपए चंदा

कांग्रेसियों में समन्वय बैठाने आए उदयभान के सामने प्रदेश कांग्रेस के सदस्य दामोदर सिंह ने कहा कि कांग्रेस में अब फटे नोट नहीं चलेंगे। आप पार्टी हाइकमान तक बात पहुंचाईएं जिले की तीनों सीटों पर नए चेहरों को मौका दे तो कार्यकर्ता पूरी मेहनत से कांग्रेस को जिताने के लिए लग जाएगा। चुनाव का समय है और कार्यालय से सभी को सूचनाएं नहीं दी जाती। राजेश दांतरे ने कहा कि हमसे राहुल गांधी की रैली के लिए 50-50 हजार रुपए चंदा लिया गया। रैली की सफलता का श्रेय एक व्यक्ति को दे दिया। यह गलत है। जहां कार्यकर्ता का सम्मान नहीं होगा वहां कार्यकर्ता मन से काम नहीं करेगा।

आशोक शर्मा ने सलाह दी कि पर्यवेक्षक दतिया में बैठे रहते हैं 7 अन्य दो विधानसभा सीट पर ध्यान ही नही देते। कार्यकर्त्ताओं से भी राय नहीं ली जाती। शिवकुमार पाठक ने टिकट पर अपनी दावेदारी पेश करते हुए कहा कि दतिया से ब्राह्ण को ही टिकट देना चाहिए।

40 दिन 40 सवाल- शिक्षा में हो रही धांधली को लेकर कमल नाथ ने पूछा सातवां सवाल

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40 दिन 40 सवाल पूछने के अभियान में मध्यप्रदेश कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष कमल नाथ ने शिवराज सरकार से बच्चों के भविष्य के साथ खिलवाड़ को लेकर सातवां सवाल पूछा है. कमल नाथ ने ट्वीट करते हुए लिखा, ‘मोदी सरकार से जानिये मामा सरकार की स्कूली शिक्षा का रोंगटे खड़े कर देने वाला सच।’
बच्चों के भविष्य को पहुँचाई चोट, मामा के मुखौटे में निकले कई खोट। मामा जी, बच्चों से क्यों किया विश्वासघात ? स्कूली शिक्षा को क्यों पहुँचाया गंभीर आघात ?

इसके बाद कमल नाथ ने एक के बाद एक 11 ट्वीट्स के जरिये आंकड़ों के साथ शिक्षा में होने वाली धांधली पर सवाल पूछा।

(1) मध्यप्रदेश के प्राथमिक ,माध्यमिक और उच्चत्तर माध्यमिक ,कुल 150762 स्कूलों में से 1 लाख़ 6 हज़ार से अधिक,अर्थात 71% स्कूलों मे बिजली पहुँची ही नहीं है ।
(2) मध्यप्रदेश के नौनिहालों की आधुनिक शिक्षा का हाल यह है कि मात्र 15. 7 % स्कूलों में कंप्यूटर एजुकेशन की व्यवस्था है

अर्थात राज्य के 1.22 लाख़ स्कूलों में आज भी कम्प्यूटर शिक्षा नहीं है ।
(3) मध्यप्रदेश के सिर्फ़ 15.6 % माध्यमिक स्कूलों में और मात्र 19% उच्चतर माध्यमिक स्कूलों में लाइब्रेरी की व्यवस्था है । सरकारी स्कूलों में तो यह नगण्य है ।

(4) केंद्र की डाईस-2017 रिपोर्ट के अनुसार मध्यप्रदेश में 19 हज़ार स्कूल एक-एक शिक्षक के भरोसे चलते हैं ।
(5) 14.6 हज़ार स्कूलों में बारिश के दिनों में पहुँच का रास्ता ही नहीं रहता,यानी इन स्कूलों में बच्चे पढ़ने ही नहीं जा पाते।
6)राज्य में 46.6हजार स्कूलों में अब भी नहीं बन पाया बच्चों के लिए खेल मैदान।प्रदेश के 93 हजार से अधिक स्कूलों में आज भी दिव्यांग बच्चों के लिये नहीं बन पाया है रैंप
(7)आज भी मप्र के 4451 स्कूलों में सिर्फ़ एक ही कमरा है। यानी चार से आठ वर्ग के बच्चे एक ही रूम में पढ़ते हैं।

8)कक्षा 1से5 तक की स्कूली शिक्षा के दौरान ही एक साल मे 3.57लाख बच्चों को शिक्षा छोड़ देनी पड़ती है।कक्षा 6से8 तक की स्कूली शिक्षा के दौरान ही 1साल में 3.42लाख बच्चो को शिक्षा छोड़ देनी पड़ती है
(9)कुल मिलाकर कक्षा 1से8 तक 1साल मे 7.17लाख बच्चों को शिक्षा छोड़ देनी पड़ती है

10) कंट्रोलर ऑडिटर जनरल की रिपोर्ट बताती है कि 2010 से 2016 तक माध्यमिक शिक्षा अर्थात आठवीं तक के 42 लाख़ 46 हज़ार बच्चों ने स्कूल छोड़ दिया ।
11) सर्व शिक्षा अभियान के तहत 1 से 8 वीं तक मुफ़्त किताबें बाँटे जाने का प्रावधान है ।
कैग ने अपनी 2017 की रिपोर्ट में बताया कि 2010 से 2016 तक 42 लाख़ 88 हज़ार किताबें बाँटी ही नहीं गईं ।
12) कैग की 2017 की रिपोर्ट बताती है कि मध्यप्रदेश के माध्यमिक स्कूलों में 63 हज़ार 851 शिक्षकों की कमी है।
13)सीएजी की रिपोर्ट के मुताबिक़ सरकार ने स्कूल शिक्षा के लिए आवंटित कुल बजट में से 2011-2016 के बीच 7284.61 करोड़ रुपए (आवंटन का 31 प्रतिशत) जारी ही नहीं किये। सरकार बच्चों के शिक्षा के अधिकार के हनन में सबसे बड़ी अपराधी रही ।

कल्पना कीजिए बग़ैर पुस्तक , बग़ैर शिक्षक ,बग़ैर कंप्यूटर , बग़ैर बिजली लाखों बच्चे अपना भविष्य कैसे सँवार सकते हैं । -उखाड़ फेंकिये ऐसी सरकार – 
सोर्स : HRD की EDI , DISE रिपोर्ट CAG की रिपोर्ट

-40 दिन 40 सवाल-
“मोदी सरकार के मुँह से जानिए,
मामा सरकार की बदहाली का हाल।”