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मायावती का भाजपा कनेक्शन सामने लाने के लिए दिया निर्दलीय को समर्थन: अखिलेश

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Akhilesh Yadav Samajwadi Party UP
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सपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष एवं यूपी के पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने आज कहा कि वह भाजपा व बसपा का सच सामने लाना चाहते थे इसलिए राज्यसभा चुनाव के लिए निर्दलीय प्रत्याशी प्रकाश बजाज को समर्थन दिया। अखिलेश यादव शनिवार को आचार्य नरेंद्र देव की पुण्य तिथि पर उन्हें श्रद्घांजलि देने के बाद मीडिया से बात कर रहे थे।

मीडिया से बात करते हुए अखिलेश ने कहा कि हमने जनता के सामने सच ला दिया है कि बसपा, भाजपा की बी टीम है। अब सब बातें साफ हो गई हैं। वहीं, उन्होंने बसपा सुप्रीमो मायावती पर भी निशाना साधा और कहा कि कुछ लोग भाजपा से मिले हुए हैं। भाजपा चुनाव जीतने के लिए किसी के साथ भी गठबंधन कर सकती है। अखिलेश यादव ने कहा कि आज के दिन हम सरदार पटेल, आचार्य नरेंद्र देव जी और वाल्मीकि जी को याद कर रहे हैं।

अखिलेश यादव ने आगे कहा है कि भाजपा की गलत नीतियों के चलते प्रदेश के किसान बेहाल हैं। बिचौलियों और बड़े व्यापारियों के सरकारी तंत्र से मिलीभगत की वजह से किसान अपनी फसल उन्हें औनपौने दाम पर बेचने को मजबूर हैं। उन्होंने कहा कि सरकार झूठे दावों के बल पर अपनी कमियों पर पर्दा डालने का प्रयास कर रही है। भाजपा सरकार किसानों की आय दुगनी करने और किसान की फसल का न्यूनतम समर्थन मूल्य एवं कृषि उपज की उत्पादन लागत का डेढ़ गुना करने का वादा भूल चुकी है। किसानों को इस वर्ष धान की फसल से बहुत उम्मीद थी, लेकिन किसानों को 1888 रुपये के घोषित न्यूनतम समर्थन मूल्य के बजाय 800 से 1000 रुपये या अधिकतम 1200 रुपये प्रति कुंतल की दर से धान बेचने को मजबूर होना पड़ रहा है।

सपा अध्यक्ष ने कहा कि धान केन्द्रों पर भी नमी के बहाने किसानों का शोषण हो रहा है। धान की खरीद में निजी एजेंसियों की चांदी है। मक्का माटी मोल बिक रहा है। उन्होंने कहा कि भाजपा सरकार द्वारा लाये गए नए कृषि विधेयक से खेत पर किसान का मालिकाना हक समाप्त हो जाएगा। उसकी खेती कॉरपोरेट कंपनियों की शर्तों पर होगी। उन्होंने कहा कि देशवासियों को भाजपा से सावधान रहना चाहिए।

MP Election- बसपा की दूसरी सूची जारी, कुल 50 प्रत्याशियों के नाम

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मध्य प्रदेश विधानसभा चुनाव के लिए बहुजन समाज पार्टी ने अपनी दूसरी सूची जारी कर दी है. इस सूची में 50 और नाम शामिल किये गए हैं. इससे पहले 20 सितम्बर को बसपा ने पहली सूची में 22 प्रत्याशियों का नाम तय किया था.

गौरतलब है कि मध्य प्रदेश प्रदेश अध्यक्ष कमल नाथ बसपा से गठबंधन करने की पूरी कोशिश में थे लेकिन ऐसा नहीं हुआ. गठबंधन की आस को ख़त्म करने के बाद बसपा सुप्रीमो मायावती अकेले 230 सीटों पर चुनाव लड़ने का फैसला किया जिसमें से 72 प्रत्याशियों का नाम तय कर दिया गया है.

20 सितम्बर को जारी हुई सूची

बिलासपुर में मायावती ने रैली को किया सम्बोधित,कहा पूर्ण बहुमत से बनेगी जोगी-बसपा सरकार

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छत्तीसगढ़ में होने वाले विधानसभा चुनाव के लिए पूर्व मुख्यमंत्री अजीत जोगी की पार्टी जनता कांग्रेस छत्तीसगढ़ जोगी और बहुजन समाज पार्टी (बसपा) में गठबंधन हुआ है। जोगी कांग्रेस से गठबंधन के बाद बसपा की राष्ट्रीय अध्यक्ष मायावती ने पहली बार शनिवार को बिलासपुर में हुई संयुक्त रैली को सम्बोधित किया है। महारैली को संबोधित करते बसपा सुप्रीमो मायावती ने भाजपा पर जमकर निशाना साधा।

बिलासपुर के मंच से मायावती ने दावा किया कि इस बार पूरे बहुमत से छत्तीसगढ़ में बसपा-छत्तीसगढ़ जनता कांग्रेस जोगी की सरकार बनेगी। इस विशाल रैली में जनता कांग्रेस छत्तीसगढ़ जोगी प्रमुख अजीत जोगी भी शामिल हुए। प्रदेश में जोगी कांग्रेस 55 और बसपा 35सीटों पर चुनाव लड़ रही है।

मायावती ने कहा आगे कहा, छत्तीसगढ़ में चुनाव को घोषणा को चुकी है। गठबंधन के लोगों की पूरी कोशिश होनी चाहिए कि हमारी पूर्ण बहुमत से सरकार बन सके। मायावती ने कहा कि छत्तीसगढ़ में अल्पसंख्कों का शोषण हो रहा है। उनके विकास के लिए कोई कार्य नहीं किए गए। नोटबंदी ने लोगों की कमर तोड़ दी है। देश में फैले भ्रष्टाचार से लोग परेशान है। केंद्र सरकार पर निशाना साधते हुए उन्होने कहा कि राफेल और बोफर्स घोटाले के दोषियों पर कोई कार्रवाई नहीं हो रही हैं, गौरक्षक के नाम पर बने कानून का दुरुपयोग हो रहा है।

नाव पर सवार होकर आ रहीं अंबे कांग्रेस की नाव पार लगाएगीं या हाथी पर जाने से होगा नुकसान

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इस वर्ष की शारदीय नवरात्रि पर मां अंबे का आगमन नाव पर हो रहा है। नाव पर सवार मां अंबे मध्यप्रदेश सहित चार राज्यों में क्या कांग्रेस का सत्ता से वनवास समाप्त कर देगीं या फिर हाथी की उपेक्षा महंगी पड़ जाएगी। मां जगदंबा की वापसी भी इस बार हाथी पर बैठ कर हो रही है। मां अंबे का नाव पर आगमन पूरे देश के लिए अच्छे दिन आने का संकेत देने वाला है। क्या ये अच्छे दिन कांग्रेस की हिन्दी भाषी तीन राज्य मध्यप्रदेश,छत्तीसगढ़ और राजस्थान में सरकार में वापसी से आएंगे? कांग्रेस को इस सवाल का जवाब अपनी भक्ति के जरिए वोटर को खुश करके मिल सकता है। कांग्रेस को इन तीन राज्यों में अपने हाथ के कमाल पर ही भरोसा है। कांग्रेस ने अपनी नाव किनारे लगाने के लिए न तो साइकल की सवारी की है और न ही हाथी पर बैठने की हिम्मत दिखाई है।

मायावती और अखिलेश यादव को कांग्रेस ने किया है निराश

वैसे तो पिछले पांच विधानसभा चुनाव के लिए वोट डाले जाने का काम शारदीय नवरात्रि के बाद ही होता है। चुनाव लड़ने वाले उम्मीदवार इस मौके का उपयोग अपने चुनाव प्रचार के लिए करते हैं। इस वार की नवरात्रि पर जगदंबा नाव पर सवार होकर आ रहीं हैं। इस कारण राजनीतिक दलों के लिए यह नवरात्रि ज्यादा खास हैं। चुनाव वाले तीनों हिन्दी भाषी राज्यों में कांग्रेस और भाजपा के बीच सीधा मुकाबला होना तय माना जा रहा है। छत्तीसगढ़ में अजीत जोगी और मायावती मिलकर मुकाबला त्रिकोणीय बनाने का पूरा प्रयत्न कर रहे हैं। मायावती को अजीत जोगी का साथ कांग्रेस द्वारा हाथ आगे न बढ़ाए जाने के कारण लेना पड़ा है।

मायावती इस उम्मीद में थीं कि राष्ट्रीय स्तर पर कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी जो महागठबंधन तैयार करना चाहते हैं,वह तीन राज्यों के विधानसभा चुनाव में बसपा को साथ लिए बगैर नहीं बन सकता। मायावती इंतजार करतीं रहीं,कांग्रेस ने उनके प्रस्ताव को स्वीकार ही नहीं किया। प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष कमलनाथ कहते हैं कि मायावती वो सीटें चाहतीं थीं, जिन पर उन्हें हजार-दो हजार वोट ही पिछले चुनाव में मिले थे। दरअसल मायावती कांग्रेस के वोट के जरिए अपनी नाव पार लगाना चाहतीं थीं। कांग्रेस को लग रहा था कि इस गठबंधन से सत्ता मिल भी गई तो उसका रिमोट मायावती के हाथ में चला जाएगा।

अखिलेश यादव की उम्मीद भरी निगाहों को कांग्रेस ने अनदेखा कर दिया। अखिलेश यादव से कांग्रेस ने समझौते के संकेत तो दिए लेकिन, सहमति का जवाब नहीं भेजा। नतीजा समाजवादी पार्टी को अपनी नाव को बचाने के लिए अकेले ही चुनाव का चप्पू चलाना पड़ रहा है।

कांग्रेस को उम्मीद कि आरक्षित वर्ग और मुस्लिम के साथ लगेगी नाव पार

बसपा प्रमुख मायावती के हाथी को नाराज करने के बाद यह माना जा रहा है कि इससे कांग्रेस को नुकसान होगा। कांग्रेस एक बार फिर सत्ता में आने से चूक सकती है। इस तरह की अटकलों का आधार बसपा के प्रतिवद्ध वोट बैंक के कारण लगाया जा रहा है। राज्य में बसपा की ताकत निरंतर कम हो रही है। बसपा को पिछले चुनाव में सिर्फ चार सीटें ही मिलीं थीं। जबकि वह नौ सीटों पर दूसरे नंबर की पार्टी बनी थी। बसपा जिन सीटों पर नबंर दो पर रही थी ये श्योपुर,सुमावलीमुरैना,भिंड,महाराजपुर,पन्ना,रामपुर बघेलान,सेमरियादेबतालाव तथा रीवा विधानसभा सीट हैं।

पहले उत्तरप्रदेश के चुनाव फिर एट्रोसिटी एक्ट का सवर्णों द्वारा किए जा रहे विरोध के बाद कांग्रेस इस नतीजे पर पहुंची है कि अनुसूचित जाति वर्ग मायावती का साथ छोड़ रहा है। कांग्रेस का अनुमान है कि यह वर्ग भाजपा से नाराज है। इस कारण वह ऐसे दल को वोट देना चाहेगा जो सरकार बना सकता है। तीनों हिन्दी भाषी राज्यों में बसपा अकेले अपने दम पर सरकार बनाने की स्थिति में नहीं है।

राजस्थान में कांग्रेस को लग रहा है कि हर पांच साल में होने वाले सत्ता परिवर्तन में वोटर इस बार भाजपा को विपक्ष में बैठाएंगे। जबकि छत्तीसगढ़ में माया-जोगी के गठबंधन को अनुसूचित जाति-जनजाति वर्ग के वोटर अभी विश्वास करने की स्थिति में नहीं है। वहीं सपा की स्थिति तीनों ही राज्यों में सिर्फ सांकेतिक ही मानी जा रही है। कांग्रेस में यह डर भी देखने को मिल रहा है कि कहीं हाथी सत्ता आने के सपने को कुचल न दे?

क्या अब कांग्रेस पर खीज उतार रहे हैं अखिलेश यादव,इच्छुक नेताओं को देंगे टिकट

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कांग्रेस से चुनावी समझौते की बात न बन पाने के बाद अब समाजवादी पार्टी के प्रमुख अखिलेश यादव ने चुनाव लड़ने के इच्छुक नेताओं के लिए अपने दरवाजे खोल दिए हैं। सोमवार को खजुराहो में हुई बैठक के बाद अखिलेश यादव ने कहा कि जो भी मध्यप्रदेश के विधानसभा चुनाव मैदान में उतरने की इच्छा के साथ उनके पास आता है तो वे जरूर टिकट देंगे। अखिलेश यादव के इस बयान को कोंग्रेसियों के लिए एक संदेश माना जा रहा है। राज्य में पिछले चुनावों में भी कांग्रेस के कई बागी समाजवादी पार्टी अथवा बहुजन समाज पार्टी का टिकट लेकर चुनाव मैदान में उतरे थे। अखिलेश यादव की अपील के बाद यह उम्मीद भी जताई जा रही है कि बसपा प्रमुख मायावती भी इस तरह का एलान कर सकतीं हैं।

उल्लेखनीय है कि कांग्रेस लगातार यह दावा करती रही है कि मध्यप्रदेश में वह बसपा और सपा के अलावा समान विचारधारा वाले दलों से मिलकर चुनाव लड़ना चाहती है। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष कमलनाथ ने कई बार कहा कि उनकी बसपा और सपा से समझौते की बातचीत चल रही है। लेकिन, कांग्रेस और सपा के बीच कोई अधिकृत टेबल टॉक नहीं हुई। अखिलेश यादव की समाजवादी पार्टी का कोई बड़ा जनाधार राज्य में नहीं है। सपा ने अपना जनाधार बढ़ाने की गंभीर कोशिश भी कभी नहीं की। जबकि मध्यप्रदेश में तीसरे दल की जरूरत लगातार महसूस की जाती रही है। बहुजन समाज पार्टी में हमेशा ही विवाद के हालात रहे हैं। फूल सिंह बरैया के पार्टी छोड़ने के बाद बसपा की स्थिति कमजोर हुई है। बसपा ने भाजपा-कांग्रेस से नाराज नेताओं को टिकट देकर उनके निजी वोट बैंक का लाभ उठाया है।

मध्यप्रदेश विधानसभा चुनाव के लिए बसपा जल्द जारी कर सकती है दूसरी सूची।

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कांग्रेस के साथ गंठबंधन की अटकलों पर विराम लगकर 22 उम्मीदवारों की पहली सूची जारी करने के बाद मायावती जल्द ही उम्मीदवारों की दूसरी सूची जारी कर सकती है.सभी 230 विधानसभाओं पर चुनाव लड़ने की तैयारी के साथ बसपा ने मध्यप्रदेश में अपनी चुनावी तैयारी तेज कर दी है. 2013 में 4 विधानसभा सीटें जीतने वाली बसपा 2018 में अपनी स्तिथि को सुधारना चाहती है.

बसपा सुप्रीमो मायावती ने हाल ही में बसपा के प्रदेश प्रभारी रामअचल राजभर से चुनावी रणनीति और तैयारिओं पर चर्चा की और जिला स्टार पर समीक्षा बैठक बुलाने के निर्देश दिए.


विंध , बुंदेलखंड और ग्वालियर-चम्बल संभाग में दिख रही है बसपा को संभावनाएं।


सन 1990 से मध्यप्रदेश विधानसभा में पैर पसारने की कोशिश कर रही बसपा को विंद्य, बुंदेलखंड और ग्वालियर-चम्बल संभाग में काफी संभावनाएं दिख रही है. इन इलाकों में काफी काफी विधानसभाएं ऐसी है जहां बसपा विधानसभा चुनाव जीत चुकी है या उसके कुल वोटों की संख्या जीत-हार के अंतर से ज्यादा रही है.

प्रधानमंत्री जी से पूछिए तो कि वे भारत को विश्व गुरु बना रहे हैं या बेवकूफ बना रहे हैं ?

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स्वीस नेशनल बैंक ने अपनी सालाना रिपोर्ट में बताया है कि 2017 में उसके यहां जमा भारतीयों का पैसा 50 प्रतिशत बढ़ गया है। नोटबंदी के एक साल बाद यह कमाल हुआ है। ज़रूरी नहीं कि स्विस बैंक में रखा हर पैसा काला ही हो लेकिन काला धन नहीं होगा, यह क्लिन चिट तो मोदी सरकार ही दे सकती है। मोदी सरकार को यह समझदारी की बात तब नहीं सूझी जब ख़ुद नरेंद्र मोदी अपने ट्विटर हैंडल से ट्विट किया करते थे कि स्विस बैंक में जमा काला धन को वापस लाने के लिए वोट करें। ऑनलाइन वोटिंग की बात करते थे।

सरकार को बताना चाहिए कि यह किसका और कैसा पैसा है? काला धन नहीं तो क्या लीगल तरीके से भी भारतीय अमीर अपना पैसा अब भारतीय बैंकों में नहीं रख रहे हैं? क्या उनका भरोसा कमज़ोर हो रहा है? 2015 में सरकार ने लोकसभा में एक सख्त कानून पास किया था। जिसके तहत बिना जानकारी के बाहर पैसा रखना मुश्किल बताया गया था। जुर्माना के साथ साथ 6 महीने से लेकर 7 साल के जेल की सज़ा का प्रावधान था। वित्त मंत्री को रिपोर्ट देना चाहिए कि इस कानून के बनने के बाद क्या प्रगति आई या फिर इस कानून को कागज़ पर बोझ बढ़ाने के लिए बनाया गया था।

इस वक्त दो दो वित्त मंत्री हैं। दोनों में से किसी को भारतीय रुपये के लुढ़कने पर लिखना चाहिए और बताना चाहिए कि 2013 में संसद में जो उन्होंने भाषण दिया था, उससे अलग क्यों बात कर रहे हैं और उनका जवाब मनमोहन सिंह के जवाब से क्यों अलग है। एक डॉलर की कीमत 69 रुपये पार कर गई और इसके 71 रुपये तक जाने की बात हो रही है। जबकि मोदी के आने से 40 रुपये तक ले आने का ख़्वाब दिखाया जा रहा था।

ईरान पर अमरीकी प्रतिबंध को लेकर छप रही ख़बरों पर नज़र रखिए। क्या भारत अपनी ऊर्जा ज़रूरतों को पूरा करने के लिए स्वतंत्र राह पर चलेगा या अमरीका जिधर हांकेगा उधर जाएगा। टाइम्स आफ इंडिया की हेडिंग है कि निक्की हेले सख़्त ज़बान में बोल रही हैं कि ईरान से आयात बंद करना पड़ेगा। निक्की हेले संयुक्त राष्ट्र में अमरीकी राजदूत हैं और भारत की यात्रा पर हैं।

अमरीका चाहता है कि भारत ईरान से तेल का आयात शून्य पर लाए। ओबामा के कार्यकाल में जब ईरान पर प्रतिबंध लगा था तब भारत छह महीने के भीतर 20 प्रतिशत आयात कम कर रहा था मगर अब ट्रंप चाहते हैं कि एक ही बार में पूरा बंद कर दिया जाए।

इंडियन एक्सप्रेस में तेल मंत्री धर्मेंद्र प्रधान का बयान छपा है। आप इस बयान पर ग़ौर कीजिए जिसका मैंने एक्सप्रेस से लेकर अनुवाद किया है। ऐसा लगता है कि तेल मंत्री ही विदेश मंत्री हैं और इन्होंने ट्रंप को दो टुक जवाब दे दिया है। अगर ऐसा है तो प्रधानमंत्री या विदेश मंत्री को औपचारिक रूप दे देना चाहिए ताकि जनता को पता चले कि ईरान प्रतिबंध को लेकर भारत की क्या नीति है।

“पिछले दो साल में भारत की स्थिति इतनी मज़बूत हो चुकी है कि कोई भी तेल उत्पादक देश हमारी ज़रूरतों और उम्मीदों को नज़रअंदाज़ नहीं कर सकता है। मेरे लिए मेरा हित ही सर्वोपरि है और मैं जहां से चाहूंगा वहीं से भू-राजनीतिक स्थिति और अपनी ज़रूरतों के हिसाब से कच्चा तेल ख़रीदूंगा। हम जहां से चाहेंगे वहां से कच्चा तेल ख़रीदेंगे। ”

ये बयान है धर्मेंद्र बयान का। आपको हंसी आनी चाहिए। अगर दो साल में भारत की स्थिति मज़बूत हो गई है तो भारत साफ साफ क्यों नहीं कह देता है।

जबकि इसी एक्सप्रेस में इसी बयान के बगल में एक कालम की खबर लगी है कि तेल रिफाइनरियों को कहा गया है कि वे विकल्प की तलाश शुरू कर दें। उन्हें ये बात तेल मंत्रालय ने ही कही है जिसके मंत्री धर्मेंद्र प्रधान हैं। सूत्रों के हवाले से इस ख़बर में लिखा है कि तैयारी शुरू कर दें क्योंकि हो सकता है कि तेल का आयात बहुत कम किया जाए या फिर एकदम बंद कर दिया जाए।

इसके बरक्स आप मंत्री का बयान देखिए। साफ साफ कहना चाहिए कि जो अमरीका कहेगा हम वही करेंगे और हम वही करते रहे हैं। इसमें 56 ईंच की कोई बात ही नहीं है। आप रुपये की कीमत पर पोलिटिक्स कर लोगों को मूर्ख बना सकते हैं, बना लिया और बना भी लेंगे लेकिन उसका गिरना थोड़े न रोक सकते हैं। वैसे ही ट्रंप को सीधे सीधे मना नहीं कर सकते। ज़रूर भारत ने अमरीका से आयात की जा रही चीज़ों पर शुल्क बढ़ाया है मगर इस सूची में वो मोटरसाइकिल नहीं है जिस पर आयात शुल्क घटाने की सूचना खुद प्रधानमंत्री ने ट्रंप को दी थी। अब आप पोलिटिक्स समझ पा रहे हैं, प्रोपेगैंडा देख पा रहे हैं?

बिजनेस स्टैंडर्ड के पेज छह पर निधि वर्मा की ख़बर छपी है कि भारत ईरान से तेल आयात को शून्य करने के लिए तैयार हो गया है। आप ही बताइये क्या इतनी बड़ी ख़बर भीतर के पेज पर होनी चाहिए थी? इस खबर में लिखा है कि तेल मंत्रालय ने रिफाइनरियों को कहा है कि वैकल्पिक इंतज़ाम शुरू कर दें। यह पहला संकेत है कि भारत सरकार अमरीका की घुड़की पर हरकत करने लगी है।

भारत ने कह चुका है कि वह किसी देश की तरफ से इकतरफा प्रतिबंध को मान्यता नहीं देता है। वह संयुक्त राष्ट्र के प्रतिबंध का ही अनुसरण करता है। लेकिन जब यह कहा है कि तो फिर इस बात को तब क्यों नहीं दोहराया जा रहा है जब निक्की हेली दिल्ली आकर साफ साफ कह रही हैं कि ईरान से आयात को शून्य करना पड़ेगा।

हिन्दी अखबारों में ये सब जानकारी नहीं मिलेगी। मेहनत से आप तक लाता हूं ताकि आप इन्हें पढ़ते हुए देश दुनिया को समझ सकें। ज़रूरी नहीं कि आप भक्त से नो भक्त बन जाएं मगर जान कर भक्त बने रहना अच्छा है, कम से कम अफसोस तो नहीं होगा कि धोखा खा गए।

अब देखिए, मूल सवालों पर चर्चा न हो इसलिए सरकार या भाजपा का कोई न कोई नेता इतिहास के गड़े मुर्दे उखाड़ लाता है। वो भी ग़लत सलत। तू तू मैं मैं की पोलिटिक्स चलाने के लिए। हर दिन आप चैनल खोल कर खुद से देख लें, पता चलेगा कि देश कहां जा रहा है। जिन नेताओं के पास जनता की समस्या पढ़ने और निराकरण का वक्त नहीं है, वो अचानक ऐसे बयान दे रहे हैं जैसे सुबह सुबह उठते ही इतिहास की एक किताब ख़त्म कर लेते हैं। उसमें भी गलत बोल देते हैं।

अब देखिए प्रधानमंत्री मगहर गए। कबीर की जयंती मनाने। वहां भाषण क्या दिया। कितना कबीर पर दिया और कितना मायावती अखिलेश पर दिया, इससे आपको पता चलेगा कि उनके लिए कबीर का क्या मतलब है। जब खुद उनकी पार्टी मज़ार मंदिर जाने की राहुल गांधी की राजनीति की आलोचना कर चुकी है तो इतनी जल्दी तो नहीं जाना चाहिए था। जब गए तो ग़लत सलत तो नहीं बोलना था।

मगहर में प्रधानमंत्री ने कहा कि ” ऐसा कहते हैं कि यहीं पर संत कबीर, गुरु नानक देव जी और गुरु गोरखनाथ एक साथ बैठकर आध्यात्मिक चर्चा करते थे” जबकि तीनों अलग अलग सदी में पैदा हुए। कर्नाटक में इसी तरह भगत सिंह को लेकर झूठ बोल आए कि कोई उनसे मिलने नहीं गया।

आप सोचिए, जब प्रधानमंत्री इतना काम करते हैं, तो उनके पास हर दूसरे दिन भाषण देने का वक्त कहां से आता है। आप उनके काम, यात्राओं और भाषण और भाषणों में ग़लत सलत तथ्यों को ट्रैक कीजिए, आपको दुख होगा कि जिस नेता को जनता इतना प्यार करती है, वो नेता इतना झूठ क्यों बोलता है। क्या मजबूरी है, क्या काम वाकई कुछ नहीं हुआ है।

आज नहीं, कल नहीं, साठ साल बाद ही सही, पूछेंगे तो सही। कबीर, नानक और गोरखनाथ को लेकर ग़लत बोलने की क्या ज़रूरत है। क्या ग़लत और झूठ बोलने से ही जनता बेवकूफ बनती है? क्या भारत को विश्व गुरु बनाने की बात करने वाले मोदी भारत को बेवकूफ बनाना चाहते हैं?

Live: बसपा सुप्रीमो मायावती की जेडीएस को सलाह, कांग्रेस के साथ मिलकर बनाए सरकार।

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bsp chief mayawati

Live Update: बीएसपी प्रमुख मायावती ने कर्नाटक में अपने गठबंधन सहयोगी जेडीएस के नेता एचडी देवगौड़ा से बात कर उन्हें सलाह दी है कि जेडीएस और कांग्रेस साथ मिलकर कर्नाटक में सरकार बनाएं

बीजेपी जितनी चाहे कोशिश कर ले, नही टूटेगा सपा-बसपा का गठबंधन : मायावती

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यूपी में हुए राज्यसभा चुनाव के नतीजों के बाद शनिवार को बीएसपी सुप्रीमो मायावती ने मीडिया को संबोधित करते हुए कहा कि बीजेपी ने राज्यसभा चुनाव में सरकारी मशीनरी और धनबल का जमकर इस्तेमाल किया। 
मायावती ने आगे कहा कि ‘बीजेपी ने राज्यसभा चुनाव जीतने के लिए अपनी पूरी ताकत लगा दी ताकि एसपी और बीएसपी के बीच दोबारा दूरी बढ़ जाए। हम बीजेपी के इन मंसूबों को कामयाब नहीं होने देंगे’ 


अपने इस बयान से मायावती ने साफ कर दिया कि समाजवादी पार्टी के साथ उनकी पार्टी का गठबंधन जारी रहेगा और राज्यसभा चुनाव के नतीजों इस पर कोई असर नहीं पड़ा है।
मायावती ने आगे कहा कि ‘गोरखपुर और फूलपुर में बीजेपी को मिली करारी हार को भूलाया नहीं जा सकता है, चाहे इसके लिए वह जितनी भी कोशिश कर ले। मोदी और योगी की परंपरागत सीट पर 28 साल बाद जो धब्बा लगा है, वह इस अनैतिक जीत से धुलने वाले नहीं है’

भाजपा के राष्ट्रपति उम्मीदवार घोषित करने के बाद आया नीतीश कुमार और मायावती का बड़ा बयान !

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भाजपा द्वारा बिहार के राज्यपाल रामनाथ कोविंद को राष्ट्रपति उम्मीदवार घोषित करने के बाद सबकी निगाहें विपक्ष पर टिकी हुई है . दलित कार्ड खेलकर बीजेपी ने विपक्ष को तगड़ा झटका दिया है . इसके बाद सभी यह जानना चाहते है कि आखिर रामनाथ कोविंद को राष्ट्रपति उम्मीदवार बनने पर विपक्षी दलों की क्या राय है ?

बात करें बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की तो रामनाथ कोविंद की उम्मीदवारी पर नीतीश कुमार का कहना है कि –

रामनाथ जी ने बिहार के गवर्नर के रूप में काफी अच्छा काम किया है . बिना किसी भेदभाव के रामनाथ जी ने राज्य सरकार के साथ अच्छा काम किया है . समर्थन करना है या नही इस पर बात करने के लिए यह बहुत जल्दी होगी .

रामनाथ कोविंद को राष्ट्रपति उम्मीदवार बनने पर मायावती का कहना है कि –

रामनाथ कोविंद एक दलित है इसलिए हम उनके नाम पर सकारात्मक है , लेकिन अगर विपक्ष कोई दूसरा दलित उम्मीदवार मैदान उतरता है तो हम विपक्ष के साथ जा सकते है .

ममता बनर्जी का कहना है कि

विपक्ष की मीटिंग 22 जून को होनी है . इसके बाद ही हम किसी निर्णय पर पहुंच सकते है .

वही  कम्युनिस्ट पार्टी की ओर से सीताराम येचुरी का कहना है कि ..

वहीं कांग्रेस की ओर से बोलते हुए ग़ुलाम नबी आजाद ने कहा कि हम इस फैसले ले ऊपर अभी कोई टिप्पणी नही करने वाले है . 22 जून को विपक्ष की बैठक के बाद ही कोई फैसला लिया जाएगा.