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विपक्ष के नेताओं और मुख्यमंत्रियों को ममता का पत्र, मोदी सरकार पर केंद्रीय एजेंसियों के गलत इस्तेमाल का लगाया आरोप

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पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने विपक्षी नेताओं और मुख्यमंत्रियों को पत्र लिखकर केंद्रीय सरकार द्वारा एजेंसियों के गलत पर चिंता व्यक्त की है।

तृणमूल कांग्रेस अध्यक्ष ममता ने मोदी सरकार पर आरोप लगाया कि केंद्र अपने विरोधियों को निशाना बनाने और उन्हें घेरने के लिए ईडी, सीबीआई, सीवीसी और आयकर विभाग जैसी एजेंसियों का इस्तेमाल कर रहा है।

सीएम बनर्जी ने अपने पत्र में लिखा, “हम शासन में पारदर्शिता और जवाबदेही में विश्वास करते हैं, लेकिन हम भाजपा की इस राजनीति को बर्दाश्त नहीं करेंगे।”

ममता ने आगे कहा कि भाजपा न्यायपालिका के एक निश्चित वर्ग को प्रभावित करने की कोशिश करके “इस देश के संघीय ढांचे” पर बार-बार हमला करने की कोशिश कर रही है।

प्रचार-प्रसार में व्यस्त मोदी सरकार ने वैक्सीन उत्पादन/रिसर्च पर नही किया 1 पैसा खर्च

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कोरोना महामारी के कारण जहां हर रोज हजारों लोगों की मौत हो रही है तो वहीं सरकार द्वारा मीडिया के माध्यम से ऐसा प्रचार-प्रसार किया जा रहा है जैसे वैक्सीन भारत सरकार के नेतृत्व में ही बन रही है। वहीं केंद्र सरकार द्वारा सुप्रीम कोर्ट में दिए गए हलफनामे में यह स्वीकार किया कि उसने वैक्सीन के विकास में एक पैसा भी नहीं लगाया।

सरकार में कोर्ट ने बताया कि यह वैक्सीन ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी और दवा निर्माता कंपनी एस्ट्राजेनेका के अनुसंधान से बनी।

भारत मे दो कोरोना वैक्सीन को अनुमति मिली है। जिसमें  पुणे का सीरम इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया (एसआईआई) कोविशील्ड बनाता है और हैदराबाद की भारत बायोटेक कोवैक्सीन का निर्माण करती है।

वैक्सीन का श्रेय लेने के लिए सरकार ने किया प्रचार


मोदी सरकार ने बिना कोई दावा किए कुछ ऐसी छवि बनाने की कोशिश की जैसे भारत सरकार ही सब कुछ कर रही है। यह धारणा 28 नवंबर 2020 से ही बनने लगी थी जिस दिन प्रधानमंत्री मोदी ने पुणे जाकर सीरम इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया और हैदराबाद जाकर भारत बायोटेक लैब का दौरा व निरीक्षण किया था।

प्रमाणपत्र में भी लगाई तस्वीर


टीका लगने के बाद मिलने वाले प्रमाणपत्र पर प्रधानमंत्री मोदी का चित्र रहने से यह धारणा और मजबूत हो गई कि वैक्सीनें केंद्र सरकार के नेतृत्व में निर्मित की जा रही हैं। किसी ने इस भ्रांति का खंडन भी नहीं किया और सरकार में बैठे मंत्री, सांसद और भाजपा नेता भी इस धारणा को मजबूत करने वाले बयान देते चले गए।


अंतरराष्ट्रीय स्तर पर हो रही आलोचना

मोदी सरकार की वैक्सीन पॉलिसी की अंतरराष्ट्रीय स्तर पर आलोचना की जा रही है। ब्रिटिश अखबार ‘गार्जियन’ ने लिखा कि जब अमेरिका और पश्चिम यूरोप के देश कोरोना से बचाव की वैक्सीन विकसित करने के लिए अरबों डॉलर लगा रहे थे, तब भारत ने सीरम इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया को कोई मदद नहीं दी। ‘गार्जियन’ की रिपोर्ट सही होने की पुष्टि 11 मई को केंद्र सरकार द्वारा सुप्रीम कोर्ट में दिए गए हलफनामे से हो गई। सरकार ने स्पष्ट शब्दों में कोर्ट को बताया कि उसने पुणे के सीरम इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया और हैदराबाद के भारत बायोटेक को वैक्सीन रिसर्च के लिए कोई रकम नहीं दी। सीरम इंस्टीट्यूट को क्लीनिकल ट्रायल के लिए भी कोई रकम नहीं दी गई।

6 करोड़ से ज्यादा वैक्सीन कर दी निर्यात

मोदी सरकार की आलोचना इस बात पर भी हो रही है कि देश में जहां कोरोना के केस बढ़ रहे थे तो वहीं सरकार ने 6 करोड़ से ज्यादा वैक्सीन दुनिया के दर्जनों देशों को निर्यात कर दिए और कुछ को मुफ्त में भी दिए। ऐसे में सवाल उठता है कि क्या पहली लहर खत्म होने के बाद सरकार निश्चिंत हो गई थी कि अब देश में टीके की जरूरत नहीं पड़ेगी?

इस समय भी कई देशों के पास करोड़ों टीकों का भंडार भरा हुआ है लेकिन वे उन्हें भारत को देने में आनाकानी कर रहे हैं। जो टीका 100-150 रुपए का बनता है, उसे रूस जैसा मित्र देश भारत को 1000 रुपए में बेच रहा है। भारत में 18 करोड़ लोगों को टीका लग चुका है जो दुनिया में सबसे ज्यादा है लेकिन 135 करोड़ की आबादी वाले हमारे देश को अभी बहुत अधिक वैक्सीन की जरूरत है। यह कहा जा रहा है कि इतने लोगों का टीकाकरण होने में कम से कम 2 वर्ष लग जाएंगे। इसलिए भी वैक्सीन की दूसरी डोज को लेने की अवधि बढ़ाई गई। टीका बनाने के लिए कई कंपनियों को लाइसेंस देने का सुझाव दिया जा रहा है लेकिन क्या ऐसी कंपनियों को सरकार अथवा पीएम केयर्स फंड से वित्तीय मदद मिलेगी?

पीएम मोदी को राहुल गांधी का खत, आपकी विफलता के कारण आई कोरोना की सुनामी, दिए यह सुझाव

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rahul gandhi corona scam
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राहुल गांधी ने शुक्रवार को पीएम मोदी को पत्र लिखकर सरकार की विफलता को कोरोना महामारी को कारण बताया। साथ ही राहुल ने सरकार से आग्रह किया कि कोरोना वायरस के सभी स्वरूपों का वैज्ञानिक तरीकों से पता लगाने के साथ ही पूरी दुनिया को इस बारे में अवगत कराया जाए तथा सभी भारतीय नागरिकों को जल्द से जल्द टीका लगाया जाए।

गरीबों की तुरंत करें आर्थिक मदद

राहुल गांधी ने कहा कि सरकार की ‘विफलता’ के कारण देश एक बार फिर से राष्ट्रीय स्तर के लॉकडाउन के मुहाने पर खड़ा हो गया है। ऐसे में गरीबों को तत्काल आर्थिक मदद दी जाए ताकि उन्हें पिछले साल की तरह पीड़ा से नहीं गुजरना पड़े। पत्र में राहुल गांधी ने कहा, ‘‘मैं आपको एक बार फिर पत्र लिखने के लिए विवश हुआ हूं क्योंकि हमारा देश कोविड सुनामी की गिरफ्त में बना हुआ है।


देश की पीड़ा को समझें पीएम मोदी: राहुल गांधी

कांग्रेस नेता ने कहा कि  इस तरह के अप्रत्याशित संकट में भारत के लोग आपकी सबसे बड़ी प्राथमिकता होने चाहिए। मैं आपसे आग्रह करता हूं कि आप देश के लोगों को इस पीड़ा से बचाने के लिए जो भी संभव हो, वह करिए।’’उन्होंने कहा कि दुनिया के हर छह लोगों में से एक व्यक्ति भारतीय है। 

कोरोना को लेकर राहुल ने जताई चिंता

पत्र में राहुल ने कहा कि इस महामारी से अब यही पता चला है कि हमारा आकार, आनुवांशिक विविधता और जटिलता से भारत में इस वायरस के लिए बहुत ही अनुकूल माहौल मिलता है कि वह अपने स्वरूप बदले तथा अधिक खतरनाक स्वरूप में सामने आए। मुझे डर इस बात का है कि जिस ‘डबल म्यूटेंट’ और ‘ट्रिपल म्यूटेंट’ को हम देख रहे हैं, वह शुरुआत भर हो सकती है। उनके मुताबिक, इस वायरस का अनियंत्रित ढंग से प्रसारित होना न सिर्फ हमारे देश के लोगों के लिए घातक होगा, बल्कि शेष दुनिया के लिए भी होगा।


केंद्र पर लगाए कई आरोप
कांग्रेस नेता ने  प्रधानमंत्री को सुझाव दिया, ‘‘इस वायरस एवं इसके विभिन्न स्वरूपों के बारे में वैज्ञानिक तरीके से पता लगाया जाए। सभी नए म्यूटेशन के खिलाफ टीकों के असर का आकलन किया जाए। सभी लोगों को तेजी से टीका लगाया जाए। पारदर्शी रहा जाए और शेष दुनिया को हमारे निष्कर्षों के बारे में अवगत कराया जाए।’’राहुल गांधी ने आरोप लगाया कि केंद्र सरकार के पास कोविड के खिलाफ टीकाकरण को लेकर कोई स्पष्ट रणनीति नहीं हैं और सरकार ने उसी समय इस महामारी पर विजय की घोषणा कर दी जब यह वायरस फैल रहा था।


राहुल गांधी ने दिया गरीबों की मदद का सुझाव
कांग्रेस नेता ने प्रधानमंत्री से आग्रह किया कि इस स्थिति को देखते हुए कमजोर तबकों के लोगों को वित्तीय मदद और खाद्य सामाग्री उपलब्ध कराई जाए ताकि लॉकडाउन के कारण गरीबों को उस पीड़ा को न झेलना पड़े जो उन्हें पिछले साल के लॉकडाउन के समय झेलनी पड़ी थी। उन्होंने कोरोना महामारी के खिलाफ लड़ाई में पूरे सहयोग का भरोसा दिलाते हुए कहा कि इस संकटकाल में विभिन्न पक्षों को विश्वास में लिया जाए ताकि सब मिलकर भारत को सुरक्षित रखने के लिए काम कर सकें।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में केंद्रीय मंत्रिपरिषद की बैठक संपन्न, कई अहम मुद्दों पर हुई चर्चा

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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी(Narendra Modi) ने आज देश में तेजी से बढ़ते कोरोना वायरस संक्रमण के मामलों के बीच केंद्रीय मंत्रिपरिषद(Cabinet Meeting) की बैठक की अध्यक्षता की। कोरोना वायरस संक्रमण की दूसरी लहर के बाद पहली बैठक है जिसकी अध्यक्षता प्रधानमंत्री ने की है।

बैठक के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी वैश्विक महामारी और इससे निपटने के तरीकों और टीकाकरण पर चर्चा कर सकते हैं। क्योकि कल 1 मई से देश में 18 साल से अधिक आयु के लोग टीकाकरण के लिए पात्र हो जाएंगे।

आपको बता दें कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी इसके पहले राज्यों के मुख्यमंत्रियों के साथ बैठक कर चुके हैं और उनके सुझाव ले चुके हैं।

इसके अलावा उन्होंने उन राज्यों के मुख्यमंत्रियों से भी अलग से चर्चा की थी जिन राज्यों में संक्रमण की दर बहुत तेजी से बढ़ रही है। इसके साथ ही प्रधानमंत्री दवाओं की हो रही अनुपलब्धता और किल्लत पर भी वरिष्ठ अधिकारियों को निर्देशित कर चुके हैं।

देशभर में 551 ऑक्सीजन प्लांट बनाएगी मोदी सरकार

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देश में बढ़ते कोरोना संक्रमण के कारण होने वाली मेडिकल ऑक्सीजन की कमी को दूर करने के लिए केंद्र की मोदी सरकार ने बड़ा फैसला किया है।

ऑक्सीजन संकट को दूर करने के उद्देश्य से सरकार देशभर में 551 ऑक्सीजन प्लांट बनाने की योजना बनाई है।

इन सभी का निर्माण PM केयर्स फंड के जरिए सरकारी अस्पतालों में किया जाएगा। प्रधानमंत्री कार्यालय से मिली जानकारी के अनुसार अस्पतालों में ऑक्सीजन की उपलब्धता बढ़ाने के लिए PM केयर्स फंड ने सार्वजनिक स्वास्थ्य सुविधाओं में 551 डेडिकेटेड प्रेशर स्विंग ऐड्सॉर्प्शन मेडिकल ऑक्सीजन जेनरेशन प्लांट लगाने के लिए फंड के आवंटन की मंजूरी दे दी है।

भाई को बेड ना मिलने पर छलका केंद्रीय मंत्री वीके सिंह का दर्द

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मोदी सरकार(modi government) के सड़क राजमार्ग राज्यमंत्री वीके सिंह(VK Singh) का दर्द उनके भाई को कोरोना संक्रमित होने और बेड की व्यवस्था न होने के कारण छलक कर सामने आ गया।

दरअसल केंद्रीय मंत्री विजय कुमार सिंह(वीके सिंह) के भाई को कोरोनावायरस है उन्हें गाजियाबाद में बेड नहीं मिल पा रहा था जिससे परेशान होकर केंद्रीय मंत्री ने परेशान होकर ट्विटर पर गाजियाबाद कलेक्टर को टैग करने मदद करने की गुहार लगाई लेकिन कलेक्टर ने उनका जवाब देना तक मुनासिब नहीं समझा।

केंद्रीय मंत्री का वह ट्वीट तो अब डिलीट कर दिया गया



जब यह बात सोशल मीडिया पर वायरल हुई तो लोगों ने केंद्रीय मंत्री को नसीहत देते हुए लिखा कि आप खुद पूर्व सेना प्रमुख रहे हैं अगर आप के भाई को बेड नहीं मिल पा रहा है गाजियाबाद प्रशासन आपके लिए सुन रहा है जबकि आप गाजियाबाद से सांसद भी हैं तो आम आदमी की क्या हालत होगी?

ट्वीट वायरल होते ही युवक कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष वी वी श्रीनिवास ने रिटायर्ड जनरल वीके सिंह से पेशेंट की डिटेल भेजने की गुजारिश की साथ ही उन्होंने कहा कि आप हमें डिटेल भेज दीजिए हम आपके भाई को बेड की उपलब्धता करवाने की पूरी कोशिश करेंगे।

Youth Congress के राष्ट्रीय अध्यक्ष वी व्ही श्रीनिवास का ट्वीट

उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के मीडिया सलाहकार सलभमणि त्रिपाठी ने भी गाजियाबाद डीएम को निर्देशित करते हुए लिखा कि जिलाधिकारी इस पर संज्ञान लें और आवश्यक कार्यवाही करें।

UP के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के मीडिया सलाहकार

ट्वीट ज्यादा वायरल होते ही उत्तर प्रदेश सरकार और मोदी सरकार हरकत में आई और जनरल वीके सिंह को ट्वीट डिलीट करने के लिए निर्देशित कर दिया जिस पर उन्होंने ट्वीट डिलीट कर दिया लेकिन तब तक तो पूरे देश के पास उनके ट्वीट का स्क्रीनशॉट फैल चुका था अब जनरल साहब ने किसी अनजान व्यक्ति से ट्वीट करा कर लिखा है कि गाजियाबाद डीएम इनके भाई को बेड दिलवाए।

हर पल बदतर हो रहे दिल्ली के हालात, केजरीवाल ने लिखा मोदी को पत्र

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कोरोना की दूसरी लहर से इस समय पूरा भारत जूझ रहा है। वहीं संक्रमण के मामले में दिल्ली भी पीछे नहीं है। शनिवार को बीते 24 घंटे में कोरोना के 24,375 नए मामले सामने आए। एक दिन में सबसे ज्यादा संक्रमित मिलने का ये अब तक का सबसे बड़ा आंकड़ा है। बीते 24 घंटे में 167 लोगों ने कोरोना से जान भी गंवाई है। अब तक की मौत का का सबसे बड़ा आंकड़ा है।

इस बीच राज्य के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने प्रेस कॉन्फ्रेंस की। इसके बाद केजरीवाल ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को दिल्ली में कोविड-19 की स्थिति के बारे में पत्र लिखा है। उन्होंने कोविड संक्रमित रोगियों के लिए केंद्रीय सरकार के 10,000 बिस्तरों में से 7,000 बिस्तरों और ऑक्सीजन के लिए आरक्षण की अपील की है।

प्रेस कॉन्फ्रेंस में केजरीवाल ने कहा कि पिछले 24 घंटों में दिल्ली में कोरोना की संक्रमण दर 24% से बढ़कर 30% हो गई। 100 से कम ICU बेड बचे हैं और ऑक्सीजन की कमी है। मैंने डॉ. हर्षवर्धन से कल और अमित शाह जी से आज सुबह बेड की कमी के बारे में बात की और उन्‍हें बताया कि हमें इसकी जरूरत है।

केजरीवाल ने आगे कहा कि पिछले 24 घंटों में दिल्ली में लगभग 25,000 कोविड-19 मामले सामने आए। दिल्ली में 10,000 बेड हैं, जो कि सेंट्रल गवर्नमेंट के हैं। जिनमें से 1,800 बेड वर्तमान में कोविड मरीजों के लिए आरक्षित हैं। मैं अनुरोध करता हूं कि कोविड मामलों के मद्देनजर 10,000 बेड में से 7,000 कोविड मरीजों के लिए आरक्षित किए जाएं।

उन्होंने कहा कि हम अगले 2-3 दिनों में यमुना स्पोर्ट्स कॉम्प्लेक्स में 6,000 से अधिक हाई फ्लो ऑक्सीजन बेड लगाएंगे। राष्ट्रमंडल खेल गांव और कुछ स्कूलों को भी कोविड केंद्रों में बदल दिया जाएगा और राधा स्वामी सत्संग ब्यास में कोविड सुविधा फिर से शुरू की जाएगी।

गुजरात मॉडल की उड़ी धज्जियाँ, सूरत में एक चिता पर जलाई जा रहीं 5 लाशें

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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ड्रीम प्रोजेक्ट गुजरात मॉडल (Gujarat Model) की धज्जियाँ उन्ही के राज्य के आला अधिकारियों द्वारा उड़ाई जा रही हैं। मामला गुजरात मे कोरोना संक्रमण (Covid-19) से होने वाली मौतों से जुड़ा हुआ है।

देश के अन्य प्रदेशों की तरह गुजरात मे भी कोरोना संक्रमण तेजी से फैल रहा है। हालात बद से बदतर होते जा रहे हैं लेकिन सरकार इस ओर ध्यान नही दे पा रही यही कारण है आये दिन संक्रमित मरीजों की संख्या में वृद्धि हो रही है।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने जिस गुजरात मॉडल को पूरे देश मे लागू करने के दम पर 2014 के आम चुनावों में विजय पाई थी आज कोरोना संक्रमण ने उसकी परत दर परत खोलकर रख दी है। प्रदेश में कोरोना से लगातार मौतें हो रही हैं लेकिन शासन प्रशासन के अधिकारी ‘आपदा में अवसर’ तलाश रहे हैं।

गुजरात के वडोदरा स्थिति एक अस्पताल में पिछले नौ दिनों में 180 लोगों की मौत हुई हैं।सूरत,वडोदरा,अहमदाबाद और राजकोट के नगर निगमों द्वारा जारी किए गए बुलेटिन के आंकड़े देखें तो रोज महज 25 मौतों का दावा किया जा रहा है जबकि मृत्युदर का आंकड़ा लगातार बढ़ रहा है।

सूरत के एक श्मशान घाट में तो बुधवार की रात अति हो गई जब बढ़ती लाशों को कम करने के लिए अधिकारियों ने एक ही चिता पर पांच लाशें जलवा दी। इसके पीछे तर्क दिया गया चूंकि श्मशान घाट में लाशों की संख्या अधिक है इसलिए सामूहिक दाह करने में समय कम लगेगा और दाह संस्कार जल्दी हो जाएगा। यह हाल सिर्फ सूरत का नहीं है पूरे गुजरात के श्मशान घाटों का यही हाल है।

पूरे गुजरात मे कोई भी ऐसा श्मशान घाट नही है जो 24 घंटे न सुलगता हो इतने के बाद भी लाशों की कतारें कम नही हो रही। अधिकांश लाशें कोरोना वायरस से संक्रमित व्यक्तियों की आ रही है। लेकिन अधिकारी यहाँ भी बेहतर स्वास्थ्य सुविधाओं का दम्भ भरती सरकार की हां में हां मिलाते हुए चालबाजी करके सरकारी आंकड़ों में कम मौत दर्ज कर रहे हैं।

18 फ़ीट लम्बी और 8 फिट चौड़ी है सामूहिक चिता

सूरत नगर निगम के गुरुवार को जारी आंकड़े में 25 मौतें दिखाई गईं हैं जबकि स्वास्थ्य विभाग ने कहा कि ‘यह सच है कि सरकारी आंकड़ों में कोरोना की मौतें कम दिखाई जा रही हैं।’ सूरत में, एक बार में पांच शवों को जलाने के लिए 18 फीट लम्बी और आठ फीट चौड़ी चिता बनाई गई है। इसमें एक साथ शवों को कुछ-कुछ दूरी पर रखकर जलाया जा रहा है।

सोनिया गांधी का मोदी सरकार पर हमला,बोली देश ने ऐसी निरंकुश,संवेदनहीन और निष्ठुर सरकार नहीं देखी

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अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी की कार्यकारी अध्यक्ष सोनिया गांधी ने मोदी सरकार पर बड़ा हमला बोलते हुए सरकार को निष्ठुर निरंकुश और संवेदनहीन बताया है।

सोनिया गांधी ने कहा कि देश में ऐसी सरकार कभी नहीं देखी जिस के राज में 44 दिन से अन्नदाता हैरान-परेशान दिल्ली की सड़कों पर जमा है और सरकार के कान पर जूं तक नहीं रेंग रही है

देश में बढ़ रही महंगाई,बेरोजगारी पर गांधी ने कहा कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल की कीमतें अपने निम्नतम स्तर पर है तब यह सरकार देश के मध्यम वर्ग और कृषक वर्ग ₹84 लीटर का पेट्रोल बेच रही है जो 73 सालों में सबसे अधिक है

गांधी ने कहा कि यह सरकार अपने पूंजीपति दोस्तों स्वयं का खजाना भरने का काम कर रही है आज देश की कमर तोड़ महंगाई ने देशवासियों को सड़क पर लाकर खड़ा कर दिया है लेकिन उससे निपटने के बजाय यह सरकार अपने चंद पूंजीपतियों दोस्तों को खुश करने में लगी हुई है।

गांधी ने सरकार से मांग करते हुए कहा कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल की कीमत भारत के मुद्रा के हिसाब से ₹23.62 पैसे के लगभग है इस कीमत पर सरकार को तेल बेचना चाहिए साथ ही घरेलू रसोई गैस सिलेंडर की जो कीमत यूपीए सरकार के समय थी उसी कीमत पर आम जनता को यह चीजें उपलब्ध कराई जाएं।