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लोकसभा चुनाव के पहले दिल्ली के जंतर-मंतर पर किसान करने जा रहे बड़ा प्रदर्शन

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मोदी सरकार द्वारा किसानों को रिझाने के हर प्रयास फेल होते नजर आ रहे हैं। जिसके कारण किसानों का मोदी सरकार के प्रति आक्रोश भी लगातार बढ़ता जा रहा है। अंतरिम बजट के सहारे मोदी सरकार ने किसानों को रिझाने का एक अंतिम प्रयास भी कर लिया है लेकिन इसका भी कोई खास असर होता नही दिख़ रहा है। सरकार से नाराज किसान अब अपने जमीन अधिग्रहण में उचित मुआवजे की मांग को लेकर दिल्ली में कूच करने जा रहे हैं। वह 7 फरवरी तक जंतर-मंतर पर प्रदर्शन करेंगे।

किसानों के आंदोलन को देखते हुए शुक्रवार को नोएडा और ग़ाजियबाद को दिल्ली से जोडऩे वाले डीएनडी फ्लाईवे को कुछ देर के लिए बंद करना पड़ा। सहायक पुलिस अधीक्षक डॉक्टर कौस्तुभ ने बताया कि अलीगढ़, आगरा, हाथरस, बुलंदशहर गौतम बुद्ध नगर आदि जगहों के किसान प्रधानमंत्री आवास का घेराव करने के लिए डीएनडी के रास्ते दिल्ली जा रहे थे। दिल्ली पुलिस ने उन्हें डीएनडी पर रोक दिया जिससे दिल्ली व नोएडा में जगह-जगह जाम लग गया।

शुक्रवार की शाम को दिल्ली-नोएडा फ्लाईवे पर किसानों ने जाम लगा दिया। किसानों की मांग है कि सरकार 2013 में पारित भूमि अधिग्रहण विधेयक के तहत भूमि ले। डीएनडी पर जाम होने की वजह से लोगों ने दूसरा रास्ता अपनाया जिससे अन्य रास्तों में भी जाम लग गया। बढ़ती भीड़ के चलते तात्कालिक रूप से रास्तों को डायवर्ट भी किया गया और यात्रा परामर्श भी जारी किया गया।

कुंभ में आयाजित धर्म संसद में सरकार से नाराज संतो ने लिया बड़ा फैसला

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प्रयागराज में कुंभ के बीच चल रही संतों की धर्म संसद में संतों ने ऐलान किया गया है कि संत समाज के लोग अगले महीने प्रयाग से अयोध्या के लिए कूच करेंगे। ‘परमधर्म संसद’ की ओर से जारी की गई प्रेस रिलीज में कहा गया है कि मंदिर निर्माण के लिए 21 फरवरी की तारीख तय की गई है। कोर्ट के रवैये पर नाराजगी जताते हुए कहा गया है कि खेद का विषय है कि कुत्ते तक को तत्काल न्याय दिलाने वाले राम के देश में रामजन्मभूमि के मुकदमे को न्याय नहीं मिल रहा है।

पीएम मोदी के इंटरव्यू का जिक्र करते हुए धर्मसंसद ने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी ने अपने साक्षात्कार में कहा है कि न्याय की प्रक्रिया पूरी होने के बाद जब उनकी बारी आएगी तो वह अपनी भूमिका निभाएंगे। वह अपने वचन पर स्थिर नहीं रह सके और उन्होंने रामजन्मभूमि विवाद की न्याय प्रक्रिया में हस्तक्षेप करते हुए सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर करवाई है, जिसमें गैर-विवादित जमीन को उसके मालिकों को लौटाने की बात कही गई है। याचिका में कहा गया है कि 48 एकड़ भूमि रामजन्मभूमि न्यास की है जबकि सच्चाई यह है कि एक एकड़ भूमि के अलावा सारी जमीन उत्तर प्रदेश सरकार की है, जो रामायण पार्क के लिए अधिगृहीत की गई थी।’

गोली खानी पड़े या जेल जाना पड़े, हम तैयारः स्वरूपानंद सरस्वती

धर्म संसद की अगुवाई कर रहे शंकराचार्य स्वरूपानंद सरस्वती की ओर से जारी बयान में कहा गया है, ’हम सविनय अवज्ञा आंदोलन के इस पहले चरण में हिंदुओं की मनोकामनाओं की पूर्ति के लिए 21 फरवरी 2019 की तारीख तय की गई है। बसंत पंचमी के बाद हम प्रयागराज से अयोध्या के लिए प्रस्थान करेंगे। उसके लिए हमें अगर गोली भी खानी पड़ी या जेल भी जाना पड़े तो हम प्रस्तुत हैं। अगर इस काम में सत्ता के तीन अंगों में से किसी के द्वारा अवरोध डाला गया तो हम संपूर्ण हिंदू जनता को धर्मादेश जारी करते हैं कि जबतक मंदिर निर्माण नहीं हो जाता, तबतक हर हिंदू का यह कर्तव्य होगा कि वह गिरफ्तारी देनी हो तो गिरफ्तारी दें। यह आंदोलन तबतक चलेगा जबतक रामजन्मभूमि हिंदुओं को सौंप नहीं दी जाती और उस पर हम मंदिर का निर्माण नहीं कर लेते।

बेरोजगारी के आंकड़ें दबाकर बैठी मोदी सरकार, 2 अधिकारियों ने दिया इस्तीफा।

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राष्ट्रीय सांख्यिकी आयोग (एनएससी) के दो सदस्यों के इस्तीफे के बाद मामले पर राजनीति तेज हो गई है। बुधवार को नरेंद्र मोदी सरकार पर हमला बोलते हुए कांग्रेस ने कहा कि सरकार तत्काल बेरोजगारी से जुड़ी वह रिपोर्ट जारी करे जिसे उसने अपने पास रोक रखा है। वरिष्ट काग्रंस नेता अहमद पटेल ने ट्वीट कर कहा, “सरकार तत्काल बेरोजगारी से जुड़ी वह रिपोर्ट जारी करे जिसे उसने अपने पास रोक रखा है। रिपोर्ट और इसे तैयार करने वाले आयोग का ताल्लुक भारत की जनता से है, न कि किसी राजनीतिक दल से। इसका कोई मतलब नहीं है कि सरकार इस रिपोर्ट को सिर्फ इसलिए जारी नहीं करे कि इसके तथ्य उसके मुताबिक नहीं है।’’

मोदी सरकार पर हमला बोलते हुए पटेल ने कहा कि सांख्यिकी आयोग के सदस्यों के इस्तीफे से एक और संस्थान निष्क्रिय हो गया है। मामले पर कांग्रेस प्रवक्ता अभिषेक मनु सिंघवी ने कहा, “सांख्यिकी आयोग उन प्रतिष्ठित संस्थानों की कतार में शामिल हो गया है जिनको प्रधानमंत्री मोदी और भाजपा ने बर्बाद किया है। इनमें आरबीआई, सीबीआई, सीवीसी, सीबीडीटी, ईडी और आयकर पहले से हैं।’’

सिंघवी ने आगे कहा कि आत्मसम्मान वाले पेशेवर लोग इस सरकार के दबाव में नहीं झुक सकते और न ही डेटा के साथ छेड़छाड़ का प्रयास कर सकते हैं। परंतु झुकने वाले नौकरशाहों का इस्तेमाल बदले की राजनीति के लिए हो सकता है। इनको आत्मसम्मान वाले पेशेवर लोगों से सीखना चाहिए।

गौरतलब है कि सांख्यिकी आयोग के दो स्वतंत्र सदस्यों पी सी मोहनन और जे वी मीनाक्षी ने सरकार के साथ कुछ मुद्दों पर असहमति होने के चलते इस्तीफा दे दिया है। एक अधिकारी ने मंगलवार को यह जानकारी दी। मोहनन आयोग के कार्यकारी अध्यक्ष भी थे।

लोकसभा चुनाव के ठीक पहले मोदी सरकार के खिलाफ बिगुल फूकेंगे अन्ना हजारे

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2014 में लोकपाल के मुद्दे पर अनशन कर कांग्रेस की सरकार गिरने वाले समाजसेवी अन्ना हजारे एक बार फिर अनशन पर बैठ रहे है। इस बार यह अनशन मोदी सरकार के खिलाफ है लेकिन मुद्दे फिर वही है, लोकपाल। मोदी सरकार पर लोकपाल के मुद्दे पर हमला बोलते हुए अन्ना ने बुधवार को सुबह 10 बजे अपने गांव रालेगण सिद्धि में अनशन पर बैठने का ऐलान किया है।

मीडिया से बात करते हुए अन्ना ने कहा कि लोकपाल कानून बनकर 5 साल हो गया और नरेंद्र मोदी सरकार 5 साल बाद भी बार-बार बहानेबाजी करती है।

मोदी सरकार पर सवाल उठाते हुए अन्ना हजारे ने कहा कि नरेंद्र मोदी सरकार के दिल में अगर यह मुद्दा अहम होता तो क्या 5 साल लगना जरुरी था?

इससे पहले अन्ना ने कहा था कि उनका यह अनशन समाज और देश की भलाई के लिए होगा। अन्ना हजारे ने कहा कि उनका यह अनशन किसी व्यक्ति, पक्ष, पार्टी के विरोध में नहीं है। उन्होंने कहा कि समाज और देश की भलाई के लिए वह आंदोलन करतेेे आए हैं। उसी प्रकार यह अनशन भी उनके इसी आंदोलन का हिस्सा है।

India’s debt up 49% to Rs 82 lakh crore in Modi’s reign

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It’s difficult to hide the reality. One may alter the statistics, iterate the failures as successes, include false claims to strengthen the lie, etc. but the truth somehow emerges on the surface. In Modi’s reign, the Total liabilities of the government has increased 49 percent to Rs 82 lakh crore.

The 8th Edition of the Status Paper on Government Debt was released on Friday. It created more tremors for the Government. Compared to the latest data available till September 2018 when the total debt of the Central government stood at Rs 82,03,253 crore, the corresponding amount till June 2014 was Rs 54,90,763 crore, the Finance Ministry’s data on government borrowings shows.

The huge surge in government’s debt has been propelled by 51.7 percent growth in public debt from Rs 48 lakh crore to Rs 73 lakh crore in the four-and-half year period, which in turn was driven by 54 percent rise in internal debt to about Rs 68 lakh crore.

Dependence on market loans shows a similar rise of 47.5 percent to more than Rs 52 lakh crore during the period. While debt raised through gold bonds was nil at the end of June 2014, it stood at Rs 9,089 crore including the gold monetization scheme.

The Central government, in the status paper on government debt, gave a detailed analysis of the overall debt position of the government of India. It has been bringing out an annual status paper on government debt since 2010-11, the Finance Ministry said.

The truth is out. The dismal ‘Modi-fying’ effects on the economy are showing its true colors through statistics. The question is, why does the Government have to borrow so much amount when, according to them, the tax collection has increased manifolds, the economy is booming, GST is a success, etc.?

पीएम मोदी पर भारी पड़ा उन्हीं का वफादार, लोकसभा में सवाल कर सभी को चौकाया।

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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भले ही कितने दावे कर लें कि देश में रोजगार के क्षेत्र में कई गुना वृद्धि हुई है लेकिन उन्ही की पार्टी के एक सासंद ने एक सवाल खड़ा कर मोदी सरकार समेत सभी को चौंका दिया है। दरअसल भाजपा सांसद ने सोमवार को रोजगार के आंकड़ों को लेकर अपनी ही सरकार से सबूत मांगे लिये। यही नहीं नेता जी ने तो कुछ ऐसा कह दिया जिससे प्रधानमंत्री मोदी समेत पार्टी के तमाम आला नेताओं की नींद उड़ गई। भाजपा सांसद ने कहा कि मंत्री जी कहते तो हैं सदन में लेकिन असलियत में होता नहीं है।
सोमवार को लोकसभा में प्रश्नकाल के दौरान भाजपा सांसद हरिनारायण राजभर ने श्रम और उद्योग पर वैश्विक मंदी के प्रभाव को लेकर कई सवाल दागे। यूपी के घोसी से बीजेपी सांसद राजभर ने आगे कहा कि श्रम मंत्री बंडारू दत्तात्रेय पिछले कई सालों में रोजगार सृजित करने का जो दावा पेश कर रहे हैं वो जमीनी स्तर पर बिलकुल भी सच नहीं है।
भाजपा नेता ने आगे कहा कि अगर वाकई ऐसा हुआ है तो मंत्री जी इसका प्रूफ दें। उनका कहना था कि असलियत में रोजगार के अवसर सृजित ही नहीं हुए हैं। राजभर के इस सवाल से सदन में बैठे सत्ता पक्ष के कई मंत्री असहज स्थिति में दिखे वहीं विपक्षी पार्टी कांग्रेस, तृणमूल कांग्रेस और वाम दलों ने मेंजे थपथपा कर भाजपा सांसद की बात का पुरजोर समर्थन कर मोदी सरकार की आलोचना की। हांलाकि श्रम मंत्री ने राजभर की इस टिप्पणी का कोई जवाब नहीं दिया।

अमर्त्य सेन ने नोटेबंदी को बताया ‘निरंकुश कार्यवाही’, कहा ‘देश को नहीं होगा कोई फायदा।’

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Newbuzzindia:​ भारत रत्न और नोबेल पुरस्कार के विजेता प्रोफेसर अमर्त्य सेन ने मोदी सरकार के 500 और 1000 वाले नोट बैन को निरंकुश कार्रवाई जैसा बताया है। एक अखबार को दिए अपने इंटरव्यू में प्रोफेसर सेन ने कहा, “लोगों को अचानक यह कहना कि आपके पास जो करेंसी नोट हैं वो किसी काम का नहीं है, उसका आप कोई इस्तेमाल नहीं कर सकते, यह अधिनायकवाद की एक अधिक जटिल अभिव्यक्ति है, जिसे कथित तौर पर सरकार द्वारा जायज ठहराया जा रहा है क्योंकि ऐसे कुछ नोट कुछ कुटिल लोगों द्वारा काला धन के रूप में जमा किया गया है।” उन्होंने कहा, “सरकार की इस घोषणा से एक ही झटके में सभी भारतीयों को कुटिल करार दे दिया गया जो वास्तविकता में ऐसा नहीं हैं।”
जब उनसे पूछा गया कि क्या नोटबंदी का कुछ सकारात्मक असर दिखेगा जैसा कि प्रधानमंत्री दावा कर रहे हैं तो उन्होंने कहा, “यह मुश्किल लगता है। यह ठीक वैसा ही लगता है जैसा कि सरकार ने विदेशों में पड़े काला धन भारत वापस लाने और सभी भारतीयों को एक गिफ्ट देने का वादा किया था और फिर सरकार उस वादे को पूरा करने में असफल रही।”

भाजपा के पूर्व मंत्री का मोदी सरकार पर हमला, कहा ‘नोटेबंदी का फैसला सोचा समझा नहीं है।’

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Newbuzzindia:​  नोटबंदी के मुद्दे पर विपक्ष के हमलों में घिरी नरेंद्र मोदी सरकरा को अब अपनों से भी आलोचना का सामना करना पड़ रहा है। बीजेपी के पूर्व केंद्रीय मंत्री अरुण शौरी ने हाल में ही दिए अपने बयान में कहा है कि नरेंद्र मोदी सरकार का फैसला “अच्छी तरह सोचा-समझा” नहीं था। हालांकि शौरी साथ ही ये भी कहा कि इस फैसले की मंशाल भली हो सकती है। शौरी अटल बिहारी वाजपेयी सरकार में केंद्रीय विनिवेश मंत्री रहे थे।
अरुण शौरी ने कहा, “जिन लोगों को पास कालाधन या काली संपत्ति है वो उसे नकद के तौर पर नहीं रखते। भारत के एक प्रतिशत लोगों के पास देश की 53 प्रतिशत संपत्ति है। 10 प्रतिशत लोगों के पास देश की 85 प्रतिशत संपत्ति है। अब इन अमीर लोगों के पास कालाधन और बढ़ जाएगा। वो गद्दों के नीचे कालाधन नहीं छिपाने जा रहे।”  शौरी के अनुसार नोटबंदी के फैसले से गरीब नागरिकों का जीवन प्रभावित हुआ था जिनका रोज का जीवन नकद लेन-देन पर टिका होता है। शौरी के अनुसार कालेधन पर अंकुश लगाने के लिए सरकार को टैक्स नीति में बदलाव जैसे कदम उठाने चाहिए थे।
निजी टीवी चैनल एनडीटीवी को दिए अपने इंटरव्यू में शौरी ने कहा, “इसका मकसद कालाधन खत्म करना बताया गया है तो इसलिए हर कोई कहेगा कि बहुत अच्छा। लेकिन मुझे नहीं लगता कि ये स्ट्राइक (हमला) अच्छी तरह सोच-समझकर की गई है। ये स्ट्राइक कालेधन पर नहीं है। ये स्ट्राइक भारत में नोटों के कानूनी चलन पर है। ये नकद लेन-देन पर स्ट्राइक है।”

मोदी सरकार ने आम देशवासिओं पर की सर्जिकल स्ट्राइक !

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Newbuzzindia: पाकिस्तान में सर्जिकल स्ट्राइक करने के बाद पुरे देश ने मोदी सरकार की तारीफ की थी । सर्जिकल स्ट्राइक के मुद्दे पर नरेंद्र मोदी एक बार फिर ट्विटर पर ट्रेंड कर रहे है । अंतर बस इतना है कि इस बार लोग मोदी की तारीफ करने की जगह उनकी आलोचना कर रहे है । 

ट्विटर पर आज काफी ज्यादा संख्या में लोग #ModiSurgicalStrikeOnCommonMan के साथ ट्वीट कर रहे है । लोगो का कहना है कि पाकिस्तान के बाद नरेंद्र मोदी ने अपने ही देशवासिओं पर सर्जिकल स्ट्राइक कर दी है । 
गौरतलब है कि मोदी सरकार द्वारा 500-1000 के नोट बंद करने के बाद से ही देश के लोगों को काफी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है । ऐसे में ट्विटर पर लोगो का गुस्सा मोदी पर फूट रहा है । हम आपको ऐसे ही कुछ ट्वीट दिखा रहे है । 


https://twitter.com/FarisAliKhan2/status/797481631657455616

काला धन: मोदी का बड़ा फैसला, काले धन का खुद करो खुलासा वर्ना होगी तकलीफ !

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#Newbuzzindia | मोदी पर लगातार काले धन को लेकर आरोप लगते रहे है और कहा भी गया कि मोदी अपने काले धन वाले वादे से मुकर गए है। बावजूद इसके कि मोदी और भाजपा सरकार ने काले धन को लाने के लिए कई हथकंडे अपनाये।

मोदी सरकार ने इस बार काले धन को लेकर एक बड़ा फैसला लिया है। जिसका जिक्र मोदी ने आज ‘मन की बात’ रेडियो कार्यक्रम के दौरान की। इस फैसले में मोदी ने देश की जनता को संदेश देते हुए कहा कि, “वे सभी लोग, जिनके पास अघोषित संपत्ति है, वे इसकी जानकारी 30 सितम्बर से पहले सरकार को दे दे। यदि लोग ऐसा करते है तो सरकार के तरफ से उन्ही किसी तरह की सख्ती और तकलीफ का सामना नही करना होगा।’

आ सकती है आफत:
यदि सभी लोग 30 सितम्बर तक अपनी अघोषित सम्पत्ति का ब्यौरा दे देते है तो उनसे किसी तरह की कोई पूछताछ नही होगी साथ ही जुर्माने चुकाने के बाद कई तरह की परेशानी से बचा जा सकता है। पर 30 सितम्बर के तक जो लोग ऐसा नही करते है, उन्हें सरकार के कड़े रुख का सामना करने के लिए तैयार रहना चाहिए। और इसके बाद सरकार भी इन लोगो को तकलीफ से बचाने में विफल होगी।

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