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FDI के मामले पर अपनों के निशाने पर आए मोदी, स्वदेशी जागरण मंच ने कहा, “ये जनता के साथ विश्वासघात है।”

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राष्ट्रीय स्वयं संघ की सम्बद्ध संगठन स्‍वदेशी जागरण मंच ने सरकार के एफडीआई के नियमों में ढील देने के फैसले की आलोचना करते हुए आरोप लगाया कि यह देश की जनता के साथ विश्वासघात है और इसका प्रभाव स्थानीय कारोबारियों के लिए यह ठीक नहीं होगा। मोदी सरकार की कुछ आर्थिक नीतियों के आलोचक रहे स्वदेशी जागरण मंच ने कहा कि भाजपा नीत सरकार विदेशी प्रत्यक्ष निवेश (एफडीआई) पर वही नीति अपना रही है जो पिछली सरकारों ने अपनाई और इसका रोजगार सृजन पर प्रतिकूल असर पड़ेगा।

स्वदेशी जागरण मंच के राष्ट्रीय सह-संयोजक अश्विनी महाजन ने से कहा, ”खुदरा, रक्षा और फार्मा जैसे क्षेत्रों को एफडीआई के लिए खोलना और नियमों में ढील देना देश की जनता के साथ विश्वासघात है। ऐसा करके इस सरकार ने सामान्य तौर पर देश के साथ और विशेष रूप से स्थानीय कारोबारियों के साथ अच्छा नहीं किया है।” नीति की आलोचना करते हुए उन्होंने कहा कि पिछली सरकार को सिंगल-ब्रांड खुदरा क्षेत्र में नियमों में ढील देने के मामले में कड़े विरोध का सामना करना पड़ा था और दुर्भाग्य की बात है कि राजग सरकार ने भी ऐसा ही किया है।

महाजन ने आरोप लगाया कि इस सरकार के साथ दिक्कत यह है कि यह पिछली सरकार की तरह की सोच के साथ काम करती है और उसे लगता है कि विकास और रोजगार सृजन केवल एफडीआई के साथ ही संभव है। उन्होंने दावा किया, ”जबकि अब एफडीआई नीति अपनाने से देश में रोजगार सृजन पर प्रतिकूल असर पड़ेगा। इस नीति का उद्देश्य रोजगार सृजन करना नहीं, बल्कि भारतीय लोगों से नौकरी छीनना है।”

गौरतलब है कि केंद्रीय वाणिज्‍य राज्‍य मंत्री निर्मला सीतारमण ने सोमवार को यह एलान किया कि केंद्र सरकार ने उड्डयन, रक्षा समेत कई क्षेत्रों में एफडीआई की सीमा को बढ़ाकर 100 फीसदी कर दिया है।

मौलाना मोदी और मौलाना मुलायम!! ये क्या कह गए ओवैसी, पढ़ें पूरी खबर…

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अपने बड़बोलेपन के लिए मशहूर अस्सद्दुदीन ओवैसी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और सपा प्रमुख मुलायम सिंह को मौलाना से संबोधित कर के एक नया बखेड़ा खड़ा कर दिया है। हालांकि अब तक विपक्षी दलों से इस पर प्रतिक्रिया नहीं मिली है पर यह देखना दिलचस्प होगा की इस संबोधन को भारतीय जनता पार्टी और समाजवादी पार्टी कैसे लेते हैं।

हैदराबाद के सांसद और एआईएमआईएम चीफ असदुद्दीन ओवैसी ने कहा है कि मौलाना नरेंद्र मोदी और मौलाना मुलायम सिंह यादव के बीच में फंस गए हैं। यह बात उन्‍होंने एक इंटरव्यू में कही। उनसे पूछा गया था कि वे यूपी में ‘मौलाना’ मुलायम सिंह यादव से कैसे निपटेंगे ? बता दें कि ओवैसी भी यूपी चुनाव 2017 के लिए अपनी तैयारियों में जुटे हुए हैं। वे मुसलमान और दलित वोटों के सहारे अपनी चुनावी नैया पार लगाने की कोशिश कर रहे हैं। दूसरी ओर, मुलायम हमेशा से खुद को मुसलमानों के हितैषी के तौर पर पेश करते रहे हैं।
मुलायम से निपटने के सवाल पर ओवैसी ने कहा, ‘देखा जाए तो मैं मौलाना नरेंद्र मोदी और मौलाना मुलायम सिंह यादव के बीच फंस गया हूं। आखिर मोदी खुद को एक बड़े सूफी विचारक समझते हैं। जहां तक हमारी बात है, हम लोगों के पास मुस्‍ल‍िमों और दलितों की तरक्‍की की बात लेकर जा रहे हैं। हम समाजवादी पार्टी के उन वादों का पर्दाफाश करेंगे जिनमें उन्‍होंने कहा था कि झूठे आरोपों में जेलों में बंद निर्दोष मुसलमानों को बाहर निकाला जाएगा। यूपी में कोई तरक्‍की नहीं हुई है।’

जानिए प्रधानमंत्री मोदी के भाषण में हुई 11 गड़बड़ियां जिनसे हर तरफ हुई उनकी किरकिरी

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अमेरिका में जब प्रधानमंत्री भारत के गौरवशाली इतिहास और धरोहरों का ज़िक्र कर रहे थे तब उन्होंने कोणार्क के मंदिर का ज़िक्र किया। उन्होंने कहा कि, ‘यह मंदिर 2000 साल पुराना है।’ जबकि इस मंदिर का निर्माण 700 वर्षों पहले हुआ था।

नरेंद्र मोदी अपने प्रभावशाली और धारदार भाषण के लिए जाने जाते हैं। लोकसभा चुनाव में वो लोगों के दिल पर छाए रहे, उसके लिए एक महत्वपूर्ण कारण उनके भाषण की शैली रही। पर इतने शानदार भाषण की शैली होने के बावजूद भी कई ऐसे क्षण आए जब इतिहास में अपने अल्पज्ञान के कारण वो विरोधियों के निशाने पर रहे।
आइए जाने प्रधानमंत्री मोदी के भाषण के दौरान की गई 11 गलतियों के बारे में

1. नवंबर 2003 में महात्मा गांधी के बारे में ज़िक्र करते हुए मोदी जी ने उन्हें मोहनलाल करमचंद गांधी कह दिया। जबकि महात्मा गांधी का पूरा नाम मोहनदास करमचंद गांधी था। इस पर मोदी जी का काफी मजाक उड़ा।

2. लोकसभा चुनाव में पार्टी के लिए प्रचार के दौरान 2013 में पटना की बहुचर्चित हूंकार रैली में बिहार का बखान करते हुए उन्होंने सम्राट अशोक, पाटलिपुत्र का ज़िक्र करते हुए  नालंदा और तक्षशिला विश्वविद्यालय का नाम लिया। इस पर विरोधियों ने मोदी के ज्ञान पर हमला करते हुए उनका खूब मज़ाक उड़ाया, क्योंकि तक्षशिला विश्वविद्यालय पाकिस्तान में है।

3. 2003 में अहमदाबाद में लोगों को संबोधित करते हुए मोदी ने कहा कि, आज़ादी के समय एक डॉलर की कीमत एक रुपये की थी। जबकि विपक्ष पर तंज कसते कसते मोदी ये भूल गए थे कि उस वक़्त 30 सेंट बरावर एक रुपया हुआ करता था और एक रुपया एक पाउंड के बराबर था।

4. अहमदाबाद में अक्तूबर 2003 में नरेंद्र मोदी ने कहा था कि अहमदाबाद नगरपालिका में महिलाओं के आरक्षण का प्रस्ताव सरदार वल्लभ भाई पटेल ने 1919 में रखा था। जबकि लंबे समय तक गुजरात के मुख्यमंत्री रहे नरेंद्र मोदी ये भूल गए थे कि वल्लभ भाई पटेल ने ये प्रस्ताव 1926 में दिया था।

5. फरवरी 2014 में नरेंद्र मोदी ने मेरठ में कहा था कि कांग्रेस ने आज़ादी की पहली लड़ाई को कम कर के आँका था।
जबकि सच ये है की 1857 की क्रांति को देश की आज़ादी की पहली लड़ाई कहते हैं। कांग्रेस का अस्तित्व भी 1857 में नहीं था। भारतीय कांग्रेस की स्थापना भी 1885 में हुई थी।

6. नवंबर 2003 में बंगलौर में नरेंद्र मोदी ने कहा था- 15 अगस्त का प्रधानमंत्री का भाषण लाल दरवाज़े से होता है। अब ये कोई बताने वाला तथ्य नहीं है कि प्रधानमंत्री लाल क़िले से भाषण देते हैं।

7. 2003 में मुंबई में नरेंद्र मोदी ने कहा था कि वर्ष 1960 से महाराष्ट्र में 26 मुख्यमंत्री हुए हैं। जबकि सच ये है कि 2003 तक सिर्फ़ 17 नेताओं ने 26 बार मुख्यमंत्री पद की शपथ ली है।

8. नरेंद्र मोदी ने एक बार कहा था कि जब हम गुप्त साम्राज्य की बात करते हैं कि हमें चंद्रगुप्त की राजनीति की याद आती है। दरअसल मोदी जिस चंद्रगुप्त की राजनीति का जिक्र कर रहे थे, वो मौर्य वंश के थे। गुप्त साम्राज्य में चंद्रगुप्त द्वितीय हुए।

9. दिसंबर 2013 में नरेंद्र मोदी ने जम्मू में एक रैली के दौरान कहा था कि मेजर सोमनाथ शर्मा को महावीर चक्र और ब्रिगेडियर रजिंदर सिंह को परमवीर चक्र मिला था। जबकि मेजर सोमनाथ शर्मा को परमवीर चक्र और रजिंदर सिंह को महावीर चक्र मिला था। इस उलटफेर में फंसे नरेंद्र मोदी।

10. नवंबर 2013 में खेड़ा में नरेंद्र मोदी श्यामजी कृष्ण वर्मा और श्यामा प्रसाद मुखर्जी में अंतर नहीं कर सके। मोदी ने श्यामा प्रसाद मुखर्जी को गुजरात का बेटा कह दिया और ये भी कह दिया कि उन्होंने लंदन में इंडिया हाउस का गठन किया था। और उनकी मौत 1930 में हो गई थी। दरअसल श्यामा प्रसाद मुखर्जी का जन्म कोलकाता में हुआ था। उनकी मौत 1953 में हुई थी। दरअसल मोदी श्यामी कृष्ण वर्मा की जगह श्यामा प्रसाद मुखर्जी बोल गए।

11. पटना में रैली के दौर बिहार के शौर्य का ज़िक्र करते हुए मोदी ने सिकंदर के बारे में कहा। उन्होंने कहा कि,‘ सिकंदर की सेना ने दुनिया जीत लिया था। पर जैसे ही वो बिहार आए उनका क्या हश्र हुआ ये दुनिया जानती है। अब कौन मोदी जी को ये बात बताये कि सिकंदर कभी गंगा को पार नहीं किया। जबकि पटना गंगा के किनारे बसा हुआ है।

अमेरिकी कांग्रेस में मोदी के भाषण का सच आया सामने, आप भी जाने सच

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अमेरिका में हुए मोदी दौरे का मुख्य आकर्षण केंद्र रहा अमेरिकी कांग्रेस में प्रधानमंत्री मोदी का अंग्रेजी में दिया हुआ भाषण। आम तौर पर हिंदी में बोलने वाले मोदी अपनी बातों से लोगों का दिल जीत लेते हैं। पर बिना देखे लगातार 40 मिनट तक अंग्रेजी में दिए अपने भाषण से उन्होंने दुनिया भर में वाहवाही लूटी है।
प्रधानमंत्री के भाषण के बाद एक फ़ोटो सोशल मीडिया पर बहुत तेज़ी से वायरल हुई है। इस फ़ोटो से यह समझ में आता है कि अपने भाषण के लिए उन्होंने टैलिप्राम्प्टर का सहारा लिया है। देश की मीडिया रिपोर्ट की माने तो यह खबर और तस्वीर सच्ची और सही है।

इस तकनीक से भाषण पढ़ने में माहिर हैं मोदी। आम तौर पर इस तकनीक से भाषण पढ़ना काफी मुश्किल होता है, क्योंकि टैलिप्राम्प्टर पर पढ़ना और उस बात को दर्शकों तक पहुँचना, दर्शकों को समझाना काफी मुश्किल होता है। टैलिप्राम्प्टर और दर्शकों दोनों में सामंजस्य बनाना सबसे बड़ी चुनौती होती है। इस तकनीक में मोदी को महारत हांसिल है। वह अपनी बात को प्रभावित ढंग से कहते हैं और दर्शकों तक उनकी बात भी पहुँचती है।

जानिए कैसे काम करता है टैलिप्राम्प्टर

दर्शकों को टैलिप्राम्प्टर नज़र नहीं आता है, क्योंकि एक तरफ से यह पारदर्शी होता है। वक्ता जैसे जैसे टैलिप्राम्प्टर पर लिखे वाक्यों को पढ़ता है, पढ़े हुए वाक्य नीचे स्क्रॉल होते जाते हैं। पारदर्शी स्क्रीन होने के कारण ऐसा लगता है जैसे वक्ता दर्शकों की ओर देख के बोल रहा है

जब मोदी भी खा गए धोखा

2015 में श्रीलंका दौरे पर श्रीलंकाई राष्ट्रपति मैत्रिपाल सिरिसेना के स्वागत भाषण में प्रधानमंत्री मोदी ने टैलिप्राम्प्टर का इस्तेमाल किया था। शब्द दर शब्द पढ़ने के चक्कर में प्रधानमंत्री ने आखिर वो गलती कर ही दी, जो अक्सर किसी टैलिप्राम्प्टर पढ़ने वाले से हो जाती है। उन्होंने मैत्रिपाला की पत्नी Mrs. Sirisena को एमआरएश सिरिसेना बोल दिया था।

जानिए वो 10 मुद्दें जिन पर मोदी कभी कुछ बोल ना पाए, सरकार भी रही बैकफुट पर

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NewBuzzIndia | Exclusive:

केंद्र में भाजपा सरकार के आने के पूर्व भाजपा ने अनेकों वादे किए। इन वादों में से मोदी सरकार ने कुछ पुरे किए तो वहीं बहुत से वादों पर चुप्पी साधी रखी है। इसी तरह प्रधानमन्त्री नरेंद्र मोदी ने भी कई मसलों पर कुछ नही कहा और बिलकुल चुप रहे।

हम आपको उन महत्वपूर्ण मुद्दों के बारे में बता रहे है जिन पर आवश्यक होने पर भी मोदी चुप रहे है-

1. राम मंदिर :-
भाजपा ने जब पहली बार राजनीती में जगह बनाई थी तब से राम मंदिर के मुद्दे को सबसे ऊपर उठाया था, पर अभी भी मोदी इस मुद्दे पर चुप है। और यह मुद्दा वैसा ही है जैसा पहले था।

2. धारा 370 :-
लोकसभा चुनाव के वक़्त मोदी के वादों में धारा 370 सबसे ऊपर था, पर अब मोदी इससे यू-टर्न लेते हुए दिखाई दे रहे है।

3. JNU मुद्दा :-
यह एक ऐसा मुद्दा था जिसने सरकार की जड़े हिला कर रख दी, पर फिर भी मोदी इससे दूर ही रहे।

4. व्यापम :-
यह भाजपा सरकार के सबसे बड़े घोटालों में से एक है, जिसमे कई लोगों की जान तक चली गयी, यह मुद्दा अभी भी नही सुलझा है। इस पर भी मोदी ने कोई रिएक्शन नही दिया।

5. काला धन :-
भाजपा को जीत दिलाने का यह सबसे बड़ा हथियार था, जिसमे विदेशो में जमा काला धन वापस लाने की बात कही गयी थी, पर अब तक ऐसा कुछ भी नही हुआ।

6. अख़लाक़ :-
अख़लाक़ एक ऐसा मुद्दा बन गया जिसमे देश में सहिष्णुता और असहिष्णुता के बीच जंग छिड़ गयी, पर इससे भी मोदी दूर भागते दिखे।

7. महंगाई:
वादों पर ध्यान दिया जाए तो मंहगाई को कम करने की बात कही गयी थी, पर फिलहाल स्थिति इसके बिलकुल विपरीत है।

8. चीन:
लोकसभा चुनाव के वक़्त, प्रचार के महत्वपूर्ण मुद्दों में चीन का मुद्दा अहम था। लगातार चीन का भारत के ज़मीन पर कब्ज़ा, अरुणांचल प्रदेश के कई हिस्सों को अपना कहना जैसे कई मुद्दे थे जिनपर उम्मीद की जा रही थी कि मोदी सरकार का रुख सख्त होगा। पर जैसे जैसे दिन ढले, इन मुद्दों को ठंडे बस्ते में डाल के भूल गयी सरकार।

9. डिग्री विवाद:
केजरीवाल के द्वारा उछाला गया  मोदी की डिग्री का विवाद, इस पर भी मोदी कभी खुलकर सामने नही आये।

10. पत्नी:
यह मुद्दा मोदी के निजी जीवन का है। मोदी ने कभी सामने आकर अपनी पत्नी का नाम उजागर नही किया।

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प्रधानमंत्री मोदी की गुगली से बौखलाया हाफ़िज़ सईद, दिया ड्रोन उड़ाने की धमकी

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भारत-अमेरिका की बढ़ती नजदीकियों से अब आतंकवादियों की बौखलाहट बढ़ने लगी हैं। आतंकवादी संगठन जमात उद-दावा प्रमुख और 2008 के मुंबई हमलों के साजिशकर्ता हाफिज सईद का कहना है कि अगर पाकिस्तानी सरजमीं में अमेरिका का कोई भी ड्रोन दिखता है तो उसे तुरंत मार गिराया जाए क्योंकि अमेरिका और भारत दोनों ही पाकिस्‍तान के खिलाफ दुश्‍मनी का भाव रखते हैं। उसने कहा कि भारत को अमेरिका का समर्थन हासिल है इसलिए अमेरिकी ड्रोन को पाक में नहीं घुसने देना चाहिए।

शुक्रवार की नमाज के बाद हाफिज ने भीड़ से कहा कि हम आर्मी चीफ से आग्रह करते हैं और वायुसेना प्रमुख से कहते हैं कि यह उनकी ड्यूटी है कि अगर कोई भी ड्रोन पाकिस्‍तानी सीमा में आता है तो वे उसे मार गिराएं और उसका माकूल जवाब दें।

बता दें कि अफगान तालिबान चीफ मुल्‍ला मंसूर को मारने के लिए अमेरिका ने पाकिस्‍तान की सरजमीं पर 21 मई को जो ड्रोन हमला किया था, उसके खिलाफ हाफिज का संगठन जमात उद-दावा पाकिस्‍तान के प्रमुख शहरों में विरोध प्रदर्शन करने वाला है। इस दौरान वो  भाषण भी देगा।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सैलरी जान कर हैरान रह जाएंगे आप!!

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हर वो इंसान जो सरकारी काम में कार्यरत है, जो जनता की सेवा करता है, उसे देश के नागरिकों के टैक्स, रेवेन्यु और भी तरह तरह के सरकारी वसूली के तहत इक्कठा किए गए पैसों से सैलरी मिलती है। इसी कड़ी में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी जनता के सेवक हैं, जिनका काम जनता की सेवा करना है।
आप लोगों को हैरानी होगी यह जान कर कि हमारे प्रधानमंत्री की सैलरी कितनी है।

सैलरी के मामले में हमारे प्रधानमंत्री विश्व में 11वें स्थान पर हैं। प्रधानमंत्री मोदी की सलाना सैलरी है 19 लाख रुपये।

आइए हम बताते हैं दुनिया के और राष्ट्राध्यक्षों की सैलरी के बारे में।
1. सबसे ज्यादा सैलरी है अमेरिका के राष्ट्रपति की। राष्ट्रपति ओबामा की सैलरी करीब ढाई करोड़ रूपये।

2. दूसरे स्थान पर कनाडा के प्रधानमंत्री स्टीफन हार्पर, इनकी सैलरी 1.62 करोड़ रूपये।

3. 1.46 करोड़ की सैलरी के साथ, जर्मनी की चांसलर मोर्केल आती हैं तीसरे स्थान पर।

4. दक्षिण अफ्रीका के राष्ट्रपति 1.39 करोड़ की सैलरी के साथ चौथे स्थान पर हैं।

5. ब्रिटिश प्रधानमंत्री डेविड कैमरून 1.34 करोड़ के साथ पांचवे स्थान पर हैं।

6. जापान के प्रधानमंत्री शिंजो आबे छठे स्थान पर करीब 1.28 करोड़ रुपयों के साथ।

7. सातवें स्थान पर फ्रांस के राष्ट्रपति फ्रांसोआ ओलांद हैं। इनकी सैलरी 1.21 करोड़ है।

8. रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन 85 लाख रुपयों की सैलरी के साथ आठवें स्थान पर हैं।

9. इटली के प्रधानमंत्री मेतिओ रेंजी 77 लाख रुपयों के साथ नौवें स्थान पर हैं।

10. 74 लाख रुपयों की सैलरी के साथ ब्राज़ील की राष्ट्रपति डीलेमा रुसेफ दसवें स्थान पर हैं।

11. भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 19 लाख रुपयों की सैलरी के साथ ग्यारहवें स्थान पर हैं।

12. चीन के राष्ट्रपति सी जिनपिंग 13 लाख रुपयों की सैलरी के साथ बारहवें स्थान पर हैं।

विदेशी यात्रा करने में मोदी से पिछड़े ओबामा

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2014 मई में कार्यभार सँभालने के बाद प्रधानमंत्री मोदी लगातार विदेशी यात्रायें करते रहे। विदेशी संबंधो, विदेशी निवेश द्विपक्षीय व्यापार जैसे अनेक महत्वपूर्ण बिंदु रहे जिनके लिहाज से ये यात्रायें बहुत ज़रूरी भी रही।
अपने तीन दिवसीय दौरे के तहत वो अमेरिका से मेक्सिको पहुचें, इसी के साथ वो अमेरिका के राष्ट्रपति बराक ओबामा से भी ज्यादा विदेशी यात्रा करने वाले राष्ट्राध्यक्ष बन गए।

विमान यात्रा के लॉग के अनुसार नरेंद्र मोदी ने अपने कार्यकाल के शुरुआत होने से अब तक कुल 35 देशों की यात्राएं की हैं और इस दौरान उन्होंने दुनिया के दो तिहाई राष्ट्राध्यक्षों से मुलाकात भी की है। दुनिया के अन्य देशों के साथ कूटनीतिक संबंधों को और ज्यादा मजबूत करने के इरादे से मोदी ने ये हवाई यात्राएं की है।

हिंदुस्तान टाइम्स में छपी एक खबर के मुताबिक जहां एक ओर मोदी ने कुल 35 देशों की यात्राएं की हैं वहीं ओबामा ने अपने दूसरे कार्यकाल के पहले दो सालों (जनवरी 2009 से जनवरी 2011 तक) के भीतर महज 25 देशों की यात्राएं की है। जहां मोदी ने मई 2014 से मई 2016 के बीच 1,64,187 किमी की हवाई दूरी तय की है वहीं ओबामा ने महज 1,56,336 किमी की। ये आंकड़े दोनों राष्ट्राध्यक्षों के कार्यकाल के पहले दो वर्षों के हवाई यात्राओं का तुलनात्मक अध्ययन है।

जानिए प्रधानमंत्री मोदी के भाषण के महत्वपूर्ण 36 बिंदुओं को, जिनके बाद तालियों से गूँज उठा अमेरिकी कांग्रेस

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NewBuzzIndia: NewBuzz Exclusive

जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अमरीकी कांग्रेस को संबोधित कर रहे थे तब दुनिया भर की नज़रे उन पर टिकी थी साथ ही साथ इस दौरे से देश के लोगों की उम्मीदें भी लगी हुई थीं।

आइए जाने की प्रधानमंत्री के भाषण के 36 महत्वपूर्ण बिंदु क्या रहे।

1. दोनों देशों के रिश्ते की नई धुन है ये ।

2. लंबे और अच्छे भविष्य के लिए हमें जुड़ना होगा।

3. आतंकवाद का कोई धर्म नहीं, इसे धर्म से अलग करना होगा।

4. हम बेहतर भविष्य के लिए काम कर रहे हैं।

5. सोलर ऊर्जा के लिए अमेरिका की मदद ज़रूरी।

7. UN शांति मोर्चे में भारत का अहम् योगदान।

8. बिना नाम लिए पाकिस्तान पर साधा निशाना, कहा ‘ भारत के पड़ोस में पनप रहा ऐ आतंकवाद।’

9. आतंकवाद का ख़ात्मा हर हाल में ज़रूरी।

10. सभी को एक साथ मिल कर आतंकवाद के खिलाफ लड़ने की ज़रूरत है।

11. आतंकवाद पर भाषण देने वालों को कड़ा संदेश मिलना चाहिए।

12. भारत के पश्चिमी सिमा से अफ्रीका तक आतंकवाद के कई नाम।

13. आतंकवाद सबसे बड़ा खतरा है।

14. अफगानिस्तान में अमेरिका का रोले काबिल-ए-तारीफ़।

15. एशिया से अफ्रीका तक शांति चाहता है भारत।

16. हिन्द महासागर में भारत अपना रोले निभाने को तैयार।

17. दोनों देशों का जुड़ना ज़रूरी, अलग होने से बात नहीं बनेगी।

18. साईबर आतंकवाद बहुत तेज़ी से बढ़ रहा है।

19. अमेरिकी कंपनियों के लिए भारत पसंदीदा जगह।

20. भारत का 7.6% विकास दर दुनिया भर के लिए अवसर।

21. अमेरिका की सामरिक रणनीति के लिए भारत अहम् है।

22. 2022 तक भारत को आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनाना है।

23. एक अरब लोगों को मिलेगी ब्रॉडबैंड की सुविधा।

24. अमेरिका के विकास में भारतीयों का बहुत बड़ा योगदान है।

25. भारत में सामाजिक- आर्थिक बदलाव का दौर।

26. अमेरिका की ताक़त हमारे लिए गर्व की बात है।

27. हर क्षेत्र के भारतीय अमरीका में मौज़ूद हैं।

28. योग दोनों देशों को जोड़ता है।

29. भारत का सबसे ज्यादा कारोबार अमरीका के साथ।

30. साझा कारोबार से दोनों देशों का फायदा हुआ।

31. नॉर्मन बोरलैंग् की हरित क्रांति में महत्वपूर्ण भूमिका रही है।

32. हमारे रिश्तें इतिहास के हिचकिचाहट से ऊपर उठ गए हैं।

33. हमारा इतिहास अलग, हमारी मान्यताएँ एक जैसी।

34. अमेरिकी संविधान का असर बाबा साहेब अंबेडकर में दिखा।

35. अमेरिका बुरे वक़्त में भारत के साथ रहा।

36. गांधी जी की अहिंसा ने मार्टिन लूथर किंग को प्रेरणा दी।

प्रधानमंत्री के शानदार उद्बोधन के बाद अमरीकी कांग्रेस में तालियों की गड़गड़ाहट थमने का नाम नहीं ले रही थी। यह उत्साह मात्र औपचारिकता भर के लिए नहीं था बल्कि प्रधानमंत्री के शब्द दर शब्द पर अमरीकी नेताओं की सहमति को भी दर्शा रहा था।

अब देखने वाली बात यह होगी की आने वाले समय में भारत अमेरिका से उन मुद्दों पर कैसे फायदा उठा सकता है जिन पर आज दोनों की सहमति बनी है।

मोदी सरकार के इस कदम ने उड़ाई चाईना की नींद

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NewBuzzIndia: हथियार और सुरक्षा तकनीक में एक महत्वपूर्ण कदम बढ़ाते हुए मोदी सरकार का यह फैसला चाईना को आँख दिखने जैसा है। इससे एशियाई देशों के बीच भारत का कद और ज्यादा बढ़ा है।

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चीन को नजरअंदाज करते हुए भारत ने वियतनाम को भारत की सुपर सोनिक क्रूज मिसाइल ब्रह्मोस बेचने का फैसला लिया है। केन्द्र की मोदी सरकार ने एशिया में चीन की बढ़ती ताकत को चुनौती देने के तहत यह फैसला लिया है। 5 साल पहले वियतनाम ने भारत से क्रूज मिसाइल खरीदने में दिलचस्पी दिखाई थी, लेकिन तत्कालीन यूपीए सरकार ने चीन के विरोध के कारण यह सौदा रोक दिया था। रक्षामंत्री मनोहर पर्रिकर 5 दिन के वियतनाम और सिंगापुर दौरे पर हैं जहां वे इस सौधे पर अंतिम बातचीत करेंगे।

उल्लेखनीय है कि ब्रह्मोस भारत-रूस के ज्वाॅइंट वेंचर से देश में ही बनाई गई एक सुपर सोनिक एंटी शिप मिसाइल है। लीथल फ्यूल से ऑपरेट करने वाली यह मोस्ट इफेक्टिव एंटी शिप मिसाइल है। यह दुनिया की सबसे तेज क्रूज मिसाइल है। इसकी स्पीड अमेरिकी सबसोनिक टॉमहॉक क्रूज मिसाइल से भी तीन गुना ज्यादा 2.8 मैच है। ब्रह्मोस मिसाइल 300 किलो वारहेड के साथ 290 किलोमीटर की दूरी तक मार कर सकती है। सरफेस-टू-सरफेस पर मार करने वाली इस मिसाइल को सबमरीन, शिप और प्लेन से भी दागा जा सकता है। समुद्र और मैदान से मार करने वाली ब्रह्मोस मिसाइल को इंडियन आर्मी और नेवी में शामिल किया जा चुका है।

मौजूदा समय में साउथ चाइना सी में भी चीन और वियतनाम के बीच बॉर्डर को लेकर टकराव बढ़ रहा है। साउथ चाइना सागर में भारतीय तेल कंपनियां वियतनाम के लिए तेल निकालती हैं। चीन को भारतीय कंपनियों द्वारा तेल निकालने पर भी ऐतराज है, इसके बावजूद भी भारत तेल के क्षेत्र में चीन की मदद कर रहा है।
भारत और रूस ब्रह्मोस को दूसरे देशों को बेचने के लिए तैयार हैं। सूत्रों की मानें तो भारत चिली, यूएई, साउथ अफ्रीका जैसे देशों के साथ ब्रह्मोस के सौदे को लेकर बात कर रहा है। इस फैसले को मोदी सरकार की विदेश नीति में बड़ा बदलाव माना जा रहा है।

अब चीन के साथ सटे एक देश के पास, चीन में भीतर तक आक्रमण करने की ताकत होगी!