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समाजवादी पार्टी

क्रॉस वोटिंग पड़ी महँगी, जब कांग्रेस ने 6 विधायकों को दिखाया पार्टी से बाहर का रास्ता

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#Newbuzzindia/लखनऊ | जहाँ एक तरफ कांग्रेस की छवि लगातार गिर रही है तो वहीँ कांग्रेसियों का कांग्रेस छोड़कर जाना भी जारी है। इसी बीच कांग्रेस ने एक बड़ा फैसला ले लिया जिसमे उसने अपने उत्तरप्रदेश के 6 विधायकों को पार्टी से बाहर करने का फैसला लिया है।

दरअसल, संजय जयसवाल, माधुरी वर्मा, विजय दुबे, मोहम्मद मुस्लिम, दिलनवाज खान, काजिम अली खान पर उत्तरप्रदेश में हुए राज्यसभा चुनाव में क्रॉस वोटिंग करने का आरोप लगा था। इनमे से तीन पर समाजवादी पार्टी को वोट देने का आरोप था तो तीन पर भाजपा के पक्ष में वोटिंग करने का।

इन 6 विधायकों के निष्कासन को लेकर कांग्रेस के दिग्गज नेता गुलाम नबी आजाद ने कहा कि हमारे 6 विधायकों ने क्रॉस वोटिंग की है। मैंने सख्त कार्रवाई करने के लिए पार्टी अध्यक्ष सोनिया गांधी जी को रिकमेंड किया है।

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कैराना मामले में आया एक नया मोड़, राजनीतिक लाभ के लिए भाजपा सांसद करा रहे थे सांप्रदायिक ध्रुवीकरण !!

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NewBuzzIndia:

उत्तर प्रदेश के कैराना मामले में डीआईजी एके राघव ने डीआईजी मुख्यालय को एक रिपोर्ट भेजी है जिसने इस पूरे मामले में एक नया मोड़ दे दिया है। इस रिपोर्ट में कई खुलासे हुए हैं। इसमें कहा गया है कि, कथित पलायन करने वाले हिंदुओं की लिस्ट बनाने वाले भाजपा सांसद हुकुम सिंह ने ये सब सिर्फ इसलिए किया क्योंकि वो यूपी चुनाव में अपनी बेटी को लड़वाना चाहते हैं, जिसके लिए वो अपनी बेटी को जीत दिलाने के लिए साम्प्रदायिक ध्रुवीकरण करवा रहे हैं।
ये ज्ञात हो की हुकुम सिंह ने ही एक लिस्ट जारी की थी जिसमे उन्होंने इस बात का ज़िक्र किया कि किसी विशेष समुदाय के डर और उनकी दहशत से भारी संख्या में हिंदुओं का वहां से पलायन हुआ है।

11 जून को डीजीपी हेडक्वार्टर को भेजी गई रिपोर्ट में डीआईजी ने बताया कि शामली जिले के कैराणा, झिंझाना, कांधला कस्बे में हिंदू और मुस्लिम दोनों समुदाय के लोग रहते हैं। यहां 85 फीसदी मुस्लिम और 15 फीसदी हिंदू आबादी है। आने वाले चुनाव में फायदा उठाने के लिए भाजपा और अन्य सहोयगी दल सांप्रदायिक माहौल बना रहे हैं। साथ ही रिपोर्ट में बड़ी सांप्रदायिक घटना की भी संभावना जताई है। रिपोर्ट में कहा गया है कि ये छोटी घटनाएं तुल देने की वजह से बड़ा रूप धारण कर सकती हैं।

बुंदेलखंड में सूखे से 10,000 से ज्यादा गाय मरी, इन मौतों का ‘अकलाख’ कौन है ??

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NewBuzzIndia:

देश में कुछ राजनीतिक दल गोहत्या को ले कर कितने संवेदनशील हैं इस बात का अंदाज़ा गाय पर हो रही राजनीति से लगाया जा सकता है। देश की राजनीति का काला पन्ना दादरी काण्ड में कैसे गोहत्या के अफवाह में एक व्यक्ति की जान कैसे जाती है इसका साक्षी देश रहा। गोहत्या का मुद्दा दादारीकंड से शुरू हो कर आज फिर से उसी मुहाने पर खड़ा है। यह मुद्दा दुबारा तब गरमाया जब फॉरेंसिक जांच की रिपोर्ट सामने आई।  वहीं स्वराज अभियान के संस्थापक सदस्य व सामाजिक कार्यकर्ता योगेंद्र यादव ने दावा किया है कि सूखा प्रभावित क्षेत्र में लगभग 3 लाख मवेशी अकेले मई महीने में मारे गए हैं, जिनमें से 10 हजार गाय हैं.

योगेंद्र यादव ने बीजेपी पर निशाना साधते हुए कहां कि जहां राष्ट्रीय पार्टी का राष्ट्रीय नेतृत्व गाय को राष्ट्रमाता बनाने और बीफ बिक्री को लेकर डिबेट में उलझा रहता है. वहीं भीषण सूखे से गुजर रहे बुंदेलखंड में कम से कम 3 लाख मवेशी मर चुके हैं.

उत्तर प्रदेश और मध्य प्रदेश के 13 जिले मवेशियों के शव से पटे पड़े हैं

योगेंद्र यादव ने बताया कि यूपी और मध्यप्रदेश के 13 जिलों में मवेशियों के शव पटे पड़े हैं. क्षेत्र में भयानक दुर्गंध फैली हुई है जो बड़े पैमाने पर बीमारी का कारण बन सकती है. वहीं भाजपा के यूपी प्रवक्ता चंद्र मोहन ने राज्य सरकार को इसके लिए दोषी ठहराया है, उनका कहना है कि बुंदेलखंद की बर्बादी के लिए राज्य की समाजवादी सरकार जिम्मेदार है.

वहीं हम केंद्रीय स्तर पर सभी बुंदेलखंड के सांसद इन सूखा प्रभावित इलाकों में जाकर लोगों की मदद कर रहे हैं। एनजीओ के अनुसार उत्तर प्रदेश और मध्यप्रदेश के बुंदेलखंड क्षेत्र में 11,065 गांव हैं, सभी गांवों में औसत 10 से 100 मवेशियों की मृत्यु मई में हुई है इस हिसाब से अकेले मई में पूरे क्षेत्र में कम से कम तीन लाख मवेशियों की मौत हुई है.

योगेन्द्र यादव ने सरकार के नियत और नीति पर प्रश्नचिन्ह उठाते हुए आरोप लगाया कि, सूखाग्रस्त क्षेत्रों में चारों की कमी हर तरफ है। चारा बैंक स्किम केवल पेपर पर है। लोगों को इस स्किम के बारे में पता भी नहीं है। इस योजना से केवल नेताओं और उनके रिश्तेदारों को लाभ मिल रहा है, जिनके पास मवेशी हैं भी नहीं। वो इन योजनाओं का लाभ उठा कर पैसों को हड़पते हैं।

‘सपा’ है गुंडागर्दी वाली सरकार, 346 हिन्दू परिवारों ने दहशत से किया पलायन

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#newbuzzindia/शामली । “उत्तरप्रदेश में समाजवादी पार्टी की सरकार के आने के बाद से ही गुंडागर्दी बड़ चुकी है, बदमाश बेख़ौफ़ हो चुके है। इस दहशत के कारण लोग पलायन कर रहे है।” यह कहना है उत्तरप्रदेश के सांसद हुकुम सिंह का।

हुकुम सिंह ने एक सूची जारी कर दावा किया है कि कैराना से 346 हिंदू परिवारों ने गुंडागर्दी से बनी दहशत के कारण पलायन कर दिया है। उनके इस खुलासे से एक बार फिर राजनीतिक गरमा गई है।

सांसद हुकुम सिंह ने यह भी कहा कि, कैराना के हालात पहले ऐसे नहीं थे, लेकिन जब से प्रदेश में सपा सरकार बनी है, तब से गुंडागर्दी चरम पर है। बदमाशों ने कैराना में रंगदारी न देने पर व्यापारियों की हत्या की, लूटपाट की गई। यही नहीं कैराना के आसपास के गांवों में बहू बेटियों की इज्जत भी सुरक्षित नहीं रही। इसका नतीजा है कि बीते तीन साल के भीतर ही कैराना से बड़े पैमाने पर लोगों ने पलायन किया।पलायन करने वालों में अधिकांश ऐसे व्यापारी हैं, जिनका कारोबार ठीक ठाक चलता था। बदमाशों ने उनसे रंगदारी मांगी। व्यापारियों ने पुलिस से सुरक्षा की गुहार लगाई, मगर पुलिस प्रशासन आम जनता में सुरक्षा का भाव पैदा नहीं कर सका। इसकी वजह से जनता का विश्वास पुलिस प्रशासन से उठ गया और मजबूरी में उन्हें पलायन करना पड़ रहा है।

एक सवाल के जवाब में सांसद ने कहा कि पलायन का मुद्दा कोई चुनावी नहीं है, यह क्षेत्र के लोगों का दर्द है। उनका मकसद क्षेत्र में सुरक्षा व्यवस्था के पुख्ता इंतजाम कराना है। इसी लिहाज से उन्होंने केंद्रीय गृहमंत्री राजनाथ सिंह से मुलाकात की तथा वह जून के अंतिम सप्ताह में कैराना आएंगे। इस दौरान भाजपा जिलाध्यक्ष पवन तरार, डॉ. रामजीलाल कश्यप, डॉ. प्रियंवदा तोमर, वीरेंद्र मलिक, दामोदर सैनी, पुनीत द्विवेदी, जिला पंचायत सदस्य अनुज चौहान, अशोक कोरियर, राकेश गर्ग और आशु नामदेव आदि मौजूद रहे।

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मुसलमानों ने किया फ़ूल मालों से संघ कार्यकर्ताओं का स्वागत, जानिए क्या होगा यूपी के चुनाव पर इसका असर

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NewBuzzIndia: राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ को हमेशा मुस्लिम विरोधी माना जाता है। ये अलग बात की संघ के तरफ से हमेशा इस बात पर सफाई आती है पर जनता के बीच इन बातो को वरीयता नहीं मिलती।

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उत्तर प्रदेश के विधानसभा चुनाव से ठीक पहले प्रदेश की राजनीति करवट लेने लगी है। सपा के मुख्य वोट स्रोतों में से एक मुसलमान भाजपा की ओर रूख करते नजर आ रहे हैं। राजनीति के मंझे हुए खिलाड़ी मुलायम सिंह यादव ने सपने में भी नहीं सोचा होगा कि उनके जिले में आरएसएस के कार्यकर्ताओं का ऐसा जोरदार स्वागत मुसलमान करेंगे। सोमवार को आरएसएस का पथ संचालन इटावा के राजकीय इंटर कालेज मैदान से शुरू होकर शहर भर में भ्रमण किया। इसी दरम्यान पुल कहारन के करीब नगर पालिका परिषद के सभासद मोहम्मद अनीस और उनके मोहल्ले के सैकडों लोगों ने आरएसएस के सभी सदस्यों का जोरदार स्वागत किया।
दरअसल, नरेंद्र मोदी के प्रधानमंत्री बनने के बाद से ही देश भर के विभिन्न हिस्सों से आरएसएस को मुसलमानों का जबरदस्त समर्थन मिल रहा है। हालांकि मुलायम सिंह यादव के गृह नगर में आरएसएस कार्यकर्ताओं का स्वागत उनके लिए खतरे की घंटी है।
बता दें कि जिस सभासद मोहम्मद अनीस ने आरएसएस सदस्यों का स्वागत किया वे समाजवादी पार्टी के कट्टर समर्थकों में से एक माने जाते हैं। मोहम्मद अनीस ने सोमवार को बताया कि हम सभी को भारतीय मानते हैं। हमारे और आरआरएस के बीच कोई अंतर या फिर कोई दूरियां नही हैं जो प्रचारित की जाती है। हालांकि अनीस ने आरएसएस का खुलकर समर्थन करने से बचते हुए कहा कि अभी यह हमारे मेहमान हैं। चूकि इनका इटावा मे कैंप था और मेहमानों का स्वागत करना हमारे धर्म में लिखा हुआ है, इसलिए हमने उनका स्वागत करके अपने आप को गौरांवित महसूस किया।
आरएसएस के पथ संचालन में पुल कहारन के पास एकाएक तस्वीर बदली हुई दिखी जब बड़ी तादाद में मुसलमानों की टोली नगर पालिका परिषद के सभासाद मोहम्मद अनीस की अगुवाई में आरएसएस मेहमानों का स्वागत करने के लिए सड़कों पर उतर आई। उन्होंने पुष्प वर्षा कर उनका स्वागत किया।
कट्टर हिंदूवादी संगठन आरएसएस को लेकर मुस्लिम समाज में जो कोई भी तस्वीर अभी आपने देखी हो लेकिन मुलायम के घर इटावा की यह तस्वीर खुद में अनूठी और बेमिसाल है। साथ ही राजनीतिक गलियारों में भी हलचल मचा रही है। सोमवार का वो पल देश का सांप्रदायिक माहौल खराब कर रहे उन लोगों के मुंह पर करारा तमाचा भी है जो धर्म की राजनीति करते हैं।
आरएसएस के नब्बे साल के इतिहास में पहली दफा मुलायम के गढ़ इटावा मे अपनी जडेÞं जमाने के इरादे से आयोजित किए जा रहे बिग कैंप का आयोजन 12 जून तक होगा। ऐसा कहा जा रहा है कि भारतीय जनता पार्टी के शीर्ष अगुवाकारों की सलाह पर राष्ट्रीय स्वंय सेवक संघ का यह कैंप शुरू किया गया है। इस कैंप के पीछे भाजपा अध्यक्ष अमित शाह का दिगाम भी बताया जा रहा है। वे आगामी विधानसभा चुनाव में मुलायम के गढ़ मे उनको पटखनी देने के इरादे से पूरी तैयारी का खाका खींच रहे हैं। राजनीतिक गलियारों में इसे इटावा में संघ की दस्तक के रूप में भी देखा जा रहा है।
सपा मुखिया मुलायम सिंह यादव के गढ़ इटावा में संघ का 22 दिवसीय संघ शिक्षा वर्ग का शिविर शुरू हो गया है। इटावा के नारायण कालेज में शुरू हुए इस शिविर को यूपी विधानसभा के आगामी चुनाव के लिहाज से बेहद अहम माना जा रहा है। इस शिक्षा वर्ग में 20 जिलों के 450 शिक्षार्थी व शिक्षक शामिल हो रहे हैं। शिक्षा वर्ग में शिक्षाथिर्यों को बौद्धिक स्तर सुधारने के साथ शारीरिक स्तर सुधारने के गुर सिखाए जा रहे हैं। सामाजिक व राष्ट्रहित के साथ हिन्दुत्व व संघ से जुड़े विषयों पर भी प्रतिदिन व्याख्यान चल रहे हैं।

‘हमे 10 साल बाद बोलने वाला प्रधानमंत्री मिला’- अमित शाह

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#newbuzzindia/कासगंज । उत्तरप्रदेश में 2017 में विधानसभा चुनाव आने वाले है। इसको लेकर भाजपा पूरी तरह सक्रिय हो चुकी है। उत्तरप्रदेश का चुनावी रण, अन्य राज्यों की तुलना में अधिक भयावक होगा। इसलिए अभी से ही बीजेपी ने चुनाव की रुपरेखा तैयार कर ली है।

बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह ने उत्तरप्रदेश में भाजपा का प्रभाव बनाना शुरू कर दिया है। अमित शाह ने उत्तरप्रदेश के कासगंज में एक रैली को संबोधित करते हुए राज्य सरकार और कांग्रेस को जमकर आड़े हाथो लिया साथ ही दोनों की कमियों को जनता को गिनाया भी।

अमित शाह ने कहा कि, ‘हमने एक ऐसा प्रधानमंत्री दिया है जो बोल सकता है। 10 साल बाद हमे ऐसा  प्रधानमन्त्री मिल पाया है। इसके पहले कांग्रेस ने ऐसा प्रधानमन्त्री दिया था जो यदि बोलता भी तो उसे या तो सोनिया गांधी सुन पाती या राहुल गांधी। जनता तक उनकी आवाज़ नही पहुच पाती थी।’

श्री शाह ने राज्य सरकार पर भी तंज कसते हुए कहा कि ‘अखिलेश बाबू ने 5 साल में क्या किया है ? क्या उन्होंने युवाओं को लैपटॉप देने का वादा पूरा किया या उत्तरप्रदेश में 24 घंटे बिजली मिलने लगी?’

इसी बीच शाह ने मोदी की तारीफ़ करते हुए कहा कि ‘मोदी यदि विदेश भी जाते है तो वहां की जनता उनका गर्मजोशी से स्वागत करती है। और इस बात की जानकारी पूरी दुनिया को मिलती है।’

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साध्वी प्राची के फिर से बिगड़े बोल, ‘मुस्लिम मुक्त भारत हो।’

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NewBuzzIndia:

  अगले साल उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव होने हैं। विधानसभा में अपनी बढ़त बढ़ाने के नज़रिए से उत्तर प्रदेश चुनाव भाजपा के लिए बहुत महत्वपूर्ण है। ऐसे में साध्वी प्राची के ऐसे बयान जो सांप्रदायिक तनाव को और ज्यादा बढ़ाने का काम कर रहा है, बीजेपी का नुकसान ही करेगा।

रुड़की में एक सभा में साध्वी प्राची ने एक बार फिर विवादित बोल कहे हैं। साध्वी कांग्रेस मुक्त भारत बना चुके अब मुसलमान मुक्त भारत बनना चाहिए। रुड़की पहुंची साध्वी प्राची ने यहां कई विवादित ब्यान दिए। उन्होंने  न सिर्फ शाहरूख खान और आमिर खान पर हमला बोला बल्कि यह तक कह डाला कि हम कांग्रेस मुक्त भारत बना चुके हैं अब मुसलमान मुक्त भारत बनना चाहिए जिस पर हम काम कर रहे हैं।

साध्वी प्राची ने शाहरुख खान पर बोलते हुए कहा कि दो फ़िल्म फ्लॉप होते ही शाहरुख़ को हिंदुओं की याद आने लगी है। ऐसा ही आमिर खान की आने वाली फिल्म के साथ होना चाहिए। आमिर की फ़िल्म में चूहे ही दंगल करते नजर आएंगे। ये खाते हिंदुस्तान की और गाते हैं पाकिस्तान की।

रुड़की के लंढोरा में कुंअर प्रणव सिंह चैम्पियन के महल पर हुए हमले के बारे में उन्होंने कहा रंगमहल पर जो हमला हुआ है वो एक सोची समझी साजिश है। हिन्दुस्तान को कांग्रेस मुक्त तो हमने कर दिया अब जरूरत है कि मुस्लिम मुक्त भारत बनना चाहिए जिस पर हम काम कर रहे हैं।

उत्तर प्रदेश में होने वाले विधानसभा चुनाव में मुख्यमंत्री पद के लिए भाजपा के चेहरे के बारे में उन्होंने कहा अगर भाजपा योगी आदित्यनाथ जी को मुख्यमंत्री का चेहरा बनाती है तो भाजपा की 300 सीट आएंगी और उत्तर प्रदेश अत्याचार से मुक्त होगा। मुस्लिम मुक्त उत्तर प्रदेश होगा और उत्तम प्रदेश बन जाएगा।

कफ़न से लिपटे बेटे के लाश को देख कर बोली एसपी की माँ, ‘एक बार तो माँ बोल दे मेरे लाल।’

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जब SSP और सभी आला अफसर अपने एसी बंगले में आराम फरमा रहे थे तब उपद्रवियों से भिड़ने के लिए अकेले निकल पड़े थे SP । उपद्रवियों के हमले में शहीद हुए SP मुकुल द्विवेदी की लाश जब उनके सरकारी आवास पर पहुँची तो परिवार में कोहराम मच गया। जिस तरह से उनकी माँ उनके लाश से लिपट के रो रही थीं उसे देख वह खड़े लोगों ने भी अपने आंसू रोक ना सके।

उठ जा मेरे लाल। देख तेरी मम्मी आ गई है। बस! एक बार तो मम्मी कह दे। रुंधे गले से बस इतना निकला और बेटे की लाश से लिपटकर रोने लगीं शहीद एसपी सिटी मुकुल द्विवेदी की मां मनोरमा द्विवेदी। पत्नी और बच्चों का तो रो-रोकर बुरा हाल था। रोते जाते और कहते, अब परिवार की देखभाल कौन करेगा।
एसपी सिटी मुकुल द्विवेदी मूल रूप से औरेया जिले के रहने वाले थे। इनके परिवार में पिता श्रीलचंद, मां मनोरमा देवी और पत्नी अर्चना देवी हैं। बेटे की मौत की खबर पाकर मां मनोरमा देवी शुक्रवार को मथुरा में उनके सरकारी आवास पर पहुंची। जैसे ही यहां मुकुल द्विवेदी का शव पहुंचा कोहराम मच गया।

मां मनोरमा देवी बेटे के शव से लिपटकर बिलखने लगीं। …बेटा उठ जा। देख तुझे तेरी मम्मी बुला रही है। एक बार सबसे बात तो कर लो। देख सारे परिवार वाले आ गए। मां का हर वाक्य वहां उपस्थित लोगों के हृदय में शूल सा लगा। लेकिन किसी की हिम्मत नहीं हो रही थी कि उन्हें सांत्वना दे। मां बिलखती हुई सवाल करती रहीं…पापा को दवा के बारे में कौन पूछेगा। मां से रोज बात कौन करेगा। छोटे-छोटे बच्चे हैं मेरे लाल के कौन रखेगा उनका ख्याल। पत्नी का भी रो-रोकर बुरा हाल था।

एसपी सिटी मुकुल द्विवेदी को उनके एक ज्योतिष मित्र ने बताया था कि उनकी गृह दशा ठीक नहीं चल रही है। कोई संकट आ सकता है। महामृत्युंजय मंत्र का जाप कराने की सलाह दी गई थी। बताया जाता है कि जाप शुरू भी हो गया था। मगर इससे पहले कि जाप पूरा होता उन पर संकट आ गया

मथुराकांड: संबित पात्रा के पांच सवालों ने की अखिलेश यादव की बोलती बंद

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NewBuzzIndia:  मथुरा में हुए सामाजिक अव्यवस्था पर संबित पात्रा ने उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री अखिलेश यादव से पांच तीखे प्रश्न पूछे हैं, जिसपर अभी तक अखिलेश यादव के तरफ से कोई प्रतिक्रिया नहीं आई।

गौरतलब है कि, बीजेपी के राष्ट्रीय प्रवक्ता डॉ संबित पात्रा ने मथुरा काण्ड को लेकर उत्तर प्रदेश के मुख्य्मंत्री अखिलेश यादव से काफी तीखे सवाल पूछे हैं। कल हुई इस घटना में दो पुलिस अफसरों समेत करीब 18 लोगों की मौत हो गयी है। इस घटना के बाद एक बार फिर से उत्तर प्रदेश की कानून व्यवस्था पर सवाल खड़े होने शुरू हो गए हैं। संबित पात्रा ने भी आज एक प्रेस कॉन्फ्रेंस करके घटना पर अपनी प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए अखिलेश यादव के ऊपर कई सवाल दागे –

पहले प्रश्न में उन्होंने अखिलेश यादव से पूछा कि जवाहर बाग़ में कब्ज़ा करके बैठे इस भू माफिया को किसका राजनैतिक संरक्षण प्राप्त था।

दूसरे सवाल में उन्होंने कहा कि मीडिया काफी तफ्शीश के साथ हर दिन इस पूरे मामले को उजागर कर रही है। मीडिया का श्पष्ट कहना है कि इस घटना का जो मास्टरमाइंड था वह किस प्रकार की करतूतों को अंजाम दे रहा था उससे सभी लोग भली भाँती परिचित थे, उसपर पहले भी 15 लोगों पर जानलेवा हमले करने का आरोप लगा था और जांच भी चल रही थी। इसके अलावा मथुरा और आस पास के लोग उस व्यक्ति और उस पूरे समूह के कार्यकलापों से परेशान थे। ऐसे में वह व्यक्ति ढाई-तीन साल तक मथुरा की गलियों में ढाई-तीन साल तक सीना चौड़ा करके घूमता रहा, यह सब कुछ प्लान करता रहा, प्रशासन और पुलिस शांत रही, यह ऐसे ही तो नहीं हो सकता है, सबकुछ जानते हुए उसकी गिरफ्तारी क्यों नहीं हुई??

तीसरे प्रश्न में उन्होंने कहा – अभी हमारी प्रेस कांफ्रेंस के पहले हमने उत्तर प्रदेश के DGP की प्रेस कांफ्रेंस को सुना, उन्होंने बहुत ही श्पष्टता के साथ कहा कि जब पुलिस वहां पर पहुंची तो पहले से ही कुछ लोग बन्दूक लेकर पेड़ों के ऊपर बैठे हुए थे, पुलिस को देखते ही उन्होने ताबड़तोड़ गोलियां चलाना शुरू कर दिया जिसमें दो पुलिसकर्मी अपना जीवन खो बैठे। संबित पात्रा ने कहा कि ये तो बड़ा आश्चर्य का विषय है, इतना बड़ा पुलिस महकमा, पुलिस बिना तैयारी के वहां चली जाती है, पुलिस में किसी प्रकार का इंटेलिजेंस ही नहीं कि लोग पेड़ पर बन्दूक लेकर बैठे हुए हैं और गोली चला सकते हैं। उन्होंने कहा कि जो भी व्यक्ति पुलिस में भर्ती होते हैं वो जनता की हिफाजत के लिए भर्ती होते हैं, वे मुस्तैदी के साथ काम करना चाहते हैं लेकिन अगर इंटेलिजेंस ही नहीं है कि पेड़ पर पहले से ही लोग बन्दूक लेकर बैठे हुए हैं तो हम उत्तर प्रदेश की सरकार और मुख्यमंत्री अखिलेश यादव से पूछना चाहते हैं कि जाने से पहले पुलिस ने तैयारी क्यों नहीं की। ये इंटेलिजेंस कहाँ नदारद थी।

चौथे सवाल में संबित ने कहा – तमाम न्यूज चैनल्स दिखा रहे हैं कि किस प्रकार का असलहा और बारूद जवाहर बाग़ से  निकाला गया है, वहां पर बम, बारूद और बंदूकों का जमावड़ा था, यह कोई रातोंरात तो नहीं हो गया, जिस तादात में यह इकठ्ठे हुए हैं, ये खुद अपने आप में बयान करता है कि ये वर्षों का काम था, दो ढाई वर्ष में धीरे धीरे करके एक मिनी वार जोन, या एक मिनी युद्ध मैदान तैयार किया गया था, उसके अन्दर इतना असलहा, बम बारूद इत्यादि है, टीवी यह भी दिखा रही है कि आधुनिक हथियार भी वहां पर मौजूद था। प्रश्न यह है कि जब उत्तर प्रदेश के सेंटर यानी मथुरा में इतना बम बारूद इकठ्ठा हो रहा था यह छोटी बात नहीं है, मथुरा कोई छोटा शहर नहीं है, आखिर यह किसके बल पर हुआ, इतना असलहा ऐसे ही इकठ्ठा नहीं हो जाता है, संभव ही नहीं है बिना कि बिना पुलिस और प्रशासन की जानकारी के इतना असलहा वहां इकठ्ठा हो जाय, जब असलहा आता है तो कई चेक पोस्ट पर उनकी चेकिंग होती है, क्या उनकी कोई चेकिंग नहीं हुई? जिस लोगों ने यहाँ पर इतना असलहा और बम बारूद इकठ्ठा किया, उसने पूछताछ नहीं की गयी या भ्रष्टाचार के कारण हर चेकपोस्ट पर उन्हें छोड़ दिया गया। यह दिखाता है कि उत्तर प्रदेश में प्रशासन की हालत क्या है।

संबित ने पांचवे सवाल में कहा – पुलिस का काम जनता की हिफाजत करना है, जब खुद पुलिस हताहत हो जाए, जब खुद पुलिस अपनी जान के लिए परेशान रहे तो जनता की हिफाजत कौन करेगा, मै NCRB का डेटा लेकर बैठा हूँ। उन्होंने कहा कि विगत कुछ वर्षों में यानी जब से सपा की सरकार बनी है, पुलिस से किस प्रकार का वर्ताव किया गया है, वह भी सोचनीय है।

उन्होंने बताया कि दो दिन पहले आजमगढ़ पुलिस थाने में कुछ लोगों की भीड़ एक थाने पर पथराव करती है, जबरजस्ती थाने में घुस जाती है और पुलिस एन जिस व्यक्ति को बंद किया होता है उसे छुड़ा लेती है।

प्रतापगढ़ के कुंडा पुलिस स्टेशन में एक होमगार्ड को गोली मार दी जाती है।, पीलीभीत में हेडकांस्टेबल को गोली मार दी जाती है।

बदायूं में दो पुलिसकर्मी जब साउंड की आवाज कम कराने जाते हैं तो उनकी गोली मारकर हत्या कर दी जाती है।

उन्होंने बताया कि NCRB का डेता बताता है कि जब से अखिलेश यादव की सरकार बनी है पुलिस पर इस प्रकार की वारदात बढ़ गयी हैं।

उन्होंने बताया कि 2014-15 में पुलिस वालों पर तीन सौ अटैक हुए। विगत चार वर्षों में 1054 बार पुलिस पर अटैक हुआ है।

उन्होंने कहा कि जिस राज्य में पुलिस ही सुरक्षित नहीं है उस राज्य में जनता का क्या हाल होगा इसका आप अंदाजा लगा सकते हैं। पुलिस की तैयारी पर भी कई प्रश्न उठते हैं, जिस पुलिस को तैयार रहना चाहिए, वह तैयार नहीं रहती, आज एसपी नहीं रहे हमारे बीच, लोग एसपी को मार दे रहे हैं, SHO मर जाते हैं। जब एसपी और SHO को ही DGP और मुख्यमंत्री नहीं बचा सकते तो आप आदमी को मुख्यमंत्री किस प्रकार से हिफाजत कर सकते हैं।

उन्होंने कहा कि हम अखिलेश यादव से इन पाँचों प्रश्नों का उत्तर चाहते हैं।

उन्होंने कहा कि अखिलेश यादव ने उत्तर प्रदेश को गुंडाराज बना दिया है।

संबित पात्रा ने कहा कि अखिलेश यादव को नैतिक रूप से इस घटना की जिमेदारी नहीं लेनी चाहिए।

राज्यसभा में भाजपा ने बड़ाई रफ़्तार, कांग्रेस से अब सिर्फ 5 कदम दूर !

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Newbuzzindia: राज्यसभा के दो वर्ष पर होने वाले चुनाव में इस साल 55 सीटों के लिए चुनाव होना है। इनमें 17 पर भाजपा की जीत तय है। भाजपा अतिरिक्त मतों के जरिए कुछ और सीटें जीतना चाहती है। भाजपा के पास 15 में से पांच राज्यों में कुछ अतिरिक्त मत हैं। राज्यसभा के लिए 11 जून को मतदान होना है। भाजपा की कोशिश उच्च सदन में अपना न केवल संख्या बल बढ़ाने बल्कि यह भी सुनिश्चित करने की है कि कांग्रेस कोई भी अतिरिक्त सीट नहीं जीत पाए। राज्यसभा में जीएसटी विधेयक सहित कई विधेयकों पर कांग्रेस ने अड़ंगा लगा रखा है।

भाजपा अब तक 14 राज्यों के लिए 18 प्रत्याशियों के नाम घोषित कर चुकी है। इनमें 17 की जीत तय है। इसके अलावा केंद्र में सत्तारूढ़ यह दल झारखंड, हरियाणा, उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश और उत्तराखंड से एक-एक सीट पर नजर गड़ाए हुए है।

झारखंड में जहां भाजपा केंद्रीय मंत्री मुख्तार अब्बास नकवी की जीत को लेकर आश्वस्त है, उसने दूसरा उम्मीदवार उद्योगपति महेश पोद्दार को बनाया है। झारखंड में उनकी जीत के लिए भाजपा को जो संख्याबल चाहिए, वह नहीं है।

झारखंड की छह में से दो सीटें खाली हो रही हैं क्योंकि भाजपा के एम. जे. अकबर और कांग्रेस के धीरज साहू अपना कार्यकाल पूरा कर रहे हैं।

उत्तर प्रदेश में 11 खाली सीटों के लिए 12 प्रत्याशी हैं। भाजपा एक सीट आसानी से जीत जाएगी।

यहां भाजपा के पास 41 विधायक हैं। राज्यसभा में जाने के लिए 37 मतों की जरूरत है। चार अतिरिक्त मतों के साथ भाजपा ने स्वतंत्र उम्मीदवार प्रीती महापात्रा का समर्थन किया है जो गुजरात के उद्योगपति की पत्नी हैं। उद्योगपति को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का करीबी माना जा रहा है।

हरियाणा में भाजपा के पास दो उम्मीदवारों को राज्यसभा में भेजने के लिए पर्याप्त संख्या बल नहीं है। यहां केंद्रीय मंत्री चौधरी बीरेंदर सिंह पहले उम्मीदवार हैं, लेकिन भाजपा के पास जो अतिरिक्त वोट हैं उससे मीडिया समूह के मालिक सुभाष चंद्रा का समर्थन करने का निर्णय लिया है जो यहां से स्वतंत्र उम्मीदवार के रूप में हैं।

मध्य प्रदेश में भाजपा ने अनिल माधव दवे और एम. जे. अकबर को उम्मीदवार बनाया है। वहां की तीन खाली सीटों में तीसरी सीट के लिए भाजपा के पदाधिकारी विजय गोटिया को स्वतंत्र उम्मीदवार के रूप में उतारा है।

यह कदम कांग्रेस के उम्मीदवार विवेक तंखा को रोकने के लिए है। उन्हें जीत के लिए सिर्फ एक अतिरिक्त वोट चाहिए।

मध्य प्रदेश में प्रत्येक राज्यसभा की सीट के लिए 58-58 मतों की जरूरत है। भाजपा दो सीटें आसानी से जीत जाएगी जबकि तीसरे सीट के लिए भाजपा के पास 50 विधायक बचेंगे।

भाजपा की अतिरिक्त सीटें जीतने के प्रयास के बावजूद 245 सदस्यीय राज्यसभा में कांग्रेस फिर भी सबसे बड़ी पार्टी रहेगी। कांग्रेस के करीब 59 सदस्य रहेंगे जबकि बीजेपी 54 सदस्यों के साथ कांग्रेस के करीब पहुँच जाएगी। कांग्रेस से फासला कम होने के कारण अगर बीजेपी को बिल पास कराना होगा तो उसे अपनी सहयोगी पार्टियों के साथ साथ क्षेत्रीय पार्टियों पर निर्भर रहना पड़ेगा। कुल मिलकर यह भी कह सकते हैं कि आने वाले समय में राज्य सभा में कांग्रेस की पॉवर कम हो जाएगी।

इस वक्त राज्य सभा की 241 सीटों में कांग्रेस के 64 जबकि बीजेपी के पास 49 सदस्य हैं, 12-12 सदस्यों के रिटायरमेंट के बाद कांग्रेस के 52 जबकि बीजेपी के 37 सांसद बचेंगे, बीजेपी की करीब 17 सीटों पर जीत तय है, मतलब पांच सीटें किसी ना किसी पार्टी से छीन ली जाएंगी, बीजेपी ने कुछ निर्दलीय विधायकों को भी समर्थन देने का मन बनाया है जिसमें से हरियाणा से जी-न्यूज मीडिया के मालिक सुभाष चंद्रा भी शामिल हैं, अगर सब कुछ सही रहा तो इस चुनाव में जहाँ बीजेपी को लाभ होगा वहीँ कांग्रेस को नुकसान होगा।

कुल मिलाकर बीजेपी ने राज्य सभा में जबरजस्त गणित भिड़ा रखा है लेकिन अंतिम नतीजा 11 जून के बाद ही आएगा।

कुल 55 सीटें जो खाली हो रही हैं, उनमें 12-12 भाजपा और कांग्रेस की हैं। 6 बसपा, 5 जनता दल यू, 3 समाजवादी पार्टी, 2 बीजू जनता दल, 3 अखिल भारतीय द्रविड़ मुनेत्र कड़गम (AIDMK), 2-2 तेलुगु देशम, DMK और राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी की हैं जबकि 1-1 शिवसेना और शिरोमणि अकाली दल और स्वतंत्र सदस्य विजय माल्या की सीट हैं।

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