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मुख्यमंत्री शिवराज के उपवास के बाद मध्यप्रदेश में 7 और किसानों ने की आत्महत्या !

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मध्यप्रदेश में किसानों की खुदकुशी के मामले थमने का नाम नहीं ले रहे है. मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान के उपवास के बाद राज्य में सात किसान खुदकुशी कर चुके हैं. अधिकांश मामलों में कर्ज के बोझ को किसानों की खुदकुशी की वजह बताया जा रहा है.

ताजा मामला राज्य के होशंगाबाद जिले का है. जहां बाबई के चपलासर गांव में किसान नर्मदा प्रसाद ने सूदखोरों से परेशान होकर जहरीला पदार्थ खा लिया. नर्मदा प्रसाद को बेहोशी की हालत में भाई ने अस्पताल में भर्ती कराया, जहां इलाज के दौरान किसान ने दम तोड़ दिया.

परिजनों ने बताया कि नर्मदा प्रसाद ने हाल ही में 45 हजार रुपए में मूंग बेची थी. फसल बेचने से मिले रुपए कथित तौर पर सूदखोरों ने छीन लिए, जिसकी वजह से नर्मदा प्रसाद काफी परेशान थे. स्थानीय पुलिस की जांच में सूदखोरों से परेशानी का जिक्र आया है. हालांकि, पुलिस का कहना है कि आत्महत्या की वजह जानने के लिए पूरे मामले की विस्तृत जांच की जा रही है.
राज्य में एक जून से किसानों ने आंदोलन शुरू किया था. आंदोलन के दौरान पुलिस फायरिंग में छह लोग मारे गए थे, जिसके बाद हिंसा को रोकने के लिए मुख्यमंत्री चौहान ने दो दिनी उपवास किया था. शिवराज के उपवास खत्म होने के बाद राज्य में अब तक सात किसान खुदकुशी कर चुके हैं.

1. मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान के पैतृक जिले सीहोर की रेहटी तहसील के जाजना गांव में 52 साल के दुलीचंद ने कथित तौर पर जहर खाकर जान दे दी. परिजनों के मुताबिक, दुलीचंद कर्ज की वजह से परेशान थे.

2. होशंगाबाद जिले की सिवनी मालवा तहसील के भैरूपुर गांव में 68 साल के माखनलाल ने कर्ज से परेशान होकर फांसी लगाकर जान दे दी.

3. विदिशा के हरिसिंह जाटव ने कथित तौर पर कर्ज की परेशानी और पटवारी के जमीन सीमांकन में किए फर्जीवाड़े से आहत होकर जहर खाकर जान दे दी.

4. राज्य में बुधवार को दो किसानों ने खुदकुशी कर ली. बालाघाट जिले में किसान रमेश बसेने ने जहर खाकर खुदकुशी कर ली. परिजनों ने बताया कि, रमेश बसेने पर करीब दो लाख रुपए का कर्ज था. रमेश ने स्थानीय सहकारी सोसायटी से यह कर्ज लिया था.

5. वहीं, बड़वानी जिले के सेंधवा ग्रामीण थाना क्षेत्र के ग्राम पिसनावल में भी किसान जुमला ने कीटनाशक पीकर आत्महत्या कर ली. मृतक किसान की पत्नी ने कहा है कि वह कर्ज की वजह से परेशान था.

6. शिवपुरी जिले के इंदार थाना अंतर्गत ग्राम बिनेका में रहने वाले एक किसान का शव बुधवार को उसके ही खेत के पास नीम के पेड़ पर फांसी के फंदे पर लटका मिला. मृतक के बेटे ने बताया कि पिता के पास पौने तीन बीघा जमीन थी, जिसमें तीन बार फसल बर्बाद हुई. अब बोबनी के लिए कोई व्यवस्था नहीं होने की वजह से वे परेशान थे.

7. अब राजधानी से सटे होशंगाबाद जिले में किसान नर्मदा प्रसाद ने सूदखोरों से परेशान होकर जान दे दी.

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मंदसौर में किसानों की मौत पर जी न्यूज़ के एंकर रोहित सरदाना ने मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान को लिया आड़े हाँथ !

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जी न्यूज़ के एंकर रोहित  सरदाना आम तौर पर अपनी राष्ट्रवादी विचारधारा के लिए जाने जाते है . रोहित सरदाना की पत्रकारिता में आम तौर पर राष्ट्रवाद प्रमुखता से दिखाई देता है . विरोधी उन्हें मोदी भक्त और बीजेपी समर्थक भी कहा करते है . रोहित सरदाना ने आज अपनी छवि से हटकर मंदसौर  में हुई किसानों की मौत पर मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान को आड़े हांथों लिया है . मंदसौर में किसानों की मौत और शिवराज के अनशन को लेकर रोहित सरदाना ने अपने फेसबुक पोस्ट पर लिखा है की –

 

पिछले डेढ़ दशक से मध्यप्रदेश के मुखिया शिवराज सिंह चौहान ने किसान आंदोलन और उससे भड़की आग को क़ाबू करने के लिए रखा अपना उपवास, डेढ़ दिन के भीतर ही तुड़वा लिया.

मंदसौर में किसान आंदोलन पे चली गोली और उसके दौरान/ बाद में बीजेपी सरकार की कारवाई से ऐसा लगा जैसे शिवराज सिंह चौहान डेढ़ दशक नहीं डेढ़ महीने पहले ही सीएम बने हों!

6 लोग मर गए लेकिन चौबीस घंटे तक सरकार कहती रही कि गोली पुलिस ने नहीं चलाई. जब ये तय हो गया कि गोली पुलिस ने ही चलाई तो कहा गया कि आंदोलन में असामाजिक तत्व घुस आए थे, कांग्रेस के विधायकों और नेताओं ने मामले को भड़काया था. लेकिन भड़काने वाले भी राहुल गांधी के साथ मोटर साइकल पे छुट्टे घूमते रहे किसी ने उनको पकड़ा नहीं. इतने से भी बात नहीं बनी तो कहा गया कि मरने वाले किसान ही नहीं थे. ठीक है किसान नहीं थे, फ़िदायीन दस्ते के सदस्य भी तो नहीं होंगे?

किसान आंदोलन से किसान का भला भले ना हुआ हो, मध्य प्रदेश में मरी पड़ी कांग्रेस को चुनाव के पहले नयी ज़िंदगी मिल गयी. पंद्रह साल की सरकार के बाद बीजेपी को बहाना मिल गया, चेहरा बदलने के लिए.

मंदसौर गोलीकांड मे मृत किसानों की लाशों पर मुख्यमंत्री शिवराजसिंह चौहान लगा रहे है बोली : कमलनाथ

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कांग्रेस के राष्ट्रीय महासचिव कमलनाथ ने कहा है कि मंदसौर गोलीकांड मे मृत किसानों की लाशों पर मुख्यमंत्री शिवराजसिंह चौहान बोली लगा रहे है। यह बहुत ही शर्म की बात है।

मुख्यमंत्री ने पहले पांच लाख रू देने की घोषणा की फिर दस लाख रू और फिर एक करोड रू देने की बात करने लगे। उन्होने कहा इस गोलीकांड के लिए मुख्यमंत्री खुद जिम्मेदार हैं और उन्हे तत्काल इस्तीफा देना चाहिए।

उन्होने कहा ऱाहुल गांधी को मंदसौर और नीमच जाने की अभी अनुमति नहीं मिली है। हम सभी वहा जाएंगे। किसानों के दुःख दर्द मे शामिल होंगे। पुलिसकर्मियों ने ही गोली चलाई है,यह साबित हो चुका है।हम किसानों के साथ है। उनकी मांगों का सर्मथन करते है।

मप्र सरकार की नीति किसान विरोधी है, सबसे ज्यादा अपमान किसानों का मप्र ही हुआ है। सरकार गलत बयान देकर लोगों को गुमराह कर रहै है। नीमच जाने वाला था, लेकिन जिला प्रशासन ने अनुमति नही दी गई। जैसे ही अनुमति मिलेगी जल्द वहा के लिए रवाना हो जाऊँगा।देश का किसान किसी दल से नही जुड़ा है। असमाजिक तत्व पर यह आरोप लगा रहे है। यह लोग बीजेपी से जुड़े ही लोग है

मोदी के बाद 10 करोड़ के घोटाले में फसे मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान !

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shivraj singh chauhan
मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान की फाइल फोटो

Newbuzzindia : कुछ दिनों पहले राहुल गांधी ने पीएम मोदी पर सहारा-बिड़ला से 45 करोड़ की रिश्वत लेने के आरोप लगाए थे । इसके बाद अब कांग्रेस ने सहारा-बिड़ला समूह की एंट्री Twitter पर सार्वजानिक कर दी है ।

rahul gandhi

 

मोदी के घोटाले

इसके साथ ही कांग्रेस ने मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान पर 10 करोड़ और छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री रमन सिंह और 4 करोड़ लेने का आरोप लगाया है ।

कांग्रेस के अनुसार शिवराज सिंह चौहान ने 29 सितंबर और 1 अक्टूबर को 5-5 करोड़ की रिश्वत ली है । वहीं रमन सिंह ने भी 1 अक्टूबर को 4 करोड़ की रिश्वत सहारा से ली थी ।

shivraj singh chauhan

देखना दिलचस्प होगा की मोदी सरकार कांग्रेस के इन आरोपों पर जांच बैठती है या नही ।

शिवराज सरकार ने 156 महीने के कार्यकाल में किये 156 घोटाले । देखें लिस्ट !

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Newbuzzindia : शिवराज सिंह चौहान और भाजपा को वैसे तो मध्यप्रदेश की सत्ता में रहते हुए 13 साल से ऊपर हो गए है । शिवराज सिंह चौहान की लोकप्रियता की भी कोई कमी नही है । फिर चाहे वो व्यापम घोटाले के कारण हो या उसके बाद हुई मौतों के कारण हो । 

वैसे शिवराज सिंह चौहान के राज में सिर्फ व्यापम और सिंहस्थ घोटाले नही हुए । भाजपा के राज में ऐसे और भी कई घोटाले हुए है । ट्विटर और फेसबुक पर इन दिनों शिवराज सिंह चौहान के कार्यकाल में हुए घोटालों की लिस्ट काफी शेयर की जा रही है । 

इस लिस्ट में शिवराज सिंह चौहान के 156 घोटालों के नाम है । जिनमे से कई घोटाले साबित हो चुके है । तो कई घोटालों की जांच चल रही है । कई घोटाले तो ऐसे भी है जिनको पहले ही दबा दिया गया । अब इन घोटाले की लिस्ट में कितनी सच्चाई है यह तो शिवराज जी ही बेहतर जानते होंगे । आप बस यह लिस्ट पर गौर करें । 

  1.व्यापम महाघोटाला

  2.सिंहस्थ महाघोटाला

  3.DMAT घोटाला

  4.डम्पर काण्ड

  5.कंजेमिया सम्रद्धि योजना CM हाउस पर 7 सालों से लगा टेंट

  6.CM के परिवारजनों द्वारा बुधनी के आसपास जमीनी खरीदी कांड

  7.मुख्यमंत्री के साले द्वारा फर्जी दस्तावेजों से PWD पंजीयन

  8.शौचालय घोटाला

  9.मनरेगा मजदूरी घोटाला

  10.PDS घोटाला

  11.मनरेगा घोटाला

  12.CM के साले को अधिमान्य पत्रकार कार्ड काण्ड

  13.NRHM घोटाला

  14.नकली खाद घोटाला

  15.गेंहू खरीदी घोटाला

  16.नकली बीज खरीदी घोटाला 

  17.15 हज़ार से ज्यादा किसानों में की आत्म हत्या

  18.धान खरीदी घोटाला

  19.मणीखेडा हरसी नहर घोटाला

  20.बाणसागर परियोजना घोटाला

  21.पन्ना के नए बाँध निर्माण में घोटाला

  22.बुंदेलखंड पैकेज घोटाला

  23.तेंदू पत्ता लाभांश वितरण घोटाला

  24.CM द्वारा संरक्षित रेत घोटाला

  25.ड्रिप एरीगेशन खरीदी घोटाला

  26.को-ऑपरेटिव हाउसिंग सोसाइटी घोटाला 

  27.किसान फसल बीमा घोटाला

  28.बिजली खरीदी घोटाला

  29.फसल मुआवजा वितरण घोटाला 

  30.लैंको अमरकंटक बिजली घोटाला

  31.रिलायंस जमीन घोटाला

  32.इंदौर विकास प्राधिकरण में जमीन घोटाला

  33.भोपाल में गैमन इंडिया घोटाला 

  34.सीहोर में कोहली लिमिटेड द्वारा पट्टे की 328 एकड़ खरीदी घोटाला 

  35.नमक खरीदी घोटाला

  36.परिवहन आरक्षक भर्ती घोटाला

  37.पटवारी भर्ती घोटाला

  38.पुलिस भर्ती घोटाला

  39.वन रक्षक भर्ती घोटाला

  40.शिक्षाकर्मी भर्ती घोटाला

  41.मिड डे मील घोटाला 

  42.प्रधानमन्त्री सड़क घोटाला

  43.मुख्यमंत्री सड़क घोटाला 

  44.BOT टोल सड़क घोटाला 

  45.रीवा बैंक घोटाला 

  46.ट्रान्सफर घोटाला 

  47.आबकारी घोटाला 

  48.वन अधिनियम पट्टा वितरण घोटाला 

  49.पोषण आहार घोटाला 

  50.हाउसिंग बोर्ड घोटाला 

  51.अवैध उत्खनन घोटाला 

  52.आरएसएस जमीन घोटाला 

  53.यूनिफार्म खरीदी घोटाला 

  54.साईकिल घोटाला 

  55.गाय बैल खरीदी घोटाला 

  56.बलराम तालाब घोटाला 

  57.पुस्तक खरीदी घोटाला 

  58.सहकारिता ऋण वितरण घोटाला 

  59.भोपाल का चंदा माम काण्ड 

  60.गौ शाला अनुदान घोटाला 

  61.वृक्षरोपण घोटाला 

  62.नर्मदा घाटी नहर घोटाला 

  63.अवैध वन कटाई घोटाला 

  64.बाढ़ राहत घोटाला 

  65.MP एग्रो घोटाला 

  66.लघु उद्योग निगम खरीदी घोटाला 

  67.नल कूप खनन घोटाला 

  68.तकिया गद्दा खरीदी घोटाला 

  69.मच्छरदानी खरीदी घोटाला 

  70.टाइपिंग बोर्ड घोटाला 

  71.संस्कृत बोर्ड घोटाला 

  72.ओपन स्कूल परीक्षा घोटाला 

  73.ब्लैक बोर्ड पुताई घोटाला 

  74.किताब छपाई घोटाला 

  75.एक्स-रे टेक्नीशयन घोटाला 

  76.जननी प्रसव अनुदान घोटाला 

  77.सहरिया प्रोत्साहन राशि घोटाला 

  78.गौण खनिज परिवहन घोटाला

  79.कपिल धारा घोटाला

  80.प्रोफेसर भर्ती घोटाला 

  81.राज्य शिक्षा केंद्र ट्रेनिग घोटाला 

  82.आरएसएस की देवपुत्र पत्रिका घोटाला 

  83.MPSID घोटाला

  84.आहार परिवहन घोटाला 

  85.फ़र्टिलाइज़र परिवहन घोटाला 

  86.स्कूल छात्रवृत्ति घोटाला 

  87.बारदाना घोटाला 

  88.बीएड डीएड घोटाला 

  89.कॉलेज छात्रवृत्ति घोटाला 

  90.कन्यादान योजना टेंडर घोटाला 

  91.स्वच्छ भरता मिशन प्रचार घोटाला 

  92.पंचायत निर्माण में कमीशन घोटाला 

  93.मंदी बोर्ड टैक्स चोरी घोटाला 

  94.कन्यादान नकली जेवर घोटाला 

  95.किसान कल्याण भ्रमण घोटाला 

  96.राजीव गाँधी बिजलीकरण घोटाला 

  97.बीमा अस्पताल खरीदी घोटाला 

  98. बुंदेलखंड पैकेज में पेयजल घोटाला 

  99. राज्य शिक्षा केंद्र लैपटॉप घोटाला 

  100.रेशम किसान कल्याण घोटाला 

  101.छात्र मोबाइल वितरण घोटाला 

  102.बालाघाट फर्जी टीपी घोटाला 

  103.सहकारिता विभाग भर्ती घोटाला 

  104.मप्र नान घोटाला 

  105.बुंदेलखंड पशुपालन घोटाला 

  106.हरदा सहकारी बैंक खरीदी घोटाला 

  107.ट्रांसफार्मर आयल खरीदी घोटाला 

  108.आपदा निधि घोटाला 

  109.CM स्वेच्छानुदान घोटाला 

  110.AKVN भूमि घोटाला 

  111.ऑटो टेस्टिंग ट्रैक घोटाला 

  112.फर्जी राशन कार्ड घोटाला 

  113.रेशम घोटाला 

  114.समग्र आईडी घोटाला 

  115.नापतोल इंस्पेक्टर घोटाला 

  116.भूमि लीज़ घोटाला 

  117.इन्वेस्टर समिट घोटाला 

  118.सेडमैप घोटाला 

  119.JNURM घोटाला 

  120.लोकसेवा गारंटी योजना घोटाला 

  121.किसान ऋण माफी घोटाला 

  122.माखनलाल यूनिवर्सिटी भर्ती घोटाला 

  123.रतनजोत प्लांटेशन घोटाला 

  124.लघु वनोपज संघ घोटाला 

  125.कोल ब्लोक घोटाला 

  126.नाव एवं लाइफ जैकेट घोटाला 

  127.पोस्टमैन भर्ती घोटाला 

  128.सड़क निर्माण में ट्रांसट्रॉय घोटाला 

  129.बरकतुल्लाह यूनिवर्सिटी घोटाला 

  130.BMHRC घोटाला 

  131.पशु आहार घोटाला 

  132.मेडिकल काउंसलिंग घोटाला 

  133.सरदार सरोवर बाँध विस्थापना रजिस्ट्री घोटाला

  134.दवाई घोटाला 

  135.इंदिरा आवास घोटाला 

  136.इंदौर सीवेज घोटाला 

  137.LED घोटाला 

  138.लाइट ट्रैप घोटाला 

  139.भोपाल दुग्ध संघ घोटाला 

  140.स्कूलों में गैस चूल्हा घोटाला 

  141.पेंशन घोटाला

  142.PSC घोटाला 

  143.सुगनीदेवी जमीन घोटाला 

  144.राशन घोटाला 

  145.जनश्री बीमा योजना घोटाला 

  146.मुकुंदपुर टाइगर सफारी निर्माण घोटाला 

  147.वेयर हाउस घोटाला 

  148.चिटफण्ड घोटाला

  149.छिंदवाडा बाँध घोटाला 

  150.टेलिकॉम विभाग घोटाला 

  151.अस्पताल सफाई घोटाला 

  152.ट्रिप कोइल खरीदी घोटाला 

  153.डायल 100 घोटाला 

  154.विज्ञापन घोटाला 

  155.नल कनेक्शन घोटाला 

  156.डामर घोटाला

शिवराज सरकार का एक और बड़ा घोटाला , ‘व्यापमं-2’ !

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Newbuzzindia: मध्य प्रदेश में 3 साल पहले एक महा घोटाला ‘व्यापमं’ हुआ था जिस से कि मध्य प्रदेश में नहीं देश की राजनीति भी पूरी तरह हिल गई थी । शिवराज सरकार में हुए इस महाघोटाले से मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान पर सभी विरोधियों ने उंगली उठाई तो मुख्यमंत्री पद से त्याग देने के लिए तक दबाव बनाया । यह व्यापमं घोटाला अभी तक पूरी तरह शांत नहीं हुआ है। इसके बावजूद मध्य प्रदेश में एक नया घोटाला सामने आया है। कयास लगाए जा रहे है की यह घोटाला व्यापमं घोटाले के स्तर का ही हो सकता है।

यह घोटाला मध्य प्रदेश में राज्य की सबसे अहम मानी जाने वाली भर्ती आयोग, मध्य प्रदेश लोक सेवा आयोग (एमपीपीएससी) में होने की आशंका है। एमपीपीएससी द्वारा कुछ साल पहले उच्च शिक्षा विभाग में की गई प्रोफेसरों की सीधी भर्ती में भारी अनियमितता सामने आई है।

नेशनल दस्तक के अनुसार, यह घोटाला जनवरी 2009 में एमपीपीएससी ने उच्च शिक्षा विभाग में प्रोफेसरों की भर्ती के लिए 385 पदों का विज्ञापन जारी किया था। इसके तहत प्रोफेसर पद पर सीधे साक्षात्कार के माध्यम से नियुक्ति की जानी थी। वर्ष 2011 के मध्य में यह प्रक्रिया पूरी हुई थी। शिकायतों के बाद इसकी जांच के लिए चार सदस्यीय जांच समिति का गठन किया गया था। उसी समिति ने हाल में अपनी रिपोर्ट राज्य सरकार को सौंपी है जिसमे कहा गया है कि आयोग द्वारा विज्ञापन जारी होने तथा चयन हेतु साक्षात्कार पूरा करने के बाद अनुभव के बारे में जो स्पष्टीकरण जारी किया गया वह पूरी तरह नियम के विरुद्ध है। जांच समिति ने कहा कि भर्ती प्रक्रिया के लिए साक्षात्कार होने के बाद अगस्त, 2011 में विज्ञापन में संशोधन जारी किया गया। नियमानुसार यदि संशोधन करना आवश्यक था तो पूरी प्रक्रिया निरस्त कर फिर से आवेदन मंगाए जाने थे लेकिन ऐसा नहीं किया गया। समिति के अनुसार उच्च शिक्षा विभाग के भर्ती नियमों के मुताबिक अनुभव योग्यताएं, जो पारंपरिक रूप से पदोन्नति के लिए भी स्वीकार की जाती हैं, से अलग योग्यताओं की व्याख्या या स्पष्टीकरण लोक सेवा आयोग द्वारा जारी किया गया।

RSS का नाम भी आया सामने-
जिस समय यह भर्ती प्रक्रिया चली उस दौरान प्रोफेसर पीके जोशी मध्य प्रदेश लोक सेवा आयोग के अध्यक्ष थे। उनका कार्यकाल 13 जून 2006 से 28 सिंतबर, 2011 तक था। आयोग के तत्कालीन अध्यक्ष को राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की पृष्ठभूमि का माना जाता है। उच्च शिक्षा विभाग के सूत्र नाम न बताने की शर्त पर जानकारी देते हैं कि चयनित कई उम्मीदवार भी संघ की पृष्ठभूमि से जुड़े हैं।

फिर जागा शिवराज का रामदेव प्रेम ,अब मध्यप्रदेश सरकार बेचेगी पतंजलि के उत्पाद..!

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Newbuzzindia: मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने बाबा रामदेव की पतंजलि के प्रोडक्ट्स को राज्यभर में फेयर प्राइस की दुकानों के माध्यम से बेचने की बात कही है। उन्होंने शुक्रवार को भोपाल में सहकारिता विभाग द्वारा आयोजित दो दिवसीय कार्यक्रम में ये बातें कहीं।

सीएम ने कहा कि लोगों के बीच मशहूर पतंजलि प्रोडक्ट्स के बेचने से फेयर प्राइस की आमदनी में इजाफा हो सकता है और उसकी किस्मत बदल सकती है। एक दशक पहले योग गुरू बाबा रामदेव और उनके सहयोगी आचार्य बालकृष्ण ने पतंजलि की शुरुआत की थी जो आज हर्बल, मिनरल और एफएमसीजी प्रोडक्ट्स के लंबे रेंज के साथ बाजार में उपलब्ध है। सहकारिता मंत्री विश्वास सारंग ने इंडियन एक्सप्रेस से बातचीत में कहा कि वो जल्द ही इस दिशा में पतंजलि से संपर्क करेंगे।

सारंग ने कहा कि “हम चाहते हैं कि फेयर प्राइस शॉप राज्यभर में मल्टी-यूटिलिटी शॉप बनकर उभरे। पतंजलि से गठजोड़ इस दिशा में लाभदायक हो सकता है।” राज्यभर के 51 जिलों में फेयर प्राइस की कुल 16,500 दुकानें हैं। मंत्री ने कहा कि ‘राज्यभर की हजारों कॉपरेटिव सोसाइटी भी पतंजलि प्रोडक्ट्स को स्टॉक कर सकती हैं।’

बाबा रामदेव के लिए रेड कार्पेट बिछानेवाले राज्यों में मध्य प्रदेश भी एक है। एक दशक पहले बीजेपी सरकार ने बाबा रामदेव को जबलपुर में जमीन उपलब्ध कराई थी लेकिन कांग्रेस के विरोध की वजह से बाबा रामदेव ने वहां किसी तरह का काम शुरू नहीं किया। अब राज्य के औद्योगिक शहर इंदौर के पास पिथमपुर में बाबा रामदेव अपनी नई मैन्यूफैक्चरिंग यूनिट शुरू करने जा रहे हैं।

मध्यप्रदेश में भाजपा की करारी हार, तीनों सीट पर कांग्रेस का कब्ज़ा..!

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Newbuzzindia: राज्यसभा चुनाव में जीत हासिल करने वाली कांग्रेस ने जीत का अपना क्रम बरकरार रखा है। मध्यप्रदेश में हुये तीन नगर पालिका चुनाव के सोमवार को आये परिणाम भी कांग्रेस के पक्ष में गये हैं। तीनों ही जगहों पर बीजेपी को करारी हार का सामना करना पड़ा है। तीनों ही जगहों पर कांग्रेस के प्रत्याशी बड़े अन्तर से जीते हैं। भोपाल में हुये हिन्दू उत्सव समिति के चुनाव में भी बीजेपी समर्थित उम्मीदवार को हार का सामना करना पड़ा है।

प्रदेश के मैहर और मंडीदीप नगर पालिका तथा ईसागढ़ नगर परिषद के लिये चुनाव हुये थे। अभी हाल में ही मैहर विधानसभा सीट जीतने वाली बीजेपी को वहां बड़ा झटका लगा है। कांग्रेस के धर्मेश घई ने भाजपा के धीरज पांडे को 4 हजार से भी ज्यादा वोटों के अंतर से हराया है। राजधानी भोपाल से लगी मंडीदीप नगर पालिका में भी बीजेपी की हार हुई है। मंडीदीप में कांग्रेस के बद्रीलाल चौहान ने बीजेपी के राजेन्द्र अग्रवाल को 5 हजार से भी ज्यादा वोटों से हराया। अशोक नगर जिले की ईशागढ़ नगर परिषद में भी कांग्रेस के भूपेन्द्र द्विवेदी ने बीजेपी के हरिवल्लभ को हरा कर कांग्रेस का झंडा बुलंद किया है।

इन तीनों ही नगर पालिकाओं में पहले बीजेपी की कब्जा था। मजे की बात यह है कि मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान और प्रदेश बीजेपी अध्यक्ष नंद कुमार सिंह चौहान के अलावा बीजेपी के कई बड़े नेता और मंत्री इन तीनों जगहों पर पार्टी का प्रचार करने गये थे। मैहर में तो मुख्यमंत्री चौहान ने कई बड़ी घोषणायें की थी। विधानसभा उपचुनाव के समय इस इलाके के लिए उन्होंने कई योजनाओं का ऐलान किया था, लेकिन जनता ने पालिका चुनाव में उनकी इन ऐलानों पर कोई ध्यान नहीं दिया।

मुख्यमंत्री ने इस चुनाव परिणाम पर कोई प्रतिक्रिया नहीं जताई है। पार्टी की तरफ से भी हार-जीत को चुनाव का एक सामान्य अंग बताकर मामले को टाल दिया गया है। हालांकि, पार्टी सूत्रों का कहना है कि हार की मुख्य वजह प्रत्याशियों का चुनाव रहा है। दरअसल पार्टी के नेताओं को यह लग रहा था कि वे ‘मिट्टी के माधौ’ को भी चुनाव जितवा सकते हैं। इस जीत से बीजेपी के लिये एक संदेश यह भी निकला है कि यदि उसने शहडोल लोकसभा और नेपानगर विधानसभा उपचुनाव के समय प्रत्याशी चुनने में इसी तरह का रवैया अपनाया तो उसे मुश्किल हो सकती है।

उधर कांग्रेस ने इस चुनाव परिणाम को जनता की जीत बताया है। प्रदेश अध्यक्ष अरूण यादव, पूर्व केन्द्रीय मंत्री सुरेश पचैरी और ज्योतिरादित्य सिंधिया ने जीत के लिये मतदाताओं का आभार जताया है। प्रदेश अध्यक्ष अरूण यादव ने कहा है कि सरकारी मशीनरी और पैसे का दुरूपयोग कर के बीजेपी चुनाव जीतती रही है। अब छोटी जगहों की जनता ने उसे हराकर स्पष्ट संदेश दे दिया है। नगर पालिकाओं की छोटी-छोटी जीत प्रदेश में कांग्रेस के लिये मील का पत्थर साबित होंगी।

मध्यप्रदेश राज्यसभा चुनाव: मायावती ने की कांग्रेस की जीत पक्की, भाजपा को लगा बड़ा झटका !

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Newbuzzindia: बसपा प्रमुख मायावती की पार्टी बसपा मध्‍य प्रदेश में कांग्रेस के राज्‍य सभा उम्‍मीदवार का समर्थन करेगी। मायावती ने शनिवार को इस बात की घोषणा की। कांग्रेस के लिए यह एलान राहत की सांस लेकर आया है। क्‍योंकि उसके उम्‍मीदवार विवेक तनखा को राज्‍य सभा जाने के लिए 58 विधायकों के वोट की जरूरत थी लेकिन कांग्रेस के पास केवल 57 विधायक ही थे।

बसपा प्रमुख मायावती ने कहा, ”मध्‍य प्रदेश और उत्‍तर प्रदेश कई राज्‍यों में राज्‍य सभा के चुनाव होने जा रहे हैं। इनमें साम्‍प्रदायिक ताकतों के खिलाफ लड़ाई है। लेकिन बसपा मध्‍य प्रदेश में अपना उम्‍मीदवार नहीं चुन सकती क्‍योंकि हमारे पास नंबर नहीं है। इसलिए साम्‍प्रदायिक ताकतों को कमजोर करने के लिए कांग्रेस उम्‍मीदवार विवेक तनखा का साथ देने का फैसला किया गया है।”

57 विधायकों के साथ कांग्रेस अपने उम्‍मीदवार को जिताने के आंकड़े से एक सीट दूर थी। साथ ही सदन में उसके नेता सत्‍यदेव कटारे का मुंबई में इलाज चल रहा है जबकि एक विधायक रमेश पटेल जेल में हैं। वहीं बताया जा रहा है कि एक विधायक ने भाजपा को वोट देने का एलान किया है।

230 सदस्‍यीय मध्‍य प्रदेश विधानसभा में एक उम्‍मीदवार को जीतने के लिए 58 विधायकों की जरूरत होती है। बसपा के समर्थन की घोषणा के बाद कांग्रेस राहत की सांस ले सकती है। अब अगर तीन विधायक छूट भी जाते हैं तो बसपा के विधायकों को मिलाकर उसका आंकड़ा 58 का हो जाएगा।

इधर, सत्‍ता में काबिज भाजपा के दो उम्‍मीदवारों की जीत तय है। पार्टी के महासचिव विनोद गोटिया निर्दलीय के रूप में मैदान में है। तीसरे उम्‍मीदवार के लिए भाजपा के पास केवल 50 विधायक ही रह जाएंगे। विधानसभा में तीन निर्दलीय विधायक भी हैं।

कांग्रेस उम्‍मीदवार विवेक तनखा को सीएम शिवराज सिंह चौहान का करीबी माना जाता है। इसके चलते माना जा रहा था कि भाजपा तीसरी सीट पर शायद ही लड़े लेकिन पार्टी आलाकमान के निर्देश के बाद गोटिया को निर्दलीय के रूप में उतारा गया।

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मध्यप्रदेश : घोटाले की बुनियाद पर नरेंद्र मोदी की “स्मार्ट सिटी” परियोजना !

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.Newbuzzindia: प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की इस महत्वाकांक्षी परियोजना के लिए शहरों का चयन प्रतिस्पर्धा के आधार पर किया गया था। प्रतिस्पर्धा में आधार आम लोगों की राय को बनाया गया था। इस राय के आधार मध्यप्रदेश के भोपाल शहर का चयन आखिरी बीस नंबर पर हुआ है। इस बीसवें नंबर को हासिल करने के लिए राजनीतिक और प्रशासनिक स्तर पर फर्जी ई-मेल खाते बनाकर आॅनलाइन राय दर्ज कराई गई। सरकार का यह कृत्य चार सौ बीसी की श्रेणी में आता है।

आईपीसी की धारा 120बी भी इसमें लगती है। तथ्यों को छुपाने अथवा तोड़ने-मरोड़ने का भी अपराध बनता है। इस अपराध की श्रेणी में आते हैं भोपाल नगर निगम के महापौर आलोक शर्मा और तत्कालीन आयुक्त तेजस्वी नायक। इन दोनों की शह पर ही नगर निगम भोपाल के कर्मचारियों ने फर्जी ई-मेल खाते बनाकर भोपाल के तुलसी नगर एवं शिवाजी नगर इलाके को स्मार्ट सिटी बनाने पर आम जनता की सहमति के रूप में दर्ज कर दिया।

पिछले साल जून माह में शहरी विकास मंत्रालय द्वारा स्मार्ट सिटी के बारे में जो निर्देश जारी किए गए थे, उसमें यह स्पष्ट तौर पर कहा गया था कि स्मार्ट सिटी के प्रस्ताव में नगरवासियों एवं हितधारकों के साथ किए गए परामर्शों को रेखांकित किया जाएगा। जिन दिनों नगर निगम भोपाल शहर को स्मार्ट सिटी में शामिल करने के लिए विभिन्न स्तरों पर विशेषज्ञों से मशविरा कर रहा था, उस वक्त स्थान के नाम को गोपनीय बनाए रखने में अत्यधिक सतर्कता बरती गई।

भोपाल के लोगों की कल्पना में भी यह नहीं था कि भारतीय जनता पार्टी के नेता और उसके अफसर एक ऐसे क्षेत्र को पुनर्विकास मॉडल में शामिल कर लेंगे, जो पूर्व से काफी स्मार्ट इलाका माना जाता है। सरकार और नगर निगम ने संभवत: इस कारण क्षेत्र के लोगों से मशविरा करना जरूरी नहीं समझा, क्योंकि वे सरकारी कर्मचारी हैं। आला अफसरों का मानना है कि सरकारी कर्मचारियों से राय लेने की जरूरत ही नहीं थी।

तुलसी नगर एवं शिवाजी नगर के आवास सरकारी हैं। सरकार इन मकानों के मामले में स्वतंत्र रूप से निर्णय ले सकती है? शहरी विकास मंत्रालय ने स्मार्ट सिटी बनाने के लिए तीन मॉडल प्रस्तावित किए थे। इसमें भोपाल के लिए पुनर्विकास का मॉडल ही सरकार ने क्यों चुना? इस सवाल का जवाब सरकार दे चुकी है। सरकार की योजना इलाके की जमीन को निजी हाथों में बेचने की है। जमीन बेच कर स्मार्ट सिटी को विकसित किया जाए, यह केन्द्र सरकार की योजना का हिस्सा नहीं है।

पुनर्विकास के मॉडल के लिए केन्द्र सरकार ने मुंबई के भिंडी बाजार और दिल्ली में पूर्वी किदवई नगर का उदाहरण दिया था। क्या भिंडी बाजार लगा रखा है? इस तरह का जुमला मुंबई के भिंडी बाजार को लेकर नकारात्मक तौर पर प्रयोग किया जाता है। मुंबई का भिंडी बाजार अर्थात भीड़भाड़ वाला इलाका और तंग गलियां। इलाके कई जगह ऐसे थे, जिन्हें मरम्मत की जरूरत थी। संकरे रास्तों पर चलना मुश्किल था। बच्चे खेलने के लिए बाहर नहीं जा सकते थे। महिलाएं भी प्रार्थना के लिए बाहर नहीं निकल सकती थीं। टैक्सी ड्राइवर भी इस इलाके की सवारी नहीं लेते।

क्या भोपाल का तुलसी नगर और शिवजी नगर इस श्रेणी में आता है? भिंडी बाजार में 18वीं सदी में गुजरात से मुंबई आए दाऊदी बोहर समाज के लोग रहते हैं। 1803 में अंगे्रजों ने यहां बसाया था। अवैध कब्जों पर ध्यान न दिए जाने के कारण इलाके की हालत बिगड़ गई। लगभग 16.5 एकड़ क्षेत्र के इस इलाके का तीन हजार करोड़ रुपए खर्च कर विकास किया जा रहा है। इसके लिए इलाका खाली कराकर लोगों को कैंप में भेजा गया है। यह परियोजना बिना मुनाफे वाली है।

इस क्षेत्र में कुल 3200 घर हैं। लगभग बीस हजार लोग रहते हैं। लगभग हर परिवार को एक पैसा खर्च किए बगैर आधुनिक सुसज्जित मकान पुनर्विकास के बाद दिया जाएगा। परियोजना सैफी बुरहानी अपलिफ्टमेंट ट्रस्ट द्वारा संचालित है। भोपाल का तुलसी नगर और शिवाजी नगर का इलाका केन्द्र द्वारा दिए गए मॉडल से मेल नहीं खाता है। तुलसी नगर और शिवाजी नगर 1960 में बनकर तैयार हुआ था।

56 साल बाद भी यह इलाका राज्य का सबसे बेहतर इलाका माना जाता है। न तो ट्रैफिक का दबाव है और न ही प्रदूषण की समस्या है। स्मार्ट सिटी के जो सूचकांक केन्द्र सरकार द्वारा तय किए गए हैं, उनमें नब्बे प्रतिशत यहां पहले से ही मौजूद हैं। चंद करोड़ रुपए खर्च करके इलाके को देश का सबसे बेहतर इलाका बनाया जा सकता है। केन्द्र सरकार ने स्मार्ट सिटी में कुल दस सूचकांक तय किए हैं। (देखें बाक्स) इलाके में गरीबों के लिए आवास पहले से ही बने हुए हैं। पर्याप्त जल आपूर्ति भी और विद्युत आपूर्ति भी।

इलाके में अस्पताल भी है और स्कूल भी। मंत्रालय के नजदीक बसा हुआ है। जहां तक सवाल आॅनलाइन नागरिक सेवाओं का है तो वह पूरे शहर के लिए ही स्थापित होंगी। यह समझ से परे है कि शिवराज सिंह चौहान की सरकार केन्द्र से मिलने वाली र

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