Home Tags Yogi adityanath

Tag: yogi adityanath

कानपुर के जघन्य हत्याकांड में यूपी सरकार पूरी तरह फेल साबित हुई: प्रियंका गांधी

0

यूपी का मोस्ट वांटेड गैंगस्टर और कानपुर में आठ पुलिस जवानों की हत्या के आरोपी विकास दुबे को गुरुवार की सुबह मध्य प्रदेश के उज्जैन की पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया। उसके साथ ही उसके दो साथी भी गिरफ्तार किया गया है। विकास की गिरफ्तारी पर विपक्ष योगी सरकार पर हमलावर हो गया है। कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी ने इस मसले पर कई सवाल खड़े किए हैं।

प्रियंका ने ट्वीट कर कहा कि तीन महीने पुराने पत्र पर ‘नो एक्शन’ और कुख्यात अपराधियों की सूची में ‘विकास’ का नाम न होना बताता है कि इस मामले के तार दूर तक जुड़े हैं। यूपी सरकार को मामले की CBI जांच करा सभी तथ्यों और प्रोटेक्शन के ताल्लुकातों को जगज़ाहिर करना चाहिए. उन्होंने आगे कहा कि कानपुर के जघन्य हत्याकांड में यूपी सरकार को जिस मुस्तैदी से काम करना चाहिए था, वह पूरी तरह फेल साबित हुई। अलर्ट के बावजूद आरोपी का उज्जैन तक पहुंचना, न सिर्फ सुरक्षा के दावों की पोल खोलता है बल्कि मिलीभगत की ओर इशारा करता है।

बेरोजगारी के मुद्दे पर प्रियंका का मोदी- योगी सरकार पर हमला

0

कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी ने एक बार फिर देश में बढ़ रही बेरोजगारी के मुद्दे पर सरकार को आड़े हांथों लिया है। प्रियंका ने उत्तरप्रदेश और बिहार में शिक्षकों के 4 लाख पद खाली होने की एक खबर को शेयर करते हुए अपने ट्विटर एकाउंट पर लिखा,

उत्तर प्रदेश में शिक्षकों के लगभग 2 लाख पद खाली पड़े हैं। युवा नौकरियाँ निकलने का रास्ता देख रहे हैं। धूप-बारिश में खड़े प्रदर्शन कर रहे हैं।

मगर रोजगार देने की बात पर BJP सरकार के लोग मुँह फेर लेते हैं या कहते हैं कि उत्तर भारत के युवाओं में योग्यता नहीं है।

– प्रियंका गांधी

दअरसा दरअसल प्रियंका गांधी अपने इस ट्वीट में केंद्रीय मंत्री संतोष गंगवार के उस बयान पर हमला बोल रहीं थी जिसमें उन्होंने कहा था कि देश में नौकरियों की कमी नही है बल्कि उत्तर भारत के युवाओं में योग्यता की कमी है।

प्रियंका गांधी का ट्वीट

Journalists arrested over “objectionable comments” on Yogi Adityanath

0

A freelance journalist, an editor of a TV channel and its owner have been arrested over contents that were considered an objectionable post on Uttar Pradesh Chief Minister Yogi Adityanath. The TV channel, Nation Live, broadcasted the comment on Yogi, which ultimately led to the chaos.

Mr Kanojia, was picked up from his home in Delhi’s West Vinod Nagar after a complaint by a police officer in Lucknow, alleging he tried to “malign” the Chief Minister’s image. He had shared a video on Twitter and Facebook where a woman is seen speaking to reporters of various media organisations outside Yogi Adityanath’s office, claiming that she had sent him a marriage proposal. Mr. Kanojia had mocked Mr Adityanath over the video and remarked in Hindi: “Ishq chupta nahi chupane se Yogi ji (love cannot be hidden).”

In a separate case, Ishika Singh, who heads private news channel Nation Live, and Anuj Shukla, its editor, were arrested in Noida on Saturday evening.

During a debate on the channel on June 6, the woman, whose video was shared by Prashant Kanojia, had allegedly made defamatory statements against Adityanath, the police said. They were arrested after workers affiliated to a political party approached the police with a complaint against the news channel for broadcasting the claims of the woman without verifying facts, a senior official said.

During investigation, it was also found that the Noida-based channel did not have any licence to operate, the police said. An additional complaint over the alleged illegal operation of the channel was made by a district official in Noida. “They have been arrested on both counts for the defamatory content as well as illegal operation of the channel,” the police officer told news agency PTI.

The Editor’s Guild of India condemned the action against the media-persons and called it “an effort to intimidate the press, and stifle freedom of expression”. Many people on Twitter condemned the journalist’s arrest. A hashtag, #FreePrashantNow, was the top trend on Twitter on Sunday, with people calling the journalist’s arrest illegal and violation of civil liberties.

“…arrest is abuse of law,” tweeted Siddharth Varadarajan, Founding Editor of The Wire where Mr Kanojia has worked in the past.

Crowd dispersed in Yogi Adityanath’s rally due to unavailability of translator

0

India is a Nation where languages and dialects change with villages and regions. A single language is not at all sufficient to communicate with people from every region in India. BJP, carelessly, did not arrange a translator for the Yogi Adityanath’s rally and thus, witnessed an embarrassing dispersion of people from the rally at Yellareddy in Kamarareddy district.

Local leaders from Zaheerabad did their best to gather crowd but forgot the translator. In the rally, Yogi Adityanath was bashing the ruling party Telangana Rashtra Samiti (TRS) in his own way of expressing. The expression did not reach the public as it was in Hindi. The clueless and angry public stood and started leaving the rally.

Telugu speaking women said that they couldn’t understand a word. “We didn’t understand what he was saying. BJP leaders, who made us come all the way to attend the meeting, should have at least got a translator,” said a women at the public meeting.

It has been norm that the local BJP leaders translate the speech of the national leaders. However, this time the BJP candidate did not arrange a translator. Such incident could have happened with Prime Minister Narendra Modi. During recent Mahbubnagar rally, Prime Minister Narendra Modi had started his speech in Hindi, but as soon as he realised that people were not responding, he asked BJP state president K Laxman to translate for him in Telugu.

It’s common sense that people prefer to listen speeches in their own language. It is also a way to connect with them emotionally too. Due to this reason only regional parties and politics came into the picture. The incident was an embarrassment for BJP. Let’s hope that they learn from this mistake and won’t repeat it again.

मध्यप्रदेश के चुनावी दगंल में संतों और बाबाओं को शीर्षासन

0

दो दिन बाद मध्यप्रदेश में विधानसभा चुनाव के लिए नामांकन पत्र दाखिल करने का काम शुरू हो जाएगा। इस बार के विधानसभा चुनाव में साधु-संत और बाबा भी शीर्षासन करते नजर आ रहे हैं। मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान द्वारा तीन बाबाओं को मंत्री और राज्य मंत्री का दर्जा दिए जाने के बाद संतों और सन्यासियों की इच्छा भी सिंहासन पर बैठने की हो गई है। सिहांसन की इच्छा रखने वाले बाबाओं के सामने साध्वी उमा भारती और उत्तरप्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का उदाहरण भी है।

बाबाओं की भस्मासुरी भूमिका

इसी साल अप्रैल में मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने पांच बाबाओं को राज्य मंत्री का दर्जा दिया था। ये धर्म गुरु नर्मदानंद महाराज, हरिहरानंद महाराज, कंप्यूटर बाबा, भैयू महाराज और पंडित योगेंद्र महंत थे। भय्यूजी महाराज ने दर्जा मिलने के कुछ दिनों बाद ही इंदौर में अपने निवास पर आत्महत्या कर ली थी। बाबाओं और संतों को दर्जा दिए जाने से पूर्व सरकार ने नर्मदा किनारे के क्षेत्रों में वृक्षारोपण, जल संरक्षण और स्वच्छता के विषयों पर जन जागरूकता अभियान चलाने के लिए गठित विशेष समिति में 31 मार्च को शामिल किया था।

कंप्यूटर बाबा और योगेंद्र महंत को उपकृत करने के पीछे नर्मदा वृक्षारोपण का घोटाला बड़ी वजह बताई गई थी। इन दोनों ने ही शिवराज सिंह चौहान सरकार की पोल खोलने के लिए नर्मदा यात्रा निकालने का एलान किया था। राज्य मंत्री का दर्जा मिलने के बाद सारे बाबा शिव भक्ति में लीन हो गए। मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान की जमकर तारीफें भी इन बाबाओं द्वारा की गईं। हाल ही में कंप्यूटर बाबा ने राज्यमंत्री का दर्जा वापस लौटाकर शिवराज सिंह चौहान पर एक बार फिर आरोप लगाना शुरू कर दिया है।

कंप्यूटर बाबा ने कहा कि हजारों संतों ने मुझ पर त्यागपत्र देने का दबाव बनाया था. मुख्यमंत्री ने मुझसे वादा किया था कि मध्य प्रदेश में अवैध रेत खनन नहीं होगा, गाय की दुर्दशा नहीं होगी, मठ-मंदिरों के संत जो कहेंगे, वह करेंगे। इस्तीफे के पहले कंप्यूटर बाबा की प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष कमलनाथ से हुई मुलाकात काफी चर्चा में रही थी। कंप्यूटर बाबा को मनाने का शिवराज सिंह चौहान का प्रयास भी पूरी तरह विफल रहा। कंप्यूटर बाबा अब जगह-जगह राज्य की भाजपा सरकार के खिलाफ प्रचार कर रहे हैं। उन्होंने कल यानि 30 अक्टूबर को ग्वालियर में बाबाओं और संतों का जमावड़ा भी लगाया। ज्यादतर बाबा भंडारे में शामिल होने के लिए बुलाए गए थे।

राज्य में भारतीय जनता पार्टी की सरकार आने के बाद से ही संतों और सन्यासियों का राजनीतिक रूतबा काफी बढा़ है। पिछले दो साल से स्वामी अवधेशानंद जी को शिवराज सिंह चौहान के संकट मोचक के तौर पर देखा जा रहा है। स्वामी अवधेशनंद जी के भक्त प्रतिपक्ष के नेता अजय सिंह भी हैं। वे हर साल रामकथा भी करते हैं। शिवराज सिंह चौहान और अजय सिंह के राजनीतिक रिश्ते के साथ-साथ व्यक्तिगत रिश्ते भी विरोध के ही हैं। दो माह पूर्व स्वामी अवधेशनंद और संघ के सर कार्यवाह भैय्या जी जोशी की मुलाकात काफी चर्चा में रही थी। चुनाव से ठीक पहले साधु-संतों की सक्रियता ने राजनीतिक दलों को हैरान कर दिया है।
कांग्रेस इसके पीछे भारतीय जनता पार्टी की रणनीति मान रही है। प्रवक्ता भूपेन्द्र गुप्ता कहते हैं कि राजनीति में कांग्रेस ने कभी धर्म को ढाल नहीं बनाया। माना यह जा रहा है कि साधु-संतों के मैदान में आने से सरकार विरोधी वोट का पूरा लाभ कांग्रेस को नहीं मिल पाएगा।

सवर्णों की राजनीति भी है बाबाओं के पीछे

राज्य में एट्रोसिटी एक्ट के ताजा संशोधनों का सबसे ज्यादा विरोध हो रहा है। सीधा टकराव अनुसूचित जाति और समान्य वर्ग के बीच दिखाई दे रहा है। सपाक्स, समान्य एवं पिछड़ा वर्ग के वोटों के धुर्वीकरण से लाभ उठाना चाहती है। राज्य में अनुसूचित जाति और जनजाति वर्ग की आबादी 36 प्रतिशत से अधिक है। सवर्ण आंदोलन का सबसे ज्यादा असर ग्वालियर-चंबल संभाग में देखने को मिला था।

कथावाचक देवकीनंदन ठाकुर भी एट्रोसिटी एक्ट के खिलाफ आंदोलन में हिस्सेदारी कर रहे हैं। पिछले दिनों उन्हें दतिया में पुलिस ने गिरफ्तार भी किया था। ठाकुर का कर्मक्षेत्र वृन्दावन है। लेकिन, वे राजनीति करने मध्यप्रदेश में आ रहे हैं। आज उन्होंने सर्वसमाज कल्याण पार्टी से अपने उम्मीदवार मैदान में उतारने का एलान भी किया है। ठाकुर ने दावा किया है कि पार्टी वर्ष 2013 में बनाई गई। इसी तरह पंडोखर सरकार भी ग्वालियर-चंबल संभाग में अपनी संभावानाएं देख रहे हैं। उन्होंने सांझाी विरासत नाम से पार्टी के गठन का एलान किया है। पचास सीटों पर वे अपने उम्मीदवार उतारेंगे।


राज सिंहासन की चाह में कई बाबा मांग रहे हैं टिकट

उज्जैन दक्षिण से महंत अवधेशपुरी टिकट की दावेदारी कर रहे हैं। बाबा ने कहा कि उन्होंने अपनी इच्छा भाजपा के बड़े नेताओं को बता दी है। अवधेशपुरी महाराज कहते हैं कि उनके क्षेत्र के लोगों की इच्छा भी है कि वे चुनाव लड़ें। अपने टिकट की दावेदारी के पीछे वे पिछले बीस सालों में भाजपा के लिए किए गए कामों को सबसे मजबूत आधार मानते हैं। बाबा के पास डॉक्टरेट की उपाधि है। सिवनी जिले के केवलारी से संत मदनमोहन खडेश्वरी टिकट मांग रहे हैं। संत मदन मोहन टिकट मिलने से पहले ही जीत का दावा कर रहे हैं। मदन मोहन कहते हैं कि उनकी चुनाव लड़ने की तैयारी पूरी है। अगर भाजपा से टिकट नहीं मिला तो वो निर्दलीय चुनाव लड़ेंगे। रायसेन जिले के सिलवानी से टिकट के दावेदार महेंद्र प्रताप गिरि हैं। बाबा कहते हैं कि अगर संगठन ने उनको टिकट नहीं दिया तो वो निर्दलीय चुनाव लड़ सकते हैं। इसी जिले की उदयपुरा सीट से संत रविनाथ टिकट मांग रहे हैं। संत रविनाथ नर्मदा को बचाने के लिए विधायक बनना चाहते हैं।

योगी आदित्यनाथ पर भड़के साधु-संत, बोले आप से अच्छी थी पिछली सरकार ।

0

यूपी के इलाहाबाद में योगी सरकार को साधु-संतों के कड़े विरोध का सामना करना पड़ा है। यूपी के साधु-संत योगी सरकार से इस कदर नाराज है कि उन सभी ने मिलकर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को चिट्ठी लिखकर बोला कि अगर आपको गुजरात चुनाव से फुरसत मिल जाए तो यूपी के माघ मेला पर भी कुछ ध्यान देने का कष्ट करें। 
साधु संतों ने यहां तक कह दिया कि आपकी सरकार से अच्छी तो पिछली सपा सरकार थी। कम से कम हमें वहां इज्जत और सम्मान तो मिलता था। 

आप को बता दें कि रामानंद सरस्वती की अध्यक्षता में संतों ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को चिठ्ठी लिखी है और माघ मेला में अव्यवस्थाओं का जिक्र किया है। उन्होंने कहा है कि 16 दिन बाद शुरू होने वाले माघ मेले के लिए हजारों लोग पहुंच चुके हैं, लेकिन वहां अभी मूलभूत सुविधाएं तक नहीं है। माघ मेले को लेकर नए डीएम की उदासीनता पर सवाल उठाया गया है। उन्होंने कहा कि अधिकारी केवल कुंभ की व्यवस्था को देख रहे हैं जिसकी वजह से माघ मेला की दुर्दशा हो रही है।

स्वच्छ भारत अभियान की पोल खोलते हुए साधु-संतों ने कहा कि सरकार स्वच्छ भारत अभियान के नाम पर बड़ी बड़ी बातें करती है वहीं मेले में एक शौचालय तक कि व्यवस्था नही की गई है । जिसके कारण लोग जगह जगह सौच करके गंदगी फैला रहे है। 
मुख्यमंत्री को लिखी संतों की चिट्ठी से प्रशासन में हड़कंप तो मच ही गया है, साथ ही ये चिट्ठी इस बात को साबित करने के लिए काफी है कि यूपी के मुख्यमंत्री योगी आदित्यानाथ गुजरात चुनाव के चक्कर में अपने प्रदेश को भी पूरी तरह से भूल गए और जनता को परेशान होने के लिए छोड़ दिया।

सीएम योगी के गृह जिले में नही रुक रहा मौत का सिलसिला, फिर हुई 30 मासूमों की मौत 

0

​​गोरखपुर. सीएम योगी आदित्यनाथ के गृह जिले गोरखपुर में मौतों का सिलसिला थमने का नाम नहीं ले रहा हैं। यहां स्थित बाबा राघव दास मेडिकल कॉलेज में बीते 48 घंटों में एक बार फिर 30 मासूमों की मौत की घटना सामने आई है। इन बच्चों की मौत 1 नवम्बर से 3 नवम्बर के बीच हुई। बता दें कि पिछले तीन महीनों में बीआरडी कॉलेज के बालरोग विभाग में 1300 बच्चों की मौत हो चुकी हैं।

 

गोरखपुर का बीआरडी मेडिकल कॉलेज उस समय सुर्खियों में आया जब 10-11 अगस्‍त की रात ऑक्‍सीजन बाधित होने के कारण 36 बच्‍चों की मौत हो गई। इस मामले ने काफी तूल पकड़ा और बीआरडी मेडिकल कॉलेज के तत्‍कालीन प्राचार्य डा. राजीव मिश्र, उनकी पत्‍नी डा. पूर्णिमा शुक्‍ला, डा. कफील खान सहित कुल 9 लोगों को जेल जाना पड़ा।

इसके बावजूद भी बीआरडी मेडिकल कॉलेज में मासूमों की मौत का सिलसिला नहीं थमा। हर रोज हो रही मासूमों की मौत ने आम लोगों को हैरान तो किया है। लेकिन, पूर्व में इसे सामान्‍य मौत मानने वाला बीआरडी मेडिकल कॉलेज प्रशासन भी अब यह मानने लगा है कि इन मौतों को सामान्‍य मौतें नहीं कहा जा सकता है।

क्या बोले डॉक्टर ?

बीआरडी मेडिकल कॉलेज के प्रोफेसर डा. डीके श्रीवास्तव ने बताया कि 1 नवंबर की रात 12 बजे से 3 नवंबर की रात 12 बजे तक 48 घंटे में कुल 30 बच्‍चों की मौत हुई है। उन्‍होंने बताया कि बीआरडी मेडिकल कॉलेज में 1 नवंबर की रात 12 बजे से 3 नवंबर की रात 12 बजे तक एनआईसीयू (नियो नेटल यूनिट) में कुल 15 बच्‍चों की मौत हुई है। वहीं पीआईसीयू (पीडिया) में 15 बच्‍चों की मौत हुई है।

उन्‍होंने बताया कि 1 नवंबर की रात 12 बजे से 2 नंवबर की रात 12 बजे तक एनआईसीयू में 7 और पीआईसीयू में 5 बच्‍चों की मौत हो गई। तो वहीं 2 नवंबर की रात 12 बजे से 3 नंवबर की रात 12 बजे तक एनआईसीयू में 8 और पीआईसीयू में 10 बच्‍चों की मौत हुई है।

जनता के भारी विरोध के बाद भाजपा ने मारी पलटी, योगी ने की ताज महल की तारीफ !

0

ताजमहल पर भाजपा नेताओं के विवादित बयान के भारी विरोध के बाद बीजेपी बैकफुट पर आ गयी है । जिसके बाद यूपी के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने पलटी मारते हुए ताज महल की तारीफ की है ।

पलटी मारते हुए योगी आदित्यनाथ ने कहा है कि ” यह मायने नही रखता की ताज महल किसने बनाया और कैसे बनाया, ताजमहल भारतीय मजदूरों के खून और पसीने से बनाया गया था ।
योगी आदित्यनाथ ने आगे कहा कि ताजमहल हमारे लिए पर्यटन लहजे से बहुत अहम है । हम ताजमहल को सभी सुविधाएं और पर्यटकों को सुरक्षा प्रदान करने के लिए बाध्य है।
आपको बता दें कि कुछ दिनों पहले भाजपा नेता संगीत सोम ने ताजमहल पर विवादित बयान देते हुए कहा था कि ताज महल मुगलों ने बनाया था और उसे देश के इतिहास से मिटा दिया जाएगा ।

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ, दोनों उपमुख्यमंत्री समेत भाजपा के कई नेताओं को देना होगा इस्तीफ़ा !

0

Newbuzzindia : उत्तरप्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ इस्तीफ़ा  देने वाले है  . योगी आदित्यनाथ के साथ ही उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्या और दिनेश शर्मा को भी इस्तीफ़ा देना होगा . इन तीन नेताओं के एलावा अल्पसंख्यक मंत्री मोहसिन रजा और परिवहन राज्यमंत्री स्वतंत्र प्रभार स्वतंत्र देव सिंह भी इस्तीफ़ा देने वालों की लिस्ट में शामिल है .

 

आपको बता दें कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ समेत यह पाँचों नेता इस समय उत्तरप्रदेश विधानसभा या विधान परिषद के सदस्य नही है . वही मुख्यमंत्री , उपमुख्यमंत्री या फिर मंत्री बनने के लिए विधानसभा या विधानपरिषद् का सदस्य होना अनिवार्य है .

 

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ इस समय गोरखपुर से संसद है . केशव प्रसाद मौर्या इलाहबाद के फूलपुर से सांसद है. वहीं दिनेश शर्मा लखनऊ के महापौर है .

 

 

लोकसभा से देना होगा इस्तीफ़ा 

 

इन सभी नेताओं को अपने पद पर बने रहने के लिए 6 महीने के अंदर विधानसभा या विधानपरिषद का सदस्य बनना होगा . वहीं इन 5 नेताओं को विधानसभा या विधानपरिषद का सदस्य बनाने के लिए  मौजूदा सदस्यों को इस्तीफ़ा देना होगा .

 

सूत्रों के अनुसार योगी आदित्यनाथ गोरखपुर की सदर विधानसभा से चुनाव मैदान में उतर सकते है . सदर विधानसभा से मौजूदा विधायक डॉक्टर राधामोहन दास अग्रवाल मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के लिए इस्तीफ़ा दे सकते है . राधामोहन के एलावा और भी कई विधायक योगी आदित्यनाथ के लिए इस्तीफ़ा देने के लिए तैयार है .

 

ऐसे में देखना दिलचस्प होगा की सीएम योगी आदित्यनाथ किस विधानसभा सीट से चुनाव लड़ते है . वैसे तो योगी आदित्यनाथ बिना चुनाव लड़े विधानपरिषद के रास्ते ही मुख्यमंत्री बने रह सकते है .

 

केशव प्रसाद मौर्या और दिनेश शर्मा

सूत्रों के अनुसार केशव प्रसाद को इलाहाबाद की किसी विधानसभा सीट से चुनाव लड़वाया जा सकता है . वहीं दिनेश शर्मा को विधानपरिषद का सदस्य बनने की तैयारी लगभग पूरी हो चुकी है . दिनेश शर्मा को विधानपरिषद में सत्ता पक्ष का नेता भी बनाया जा चुका है .

 

नवंबर में होंगे चुनाव

 

आपको बता दें कि उत्तरप्रदेश में इसी साल नवंबर में स्थानीय निकाय चुनाव होने है . जिसके साथ ही मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की गोरखपुर लोकसभा सीट और केशव प्रसाद मौर्या की इलाहाबाद लोकसभा सीट पर भी चुनाव होंगे . ऐसे में विधानसभा चुनाव में बुरी तरह हर चुकी कांग्रेस , बसपा और सपा अपनी पूरी ताकत लगाकर यह चुनाव जीतना चाहेंगी .

शुरू हुए योगी आदित्यनाथ के बुरे दिन , 21 अगस्त से शुरू होगी उलटी गिनती

0

वैसे तो मोदी सरकार के आने के बाद से ही भाजपा के अच्छे दिन शुरू हो गये है . लेकिन उत्तर प्रदेश में प्रचंड जीत दर्ज करके मुख्यमंत्री बनने  वाले योगी आदित्यनाथ के बुरे दिन शुरू होने वाले है . ऐसा कह रहे है जाने माने ज्योतिष और हस्तरेखा विशेषज्ञ अनिल कात्यन . आपको बता दें की अनिल कात्यान इससे पहले भी कई राजनैतिक भविष्यवाणी कर चुके है . जिनमें से ज्यादातर भविष्यवाणी सही साबित हुई है .

 

कात्यान का कहना है की 7 अप्रैल के बाद ग्रहों की स्तिथि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के खिलाफ हो रही  है . जिसके कारण आदित्यनाथ को बड़ी मुश्किल और विरोध का सामना करना पद सकता है . कात्यान का कहना है की जिस तरह आदित्यनाथ अधिकारिओं को भरोसे में लिए बिना बड़ी बड़ी घोषणा कर रहे है . जिसके कारण  धीरे-धीरे अधिकारी मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की बातें सुनना कम कर सकते है .

 

ज्योतिष के अनुसार मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के काम करने की दिशा सही हो सकती है . लेकिन कार्यं करने का प्रारूप तय नही होने के कारण अडचनें आ सकती है .

उत्तर प्रदेश चुनाव के पहले भी की थी भविष्यवाणी

 

अगर आपने मीडिया में सुना हो तो अनिल कात्यान ने उत्तरप्रदेश चुनाव के पहले भी भविष्यवाणी की थी . कात्यान ने कहा था की उत्तरप्रदेश में भारतीय जनता पार्टी बड़ी जीत दर्ज करेगी . इसके साथ ही कात्यान ने कहा  था की समाजवादी पार्टी के खराब दिन शुरू होने वाले है .

 

21 अगस्त के बाद शुरू होगी उलटी गिनती

 

अगर ज्योतिष अनिल कात्यान की बातों को सही मानो तो 21 अगस्त से मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की उलटी गिनती शुरू होने वाली है . कात्यान के अनुसार योगी आदित्यनाथ के यह बुरे दिन पूरे तीन महीने यानि 31 नवम्बर तक चलेंगे . इस बीच कुछ ऐसी स्तिथि पैदा हो सकती है की आदित्यनाथ को पार्टी आलाकमान के विरोध का सामना करना पड़े . अब देखना दिलचस्प होगा की मोदी जी के डिजिटल इंडिया में क्या ज्योतिष की बातें सच होती है ? और क्या योगी आदित्यनाथ के बुरे दिन आते है ?