Newbuzzindia: मध्य प्रदेश में 3 साल पहले एक महा घोटाला ‘व्यापमं’ हुआ था जिस से कि मध्य प्रदेश में नहीं देश की राजनीति भी पूरी तरह हिल गई थी । शिवराज सरकार में हुए इस महाघोटाले से मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान पर सभी विरोधियों ने उंगली उठाई तो मुख्यमंत्री पद से त्याग देने के लिए तक दबाव बनाया । यह व्यापमं घोटाला अभी तक पूरी तरह शांत नहीं हुआ है। इसके बावजूद मध्य प्रदेश में एक नया घोटाला सामने आया है। कयास लगाए जा रहे है की यह घोटाला व्यापमं घोटाले के स्तर का ही हो सकता है।
यह घोटाला मध्य प्रदेश में राज्य की सबसे अहम मानी जाने वाली भर्ती आयोग, मध्य प्रदेश लोक सेवा आयोग (एमपीपीएससी) में होने की आशंका है। एमपीपीएससी द्वारा कुछ साल पहले उच्च शिक्षा विभाग में की गई प्रोफेसरों की सीधी भर्ती में भारी अनियमितता सामने आई है।
नेशनल दस्तक के अनुसार, यह घोटाला जनवरी 2009 में एमपीपीएससी ने उच्च शिक्षा विभाग में प्रोफेसरों की भर्ती के लिए 385 पदों का विज्ञापन जारी किया था। इसके तहत प्रोफेसर पद पर सीधे साक्षात्कार के माध्यम से नियुक्ति की जानी थी। वर्ष 2011 के मध्य में यह प्रक्रिया पूरी हुई थी। शिकायतों के बाद इसकी जांच के लिए चार सदस्यीय जांच समिति का गठन किया गया था। उसी समिति ने हाल में अपनी रिपोर्ट राज्य सरकार को सौंपी है जिसमे कहा गया है कि आयोग द्वारा विज्ञापन जारी होने तथा चयन हेतु साक्षात्कार पूरा करने के बाद अनुभव के बारे में जो स्पष्टीकरण जारी किया गया वह पूरी तरह नियम के विरुद्ध है। जांच समिति ने कहा कि भर्ती प्रक्रिया के लिए साक्षात्कार होने के बाद अगस्त, 2011 में विज्ञापन में संशोधन जारी किया गया। नियमानुसार यदि संशोधन करना आवश्यक था तो पूरी प्रक्रिया निरस्त कर फिर से आवेदन मंगाए जाने थे लेकिन ऐसा नहीं किया गया। समिति के अनुसार उच्च शिक्षा विभाग के भर्ती नियमों के मुताबिक अनुभव योग्यताएं, जो पारंपरिक रूप से पदोन्नति के लिए भी स्वीकार की जाती हैं, से अलग योग्यताओं की व्याख्या या स्पष्टीकरण लोक सेवा आयोग द्वारा जारी किया गया।
RSS का नाम भी आया सामने-
जिस समय यह भर्ती प्रक्रिया चली उस दौरान प्रोफेसर पीके जोशी मध्य प्रदेश लोक सेवा आयोग के अध्यक्ष थे। उनका कार्यकाल 13 जून 2006 से 28 सिंतबर, 2011 तक था। आयोग के तत्कालीन अध्यक्ष को राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की पृष्ठभूमि का माना जाता है। उच्च शिक्षा विभाग के सूत्र नाम न बताने की शर्त पर जानकारी देते हैं कि चयनित कई उम्मीदवार भी संघ की पृष्ठभूमि से जुड़े हैं।
