Newbuzzindia: उत्तर प्रदेश में कांग्रेस का बेड़ा पार करने के लिए प्रियंका गांधी वाड्रा के मैदान में उतरने की बातें कई महीनों से चल रही हैं, लेकिन अब ऐसी खबरें आ रही हैं कि प्रियंका का इंतजार कर रहे कांग्रेसियों की मुराद जल्दी ही पूरी होने वाली है। प्रियंका अगले हफ्ते यानी 19 सितंबर को कांग्रेस की सक्रिय राजनीति में एंट्री मार सकती हैं।
19 तीराख का चुनाव इसलिए किया गया है कि क्योंकि ये दिन इंदिरा गांधी का जन्मदिन है और कांग्रेसी प्रियंका में इंदिरा गांधी का ही अक्स देखा करते हैं।
उत्तर प्रदेश में कांग्रेस के चुनाव प्रचार अभियान की कमान संभाल रहे प्रशांत किशोर शुरू से ही प्रियंका को चुनाव मैदान में उतारने के पक्षधर रहे हैं। उन्होंने पिछले दिनों कह भी दिया था कि प्रियंका को उत्तर प्रदेश में कांग्रेस के चेहरे के तौर पर पेश किया जाना चाहिए। कांग्रेस फिलहाल राहुल गांधी को ही आगे करना चाहती है इसलिए पीके की इस बात को नहीं माना गया।
इसके बाद पीके दूसरी योजना पर काम कर रहे थे। वो ये थी कि पहले यूपी के आगामी विधानसभा चुनावों के लिए राहुल गांधी को स्थापित कर दिया जाए उसके बाद प्रियंका को लाया जाए।
पीके की इस रणनीति में कांग्रेस का दोहरा फायदा था, पहला और सबसे बड़ा ये कि राहुल गांधी जो कि पिछले दो-तीन सालों से अथक परिश्रम के बावजूद राजनीति में नाकाम बताए जा रहे हैं, उन्हें अगर उत्तर प्रदेश में स्थापित कर दिया जाए तो इसके दूरगामी असर होंगे और भविष्य में उन्हें प्रधानमंत्री की कुर्सी तक ले जाएंगे।
दूसरे राहुल के स्थापित हो जाने के बाद प्रियंका सामने आएंगी तो वो कांग्रेस को दोहरा उछाल दे पाएंगी। इसीलिए पीके ने प्रियंका को सामने लाने से पहले राहुल का यूपी में महीने भर का कार्यक्रम रखा।
राहुल गांधी की महायात्रा को उत्तर प्रदेश में जैसा रिस्पॉन्स मिल रहा है उससे कांग्रेस काफी खुश दिखाई दे रही है। खासतौर पर राहुल की खाट सभा उसी तर्ज पर लोकप्रिय हो रही है जैसी कि पीके की बनाई पूर्व की योजनाएं चाहे वो पीएम मोदी के लिए ‘चाय पर चर्चा’ हो या फिर नीतीश कुमार के लिए बनाई गई ‘घर-घर दस्तक’ योजनाएं थीं।
राहुल की यात्रा और खाट सभा दोनों में ही अच्छी-खासी भीड़ जुट रही है। इससे कांग्रेसी जहां जोश में हैं वहीं विरोधियों की नींद उड़ती दिख रही है, खासतौर पर समाजवादी पार्टी की, जिसे अपना मुस्लिम वोटबैंक खिसकता दिख रहा है।
