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स्वाथ्य कारणों के चलते अवकाश पर मध्‍यप्रदेश के डीजीपी शुक्ला,वीके सिंह को मिला कार्यवाहक डीजीपी का प्रभार

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मध्यप्रदेश के डीजीपी ऋषि शुक्ला के छह सप्ताह के मेडिकल लीव पर जाने से चुनाव अयोग ने मप्र कैडर के 1984 बैच के आईपीएस अफसर वीके सिंह को मध्यप्रदेश पुलिस का नया कार्यवाहक डीजीपी बनाया है। अब उन्‍हीं की निगरानी में विधानसभा चुनाव संपन्‍न कराए जाएंगे। पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) ऋषि कुमार शुक्ला को रविवार को हृदयाघात हो गया था। वे इलाज के लिए मंगलवार सुबह मुंबई रवाना हो चुके है.

चुनाव आयोग को भेजे गए पैनल में 1984 बैच के तीन अधिकारियों वीके सिंह, मैथिलीशरण गुप्त और संजय चौधरी के नाम थे। इनमें से चुनाव आयोग ने वीके सिंह के नाम को मंजूरी दे दी है। वह इस समय अध्यक्ष पुलिस हाउसिंग कॉरपोरेशन हैं, जबकि शुक्ला के 1983 बैच की एकमात्र अधिकारी रीना मित्रा इस समय केंद्रीय प्रतिनियुक्ति पर हैं। आपको बता दें कि आईपीएस अफसर वीके सिंह ने अपना पदभार संभाल लिया है।

फर्जी वोटर लिस्ट: सुप्रीम कोर्ट ने नहीं मानी वोटर लिस्ट में गड़बडी

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वोटर लिस्ट में फर्जी वोटर होने का आरोप लगा रही कांग्रेस पार्टी को सुप्रीम कोर्ट से बड़ा झटाक लगा है। सुप्रीम कोर्ट ने कमलनाथ की याचिका खारिज कर दी है। कमलनाथ के अलावा राजस्थान प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष सचिन पायलट ने भी एक याचिका दायर की थी।

सुप्रीम कोर्ट जाने से पहले ही चुनाव आयोग ने कांग्रेस की शिकायत पर ही वोटर लिस्ट का पुनरीक्षण किया था। इस पुनरीक्षण में चौबीस लाख से अधिक ऐसे वोटरों के नाम हटाए गए थे जिनकी मृत्यु हो गई थी अथवा अन्य क्षेत्र में जाकर रहने लगे थे।

चुनाव आयोग का तर्क था कि नए स्थान पर वोटर लिस्ट में अपना नाम तो जुड़वा लेते हैं लेकिन, पुराने स्थान की लिस्ट से नाम नहीं कटवाते हैं। कांग्रेस ऐसे ही वोटरों का फर्जी बता रही थी। जबकि चुनाव आयोग लिस्ट में दोहराव मान रही थी। सुप्रीम कोर्ट में याचिका खरिज हो जाने के बाद अब कांग्रेस के लिए वोटर लिस्ट में संशोधन के सारे रास्ते बंद हो गए हैं।

मध्यप्रदेश में 28 नवंबर को होंगे मतदान,5 राज्यों में 11 दिसंबर को आ जायेंगे चुनावी नतीजे:चुनाव आयोग

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देश के चार राज्यों राजस्थान, मध्यप्रदेश, छत्तीसगढ़ और मिजोरम में इस साल होने वाले विधानसभा चुनाव के तारीखों की घोषणा शनिवार को चुनाव आयोग की प्रेस कॉन्फ्रेंस शुरू हो गयी है। इसमें चुनाव आयुक्त ने कहा एमपी, राजस्थान, छत्तीसगढ़ में विधानसभा का कार्यकाल जनवरी, 2019 में खत्म हो रहा है। अभी केवल 4 राज्यों में ही विधानसभा चुनावों की तारीखों का ऐलान होगा। छत्तीसगढ़ में दो चरणों में चुनाव होंगे। पहले चरण में मतदान 12 नवंबर तथा दूसरे चरण के मतदान 20 नवंबर को होंगे

लाइव अपडेट्स

एमपी, राजस्थान, छत्तीसगढ़ में विधानसभा का कार्यकाल जनवरी, 2019 में खत्म हो रहा है: चुनाव आयोग

– चारों चुनावी राज्यों में मतदान VVPAT मशीनों के जरिए करवाई जाएगी: चुनाव आयोग

– चुनाव की तारीखों का ऐलान होते ही आज से मध्य प्रदेश, राजस्थान, छत्तीसगढ़ और मिजोरम में लागू हो जाएगी आचार संहिता

मध्य प्रदेश, राजस्थान, छत्तीसगढ़ और मिजोरम में मतदान कराने को लेकर तैयारियां पूरी हैं: चुनाव आयोग

चुनाव में कोई भी उम्मीदवार अधिकतम 28 लाख रुपया खर्च कर सकेंगे: चुनाव आयोग

चारों चुनावी राज्यों में वोटिंग के लिए नई मशीनों का इस्तेमाल होगा: चुनाव आयोग

-मिजोरम और मध्यप्रदेश में 28 नवंबर को मतदान होंगे :चुनाव आयोग

-छत्तीसगढ़ में पहले फेज के मतदान 12 नवंबर तथा दूसरे फेज के मतदान 20 नवंबर को होंगे :चुनाव आयोग

-राजस्थान और तेलंगाना में 7 दिसंबर को मतदान होंगे : चुनाव आयोग 

मध्यप्रदेश में विधानसभा चुनावों की घोषणा अब कुछ ही देर में,राहुल गाँधी कर रहे हैं सभा

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मध्यप्रदेश विधानसभा चुनाव समेत पांच राज्यों में होने वाले चुनावों की भी आज घोषणा हो सकती है। चुनाव आयोग ने इसकी पूरी तैयारियां भी कर ली हैं। चुनाव आयोग आज दोपहर तीन बजे एक प्रेस कॉन्फ्रेंस करने वाला है जिसमें इन राज्यों में चुनाव तारीखों की घोषणा हो सकती है। पहले यह प्रेस कॉन्फ्रेंस 12:30 बजे होनी थी, लेकिन किसी कारणवश अब यह प्रेस कॉन्फ्रेंस तीन बजे रखी गई है। आयोग अलग-अलग चरणों में यह चुनाव करवा सकता है। आयोग द्वारा तारीखों की घोषणा के बाद ही राज्यों में आचार संहिता लागू हो जाएगी।

बता दें कि मध्य प्रदेश और राजस्थान में आगामी विधानसभा चुनाव को लेकर कांग्रेस और भाजपा पहले ही कमर कस चुके हैं। भाजपा अध्यक्ष अमित शाह और कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी शानिवार को मध्य प्रदेश में चुनावी रैली को संबोधित करेंगे। वहीं, प्रधानमंत्री मोदी राजस्थान में आज चुनावी रैली को संबोधित करेंगे।

तेलंगाना विधानसभा चुनाव की भी हो सकती है घोषणा

मध्य प्रदेश में 2013 में हुए विधानसभा चुनाव को लेकर तारीखों की घोषणा 4 अक्टूबर को की गई थी। इस आधार पर अनुमान लगाया जा रहा है कि इस बार भी आचार संहिता जल्द लागू हो सकती है। मध्य प्रदेश के साथ-साथ राजस्थान, छत्तीसगढ़, मिजोरम और तेलंगाना विधानसभा चुनावों की भी घोषणा की जा सकती है।

हालांकि, माना ये भी जा रहा है कि तेलंगाना में 9 अक्टूबर को अंतिम मतदाता सूची प्रकाशित होगी, इसलिए उसके बाद ही चुनावों के तारीखों की घोषणा की जाएगी। इसके अलावा ऐसा भी माना जा रहा है कि 12 अक्टूबर के बाद चुनाव की घोषणा की जाएगी, क्योंकि मध्य प्रदेश के मुख्य निर्वाचन आयुक्त ओपी रावत मनीला दौरे पर जा रहे हैं। जब वह वहां से वापस लौटेंगे, उसके बाद ही चुनाव के तारीखों की घोषणा होगी।

कहां-कितनी सीटें?

बता दें कि मध्य प्रदेश में कुल 231 सीटों पर चुनाव होगा, जबकि राजस्थान में 200 सीटों पर, छत्तीसगढ़ में 91 सीटों पर, मिजोरम में 40 सीटों पर और तेलंगाना में कुल 119 सीटों पर विधानसभा चुनाव होने हैं।

में चुनाव आयोग को चुनौती देता हूँ कि उन्होंने जो कहा है वो साबित करे:कमलनाथ

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मध्यप्रदेश की मतदाता सूची में कथित गड़बड़ी मामले में निर्वाचन आयोग ने कांग्रेस नेता कमलनाथ पर फर्जी सूची उच्चतम न्यायालय में पेश करने का गुरुुवार को आरोप लगाया। आयोग ने न्यायमूर्ति ए के सिकरी और न्यायमूर्ति अशोक भूषण की पीठ के समक्ष दावा किया कि आयोग की छवि खराब करने और मनमाफिक आदेश के लिए श्री कमलनाथ ने फर्जी मतदाता सूची सौंपे हैं। आयोग ने कहा कि कांग्रेस द्वारा उसकी वेबसाइट में मौजूद मतदाता सूची में हेर-फेर कर नयी सूची शीर्ष अदालत के समक्ष पेश किया गया है। जिसके लिए मध्य प्रदेश कांग्रेस पर फर्जी सबूत पेश करके न्यायालय को गुमराह करने का मुकदमा चलाया जाना चाहिए।

न्यायालय ने आयोग के इस दावे पर कड़ा ऐतराज जताते हुए आगाह किया कि वह (न्यायालय) उस कंपनी को तलब करेगा, जिसने मतदाताओं के आंकड़े सार्वजनिक किये और फर्जीवाड़े का खुलासा किया। खंडपीठ ने आयोग की ओर से पेश हो रहे वरिष्ठ अधिवक्ता विकास सिंह को मुख्य चुनाव आयुक्त ओ पी रावत से यह पता करने को कहा कि क्या उन्हें इस तरह का कोई दस्तावेज (फर्जी मतदाता सूची) सौंपा गया है, या इसे सीधे अदालत को दिया गया है।

श्री कमलनाथ की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल ने दलील दी कि संबंधित डाटा पब्लिक डोमेन में है और इसमें कुछ भी गलत नहीं है।याचिकाकर्ता ने इसे श्री रावत को भी सौंपा है। मामले की अगली सुनवाई आठ अक्टूबर को होगी।

चुनाव आयोग भ्रमित करने का काम कर रहा है:कमलनाथ

प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष कमलनाथ ने अपने ऊपर लगे आरोपों के खिलाफ पीसीसी में मीडिया से चर्चा करते हुए कहा कि चुनाव आयोग भ्रमित करने का काम कर रहा है। आज विश्व में चुनाव आयोग की साख। हम भी चुनाव आयोग को निष्पक्षता के लिये मदद कर रहे है। हमने जो शिकायत की थी वो 18 जनवरी की मतदाता सूची के आधार पर की थी। 31 जुलाई को उन्होंने जो सूची प्रकाशित की उसमें 24 लाख नाम हटायें गये। जब हमारी शिकायत ग़लत थी तो क्यों नाम हटायें ? हमने सीडी सार्वजनिक तौर पर उन्हें सौंपी। हमने चुनाव आयोग से माँग की थी कि हमें मतदाता सूची text प्रारूप में दी जाये लेकिन हमें image प्रारूप में दी गयी। जबकि राजस्थान को text प्रारूप में दी गयी। text प्रारूप में देने से हमें डूप्लिकेट वोटर्स पकड़ने में आसानी होती। हमने शिकायत भी डूप्लिकेट वोटर्स को लेकर ही की थी। हमारी माँग के बावजूद हमें यह सूची नहीं दी गयी। चुनाव आयोग यह बताये क्यों नहीं दी गयी ? हमने 3 जून को मिलकर सारे प्रमाण सौंपे ।

डीज़ल – पेट्रोल पर कटौती चुनावी कटौती

कमलनाथ ने कहा कि डीज़ल – पेट्रोल पर इतनी दरवृद्धि के बावजूद मामूली कटौती की। क्यों वेट कम नहीं कर रही सरकार ? मतदान समाप्ति पश्चात यह दर फिर 100 तक पहुँच जायेगी। चुनाव तक इस तरह की घोषणाएँ जारी रहेगी।

मतदाता सूची के दस्तावेजों को लेकर घिरे कमलनाथ, सुप्रीम कोर्ट ने दिए जांच के आदेश

फर्जी मतदाता सूची के आरोप को लेकर सुप्रीम कोर्ट पहुंचे कांग्रेस प्रदेशाध्यक्ष कमलनाथ अब इसी मामले को लेकर घिरते नजर आ रहे हैं। दरअसल, इस प्रकरण में नाथ के दस्तावेजों पर चुनाव आयोग ने आपत्ति जताते हुए इन्हें फर्जी करार दिया है। इस पर कोर्ट ने आयोग को उसे सौंपे गए दस्तावेजों की जांच कर रिपोर्ट सोमवार तक तलब की है।

क्या था मामला?

कांग्रेस प्रदेशाध्यक्ष श्री कमलनाथ ने बीते माह सुप्रीम कोर्ट में एक याचिका दायर कर मप्र की मतदाता सूची में गड़बड़ी का आरोप लगाया था। इसी तारतम्य में उन्होंने कुछ दस्तावेज भी याचिका के साथ पेश किए थे। बताया जाता है,कि चुनाव आयोग ने अपने जवाब में इन दस्तावेजों को असत्य करार देते हुए याचिकाकर्ता पर फर्जी दस्तावेजों के सहारे अपने हक में आदेश लेने की कोशिश करने का आरोप लगाया। गुरुवार को कमलनाथ की याचिका का विरोध करते हुए चुनाव आयोग के वकील विकास सिंह ने कहा कि मतदाता सूची अपडेट करना आयोग का वैधानिक कर्तव्य है।

हालांकि, कमलनाथ की ओर से अधिवक्ता कपिल सिब्बल व विवेक तन्खा ने आरोपों का जोरदार विरोध करते हुए कहा,कि जो दस्तावेज उन्होंने चुनाव आयोग को ज्ञापन के साथ सौंपे, वे सार्वजनिक हैं। विवाद उठने पर सुप्रीम कोर्ट ने चुनाव आयोग से कमलनाथ के दावे की जांच करने को कहा है। कोर्ट ने आयोग से कहा है कि वह जांच करके सोमवार तक बताए कि क्या यही दस्तावेज कमलनाथ की ओर से उसको भी दिए गए थे। यह आदेश न्यायमूर्ति एके सीकरी की अध्यक्षता वाली पीठ ने कमलनाथ की याचिका पर सुनवाई के दौरान दिया।