में चुनाव आयोग को चुनौती देता हूँ कि उन्होंने जो कहा है वो साबित करे:कमलनाथ

मध्यप्रदेश की मतदाता सूची में कथित गड़बड़ी मामले में निर्वाचन आयोग ने कांग्रेस नेता कमलनाथ पर फर्जी सूची उच्चतम न्यायालय में पेश करने का गुरुुवार को आरोप लगाया। आयोग ने न्यायमूर्ति ए के सिकरी और न्यायमूर्ति अशोक भूषण की पीठ के समक्ष दावा किया कि आयोग की छवि खराब करने और मनमाफिक आदेश के लिए श्री कमलनाथ ने फर्जी मतदाता सूची सौंपे हैं। आयोग ने कहा कि कांग्रेस द्वारा उसकी वेबसाइट में मौजूद मतदाता सूची में हेर-फेर कर नयी सूची शीर्ष अदालत के समक्ष पेश किया गया है। जिसके लिए मध्य प्रदेश कांग्रेस पर फर्जी सबूत पेश करके न्यायालय को गुमराह करने का मुकदमा चलाया जाना चाहिए।

न्यायालय ने आयोग के इस दावे पर कड़ा ऐतराज जताते हुए आगाह किया कि वह (न्यायालय) उस कंपनी को तलब करेगा, जिसने मतदाताओं के आंकड़े सार्वजनिक किये और फर्जीवाड़े का खुलासा किया। खंडपीठ ने आयोग की ओर से पेश हो रहे वरिष्ठ अधिवक्ता विकास सिंह को मुख्य चुनाव आयुक्त ओ पी रावत से यह पता करने को कहा कि क्या उन्हें इस तरह का कोई दस्तावेज (फर्जी मतदाता सूची) सौंपा गया है, या इसे सीधे अदालत को दिया गया है।

श्री कमलनाथ की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल ने दलील दी कि संबंधित डाटा पब्लिक डोमेन में है और इसमें कुछ भी गलत नहीं है।याचिकाकर्ता ने इसे श्री रावत को भी सौंपा है। मामले की अगली सुनवाई आठ अक्टूबर को होगी।

चुनाव आयोग भ्रमित करने का काम कर रहा है:कमलनाथ

प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष कमलनाथ ने अपने ऊपर लगे आरोपों के खिलाफ पीसीसी में मीडिया से चर्चा करते हुए कहा कि चुनाव आयोग भ्रमित करने का काम कर रहा है। आज विश्व में चुनाव आयोग की साख। हम भी चुनाव आयोग को निष्पक्षता के लिये मदद कर रहे है। हमने जो शिकायत की थी वो 18 जनवरी की मतदाता सूची के आधार पर की थी। 31 जुलाई को उन्होंने जो सूची प्रकाशित की उसमें 24 लाख नाम हटायें गये। जब हमारी शिकायत ग़लत थी तो क्यों नाम हटायें ? हमने सीडी सार्वजनिक तौर पर उन्हें सौंपी। हमने चुनाव आयोग से माँग की थी कि हमें मतदाता सूची text प्रारूप में दी जाये लेकिन हमें image प्रारूप में दी गयी। जबकि राजस्थान को text प्रारूप में दी गयी। text प्रारूप में देने से हमें डूप्लिकेट वोटर्स पकड़ने में आसानी होती। हमने शिकायत भी डूप्लिकेट वोटर्स को लेकर ही की थी। हमारी माँग के बावजूद हमें यह सूची नहीं दी गयी। चुनाव आयोग यह बताये क्यों नहीं दी गयी ? हमने 3 जून को मिलकर सारे प्रमाण सौंपे ।

डीज़ल – पेट्रोल पर कटौती चुनावी कटौती

कमलनाथ ने कहा कि डीज़ल – पेट्रोल पर इतनी दरवृद्धि के बावजूद मामूली कटौती की। क्यों वेट कम नहीं कर रही सरकार ? मतदान समाप्ति पश्चात यह दर फिर 100 तक पहुँच जायेगी। चुनाव तक इस तरह की घोषणाएँ जारी रहेगी।

मतदाता सूची के दस्तावेजों को लेकर घिरे कमलनाथ, सुप्रीम कोर्ट ने दिए जांच के आदेश

फर्जी मतदाता सूची के आरोप को लेकर सुप्रीम कोर्ट पहुंचे कांग्रेस प्रदेशाध्यक्ष कमलनाथ अब इसी मामले को लेकर घिरते नजर आ रहे हैं। दरअसल, इस प्रकरण में नाथ के दस्तावेजों पर चुनाव आयोग ने आपत्ति जताते हुए इन्हें फर्जी करार दिया है। इस पर कोर्ट ने आयोग को उसे सौंपे गए दस्तावेजों की जांच कर रिपोर्ट सोमवार तक तलब की है।

क्या था मामला?

कांग्रेस प्रदेशाध्यक्ष श्री कमलनाथ ने बीते माह सुप्रीम कोर्ट में एक याचिका दायर कर मप्र की मतदाता सूची में गड़बड़ी का आरोप लगाया था। इसी तारतम्य में उन्होंने कुछ दस्तावेज भी याचिका के साथ पेश किए थे। बताया जाता है,कि चुनाव आयोग ने अपने जवाब में इन दस्तावेजों को असत्य करार देते हुए याचिकाकर्ता पर फर्जी दस्तावेजों के सहारे अपने हक में आदेश लेने की कोशिश करने का आरोप लगाया। गुरुवार को कमलनाथ की याचिका का विरोध करते हुए चुनाव आयोग के वकील विकास सिंह ने कहा कि मतदाता सूची अपडेट करना आयोग का वैधानिक कर्तव्य है।

हालांकि, कमलनाथ की ओर से अधिवक्ता कपिल सिब्बल व विवेक तन्खा ने आरोपों का जोरदार विरोध करते हुए कहा,कि जो दस्तावेज उन्होंने चुनाव आयोग को ज्ञापन के साथ सौंपे, वे सार्वजनिक हैं। विवाद उठने पर सुप्रीम कोर्ट ने चुनाव आयोग से कमलनाथ के दावे की जांच करने को कहा है। कोर्ट ने आयोग से कहा है कि वह जांच करके सोमवार तक बताए कि क्या यही दस्तावेज कमलनाथ की ओर से उसको भी दिए गए थे। यह आदेश न्यायमूर्ति एके सीकरी की अध्यक्षता वाली पीठ ने कमलनाथ की याचिका पर सुनवाई के दौरान दिया।

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