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आम आदमी पार्टी विधायक अमानतुल्लाह खान को ED ने दिल्ली वक्फ बोर्ड घोटाले में किया गिरफ्तार

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दिल्ली में आम आदमी पार्टी सरकार की मुश्किलें बढ़ती जा रही हैं. शराब नीति केस में कथित घोटाले को लेकर पहले डिप्टी सीएम मनीष सिसोदिया गिरफ्तार हुए. फिर मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल को ED ने कस्टडी में लिया. अब आम आदमी पार्टी के एक और विधायक की गिरफ्तारी की खबर है. ED के सूत्रों के मुताबिक, वक्फ बोर्ड नियुक्ति घोटाले में आम आदमी पार्टी के विधायक अमानतुल्लाह खान को गिरफ्तार किया गया है. सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर अमानतुल्लाह खान गुरुवार (18 अप्रैल) को ED के सामने पेश हुए थे. ED दफ्तर में करीब साढ़े 9 घंटे उनसे पूछताछ हुई, जिसके बाद एजेंसी के अधिकारियों ने उन्हें गिरफ्तार कर लिया. 

अमानतुल्लाह खान ओखला से विधायक हैं. 2020 में आम आदमी पार्टी ने ओखला से अमानतुल्ला खान को फिर से मैदान में उतारा था. इस चुनाव में उनकी जीत हुई. अमानतुल्ला खान अक्सर विवादों में घिरे रहे हैं. ओखला विधानसभा में वो अक्सर विपक्षी दलों के निशाने पर भी रहे.

अमानतुल्ला खान पर आरोप है कि दिल्ली वक्फ बोर्ड के अध्यक्ष के रूप में उन्होंने 32 लोगों को अवैध रूप से भर्ती किया. इसके साथ ही उन्होंने अवैध रूप से दिल्ली वक्फ बोर्ड की कई संपत्तियों को किराए पर दिया है. AAP विधायक पर ये भी आरोप लगाया गया है कि उन्होंने दिल्ली वक्फ बोर्ड के फंड का गलत इस्तेमाल किया है. दिल्ली वक्फ बोर्ड के तत्कालीन CEO ने इस तरह की अवैध भर्ती के खिलाफ बयान जारी किया था. जांच के दौरान अमानतुल्लाह के करीबियों के ठिकानों से कैश बरामद हुए थे.

मध्यप्रदेश में कमलनाथ के शपथग्रहण में केजरीवाल के शामिल न होने का यह हो सकता है बड़ा कारण

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मध्यप्रदेश के 18वे मुख्यमंत्री के तौर पर कमलनाथ ने सोमवार को भोपाल के जंबूरी मैदान में शपथ ली। शपथ में कांग्रेस और विपक्ष के वरिष्ट नेताओं से साथ प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान, बाबूलाल गौर और कैलाश जोशी भी शामिल हुए। वहीं विपक्षी एकता के इस मंच से दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल नदारद दिखे। कांग्रेस की ओर से मुख्यमंत्री केजरीवाल को नियोता भी भेजा गया है लेकिन अभी तक यह स्पष्ट नही हो पाया है कि आखिर अरविंद या आम आदमी पार्टी का कोई भी नेता कार्यक्रम में शामिल क्यों नही हुआ। वहीं अटकलें इस बात की भी लगे जा रही है कि सोमवार को हाईकोर्ट द्वारा सिख दंगों पर सुनाए गए फैसले के चलते केजरीवाल कार्यक्रम में शामिल नही हुए।

तो क्या सिख दंगों के दाग ने केजरीवाल को भोपाल आने से रोका ?

सिख दंगों का कोई आरोपी बचना नही चाहिए: केजरीवाल

कमलनाथ की शपथ के साथ ही सोमवार को 1984 के सिख दंगों पर दिल्ली हाई कोर्ट के फैसले में कांग्रेस नेता सज्जन कुमार को दोषी ठहराते हुए उम्र कैद की सजा सुनाई है। इसके बाद दिल्ली में आप के सांसद भगवंत मान ने मांग की है कि सिख दंगों में कमलनाथ पर भी केस चलना चाहिए और उन्हें मुख्यमंत्री नहीं बनाया जाना चाहिए। वहीं केजरीवाल ने भी सिख दंगों पर दिल्ली हाई कोर्ट के फैसले पर प्रतिक्रिया देते हुए ट्वीट किया कि वे इसका स्वागत करते हैं। केजरीवाल ने यह भी लिखा है कि दंगे में शामिल कोई भी आरोपी नहीं बचना चाहिए, चाहे कोई कितनाभी ताकतवर क्यों न हो। आम आदमी पार्टी इससे पहले भी सिख दंगों में कांग्रेस नेताओं पर निशाना साधते रहे हैं। पंजाब विधानसभा चुनाव से पहले आप नेता संजय सिंह ने कहा था कि सिख दंगों के मुख्य आरोपियों में शामिल कांग्रेस नेता सज्जन कुमार, जगदीश टाइटलर और कमलनाथ सफेद कुर्ते पहनकर घूम रहे हैं। कांग्रेस ने 32 साल से अपनी मानसिकता नहीं बदली है। ऐसे में सवाल उठता है कि क्या सिख दंगों के दाग से बचने के लिए मुख्यमंत्री अरविन्द केजरीवाल कमलनाथ के शपथग्रहण में शामिल नही हुए ?

उपेंद्र कुशवाहा ने तोड़ी चुप्पी, मध्यप्रदेश की 66 सीटों पर लड़ेंगे चुनाव

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राष्ट्रीय लोक समता पार्टी के अध्यक्ष और एनडीए सरकार में केंद्रीय मंत्री उपेंद्र कुशवाहा ने मंगलवार को चुप्पी तोड़ते हुए कहा कि भाजपा ने सीटों के आधे-आधे बंटवारें के फैसले पर नाराज हैं। साथ ही मध्यप्रदेश विधानसभा चुनाव में अकेले चुनाव लड़ने की घोषणा कर दी। कुशवाहा ने बताया की पार्टी प्रदेश की 66 सीटों पर अपने प्रत्याशी उतारेगी।

बता दें कि 2014 के लोकसभा चुनाव में भाजपा, आरएलएसपी और पासवान की लोक जनशक्ति पार्टी ने बिहार की 40 सीटों में एक साथ चुनाव लड़ा था, जिसमें भाजपा को 22, लोक जनशक्ति पार्टी 6 और आरएलएसपी को तीन सीटें मिलीं थीं।

क्या है मामला :

26 अक्टूबर को दिल्ली में बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की मुलाकात भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह से हुई, जिसमें आगामी लोकसभा चुनाव को लेकर सीटों के बटवारें पर फैसला लिया गया। प्रेस कांर्फेंस कर दोनो ने बराबरी की सीटों पर चुनाव लड़ने की बात कही। साथ ही बिहार में भाजपा के सहयोगी दल आरएलएसपी (राष्ट्रीय लोक समता पार्टी) और लोक जनशक्ति पार्टी को भी सम्मान जनक सीटें देने की बात कही।

इसी दिन दूसरी तरफ कुशवाहा की मुलाकात लालू के बेटे और आरजेडी (राष्ट्रीय जनता दल) नेता तेजस्वी यादव से हुई, जिसके बाद ये कयास लगाए जा रहे थे कि शायद कुशवाहा अब आरजेडी के साथ लोकसभा चुनाव लड़ सकतें हैं। साथ ही शाह-नीतीश की लड़ाई से नाराज कुशवाहा के इस्तीफा देने की खबरें भी आने लगी थी। खैर कुशवाहा ने चुप्पी तोड़ते हुए सारी बतों का खंडन किया और मध्यप्रदेश में भाजपा को झटका देते हुए 66 सीटों पर अकेले चुनाव लड़ने की घोषणा कर दी।

उपेंद्र कुशवाहा और तेजस्वी यादव की मुलाकात।

मध्यप्रदेश में बाहरी पार्टियों की भरमार :

28 नवंबर को मध्यप्रदेश में विधानसभा चुनाव होने वाले हैं और इस चुनावीं जंग में बाहर की कई पार्टियों ने छलांग लगा दिया है। इसी कड़ी में बिहार में भाजपा के साथ 2014 के लोकसभा चुनाव लड़ने वाली उपेंद्र कुशवाहा की राष्ट्रीय लोक समता पार्टी मध्यप्रदेश में भाजपा की प्रतिव्दंदी बन खड़ी हो गई है। भाजपा-कांग्रेस के अलावा प्रदेश में बहुजन समाज पार्टी, समाजवादी पार्टी, आम आदमी पार्टी, कम्यूनिस्ट पार्टी जैसी कई पार्टियों ने हिस्सा लिया है।

कांग्रेस की शरद कौल और आप की नेहा हुई भाजपा में शामिल।

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विधानसभा चुनाव से पहले नेताओं का पार्टी बदलने का सिलसिला शुरू हो गया है। शहडोल से कांग्रेस की पूर्व जिला अध्यक्ष और जिला पंचायत सदस्य शरद कौल आज भाजपा में शामिल हो गयी। शरद ने प्रदेश अध्यक्ष राकेश सिंह और प्रदेश प्रभारी डॉ विनय सहस्रबुद्धे एवं अन्य वरिष्ठ नेताओं के समक्ष भारतीय जनता पार्टी जॉइन की।

वहीं आम आदमी पार्टी की पूर्व मीडिया समन्वयक नेहा बग्गा नही भी आज भाजपा की सदस्यता ली। इस मौके पर राकेश सिंह ने कहा कि “नेहा ने मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान के नेतृत्व में हुए विकास कार्य से प्रभावित होकर भाजपा की सदस्यता ली। वहीं नेहा ने कहा कि उन्हें पार्टी में जो भी जिम्मेदारी मिलेगी उसका निर्वहन करेंगी।

आम आदमी पार्टी ने किया नेहा से किनारा।

नेहा बग्गा के भाजपा में शामिल होने पर आम आदमी पार्टी का कहना है कि वह डेढ़ साल पहले पार्टी छोड़ चुकी है और फिलहाल उनका पार्टी से कोई संबंध नही है। 2018 विधानसभा चुनाव में भी नेहा की कोई भूमिका नही है। नेहा को उनकी नई भूमिका के लिए शुभकामनाएं।

कांग्रेस की शरद कौल और आप की नेहा हुई भाजपा में शामिल।

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विधानसभा चुनाव से पहले नेताओं का पार्टी बदलने का सिलसिला शुरू हो गया है। शहडोल से कांग्रेस की पूर्व जिला अध्यक्ष और जिला पंचायत सदस्य शरद कौल आज भाजपा में शामिल हो गयी। शरद ने प्रदेश अध्यक्ष राकेश सिंह और प्रदेश प्रभारी डॉ विनय सहस्रबुद्धे एवं अन्य वरिष्ठ नेताओं के समक्ष भारतीय जनता पार्टी जॉइन की।

वहीं आम आदमी पार्टी की पूर्व मीडिया समन्वयक नेहा बग्गा नही भी आज भाजपा की सदस्यता ली। इस मौके पर राकेश सिंह ने कहा कि “नेहा ने मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान के नेतृत्व में हुए विकास कार्य से प्रभावित होकर भाजपा की सदस्यता ली। वहीं नेहा ने कहा कि उन्हें पार्टी में जो भी जिम्मेदारी मिलेगी उसका निर्वहन करेंगी।

आम आदमी पार्टी ने किया नेहा से किनारा।

नेहा बग्गा के भाजपा में शामिल होने पर आम आदमी पार्टी का कहना है कि वह डेढ़ साल पहले पार्टी छोड़ चुकी है और फिलहाल उनका पार्टी से कोई संबंध नही है। 2018 विधानसभा चुनाव में भी नेहा की कोई भूमिका नही है। नेहा को उनकी नई भूमिका के लिए शुभकामनाएं।

मध्य प्रदेश में 150 सीटों पर चुनाव लड़ेगी नीतीश की जेडीयू

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मध्यप्रदेश चुनाव में महज 39 दिन बाकी है और राजनैतिक माहौल गरमाता जा रहा है। इस चुनावी रण में नीतीश कुमार की पार्टी जनता दल यूनाईटेड (जेडीयू) ने भी छंलाग लगा दी है। इसकी जानकारी जेडीयू प्रदेश अध्यक्ष सूरज जायसवाल ने दी है। जानकारी के मुताबिक जेडीयू 150 सीटों पर चुनाव लड़ने वाली है। जिसमें विंध्य, बुंदेलखंड, महाकौशल और नर्मदांचल की सीटें शामिल हैं।

क्या मध्यप्रदेश की कमान प्रशांत के हाथों में ?

2014 के लोकसभा चुनाव में मोदी को जीत दिलाने में अहम भूमिका निभाने वाले प्रशांत किशोर जेडीयू में शामिल हो गए हैं। नीतीश ने उन्हें राष्ट्रीय उपाध्यक्ष पद की जिम्मेदारी सौपीं है। प्रशांत किशोर ही इस समय जेडीयू की चुनावी रणनीति तैयार करते नजर आ रहे हैं। अब ये देखना काफी दिलचस्प होगा की क्या प्रशांत किशोर का जादू मध्यप्रदेश में चलेगा?? 25 अक्टूबर को जेडीयू की चुनावी रणनीति पर चर्चा को लेकर प्रदेश अध्यक्ष को पटना बुलाया गया है।

छोटी पार्टियों के साथ गठबंधन का प्रयास :

जेडीयू चुनाव में उतरने से पहले प्रदेश की छोटी पार्टीयों को अपने पाले में लाने का प्रयास कर रही है। जिसमें अपना दल, भारतीय शक्ति चेतना, गोंडवाना गणतंत्र पार्टी के नाखुश लोगों से इस मसले पर बात कर रही है। 22 अक्टूबर को नीतीश ने सभी छोटे दलो के पदाधिकारियों के साथ बैठक बुलाई है, जिसमें सीटों के बंटवारे को लेकर चर्चा की जाएगी। फिर 23 अक्टूबर को जेडीयू अपनी पहली सूची जारी कर देगी।

गोंडवाना और जेडीयू का गठबंधन हो पाएगा ?

मध्यप्रदेश चुनाव से पहले पार्टियों के गठबंधन का सिलसिला शुरु हो चुका है। वहीं गोंडवाना गणतंत्र पार्टी और सपा के गठबंधन की खबरें आ  रहीं थीं। पर अब चुनावी मैदान में जेडीयू भी गोंगपा को अपने पाले में लाने में जुट गई है। अब देखना होगा कि गोंगपा किसके समर्थन में जाती है। वहीं एक ओर प्रदेश में केजरीवाल की आम आदमी पार्टी, सपाक्स समेत कई छोटी बड़ी पार्टियां भी चुनाव लड़ने वाली है।

कंगाल हुई अरविंद की आप, दोबारा इमानदार सरकार चाहिए तो देना होगा चंदा

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राज्य दर राज्य चुनाव लड़ रही आम आदमी पार्टी अब कंगाल हो चुकी है। तालकटोरा स्टेडियम में पार्टी के मासिक चंदा अभियान का आगाज करते हुए दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने वहां मौजूद जनता से कहा की ‘इतिहास में ऐसा पहली बार हो रहा है की सरकार के पास बहुत पैसा है लेकिन पार्टी कंगाल है। दो साल बाद दिल्ली में विधानसभा चुनाव होने है और पार्टी के पास चुनाव लड़ने के लिए पैसा नही है। ऐसे में अगर आप दिल्ली में एक बार फिर ईमानदार सरकार चाहते है तो इसके लिए आपको चंदा देना पड़ेगा’।
अरविंद केजरीवाल ने इस मौके पर एक मोबाइल नंबर (9871010101) भी जारी किया। इस नंबर पर मिस्ड कॉल देकर कोई भी पार्टी से जुड़ सकता है और चंदा दे सकता है।
अरविंद केजरीवाल ने इस मौके सभी लोगो से हर महीने पार्टी को चंदा देने कि अपील की। केजरीवाल ने कहा की पार्टी के वॉलेंटियर्स भी हर महीने 100 रुपए जरूर दान करें।

https://twitter.com/raghav_chadha/status/1051821338241961990?s=19

कार्यक्रम में अरविंद केजरीवाल ने कहा की ‘दिल्ली में देश की सबसे ईमानदार सरकार है। पिछले साढ़े तीन साल में हमने 4 बजट पेश किये है और कुल दो लाख करोड़ खर्च किये है। ऐसे में अगर हम ठेकेदारों से 1 फीसदी कमीशन भी लेते तो 2000 करोड़ रुपये हमारे पास होते लेकिन हमने ईमानदारी से काम किया। हमने वो करके दिखाया जो दुसरे राज्यों में 15-15 सालों से सत्ता पर बैठे लोग नही कर पाए।’
दिल्ली सरकार की उपलब्धियां गिनाते हुए केजरीवाल ने कहा की ‘हमने ईमानदारी से काम किया। मोहल्ला क्लीनिक बनाए, स्कूलों की हालत सुधारी। 24 घंटे सबसे सस्ती बिजली उपलब्ध कराई। अगर हमने ठेकेदारों से पैसे लिए होते तो हम यह सब नही कर पाते’।

लुधियाना नगर निगम चुनाव में बीजेपी और अकाली दल का सूपड़ा साफ, कांग्रेस की बड़ी जीत !

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लुधियाना नगर निगम चुनाव में कांग्रसे ने बाजी मारते हुए 62 वार्डों पर जीत दर्ज की। 10 में अकाली, 10 में भाजपा, 7 लिप और 4 वार्डों में निर्दलीय को जीत मिली। बता दें कि 24 फरवरी को हुए मतदान के बाद महानगर के 494 उम्मीदवारों की किस्मत ईवीएम में बंद हो गई थी। कि कांग्रेस, बीजेपी और शिरोमणि अकाली दल के बीच कड़ा मुकाबला था। मंगलवार सुबह मतगणना शुरू हुई और दोपहर तक 494 उम्मीदवारों में से 95 की किस्मत का फैसला हो गया।वोटों की गिनती अलग-अलग केंद्रों में हुई थी।
मिली जानकारी के मुताबिक, 95 सीटों वाले इस नगर निगम में कांग्रेस 62 सीटों पर जीत दर्ज की है. दूसरे नंबर पर शिरोमणि अकाली दल है जिसे 11 सीटों से संतुष्ट करना पड़ा है. बीजेपी को महज 10 सीटों पर जीत मिली है.

इस नगर निगम चुनाव में अपनी किस्मत आजमा रही आम आदमी पार्टी को सिर्फ एक सीट मिली है. नई पार्टी लोक इंसाफ पार्टी को 7 सीटें मिली हैं. लोक इंसाफ पार्टी और आप इस चुनाव में गठबंधन कर मैदान में थे.
चार सीटों पर निर्दलीय उम्मीदवार विजयी हुए हैं.
लुधियाना नगर निगम की 95 सीटों पर कुल 494 उम्मीदवार मैदान में थे. मुख्य मुकाबला कांग्रेस और शिरोमणि अकाली दल-बीजेपी गठबंधन के बीच था.
लुधियाना नगर निगम चुनाव के लिए 24 फरवरी को मतदान हुआ था. दो सीटों पर सोमवार को भी मतदान हुआ था. इस चुनाव के लिए 59.08 प्रतिशत लोगों ने अपने मतधिकार का इस्तेमाल किया था.
लुधियाना नगर निगम के तहत करीब 10 लाख 50 हजार वोटर रजिस्टर्ड हैं. इनमें 5 लाख 67 हजार पुरुष, 4 लाख 28 हजार महिलाएं और 23 थर्ड जेंडर मतदाता हैं.

मोदी सरकार के खिलाफ आए भाजपा के वरिष्ठ नेता, बजट को बताया निराशाजनक ।

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मोदी सरकार द्वारा पेश किए गए बजट की हर जगह आलोचना हो रही है। विपक्ष, आम जनता और संघ के सहयोगी संगठन पहले ही बजट पर नाराजगी जाहिर कर चुके है। संघ के सहयोगी संगठन भारतीय मजदूर संघ ने शुक्रवार राष्ट्रव्यापी विरोध प्रदर्शन का ऐलान कर दिया है। 
इस सबके बाद अब भाजपा के वरिष्ठ नेता और पूर्व वित्त मंत्री यशवंत सिन्हा ने मोदी सरकार के बजट को निराशाजनक बताया है। सिन्हा का कहना है कि ‘उम्मीद थी कि बजट से आम आदमी, युवाओं और किसानों को राहत मिलेगी पर ऐसा नही हुआ। कृषि क्षेत्र के साथ-साथ यह बजट शिक्षा, स्वास्थ और रोजगार की दृष्टि से निराशाजनक रहा।

यशवंत सिंह ने आगे कहा कि इस बजट में किसानों की फसलों के भाव समेत ऋण माफी और सिंचाई के बारे में कोई प्रावधान नहीं किया गया है। सिन्हा ने बताया कि बजट में सिर्फ आंकड़ों की बाजीगरी रही। मध्यम एवं गरीब वर्ग को इससे कोई लाभ होने वाला नहीं है। उन्होंने कहा कि असंतुलित बजट पेश करके सरकार ने राहत के बजट को पेश करने का एक और मौका खो दिया है।

आपको बता दें कि यशवंत सिन्हा भाजपा के वरिष्ठ नेता है और पिछले काफी समय से सरकार के खिलाफ बयान दे रहे है। अपने इस्तीफे पर बोलते हुए यशवंत सिंह ने कहा कि वह पार्टी से इस्तीफा नही देंगे और अगर पार्टी चाहे तो उन्हें निकाल सकती है। 

20 विधायकों की बर्खास्तगी पर उप मुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया का दिल्ली की जनता के नाम पत्र

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इन्होंने आम आदमी पार्टी के 20 विधायकों को बर्खास्त कर दिया …
मेरे प्यारे दिल्लीवासी,
आज इस खुले पत्र के माध्यम से मैं आपसे सीधे बात करना चाहता हूँ। मन दुःखी है। पर निराश नहीं हूँ। क्यूँकि मुझे आप पर भरोसा है। दिल्ली के और देश के लोग मेरी आशा हैं। 
तीन साल पहले आपने 70 में से 67 विधायक चुनकर आम आदमी पार्टी की सरकार बनायी थी। आज इन्होंने आपके 20 विधायकों को बर्खास्त कर दिया। इनका कहना है की ये 20 विधायक “लाभ के पद” पर थे। 
हमने इन 20 विधायकों को संसदीय सचिव बनाया था और इन्हें अलग अलग जिम्मेदारियाँ दी थी। जैसे एक विधायक को सरकारी स्कूलों की ज़िम्मेदारी दी। वो रोज़ सरकारी स्कूलों में जाता था, देखता था कि टीचर आए हैं, सब कुछ ठीक चल रहा है। जहाँ ज़रूरत होती थी वहाँ ऐक्शन लेता था। इसी तरह एक विधायक को सरकारी अस्पतालों की ज़िम्मेदारी दी, एक विधायक को मोहल्ला क्लीनिक की ज़िम्मेदारी दी। इस तरह 20 विधायकों को हमने अलग अलग जिम्मेदारियाँ दी। बदले में इन विधायकों को कोई सरकारी गाड़ी नहीं दी, कोई बंगला नहीं दिया, एक नया पैसा तनख़्वाह नहीं दी। कुछ भी नहीं दिया। ये सभी विधायक अपने ख़ुद के पैसे ख़र्च करके काम करते थे क्योंकि ये सब आंदोलन से आए थे और देश के लिए काम करने का जुनून था। 
जब इनको कुछ नहीं दिया तो ये “लाभ का पद” कैसे हो गया? आपके इन विधायकों ने चुनाव आयोग को कहा कि इन्हें अपनी बात कहने का मौक़ा दिया जाए। ये साबित कर देंगे कि इन्होंने कोई लाभ नहीं लिया। चुनाव आयोग ने इन्हें 23 जून को पत्र लिखकर कहा कि इन्हें सुनवाई के लिए तारीख़ दी जाएगी। उसके बाद इन्हें सुनवाई की कोई तारीख़ नहीं दी गयी और सीधे केंद्र सरकार ने आपके इन 20 विधायकों को बर्खास्त कर दिया, बिना सुनवाई किए, बिना इनके सबूत और गवाह देखे। 
ये तो केंद्र सरकार जनता के साथ घोर अन्याय कर रही है। आपके द्वारा चुने हुए 20 विधायकों को बिना सुनवाई के मनमाने ढंग से बर्खास्त कर दिया? 
केंद्र सरकार ऐसा पहली बार नहीं कर रही। पिछले तीन सालों में उन्होंने आपके द्वारा चुनी हुई दिल्ली सरकार को तंग करने में कोई कसर नहीं छोड़ी। आपके 18 विधायकों के ख़िलाफ़ झूठे मुक़दमे लगा कर गिरफ़्तार किया गया। जब कोर्ट में पेशी हुई तो कोर्ट ने सबको छोड़ दिया। कई मामलों में तो कोर्ट ने केंद्र सरकार को फ़र्ज़ी मुक़दमे लगाने के लिए कड़ी फटकार लगाई। फिर इन्होंने आपके CM अरविंद केजरीवाल पर CBI की रेड करवा दी लेकिन इनको कुछ नहीं मिला। फिर इन्होंने आपके विधायकों को करोड़ों रुपए देकर ख़रीदने की कोशिश की। पर आपके विधायक इतने मज़बूत निकले कि ये लोग आपके एक विधायक को भी नहीं तोड़ पाए। फिर इन्होंने केजरीवाल सरकार की 400 फ़ाइलो की जाँच के आदेश दे दिए। इनको उम्मीद थी कि इन फ़ाइलो में केजरीवाल के ख़िलाफ़ ज़रूर कुछ मिल जाएगा और ये केजरीवाल को गिरफ़्तार कर लेंगे। 6 महीने तक LG साहब के दफ़्तर में 20 अफ़सर इन फ़ाइलो की जाँच करते रहे पर इनको कुछ नहीं मिला। 
सब तरफ़ से हारकर इन्होंने अब आपके 20 विधायकों को बर्खास्त कर दिया। ये लोग आख़िर ये सब क्यों कर रहे हैं? ये लोग हमें इतना तंग क्यों कर रहे हैं? हमारा क़सूर क्या है? 
मैं बताता हूँ कि ये लोग ऐसा क्यों कर रहे हैं। तीन साल पहले आपने देश की सबसे ईमानदार सरकार चुनी। पिछले तीन सालों में आपकी सरकार ने ढेरों काम किए- दिल्ली में बिजली के दाम देश में सबसे कम कर दिए, तीन साल से दिल्ली में बिजली के दाम बढ़ने नहीं दिए, पानी मुफ़्त कर दिया, 309 कालोनियों में पाइप बिछा कर घर घर तक पानी पहुँचाया, सरकारी स्कूलों का कायापलट किया, प्राइवट स्कूलों से बढ़ी फ़ीस वापिस दिलवाई, मोहल्ला क्लीनिक बनाए, सभी अस्पतालों में दवाई और टेस्ट मुफ़्त कर दिए, बुज़ुर्गों की पेन्शन बढ़ा दी, कई नए फ़्लाइओवर बनाए, कई नई सड़के बनवाई, कई कालोनियों में गली और नालियाँ बनवाई। आपकी ईमानदार सरकार ने इन तीन सालों में और भी ढेरों काम किए। 
अब 2 साल बचे हैं। इन दो सालों में और बहुत सारे काम करने हैं। पूरी दिल्ली में CCTV कैमरे लगाने हैं, पूरी दिल्ली में फ़्री Wi Fi देने की योजना बना ली है, सरकारी सेवाओं की डोरस्टेप डिलिवरी की योजना लागू होने जा रही है, हर महीने राशन घर घर तक पहुँचाने का इंतज़ाम कर रहे है, दिल्ली की सारी कच्ची कालोनियों में पानी, सीवर, गली और नाली बनाने का काम शुरू हो गया है। ये सब काम अगले 2 साल में करने हैं। 
ये लोग इसी बात से घबरा रहे हैं। जिस तेज़ी से केजरीवाल सरकार काम कर रही है, इन्हें उसी बात से डर लग रहा है। केजरीवाल जी अपने अच्छे कामों की वजह से दिल्ली ही नहीं, पूरे देश में लोकप्रिय होते जा रहे हैं। ये केजरीवाल सरकार को काम नहीं करने देना चाहते। 
भाजपा का अपना ग्राफ़ तेज़ी से गिर रहा है। भाजपा से आज सब ग़ुस्सा हैं- दलित, किसान, व्यापारी, मज़दूर, यूथ, विद्यार्थी, अल्पसंख्यक- सब इनसे नाराज़ हैं। ये लोग केजरीवाल को काम करने से हर हाल में रोकना चाहते हैं। 
20 विधायकों को बर्खास्त करके इन्होंने दिल्ली पर चुनाव थोप दिए। अब आचार संहिता लग जाएगी और दिल्ली में सारा सरकारी काम रुक जाएगा। उसके बाद लोक सभा के चुनाव आ जाएँगे। फिर आचार संहिता लग जाएगी और फिर सारा सरकारी काम रुक जाएगा। और उसके बाद विधान सभा के चुनाव आ जाएँगे। 
तो इन 20 विधान सभाओं पर चुनाव थोप कर एक तरह से भाजपा ने अगले दो सालों तक दिल्ली में सारा विकास का काम रोक दिया। और इन 20 विधानसभाओं में चुनाव पर फ़िज़ूल में आपका पैसा व्यर्थ होगा। 
क्या ये गंदी राजनीति नहीं है? क्या दिल्ली को इस तरह चुनावों में धकेलना ठीक है? क्या दिल्ली के सारे विकास कार्यों को दो साल तक ठप करना सही है? क्या इस तरह ग़ैर संवैधानिक और ग़ैर क़ानूनी तरीक़े से आपके चुने हुए विधायकों को बर्खास्त करना सही है?
मुझे आपसे ही उम्मीद है। आप ज़रूर इसका सही और असरदार जवाब देंगे। 
आपका अपना
मनीष सिसोदिया