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Arunachal man gains recognition for devising new script

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By: Talat Mohsin

As a school boy, Banwang Losu wanted to be a pilot. Little did he know that one day he would be internationally recognised for his work in linguistics.

Wancho is a Konyak language which is native to the Wancho tribe of Arunachal Pradesh. Earlier, they used a Roman script to write it. But the Roman script could not do justice to the various variations of pronunciations in the Wancho language. Everything changed in between 2001 and 2012, when Losu designed a unique alphabetical script for the language. Not only was he successful, in addition the script was also officially published into the Unicode Standard in version 12.

For the 37 year old Losu, it’s a dream come true. He had taken the initiative when he was struck by the fact that his tribe did not have a own script which had all the nuances needed by the language.

Image Source: Deccan Herald

“In today’s world when parents are going for English medium education for their children, the only way to promote and keep Wancho script alive is through the use of internet.” Says Losu (as published in the Deccan Herald.)

By profession, Banwang Losu is a government school teacher. He had also released a book on the Wancho script in the year 2013.

Arunachal Pradesh MLA, his son among 11 killed in Ambush

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Members of a Naga extremist group gunned down 11 people on 21 May. These include an MLA and candidate of the National People’s Party (NPP) in Tirap district of Arunachal Pradesh.

Police said the assailants, allegedly belonging to the Isak-Muivah faction of the National Socialist Council of Nagaland, ambushed the vehicles of NPP candidate Tirong Aboh’s family was travelling in near Bogapani at around 11.30 a.m. Among the dead was his son.

P.N. Thungon, the Deputy Commissioner of Tirap district, confirmed Mr. Aboh’s death as well as that of 10 others.

“I’m shocked and saddened by the brutal attack and tragic killing of MLA Shri Tirong Aboh of Arunachal Pradesh, his family including 11 people. Strongest possible action will be taken against those responsible for such dastardly attack,” Union Minister of State for Home Kiren Rijiju said in a tweet.

The NPP had fielded Mr. Aboh from the Khonsa West Assembly constituency that he had won in 2014 on a People’s Party of Arunachal ticket. Election to the constituency was held on April 11.

Meghalaya Chief Minister Conrad K. Sangma, also the president of NPP, condemned the “brutal attack” and urged Prime Minister Narendra Modi and Union Home Minister Rajnath Singh to take action against those responsible for the killing.

लोकसभा चुनाव से पहले भाजपा के पूर्व मुख्यमंत्री ने दिया पार्टी से इस्तीफा

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लोकसभा चुनाव से पहले भारतीय जनता पार्टी को एक और बड़ा झटका लगा है। अरुणाचल के पूर्व मुख्यमंत्री और भारतीय जनता पार्टी के वरिष्ठ नेता गेगोंग अपांग ने पार्टी से इस्तीफा दे दिया है। मंगलवार को अपांग नेे भारतीय जनता पार्टी पर पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी के सिद्धातों पर नहीं चलने का आरोप लगाया और पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह को इस्तीफा भेज दिय। अपांग ने इस्तीफे में कहा कि मैं यह देखकर निराश हूं कि भारतीय जनता पार्टी अब अटल बिहारी वाजपेयी के सिद्धातों पर नहीं चल रही। बीजेपी अब सत्ता हासिल करने का मंच बन गई है।

अपने इस्तीफे में अरुणाचल प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री ने कहा कि भाजपा अब एक नेता की मुट्ठी में है, जो विकेंद्रीकरण या लोकतांत्रिक निर्णय प्रक्रिया से नफरत करता है और उन मूल्यों को नहीं मानता, जिनके लिए पार्टी की स्थापना हुई थी। अरुणाचल प्रदेश की भाजपा करकार पर बोलते हुए अपांग ने कहा कि बीजेपी को अरुणाचल प्रदेश में साल 2014 में जनादेश नहीं मिला था, लेकिन बीजेपी नेतृत्व ने खरीद-फरोख्त और हर गंदा तिकड़म करके कालिखो पुल को अरुणाचल का मुख्यमंत्री बनवा दिया।

भाजपा नेत्रत्व पर आरोप लगाते हुए गेगोंग ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट के प्रतिकूल फैसले के बावजूद बीजेपी ने अरुणाचल प्रदेश में सरकार बनाई। बीजेपी नेतृत्व ने पूर्वोत्तर में कई अन्य बीजेपी सरकारों के गठन के दौरान नैतिकता का कोई ख्याल ही रखा। 10-11 नवंबर को पासीघाट में हुई राज्यस्तरीय कार्यकारिणी की बैठक के दौरान बीजेपी महासचिव राम माधव ने कई सदस्यों और पदाधिकारियों को अपने विचार तक नहीं रखने दिए।

गेगोंग ने आगे कहा कि चुनाव से पहले पेमा खांडू को अरुणाचल प्रदेश का मुख्यमंत्री बनाने का निर्णय न तो उस नियम के अनुरूप है और न उस परंपरा के, जिसका बीजेपी जैसी काडर वाली पार्टी अनुसरण करती है।

उत्तराखंड में नाकामयाब होने पर भाजपा ने की अरुणाचल प्रदेश में लोकतंत्र की हत्या.!

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“”अरुणाचल प्रदेश में कांग्रेस के विधायकों द्वारा बगावत करने के बाद कांग्रेस भाजपा और नरेंद्र मोदी पर हमलावर हो गई है । इसी क्रम मे कांग्रेस द्वारा कांग्रेस द्वारा जगह जगह विरोध प्रदर्शन किए जा रहे है “”

Newbuzzindia: लोहाघाट में मोदी जवाब दो भाजपा हिसाब दो के रैली के तहत जिला पंचायत अध्यक्ष खुशाल अधिकारी के नेतृत्व एक रैली निकली गई.

रैली में जहां कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष किशोर उपाध्याय राज्यसभा सांसद प्रदीप टम्टा यूथ कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष ने शिरकत की. वही हजारों की संख्या में लोगों को रैली में देखकर किशोर उपाध्याय गदगद नजर आए.

लोहाघाट में कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष ने केंद्र सरकार के मुखिया नरेंद्र मोदी की लोकसभा चुनाव के दौरान की गई घोषणाओं पर सवाल खड़े किए. भाजपा पर चुनी सरकार राज्य सरकार को गिराने के साथ कई गंभीर आरोप लगाए. वही किशोर उपाध्याय ने कहा उत्तराखंड में भाजपा और मोदी सरकार गिराने में कामयाब नहीं हुए लेकिन अरुणाचल प्रदेश में लोकतंत्र की हत्या कर भाजपा ने भाजपा मुक्त भारत की शुरुआत कर दी है. जब की राज्यसभा सांसद प्रदीप टम्टा का कहना है कि उतराखंड से जीत गए पांचों सांसद के साथ पूरी केंद्र सरकार भारत के 11 हिमलाय राज्य के खिलाफ काम कर रही है.

हालाकि कांग्रेस की मोदी जवाब दो भाजपा हिसाब दो के रैली इस रैली में 2017 की चुनाव की तैयारी में लगे जिला पंचायत अध्यक्ष खुशाल अधिकारी भीड़ जुटाने में कामयाब नजर आए.वहीं अन्य उम्मीदवारों और उनके समर्थकों के रैली और जनसभा स्थल से नदारद दिखने से कई सवाल भी खड़े किए.

कमज़ोर हुआ कांग्रेस का पंजा, 44 विधायकों के साथ CM पेमा खांडू ने दिया पार्टी से इस्तीफा

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NewBuzzIndia: लगातार चले राजनीतिक अस्थिरता के बाद मुश्किल से बानी सरकार के एक महीने बाद ही अरुणाचल प्रदेश में फिर से कांग्रेस की सरकार लड़खड़ा गई है। कांग्रेस के हाथ से फिर अरुणाचल प्रदेश निकलता हुआ नजर आ रहा है। सूत्रों के हवाले से खबर मिली है कि CM पेमा खांडू समेत 45 में से 44 विधायकों ने पार्टी से इस्तीफा दे दिया है। सभी बागी विधायकों ने क्षेत्रीय दल पीपुल्स पार्टी ऑफ अरुणाचल में शामिल हो गए हैं। खबर है कि पीपीए नॉर्थ ईस्ट डेमोक्रेटिक एलायंस का साथ दे सकता है। मई 2016 में भी पीपीए ने इस एलायंस का साथ दिया था जब राज्य में बीजेपी की सरकार बनी थी। 
इस पार्टी की स्थापना 1979 में एक क्षेत्रीय दल के रूप में हुई थी। भूतपूर्व मुख्यमंत्री कालिखो पुल जो नबाम तुकी सरकार में मंत्री थे, फरवरी 2016 में पीपीए में शामिल हो गए थे। उस वक्त कांग्रेस के 24 विधायक उनके साथ पीपीए में शामिल हुए थे। शायद यही वजह है कि खांडू ने बीजेपी की जगह पीपीए को चुना है।

60 सदस्यीय अरुणाचल प्रदेश की विधानसभा में कांग्रेस के 46 विधायक हैं, जबकि बीजेपी के 11 विधायक हैं। कांग्रेस में पहली बगावत नवंबर, 2015 में हुई थी। तभी से वहां राजनीतिक उथल-पुथल का दौर जारी है। उस समय कांग्रेस की सरकार गिर गई थी और कालिखो पुल की अगुवाई में नई सरकार बनी थी, जिसे बीजेपी के 11 विधायकों ने समर्थन दिया था। 

आरएसएस के मेंबर खाते है बीफ, संघ को नही कोई परेशानी !

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Newbuzzindia: राजनितिक पार्टियों के नेताओं को अपने फायदे के लिए रंग बदलते तो देखा ही होगा लेकिन अपनी पकड़ पूरे भारत में बनाने के लिए भगवा झंडा लेकर, गाय को माँ बताने वाला संघ यानि आरएसएस इस कदर गिर जाएगा ऐसा सोचना थोड़ा मुश्किल था।

हाल ही में अरुणाचल प्रदेश जहाँ संघ ने 3000 आरएसएस मेंबर बनाए हैं को एक सभा में सम्बोधित करते हुए आरएसएस के आल इंडिया प्रचार प्रमुख मनमोहन वैदय ने कहा है कि संघ को किसी के खाने पीने की आदतों से कोई लेना देना नहीं है। कोई चाहे तो बीफ खा सकता है या कुछ और हमें इससे कोई फर्क नहीं पड़ता।

वैदय ने कहा की जहाँ तक बीफ का सवाल है बीफ हमारे लिए कभी कोई मुद्दा था ही नहीं और न ही कभी होगा। हमारा मुद्दा सिर्फ और सिर्फ देशद्रोहियों को देश से दूर रखना और देश को बचाना है। हमारे बहुत से मेंबर बीफ खाते हैं लेकिन वो हमारे लिए मुद्दा नहीं है। बीफ कहना उनका निजी मामला है।

वैदय यहाँ अरुणाचल प्रदेश में तीन दिन के दौरे पर पहुंचे थे जिस दौरान उन्होंने संघ मेंबरों के साथ मीटिंगें की।

अरुणाचल में मज़बूत हुआ “पंजा”, बनी कांग्रेस की सरकार

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NewBuzzIndia: लगातार कई महीनों से जिस तरह की राजनीतिक अस्थिरता अरुणाचल प्रदेश में पसरी हुई थी, आखिरकार अब सब कुछ सुलझा। पेमा खांडु राज्‍य के नए मुख्‍यमंत्री चुने गए हैं। कांग्रेस ने 44 विधायकों के समर्थन का दावा किया था जिसे राज्‍यपाल ने मान लिया। इसके चलते विश्‍वासमत नहीं कराया। इससे पहले कांग्रेस ने नबाम टुकी को सीएम पद से हटाकर खांडु को विधायक दल का नेता चुन लिया था। इसके चलते असंतुष्‍ट विधायक भी कांग्रेस के सााथ आ गए थे। 

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पिछले दिनों सुप्रीम कोर्ट द्वारा राष्‍ट्रपति शासन लगाने को गलत ठहराए जाने के बाद अरुणाचल प्रदेश में विश्‍वासमत किया जाना था। टुकी ने इसके लिए राज्‍यपाल से 10 दिन का समय मांगा था लेकिन गवर्नर ने शनिवार को ही विश्‍वासमत साबित करने को कहा।

अरुणाचल प्रदेश: विश्वासमत से पहले कांग्रेस में बड़ी फेर बदल, पेमा खाडू होंगे विधायक दल के नेता

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​NewBuzzIndia: 

Pema Khadu, INC Leader

अरुणाचल प्रदेश में इतने लंबे समय से चली राजनीतिक अस्थिरता के बाद जिस तरह से सुप्रीम कोर्ट का फैसला आया है उसे देश के लोकतंत्र में मील का पत्थर माना जा रहा है। अब बात कांग्रेस के ताक़त के प्रदर्शन पर आ अटकी है। और इसी बीच कांग्रेस ने प्रदेश में अपने दल का चेहरा ही बदल दिया।अरुणाचल प्रदेश में विश्‍वासमत से पहले कांग्रेस ने मुख्‍यमंत्री पद के उम्‍मीदवार को बदल दिया है। नबाम टुकी की जगह पेमा खांडु को कांग्रेस विधायक दल का नेता बनाया गया है। टुकी ने सीएम पद से इस्‍तीफा दे दिया है।
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पिछले दिनों सुप्रीम कोर्ट द्वारा राष्‍ट्रपति शासन लगाने को गलत ठहराए जाने के बाद अरुणाचल प्रदेश में विश्‍वासमत किया जा रहा है। टुकी ने इसके लिए राज्‍यपाल से 10 दिन का समय मांगा था लेकिन उनके मांगो को रद्द करते हुए गवर्नर ने शनिवार को ही विश्‍वासमत साबित करने का आदेश दिया है।

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उत्तराखंड के बाद भाजपा की एक और हार, अरुणाचल में बनेगी कांग्रेस की सरकार !

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Newbuzzindia: अरुणाचल प्रदेश में सरकार को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने बड़ा फैसला सुनाया है। सर्वोच्च अदालत ने राज्य में कांग्रेस सरकार को बहाल करने का आदेश दिया है।

सुप्रीम कोर्ट ने 15 दिसंबर की स्थिति को बहाल करने का आदेश सुनाया है। इसके साथ कांग्रेस की नबाम टुकी सरकार फिर से राज्य में बहाल होगी।

सुप्रीम कोर्ट ने राज्यपाल के फैसले को असंवैधानिक कहा है। राज्यपाल ने 9 दिसंबर 2015 को जो फैसला लिया वो गलत था।

सुप्रीम कोर्ट का फैसला बीजेपी के मुंह पर तमाचा

राज्यपाल ने एक महीने पहले विधानसभा सत्र बुलाया था और विधानसभा अध्यक्ष को हटा दिया था। कोर्ट ने राज्यपाल के कदम को असंवैधानिक करार दिया है। सर्वोच्च अदालत ने 9 दिसंबर के नोटिफिकेशन को रद्द कर दिया है।
 
कांग्रेस के वकील विवेक तनखा ने सुप्रीम कोर्ट के फैसले को ऐतिहासिक बताया है। उन्होंने कहा कि कोर्ट का फैसला बीजेपी पर तमाचा बताया है।