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पेड़ पर झूलती मिली युवक-युवती की लाश, पुलिस मामले की जांच में जुटी

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बड़वानी। मध्यप्रदेश के बड़वानी जिले के राजपुर थाना क्षेत्र से हैरान करने वाला मामला आया है, जहां मोरगुण रोड़ के पास बने एक खेत में एक पेड़ पर अज्ञात युवक और युवती की लाश फांसी के फंदे पर झूलती मिली। इस घटना से इलाके में सनसनी फैल गई। ग्रामीणों की सूचना पर पुलिस ने घटनास्थल पर पहुंचकर शवों को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है। इसके साथ ही पुलिस ने मर्ग कायम कर मामले की जांच शुरू कर दी है।

राजपुर थाना प्रभारी यशवंत बड़ोले के अनुसार शवों की पहचान नहीं हो पाई है। बाकी कि कार्रवाई पीएम रिपोर्ट आने के बाद की जाएगी। पुलिस मृतकों की पहचान को लेकर आसपास के गांवों में पूछताछ कर रही है।

डिंडोरी में हुए प्रेग्नेंसी टेस्ट पर कमलनाथ ने जताई आपत्ति, महिला आयोग को लिखा पत्र

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डिंडोरी। मध्यप्रदेश के डिंडोरी जिले में हुए मुख्यमंत्री कन्या विवाह योजना के कार्यक्रम के दौरान हुए प्रेग्नेंसी टेस्ट के मामलें को लेकर पीसीसी अध्यक्ष कमलनाथ ने राष्ट्रीय महिला आयोग को एक पत्र लिखा है। कमलनाथ ने पत्र में युवतियों के प्रति चिंता जताते हुए इस प्रकार के आपत्तिजनक टेस्ट पर गंभीर सवाल उठाए हैं। पत्र में कमलनाथ ने लिखा है कि मध्यप्रदेश सरकार का यह कृत्य महिलाओं की निजता और उनके मौलिक अधिकारों का हनन है।

कमलनाथ ने अपने पत्र में लिखा है कि डिंडोरी जिले में 22 अप्रैल, 2023 को राज्य सरकार की ओर से मुख्यमंत्री कन्या विवाह कार्यक्रम का आयोजन किया गया जिसमें सूचनाओं के माध्यम से पता चला है कि कार्यक्रम के लिए मेडिकल टेस्ट के नाम पर सैकड़ों युवतियों का प्रेग्नेंसी टेस्ट कराया गया है।

उन्होंने सरकार पर तंज कसते हुए लिखा कि जिस प्रदेश में सरकार ही महिलाओं को बेआबरू करने पर उतारू हो, वहां अपराधियों के हौसले बुलंद होना कोई अप्रत्याशित घटना नहीं है। यही कारण है कि मध्यप्रदेश लम्बे समय से महिलाओं के खिलाफ अपराध में अव्वल है। शिवराज सरकार महिला अत्याचारों के खिलाफ मौन है।

कमलनाथ ने इस पर आपत्ति दर्ज कराते हुए पत्र में लिखा है कि युवतियों को सार्वजनिक तौर पर इस तरह अपमानित करना बेहद शर्मनाक है। ये नारी अस्मिता और भारतीय संस्कृति के खिलाफ है। जिन गरीब बेटियों ने अपने विवाह संस्कार का सपना देखा था, उन्हें अपनी जिंदगी के सबसे खुशनसीब दिन ऐसा सरकारी दुर्व्यवहार देखना सरकार के लिए डूब मरने जैसा है।

वीरांगना दुर्गावती, रानी अवंती बाई लोधी और महारानी अहिल्याबाई जैसी देवियों ने जिस भूमि को अपने तप से सींचा, वहीं मातृ शक्ति के साथ ऐसी अपमानजनक बर्बरता समूची नारी जाति के आत्म सम्मान के खिलाफ है।

बता दें पीसीसी अध्यक्ष ने इस मामले में राष्ट्रीय महिला आयोग से अनुरोध करते हुए लिखा है कि डिंडोरी में महिलाओं के खिलाफ हुए इस अपमानजनक और गैरकानूनी कृत्य की विस्तृत और उच्च स्तरीय जांच कराई जाए और दोषी व्यक्तियों के खिलाफ उचित कानूनी कार्रवाई की जाए।

मध्यप्रदेश के ‘सांची’ को मिलेगी देश की पहली सोलर सिटी की पहचान…

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मध्यप्रदेश के रायसेन जिले में स्थित विश्व धरोहर ‘सांची’ देश की पहली सोलर सिटी बनने जा रहा है। आने वाले महीने में देश की पहली सोलर सिटी के रूप में सांची का नाम जाना जाएगा। मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि मध्यप्रदेश में सौर ऊर्जा के उपयोग को हमेशा से बढ़ावा दिया जाता रहा है। प्रदेश में अनेक सौर ऊर्जा परियोजनाएं भी संचालित हैं। प्रदेश के रीवा डिवीज़न के सीधी में एशिया का सबसे बड़ा सोलर प्लांट स्थित है।

इसी क्रम में रायसेन जिले में स्थित विश्व धरोहर स्मारक स्थल सांची नगर देश की प्रथम सोलर सिटी बनने जा रहा है। परियोजना के तहत सांची में सभी कार्य लगभग पूरे हो गए हैं। सांची का सोलर सिटी बनना यह मध्यप्रदेश की विशेष उपलब्धि होगी। मुख्यमंत्री ने आगे कहा कि ऊर्जा क्षेत्र में मध्यप्रदेश ने काफी अच्छी प्रगति की है।

मध्यप्रदेश बिजली उत्पादन और आपूर्ति में आत्मनिर्भर बना है, वहीं नवकरणीय ऊर्जा क्षेत्र में मध्यप्रदेश की उपलब्धियों ने देश में बड़ा नाम किया है। सोलर सिटी सांची मध्यप्रदेश को नई पहचान दिलाएगी।

कुएं में मिलीं 3 बहनों की लाश, मां की तलाश में जुटी पुलिस

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धार। मध्यप्रदेश के धार जिले में दो से छह वर्ष की आयु की तीन बहनों की लाशें एक कुएं में मिली हैं। लाशों के मिलने के बाद से पूरे जिले में हड़कंप मच गया है। इस तरह लाशों के मिलने पर लोगों द्वारा तरह-तरह के कयास भी लगाए जा रहे हैं। बता दें, तीनों लड़कियों की लाशें श्यामपुरा गांव के एक कुएं में मिली हैं।

पुलिस अधिकारी राम सिंह मेड़ा के अनुसार जब शिकायतकर्ता जीवन बामनिया मंगलवार को दोपहर में अपने घर पहुंचा तो वहां उसकी पत्नी और तीनों बेटियां मौजूद नहीं थीं। जब तीनों की तलाश शुरू की गई तो तीनों बेटियों की लाशें कुएं से मिलीं।

पुलिस का कहना है कि स्थानीय लोगों ने बताया कि शिकायतकर्ता की पत्नी और उसकी तीनों बेटियां गांव के बाहर आम तोड़ते हुए नजर आईं थीं। जब पूरे इलाके की छानबीन की गई तभी 4 साल की एक लड़की की लाश कुएं में मिली, फिर 2 साल और 6 साल की बेटियों के शव भी उसी कुंए में मिले। अधिकारी ने बताया कि जीवन की पत्नी का अभी तक कुछ पता नहीं चला है और उसकी तलाश की जा रही है।

शिवराज कैबिनेट के मंत्रियों को किया गया तलब, सक्रियता बढ़ाने को लेकर बंद कमरे में हुई चर्चा…

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भोपाल। मध्यप्रदेश विधानसभा चुनाव 2023 में होना हैं, हालांकि अभी तक चुनाव की तारीखों को लेकर किसी तरह की जानकारी सामने नहीं आयी है। लेकिन बीजेपी ने अपने स्तर पर चुनावी तैयारियां ज़रूर शुरू कर दी हैं। आज बीजेपी ने सीएम शिवराज कैबिनेट के निष्क्रिय नेताओं और मंत्रियों को प्रदेश कार्यालय में तलब किया। संगठन महामंत्री हितानंद शर्मा और प्रदेश प्रभारी पी. मुरलीधर राव ने बंद कमरे में इन नेताओं के साथ काफी देर तक चर्चा की।

इस मीटिंग में पदाधिकारियों ने नेताओं और मंत्रियों की फीडबैक रिपोर्ट भी पेश की।
इस मीटिंग में प्रदेश के डिएक्टिव नेताओं और मंत्रियों को उनके जमीनी फीडबैक से अवगत कराया गया। घंटों चली इस मीटिंग में चुनावी साल होने पर मंत्रियों को उनके क्षेत्रों में सक्रियता बढ़ाने के लिए कहा गया।
BJP ने चुनाव पर फोकस करते हुए घर-घर कैंपेन जैसे कई प्लान तैयार किए हैं। जैसे मंत्रियों द्वारा प्रदेश की जनता के पास जाना, उनसे जुड़ना और उनकी समस्याएं सुनकर उनका निपटारा करना भी शामिल है।

मुख्यमंत्री शिवराज ने प्रदेश के सभी मंत्रियों को निर्देश दिए हैं कि वे नगरीय और ग्रामीण क्षेत्रों में शिविर लगाकर जन मानस की समस्याएं सुनें और उन्हें सुलझाएं। प्रदेश की जनता की समस्याओं का निपटारा खुद मंत्री करेंगे। सभी मंत्री और नेता 10 मई से अपने-अपने क्षेत्रों में जाकर जनता से मिलेंगे और जनसमस्याएं सुनेंगे।

एनएसयूआई ने स्वास्थ्य मंत्री के बंगले के बाहर लगाए पोस्टर, रवि परमार समेत 10 कार्यकर्ताओं पर दर्ज हुआ मुकदमा

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भोपाल। मध्यप्रदेश की राजधानी में एनएसयूआई ने स्वास्थ्य मंत्री के बंगले के बाहर “डॉ. बिकाऊ लाल चौधरी की तबादले की दुकान” के पोस्टर चस्पा कर दिए। दरअसल, स्वास्थ्य मंत्री पर एनएसयूआई मेडिकल विंग ने ये पोस्टर लगाकर तबादले की दुकान चलाने का आरोप लगाया है। एनएसयूआई नेता रवि परमार के नेतृत्व में कार्यकर्ताओं ने स्वास्थ्य मंत्री के बंगले पर पहुंचकर बंगले के बाहर जगह-जगह पोस्टर चस्पा किए।

वहीं स्वास्थ्य मंत्री डॉक्टर प्रभुराम चौधरी के बंगले पर ‘डॉक्टर बिकाऊ लाल की तबादले की दुकान’ के पोस्टर लगाना NSUI कार्यकर्ताओं को महंगा पड़ गया। टीटी नगर पुलिस ने इस मामले को लेकर नेता रवि परमार समेत करीब 10 लोगों पर मुकदमा दर्ज किया है।

जानकारी के मुताबिक भोपाल की टीटी नगर पुलिस ने मंत्री प्रभुराम चौधरी के बंगले के बाहर खड़े गार्ड की शिकायत पर टीटी रवि परमार समेत करीब 10 लोगों पर केस दर्ज किया है। पुलिस ने छात्र नेताओं के खिलाफ धारा 353 (शासकीय कार्य में बाधा), 491, 294 , 149 संपत्ति निवारण अधिनियम जैसी गंभीर धाराओं के तहत मामला दर्ज किया है।

मुकदमा दर्ज होने के बाद नेता रवि परमार ने बताया कि हम पुलिस से डरने वाले नहीं है। शिवराज सरकार जब भी डरती है तो पुलिस को आगे करती है। रवि ने कहा कि सरकार के खिलाफ निरंतर प्रदर्शन जारी रहेगा। जिस प्रकार से बिकाऊ लाल सिर्फ तबादलों पर ध्यान दे रहें है, उसके खिलाफ NSUI लगातार आवाज़ उठाएगी।

दरअसल मध्यप्रदेश में आगामी विधानसभा चुनाव से पहले भाजपा सरकार हर जगह विरोध का सामना कर रही है। मध्यप्रदेश के स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री डॉ. प्रभुराम चौधरी के विरुद्ध मंगलवार को एनएसयूआई मेडिकल विंग का अनोखा प्रदर्शन देखने को मिला। प्रदर्शन के दौरान एनएसयूआई मेडिकल विंग के संयोजक रवि परमार के नेतृत्व में एनएसयूआई कार्यकर्ताओं ने डॉ प्रभुराम चौधरी के बंगले की नेमप्लेट सहित बंगले के बाहर पोस्टर चस्पा कर दिया।

एनएसयूआई द्वारा चस्पा किए गए पोस्टर में “डॉ बिकाऊ लाल चौधरी की तबादले की दुकान” और “यह स्वास्थ्य मंत्री का बंगला नहीं बिकाऊ लाल चौधरी का तबादलो का कारखाना है” लिखा था। इस प्रदर्शन के जरिए एनएसयूआई ने मेडिकल विभाग में हो रहे तबादलों का विरोध जताया है। इस दौरान रवि परमार ने स्वास्थ्य मंत्री प्रभुराम चौधरी पर आरोप लगाते हुए कहा कि, “स्वास्थ्य विभाग में नियमों को अनदेखी करते हुए लाखों रुपयों लेकर धड़ल्ले से तबादले किए जा रहे हैं।

परमार ने चौधरी पर निशाना साधते हुए कहा, “हम भाजपा को चेतावनी देना चाहते हैं कि उनकी सत्ता ज्यादा दिन तक नहीं रहेगी। छः महीने बाद राज्य में कांग्रेस की सरकार बनेगी और सबका कच्चा-चिट्ठा बाहर आएगा। परमार ने चेतावनी देते हुए कहा कि चौधरी यदि तबादलों का कारखाना बंद नहीं करेंगे तो प्रदेशभर में चरणबद्ध तरीके से आंदोलन शुरू किया जाएगा।

लाड़ली लक्ष्मी फ्रेंडली घोषित होंगी पंचायतें, कलेक्टरों से मांगे गए प्रस्ताव…

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भोपाल। मध्यप्रदेश सरकार ने ग्राम पंचायतों को लाड़ली लक्ष्मी फ्रेंडली घोषित करने का फैसला लिया है। इसके लिए प्रशासन ने कलेक्टरों से पंचायतों के प्रस्ताव भी मांगे गए हैं। ऐसी पंचायतें जिनमें पिछले एक वर्ष में एक भी बाल विवाह नहीं हुआ हो। सौ प्रतिशत लाड़ली लक्ष्मियां स्कूल जाती हों। इसके अलावा पंचायत में कुपोषण की समस्या न हो और पंचायत क्षेत्र में बालिकाओं के विरुद्ध कोई भी अपराध घटित न हुआ हो। ऐसी सभी पंचायतों को पुरस्कृत किया जाएगा।

इसके अलावा लाड़ली लक्ष्मी फ्रेंडली पंचायतों को बेटियों की सुरक्षा, उनके सर्वांगीर्ण विकास के लिए अलग से बजट देने का प्रावधान भी किया जा रहा है। लाड़ली लक्ष्मी फ्रेंडली पंचायत घोषित करने के लिए सरकार द्वारा पंचायतों से ही प्रस्ताव लिए जाएंगे, जिन्हें जिला स्तर पर कलेक्टर की अध्यक्षता में गठित टास्क फोर्स के समक्ष रखा जाएगा।

समिति अच्छे-बुरे हर पहलू के आधार पर पंचायतों को लाड़ली लक्ष्मी फ्रेंडली घोषित करेगी। दरअसल, टास्क फोर्स बेटी बचाओ- बेटी पढ़ाओ योजना के अंतर्गत गठित की गई है। लाड़ली लक्ष्मी फ्रेंडली पंचायत घोषित करने से पहले जिले में पंचायतवार वर्तमान लिंगानुपात की समीक्षा की जाएगी, जो प्रत्येक तीन माह में होगी। इसके अनुसार लिंगानुपात में पिछले साल की इस साल सुधार करने वाली पंचायतों को पुरस्कार दिया जाएगा। पंचायतों में बेटी के जन्म पर उत्सव मनाने के साथ ही बाल विवाह को लेकर भी जागरूक किया जाएगा।

क्षिप्रा नदी को प्रदूषण मुक्त बनाने के लिए साधु-संत करेंगे आंदोलन, जल्द तैयार होगी रूप रेखा

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उज्जैन। धार्मिक नगरी उज्जैन में 12 वर्षों में एक बार लगने वाला सिंहस्थ महापर्व 2028 में आयोजित होगा, लेकिन इसके पहले क्षिप्रा नदी की दयनीय स्थिति को देखकर साधु-संतों ने आंदोलन का बिगुल बजा दिया है। इस आंदोलन को लेकर एक बैठक आयोजित होने वाली है, जिसमें साधु संतों के साथ शहर के सामाजिक संगठन, समाजसेवी, पुजारी मिलकर एक योजना तैयार करेंगे। इसमें मां क्षिप्रा को प्रदूषण मुक्त करने और प्रवाहमान बनाने को लेकर चर्चा होगी। साधु-संतों का कहना है कि मां क्षिप्रा का वही स्वरूप सभी को नजर आये जिसके बारे में वह अब तक पढ़ते और सुनते आए हैं।

यह पहल चार धाम मंदिर के पीठाधीश्वर शांतिस्वरूपानंद गिरि महाराज ने की है। उनका कहना है कि मां क्षिप्रा कोई प्रवचन करने का विषय नहीं हैं। मां क्षिप्रा में अमृत की बूंदे गिरी थीं इसलिए सभी को सिंहस्थ महाकुंभ में मां क्षिप्रा में ही स्नान का सौभाग्य मिले ऐसी हमारी कामना है।

शांतिस्वरूपानंद गिरि जी ने आगे कहा कि सरकार ने करोड़ों रुपये खर्च कर दिए लेकिन अब तक मां क्षिप्रा प्रदूषित ही हैं। केंद्र सरकार ने नमामि गंगे प्रोजेक्ट के तहत 600 करोड़ रुपये खर्च कर इस पानी को शुद्ध करने का प्लांट लगाया जाने वाला है, लेकिन इस प्रोजेक्ट के तहत कितनी ईमानदारी से काम होगा यह तो सभी जानते हैं। पहले भी कई ऐसी योजनाएं आईं और क्षिप्रा नदी के लिए कई कार्य किए गए। लेकिन आज भी मां क्षिप्रा प्रदूषित ही हैं।

उन्होंने कहा कि मां क्षिप्रा के उत्थान के लिए किसी को तो आगे आना होगा, लेकिन हिंदू समाज और क्षिप्रा के पुजारी सोए हुए हैं, क्योंकि वह सिर्फ मां क्षिप्रा की आरती कर अपने कर्तव्यों की इतिश्री कर रहे हैं। लेकिन ऐसे नहीं चलेगा। सरकार क्षिप्रा को प्रवाहमान करने के लिए अपने मुताबिक कार्य करवाती है, लेकिन यह कार्य ठीक से नहीं हो पाता। इसलिए इस बार एक समिति बनाई जाए जो कि इन कार्यों को सही तरीके से पूर्ण करवाएं। 

वहीं, महामंडलेश्वर शैलेशानंद ने कहा कि यह हम सभी का दायित्व है कि मां क्षिप्रा उज्जैन की जीवनदायिनी हैं और यह नगरी सबसे प्राचीनतम नगरी है। क्षिप्रा के लिए एक आंदोलन जल्द ही होगा, जिसके लिए प्रत्येक धर्म व संस्था के लोग शामिल होंगे।

वहीं, महामंडलेश्वर ज्ञानदास महाराज ने कहा कि गंभीर डैम के पानी को फिल्टर कर शहरवासियों को पीने के लिए उपलब्ध कराया जाता है। उसी तरह मां क्षिप्रा के जल को नदी में भी प्रवाहमान करना चाहिए। अभी मां क्षिप्रा की स्थिति काफी दयनीय है, जिसमें वर्तमान में कई नाले मिल रहे हैं।

पति के अवैध संबंध के कारण महिला ने फांसी लगाकर दी जान, सुसाइड नोट में लिखा- पति ना दे चिता को अग्नि

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भोपाल। मध्यप्रदेश की राजधानी भोपाल में एक महिला ने फांसी लगाकर अपनी जान दे दी। महिला ने मरने से पहले सुसाइड नोट लिखा है जिसमें उसके पति के किसी अन्य महिला के साथ संबंधों की बात लिखी है। महिला ने लिखा है, ” मेरे पति के किसी अन्य महिला के साथ संबंध हैं। वह उसके साथ अधिकांश समय गुजारते हैं। मैं अपने पति के किसी दूसरी महिला के साथ संबंध को बर्दाश्‍त नहीं कर सकती और न ही मैं उन्हें छोड़ सकती हूं। इसलिए मैं अपनी जिंदगी समाप्त कर रही हूं। मेरा शव मेरे पति को न सौंपा जाए और न ही वह मेरी चिता को अग्‍नि दें। मेरे बेटे के पालन-पोषण की जिम्‍मेदारी भी मेरे माता-पिता को दी जाए।” यह लिखकर महिला ने अपने मायके में फांसी लगा ली है।

यह घटना सोमवार रात की है। घटना की खबर मिलते ही पुलिस ने मर्ग कायम कर जांच शुरू कर दी है। बता दें, महिला का एक छह साल का बेटा भी है। पुलिस मंगलवार को महिला के मायके वालों के साथ-साथ पति और ससुराल वालों के बयान दर्ज करेगी। हबीबगंज थाना पुलिस के मुताबिक रानू कुडोका पुत्री बालसिंह वीरपाचे (30) ने ग्यारह सौ क्वार्टर में सोमवार रात अपने मायके में फांसी लगा ली थी।

उसके पास से मिले सुसाइड नोट में कारणों का खुलासा हुआ है। करीब सात साल पहले माता मंदिर इलाके में रहने वाले एक पीएचई कर्मचारी से रानू की शादी हुई थी। रानू कुडोपा 15 दिन पहले अपने पति से झगड़े के बाद मायके आकर रहने लगी थी। विवेचना अधिकारी उप निरीक्षक सुडील देशमुख ने बताया कि महिला की 30 वर्ष से कम उम्र होने के कारण मामला नवविवाहिता का है। पुलिस ने भी पोस्टमार्टम कराकर महिला का शव उसके पिता के सुपुर्द कर दिया। मायके और ससुराल वालों के मंगलवार को बयान दर्ज होने के बाद आगे की कार्रवाई की जाएगी।

कूनो नेशनल पार्क में चीते उदय की मौत के पहले का वीडियो हुआ वायरल…..

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श्योपुर। मध्यप्रदेश के कूनो नेशनल पार्क में रविवार को चीते उदय की मौत के बाद उसका एक वीडियो तेजी से वायरल हो रहा है। इस वीडियो में उदय बाड़े में चलते समय लड़खड़ाते हुए नजर आ रहा है। बता दें कि उदय को दक्षिण अफ्रीका से मध्यप्रदेश के कूनो नेशनल पार्क लाया गया था। प्रबंधन के अनुसार उदय कुछ समय से बीमार चल रहा था और रविवार को इलाज के दौरान उसने दम तोड़ दिया।

प्रबंधन से मिली जानकारी के अनुसार, उदय सुबह से ही सिर झुकाए और सुस्त हालत में बैठा मिला था। उसके करीब जाने पर वह उठकर लड़खड़ाकर चलने लगा। वीडियो में भी चीता चलते समय लड़खड़ाते हुए दिख रहा है, हालांकि इस वारयल वीडियो की पुष्टि Newbuzzindia नहीं करता।

नामीबिया से पहली बार में 8 चीते कूनो नेशनल पार्क लाए गए थे। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने 17 सितंबर को अपने जन्मदिन के मौके पर इन चीतों को बाड़े में छोड़ा था। इन चीतों में से एक मादा चीता साशा की पहले ही मौत हो गई थी। फिर इसके बाद 18 फरवरी को दक्षिण अफ्रीका से 12 चीते लाए गए थे जिनको सीएम शिवराज ने बाड़े में छोड़ा था। कूनो में 70 साल बाद 20 चीते छोड़े गए जिनमें 2 की मौत हो चुकी है। अब पार्क में 18 चीते ही बचे हैं।