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हरियाणा: बदले समीकरण, जेजेपी के समर्थन से कांग्रेस बना सकती है सरकार

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कांग्रस प्रदेश अध्यक्ष कुमारी शैलजा के साथ भूपेंदर हुड्डा और प्रभारी घुलान नबी आजाद
कांग्रस प्रदेश अध्यक्ष कुमारी शैलजा के साथ भूपेंदर हुड्डा और प्रभारी घुलान नबी आजाद

हरियाणा विधानसभा चुनाव में मतदान के पहले जहां सभी लोग भाजपा की जबरदस्त वापसी की उम्मीद कर रहे थे तो वहीं मतदान के बाद सभी समीकण बदले नजर आ रहे है। इंडिया टुडे और माय एक्सिस द्वारा जारी किये गए एक्सिट पोल में किसी भी पार्टी को बहुमत मिलता नजर नही आ रहा है। एक्जित पोल में कांग्रेस और भाजपा के बीच कांटे की टक्कर देखने को मिल रही है और जेजेपी किंगमेकर की भूमिका में नजर आ रही है। इंडिया टुडे-एक्सिस माई इंडिया एग्जिट पोल का ये अनुमान मंगलवार शाम को सामने आया।

हरियाणा की 90 विधानसभा सीटों में से बीजेपी को 32-44 के बीच सीट मिलने का अनुमान है जबकि कांग्रेस को फायदा होता दिख रहा है। एग्जिट पोल के मुताबिक राज्य में कांग्रेस को 30-42 सीटें और जेजेपी को 6-10 सीटें मिल सकती है। अगर एग्जिट पोल के आंकड़े हकीकत में तब्दील होते हैं तो हरियाणा में त्रिशंकु विधानसभा होगी और उम्मीद के मुकाबले जेजेपी के साथ मिलकर कांग्रेस सरकार बना सकती है।

वहीं इंडिया टुडे-एक्सिस माई इंडिया एग्जिट पोल के नतीजों पर दुष्यंत चौटाला ने कहा, ‘मैं पहले दिन से ही कह रहा हूं कि हरियाणा में JJP सरकार गठन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी। अगर त्रिशंकु विधानसभा होती है तो पार्टी नेतृत्व तय करेगा कि नतीजों के घोषित होने के बाद किसे समर्थन देना है।’

एग्जिट पोल के मुताबिक किसी भी पार्टी को बहुमत नहीं मिलने की स्थिति में 6-10 सीटें हासिल करती दिख रही जेजेपी किंगमेकर की भूमिका में आ सकती है। हिसार, रोहतक और करनाल में मजबूत पकड़ रखने के कारण चौटाला और जाट वोट जेजेपी की तरफ जाता दिख रहा है।

वोट शेयर के लिहाज से देखा जाए तो हरियाणा में बीजेपी को 33 फीसदी, कांग्रेस को 32 फीसदी और जेजेपी को 14 फीसदी वोट मिलते दिख रहे हैं। वहीं अन्य के खाते में 21 फीसदी वोट जाते दिख रहे हैं।

बता दें कि आजतक-एक्सिस माई इंडिया के एग्जिट पोल में 23,118 लोगों से बातचीत कर आंकड़े जुटाए गए हैं।

दीपेंदर हुड्डा ने फिर जताया सरकार बनाने का भरोसा

मतदान के 3 दिन पहले पूर्व सांसद और भूपेंदर हुड्डा के बेटे दीपेंदर हुड्डा ने ट्वीट करते हुए कहा था कि, “मेरे इस ट्वीट को सेव करना, हरियाणा खट्टर सरकार का घमण्ड तोड़ने जा रहा है।” वहीं मतदान के अगले दिन एक बार फिर दीपेंदर में अपनी बात दोहराते हुए कहा कि मेरे एक हफ़्ता पहले वाले इस ट्वीट को दुबारा सेव करना।

कर्नाटक में कांग्रेस का शानदार प्रदर्शन, नगरीय निकाय चुनाव में बन रही सबसे बड़ी पार्टी

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लोकसभा चुनाव मव भले ही कांग्रेस का प्रदर्शन खराब रहा हो और कर्नाटक में सिर्फ एक सीट से उसके खाते में आई हो लेकिन नगरीय निकाय चुनाव में कांग्रेस ने शानदार प्रदर्शन किया है। नगरीय निकाय चुनाव के वोटों की गिनती जारी है और ताजा नतीजों के अनुसार कांग्रेस सबसे आगे दिख रही है। वहीं भाजपा दूसरे और जेडीएस तीसरे नंबर पर दिखाई दे रही है।

शाम तक चुनाव के पूर्ण परिणाम आ जाएंगे। मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, लोकल निकाय चुनाव की वोटिंग में कांग्रेस और जेडीएस महागठबंधन आगे चल रहा है। वहीं भाजपा पीछे नजर आ रही है। कांग्रेस-476, जेडीएस-162, बीजेपी-341 और वहीं अन्य दल- 189 सीटों पर लीड कर रहे हैं।

इस बार अलग-अलग लड़े कांग्रेस और जेडीएस

बता दें कि इस बार के निकाय चुनाव में दोनों पार्टियों ने अलग अलग चुनाव लड़ा है। लेकिन राज्य में दोनों की साझा सरकार है। शाम तक नतीजे घोषित किए जाएंगे।

लोकसभा चुनाव में भाजपा ने 303 सीटों पर प्रचंड बहुमत से जीत दर्ज की थी वहीं बीजेपी ने कर्नाटक की 28 लोकसभा सीटों में 25 सीटों पर जीती दर्ज की और बाकी तीन सीटों में एक-एक सीट कांग्रेस, जेडीएस और निर्दलीय उम्मीदवारों ने जीती।

ओवररेटेड चुनाव आयोग का औसत काम, सांप्रदायिक बहसों पर क्यों नहीं लगाता लगाम: रविश कुमार

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छत्तीसगढ़ के दूसरे चरण के मतदान में 562 मशीनों के ख़राब होने की ख़बर छपी है। जिन्हें 15-20 मिनट में बदल देने का दावा किया गया है। चुनाव से पहले मशीनों की बक़ायदा चेकिंग होती है फिर भी इस तादाद में होने वाली गड़बड़ियाँ आयोग के पेशेवर होने को संदिग्ध करती है। क्या लोगों की कमी हैं या फिर कोई अन्य बात है। जबकि छत्तीसगढ़ में गुजरात में इस्तमाल की गई अत्याधुनिक थर्ड जनरेशन का M-3 श्रेणी की मशीनें लाई गईं। एक वीडियो चल रहा है जिसमें छत्तीसगढ़ के मंत्री बूथ के भीतर जाकर अगरबत्ती दिखा रहे हैं और नारियल फोड़ रहे हैं। मतदाता सूची से लेकर ईवीएम मशीनों के मामले में चुनाव आयोग का काम बेहद औसत है।

मतदान प्रतिशत के जश्न की आड़ में चुनाव आयोग के औसत कार्यों की लोक-समीक्षा नहीं हो पाती है। तरह तरह की तरकीबें निकाल कर प्रधानमंत्री आचार संहिता के साथ धूप-छांव का खेल खेल रहे हैं और आयोग अपना मुँह बायें फेर ले रहा है। आयोग के भीतर बैठे डरपोक अधिकारियों को यह समझना चाहिए कि वे प्रधानमंत्री की रैली की सुविधा देख कर प्रेस कांफ्रेंस कराने के लिए नहीं बैठे हैं।

टीवी की बहसों के ज़रिए सांप्रदायिक बातों को प्लेटफ़ार्म दिये जाने पर भी आयोग सुविधाजनक चुप्पी साध लेता है। क्या आयोग का काम रैलियों पर निगरानी रखना रह गया है? खुलेआम राजनीतिक प्रवक्ता सांप्रदायिक टोन में बात कर रहे हैं। एलान कर रहे हैं। टीवी की बहसें सांप्रदायिक हो गई हैं।यह सब चुनावी राज्यों में बकायदा सेट लगाकर हो रहा है। आयोग यह सब होने दे रहा है। यह बेहद शर्मनाक है। आयोग को अपनी ज़िम्मेदारियों का विस्तार करना चाहिए वरना आयुक्तों को बैठक कर इस संस्था को ही बंद कर दे।

यह एक नई चुनौती है। आख़िर आयोग ने खुद को इस चुनौती के लिए क्यों नहीं तैयार किया? क्या इसलिए कि हुज़ूर के आगे बोलती बंद हो जाती है। क्या आयोग ने न्यूज़ चैनलों के नियामक संस्थाओं से बात की, उन्हें नोटिस दिया कि चुनावी राज्यों में या उसके बाहर भी चुनाव के दौरान, टीवी की बहसों में सांप्रदायिक बातें नहीं होंगी। क्या मौजूदा आयोग को अपनी संस्था की विरासत की भी चिन्ता नहीं है? कैसे खुल कर चैनलों पर राजनीतिक दलों के प्रवक्ताओं को खुलकर हिन्दू मुस्लिम बातें करने की छूट दी जा रही है।

यह संस्था ओवररेटेड हो गई है। इसकी जवाबदेही को नए सिरे से व्याख्यायित करने की ज़रूरत है। यही कारण है कि अब लोग चुनाव आयोग के आयुक्त का नाम भी याद नहीं रखते हैं। आयुक्तों को सोचना चाहिए कि वहां बैठकर विरासत को बड़ा कर रहे हैं या छोटा कर रहे हैं। चुनाव का तमाशा बना रखा है। चुनाव का तमाशा तो बनता ही रहा है, आयोग अपना तमाशा क्यों बना रहा है।

नोट: इस लेख में व्यक्त विचार लेखक के निजी विचार है, newbuzzindia.com का इन विचारों से सहमत होना अनिवार्य नही है।

सट्टा बाजार: मध्यप्रदेश और राजस्थान में जीत रही कांग्रेस, छत्तीसगढ़ में कड़ा मुकाबला

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मध्यप्रदेश विधानसभा चुनाव का माहौल अब और रोचक हो चुका है। न्यूज़ चैनल और अखबारों के सर्वे के बाद अब सट्टा बाजार में भी सत्ता बदलती नजर आ रही है। मीडिया में चल रही खबरों के अनुसार मध्यप्रदेश विधानसभा चुनाव के सट्टा बाजार में जहां पहले बीजेपी हावी थी तो वहीं अब कांग्रेस हावी दिख रही है।

मध्यप्रदेश में 2 हफ्ते के पहले जो सटोरी बीजेपी पे पैसा लगा रहे थे वही सटोरी अब कांग्रेस पर दांव लगा रहे है।

हिंदी अखबार टाइम्स ऑफ इंडिया के मुताबिक पिछले एक महीने से सट्टा बाजार में बीजेपी के ऊपर पैसा लगाया जा रहा था लेकिन अब यह पैसा कांग्रेस पर लग रहा है। एक महीने पहले अगर आप बीजेपी पर पैसा लगते तो आपको 10 हजार के 11 हजार रुपये मिलते। वहीं कांग्रेस पर 4400 रुपये लगाने पर आपको 10 हजार रुपये मिलते। मतलब सट्टा बाजार में बीजेपी के जीतने की उम्मीदें ज्यादा थी।

कांग्रेस को मिल रही 116 से ज्यादा सीटें

सट्टा बाजार की माने तो प्रदेश में कांग्रेस पूर्ण बहुमत के साथ सरकार बना रही है। कांग्रेस को 230 विधानसभा सीटों में से 116 से ज्यादा सीटें मिल रही है। वहीं बीजेपी को 102 के आस पास सीटें मिलती दिख रही है।

राजस्थान में कांग्रेस तो छत्तीसगढ़ में सेफ खेल रहा सट्टा बाजार

मध्यप्रदेश के एलावा राजस्थान विधानसभा चुनाव की बात करें तो सट्टा बाजार राजस्थान में भी कांग्रेस की सरकार बनवा रहा है। वहीं छत्तीसगढ़ में सट्टा बाजार सेफ खेल रहा है, मतलब दोनों ही पार्टियों में कड़ी टक्कर देखने को मिल रही है।

नोट: चुनावों में सट्टा लगाना देश मे गैरकानूनी है। पुलिस इसके लिए कई गंभीर कदम भी उठा रही है लेकिन इसके बाद भी चुनावों में लोग सट्टा बाजार में काफी सक्रिय रहते है।

छत्तीसगढ़: भ्रष्टाचार, बेरोजगारी और राफेल के मुद्दे पर राहुल गाँधी का बीजेपी पर हमला

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congress president rhaul gandhi during his rally at kabirnagar in chhattisgarh
छत्तीसगढ़ के कबीरधाम में चुनावी सभा को संबोधित करते हुए कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गाँधी

छत्तीसगढ़ के कबीरधाम में चुनावी रैली को संबोधित करते हुए कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गाँधी ने छत्तीसगढ़ की रमन सरकार और केंद्र की मोदी सरकार पर जमकर हमला बोला. राहुल गाँधी ने इस दौरान भ्रष्टाचार, महंगाई, नोटबंदी, बेरोजगारी और राफेल जैसे मुद्दों पर बीजेपी सरकार पर हमला बोला. देखें राहुल गाँधी द्वारा कबीरधाम में कही गयी मुख्य बातें-

  • जब नरेन्द्र मोदी जी भ्रष्टाचार की बात करते हैं तो जनता के मन में बात आती है कि ये वही आदमी है जो राफेल मामले में 30,000 करोड़ रुपये अपने मित्र अनिल अंबानी की जेब में डाल दिया
  • भ्रष्टाचार शब्द नहीं बोल सकते नरेन्द्र मोदी जी, क्योंकि उनके मुख्यमंत्री भ्रष्ट हैं, मुख्यमंत्री का बेटा भ्रष्ट है, मुख्यमंत्री की पत्नी भ्रष्ट हैं और खुद प्रधानमंत्री भ्रष्ट हैं 
  • छत्तीसगढ़ के युवा 15 साल से रोजगार ढूंढ रहे हैं, बाकी प्रदेशों में जा रहे हैं। छत्तीसगढ़ में सरकारी पोस्ट खाली पड़े हैं, यहां आउटसोर्सिंग लागू है
  • हम आपके पैसे को सरकारी स्कूल और सरकारी अस्पताल में लगाना चाहते हैं। भाजपा के लोग अस्पतालों, कॉलेज, यूनिवर्सिटी को प्राईवेट कर देते हैं
  • सरकारी नौकरी के पद खाली पड़े हुए है और भाजपी सरकार नौकरीयां बाहरी लोगों को दे रही है। कांग्रेस की सरकार आएगी तो सभी खाली पदों को भरेगी और छत्तीसगढ़ के युवाओं को राजगार देगी

राजस्थान में एक और मंत्री ने छोड़ी भाजपा, पार्टी का झंडा जलाकर बोले बीजेपी मुर्दाबाद।

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राजस्थान विधानसभा चुनाव को लेकर भाजपा ने आज अपनी पहली लिस्ट जारी कर दी है। लिस्ट में 131 विधानसभा सीटों पर भाजपा ने अपने प्रत्याशी घोषित किये है, जिसमे 23 मौजूद विधायकों के टिकट काटे गए है। टिकट कटने के बाद भाजपा के कई विधायक बगावत पर उतर गए है।

राजस्थान के वरिष्ठ बीजेपी नेता और वसुंधरा सरकार में कैबिनेट मंत्री सुरेंद्र गोयल ने मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। सुरेंद्र गोयल ने टिकट कटने के बाद राजस्थान में भाजपा को हराने की कसम खाते हुए भाजपा का झंडा जलाया और भाजपा मुर्दाबाद के नारे भी लगाए।

टिकट काटने पर गुस्साए सुरेंद्र गोयल ने कहा कि ‘मैंने बीजेपी के जिस वृक्ष को खड़ा किया है उसे उखाड़ कर फेंक दूंगा। जैतारण विधानसभा सीट पर मैंने भाजपा का कमाल खिलाया था पर अब में उस कमल को उखाड़ फेंकूँगा।”

जैतारण सीट से लगातार चार बार विधानसभा चुनाव जीत चुके सुरेंद्र गोयल को टिकट न मिलने से वहां के बीजेपी कार्यकार्य खासे नाराज है। सुरेंद्र ने कहा कि मैंने आज तक किसी भी भाजपा नेता की चापलूसी नही की इसलिए भाजपा नेतृत्व को लगता है कि मै संघ विरोधी हूं जिसके चलते मेरा टिकट काटा गया है।

आज़ाद भारत का सबसे बड़ा घोटाला – मोदी निर्मित तबाही, नोटबंदी से आई : सुरजेवाला

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randeep singh surjewala in bhopal

कांग्रेस मीडिया विभाग के प्रमुख रणदीप सिंह सुरजेवाला ने शुक्रवार को नोटबंदी की दूसरी बरसी पर प्रदेश कांग्रेस कार्यालय में प्रेस वार्ता को संबोधित किया। प्रेस वार्ता में सुरजेवाला ने कहा कि नोटबंदी को अब दो साल हो गये है। लोगों को समझ आ गया है कि नोटबंदी कोई क्रन्तिकारी कदम नही था बल्कि कालेधन को सफ़ेद करने वाली ‘फेयर एंड लवली योजना’ थी। जिसके कारण लाखों लोग बेरोजगार हो गये, हजारों कारखाने बंद हो गये, 100 से ज्यादा लोगों की जान चली गयी और देश की अर्थव्यस्था चौपट हो गयी। सुरजेवाला ने आगे कहा कि प्रधानमंत्री मोदी जापान में अप्रवासी भारतीयों को संबोधित करते हुए ताली बजा-बजाकर देश के गरीब व मध्यम वर्ग का मजाक उड़ाते हुए कह रहे थे कि “घर में शादी है और पैसे नहीं हैं, देखो नोटबंदी का कमाल”। यह भाजपा के अहंकार की आखिरी सीमा थी। सच तो यह है कि जहां एकतरफ नोटबंदी ने किसान, नौजवान, महिलाएं, छोटे व्यवसायी व दुकानदार की कमर तोड़ डाली, तो दूसरी तरफ कालाधन वालों की हो गई ‘ऐश’, जिन्होंने रातों रात सफेद कर लिया सारा कैश।

नोटबंदी घोटाले ने किया सबको बेज़ार,
किसान हों, नौजवान हों, व्यवसायी या दुकानदार,
रोजी गई, गया रोजगार – अर्थव्यवस्था का बंटाधार,
ऐश की कालाधन वालों ने, भुगत रहे हैं ईमानदार,
वोट की चोट से बताएंगे, कि भाजपाई हैं जिम्मेवार

रणदीप सिंह सुरजेवाला

सुरजेवाला ने कहा ” दो साल पहले, 8 नवंबर, 2016 को प्रधानमंत्री, श्री नरेंद्र मोदी ने नोटबंदी की तबाही को आर्थिक क्रांति का नया सूत्र बताते हुए तीन वादे किये – सारा काला धन पकड़ा जाएगा, फर्जी नोट पकड़े जाएंगे, आतंकवाद व नक्सलवाद खत्म हो जाएगा। ऐसे में अब दो साल बाद नरेंद्र मोदी और शिवराज सिंह चौहान से नोटबंदी पर जवाब मांगने का समय आ गया है.” कांग्रेस मीडिया प्रमुख रणदीप सिंह सुरजेवाला ने इस मौके पर भाजपा सरकार से 8 प्रमुख सवाल किये.

सारा कालाधन कहां गया ?

10 दिसंबर, 2016 को मोदी सरकार ने देश की सुप्रीम कोर्ट को कहा था कि 15.44 लाख करोड़ पुराने नोटों में 3 लाख करोड़ कालाधन है, जो जमा नहीं होगा और जब्त हो जाएगा। सुरजेवाला ने बताया कि “24 अगस्त, 2018 की आरबीआई रिपोर्ट के मुताबिक नोटबंदी के दिन चलन में 15.44 लाख करोड़ के नोटों में से 99.9 प्रतिशत मतलब 15.31 लाख करोड़ पुराने नोट तो बैंकों में जमा हो गए। बाकी बचा पैसा भी रॉयल बैंक ऑफ नेपाल व भूटान तथा अदालतों में केस प्रॉपर्टी के तौर पर जमा है। तो फिर कालाधन गया कहां ?

फर्जी नोट कहां गए ?

मोदी जी और बीजेपी ने नोटबंदी के समय बड़े-बड़े दावे किये थे कि नोटबंदी से हजारों करोड़ के नकली नोट पकडे जायेंगे। साल 2017-18 आरबीआई रिपोर्ट के मुताबिक 15.44 लाख करोड़ के पुराने नोटों में से मात्र 58.30 करोड़ ही नकली नोट पाए गए, यानि 0.0034 प्रतिशत। क्या नोटबंदी से नकली नोटों पर नकेल कसना भी भाजपाई जुमला निकला ?

क्या ख़त्म हुआ उग्रवाद और नक्सलवाद ?

बीजेपी ने दावा किया था कि नोटबंदी से नक्सलवाद और उग्रवाद ख़त्म हो जाएगा। नोटबंदी के बाद अकेले जम्मू-कश्मीर में 86 बड़े उग्रवादी हमले हुए, जिनमें 127 जवान और 99 नागरिक शहीद हुए। वहीं 1030 नक्सलवादी हमले हुए, जिनमें 114 जवान शहीद हुए। तो क्या मोदी सरकार ने देश को जानबूझकर गुमराह किया?

क्या नए नोट छापने व बांटने की कीमत नोटबंदी की बचत से 300 प्रतिशत अधिक है?

आरबीआई के मुताबिक साल, 2016-18 के बीच नए नोट छापने तथा लिक्विडिटी ऑपरेशन में लगभग 30,303 करोड़ रु. खर्च हुए है, वहीं नोटबंदी में मात्र 10,720 करोड़ रु. वापस जमा नही हो पाए। क्या भाजपाई बताएंगे कि इतने बड़े आर्थिक नुकसान के लिए कौन जिम्मेवार है?

क्या डिजिटल हो गया इंडिया ?

8 नवंबर, 2016 को नोटबंदी के समय देश में 17.71 लाख करोड़ नगद चलन में था। वहीं 28 अक्टूबर, 2018 को चलन में कैश की मात्रा बढ़कर 19.61 लाख करोड़ हो गई है। तो फिर डिजिटल भुगतान कैसे बढ़ा?

नोटबंदी से पड़ी बेरोजगारी की मार ?

सेंटर फॉर मॉनिटरिंग ऑफ इंडियन इकॉनॉमी की रिपोर्ट के मुताबिक नोटबंदी से सीधे तौर पर 15 लाख नौकरियां गईं और देश की अर्थव्यवस्था को 3 लाख करोड़ का नुकसान हुआ। क्या यह सीधे तौर पर आर्थिक आतंकवाद नहीं?

क्या नोटबंदी कालेधन को सफेद बनाने का एक बड़ा घोटाला था ?


रणदीप सिंह सुरजेवाला ने नोटबंदी को कालेधन को सफ़ेद बनाने वाला देश का सबसे बड़ा घोटाला बताया। सुरजेवाला ने कहा कि “नोटबंदी से ठीक पहले भाजपा व आरएसएस ने सैकड़ों करोड़ रु. की संपत्ति पूरे देश में खरीदी। सितंबर, 2016 में बैंकों में यकायक 5,88,600 करोड़ रुपया अतिरिक्त जमा हुआ। नोटबंदी वाले दिन, यानि 8 नवंबर, 2016 को भाजपा की कलकत्ता इकाई के खाता नंबर 554510034 में 500 व 100 रु. के तीन करोड़ रुपए जमा करवाए गए। कर्नाटक के पूर्व मंत्री व भाजपा नेता, जी. जनार्दन रेड्डी (बेल्लारी ब्रदर्स) के सहयोगी, रमेश गौड़ा ने नोटबंदी के बाद खुदकुशी कर ली तथा सुसाईड नोट में लिखा कि 100 करोड़ रु. का कालाधन भाजपा नेताओं द्वारा बदला जा रहा था। क्या भाजपा व आरएसएस को नोटबंदी के निर्णय की जानकारी पहले से थी? क्या कारण है कि भाजपा व आरएसएस ने इतने सैकड़ों व हजारों करोड़ की संपत्ति खरीदी व इसे सार्वजनिक करने से इंकार कर दिया? क्या इसकी जाँच नहीं होनी चाहिए?”

क्या अमित शाह व भाजपा नेताओं की जाँच हुई?

नोटबंदी के बाद मात्र 5 दिनों में यानि, 10 नवंबर से 14 नवंबर, 2016 के बीच अहमदाबाद जिला को -ऑपरेटिव बैंक में 745.58 करोड़ रु. के पुराने नोट जमा हो गए। इस बैंक के डायरेक्टर, भाजपा अध्यक्ष, श्री अमित शाह हैं, जो इससे पहले बैंक के चेयरमैन भी रहे हैं। 7 मई, 2018 के आरटीआई जवाब (A1 व A2) में बताया गया कि देश में किसी भी जिला को-ऑपरेटिव बैंक में जमा हई पुराने नोटों की यह सबसे बड़ी राशि थी। ऐसा क्यों? क्या इसकी जाँच हुई? क्या श्री अमित शाह की जाँच हुई?

रणदीप सुरजेवाला ने 8 सवाल पूछने के बाद कहा कि आज नोटबंदी को 731 दिन बीत गए हैं और देशवासी भुगत रहे हैं. जनता अब सब समझ गयी है और नोटबंदी का जवाब वोटबंदी करके देगी। कांग्रेस अगर सत्ता में आती है तो नोटबंदी के दौरान कालाधन बदलने वालों की जांच करवाई जाएगी और जो भी दोषी पाया जाएगा उसे सजा मिलेगी।

तेलंगाना में राहुल गांधी का पीएम-सीएम पर हमला, वादा खिलाफी और मिलीभगत का लगाया आरोप.

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राहुल गांधी की फाइल फोटो

तेलंगाना में  शनिवार को कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष राहुल गाँधी ने एक चुनावी सभा को संबोधित करते हुए दिसंबर में होने वाले विधानसभा चुनाव के प्रचार अभियान की शुरुआत की। राहुल गाँधी ने इस दौरान प्रधानमंत्री मोदी और तेलंगाना के कार्यवाहक मुख्यमंत्री के चंद्रशेखर राव पर जमकर हमला बोला। अदिलाबाद जिले के भाइंसा में एक रैली को संबोधित करते हुए राहुल गाँधी ने कहा की ‘ प्रधानमंत्री मोदी और मुख्यमंत्री चंद्रशेखर राव, दोनों ने ही जनता से किये गये वादों को पूरा नही किया। पीएम मोदी देश के युवाओं को रोजगार देने की बात की, किसानों को फसलों के सही दाम देने की बात की, सभी को 15 लाख देने की बात की लेकिन दिया कुछ नही।  मोदी जी ने कहा की में देश का चौकीदार बनना चाहता हूँ लेकिन उन्होंने यह नही बताया की वह किसकी चौकीदारी करेंगे। पीएम मोदी ने गरीबों की नही बल्कि नीरव मोदी, मेहुल चौकसी, विजय माल्या और अनिल अंबानी जैसे अमीरों की चौकीदारी की।’


राफेल के मुद्दे पर पीएम मोदी पर हमला बोलते हुए कांग्रेस अध्यक्ष ने कहा की ‘यूपीए सरकार ने राफेल लड़ाकू हवाई जहाज का कांट्रैक्ट एचएएल को दिया था। मोदी जी प्रधानमंत्री बने और उन्होने राफेल का कांट्रैक्ट एचएएल से छीनकर अपने मित्र अनिल अंबानी को दिया। एचएएल पर एक रुपया कर्जा नहीं है उल्टा सरकार ने एचएएल से 3000 करोड़ रुपया लिया है वहीं अनिल अंबानी पर 45000 करोड़ रुपये का कर्जा है। सदन में मोदी जी ने डेढ़ घंटा भाषण दिया लेकिन अंबानी के बारे में और राफेल के बारे में एक शब्द नहीं कहा।’ 


अपने भाषण के दौरान राहुल गाँधी ने तेलंगाना के कार्यवाहक मुख्यमंत्री चंद्रशेखर राव को भी आड़े हाथों लेते हुए कहा कि ‘तेलंगाना का सीएम बनते ही केसीआर ने भ्रष्‍टाचार शुरू कर दिया। राजीव सागर प्रोजेक्ट, इंदिरा सागर प्रोजेक्ट की असल लागत 2500 करोड़ रुपये थी, इसको मुख्यमंत्री ने बदलकर 12000 करोड़ रुपये कर दिया। जैसे तेलंगाना में केसीआर ने 38000 करोड़ के प्रोजेक्ट को 1 लाख करोड़ में बदला, वैसे ही केन्द्र में मोदी जी ने 526 करोड़ के हवाई जहाज को 1670 करोड़ में खरीदा’ 


राहुल गाँधी ने केसीआर पर भाजपा से मिलीभगत का आरोप लगाते हुए कहा की ‘तेलंगाना में केसीआर भाजपा की मदद कर रही है। केसीआर बीजेपी के हर निर्णय में उनके साथ खड़ी हो जाती है। केसीआर के बाद अब एमआईएम भी नरेन्द्र मोदी की मदद करने में लग गयी है। चाहे वह नोटबंदी का फैसला हो या कोई और यह दोनों ही पार्टी भाजपा के साथ खड़ी दिखाई दी।
अपने भाषण की शुरुआत में राहुल गांधी ने कहा कि ‘आज हम यहाँ आकर कौमाराम भीम जी और डा भीमराव अंबेडकर जी को याद करते हैं। लेकिन पता नहीं क्यों यहाँ के मुख्यमंत्री को अंबेडकर जी का नाम अच्छा नहीं लगता है। तेलंगाना में सिंचाई परियोजना का नाम भीमराव आंबेडकर जी के नाम पर रखा गया था। पर पता नही क्यों आपके मुख्यमंत्री ने उसका नाम बदल दिया। यह आंबेडकर जी का अपमान है।


राहुल गाँधी ने कहा की कांग्रेस पार्टी कभी झूठे वादा नहीं करती है। यूपीए की सरकार ने 10 साल में सबसे ज्यादा लोगों को गरीबी से निकालने का काम किया। किसानों और आदिवासियों का शोषण रोकने के लिए कांग्रेस सरकार ने भूमि अधिग्रहण बिल पेश किया था और यह सुनिश्चित किया गया था कि उन्हें भूमि की बाजार कीमत से चार गुणा ज्यादा दाम मिलें। तेलंगाना की सरकार ने एससी-एसटी को तीन एकड़ भूमि और 12 फीसदी आरक्षण आदिवासियों को देने का वादा किया था लेकिन इस वादे को राज्य सरकार पूरा नहीं कर पाई।’


राहुल गाँधी ने कहा की पांच साल होने वाले हैं तेलंगाना का जो सपना था वो अधूरा है, टूट गया। अगर कांग्रेस पार्टी सत्ता में आती है तो तेलंगाना में बेरोजगार युवाओं को तीन हजार रुपये का बेरोजगारी भत्ता दिलवाएंगे।  केवल कांग्रेस ही तेलंगाना के वादे के पूरा कर सकती है। हर परिवार कर्ज तले दबा है। पिछले चुनाव में आपने केसीआर पर भरोसा किया था। लेकिन अब लोगों को पता चल गया है केसीआर सरकार भ्रष्टाचार में डूबी है।


119 विधानसभा सीटों वाले तेलंगाना में 7 दिसंबर को विधानसभा चुनाव के लिए वोटिंग होगी।

क्या पीके मध्यप्रदेश में कर पाएँगे जेडीयू का बेडा पार ?

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Patna: Bihar Chief Minister and Janta Dal United JD(U) National President Nitish Kumar greets electoral strategist Prashant Kishor after he joined JD(U) during party's state executive meeting at Anne Marg, in Patna.

नवंबर में होने वाले मध्यप्रदेश विधानसभा चुनाव में अब एक महीने से कुछ ही दिन ज्यादा बचे है. चुनाव के नजदीक आते-आते प्रदेश के बाहर की छेत्रीय पार्टी भी अब प्रदेश का रुख कर रही है. बसपा, सपा, आप, एनसीपी और शिवसेना के बाद अब नितीश कुमार की जेडीयू ने भी मध्यप्रदेश विधानसभा चुनाव लड़ने की घोषणा कर दी है. जेडीयू के प्रदेश अध्यक्ष सूरज जैसवाल ने कहा की पार्टी विंध्य, बुंदेलखंड, महाकौशल और नर्मदांचल की 150 विधानसभा सीटों पर चुनाव लड़ने की रणनीति पर काम कर रही है.

भाजपा के लिए 2014 और महागठबंधन के लिए बिहार विधानसभा 2015 में चुनावी रणनीति तैयार करने वाले प्रशांत किशोर कुछ दिनों पहले ही जेडीयू में शामिल हुए है. शामिल होते ही नितीश कुमार ने प्रशांत किशोर को नंबर 2 की पोजीशन देते हुए पार्टी का राष्ट्रीय उपाध्यक्ष नियुक्त कर दिया है. जेडीयू की चुनावी रणनीति अब प्रशांत किशोरे के जिम्मे ही है. मध्यप्रदेश में भाजपा के साथ गठबंधन न करके जेडीयू ने अलग चुनाव लड़ने का फैसला किया है. हालाँकि जेडीयू मध्यप्रदेश में अपना दल, भारतीय शक्ति चेतना, गोंडवाना गणतंत्र पार्टी जैसे छोटे दलों के साथ गठबंधन की संभावनाएं जरूर तलाश रही है.

मध्यप्रदेश चुनाव की रणनीति पर चर्चा करने के लिए नितीश कुमार ने पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष सूरज जैसवाल को पटना बुलाया है. उम्मीद है की इस बैठक में प्रशांत किशोर भी शामिल होंगे.

तीन विधानसभा चुनाव, 107 प्रत्याशी, 1 जीत, 102 पर जमानत जब्त

मध्यप्रदेश में जेडीयू अब तक तीन विधानसभा चुनाव लड़ने के बाद भी प्रदेश में कोई ख़ासा असर नही बना पाई है. जेडीयू ने पहली बार मध्यप्रदेश विधानसभा चुनाव 2003 में लड़ा था. पार्टी ने तब प्रदेश की 36 विधानसभा सीटों पर उम्मीदवार उतारे थे और 1 सीट पर जीत दर्ज की थी. वहीं 33 सीटों पर जेडीयू उम्मीदवार की जमानत जब्त हो गयी थी. इसके बाद 2008 विधानसभा चुनाव में जेडीयू ने 49 विधानसभा सीटों पर प्रत्याशी उतारे. इस चुनाव में पार्टी अपना खाता भी नही खोल पाई और 49 में 48 सीटों पर जेडीयू के उम्मीदवारों की जमानत जब्त हो गई. 2013 में जेडीयू ने 22 उम्मीदवार उतारे और बिना कोई सीट जीते 21 सीटों पर जेडीयू की जमानत जब्त हो गई.

साफ़ है की मध्यप्रदेश में जेडीयू की स्तिथि सुधारना प्रशांत किशोर के लिए बड़ी चुनौती होगी. प्रशांत किशोर की कोशिश चुनाव में गोंडवाना गणतंत्र पार्टी के साथ गठबंधन करने की है. गठबंधन के प्रयास के साथ ही जेडीयू, गपा से नाराज चल रहे लोगों को भी संपर्क में ले रही है. पार्टी के पदाधिकारियों और छोटे दलों के कुछ नेताओं के साथ 22 अक्टूबर को बैठक करके जेडीयू 23 अक्टूबर को प्रत्याशियों की पहली सूची जारी कर सकती है.

मध्यप्रदेश के दौरे पर राहुल गाँधी, पीतांबरा देवी शक्तिपीठ पर की पूजा, मोदी सरकार पर बोला हमला.

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कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गाँधी अपने दो- दिन के मध्यप्रदेश दौरे के अंतर्गत आज ग्वालियर पहुंचे. जहां उन्होंने सबसे पहले मां पीतांबरा देवी के दर्शन किये और पूजा-अर्चना की. राहुल गाँधी के साथ मंदिर में कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष कमलनाथ और संसद ज्योतिरादित्य सिंधिया भी मौजूद रहे. राहुल गाँधी अगले दो दिन संसद ज्योतिरादित्य सिंधिया के प्रभाव वाले ग्वालियर संभाग में रोड शो और जनसभाओं को संबोधित करेंगे.
राहुल गाँधी का यह दौरा विधानसभा चुनाव के नजरिये से काफी महत्वपूर्ण है. ग्वालियर संभाग में मध्यप्रदेश विधानसभा की तकरीबन 34 विधानसभा आती है. 2013 के चुनाव में भाजपा ने यहां 20 सीटों पर जीत दर्ज की थी. ऐसे में अगर कांग्रेस को मध्यप्रदेश की सत्ता में वापिस आना है तो उसे ग्वालियर संभाग में अपनी सीटें बड़ानी होंगी.

दतिया में राहुल गांधी की जनसभा, मोदी सरकार पर बोला हमला

पीतांबरा देवी शक्तिपीठ में पूजा अर्चना करने के बाद राहुल गाँधी ने दतिया पहुंचकर जनसभा को संबोधित किया. मोदी सरकार पर हमला बोलते हुए राहुल गाँधी ने कहा की ‘जब केंद्र में कांग्रेस की सरकार थी तो हमने किसानों का कर्जा माफ़ किया था लेकिन मोदी जी किसानों की अनदेखी कर सिर्फ उद्योगपतियों का कर्जा माफ कर रहे है’ प्रधानमंत्री मोदी से हुई एक मुलाकात का जिक्र करते हुए राहुल गांधी ने कहा कि ‘मैं किसानों की बात करने पीएम ऑफिस गया था। मैंने उनसे कहा कि आप बड़े उद्योगपतियों का कर्जा माफ कर रहे हैं तो आप किसानों का कर्जा भी माफ कर दीजिए. जिसपर उन्होंने एक शब्द भी नहीं बोला।’
कर्जमाफी के बाद राहुल गांधी ने राफेल  मुद्दा उठाते हुए कहा की ‘अम्बानी की कंपनी के पास ना तो लड़ाकू विमान बनाने का अनुभव है और ना ही क्षमता है, ऐसे में प्रधानमंत्री मोदी ने अम्बानी की कंपनी को राफेल विमान बनाने का कॉन्ट्रैक्ट क्यों दिया ? सरकार दलील देती है की HAL के पास राफेल बनाने की क्षमता नही है, में पूछना चाहता हूँ की जिसको आपने कांटेक्ट दिया उसके पास क्या राफेल बनाने की क्षमता है ?
राहुल गाँधी ने आगे कहा की प्रधानमंत्री मोदी जिस तरह किसानों के मुद्दे पर चुप थे उसी तरह वह आज राफेल के मुद्दे पर चुप है.

सरकार आने पर किसानो का कर्ज करेंगा माफ, युवाओं को देंगे रोजगार: राहुल गांधी

मोदी सरकार पर हमले के बाद राहुल गाँधी ने कहा की कांग्रेस की सरकार आने बाद फौरन किसानों का कर्जा माफ़ किया जाएगा. युवाओं को रोजगार देने के किये हमारे मुख्यमंत्री 18-18 घंटों तक काम करेंगे. राहुल गाँधी ने आगे कहा की में आपसे झूठे जाड़े नही करूंगा. में आपसे नही कहूँगा की में आपके खाते में 15-15 लाख डलवा दूंगा. में जो बोलूँगा वो करके दिखाऊंगा. सरकार आने पर हम हर जिले में फूड प्रोसेसिंग यूनिट लगाएंगे जिससे किसान सीधे अपने फसलों को बेच सकेंगे.