नवंबर में होने वाले मध्यप्रदेश विधानसभा चुनाव में अब एक महीने से कुछ ही दिन ज्यादा बचे है. चुनाव के नजदीक आते-आते प्रदेश के बाहर की छेत्रीय पार्टी भी अब प्रदेश का रुख कर रही है. बसपा, सपा, आप, एनसीपी और शिवसेना के बाद अब नितीश कुमार की जेडीयू ने भी मध्यप्रदेश विधानसभा चुनाव लड़ने की घोषणा कर दी है. जेडीयू के प्रदेश अध्यक्ष सूरज जैसवाल ने कहा की पार्टी विंध्य, बुंदेलखंड, महाकौशल और नर्मदांचल की 150 विधानसभा सीटों पर चुनाव लड़ने की रणनीति पर काम कर रही है.
भाजपा के लिए 2014 और महागठबंधन के लिए बिहार विधानसभा 2015 में चुनावी रणनीति तैयार करने वाले प्रशांत किशोर कुछ दिनों पहले ही जेडीयू में शामिल हुए है. शामिल होते ही नितीश कुमार ने प्रशांत किशोर को नंबर 2 की पोजीशन देते हुए पार्टी का राष्ट्रीय उपाध्यक्ष नियुक्त कर दिया है. जेडीयू की चुनावी रणनीति अब प्रशांत किशोरे के जिम्मे ही है. मध्यप्रदेश में भाजपा के साथ गठबंधन न करके जेडीयू ने अलग चुनाव लड़ने का फैसला किया है. हालाँकि जेडीयू मध्यप्रदेश में अपना दल, भारतीय शक्ति चेतना, गोंडवाना गणतंत्र पार्टी जैसे छोटे दलों के साथ गठबंधन की संभावनाएं जरूर तलाश रही है.
मध्यप्रदेश चुनाव की रणनीति पर चर्चा करने के लिए नितीश कुमार ने पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष सूरज जैसवाल को पटना बुलाया है. उम्मीद है की इस बैठक में प्रशांत किशोर भी शामिल होंगे.
तीन विधानसभा चुनाव, 107 प्रत्याशी, 1 जीत, 102 पर जमानत जब्त
मध्यप्रदेश में जेडीयू अब तक तीन विधानसभा चुनाव लड़ने के बाद भी प्रदेश में कोई ख़ासा असर नही बना पाई है. जेडीयू ने पहली बार मध्यप्रदेश विधानसभा चुनाव 2003 में लड़ा था. पार्टी ने तब प्रदेश की 36 विधानसभा सीटों पर उम्मीदवार उतारे थे और 1 सीट पर जीत दर्ज की थी. वहीं 33 सीटों पर जेडीयू उम्मीदवार की जमानत जब्त हो गयी थी. इसके बाद 2008 विधानसभा चुनाव में जेडीयू ने 49 विधानसभा सीटों पर प्रत्याशी उतारे. इस चुनाव में पार्टी अपना खाता भी नही खोल पाई और 49 में 48 सीटों पर जेडीयू के उम्मीदवारों की जमानत जब्त हो गई. 2013 में जेडीयू ने 22 उम्मीदवार उतारे और बिना कोई सीट जीते 21 सीटों पर जेडीयू की जमानत जब्त हो गई.
साफ़ है की मध्यप्रदेश में जेडीयू की स्तिथि सुधारना प्रशांत किशोर के लिए बड़ी चुनौती होगी. प्रशांत किशोर की कोशिश चुनाव में गोंडवाना गणतंत्र पार्टी के साथ गठबंधन करने की है. गठबंधन के प्रयास के साथ ही जेडीयू, गपा से नाराज चल रहे लोगों को भी संपर्क में ले रही है. पार्टी के पदाधिकारियों और छोटे दलों के कुछ नेताओं के साथ 22 अक्टूबर को बैठक करके जेडीयू 23 अक्टूबर को प्रत्याशियों की पहली सूची जारी कर सकती है.
