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40 दिन 40 सवाल: पंचायती राज और पिछड़े जिलों का दिवाला होने को लेकर कमलनाथ ने पूछा दसवां सवाल

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40 दिन 40 सवाल पूछने के अभियान में कांग्रेस मध्यप्रदेश अध्यक्ष कमलनाथ ने शिवराज सरकार से दसवां सवाल पूछा। अपने दसवें सवाल में कमल नाथ ने पंचायती राज और पिछड़े जिलों का दिवाला होने को लेकर किया।

सवाल नंबर दस

मोदी जी ने निकाला पंचायती राज और पिछड़े जिलों का दिवाला,
मामा क्यों डाला मुँह पर ताला ? शर्म करो शिवराज ।
मनमोहन जी के समय ‘धरना-धर’ और उपवास का स्वाँग,
अब क्यों नही उठाते बासमती की माँग ?

1) कांग्रेस सरकार ने पंचायती राज को सशक्त करने के लिए पंचायती राज मंत्रालय स्थापित किया था। मोदी सरकार ने नियोजित रूप से पंचायती राज का गला घोंट कर उसे समाप्त प्रायः कर दिया । इस मंत्रालय के 2014-15 के 7000 करोड़(BE) के बजट को 2015-16 में 94 करोड़(BE) कर दिया गया ।

2) इस मंत्रालय के तहत दो प्रमुख कार्यक्रम चलाए जाते थे।
पहला- देश के पिछड़े जिलों का विकास BRGF) और दूसरा पंचायतों को सशक्त करने के लिये राजीव गांधी पंचायत सशक्तिकरण अभियान (RGPSA)। मोदी सरकार ने दोनों कार्यक्रमों को 2015-16 के बाद बंद कर दिया।

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3) कांग्रेस सरकार ने मध्यप्रदेश के 30 पिछड़े जिलों को आगे लाने के लिए पिछड़ा क्षेत्र अनुदान निधि ( BRGF) कार्यक्रम 2006-07 से प्रारंभ किया था । जिसके तहत 2013 -14 तक मध्यप्रदेश पर 2995.59 करोड़ रु खर्च किए ।
4)अलीराजपुर ,अनूपपुर ,अशोकनगर,बालाघाट ,बड़वानी
,बैतूल,बुरहानपुर ,झाबुआ ,मंडला, टीकमगढ,डिंडोरी, श्योपुर इत्यादि पिछड़े 30 जिलों का अनुदान बंद ।

5) मोदी जी ने आने के बाद 2015 -16 से मध्यप्रदेश को यह(BRGF) अनुदान बंद कर दिया ।आखरी साल 2014 – 15 के लिए मोदी जी ने 647.20 करोड़ रु प्रावधानित किए ,मगर जारी किए सिर्फ़ 221.22 करोड़ और मामा जी ने ख़र्च किए मात्र 197.52 करोड़ ।

6) इसी प्रकार मध्यप्रदेश की पंचायतों के सशक्तिकरण के लिए राजीव गांधी पंचायत सशक्तिकरण अभियान को भी अनुदान बंद कर दिया । मोदी जी ने आखरी वर्ष 2015-16 में इस हेतु प्रावधानित किए मात्र 41.63 करोड़ और दिए सिर्फ़ 10.8 करोड़ ।

7)शिवराज जी फरवरी 2014 को तत्कालीन प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह जी को पत्र लिखकर धरने पर बैठे थे कि मध्यप्रदेश के बासमती चावल की पहचान,जो जियोग्राफिकल इंडिकेशन (GI) ने स्वीकारी है,को एपीडा द्वारा स्वीकारा नहीं जा रहा है।ये मध्यप्रदेश के किसानों के साथ कांग्रेस सरकार का अन्याय है

8) अब क्या हुआ मामा जी , जब मोदी सरकार ने फरवरी 2016 में आपकी मांग को ठुकरा कर आदेश दिया कि मध्यप्रदेश के किसान अपने चावलों को बासमती की पहचान नहीं दे सकेंगे ?

9) मध्यप्रदेश में 2 लाख़ हेक्टेयर के 13 जिलों,विदिशा ,सीहोर होशंगाबाद ,नरसिंहपुर ,जबलपुर, गुना ,शिवपुरी, ग्वालियर, दतिया ,भिंड ,श्योपुर, मुरैना,रायसेन के किसानों को मोदी जी ने कहा कि वे अपने चावल बासमती के नाम से नहीं बेच सकेंगे ।

10)मामा जी,मप्र के बासमती चावल उत्पादक किसानो के लिए अब धरने का स्वाँग भी नही करोगे?अब क्या मोदी सरकार से डर लगता है या कांग्रेस सरकार के समय दिखावा कर रहे थे?
सोर्स -केंद्रीय पंचायतीराज मंत्रालय,कृषि और प्रसंस्कृत खाद्य उत्पाद निर्यात विकास प्राधिकरण
धरना-धर मामा का स्वाँग

40 दिन 40 सवाल-

“मोदी सरकार के मुँह से जानिए,
मामा सरकार की बदहाली का हाल।”

“हार की कगार पर, मामा सरकार”

भोपाल में प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान सवालों से भागे संबित पात्रा

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मध्य प्रदेश विधानसभा चुनाव के सिलसिले में राजधानी भोपाल पहुंचे बीजेपी प्रवक्ता संबित पात्रा ने भोपाल स्थित नेशनल हेराल्ड की बिल्डिंग के सामने प्रेस कांफ्रेंस की. प्रेस कॉन्फ्रेंस में उन्होंने कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी और सोनिया गांधी पर जमकर आरोप लगाए. उन्होंने कहा कि, ‘हमारे पास गांधी परिवार की सच्चाई सामने लाने के लिए पर्याप्त सबूत हैं. मध्यप्रदेश के लोगों को गांधी परिवार का असली चेहरा देखना चाहिए.’

राहुल गांधी और सोनिया गांधी जमानत पर हैं बाहर

कॉन्फ्रेंस में पात्रा ने आगे कहा कि, ‘नेशनल हेराल्ड केस में सोनिया गांधी और राहुल गांधी दोनों ही 50,000 के मुचलके पर बाहर घूम रहें है. यह दोनों ही जेल से कुछ कदम दूर हैं.’ वहीं प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान ही कांग्रेस नेता जेपी धनोपिया ने जमकर हंगामा किया. उन्होंने बीजेपी पर आचार संहिता के उल्लंघन का आरोप लगाया. उन्होंने आरोप लगाया कि बीजेपी सड़क किनारे निजी जमीन पर प्रेसवार्ता कर रही है.

पत्रकारों के सवालों से भागते दिखे पात्रा

प्रेस कॉन्फ्रेंस के बाद सवाल-जवाब के लिए भी समय दिया गया था. लेकिन जब पत्रकारों ने सवाल पूछना शुरू किया तो पात्रा ने चुनिंदा सवालों का ही जवाब दिया. बाकी सवालों से भागते नजर आये. बता दें कि संबित पात्रा नेशनल हेराल्ड मामले पर भोपाल एम.पी नगर स्थित विशाल मेगा मार्ट के सामने ये प्रेस कॉन्फ्रेंस कर रहे थे.

दतिया में नरोत्तम मिश्रा के खिलाफ कांग्रेस को नहीं मिल रहा दमदार उम्मीदवार

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मध्यप्रदेश भारतीय जनता पार्टी के दिग्गज नेता राज्य के जनसंपर्क मंत्री नरोत्तम मिश्रा को पटखनी देने वाला उम्मीदवार कांग्रेस को अब तक नहीं मिला है। दिल्ली में जब कांग्रेस की स्क्रीनिंग कमेटी उम्मीदवारों के नाम पर सहमति बनाने का काम कर रही थी, ठीक उसी वक्त दतिया में कांग्रेस आस्तीनें चढ़ा पेराशूट नेताओं का विरोध कर रहे थे। अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी द्वारा दतिया जिले के लिए नियुक्त किए गए पर्यवेक्षक हरियाण के विधायक उदयभान जाटव को नेताओं की आपसी लड़ाई देखकर कहना पड़ा कि सीट जीतोगे सरकार तब ही बन पाएगी। आपस में लड़ने सरकार नहीं बन सकती।

तीन सीट,तीन सौ दावेदार

दतिया जिला में विधानसभा की कुल तीन सीटें हैं। दतिया,सेंवढ़ा और भांडेर। तीनों सीटों पर अभी भारतीय जनता पार्टी का कब्जा है। राज्य के जनसंपर्क मंत्री नरोत्तम मिश्रा दतिया विधानसभा क्षेत्र का प्रतिनिधित्व करते हैं। पिछले चुनाव में पेड न्यूज के आरोप के चलते चुनाव आयोग ने मिश्रा को चुनाव लड़ने के लिए अयोग्य घोषित कर दिया था। हाईकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट तक मामला पहुंचा। चुनाव आयोग के आदेश को निरस्त कर दिया गया है।

पिछले एक दशक में नरोत्तम मिश्रा ने दतिया अपनी जड़े काफी मजबूत कर ली हैं। कांग्रेस में उन्हें चुनौती देने वाला कोई नेता भी सामने नहीं है। कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने ग्वालियर संभाग की अपनी यात्रा की शुरूआत दतिया के पीतांबरा पीठ के दर्शन कर की थी। राहुल गांधी की इस यात्रा का मकसद दतिया सीट वापस कांग्रेस की झोली में लाने का था। लेकिन, दतिया में कांग्रेस एक नहीं हो पा रहे हैं।

राहुल गांधी की रैली के लिए 50-50 हजार रुपए चंदा

कांग्रेसियों में समन्वय बैठाने आए उदयभान के सामने प्रदेश कांग्रेस के सदस्य दामोदर सिंह ने कहा कि कांग्रेस में अब फटे नोट नहीं चलेंगे। आप पार्टी हाइकमान तक बात पहुंचाईएं जिले की तीनों सीटों पर नए चेहरों को मौका दे तो कार्यकर्ता पूरी मेहनत से कांग्रेस को जिताने के लिए लग जाएगा। चुनाव का समय है और कार्यालय से सभी को सूचनाएं नहीं दी जाती। राजेश दांतरे ने कहा कि हमसे राहुल गांधी की रैली के लिए 50-50 हजार रुपए चंदा लिया गया। रैली की सफलता का श्रेय एक व्यक्ति को दे दिया। यह गलत है। जहां कार्यकर्ता का सम्मान नहीं होगा वहां कार्यकर्ता मन से काम नहीं करेगा।

आशोक शर्मा ने सलाह दी कि पर्यवेक्षक दतिया में बैठे रहते हैं 7 अन्य दो विधानसभा सीट पर ध्यान ही नही देते। कार्यकर्त्ताओं से भी राय नहीं ली जाती। शिवकुमार पाठक ने टिकट पर अपनी दावेदारी पेश करते हुए कहा कि दतिया से ब्राह्ण को ही टिकट देना चाहिए।

CBIvsCBI- विपक्ष के सवालों पर अरुण जेटली के यह 10 जवाब

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arun jaitley

सीबीआई बनाम सीबीआई मामले ने अब तूल पकड़ लिया है. दरअसल देर रात सीबीआई चीफ आलोक वर्मा और स्पेशल डायरेक्टर राकेश अस्थाना को छुट्टी पर भेज दिए जाने से हड़कंप मच गया. विपक्ष केंद्र सरकार पर आरोप प्रत्यारोप लगाने लगी. आरोप लगाने की लिस्ट में कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी भी शामिल हैं. राहुल गांधी ने इसको राफेल से जुड़ा मुद्दा बताया. वहीं आरोपों का सिलसिला बढ़ता देख केंद्रीय मंत्री अरुण जेटली ने प्रेस कांफ्रेंस कर सरकार की ओर से पक्ष रखते हुए कई सवालों का जवाब दिया.

अरुण जेटली की 10 बड़ी बातें

  • अरुण जेटली ने बताया कि सीवीसी की सिफारिश के बाद केंद्र ने अधिकारियों को हटाने का फैसला किया है।
  • देश की सबसे बड़ी जांच एजेंसी की छवि को बचाने के लिए ऐसा करना जरूरी हो गया था।
  • सीवीसी की अनुशंसा पर एक एसआईटी पूरे मामले की जांच करेगी।
  • अरुण जेटली ने कहा कि इस मामले की जांच करना सरकार के अधिकार क्षेत्र में नहीं आता है और न ही इसकी जांच सरकार करेगी।
  • दोनों शीर्ष अधिकारियों पर ही आरोप लगे हैं, ऐसे में इसकी जांच ये अधिकारी खुद नहीं कर सकते।
  • जांच पूरी होने तक दोनों अधिकारी अवकाश पर रहेंगे।
  • एसआईटी केस की जांच करेगी। उच्चतम निष्पक्षता के तहत यह कदम उठाया गया है।
  • विपक्ष के आरोपों को जेटली नें अनफेयर बताया।
  • जेटली नेकहा कि सरकार ने सेक्शन 42 की शक्ति का इस्तेमाल करते हुए यह आदेश पारित किया है।

चंबल- ग्वालियर में सिंधिया की अच्छी पकड़ के बावजूद 2013 में कांग्रेस कैसे हार गई चुनाव ?

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कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी हाल ही में 2 दिन के लिए ग्वालियर-चम्बल दौरे पर आए हुए थे। राजनैतिक विशेषज्ञों की माने तो राहुल गांधी का ये दौरा प्रचार-प्रसार के साथ-साथ नेता कार्यकर्ताओं को एकजुट करने को लेकर भी था।दरअसल ग्वालियर-चम्बल इलाके में ज्योतिरादित्य सिंधिया का पैठ माना जाता है लेकिन इसके बावजूद भी 2013 विधानसभा चुनाव में बड़े अंतर से हारना ज़हन में जरुर खटकता है कि आखिर ये कैसे हो गया ?

पैठ सिंधिया की लेकिन वोट भाजपा को

साल 2013 विधानसभा चुनाव में ग्वालियर- चम्बल की 34 सीटों में से बीजेपी को 20, कांग्रेस को 12 और बसपा को 2 सीटें मिली थ। कांग्रेस के इस हार के पीछे गुटबाजी का कारण माना जाता है। दरअसल 2013 में कांग्रेस अध्यक्ष रहे कांतिलाल भूरिया सभी कोंग्रेसी नेताओं और कार्यकर्ताओं को एकजुट करने में नाकाम थे, जिस तरह से आज वर्तमान प्रदेश अध्यक्ष कमल नाथ करते हुए दिखाई दे रहे हैं।

वोट का बंटवारा

2013 विधानसभा चुनाव में कांग्रेसीनेताओं में टिकट को लेकर नोक झोक भी हार का कारण माना जाता है। दिग्विजय सिंह चुनाव से खुद को दूर रखाथा तो सिंधिया बड़े चेहरे के रूप में सामने थे। मामला ये हुआ कि दिग्विजय के क्षेत्रमें सिंधिया प्रचार करने से दूर रहे तो सिंधिया के क्षेत्र में और दूसरे नेता दूर रहे।इस वजह से कई नेताओं ने दूसरे दल में जाना उचित समझा। नतीजा चम्बल-ग्वालियर में पैठहोने के बावजूद कांग्रेस मात्र 12 सीटें ही जीत पाई।

एकजुट करने की कोशिश

2012018 विधानसभा चुनाव में कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी मध्य प्रदेश के सभी नेताओं को एकजुट करने के लिए हरसंभव प्रयास करने में जुटे हुए हैं ताकि वोट बटवारा होने से रोका जाये और 15 साल का सूखा भी ख़त्म हो. यही कारण है कि राहुल गांधी 2 दिन के लिए ग्वालियर-चम्बल दौरे पर थे। इन दो दिन के दौरे पर राहुल गांधी कई धार्मिक स्थल भी गये और रोड शो भी किए। ख़ास बात यह है कि राहुल गांधी प्रदेश अध्यक्ष कमल नाथ और ज्योतिरादित्य सिंधिया को साथ लेकर चुनाव प्रचार कर रहे हैं। इशारा साफ़ है कि इस बार राहुल गांधी किसी भी प्रकार की गुटबाजी नहीं देखना चाहते जो हार का कारण बनें।

टिकट का खेल

बहरहाल अभी यह कहना ठीक नहीं होगा कि कांग्रेस खेमे में सब कुछ ठीक ही चल रहा है। क्योंकि आने वाले दिनों में जैसे ही टिकट मिलने ना मिलने का खेल सामने आएगा एक बार फिर से 2013 जैसा माहौल देखने को मिल सकता है।

मध्यप्रदेश में कांग्रेस से ज्यादा अपने सम्मान की चिंता कर रहे हैं दिग्गज कांग्रेसी

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मध्यप्रदेश में कांग्रेस के नेताओं के बीच की लड़ाई पार्टी के मुद्दे काफी दिलचस्प हैं। स्क्रीनिंग कमेटी की बैठक में अहम की यह लड़ाई गंभीर गुटबाजी में बदलती जा रही है। कांग्रेस के वरिष्ठ नेता सांसद ज्योतिरादित्य सिंधिया की लोकप्रियता को भी स्वीकार नहीं कर पा रहे हैं। सिंधिया से कांग्रेस के नेताओं की अपेक्षा वैसी ही दिखाई दे रही है,जैसी वे अपने समर्थकों से करते हैं।

कांग्रेस की इस गुटबाजी का लाभ उठाते हुए पूर्व केन्द्रीय मंत्री सुरेश पचौरी ने अपने समर्थकों को हर नेता के साथ फीट कर दिया है।

स्क्रीनिंग कमेटी में सिंधिया बनाम ऑल की लड़ाई

मध्यप्रदेश कांग्रेस में गुटबाजी की एतिहासिक पृष्ठभूमि रही है। इस एतिहासिक पृष्ठभूमि में कमलनाथ हमेशा ही माधवराव सिंधिया के खिलाफ ही खड़े हुए नजर आए। माधवराव सिंधिया का नाम जब भी मुख्यमंत्री पद के लिए उभर कर सामने आया तब-तब अर्जुन सिंह-कमलनाथ ने इसका खुला विरोध किया। चुरहट लॉटरी कांड में आए फैसले के बाद जब कांगे्रस हाईकमान ने अर्जुन सिंह को हटाने का फैसला लिया तब विधायकों के समर्थन के आधार पर माधवराव सिंधिया को मुख्यमंत्री पद पर आने से रोका गया। अर्जुन सिंह समर्थक ठाकुर हरवंश सिंह के चार बंगले स्थिति निवास पर तीन दिन तक कांगे्रसी विधायक नजरबंद रहे। बाद में राजीव गांधी को समझौते का रास्ता निकालते हुए मोतीलाल वोरा को दुबारा राज्य का मुख्यमंत्री बनाना पड़ा था। वोरा,माधवराव सिंधिया के करीबी थे। लगभग चार दशक पुरानी यह गुटबाजी पीढ़ी बदलने के बाद भी खत्म होती नजर नहीं आ रही हैं। प्रदेश कांगे्रस कमेटी के अध्यक्ष कमलनाथ आज भी इस गुटबाजी के केन्द्र में हैं।

केन्द्र से कांग्रेस की सरकार जाने के बाद कमलनाथ किंगमेकर की भूमिका छोड़कर किंग बनने के लिए तैयार दिखाई दे रहे हैं। पिछले चार दशक में कमलनाथ कभी भी छिंदवाड़ा जिले से बाहर नहीं निकले हैं। विधानसभा के इस चुनाव में भी वे छिंदवाड़ा के कथित विकास को ही अपने पक्ष में भुनाने की कोशिश कर रहे हैं। छिंदवाड़ा के कमलनाथ मॉडल को वोटरों ने वोटरों ने खास तव्वजों नहीं दी है। 72 साल के कमलनाथ ने पिछले छह माह में दो अंकों की संख्या में बताया जा सके इतनी रैलियां भी नहीं कर पाए हैं। क

मलनाथ ने अपनी पूरी ताकत सिंधिया को रोकने में लगा रखी है। पार्टी की चुनाव प्रचार अभियान समिति के अध्यक्ष होने के बाद भी प्रदेश कांग्रेस कमेटी ने राज्य भर में सिंधिया की सभा भी नहीं होने दी। जबकि राज्य में कमलनाथ के मुकाबले में सिंधिया का चेहरा ज्यादा लोकप्रिय है। कई चुनावी सर्वेक्षणों में भी मुख्यमंत्री के चेहरे को लेकर कमलनाथ के पक्ष में उत्साहजनक राय सामने नहीं आई है। अब कमलनाथ की कोशिश है कि अपने समर्थकों को ज्यादा से ज्यादा टिकट दिलाकर सिंधिया को मुख्यमंत्री पद की दौड़ से बाहर कर दिया जाए। राज्य में परंपरागत तौर सिंधिया विरोधी नेता एक साथ खड़े दिखाई दे रहे हैं। इन नेताओं में दिग्विजय सिंह, कमलनाथ,अजय सिंह और कांतिलाल भूरिया प्रमुख हैं। पूर्व केन्द्रीय मंत्री सुरेश पचौरी दोनों गुट में समान रूप से सक्रिय नजर आ रहे हैं। बताया जाता है कि पचौरी ने अपने कुछ समर्थकों के नाम सिंधिया गुट से और कुछ समर्थकों के नाम कमलनाथ गुट की ओर से आगे बढ़ाया हैं। विवेक तन्खा भी दोनों गुटों को साध कर अपने समर्थकों को टिकट दिलाने की कोशिश कर रहे हैं।

भाजपा से समझौते की उड़ रहीं अपवाहें

चुनाव के लिए उम्मीदवारों की सूची जारी होने से पहले एक बार फिर भूल छाप कांगे्रसियों के सक्रिय दिखाई देने से प्रतिबद्ध कांगे्रसी हैरान हैं। प्रतिबद्ध कांगे्रसी यह महसूस कर रहे हैं कि पार्टी के कुछ बड़े नेताओं ने इस चुनाव से पहले भाजपा से अंदरूनी समझौता कर लिया है। अधिकांश कांगे्रसी यह मानते हैं कि कमलनाथ की तुलना में ज्योतिरादित्य सिंधिया का चेहरा राज्य में ज्यादा लोकप्रिय है। राज्य के वोटर भी यह मानते हैं भाजपा की पंद्रह साल की सरकार को चुनौती सिर्फ सिंधिया दे सकते हैं। प्रदेश कांगे्रस के अधिकांश नेता भी यह महसूस करते हैं कि सिंधिया का लाभ पाटर्भ् को मिल सकता है, लेकिन वे पार्टी से ज्यादा अपने अहम को ज्यादा महत्व दे रहे हैं। सिंधिया से उनके विरोधियों को शिकायत इस बात की रहती है कि वे उम्र में काफी बड़े अजय सिंह, कांतिलाल भूरिया और सुरेश पचौरी जैसे नेताओं को भी पहले नाम से बुलाते हैं। पार्टी नेताओं की यह अपेक्षा है कि सिंधिया उनकी वरिष्ठता को स्वीकार करें। सिंधिया वर्ष 2002 में सक्रिय राजनीति में आए हैं। जबकि उनके मुकाबले में खड़े विरोधी नेता अस्सी के दशक से राजनीति कर रहे हैं। कांग्रेस के नेता यह भी चाहते हैं कि सिंधिया अपने संसदीय क्षेत्र तक सीमित रहे हैं।

दिग्विजय सिंह-कमलनाथ की जोड़ी ग्वालियर संभाग में अपने उन समर्थकों को टिकट दिलाना चाहते हैं पंद्रह साल में जिनकी मैदानी पकड़ कमजोर हो गई है। मध्यप्रदेश की स्क्रीनिंग कमेटी के चेयरमेन मधूसूदन मिस्त्री हैं। मिस्त्री भी सिंधिया द्वारा दिए गए नामों पर क्ैंची चला रहे हैं। सिंधिया को राहुल गांधी का करीबी मानी जाता है। हर चुनावी सभा में वे कमलनाथ से ज्यादा महत्व सिंधिया को दे रहे हैं। सिंधिया सिर्फ 47 साल के हैं।

तेलंगाना में राहुल गांधी का पीएम-सीएम पर हमला, वादा खिलाफी और मिलीभगत का लगाया आरोप.

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राहुल गांधी की फाइल फोटो

तेलंगाना में  शनिवार को कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष राहुल गाँधी ने एक चुनावी सभा को संबोधित करते हुए दिसंबर में होने वाले विधानसभा चुनाव के प्रचार अभियान की शुरुआत की। राहुल गाँधी ने इस दौरान प्रधानमंत्री मोदी और तेलंगाना के कार्यवाहक मुख्यमंत्री के चंद्रशेखर राव पर जमकर हमला बोला। अदिलाबाद जिले के भाइंसा में एक रैली को संबोधित करते हुए राहुल गाँधी ने कहा की ‘ प्रधानमंत्री मोदी और मुख्यमंत्री चंद्रशेखर राव, दोनों ने ही जनता से किये गये वादों को पूरा नही किया। पीएम मोदी देश के युवाओं को रोजगार देने की बात की, किसानों को फसलों के सही दाम देने की बात की, सभी को 15 लाख देने की बात की लेकिन दिया कुछ नही।  मोदी जी ने कहा की में देश का चौकीदार बनना चाहता हूँ लेकिन उन्होंने यह नही बताया की वह किसकी चौकीदारी करेंगे। पीएम मोदी ने गरीबों की नही बल्कि नीरव मोदी, मेहुल चौकसी, विजय माल्या और अनिल अंबानी जैसे अमीरों की चौकीदारी की।’


राफेल के मुद्दे पर पीएम मोदी पर हमला बोलते हुए कांग्रेस अध्यक्ष ने कहा की ‘यूपीए सरकार ने राफेल लड़ाकू हवाई जहाज का कांट्रैक्ट एचएएल को दिया था। मोदी जी प्रधानमंत्री बने और उन्होने राफेल का कांट्रैक्ट एचएएल से छीनकर अपने मित्र अनिल अंबानी को दिया। एचएएल पर एक रुपया कर्जा नहीं है उल्टा सरकार ने एचएएल से 3000 करोड़ रुपया लिया है वहीं अनिल अंबानी पर 45000 करोड़ रुपये का कर्जा है। सदन में मोदी जी ने डेढ़ घंटा भाषण दिया लेकिन अंबानी के बारे में और राफेल के बारे में एक शब्द नहीं कहा।’ 


अपने भाषण के दौरान राहुल गाँधी ने तेलंगाना के कार्यवाहक मुख्यमंत्री चंद्रशेखर राव को भी आड़े हाथों लेते हुए कहा कि ‘तेलंगाना का सीएम बनते ही केसीआर ने भ्रष्‍टाचार शुरू कर दिया। राजीव सागर प्रोजेक्ट, इंदिरा सागर प्रोजेक्ट की असल लागत 2500 करोड़ रुपये थी, इसको मुख्यमंत्री ने बदलकर 12000 करोड़ रुपये कर दिया। जैसे तेलंगाना में केसीआर ने 38000 करोड़ के प्रोजेक्ट को 1 लाख करोड़ में बदला, वैसे ही केन्द्र में मोदी जी ने 526 करोड़ के हवाई जहाज को 1670 करोड़ में खरीदा’ 


राहुल गाँधी ने केसीआर पर भाजपा से मिलीभगत का आरोप लगाते हुए कहा की ‘तेलंगाना में केसीआर भाजपा की मदद कर रही है। केसीआर बीजेपी के हर निर्णय में उनके साथ खड़ी हो जाती है। केसीआर के बाद अब एमआईएम भी नरेन्द्र मोदी की मदद करने में लग गयी है। चाहे वह नोटबंदी का फैसला हो या कोई और यह दोनों ही पार्टी भाजपा के साथ खड़ी दिखाई दी।
अपने भाषण की शुरुआत में राहुल गांधी ने कहा कि ‘आज हम यहाँ आकर कौमाराम भीम जी और डा भीमराव अंबेडकर जी को याद करते हैं। लेकिन पता नहीं क्यों यहाँ के मुख्यमंत्री को अंबेडकर जी का नाम अच्छा नहीं लगता है। तेलंगाना में सिंचाई परियोजना का नाम भीमराव आंबेडकर जी के नाम पर रखा गया था। पर पता नही क्यों आपके मुख्यमंत्री ने उसका नाम बदल दिया। यह आंबेडकर जी का अपमान है।


राहुल गाँधी ने कहा की कांग्रेस पार्टी कभी झूठे वादा नहीं करती है। यूपीए की सरकार ने 10 साल में सबसे ज्यादा लोगों को गरीबी से निकालने का काम किया। किसानों और आदिवासियों का शोषण रोकने के लिए कांग्रेस सरकार ने भूमि अधिग्रहण बिल पेश किया था और यह सुनिश्चित किया गया था कि उन्हें भूमि की बाजार कीमत से चार गुणा ज्यादा दाम मिलें। तेलंगाना की सरकार ने एससी-एसटी को तीन एकड़ भूमि और 12 फीसदी आरक्षण आदिवासियों को देने का वादा किया था लेकिन इस वादे को राज्य सरकार पूरा नहीं कर पाई।’


राहुल गाँधी ने कहा की पांच साल होने वाले हैं तेलंगाना का जो सपना था वो अधूरा है, टूट गया। अगर कांग्रेस पार्टी सत्ता में आती है तो तेलंगाना में बेरोजगार युवाओं को तीन हजार रुपये का बेरोजगारी भत्ता दिलवाएंगे।  केवल कांग्रेस ही तेलंगाना के वादे के पूरा कर सकती है। हर परिवार कर्ज तले दबा है। पिछले चुनाव में आपने केसीआर पर भरोसा किया था। लेकिन अब लोगों को पता चल गया है केसीआर सरकार भ्रष्टाचार में डूबी है।


119 विधानसभा सीटों वाले तेलंगाना में 7 दिसंबर को विधानसभा चुनाव के लिए वोटिंग होगी।

संघ मैदान में आया है तो चुनाव का मुद्दा राम और पाकिस्तान ही होगा

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हिन्दी भाषी तीन राज्यों की चुनाव प्रक्रिया के बीच आए दशहरे के त्यौहार ने इस बात के स्पष्ट संकेत दिए हैं कि मध्यप्रदेश, छत्तीसगढ़ और राजस्थान की भाजपा सरकार को बचाने के लिए राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ के कार्यकर्त्ता राम और पाकिस्तान का अस्त्र लेकर चुनाव मैदान में प्रचार करते नजर आएंगे।

अब तक तीनों राज्यों में सरकार की नाकामी चुनाव का मुद्दा बने हुए हैं। कांग्रेस भाजपा के तीनों मुख्यमंत्रियों पर लगातार हमलावर है। कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी मध्यप्रदेश पर विशेष तौर पर फोकस कर रहे हैं। भाजपा के नेताओं द्वारा राहुल गांधी का बाबा कह कर उठाया जा रहा उपहास पर भी वोटर ताली नहीं बजा रहे हैं। राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ यह महसूस कर रहा है कि इन तीनों राज्यों में भाजपा को अपनी सत्ता बचाने के लिए चुनावी रणनीति में व्यापक बदलाव करना होंगे। 

मोहन भागवत के राम मंत्र को ब्रह्मास्त्र के तौर पर उपयोग करेगी भाजपा 

हिन्दू ग्रंथों और शास्त्रों में ब्रह्मास्त्र का उल्लेख कई स्थानों पर देखने को मिलता है। अर्जुन के पास भी ब्रह्मास्त्र था। उन्होंने इसका उपयोग महाभारत में किया था। भारतीय जनता पार्टी देश की चुनावी राजनीति में राम का उपयोग ब्रह्मास्त्र के तौर पर करती है। राम के नाम का उपयोग वोटों का बंटवारा हिन्दू-मुस्लिम के तौर पर किए जाने के लिए किया जाता है। राम का यह मुद्दा केवल हिन्दीभाषी राज्यों में असर करता दिखाई देता है। दक्षिण भारत में राम का असर राजनीति पर नहीं पड़ता है। उत्तरप्रदेश से लेकर हरियाणा तक के चुनाव में भाजपा के नेताओं ने अपने-अपने तरीके से राम नाम का जप किया था। पाकिस्तान और घुसपैठिया जैसे मुद्दे, वोटों के धुर्वीकरण के लिए उभरे गए।

मध्यप्रदेश,राजस्थान और छत्तीसगढ़ के चुनाव के लिए वोट डाले जाने की तारीख जैसे-जैसे नजदीक आ रही है वैसे-वैसे मुद्दे भी बदलते हुए दिखाई दे रहे हैं। राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ के प्रमुख मोहन भागवत ने दशहरे के मौके पर अपने वार्षिक संबोधन में राम का जिक्र कर भावी चुनावी रणनीति के संकेत दिए हैं। भागवत ने कहा कि अब राम मंदिर निर्माण के लिए केन्द्र सरकार को कानून बनाना चाहिए। अयोध्या की विवादास्पद बाबरी मस्जिद जिस स्थान पर है उसी स्थान पर भगवान श्री राम का जन्म हुआ था, यह दावा विश्व हिन्दू परिषद द्वारा कई शोध के आधार पर लगातार किया जाता रहा है। जमीन के स्वामित्व को लेकर मामला अभी ऊपरी अदालत में चल रहा है। इस पर सुनवाई भी जल्द शुरू होने वाली है। संघ चाहता है कि केन्द्र सरकार कानून बनाकर जमीन के स्वामित्व का मसला हल कर दे। संघ को यह उम्मीद है कि कानून बनने के बाद हिन्दू समुदाय स्वत: इसके पक्ष में खड़ा हो जाएगा। कांग्रेस अथवा अन्य दलों का विरोध भाजपा को लाभ देने वाला होगा।

माना यह जा रहा है कि संघ प्रमुख ने यह बयान देने से पूर्व प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी से विमर्श किया होगा। मोदी के नेतृत्व वाली एनडीए सरकार ने जिस तरह से अदालत के आदेश को दरकिनार कर एट्रोसिटी एक्ट में बदलाव किया है,उससे उच्च वर्ग में भाजपा की स्थिति कमजोर हुई है। भाजपा उच्च वर्ग को वापस अपनी और लाने के लिए मंदिर निर्माण के लिए कानून बनाने का कार्ड खेल रही है। इससे पहले मंदिर निर्माण के मामले में भाजपा अदालत के आदेश का पालन करने की बात करती रही है। राहुल के मंदिर-मंदिर जाने से कमजोर पड़ रहा है.

गुजरात चुनाव के बाद से कांग्रेस की रणनीति में बदलाव ने भी भाजपा और संघ को राम मंदिर को लेकर बैकफुट पर लाकर खड़ा कर दिया है। राहुल गांधी पिछले एक साल से लगातार कांग्रेस की छवि में बदलाव लाने के लिए देश के सभी प्रमुख हिन्दू धर्म स्थानों पर जाकर पूजा-अर्चना कर रहे हैं। पिछले दो दशक में कांग्रेस की छवि अल्पसंख्यकों का पक्ष लेने वाली पार्टी के तौर गहरी हो गई है। भाजपा, कांग्रेस को बहुसंख्यक विरोधी पार्टी के रूप में प्रचारित करती रही है। राहुल गांधी के मंदिर-मंदिर जाने से भाजपा को कांग्रेस के खिलाफ अपनी मुहिम चलाने में भी मुश्किल आ रही है।

गुजरात चुनाव में राहुल की रणनीति का असर देखने को मिला। भाजपा बमुश्किल अपनी सरकार बचा पाई थी। मध्यप्रदेश में भी राहुल गांधी की कोशिश है कि वोटों का धुर्वीकरण धर्म के आधार पर न हो। राहुल गांधी,भाजपा से नाराज उच्च वर्ग को अपने साथ लाने के लिए अल्पसंख्यकों के समर्थन की बात से लगातार बच रहे हैं। वे प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी पर राफेल को लेकर लगातार हमले कर रहे हैं। मध्यप्रदेश में पचास से अधिक ऐसी विधानसभा सीटें हैं जहां वोटों का धुर्वीकरण होने पर कांग्रेस को बड़ा नुकसान उठाना पड़ता है। राम का नाम न होने के कारण भाजपा को ऐसी सीटें बचाना मुश्किल दिखाई दे रहा है।

संघ के जरिए असंतुष्टों को साधना चाहते हैं शिवराज

मध्यप्रदेश के विधानसभा चुनाव से अब तक राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ ने अपने आपको दूर रखा था। हाल ही में भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह ने भोपाल स्थित संघ कार्यालय समिधा में जाकर वहां पदाधिकारियों से मुलाकात की थी। शाह को मध्यप्रदेश के बारे में जो फीडबैक मिला हैं, उसमें जमीनी हालात सरकार बनने लायक नहीं दिखी कार्यकर्त्ता नाराज हैं। उच्च वर्ग सपाक्स की ओर जाता दिखाई दे रहा है। कुछ स्थानों पर तो शाह को भी एट्रोसिटी एक्ट के खिलाफ प्रदर्शन देखना पड़ा है। मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान के चेहरे को लेकर भी जनता में नाराजगी देखने को मिली है। शाह के आग्रह पर संघ राज्य में भाजपा की मदद के लिए तैयार हो गया है। संघ ने जो फीडबैक भाजपा को दिया है, उसमें अस्सी मौजूदा विधायकों को बदलने के लिए कहा गया है। पार्टी उम्मीदवारों के चयन में भी संघ की राय ले रही है। संघ के पदाधिकारी लगातार भाजपा नेताओं के साथ बैठक कर रहे हैं। संघ प्रमुख मोहन भागवत के बयान के बाद संघ के कार्यकर्त्ताओं को राम मंदिर पर काननू की चर्चा के लिए लोगों के बीच भेजा जा रहा है।

दशहरे के बाद जारी होगी कांग्रेस की सूची

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तीन दिवसीय कांग्रेस चुनाव समिति की बैठक दिल्ली में चल रही है। जिसमें मध्यप्रदेश की 230 विधानसभा सीटों में से 71 सीटों पर प्रत्योशियों के सिंगल नाम तय कर लिए गए हैं। जिनकी घोषणा कांग्रेस जल्द ही कर सकती है। दिल्ली स्थित सोनिया गांधी के निवास पर लगातार बैठकों का सिलसिला जारी है। जिसमें राहुल गांधी, मध्यप्रदेश के प्रदेशाध्यक्ष कमलनाथ, चुनाव प्रचार समिति अध्यक्ष सिंधिया, प्रदेश प्रभारी दिपक बावरिया, नेता प्रतिपक्ष अजय सिंह समेंत कई वरिष्ट नेता मौजूद थे।


बैठक के बाद लिस्ट सोशल मीडिया पर वायरल :-
चुनाव समिति की बैठक के बाद देर रात ही सोशल मीडिया पर 230 सीटों पर प्रत्याशियों के नाम वाली एक लिस्ट तेजी से वायरल हो रही है। जिसमें कमलनाथ, अजय सिंह और दिग्विजय के करीबियों के नाम भी शामिल हैं। पर कांग्रेस की तरफ से इसे भाजपा की साजिश बताया जा रहा है। चुनाव प्रचार समिति के अध्यक्ष सिंधिया ने भी इस लिस्ट को गलत बताया है। साथ ही सिधिंया ने अगली बैठक के बाद प्रत्याशियों के नाम की घोषणा करनी की बात कही है।


टिकट वितरण प्रक्रिया :-
टिकटों के लिए बहुत से प्रत्याशियों के नामों की सिफारिशें की गई थी, पर कांग्रेसी नेताओं ने बहुत माथापच्ची करने के बाद सबसे पहले पिछले चुनाव में कम अंतर से हारने वाले नेताओं को टिकट देने की रणनीति बनाई, साथ ही कांग्रेस के बड़े नामी नेताओं जो वर्तमान में विधायक हैं, उनके नामों पर मोहर लगा दिया गया है। बाकि की सीटों पर बाद में निर्णय लिया जाएगा।


बैठकों में दिग्विजय नहीं रहे मौजूद :-
मध्यप्रदेश के टिकट वितरण में सिंधिया और कमलनाथ आगे नजर आ रहे हैं, वहीं पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह टिकटों के वितरण प्रक्रिया से दूर नजर आ रहें हैं। हाल ही में सोशल मीडिया में वायरल वीडियो में दिग्विजय कहते नजर आ रहें है कि, उनके भाषण देने से कांग्रेस के वोट कट जाते है, साथ ही बड़े पदाधिकारियों ने उन्हें जमीनी स्तर पर कार्यकर्ताओं के साथ काम करने की जिम्मेदारी दी है।

कांग्रेस प्रत्याशियों के चयन के लिए आज से CEC की बैठक, मौजूदा विधायकों पर लग सकती है मोहर

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विधानसभा चुनाव के लिए आज कांग्रेस में प्रत्याशियों के नाम पर मुहर लग सकती है। दिल्ली में सेंट्रल इलेक्शन कमेटी के इस बैठक में मध्यप्रदेश, छत्तीसगढ़ और राजस्थान चुनाव के लिए प्रत्याशियों के नाम सुनिश्चित होने हैं। इस बैठक में सोनिया गांधी,राहुल गांधी के अलावा कमलनाथ, सिंधिया, अजय सिंह और दिग्विजय सिंह हिस्सा ले रहे हैं।

आज आ सकती है छत्तीसगढ़ चुनाव के पहले चरण की सूची

चुनाव आयोग ने छतीसगढ़ विधानसभा चुनाव के लिए मंगलवार को अधिसूचना जारी कर दी है। 23 अक्टूबर को नामंकन का आखिरी तारीख तय किया गया है। बता दें कि पहले चरण में बस्तर संभाग की 12 व राजनांदगांव जिले की सभी छह सीटों के लिए चुनाव होने हैं। जिसमें एक तरफ अजीत जोगी (जनता कांग्रेस छत्तीसगढ़), बसपा और सीपीआई गठबंधन है तो दूसरी तरफ राजनांदगांव से खुद मुख्यमंत्री रमन सिंह चुनाव लड़ते आ रहे हैं। वहीं कांग्रेस को भी ऐसे बड़े चेहरे के रूप में प्रत्याशी का चुनाव करना होगा जो अजीत जोगी और रमन सिंह जैसे नेताओं को टक्कर दे सके। बैठक में मौजूदा सिंगल विधायकों पर भी मुहर लगने की सम्भावना ज्यादा है।

मध्यप्रदेश में सपा और गोंडवाना से समझौता की एक और कोशिश

वहीं गठबंधन करने से दुरी बना चुके समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव और गोंडवाना गणतंत्र पार्टी के अध्यक्ष हीरा सिंह से भी मुलाकात होने की सम्भावना है। कहा जा रहा है कि गठबंधन को लेकर एक और कोशिश की जा सकती है।