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जसवंत सिंह के बेटे मानवेंद्र सिंह ने थामा राहुल गाँधी का हाथ,बीजेपी से थे नाराज

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भारतीय जनता पार्टी के संस्थापक सदस्य रहे पूर्व विदेश मंत्री जसवंत सिंह के पूरे परिवार ने बुधवार को कांग्रेस का हाथ थाम लिया है। राजस्थान के मारवाड़ इलाके में प्रभाव रखने वाला जसवंत का परिवार का बीजेपी से अलग होना पार्टी के लिए एक बड़ा झटका माना जा रहा है।

कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी के आवास पर जसवंत सिंह के बेटे मानवेंद्र सिंह पूरे परिवार के साथ पार्टी में शामिल हो गए। मानवेंद्र इस समय बीजेपी से शिव सीट के विधायक हैं। मानवेंद्र के साथ उनकी पत्नी चित्रा सिंह, भूपेन्द्र सिंह और जसवंत सिंह की पत्नी शीतल कवर कांग्रेस की सदस्यता ली। कांग्रेस का दामन थामने के बाद मानवेंद्र सिंह ने पूरे परिवार के साथ अपने आवास पर यज्ञ कराया।

एक ही भूल कमल का फूल:मानवेंद्र सिंह

बाड़मेर के पचपदरा की स्वाभिमान रैली में मानवेंद्र सिंह ने ‘एक ही भूल कमल का फूल’ कहकर बीजेपी छोड़ दी थी। उसके बाद से अटकलें लगाई जा रही थी कि मानवेंद्र सिंह कांग्रेस का दामन थाम सकते हैं, लेकिन अब मानवेंद्र ने साफ कर दिया है कि वो कांग्रेस में शामिल हो रहे हैं। बाड़मेर के कांग्रेसी नेताओं ने भी इसका स्वागत किया है। कांग्रेस के सचिव हरीश चौधरी ने कहा कि उन्होंने मानवेंद्र सिंह का विरोध नहीं किया है। उनके आने से कांग्रेस और मजबूत होगी। राजस्थान में राजपूत बीजेपी के कोर वोट बैंक रहे हैं।

जसवंत सिंह का परिवार बीजेपी से था नाराज

2014 के लोकसभा चुनाव में बीजेपी ने जसवंत सिंह को टिकट नहीं दिया था। इससे उनको निर्दलीय ही चुनाव लड़ना पड़ा था। उस चुनाव में जसवंत सिंह हार गए थे। इसी के बाद से जसवंत सिंह का परिवार बीजेपी से नाराज चल रहा था।

कांग्रेस और बीजेपी दोनों में लगी वोटर बटोरने की होड़

कांग्रेस इस बार कोशिश कर रही है कि नाराज राजपूतों को तोड़ा जाए और कांग्रेस में लाया जाए। हालांकि, बीजेपी कोशिश कर रही है कि राजपूतों का डर दिखाकर कांग्रेस के परंपरागत वोटर जाटों को अपने पक्ष में लाया जाए, लेकिन कांग्रेस अपने जाट नेताओं को भरोसे में लेकर नाराज राजपूतों को रिझाने की कोशिश कर रही है।

यौन शोषण के आरोपों के बाद NSUI के राष्ट्रीय अध्यक्ष फ़िरोज़ खान ने दिया इस्तीफा।

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कांग्रेस की छात्र इकाई (एनएसयूआई) के राष्ट्रीय अध्यक्ष फ़िरोज़ खान ने यौन शौषण के आरोप के बाद दिया इस्तीफा।

Nsui के राष्ट्रीय अध्यक्ष फ़िरोज़ खान ने यौन शोषण के आरोपों के बाद अध्यक्ष पद से इस्तीफा दे दिया है। सूत्रों के अनुसार फ़िरोज़ खान ने सोमवार को अध्यक्ष पद से इस्तीफा दे दिया था, जिसे राहुल गांधी ने आज स्वीकार कर लिया है।

बता दें कि जम्मू कश्मीर के रहने वाले फ़िरोज़ खान पर छत्तीसगढ़ की एक लड़की ने यौन शोषण के आरोप लगाए थे। जिसके बाद पार्टी ने आरोपों की जांच के लिए तीन सदस्य जांच कमेटी गठित की थी। जांच कमेटी की जांच लगभग पूरी हो चुकी है और वह जल्द ही रिपोर्ट जमा कर सकती है।

फ़िरोज़ ने आरोपों से किया किनारा, पार्टी की छवि के खातिर दिया इस्तीफा।

अपने इस्तीफे पर बोलते हुए फ़िरोज़ खान ने कहा कि ‘ मैंने कल एनएसयूआई के अध्यक्ष पद से इस्तीफा दे दिया है। मुझपर लगाए गए सारे आरोप निराधार है। में इन आरोपों के खिलाफ अदालत जाऊंगा। मैंने पार्टी की छवि को ध्यान में रखकर इस्तीफा दिया है।

राहुल गांधी के गुरूद्वारे जाने से क्या ‘सिख दंगे’ का दाग धुल जाएगा ?

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कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी दो दिन के लिए मध्य प्रदेश दौरे पर हैं जहा पर उन्होंने मंदिर, मस्जिद पर मत्था टेकने के बाद ग्वालियर के एक गुरुद्वारे पहुंचे। ये संयोग ही है कि जब भी राहुल गांधी गुरूद्वारे जाते हैं तो सिख दंगे का दाग उनका पीछा करता ही रहता है। यद्यपि राहुल गांधी नें इससे पीछा छुड़ाने के लिए सिख दंगो पर कई बार अपनी सफाई दे चुके हैं।

इंदिरा गांधी की हत्या के बाद हुए थे सिख दंगे

31 अक्टूबर 1984 को तात्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी को उनके ही दो सुरक्षा गार्डों ने गोली मार कर हत्या कर दी थी। ह्त्या के 24 घंटे के भीतर पुरे भारत का इतिहास ही बदला गया। जगह-जगह पर हिंसा की ख़बरें आने लगी। हिंसा की चपेट में सबसे ज्यादा दिल्ली के आसपास इलाकों में करीब 3000 लोग मारे गए थे।

यह दाग बहुत ही गहरे हैं

यद्यपि राहुल गांधी इस बात को लेकर कितना भी इंकार कर दें लेकिन इस सच्चाई को नाकारा नहीं जा सकता। सिख दंगे के दाग से जगदीश टाइटलर और सज्जान कुमार जैसे कितने कांग्रेसी नेताओं का राजनीतिक कैरियर ही समाप्त हो गया। यही वजह है कि 21 साल बाद प्रधानमंत्री के रूप में मनमोहन सिंह ने संसद में माफ़ी मांगते हुए कहा था कि, ‘जो कुछ भी हुआ, उससे उनका सिर शर्म से झुक जाता है।’

कमलनाथ पर भी आरोप

वर्तमान मध्य प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष कमलनाथ पर भी सिख दंगे के आरोप लगते रहते हैं। उनपर आरोप है कि दिल्ली के गुरुद्वारा रकाबगंज में हुई हिंसा में कमलनाथ यदि वहां रक्षा करने पहुंचे थे, तो उन्होंने वहां आग की चपेट में आए सिखों की मदद क्यों नहीं की। वहां पर उनकी मौजदूगी का जिक्र पुलिस रिकॉर्ड में भी है।

दंगों की तपिश आज भी जहन में

सिख दंगे हुए लगभग तीन दशक से ज्यादा हो चुके हैं लेकिन आज भी कई ऐसे सिख परिवार इस दर्दनाक घटना से उबर नहीं पाए हैं। आज भी कई ऐसे परिवार हैं जो दंगे का भयावह तस्वीर याद कर जिसमें अपनों को मरते हुए देखा था वो भुला नहीं पाते। इन दंगों में हजारों लोगों की जानें गई थी और न जाने कितने घरों को जला दिया गया था।

राहुल गांधी काट रहे है मंदिर-मस्जिद और गुरुद्वारे के चक्कर,दूसरी और दिग्विजय ने पार्टी से बनाई दूरियां

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मध्यप्रदेश दौरे के दूसरे दिन कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी मंगलवार को ग्वालियर किले में स्थित गुरुद्वारे में मत्था टेकने पहुंचे। वे यहां करीब 10 मिनट रहे। उन्हें यहां सरोपा भेंट किया गया। उनके साथ कमलनाथ और ज्योतिरादित्य सिंधिया भी पहुंचे। वे मुरैना में शाम को करीब 46 किलोमीटर लंबा रोड शो करेंगे। राहुल ने सोमवार को दतिया में पीताम्बरा पीठ, ग्वालियर के अचलेश्वर मंदिर में पूजा-अर्चना की थी। उन्होंने शाम को यहां की मोती मस्जिद में इबादत भी की थी। राहुल मंगलवार को ही श्योपुर में मेला मैदान पर आम सभा को संबोधित करेंगे।

पीताम्बरा पीठ में राहुल ने पीली धोती पहनकर प्रवेश किया। ग्वालियर के अचलेश्वर मंदिर में भी अभिषेक किया। इसके बाद उन्होंने रोड शो किया। अचलेश्वर मंदिर में अभिषेक के दौरान पंडित ने उन्हें जल से भरा लौटा दिया तो राहुल ने तपाक से कहा- इसमें दूध नहीं है। इसके बाद उसमें दूध डाला गया। पूजा के दौरान पंडित ने राहुल के माथे पर चंदन से त्रिपुंड बनाया। जामा मस्जिद में मसाजिद कमेटी के नाजिम खान ने राहुल को मक्का-मदीना से लाई गई चादर भेंट की। इस दौरान प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष कमलनाथ और सांसद ज्योतिरादित्य सिंधिया उनके साथ थे।

दिग्विजय कांग्रेस की रैलियों में नहीं आएंगे नज़र,नहीं करेंगे कोई प्रचार

मध्यप्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री और कांग्रेस के वरिष्ठ नेता दिग्विजय सिंह पार्टी की किसी भी रैली में ज्यादा नहीं दिखाई देते है। इससे कांग्रेस में गुटबाज़ी साफ़ दिखाई दे रही है। हाल ही में दिग्विजय सिंह का एक वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुआ है। इस वीडियों में वो पार्टी के कार्यकर्ताओं से बात करते नजर आ रहे हैं और साफ तौर पर कह रहे हैं, मेरे भाषणों से कांग्रेस के वोट कटते हैं, इसलिए मैं रैलियों में नहीं जाता।

बताया जा रहा है कि दिग्विजय सिंह का यह वीडियो उस वक्त का है जब वो मध्य प्रदेश कांग्रेस के कार्यकारी अध्यक्ष जीतू पटवारी के सरकारी बंगले पर पहुंचे थे। इसी दौरान उनकी मुलाकात पार्टी के कार्यकर्ताओं से हो गई और दिग्विजय सिंह अपनी व्यथा सुनाने लगे। वीडियो में दिग्विजय सिंह ने साफ़ तौर पर यह भी कहा कि देखते रह जाओगे,ऐसे सरकार नहीं बनेगी। जिसको टिकट मिले, चाहे दुश्मन को टिकट मिले, जिताओ। उन्होंने आगे कहा, मेरा काम सिर्फ एक है- कोई प्रचार नहीं, कोई भाषण नहीं। मेरे भाषण देने से तो कांग्रेस के वोट कटते हैं, इसलिए मैं कहीं जाता ही नहीं। इससे साफ़ दिखता है कि दिग्विजय सिंह पार्टी से कटे-कटे नज़र आ रहे है।

बता दें कि राहुल गांधी हाल ही में भोपाल दौरे पर पहुंचे थे। इस दौरान पार्टी के सभी बड़े नेताओं के पोस्टर मौजूद थे लेकिन दिग्विजय सिंह के पोस्टर नजर नहीं आए। हालांकि इसके लिए प्रदेशाध्यक्ष कमलनाथ ने माफी भी मांगी थी। पार्टी में अपनी स्थिति का एहसास हो जाने के बाद दिग्विजय सिंह ने कार्यकर्ताओं को साफ तौर पर कह दिया है कि पार्टी को जीताने में लग जाओ। इसके साथ ही उन्होंने अपनी स्थित भी साफ कर दी है।

मुख्यमंत्री पद की लड़ाई कहीं मध्यप्रदेश में सत्ता से चूक न जाए कांग्रेस

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मध्यप्रदेश में मुख्यमंत्री के पद को लेकर चल रही खींचतान कांग्रेस कहीं सत्ता में आने से चूक न जाए। कांग्रेस में उठ रहीं इस तरह की आशंकाओं को भारतीय जनता पार्टी के नेता लगातार हवा दे रहे हैं। भारतीय जनता पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह भी अपने मध्यप्रदेश के दौरे में लगातार चेहरे को लेकर हवा दे रहे हैं। कांग्रेस के लिए यह चुनाव करो या मरो का चुनाव है। इस चुनाव कांग्रेस यदि सत्ता बनाने से चूक गई तो स्थितियां उत्तरप्रदेश और बिहार जैसी हो जाएंगीं।

पंद्रह साल की भाजपा सरकार से नाराज है वोटर

राज्य में कांग्रेस अब तक चुनाव कोई ऐसा मुद्दा तैयार नहीं कर पाई है, जिसके नारे के सहारे उसका सत्ता से वनवास समाप्त हो जाए। लगातार पंद्रह साल से विपक्ष में बैठी कांग्रेस जमीनी स्तर पर अपनी पकड़ कमजोर कर चुकी है। पिछले दो विधानसभा चुनाव में नेतृत्व को लेकर जो प्रयोग कांग्रेस पार्टी द्वारा किए गए थे, वे असफल साबित हुए हैं। वर्ष 2008 में पार्टी ने सुरेश पचौरी के नेतृत्व में चुनाव लड़ा था। इस चुनाव में कांग्रेस की सत्ता में वापसी की सबसे ज्यादा संभावनाएं थीं। पांच साल की अवधि में शिवराज सिंह चौहान भारतीय जनता पार्टी के तीसरे मुख्यमंत्री थे। पार्टी में चौहान का नेतृत्व स्वीकार करने वाले लोगों की भी कमी थी।

कांग्रेस की रणनीतिक कमजोरी ने उसे सत्ता से वंचित कर दिया था। वर्ष 2013 के विधानसभा चुनाव में कांग्रेस ने कांतिलाल भूरिया के जरिए आदिवासी कार्ड खेल था। पार्टी को इस कार्ड से आदिवासी क्षेत्रों में ही सफलता नहीं मिली। पिछले विधानसभा चुनाव में भी पार्टी के बड़े नेताओं के बीच निपटाओ का भाव उसी तरह देखने को मिला था, जिस तरह वर्ष 2003 के विधानसभा चुनाव में मिला था। लोकसभा चुनाव में केन्द्र की सरकार जाने के बाद अरूण यादव को प्रदेश कांग्रेस का नेतृत्व सौंपा गया था। तीन साल से भी अधिक समय तक अध्यक्ष रहने के बाद भी वे अपना और पार्टी का जनाधार मजबूत नहीं कर पाए थे। पार्टी ने उन्हें हटाए जाने के फैसले में भी काफी देरी कर दी थी। उनके स्थान पर अध्यक्ष बनाए गए कमलनाथ राज्य की राजनीति के तौर-तरीके से भी परिचित नहीं है।

उनके व्यवहार को लेकर कांग्रेस के कार्यकर्त्ताओं की यह शिकायत हमेशा रहते है कि वे इस तरह पेश आते हैं जैसे कि केन्द्रीय मंत्री अथवा मुख्यमंत्री हैं। कमलनाथ ने राज्य में अपनी भूमिका को किंग मेकर की तरह पेश किया था। पहली बार वे किंग बनने के लिए उतावले दिखाई दे रहे हैं। सत्तर की उम्र पार कर चुके कमलनाथ का राज्य की राजनीति में नोसिखियापन कई मौकों पर देखने को मिला। मीडिया विभाग में परिवर्तन से लेकर उनके चुनावी मुद्दे तक में इस नौसिखिएपन को समझा जा सकता है। कमलनाथ छिंदवाड़ा के विकास मॉडल से राज्य की पंद्रह साल पुरानी भाजपा सरकार को उखाडना चाहते हैं। छिंदवाड़ा के विकास मॉडल को उभारने के पीछे उनकी सोच पार्टी में मुख्यमंत्री पद के दावेदार दूसरे नेताओं को पीछे करने की है।

कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी की सार्वजनिक मंचों से दी गई नसीहतों के बाद भी कमलनाथ, ज्योतिरादित्य सिंधिया से तालमेल नहीं बैठा पा रहे हैं। राहुल गांधी ने मध्यप्रदेश में चुनाव जीतने की जो रणनीति बनाई है उसमें सिर्फ दो ही चेहरों को केन्द्र में रखा गया है। कमलनाथ और ज्योतिरादित्य सिंधिया। राज्य में भारतीय जनता पार्टी की पंद्रह साल की सरकार को लेकर लोगों में नाराजगी साफ दिखाई दे रही है। कांग्रेस इस नाराजगी को अपने पक्ष में मोड़ने का कोई रास्ता हीं ढूंढ पाई है।

सपाक्स और जयस भी बन सकते हैं राह में रोड़ा

कांग्रेस की राह में बड़ी रूकावट सपाक्स और जयस उभर कर सामने आ रही है। दोनों ही वर्ग विशेष की राजनीति कर रहे हैं। सपाक्स संगठन विशेष रूप से ठाकुर, ब्राह्मण एवं वैश्य वर्ग के वोटों की राजनीति कर रहा है। जबकि जयस संगठन आदिवासी वर्ग पर आधारित है। वैसे तो आदिवासी कांग्रेस का प्रतिबद्ध वोटर माना जाता है लेकिन , पिछले दो चुनावों से इसकी कांग्रेस से दूरी साफ दिखाई दे रही है। इस दूरी के अलग-अलग क्षेत्रों में अलग-अलग कारण हैं। गोंडवाना गणतंत्र पार्टी जबलपुर संभाग की कुछ विधानसभा सीटों तक प्रभाव रखती है। इससे मिलने वाले कांग्रेस को नुकसान पहुंचाने के लिए पर्याप्त माने जाते हैं।

जयस चुनाव मैदान में कहां और कितने उम्मीदवार उतारता है यह अभी कहना मुश्किल है। सपाक्स जरूर यह दावा कर रहा है कि वह राज्य की सभी 230 सीटों पर उम्मीदवार उतारेगा। स्वभाविक है कि अनुसूचित जाति, जनजाति वर्ग के लिए आरक्षित सीटें भी इसमें शामिल हैं। इन आरक्षित सीटों पर संबंधित वर्ग के ही लोगों को उम्मीदवार बनाना होगा। ऐसा होने पर सपाक्स के मूल उद्देश्य पर ही स्वभाविक तौर पर सवाल खड़े हांगे। सपाक्स का जन्म आरक्षण विरोध से हुआ है। सामान्य वर्ग के वोटर के बारे में यह माना जाता है कि वह भाजपा का प्रतिबद्ध वोटर है।

सपाक्स के मैदान में होने से नुकसान भाजपा को होगा ऐसा माना जाना स्वभाविक है। यह वोटर भी चुनाव के वक्त विभाजित होगा। इसका फायदा कितना कांग्रेस को मिलेगा यह कहना मुश्किल है। कांग्रेस वर्तमान राजनीतिक हालात अपने अनुकूल मान रही है। यही वजह है कि पार्टी में अभी से नेता एक-दूसरे के समर्थकों के टिकट कटवाने में लगे हुए हैं। कहा यह जा रहा है कि कांग्रेस के सारे नेता मिलकर सिंधिया की राह को रोकना चाहते हैं। राज्य में एक मात्र सिंधिया का चेहरा ही ऐसा है,जिस पर कोई दाग नहीं है। वोटर के बीच भी लोकप्रिय है।

मध्यप्रदेश के दौरे पर राहुल गाँधी, पीतांबरा देवी शक्तिपीठ पर की पूजा, मोदी सरकार पर बोला हमला.

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कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गाँधी अपने दो- दिन के मध्यप्रदेश दौरे के अंतर्गत आज ग्वालियर पहुंचे. जहां उन्होंने सबसे पहले मां पीतांबरा देवी के दर्शन किये और पूजा-अर्चना की. राहुल गाँधी के साथ मंदिर में कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष कमलनाथ और संसद ज्योतिरादित्य सिंधिया भी मौजूद रहे. राहुल गाँधी अगले दो दिन संसद ज्योतिरादित्य सिंधिया के प्रभाव वाले ग्वालियर संभाग में रोड शो और जनसभाओं को संबोधित करेंगे.
राहुल गाँधी का यह दौरा विधानसभा चुनाव के नजरिये से काफी महत्वपूर्ण है. ग्वालियर संभाग में मध्यप्रदेश विधानसभा की तकरीबन 34 विधानसभा आती है. 2013 के चुनाव में भाजपा ने यहां 20 सीटों पर जीत दर्ज की थी. ऐसे में अगर कांग्रेस को मध्यप्रदेश की सत्ता में वापिस आना है तो उसे ग्वालियर संभाग में अपनी सीटें बड़ानी होंगी.

दतिया में राहुल गांधी की जनसभा, मोदी सरकार पर बोला हमला

पीतांबरा देवी शक्तिपीठ में पूजा अर्चना करने के बाद राहुल गाँधी ने दतिया पहुंचकर जनसभा को संबोधित किया. मोदी सरकार पर हमला बोलते हुए राहुल गाँधी ने कहा की ‘जब केंद्र में कांग्रेस की सरकार थी तो हमने किसानों का कर्जा माफ़ किया था लेकिन मोदी जी किसानों की अनदेखी कर सिर्फ उद्योगपतियों का कर्जा माफ कर रहे है’ प्रधानमंत्री मोदी से हुई एक मुलाकात का जिक्र करते हुए राहुल गांधी ने कहा कि ‘मैं किसानों की बात करने पीएम ऑफिस गया था। मैंने उनसे कहा कि आप बड़े उद्योगपतियों का कर्जा माफ कर रहे हैं तो आप किसानों का कर्जा भी माफ कर दीजिए. जिसपर उन्होंने एक शब्द भी नहीं बोला।’
कर्जमाफी के बाद राहुल गांधी ने राफेल  मुद्दा उठाते हुए कहा की ‘अम्बानी की कंपनी के पास ना तो लड़ाकू विमान बनाने का अनुभव है और ना ही क्षमता है, ऐसे में प्रधानमंत्री मोदी ने अम्बानी की कंपनी को राफेल विमान बनाने का कॉन्ट्रैक्ट क्यों दिया ? सरकार दलील देती है की HAL के पास राफेल बनाने की क्षमता नही है, में पूछना चाहता हूँ की जिसको आपने कांटेक्ट दिया उसके पास क्या राफेल बनाने की क्षमता है ?
राहुल गाँधी ने आगे कहा की प्रधानमंत्री मोदी जिस तरह किसानों के मुद्दे पर चुप थे उसी तरह वह आज राफेल के मुद्दे पर चुप है.

सरकार आने पर किसानो का कर्ज करेंगा माफ, युवाओं को देंगे रोजगार: राहुल गांधी

मोदी सरकार पर हमले के बाद राहुल गाँधी ने कहा की कांग्रेस की सरकार आने बाद फौरन किसानों का कर्जा माफ़ किया जाएगा. युवाओं को रोजगार देने के किये हमारे मुख्यमंत्री 18-18 घंटों तक काम करेंगे. राहुल गाँधी ने आगे कहा की में आपसे झूठे जाड़े नही करूंगा. में आपसे नही कहूँगा की में आपके खाते में 15-15 लाख डलवा दूंगा. में जो बोलूँगा वो करके दिखाऊंगा. सरकार आने पर हम हर जिले में फूड प्रोसेसिंग यूनिट लगाएंगे जिससे किसान सीधे अपने फसलों को बेच सकेंगे.

राहुल गाँधी ने दतिया मे सभा को संबोधित करते हुए कहा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने गरीबों का अपमान किया

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कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी 2 दिन के चुनावी दौरे के लिए सोमवार को ग्वालियर पहुंच चुके हैं। राहुल गांधी ने अपने दौरे की शुरुआत मां पीतांबरा देवी के दर्शन से की। शक्तिपीठ में उन्होंने पूजा-अर्चना की,जहाँ उनके साथ मंदिर में सांसद ज्योतिरादित्य सिंधिया और कमलनाथ भी मौजूद हैं।

राहुल अगले दो दिनों तक मध्य प्रदेश में मुख्यमंत्री पद की दौड़ में शामिल पूर्व केंद्रीय मंत्री और सांसद ज्योतिरादित्य सिंधिया के प्रभाव वाले इलाकों में रोड शो और रैली के जरिए चुनाव प्रचार करेंगे। वहीं सोमवार शाम राहुल गांधी ग्वालियर में रोड शो करेंगे। इस दौरान वह एक दरगाह में जियारत भी करेंगे।

मध्य प्रदेश के ग्वालियर क्षेत्र में विधानसभा की कुल 34 सीटें हैं। साल 2013 के चुनाव में बीजेपी ने इन 34 सीटों में से 20 सीटों पर कब्जा जमाया था। इससे साफ है कि मध्य प्रदेश में सत्ता में वापसी का सपना देख रही कांग्रेस को इस इलाके में इस बार बेहतरीन प्रदर्शन करना होगा जिसके लिए पार्टी राहुल गांधी को मैदान में उतारकर उसी की तैयारी कर रही है।

लाइव अपडेट्स

-प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने किसानों का अपमान किया :राहुल गाँधी

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने उद्योगपतियों को लाभ पहुँचाया :राहुल गाँधी

प्रधानमंत्री मोदी ने किसानों का कर्ज माफ़ नहीं किया:राहुल गाँधी

कांग्रेस की सरकार ने किसानों का क़र्ज़ माफ़ किया है: राहुल गाँधी

राफेल डील : राहुल गाँधी पहुंचे HAL दफ्तर,बेंगलुरु में कर्मचारियों से करेंगे मुलाकात

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कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी राफेल पर छिड़ी राजनीतिक जंग को लगातार हवा दे रहे हैं। इस कड़ी में राहुल गांधी शनिवार को बेंगलुरु पहुंचे हैं जहाँ वे हिन्दुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड (HAL) के मुख्यालय के सामने प्रदर्शन करेंगे। राहुल गांधी ने ट्वीट कर कहा है कि हिन्दुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड भारत की सामरिक संपत्ति है, इस संस्थान से राफेल बनाने का ऑर्डर छीनकर इसे बर्बाद करने की कोशिश की गई है।

राहुल गांधी ने ट्वीट किया, ‘एचएएल भारत की सामरिक संपत्ति है, हिन्दुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड से राफेल का ऑर्डर छीनकर और इसे अनिल अंबानी को गिफ्ट कर भारत के एयरोस्पेस इंडस्ट्री के भविष्य को बर्बाद कर दिया गया है।’ राहुल ने लिखा, “आगे आइए भारत की रक्षा करने वालों की प्रतिष्ठा की रक्षा करिए, मैं एचएएल के कर्मचारियों के साथ खड़ा होने के लिए बेंगलुरु में हूं। मेरे साथ एचएएल मुख्यालय के सामने आइए।”

कर्नाटक कांग्रेस के प्रवक्ता रवि गौड़ा ने कहा कि राहुल जानना चाहते हैं कि इस सौदे के हाथ से जाने के बाद एचएएल के कर्मचारी कैसा महसूस करते हैं। राहुल गांधी यहां पर एचएएल के कुछ कर्मचारियों से भी मुलाकात कर सकते हैं। हालांकि एचएएल की ओर से अपने स्टाफ को सलाह दी गई है कि नौकरी की सेवा शर्तों के मुताबिक वे राहुल गांधी से मुलाकात नहीं करें। फिर भी कुछ कर्मचारी और एचएएल के रिटायर्ड स्टाफ राहुल गांधी से मुलाकात कर सकते हैं।

श्योपुर में एकता परिषद और सबलगढ़ में रामनिवास रावत का हो रहा है विरोध

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श्योपुर जिले की विजयपुर सीट पर कांग्रेस और एकता परिषद के बीच हुए समझौते के बाद आदिवासियों को दो गुटों में बांटने की कवायद तेज हो गई है। श्योपुर जिले में एक नया आदिवासी संगठन सहरिया विकास परिषद ने एकता परिषद के उम्मीदवार के बहिष्कार की घोषणा कर दी है। सबलगढ़ में भी कांग्रेस विधायक रामनिवास रावत को बाहरी बताकर कांग्रेस में ही उनका विरोध तेज हो गया है। कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी की यात्रा की तैयारियों के लिए सबलगढ़ गए सांसद ज्योतिरादित्य सिंधिया के सामने कोंग्रेसियों ने रावत के खिलाफ नारेबाजी की।

सहरिया विकास परिषद उतारेगा श्योपुर जिले में अपने उम्मीदवार

श्योपुर जिला सहरिया आदिवासी बाहुल्य जिला है। एकता परिषद का इन आदिवासियों पर खासा प्रभाव है। एकता परिषद ने अपने दिल्ली मार्च के दौरान कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी से विजयपुर की सीट पर आदिवासी को कांग्रेस का टिकट देने का सुझाव रखा था। राहुल गांधी ने उम्मीदवार का नाम तय करने की जिम्मेदारी एकता परिषद के नेताओं पर डाल दी। एकता परिषद जिला पंचायत सदस्य गोपाल डी भास्कर का नाम आगे बढ़ाया है। विजयपुर से कांग्रेस विधायक रामनिवास रावत विधायक हैं उन्हें मुरैना जिले की सबलगढ़ सीट पर भेजा जा रहा है। सहरिया आदिवासी विकास परिषद भी जिले में आदिवासियों के बीच सक्रिय है।

सहरिया विकास परिषद, एकता परिषद के नेताओं पर भाजपा से हाथ मिलने का आरोप लंबे समय से लगा रही है। पिछले दो चुनाव में एकता परिषद ने भाजपा का खुलकर समर्थन किया था। इस चुनाव में वह कांग्रेस के साथ जा रही है। सहरिया विकास परिषद ने शुक्रवार को कराहल के झरेर गांव में बीस गांव के आदिवासियों की पंचायत बुलाई थी। इस पंचायत में एकता परिषद और भाजपा के उम्मीदवार के बहिष्कार का एलान किया गया। जिले में आदिवासियों के दो धड़े में बंट जाने की स्थिति में यहां चुनावी गणित बुरी तरह गड़बड़ा सकते हैं।

बाहरी के नाम पर सबलगढ़ में रामनिवास रावत का विरोध

एकता परिषद से हुए समझौते के तहत विजयपुर के विधायक रामनिवास रावत को मुरैना जिले की सबलगढ़ विधानसभा सीट से टिकट दिया जा रहा है। कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी की पहल पर रावत को सबलगढ़ भेजने के फैसले पर राज्य कांग्रेस के सभी बड़े नेताओं ने अपनी सहमति भी दे दी है। रामनिवास रावत,सिंधिया के करीबी विधायक हैं। सिंधिया शुक्रवार को रावत को लेकर सबलगढ़ भी पहुंचे थे। सिंधिया की सबलगढ़ यात्रा कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी की श्योपुर यात्रा की तैयारियों से संबधित थी। सबलगढ़ में सिंधिया के स्वागत के दौरान कांग्रेसी नेताओं ने रावत का विरोध करते हुए नारेबाजी भी की। कांग्रेसी स्थानीय नेता को टिकट देने की मांग कर रहे थे।

एकता परिषद को मनाने राहुल गांधी ने कुर्बान की मध्यप्रदेश की एक सीट

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6 अक्टूबर को एकता परिषद के दिल्ली मार्च में कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने हिस्सा लिया था। कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी को इस मंच तक पहुंचने के लिए अपने एक विधायक रामनिवास रावत की सीट बदलना पड़ रही है। रामनिवास रावत मध्यप्रदेश कांग्रेस के वरिष्ठ विधायक हैं। वे पिछले 28 साल से इस क्षेत्र में चुनाव लड़ रहे हैं। रामनिवास रावत का निर्वाचन क्षेत्र श्योपुर जिले की विजयपुर विधानसभा सीट है। श्योपुर जिला राजस्थान की सीमा से लगा हुआ है। श्योपुर जिले में सहरिया आदिवासी वोट निर्णायक माने जाते हैं। इस आदिवासी वोट बैंक पर एकता परिषद का गहरा प्रभाव है। आदिवासी उसे ही वोट देते हैं जिसे देने का निर्णय एकता परिषद के नेता करते हैं।

आदिवासी वोट कांग्रेस को दिलाने के बदले में एकता परिषद के नेताओं ने विजयपुर की सीट उनके उम्मीदवार को देने की मांग राहुल गांधी के समक्ष रखी थी। राहुल गांधी ने इस मांग को तत्काल मंजूर भी कर लिया। बताया जाता है कि उन्होंने प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष कमलनाथ को कहा था कि रामनिवास रावत को किसी ओर सीट पर चुनाव लड़ने के लिए भेज दिया जाए। रामनिवास रावत को दो विकल्प कमलनाथ की ओर से दिए गए थे। पहला श्योपुर और दूसरा सबलगढ़ विधानसभा सीट का विकल्प दिया गया था। सबलगढ़ सीट मुरैना जिले में आती है। बताया जाता है कि रामनिवास रावत ने पहले श्योपुर विधानसभा सीट से चुनाव लड़ने का मन बनाया था। लेकिन, कांग्रेस नेता तुलसीनारायण मीणा के बसपा में शामिल होने के बाद उन्होंने अपना ध्यान सबलगढ़ पर केंद्रित कर दिया है।

सबलगढ़ मुरैना जिले में आता है। यह क्षेत्र रावत बाहुल्य क्षेत्र है। पिछले चुनाव में इस सीट पर भाजपा के मेहरबान सिंह रावत चुनाव जीते थे। मेहरबान सिंह रावत की टिकट कटने की चर्चाएं भी भाजपा में चल रहीं हैं। रामनिवास रावत को यदि कांग्रेस सबलगढ़ से उम्मीदवार बनाती है तो भाजपा को मजबूरी में मेहरबान सिंह रावत को उम्मीदवार बनाना होगा। रामनिवास रावत की सीट विजयपुर से जिला पंचायत के सदस्य गोपाल भास्कर का नाम कांग्रेस के टिकट के लिए एकता परिषद ने कांग्रेस अध्यक्ष को सुझाया है।

रामनिवास रावत कांग्रेस सांसद ज्योतिरादित्य सिंधिया के करीबी हैं। वे प्रदेश कांग्रेस कमेटी के कार्यवाहक अध्यक्ष भी हैं। श्री रावत ने वर्ष 1990 में विजयपुर से पहली बार चुनाव लड़ा था। वे वर्ष 2003 का विधानसभा चुनाव हार गए थे। पिछले दो चुनाव से उनकी जीत का अंतर लगातार कम हो रहा है। इसकी वजह एकता परिषद का झुकाव भाजपा की ओर रहा है। एकता परिषद पिछले दो चुनाव से इस क्षेत्र में भाजपा का समर्थन करती आ रही है। कोलारस विधानसभा के उप चुनाव के दौरान एकता परिषद और कांग्रेस नेता ज्योतिरादित्य सिंधिया करीब आए थे। राहुल गांधी की एकता परिषद के नेताओं से मुलाकात में भी सिंधिया की भूमिका काफी महत्वपूर्ण रही थी।