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#MeToo पर राहुल गाँधी ने कहा महिलाओं के साथ सम्मान से पेश आना सीखना चाहिए

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कांग्रेेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने शारीरिक उत्पीड़न पर अपनी बात कहने वाले महिलाओं के विश्व व्यापी अभियान “मी टू्” का समर्थन करते हुए कहा है कि अब समय आ गया है कि हर किसी को महिलाओं के साथ सम्मान के पेश आने की बात सीखनी है। श्री गांधी ने शुक्रवार को एक ट्वीट कर कहा“मुझे इस बात की खुशी है कि जिन महिलाओं को अपनी बात कहने का कोई मौका नहीं मिल रहा था अथवा मीडिया में उन्हें जगह नहीं मिल रही थी , अब यह अंतर कम हो रहा है। परिवर्तन लाने के लिए सच को जोर से तथा स्पष्टता से सुना जाना चाहिए।”

मी टू के तहत एमजे अकबर पर लगे आरोप

गौरतलब है कि विदेशों में महिलाओं ने इस अभियान के जरिए अपने साथ हुए शारीरिक उत्पीड़न की बातें खुलकर की है अौर यह लहर भारत में भी आ गई है जहां अनेक महिलाओं ने अपने साथ हुई शारीरिक ज्यादतियों को उजागर किया है। देश में अनेक महिलाओं ने इस मुहिम का हिस्सा बनकर अपनी अापबीती जाहिर की और इसकी चपेट में विदेश राज्य मंत्री और पूर्व संपादक एमजे अकबर भी आए हैं जिन पर कईं महिला पत्रकारों ने आपत्तिजनक हरकतें करने का आरोप लगाया है ।

एक महिला पत्रकार ने ट्वीट कर विदेश राज्य मंत्री और पूर्व संपादक एमजे अकबर पर आरोप लगाते हुुए कहा कि अकबर जब संपादक थे तब होटल रूम में इंटरव्यू के दौरान कई महिला पत्रकारों के साथ आपत्तिजनक हरकतें कर चुके हैं।

देश के PM भ्रष्ट हैं, अंबानी के प्रधानमंत्री है,जबाब नहीं दे सकते तो इस्तीफा दें मोदी:राहुल गाँधी

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राफेल सौदे को लेकर फ्रांस की और से नये खुलासे के बाद कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने एक बार फिर से राफेल मामले पर मोदी सरकार को घेरने की कोशिश की है। राहुल गाँधी ने गुरुवार को प्रेस कांफ्रेंस कर कहा कि पता नहीं कि फ्रांस में क्या इमरजेंसी है कि रक्षामंत्री सीतारमण को तुरंत फ्रांस जाना पड़ता है। राहुल गांधी ने कहा कि अंबानी के प्रधानमंत्री ने अनिल अंबानी के जेब में करोड़ों रुपये डाले है।

कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा कि फ्रांस्वा ओलांद के बाद अब अधिकारी का बयान आ गया है कि डील के लिए अनिल अंबानी की रिलायंस को जोड़ना पड़ा। उन्होंने कहा कि अनिल अंबानी के चौकीदार हैं प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी। यह पूरी तरह से भ्रष्टाचार का मामला है और भारत के प्रधानमंत्री भ्रष्ट हैं।

राहुल गांधी ने कहा कि ऐसे आरोप लग रहे हैं कि भारत के प्रधानमत्री भ्रष्ट हैं तो इस पर पीएम को जवाब देना चाहिए। अगर वे जबाब नहीं दे पा रहे हैं तो उन्हें इस्तीफा देना चाहिए।

70 सालों से हम जातिवाद, धर्मवाद के जाल में फंसे हैं, अब तो राष्ट्रवाद की तरफ बढ़ें: हीरालाल त्रिवेदी

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सामान्य, अन्य पिछड़ा वर्ग, अल्पसंख्यक कल्याण समाज संघ (सपाक्स) के संरक्षक एवं पूर्व आईएएस अधिकारी हीरालाल त्रिवेदी कहते हैं कि हम आजादी के इतने वर्षों के बाद भी जातिवाद, धर्मवाद, क्षेत्रवाद, संप्रदायवाद के जाल में ही फंसे हैं। अब समय है राष्ट्रवाद की तरफ बढ़ने का, लेकिन हमारे देश की राजनीति ने ऐसा मकड़जाल बिछा रखा है, जिसमें हर कोई उलझा हुआ है। हीरालाल त्रिवेदी कहते हैं कि राजनीति में उनकी कोई दिलचस्पी नहीं है, लेकिन कीचड़ को साफ करने के लिए कीचड़ में उतरना ही पड़ता है। पावर गैलरी ने उनसे कई मुद्दों पर चर्चा की। पेश है चर्चा के मुख्य अंश…

सपाक्स ने विधानसभा चुनाव लड़ने की घोषणा की थी। चुनावी तैयारियों को किस तरह से अंजाम दे रहे हैं?


जबाव : देखिए, सपाक्स ने मध्यप्रदेश की सभी 230 विधानसभा क्षेत्रों से चुनाव लड़ने की घोषणा की थी और हम अपनी घोषणा पर कायम भी रहेंगे। चुनावी तैयारियों से पहले सपाक्स की जिला इकाइयों का गठन किया गया है। लगभग सभी जिलों में सपाक्स संगठन की कार्यकारिणी बन गई है। कुछ जगह तेजी से काम भी चल रहा है। हमारे साथ सभी समाज के लोग आ रहे हैं। इसके बाद हम पॉलिटिकल पार्टी के रूप में काम शुरू करेंगे।

क्या सपाक्स को चुनाव आयोग ने राजनीतिक दल की मान्यता दे दी है?


जबाव : सपाक्स द्वारा चुनाव आयोग में पंजीयन प्रक्रिया का आवेदन दिया है, जो प्रक्रियाधीन है। अब हमने चुनाव आयोग में चुनाव-चिन्ह आंवटन का आवेदन भी दिया है। उम्मीद है कि चुनाव से पहले हमें मान्यता और चुनाव चिन्ह दोनों मिल मिल जाएंगे। इसके बाद सपाक्स चुनाव मैदान में उतरेगा।

सपाक्स किन मुद्दों को लेकर चुनाव मैदान में उतरेगा?


जबाव : मुख्य रूप से हमारे दो मुद्दे हैं- एक एट्रोसिटी एक्ट और दूसरा आरक्षण। एट्रोसिटी एक्ट में वर्तमान सरकार ने वर्ष 2016 में 22 ऐसे छोटे-मोटे अपराध जोड़ दिए हैं, जिससे लोगों की रोजमर्रा की जिंदगी प्रभावित हो रही है। इसमें कई ऐसे छोटे-मोटे अपराध हैं जैसे, किसी जाति विशेष का नाम ले लेना, प्रताड़ित करना या अधिकारी कर्मचारी को नोटिस देता है तो कुछ विशेष शब्द बोल देने से अपराध बन जाते हैं और उसमें जमानत नहीं होती है। सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में गाइड लाइन दी है। लेकिन अब उस कानून को ऐसे बना दिया है, जिससे इन छोटे-मोटे अपराध को करने वाले इस देश के सामान्य, अल्पसंख्यक, अन्य पिछड़ा वर्ग के लोग बड़े हिंसक हों, आतंकवादी हों। यदि वे किसी जाति विशेष का नाम ले भी लें तो उनको अंदर करना है। अब जब ऐसी सोच रखने वाले राजनीतिक दल और जनप्रतिनिधि हैं, तो हमारे पास कोई विकल्प भी नहीं है, इसलिए हम लोग चुनाव में जाएंगे इन मुद्दों को लेकर। इसी तरह आरक्षण का मुद्दा है। यदि एक बार किसी को आरक्षण मिल गया तो उसकी पीढिय़ां उस आरक्षण का लाभ लेती रहती हैं। वर्तमान में भी यही स्थिति है। एक व्यक्ति को दो-दो बार आरक्षण मिल रहा है। एक तो वह नौकरी में भी आरक्षण लेकर आ रहा है और फिर प्रमोशन भी उसको आरक्षण का लाभ मिल रहा है। मध्यप्रदेश में तो यह स्थिति हो गई है कि जन्म से लेकर मरने तक लोगों को आरक्षण का लाभ मिल रहा है। सरकार ने सभी जातियों को अलग-अलग खंडों में बांट दिया है।

क्या आपको लगता है कि हिन्दू ही हिन्दू का दुश्मन बन रहा है?


जबाव : बिल्कुल सरकारों ने सभी जातियों को आपस में लड़वाने का काम किया है। यही कारण है कि हम लोग एक-दूसरे के दुश्मन बन रहे हैं। स्थिति यह है कि यदि कोई व्यक्ति सामान्य, ओबीसी या अल्पसंख्यक है तो उसको इतने पैसे मिलेंगे और यदि कोई व्यक्ति आरक्षित वर्ग का है तो उसको इतने पैसे मिलेंगे। हमारे यहां पर भाजपा यह दावा करती है वह हिन्दूवादी पार्टी है, कांगेस का दावा है कि वह अल्पसंख्यक और आरक्षित वर्ग के साथ है, बसपा केवल आरक्षित वर्ग की बात करती है। हम हर वर्ग की बात करते हैं। हम समाज में सदभाव लाने की बात करते हैं। जब हमारे संविधान में लिखा है कि जाति, धर्म, लिंग, संप्रदायवाद, भाषा, क्षेत्रवाद इनमें कहीं भेद नहीं करना चाहिए तो यह भेदभाव क्यों किया जा रहा है, इसे नहीं होना चाहिए। कानून, नियम ऐसे बनाओ कि यह भेद उसमें क्रिएट ही न हो, लोगों के मन में ऐसी भावनाएं ही नहीं पनपे। सरकार खुद कानून और नियम बनाकर भावनाएं पनपा रही है तो समाज कहां जाएगा।


क्या अब देश और प्रदेश में एक देश-एक आरक्षण की बात नहीं होनी चाहिए?


जबाव : बिल्कुल होनी चाहिए। यदि आरक्षण आर्थिक आधार पर लागू हो जाए तो यह व्यवस्था हो सकती है।

आपने लंबा समय प्रशासनिक सेवा में भी बिताया है और अब राजनीतिक की तरफ बढ़े हैं?


जबाव : देखिए, हमने तो कुछ मुद्दों को लेकर एक सामाजिक संगठन खड़ा किया है। हमारी राजनीति में कोई रूचि नहीं है, राजनीति में जाने में भी कोई रूचि नहीं है। लेकिन हो यह गया कि कीचड़ को साफ करने के लिए कीचड़ में उतरना होगा, गंदी नाली को साफ करना है तो गंदी नाली में उतरना पड़ेगा। हमारी राजनीति में आजकल झूठ बोलना अफवाहे फैलाना, भाई को भाई से लड़ाना, जाति के आधार पर लड़ाना, धर्म के आधार पर लड़ाना। यही सब हो रहा है। मुद्दों को लेकर कोई काम नहीं कर रहा है, लेकिन हम मुद्दों को लेकर राजनीतिक करना चाहते हैं। हम अच्छे लोगों को राजनीति में लाना चाहते हैं और यह चाहते हैं कि जो लोग आए कम से कम वे इन चीजों से ऊपर उठें।

इस समय सवर्ण समाज सरकार का विरोध कर रहा है। क्या यह विरोध जायज है?


जबाव : देखिए, सपाक्स कोई विरोध नहीं कर रहा है। यह विरोध तो स्वत: ही हो रहा है। किसी भी जाति का नाम लेना या आप ऐसे कोई शब्द बोल दो जो गांधीजी ने दिए थे, ऐसे कैसे कानून बना सकते हो, ऐसे कैसे ऊपर से थोप सकते हो। आरक्षित समाज के किसी भी व्यक्ति ने 2016 में यह मांग नहीं कि हमें ऐसे कानून चाहिए। जनता के पास से ऐसी कोई मांग नहीं आई। केवल रामविलास पासवान और उनकी पार्टी, उनके सुझाव उसके हिसाब से कानून बन जाता है, नियम बन जाता है और देश एक तरफ रह जाता है।

देश में जातिवाद, धर्मवाद हावी है, लेकिन राष्ट्रवाद को सब भूल रहे हैं, क्यों?


जबाव : इस देश के लोग आजादी के इतने वर्षों के बाद भी जातिवाद, धर्मवाद, क्षेत्रवाद, संप्रदायवाद से आगे नहीं निकल पा रहे हैं। यदि वाकई में देश का विकास करना है तो हमें राष्ट्रवाद पर आगे बढ़ना पड़ेगा। इस हिन्दुस्तान का एक ही धर्म है राष्ट्रीय धर्म, एक ही जाति रखना पड़ेगी राष्ट्रीय जाति। यदि सरकार जितने नियम-कानून जाति के आधार पर बने हैं उन सबको हटा दे तो लोग अपने आप जाति धर्म को भूल जाएंगे। लोग अपने घरों में कुछ भी करे, लेकिन घर से बाहर लोगों के दिमाग में जातिवाद, धर्मवाद, क्षेत्रवाद नहीं रहेगा। यदि आप इस जाति और इस धर्म की लड़ाई को कानून और नियम से हटा दें। लोगों से मेरा अनुरोध है कि एक बार ऐसे लोगों को ठुकराकर दिखाएं जो 68 साल से ऐसी राजनीति कर रहे हैं। एक बार ऐसे लोगों को लेकर आए कि जो इस जातिवाद को खत्म करके इस देश को राष्ट्रवाद की तरफ लेकर जाएं। यदि एक बार जनता ने ऐसे लोगों को सपोर्ट कर दिया तो इस देश की तस्वीर बदल जाएगी।

क्या आपको लगता है कि मध्यप्रदेश में अजाक्स इस स्थिति में है कि वह बदलाव कर सके?


जबाव : देखिए मध्यप्रदेश ही नहीं अब अजाक्स का दायरा मध्यप्रदेश से बाहर भी बढ़ रहा है। हमने इतने कम समय में एक बड़ा बदलाव किया है तो निश्चित रूप से हम मध्यप्रदेश में बदलाव ला सकते हैं। हमारी भावनाएं, हमारे लक्ष्य सिर्फ जातिवाद तक आकर नहीं सिमटे हैं, हमारी सोच सभी लोगों के विकास और सभी लोगों को संरक्षण देने की है। हमारा उद्देश्य संपूर्ण मध्यप्रदेश और मध्यप्रदेश में रहने वाले हरएक नागरिक का है। आज की राजनीति जातिवाद पर आधारित हो गई है, लेकिन इस जातिवाद से बाहर आकर भी राजनीति करने वालों को सोचना चाहिए। देश, प्रदेश का यह माहौल हमारी आने वाली पीढ़ियों के लिए बेहद निराशाजनक साबित होगा। 

केंद्र सरकार बताये कैसे हुई राफेल सौदे पर डील,बंद लिफाफे में माँगा जवाब : सुप्रीम कोर्ट

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सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को केंद्र सरकार से फ्रांस के साथ हुई राफेल एयरक्राफ्ट डील पर जवाब मांगा। केंद्र से पूछा कि सरकार ने कैसे राफेल डील की, इसके बारे में पूरी जानकारी 29 अक्टूबर तक सीलबंद लिफाफे में दी जाए। इस संबंध में एक जनहित याचिकाएं दायर की गई हैं। इस पर अगली सुनवाई 31 अक्टूबर को होगी। मुख्य न्यायाधीश रंजन गोेगोई की अध्यक्षता वाली न्यायमूर्ति एसके कौल और न्यायमूर्ति केएम जोसेफ की तीन सदस्यीय खंडपीठ ने इस मामले में दायर एक जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए यह फैसला किया है।

खंडपीठ ने कहा कि वह इस समय केन्द्र सरकार को कोई नोटिस जारी नहीं कर रही है। इस याचिका में फ्रांस की कंपनी दसाल्ट द्वारा रिलायंस को दिए गए ठेके की जानकारी भी मांगी गई है। गौरतलब है कि राफेल लड़ाकू विमान सौदे को लेकर कांग्रेस भारी अनियमितताओं का आरोप लगा रही है।

कांग्रेस का कहना है कि केन्द्र की भारतीय जनता पार्टी सरकार 1670 करोड़ रुपये प्रति राफेल की दर से इन विमानाें को खरीद रही है, जबकि पूर्ववर्ती संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन (संप्रग) सरकार के कार्यकाल में इनकी कीमत 526 करोड़ रुपये प्रति विमान निर्धारित की गई थी।

मोदी के कहने पर रिलायंस को साझेदार बनाया

राफेल सौदे पर कांग्रेस लगातार केंद्र सरकार को घेर रही है। पिछले कई दिनों से कांग्रेस और कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने मोदी सरकार में हुए राफेल सौदे पर सवाल उठाया है।

राहुल गांधी ने आरोप लगाया है कि मोदी सरकार ने फ्रांस की कंपनी दसॉल्ट से 36 राफेल लड़ाकू विमान की खरीद का जो सौदा किया है, उसका मूल्य पूर्ववर्ती यूपीए सरकार में विमानों की दर को लेकर जो सहमति बनी थी उसकी तुलना में बहुत अधिक है। इससे सरकारी खजाने को हजारों करोड़ रुपए का नुकसान हुआ है। कांग्रेस ने यह भी दावा किया है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सौदे को बदलवाया और एचएएल से ठेका लेकर रिलायंस डिफेंस को दिया गया।

12 अक्टूबर को चुनाव समिति की बैठक में प्रत्याशियों की सूची पर मुहर लगाएगी कांग्रेस।

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मध्यप्रदेश विधानसभा चुनाव में टिकट वितरण को लेकर बैठकों का सिलसिला जारी है। सोमवार को कांग्रेस स्कीनिंग कमेटी की बैठकों में लगभग 80 ऐसे उम्मीदवारों की लिस्ट फाइनल की गई जिसमें मौजूदा विधायक और 2013 में 3000 से कम वोटों से हारे प्रत्याशी शामिल है।

वहीं मंगलवार को हुई स्क्रीनिंग कमेटी की बैठक में 3 हजार- 10 हजार वोटों से हारे प्रत्याशियों की लिस्ट पर चर्चा की गई।

मधुसूधन मिस्त्री की अध्यक्षता में हुई इस बैठक में प्रदेश अध्यक्ष कमलनाथ के साथ दिग्विजय सिंह, ज्योतिरादित्य सिंधिया, नेता प्रतिपक्ष अजय सिंह और प्रदेश प्रभारी दीपक बाबरिया शामिल हुए थे।

12 अक्टूबर को प्रत्याशियों की लिस्ट हो सकती है फाइनल।

खबरों के अनुसार 12 अक्टूबर को चुनाव कमेटी की बैठक में प्रत्याशियों की लिस्ट फाइनल की जा सकती है। कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी भी इस बैठक में शामिल हो सकते है।

नाव पर सवार होकर आ रहीं अंबे कांग्रेस की नाव पार लगाएगीं या हाथी पर जाने से होगा नुकसान

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इस वर्ष की शारदीय नवरात्रि पर मां अंबे का आगमन नाव पर हो रहा है। नाव पर सवार मां अंबे मध्यप्रदेश सहित चार राज्यों में क्या कांग्रेस का सत्ता से वनवास समाप्त कर देगीं या फिर हाथी की उपेक्षा महंगी पड़ जाएगी। मां जगदंबा की वापसी भी इस बार हाथी पर बैठ कर हो रही है। मां अंबे का नाव पर आगमन पूरे देश के लिए अच्छे दिन आने का संकेत देने वाला है। क्या ये अच्छे दिन कांग्रेस की हिन्दी भाषी तीन राज्य मध्यप्रदेश,छत्तीसगढ़ और राजस्थान में सरकार में वापसी से आएंगे? कांग्रेस को इस सवाल का जवाब अपनी भक्ति के जरिए वोटर को खुश करके मिल सकता है। कांग्रेस को इन तीन राज्यों में अपने हाथ के कमाल पर ही भरोसा है। कांग्रेस ने अपनी नाव किनारे लगाने के लिए न तो साइकल की सवारी की है और न ही हाथी पर बैठने की हिम्मत दिखाई है।

मायावती और अखिलेश यादव को कांग्रेस ने किया है निराश

वैसे तो पिछले पांच विधानसभा चुनाव के लिए वोट डाले जाने का काम शारदीय नवरात्रि के बाद ही होता है। चुनाव लड़ने वाले उम्मीदवार इस मौके का उपयोग अपने चुनाव प्रचार के लिए करते हैं। इस वार की नवरात्रि पर जगदंबा नाव पर सवार होकर आ रहीं हैं। इस कारण राजनीतिक दलों के लिए यह नवरात्रि ज्यादा खास हैं। चुनाव वाले तीनों हिन्दी भाषी राज्यों में कांग्रेस और भाजपा के बीच सीधा मुकाबला होना तय माना जा रहा है। छत्तीसगढ़ में अजीत जोगी और मायावती मिलकर मुकाबला त्रिकोणीय बनाने का पूरा प्रयत्न कर रहे हैं। मायावती को अजीत जोगी का साथ कांग्रेस द्वारा हाथ आगे न बढ़ाए जाने के कारण लेना पड़ा है।

मायावती इस उम्मीद में थीं कि राष्ट्रीय स्तर पर कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी जो महागठबंधन तैयार करना चाहते हैं,वह तीन राज्यों के विधानसभा चुनाव में बसपा को साथ लिए बगैर नहीं बन सकता। मायावती इंतजार करतीं रहीं,कांग्रेस ने उनके प्रस्ताव को स्वीकार ही नहीं किया। प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष कमलनाथ कहते हैं कि मायावती वो सीटें चाहतीं थीं, जिन पर उन्हें हजार-दो हजार वोट ही पिछले चुनाव में मिले थे। दरअसल मायावती कांग्रेस के वोट के जरिए अपनी नाव पार लगाना चाहतीं थीं। कांग्रेस को लग रहा था कि इस गठबंधन से सत्ता मिल भी गई तो उसका रिमोट मायावती के हाथ में चला जाएगा।

अखिलेश यादव की उम्मीद भरी निगाहों को कांग्रेस ने अनदेखा कर दिया। अखिलेश यादव से कांग्रेस ने समझौते के संकेत तो दिए लेकिन, सहमति का जवाब नहीं भेजा। नतीजा समाजवादी पार्टी को अपनी नाव को बचाने के लिए अकेले ही चुनाव का चप्पू चलाना पड़ रहा है।

कांग्रेस को उम्मीद कि आरक्षित वर्ग और मुस्लिम के साथ लगेगी नाव पार

बसपा प्रमुख मायावती के हाथी को नाराज करने के बाद यह माना जा रहा है कि इससे कांग्रेस को नुकसान होगा। कांग्रेस एक बार फिर सत्ता में आने से चूक सकती है। इस तरह की अटकलों का आधार बसपा के प्रतिवद्ध वोट बैंक के कारण लगाया जा रहा है। राज्य में बसपा की ताकत निरंतर कम हो रही है। बसपा को पिछले चुनाव में सिर्फ चार सीटें ही मिलीं थीं। जबकि वह नौ सीटों पर दूसरे नंबर की पार्टी बनी थी। बसपा जिन सीटों पर नबंर दो पर रही थी ये श्योपुर,सुमावलीमुरैना,भिंड,महाराजपुर,पन्ना,रामपुर बघेलान,सेमरियादेबतालाव तथा रीवा विधानसभा सीट हैं।

पहले उत्तरप्रदेश के चुनाव फिर एट्रोसिटी एक्ट का सवर्णों द्वारा किए जा रहे विरोध के बाद कांग्रेस इस नतीजे पर पहुंची है कि अनुसूचित जाति वर्ग मायावती का साथ छोड़ रहा है। कांग्रेस का अनुमान है कि यह वर्ग भाजपा से नाराज है। इस कारण वह ऐसे दल को वोट देना चाहेगा जो सरकार बना सकता है। तीनों हिन्दी भाषी राज्यों में बसपा अकेले अपने दम पर सरकार बनाने की स्थिति में नहीं है।

राजस्थान में कांग्रेस को लग रहा है कि हर पांच साल में होने वाले सत्ता परिवर्तन में वोटर इस बार भाजपा को विपक्ष में बैठाएंगे। जबकि छत्तीसगढ़ में माया-जोगी के गठबंधन को अनुसूचित जाति-जनजाति वर्ग के वोटर अभी विश्वास करने की स्थिति में नहीं है। वहीं सपा की स्थिति तीनों ही राज्यों में सिर्फ सांकेतिक ही मानी जा रही है। कांग्रेस में यह डर भी देखने को मिल रहा है कि कहीं हाथी सत्ता आने के सपने को कुचल न दे?

इस देश में किसी के मंदिर जाने पर मज़ाक नहीं उड़ता है लेकिन राहुल गांधी मंदिर गए तो मज़ाक ज़रूर उड़ेगा क्यों भाई ?

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4 पुश्तों का बदला सबको राहुल गांधी से ही लेना है, जबकि इस पूरी फैमिली में कोई इतना नहीं झुका जितना राहुल गांधी झुका है, फिर भी 1955 से लेकर 2014 तक का पूरा हिसाब सबको राहुल गांधी से चाहिए, क्यों भाई ?

जो करने वाले थे वो गए, जो वोट देने वाले थे वो गए, उन्होंने कभी नहीं कहा सरकार ने हमारे लिए कुछ नहीं कहा और जो कह रहे हैं उन्होंने आपके लिए क्या किया बताइये ?


मुझे ये बताइये कि राहुल का मतलब मस्करा है क्या ?
राहुल गांधी का जिक्र होते ही हंसी क्यों आती है ?

अब कोई मां बाप अपने बच्चे का नाम राहुल नहीं रखना चाहते हैं क्यों ? जबकि जिनका नाम राहुल है उनके तो माता पिता ने बहुत उम्मीदों से ये नाम रखा था ।

मुझे बताइये आपकी उम्मीदों को आपसे किसने छीना है ?
किसने IT सेल को अपनी सत्ता के लिए हथियार बनाया ?

आप थोड़ी देर के लिए अपने माता पिता और दादा दादी के ज़माने में जाइये फिर याद कर के बताइये क्या इस इंसान का, इस परिवार का मजाक ऐसे ही उड़ता था ?

नहीं बिल्कुल नहीं लेकिन आज ऐसा हो रहा है क्यों ?

क्यों कि सियासत ने आपको वीडियो दिखाकर उलझा दिया है और आप इसी में मगन हैं, 60 सालों का हिसाब मांगने में व्यस्त हैं, जबकि आपके माता पिता दादा दादी ने ऐसा कभी नहीं कहा क्योंकि उन्होंने देखा है इंदिरा गांधी के जादुई नेतृत्व को, जो बांग्लादेश और पाकिस्तान को आंख दिखाकर जीत ले, यहाँ बैठकर डींगें ना मारे ।

राहुल गांधी से नफरत करने वालों से मेरा सवाल है कि देश में नफरत के बीज कौन बो रहा है ?

हम 2 + 2 का मतलब 4 ही समझते हैं, मर भी रहे हों तो वही समझेंगे लेकिन मुझे ये बताइये कि इसकी क्या गारंटी है कि हर पढ़ा लिखा, डॉक्टर या इंजीनियर ट्रैफ़िक रूल्स का पालन करता ही है, ये इस बात का गवाह है कि हमारी टीचिंग तो अच्छी हुई है लेकिन लर्निंग बेकार है, हम पढ़ तो बहुत अच्छा रहे हैं लेकिन हमारी सीखने की क्षमता बेकार है और जो आपको पढ़ा रहा है ना वो देश को जानवर बना रहा है ।

लेखक वरिष्ट पत्रकार है और वर्तमान में हिन्दी न्यूज चैनल ‘न्यूज नेशन’ में कार्यरत है

मध्यप्रदेश में विधानसभा चुनावों की घोषणा अब कुछ ही देर में,राहुल गाँधी कर रहे हैं सभा

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मध्यप्रदेश विधानसभा चुनाव समेत पांच राज्यों में होने वाले चुनावों की भी आज घोषणा हो सकती है। चुनाव आयोग ने इसकी पूरी तैयारियां भी कर ली हैं। चुनाव आयोग आज दोपहर तीन बजे एक प्रेस कॉन्फ्रेंस करने वाला है जिसमें इन राज्यों में चुनाव तारीखों की घोषणा हो सकती है। पहले यह प्रेस कॉन्फ्रेंस 12:30 बजे होनी थी, लेकिन किसी कारणवश अब यह प्रेस कॉन्फ्रेंस तीन बजे रखी गई है। आयोग अलग-अलग चरणों में यह चुनाव करवा सकता है। आयोग द्वारा तारीखों की घोषणा के बाद ही राज्यों में आचार संहिता लागू हो जाएगी।

बता दें कि मध्य प्रदेश और राजस्थान में आगामी विधानसभा चुनाव को लेकर कांग्रेस और भाजपा पहले ही कमर कस चुके हैं। भाजपा अध्यक्ष अमित शाह और कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी शानिवार को मध्य प्रदेश में चुनावी रैली को संबोधित करेंगे। वहीं, प्रधानमंत्री मोदी राजस्थान में आज चुनावी रैली को संबोधित करेंगे।

तेलंगाना विधानसभा चुनाव की भी हो सकती है घोषणा

मध्य प्रदेश में 2013 में हुए विधानसभा चुनाव को लेकर तारीखों की घोषणा 4 अक्टूबर को की गई थी। इस आधार पर अनुमान लगाया जा रहा है कि इस बार भी आचार संहिता जल्द लागू हो सकती है। मध्य प्रदेश के साथ-साथ राजस्थान, छत्तीसगढ़, मिजोरम और तेलंगाना विधानसभा चुनावों की भी घोषणा की जा सकती है।

हालांकि, माना ये भी जा रहा है कि तेलंगाना में 9 अक्टूबर को अंतिम मतदाता सूची प्रकाशित होगी, इसलिए उसके बाद ही चुनावों के तारीखों की घोषणा की जाएगी। इसके अलावा ऐसा भी माना जा रहा है कि 12 अक्टूबर के बाद चुनाव की घोषणा की जाएगी, क्योंकि मध्य प्रदेश के मुख्य निर्वाचन आयुक्त ओपी रावत मनीला दौरे पर जा रहे हैं। जब वह वहां से वापस लौटेंगे, उसके बाद ही चुनाव के तारीखों की घोषणा होगी।

कहां-कितनी सीटें?

बता दें कि मध्य प्रदेश में कुल 231 सीटों पर चुनाव होगा, जबकि राजस्थान में 200 सीटों पर, छत्तीसगढ़ में 91 सीटों पर, मिजोरम में 40 सीटों पर और तेलंगाना में कुल 119 सीटों पर विधानसभा चुनाव होने हैं।

सुरेश रैना ने स्वच्छता की जागरूकता के लिए ‘मेरा उत्तर स्वच्छ प्रदेश’ अभियान शुरू किया

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भारतीय ऑलराउंडर सुरेश रैना ने गांधी जयंती के अवसर पर अपने राज्य उत्तर प्रदेश में स्वच्छता के बारे में जागरूकता पैदा करने के लिए ‘मेरा उत्तर स्वच्छ प्रदेश’ अभियान शुरू किया। एक साल लंबे इस अभियान के माध्यम से रैना ने लोगों से स्वच्छ और बेहतर भारत के लिए उन्‍हें समर्थन देने का आग्रह किया है।स्वच्छ भारत मिशन के एम्‍बेसेडर क्रिकेटर रैना ने बताया कि इस अभियान के जरिये उनका उद्देश्य राज्य का दौरा करना और युवाओं की अपनी सेना बनाना है जो दूसरों में अपने आसपास स्वच्छता के दृष्टिकोण को जगाने के लिए जागरूकता और चेतना पैदा करने में मदद करेंगे। स्वच्छ भारत अभियान को लोकप्रिय बनाने के लिये उन्होंने वीडियो पोस्ट कर लोगों से अपने स्वयं के उत्तर प्रदेश को स्वच्छ और बेहतर बनाने की अपील की है।


इस अभियान को लेकर रैना ने कहा, “मैं इसे एक्स्ट्रा इनिंग के रूप में मानता हूं। हालांकि इस बार यह अलग है। पिच बड़ी है, चुनौती मुश्किल है और मैं वहां जाकर युवा भारतीयों की एक टीम बनाने जा रहा हूं जो स्वच्छ भारत के लक्ष्य को पूरा करने के लिए हाथ मिलाएंगे।”

राष्ट्रपिता महात्मा गांधी जन्मदिन पर करते थे ईश्वर से प्रार्थना,चरखा चलाते थे और रहते थे मौन

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राष्ट्रपिता महात्मा गांधी की आज 150वी जयंती है, जिसे जोरों-शोरों से देश मना रहा है। इस अवसर पर देश के हिस्सों में कार्यक्रम होंगे। भारतीय जनता पार्टी भी इस बार गांधी जयंती पर बड़ा आयोजन कर रही है। 15 दिन पहले शुरू किया गया BJP का ‘स्वच्छता ही सेवा’ कैंपेन आज खत्म होगा। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मंगलवार को नई दिल्ली स्थित राजघाट जाकर महात्मा गांधी को श्रद्धांजलि दी।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के अलावा कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी, यूपीए चेयरपर्सन सोनिया गांधी समेत कई अन्य बड़े नेताओं ने भी वहां पहुंच श्रद्धांजलि दी। इस अवसर पर मंगलवार को राष्ट्रपति भवन में स्वच्छता सर्वेक्षण पुरस्कार भी दिया जाएगा। जिसके बाद शाम को गांधी स्मृति पर प्रार्थना का आयोजन किया जाएगा। आपको बता दें कि महात्मा गांधी का जन्म 2 अक्टूबर 1869 को गुजरात के पोरबंदर में एक हिंदू-गुजराती मोध बनिया वैश्य परिवार में हुआ था। उनके माता पिता ने उनका नाम मोहनदास करमचंद गांधी रखा था। उनके जन्म के 5 साल बाद उनका परिवार पोरबंदर से राजकोट आ गया। जब गांधी 9 साल के हुए तब राजकोट में उन्हें उनके घर के नजदीकी स्कूल में पढ़ने के लिए भेजा गया। जब वो 11 साल के हुए तब उन्होंने राजकोट के हाई स्कूल में जाना शुरू किया था।

जन्मदिवस पर ज्यादातर समय मौन रहते थे गाँधी जी

आज से 100 साल पहले, जब वर्ष 1918 में गांधीजी ने अपना जन्मदिन मनाने वालों से कहा था ‘मेरी मृत्यु के बाद मेरी कसौटी होगी कि मैं जन्मदिन मनाने लायक हूं कि नहीं’.” देशभर में फैलीं गांधीवादी संस्थाओं की मातृ संस्था, गांधी स्मारक निधि के अध्यक्ष, रामचंद्र राही ने कहा, “यह गंभीर दिन होता था, इस दिन वह ईश्वर से प्रार्थना करते थे, चरखा चलाते थे और ज्यादातर समय मौन रहते थे। किसी भी महत्वपूर्ण दिन को वह इसी तरह मनाते थे। लेकिन सरकार आज गांधी जयंती पर तरह-तरह के समारोह आयोजित कर रही है, चारों तरफ हंगामा है, पूरे सालभर कार्यक्रम चलने हैं।

इसपर राही ने कहा, ‘सरकार तो कोई भी आयोजन अपने मतलब से करती है। उसे गांधी के विचारों से कुछ लेना-देना नहीं है। सरकार अपनी राजनीतिक महत्वाकांक्षा पूरी करने के लिए गांधी के नाम का इस्तेमाल करती है उन्होंने कहा, ‘अगर सरकार सचमुच गांधी का जन्मदिन मनाना चाहती है तो उसे गांधी के विचारों पर समाज को आगे ले जाने की कोशिश करनी चाहिए। लेकिन इसका लक्षण नहीं दिखता, वर्तमान सरकार गांधी को और गांधी के जन्मदिन को सफाई के साथ जोड़ती है।’

गांधी जयंती के उपलक्ष्य में सरकार की तरफ से स्वच्छता अभियान चलाए जा रहे हैं। इस पर राही ने कहा, ‘अगर सफाई के बारे में सोचें तो पहला काम यह होना चाहिए कि देश में सफाई करने वालों को ऐसी सुविधाएं मुहैया कराई जानी चाहिए, जिससे उन्हें गटर में उतर कर सफाई न करनी पड़े। सफाईकर्मियों को मृत्यु के मुंह में धकेलना सरकार के लिए शर्म की बात है। उन्होंने कहा, ‘सफाई महत्वपूर्ण काम है, लेकिन जबतक भारत में सफाईकर्मी एक खास समूह में रहेगा, उसके जीवन को कोई सुरक्षा नहीं मिल सकेगी। यह समाज के माथे पर कलंक है, यह कलंक नहीं मिटेगा, तो गांधी जयंती मनाने से कुछ नहीं होगा।