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गुजरात

केजरीवाल ने गुजरात पर कसा शिकंजा! BJP को बताया दलित विरोधी तो हार्दिक पटेल हुए देशभक्त !

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Newbuzzindia: छोटा पैकेट बड़ा धमाका ! हां आप सही समझ रहे है। अरविन्द केजरीवाल और उनकी आम आदमी पार्टी पर ये बात पूरी तरह बैठती है। बहुत कम समय में सत्ता हतियाने वाली राजनीतिक पार्टी AAP दिल्ली में अपने झंडे तो गाड़ ही चुकी है। अब उसकी नजर देश के अन्य प्रदेशों पर आ टिकी है। जहां केजरीवाल ने पंजाब विधानसभा चुनाव के लिए जी जान लगा दी है तो वहीँ अब वे मोदी के गढ़ और गृह राज्य गुजरात में भी सेंध लगाने के मकसद से कड़ी टक्कर में उतर आये है।

केजरीवाल राजनीति के नए खिलाड़ी के रूप में उभरे है और अब उनकी नजर गुजरात की सत्ता पर भी टीक चुकी है। इसी के चलते उन्होंने हार्दिक पटेल का तहे दिल से support किया है तो वहीँ भाजपा को बैकफुट पर लाने के लिए अनेकों हथकंडे अपना रहे है। 

केजरीवाल ने सूरत में एक बड़ी रैली की है जिससे गुजरात भाजपा में थोड़ी हलचल मची हैं। केजरीवाल ने रैली में एक तीर से तीन निशाने लगाए है। उन्होंने गुजरात में भड़के पटेल आंदोलन को समर्थन दिया तो वहीँ हार्दिक पटेल को देशभक्त का दर्जा भी दिया साथ ही दलितों के प्रति संवेदना भी जाहिर की। इसी दौरान भाजपा को दलित विरोधी बता कर दलितों के वोट बैंक पर एक तिरछी नजर डाली है।

आपको बता दे की सूरत में केजरीवाल की रैली के पहले ही गुजरात के कई जिलों में केजरीवाल का विरोध शुरू हो गया था। तो कहीं कहीं हंगामे भी हुए।

गुजरात चुनाव : कांग्रेस के सर्वे में ही भाजपा से हार रही है कांग्रेस..!

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Newbuzzindia: 2017 में होने वाले विधानसभा चुनावों के मद्देनजर गुजरात कांग्रेस ने एक विश्‍वसनीय रिपोर्ट तैयार की है। यह रिपोर्ट कांग्रेस उपाध्‍यक्ष राहुल गांधी को भी भेजी गई है। टाइम्‍स ऑफ इंडिया के मुताबिक, रिपोर्ट में कहा गया है कि 2017 के विधानसभा चुनावों में भारतीय जनता पार्टी 182 में से 97 सीटें जीत सकती है।

इसी रिपोर्ट में कहा गया है कि अगर कांग्रेस भाग्‍यशाली हुई तो अधिकतम 82 सीटें जीतेगी। टीआेआई ने सूत्रों के हवाले से लिखा है कि यह रिपोर्ट ‘पेशेवर एजेंसियों की मदद’ से तैयार की गई है। रिपोर्ट के अनुसार, विधानसभा की 182 सीटों में से ”52 सीटों पर भाजपा के जीतने की 100 फीसदी संभावना है, जबकि अन्‍य 45 सीटों पर बीजेपी के जीतने की संभावना 80 से 85 फीसदी है।”

दोनों को जोड़ दें तो संख्‍या 97 हो जाती है। अगर ऐसा होता है तो विधानसभा में आराम से भाजपा को बहुमत मिल जाएगा। अगर सत्‍ताधारी पार्टी कोई और सीट नहीं भी जीतती, तो भी वह कम बहुमत के साथ सरकार बना लेगी।

रिपोर्ट में आगे कहा गया है कि अगर कांग्रेस बाकी बची 85 सीटें जीत भी ले, तो भी वह सरकार नहीं बना पाएगी। रिपोर्ट के मुताबिक, बीजेपी की 52 ‘ए ग्रेड सीटों'(जहां भाजपा का जीतना तय है) के मुकाबले कांग्रेस के पास सिर्फ 8 ‘ए ग्रेड सीटें’ हैं। पार्टी के एक सूत्र ने कहा कि कांग्रेस को अभी भी कई कमियां दूर करनी है।

पार्टी की चार बड़े शहरों और अर्द्धशहरी क्षेत्रों में कम पहुंच है। इसके अतिरिक्‍त भाजपा बूथ-लेवल मैनेजमेंट में कांग्रेस से कहीं आगे है। कांग्रेस सूत्र ने टीआेआई से कहा, ”भाजपा को कड़ी टक्‍कर देने के लिए कांग्रेस को कई गुना प्रयास करने होंगे।”
गुजरात, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का गृह राज्‍य है। उन्‍होंने अपने विश्‍वासपात्र विजय रुपानी को राज्‍य का मुख्‍यमंत्री नियुक्‍त किया है।

प्रधानमंत्री बनने के बाद मोदी ने आनंदीबेन पटेल को मुख्‍यमंत्री बनाया था, मगर विवादों में फंसने के बाद पटेल ने इस्‍तीफा सौंप दिया। जिसके बाद शाह और मोदी की जोड़ी ने रुपानी को चुना। 2017 के चुनावों के लिए भाजपा अध्‍यक्ष अमित शाह खुद चुनाव प्रबंधन पर नजर रखेंगे।

गुजरात विधानसभा चुनाव: आरएसएस के सर्वे में भाजपा की करारी हार..!

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Newbuzzindia : आरएसएस ने हाल में गुजरात में सर्वे चुनावी सर्वे किया।  सर्वे में सामने आया की अगर इस समय गुजरात में वधान सभा चुनाव होते है तो भाजपा की करारी हार तय है । आरएसएस द्वारा किये गए सर्वे में भाजपा को 180 में से केवल 60-65 सीट ही मिलती दिखाई दे रही है । 

गौरतलब है कि दलित आंदोलन के बाद किये गए इस सर्वे को आनंदीबेन के इस्तीफ़ा से जोड़कर देखा जा रहा है । आपको बता दें कि ऊना में मृत गाय की खाल उतरने लार दलित युवकों की पिटाई के विरोध में पिछले  दो हफ़्तों से विरोध प्रदर्शन हो रहे है ।

इस सर्वे को आरएसएस के कुछ जमीनी प्रचारकों ने अंजाम दिया । ये वही प्रचारक है जो आरएसएस के लिए फीडबैक लाने का काम करते रहे है । सर्वे में खुलासा हुआ है कि हिंदुओं का झुकाव तो भाजपा की तरफ है लेकिन दलितों को भाजपा से दूर बताया जा रहा है । आरएसएस दलितों को हमेशा से ही हिन्दू ही मानता आया है और वह नही चाहता की दलित किसी दूसरी पार्टी का रुख करें ।

बताया जा रहा है कि सोमवार को गुजरात आरएसएस ने मुख्यमंत्री आनंदीबेन पटेल से मुलाकात कर इस सर्वे के बारे में बताया । जिसके बाद सीएम आनंदीबेन पटेल इस्तीफे के लिए राजी कर दिया । सर्वे के अनुसारी दलित अन्दोलर और पाटीदार आंदोलन के कारण भाजपा को कम से कम 18 विधानसभा सीटों पर नुक्सान झेलना पड़ सकता है ।

सर्वे के अनुसार आदिवासी भी सरकारी नौकरियों और जमीन आवंटन के लिए आंदोलन छेड़ सकते हैं । आरएसएस की एक और रिपोर्ट में कहा गया था कि बीजेपी को दिसंबर 2015 के पंचायती चुनावों में कम से कम 104 सीटों का नुकसान हुआ। इसकी वजह पाटीदारों का आंदोलन था। बीजेपी को शहरी इलाकों के मुकाबले ग्रामीण इलाकों में ज्यादा नुकसान हुआ था।

भारी विरोध के बाद आनंदी बेन पटेल ने दिया मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा..!

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Newbuzzindia: गुजरात की पहली महिला मुख्यमंत्री आनंदी बेन पटेल ने पार्टी हाइकमान को मुख्यमंत्री पद से दिया इस्तीफ़ा । आनंदी बेन पटेल ने अपने फेसबुक पेज पर खत पोस्ट करते हुए कहा है कि इस्तीफ़ा देने का मन उन्होंने 2 महीने पहले बनाया था ।
आनंदी बेन का कहना है कि उन्हें अब “vibrant gujrat” जैसे कार्यक्रम के लिए पर्याप्त समय निकलना है । आनंदी बेन ने लेटर के साथ लिखा है कि “आज मैंने फिर एक बार पार्टी हाई कमान को खत लिखकर मुख्यमंत्री पद की जिम्मेदारी से खुद को आजाद करने का निवेदन किया । 
गौतलब है कि मुख्यमंत्री बनने के बाद से ही आनंदी बेन पटेल का विरोध हो रहा है । पाटीदार आंदोलन के बाद आनंदी बेन पटेल की योग्यता पर भी लोगो ने सवालिया निशान लगा दिए थे । हाल ही में गुजरात में दलितों पर हुए हमले के बाद भाजपा के दलित नेता ने इस्तीफा दिया था । 
देखना होगा की आनंदी बेन पटेल का इस्तीफा अगर मंजूर हो जाता है तो उनकी जगह लेने के लिए पार्टी किसे चुनती है । 

दलित नेता ने 200 समर्थकों के साथ दलित विरोधी भाजपा की प्राथमिक सदस्यता से दिया इस्तीफ़ा..!

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Newbuzzindia: लगातार दलित विरोधी होने का आरोप झेल रही भाजपा के लिए मुश्किलें कम होने का नाम नही ले रही । ताजा खबर आ रही है मोदी जी के गुजरात से जहां भाजपा के एक दलित नेता ने 200 समर्थकों के साथ भाजपा की प्राथमिक सदस्यता से इस्तीफ़ा दे दिया है ।

गौरतलब है की गुजरात समेत देश के कई राज्यों से दलितों की पिटाई के मामले सामने आ रहे है । गौरतलब है की भाजपा के दलित नेता बाबू पांडवाडरा ने अपने 200 समर्थकों के साथ प्राथमिक सदस्‍यता से इस्‍तीफा दे दिया। उनका इस्‍तीफे गुजरात के अहमदाबाद में रविवार को दलित महासम्‍मेलन से ठीक एक दिन पहले आया है ।

पांडवाडरा 26 साल से भाजपा में थे। वे गुजरात भाजपा की एससी एग्‍जीक्‍यूटिव कमिटी के सदस्‍य थे और पोरबंदर में काफी सक्रिय थे। बताया जा रहा है कि वे साल 2010 में पोरबंदर के सोढाणा गांव में एकि दलित किसान रामा शिनगरखिया के हत्‍या के मामले पर भाजपा नेताओं के भेदभाव पूर्ण रूख से नाराज थे।

गौरतलब है की पांडवाडरा का कहना है की भाजपा दलित पीड़ितों को न्याय दिलाने में नाकाम रही है ।
पांडवाडरा रामा शिनगरखिया की हत्‍या के मामले का उल्‍लेख करते हुए लिखा कि मामले में आरोपी अरभाम करवडारा और 35 अन्‍य ऊंची जाति मेर से है, इसलिए भाजपा और कांग्रेस नेताओं ने उसे बचाने का प्रयास किया। 
मामले की जांच को रोकने की कोशिश की गई। उन्‍होंने गिर सोमनाथ जिले के ऊना कस्‍बे में दलित युवकों की पिटाई का मामला भी उठाया। उन्‍होंने कहा कि भाजपा समाधियाला गांव के दलितों को भी न्‍याय देने में असफल रही।

ऊनाकाण्ड: दलित विरोधी है भाजपा! भाजपा के दलित नेता ने 200 समर्थकों समेत छोड़ी पार्टी

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NewBuzzIndia: गुजरात के ऊना में दलितों की पिटाई को ले कर के पैदा हुए विवाद में जैसे भाजपा की मुश्किलें बढ़ती ही जा रही हैं। भाजपा के दलित नेता बाबू पांडवाडरा ने अपने 200 समर्थकों के साथ प्राथमिक सदस्‍यता से इस्‍तीफा दे दिया। पांडवाडरा ने यह कदम गुजरात के अहमदाबाद में रविवार को होने वाले दलित महासम्‍मेलन से ठीक एक दिन पहले उठाया है। पांडवाडरा 26 साल से भाजपा में थे। वे गुजरात भाजपा की एससी एग्‍जीक्‍यूटिव कमिटी के सदस्‍य थे। वे साल 2010 में पोरबंदर के सोढाणा गांव में एकि दलित किसान रामा शिनगरखिया के हत्‍या के मामले पर भाजपा नेताओं के भेदभाव पूर्ण रूख से नाराज थे।

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गुजरात भाजपा अध्‍यक्ष विजय रुपाणी को भेजे इस्‍तीफे में उन्‍होंने लिखा कि राज्‍य सरकार दलित पीडि़तों को न्‍याय दिलाने में नाकाम रही है। उन्‍होंने कहा कि भाजपा समाधियाला गांव के दलितों को भी न्‍याय देने में असफल रही।
इन सब के बीच दिल्‍ली के मुख्‍यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने इस पुरे मामले को हवा देते हुए कहा कि, “उदित जी और भाजपा के सभी दलित सांसदों को देशभर में भाजपा के गुंडों द्वारा दलितों पर हो रहे हमलों के विरोध में इस्‍तीफा दे देना चाहिए।” 

जानिए प्रधानमंत्री मोदी के भाषण में हुई 11 गड़बड़ियां जिनसे हर तरफ हुई उनकी किरकिरी

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NewBuzzIndia:

अमेरिका में जब प्रधानमंत्री भारत के गौरवशाली इतिहास और धरोहरों का ज़िक्र कर रहे थे तब उन्होंने कोणार्क के मंदिर का ज़िक्र किया। उन्होंने कहा कि, ‘यह मंदिर 2000 साल पुराना है।’ जबकि इस मंदिर का निर्माण 700 वर्षों पहले हुआ था।

नरेंद्र मोदी अपने प्रभावशाली और धारदार भाषण के लिए जाने जाते हैं। लोकसभा चुनाव में वो लोगों के दिल पर छाए रहे, उसके लिए एक महत्वपूर्ण कारण उनके भाषण की शैली रही। पर इतने शानदार भाषण की शैली होने के बावजूद भी कई ऐसे क्षण आए जब इतिहास में अपने अल्पज्ञान के कारण वो विरोधियों के निशाने पर रहे।
आइए जाने प्रधानमंत्री मोदी के भाषण के दौरान की गई 11 गलतियों के बारे में

1. नवंबर 2003 में महात्मा गांधी के बारे में ज़िक्र करते हुए मोदी जी ने उन्हें मोहनलाल करमचंद गांधी कह दिया। जबकि महात्मा गांधी का पूरा नाम मोहनदास करमचंद गांधी था। इस पर मोदी जी का काफी मजाक उड़ा।

2. लोकसभा चुनाव में पार्टी के लिए प्रचार के दौरान 2013 में पटना की बहुचर्चित हूंकार रैली में बिहार का बखान करते हुए उन्होंने सम्राट अशोक, पाटलिपुत्र का ज़िक्र करते हुए  नालंदा और तक्षशिला विश्वविद्यालय का नाम लिया। इस पर विरोधियों ने मोदी के ज्ञान पर हमला करते हुए उनका खूब मज़ाक उड़ाया, क्योंकि तक्षशिला विश्वविद्यालय पाकिस्तान में है।

3. 2003 में अहमदाबाद में लोगों को संबोधित करते हुए मोदी ने कहा कि, आज़ादी के समय एक डॉलर की कीमत एक रुपये की थी। जबकि विपक्ष पर तंज कसते कसते मोदी ये भूल गए थे कि उस वक़्त 30 सेंट बरावर एक रुपया हुआ करता था और एक रुपया एक पाउंड के बराबर था।

4. अहमदाबाद में अक्तूबर 2003 में नरेंद्र मोदी ने कहा था कि अहमदाबाद नगरपालिका में महिलाओं के आरक्षण का प्रस्ताव सरदार वल्लभ भाई पटेल ने 1919 में रखा था। जबकि लंबे समय तक गुजरात के मुख्यमंत्री रहे नरेंद्र मोदी ये भूल गए थे कि वल्लभ भाई पटेल ने ये प्रस्ताव 1926 में दिया था।

5. फरवरी 2014 में नरेंद्र मोदी ने मेरठ में कहा था कि कांग्रेस ने आज़ादी की पहली लड़ाई को कम कर के आँका था।
जबकि सच ये है की 1857 की क्रांति को देश की आज़ादी की पहली लड़ाई कहते हैं। कांग्रेस का अस्तित्व भी 1857 में नहीं था। भारतीय कांग्रेस की स्थापना भी 1885 में हुई थी।

6. नवंबर 2003 में बंगलौर में नरेंद्र मोदी ने कहा था- 15 अगस्त का प्रधानमंत्री का भाषण लाल दरवाज़े से होता है। अब ये कोई बताने वाला तथ्य नहीं है कि प्रधानमंत्री लाल क़िले से भाषण देते हैं।

7. 2003 में मुंबई में नरेंद्र मोदी ने कहा था कि वर्ष 1960 से महाराष्ट्र में 26 मुख्यमंत्री हुए हैं। जबकि सच ये है कि 2003 तक सिर्फ़ 17 नेताओं ने 26 बार मुख्यमंत्री पद की शपथ ली है।

8. नरेंद्र मोदी ने एक बार कहा था कि जब हम गुप्त साम्राज्य की बात करते हैं कि हमें चंद्रगुप्त की राजनीति की याद आती है। दरअसल मोदी जिस चंद्रगुप्त की राजनीति का जिक्र कर रहे थे, वो मौर्य वंश के थे। गुप्त साम्राज्य में चंद्रगुप्त द्वितीय हुए।

9. दिसंबर 2013 में नरेंद्र मोदी ने जम्मू में एक रैली के दौरान कहा था कि मेजर सोमनाथ शर्मा को महावीर चक्र और ब्रिगेडियर रजिंदर सिंह को परमवीर चक्र मिला था। जबकि मेजर सोमनाथ शर्मा को परमवीर चक्र और रजिंदर सिंह को महावीर चक्र मिला था। इस उलटफेर में फंसे नरेंद्र मोदी।

10. नवंबर 2013 में खेड़ा में नरेंद्र मोदी श्यामजी कृष्ण वर्मा और श्यामा प्रसाद मुखर्जी में अंतर नहीं कर सके। मोदी ने श्यामा प्रसाद मुखर्जी को गुजरात का बेटा कह दिया और ये भी कह दिया कि उन्होंने लंदन में इंडिया हाउस का गठन किया था। और उनकी मौत 1930 में हो गई थी। दरअसल श्यामा प्रसाद मुखर्जी का जन्म कोलकाता में हुआ था। उनकी मौत 1953 में हुई थी। दरअसल मोदी श्यामी कृष्ण वर्मा की जगह श्यामा प्रसाद मुखर्जी बोल गए।

11. पटना में रैली के दौर बिहार के शौर्य का ज़िक्र करते हुए मोदी ने सिकंदर के बारे में कहा। उन्होंने कहा कि,‘ सिकंदर की सेना ने दुनिया जीत लिया था। पर जैसे ही वो बिहार आए उनका क्या हश्र हुआ ये दुनिया जानती है। अब कौन मोदी जी को ये बात बताये कि सिकंदर कभी गंगा को पार नहीं किया। जबकि पटना गंगा के किनारे बसा हुआ है।

अमेरिकी कांग्रेस में मोदी के भाषण का सच आया सामने, आप भी जाने सच

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NewBuzzIndia:

अमेरिका में हुए मोदी दौरे का मुख्य आकर्षण केंद्र रहा अमेरिकी कांग्रेस में प्रधानमंत्री मोदी का अंग्रेजी में दिया हुआ भाषण। आम तौर पर हिंदी में बोलने वाले मोदी अपनी बातों से लोगों का दिल जीत लेते हैं। पर बिना देखे लगातार 40 मिनट तक अंग्रेजी में दिए अपने भाषण से उन्होंने दुनिया भर में वाहवाही लूटी है।
प्रधानमंत्री के भाषण के बाद एक फ़ोटो सोशल मीडिया पर बहुत तेज़ी से वायरल हुई है। इस फ़ोटो से यह समझ में आता है कि अपने भाषण के लिए उन्होंने टैलिप्राम्प्टर का सहारा लिया है। देश की मीडिया रिपोर्ट की माने तो यह खबर और तस्वीर सच्ची और सही है।

इस तकनीक से भाषण पढ़ने में माहिर हैं मोदी। आम तौर पर इस तकनीक से भाषण पढ़ना काफी मुश्किल होता है, क्योंकि टैलिप्राम्प्टर पर पढ़ना और उस बात को दर्शकों तक पहुँचना, दर्शकों को समझाना काफी मुश्किल होता है। टैलिप्राम्प्टर और दर्शकों दोनों में सामंजस्य बनाना सबसे बड़ी चुनौती होती है। इस तकनीक में मोदी को महारत हांसिल है। वह अपनी बात को प्रभावित ढंग से कहते हैं और दर्शकों तक उनकी बात भी पहुँचती है।

जानिए कैसे काम करता है टैलिप्राम्प्टर

दर्शकों को टैलिप्राम्प्टर नज़र नहीं आता है, क्योंकि एक तरफ से यह पारदर्शी होता है। वक्ता जैसे जैसे टैलिप्राम्प्टर पर लिखे वाक्यों को पढ़ता है, पढ़े हुए वाक्य नीचे स्क्रॉल होते जाते हैं। पारदर्शी स्क्रीन होने के कारण ऐसा लगता है जैसे वक्ता दर्शकों की ओर देख के बोल रहा है

जब मोदी भी खा गए धोखा

2015 में श्रीलंका दौरे पर श्रीलंकाई राष्ट्रपति मैत्रिपाल सिरिसेना के स्वागत भाषण में प्रधानमंत्री मोदी ने टैलिप्राम्प्टर का इस्तेमाल किया था। शब्द दर शब्द पढ़ने के चक्कर में प्रधानमंत्री ने आखिर वो गलती कर ही दी, जो अक्सर किसी टैलिप्राम्प्टर पढ़ने वाले से हो जाती है। उन्होंने मैत्रिपाला की पत्नी Mrs. Sirisena को एमआरएश सिरिसेना बोल दिया था।

जानिए वो 10 मुद्दें जिन पर मोदी कभी कुछ बोल ना पाए, सरकार भी रही बैकफुट पर

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NewBuzzIndia | Exclusive:

केंद्र में भाजपा सरकार के आने के पूर्व भाजपा ने अनेकों वादे किए। इन वादों में से मोदी सरकार ने कुछ पुरे किए तो वहीं बहुत से वादों पर चुप्पी साधी रखी है। इसी तरह प्रधानमन्त्री नरेंद्र मोदी ने भी कई मसलों पर कुछ नही कहा और बिलकुल चुप रहे।

हम आपको उन महत्वपूर्ण मुद्दों के बारे में बता रहे है जिन पर आवश्यक होने पर भी मोदी चुप रहे है-

1. राम मंदिर :-
भाजपा ने जब पहली बार राजनीती में जगह बनाई थी तब से राम मंदिर के मुद्दे को सबसे ऊपर उठाया था, पर अभी भी मोदी इस मुद्दे पर चुप है। और यह मुद्दा वैसा ही है जैसा पहले था।

2. धारा 370 :-
लोकसभा चुनाव के वक़्त मोदी के वादों में धारा 370 सबसे ऊपर था, पर अब मोदी इससे यू-टर्न लेते हुए दिखाई दे रहे है।

3. JNU मुद्दा :-
यह एक ऐसा मुद्दा था जिसने सरकार की जड़े हिला कर रख दी, पर फिर भी मोदी इससे दूर ही रहे।

4. व्यापम :-
यह भाजपा सरकार के सबसे बड़े घोटालों में से एक है, जिसमे कई लोगों की जान तक चली गयी, यह मुद्दा अभी भी नही सुलझा है। इस पर भी मोदी ने कोई रिएक्शन नही दिया।

5. काला धन :-
भाजपा को जीत दिलाने का यह सबसे बड़ा हथियार था, जिसमे विदेशो में जमा काला धन वापस लाने की बात कही गयी थी, पर अब तक ऐसा कुछ भी नही हुआ।

6. अख़लाक़ :-
अख़लाक़ एक ऐसा मुद्दा बन गया जिसमे देश में सहिष्णुता और असहिष्णुता के बीच जंग छिड़ गयी, पर इससे भी मोदी दूर भागते दिखे।

7. महंगाई:
वादों पर ध्यान दिया जाए तो मंहगाई को कम करने की बात कही गयी थी, पर फिलहाल स्थिति इसके बिलकुल विपरीत है।

8. चीन:
लोकसभा चुनाव के वक़्त, प्रचार के महत्वपूर्ण मुद्दों में चीन का मुद्दा अहम था। लगातार चीन का भारत के ज़मीन पर कब्ज़ा, अरुणांचल प्रदेश के कई हिस्सों को अपना कहना जैसे कई मुद्दे थे जिनपर उम्मीद की जा रही थी कि मोदी सरकार का रुख सख्त होगा। पर जैसे जैसे दिन ढले, इन मुद्दों को ठंडे बस्ते में डाल के भूल गयी सरकार।

9. डिग्री विवाद:
केजरीवाल के द्वारा उछाला गया  मोदी की डिग्री का विवाद, इस पर भी मोदी कभी खुलकर सामने नही आये।

10. पत्नी:
यह मुद्दा मोदी के निजी जीवन का है। मोदी ने कभी सामने आकर अपनी पत्नी का नाम उजागर नही किया।

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दिलचस्प: बच्ची ने ऐसा क्या कह दिया, कि गुजरात की CM आनंदीबेन रो पड़ी !

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#newbuzzindia/अहमदाबाद । हर व्यक्ति के अंदर भावनाये छुपी रहती है। वो व्यक्ति चाहे आम हो या विशेष। ये भावनाये जब बाहर आती हैं तो कोई भी इसे रोकने में सफल नही हो पाता हैं।

ऐसा ही कुछ हुआ गुजरात की मुख्यमंत्री आनंदीबेन पटेल के साथ। मौका था अहमदाबाद के एक स्कूल में गर्मी की छुट्टियों के बाद ‘शाला प्रवेशोत्सव’ का। गर्मी की छुट्टियां खत्म होने के बाद स्कूल का पहला दिन था। इस दौरान कक्षा नौ की एक छात्रा अंबिका की ओर से कन्या भ्रूण हत्या पर दी गई प्रस्तुति के दौरान सीएम आनंदीबेन भावुक होकर मंच पर ही रो पड़ीं।

आनंदीबेन पटेल को काफी सख्त मिजाज मुख्यमंत्री माना जाता है, लेकिन वह भी अपने आंसू नहीं रोक सकीं। जब अंबिका ने चिट्ठी खत्म की, तो मुख्यमंत्री ने उसे गले लगाया।

आपको बता दे कि राजनीति में आने से पहले आनंदीबेन टीचर रह चुकी हैं। 1997 में उन्होंने रिटायरमेंट ले लिया था। गुजरात की पहली महिला मुख्यमंत्री आनंदीबेन पटेल, जिन्हें महिला सशक्तीकरण का मुखर समर्थक माना जाता है।

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