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“जब वो तोड़ने से ना रोक सके तो बनाने से कौन रोकेगा, बनेगा राम मंदिर।” -योगी आदित्यनाथ

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भले ही भाजपा राम मंदिर मामले पर बोलने से बचती रहती है पर अभी जैसे ही यूपी में चुनाव का माहौल आया अपने इरादों को स्पष्ट करते हुए आखिर भाजपा सांसद योगी आदित्यनाथ ने अपनी बात कह दी है। आदित्यनाथ राम मंदिर मामले पर एक बार और विवादित बयान दे कर विरोधियों के निशाने पर आ गए हैं।

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पार्टी सांसद योगी आदित्यनाथ ने यूपी के बस्ती में राम मंदिर को लेकर विवादास्पद बयान दिया है। उन्होंने भड़काऊ अंदाज में कहा कि जब अयोध्या में विवादित ढांचा गिराने से कोई नहीं रोक सका, तो भला मंदिर बनाने से कौन रोकेगा।
रविवार को रामकथा के अयोजन में पहुंचे योगी आदित्यनाथ ने प्रशासन को धमकी भरे अंदाज में कहा, ‘भगवान राम के मंदिर को बनने से कोई नहीं रोक सकता है। जब ढांचा ढहाने से कोई नहीं रोक पाया तो मंदिर बनाने से कौन रोकेगा। छह दिसंबर को कार सेवकों ने ढांचा ढहाने के बाद ईट का एक-एक टुकड़ा अपने साथ लेकर चले गए और अपने हिसाब से उसका इस्तेमाल किया।’

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मदर टेरेसा पर फिर हमला

बीजेपी सांसद यही नहीं रुके। उन्होंने अपने चिरपरिचित अंदाज में भारत रत्न मदर टेरेसा को लेकर भी टिप्पणी की। आदित्यनाथ ने कहा, ‘मदर टेरेसा धर्मांतरण करवाती थी। आज भी सेवा के नाम पर धर्मांतरण जारी है। टेरेसा के लोग भारत का इसाईकरण करने का काम करते हैं। देश के पूर्वोत्तर राज्यों में इन इसाईयों ने किस तरह से खतरनाक स्थ‍िति पैदा कर रखी है, इसे देखना है तो झारखंड, अरूणाचल, त्रिपुरा, नागालैंड और मेघालय जाइए।’

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‘कैराना मामले पर किसी ने पुरस्कार क्यों नहीं लौटाया ?’

आदित्यनाथ ने कैराना के मामले पर दुख प्रकट करते हुए कहा, ‘हिंदू कब तक पलायन करेगा और वह जाएगा कहां ? पाकिस्तान, बांग्लादेश और अफगानिस्तान से हिंदुओं को भगाया गया। तब किसी ने असहिष्णुता की बात नहीं की। तब किसी ने कोई पुरस्कार वापस नहीं किया।’

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ओवैसी का भाजपा से सवाल, “मुज़फ्फरनगर दंगे के बाद 50,000 मुसलमानों ने किया पलायन, कौन है ज़िम्मेदार?”

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NewBuzzIndia:

कैराना पलायन मामले से उत्तर प्रदेश राजनीति ही नहीं राष्ट्रीय राजनीति में एक हलचल पैदा हो गया है। हुकुम सिंह ने जब अपना ‘हुकुम का इक्का’ फेंका तो उन्हें भी अंदाज़ा नहीं रहा होगा की उनके इस कदम से प्रदेश की सियासत किस तरह से प्रभावित होगी।

साल 2013 के मुजफ्फरनगर दंगों के बाद 50,000 मुसलमानों के पलायन करने का दावा करते हुए एआईएमआईएम प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी ने शनिवार (18 जून) को भाजपा से कहा कि क्या वह वहां एक तथ्यान्वेषी टीम भेजेगी, जैसा कि इसने हिंदुओं के कथित पलायन के मुद्दे पर कैराना भेजी है। हैदराबाद से लोक सभा सदस्य ने उत्तर प्रदेश के कैराना से कथित तौर पर पलायन करने वाले 346 परिवारों की सूची को ‘फर्जी’ बताया है। उन्होंने कहा कि इस मुद्दे पर नाटक करना भाजपा और सपा दोनों के हितों के अनुकूल बैठता है।
ओवैसी ने दावा किया कि मुजफ्फरनगर दंगों के बाद 50,000 से अधिक लोगों ने अपना मूल स्थान छोड़ दिया जहां वे पीढ़ियों से रहते आ रहे थे। उन्होंने इसे देश की आजादी के बाद अल्पसंख्यकों को सामूहिक रूप से हटाने का कार्य बताया। उन्होंने कहा, ‘क्या भाजपा एक तथ्यान्वेषी टीम भेजेगी ? (मुजफ्फरनगर दंगों के बाद) विस्थापित हुए 50,000 लोगों के साथ क्या हुआ उसका पता लगाने के लिए क्या भाजपा कोई समय निकालेगी?’

कैराना मामले पर योगी आदित्यनाथ ने उगला ज़हर, पढ़ें पूरी खबर

ओवैसी ने दावा किया कि मूल रूप से उसके (भाजपा) पास कोई और मुद्दा नहीं है और यह (कैराना मुद्दा) भाजपा का असली चेहरा उजागर करता है जो सबका साथ सबका विकास की बात करती है। उन्होंने कहा कि यह भाजपा और सपा दोनों के लिए उपयुक्त बैठता है, भाजपा बहुसंख्यक समुदाय के बीच डर की भावना पैदा करना चाहती है। सपा मुसलमानों को यह संदेश देना चाहती है कि यदि आप सपा को नहीं चुनते हैं तो आप असुरक्षित हैं। इस तरह यह नाटक भाजपा और सपा, दोनों के अनुकूल बैठता है।
उन्होंने कहा कि जब ऐसा मुद्दा सामने आता है तो सपा खुश होती है क्योंकि इसे अपने मकसद में नाकाम रहने और कुशासन पर सवालों का जवाब नहीं देना पड़ता है। ओवैसी ने कहा कि एआईएमआईएम अगले साल के शुरुआत में उत्तर प्रदेश में होने वाले विधानसभा चुनाव लड़ेगा। उन्होंने कहा कि उनकी पार्टी ने उत्तर प्रदेश में एक गठबंधन बनाने के लिए विकल्प खुले रखे हैं।

यहाँ हम कैराना में उलझे हैं और उधर इराक में 39 लोग लापता, हत्या की आशंका

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NewBuzzIndia:

देश के कई लोग नौकरी के सिलसिले में देश के बाहर जाते हैं। पैसा कमाने की चाह लोगों को खतरों से भरे अरब देशों में भी ले जाती है। भारत के ऐसे ही 39 लोग साल 2014 से इराक में लापता हैं। उन लोगों के परिवारवालों को अबतक समझ नहीं आ रहा कि उनके सगे-संबंधी जिंदा भी हैं या फिर नहीं। मामला 2014 का है जब आईएस ने ईराक पर कब्जा कर लिया था। इसके बाद से इन लोगों की कोई खबर नहीं आई। हालांकि, सुषमा स्वराज का कहना है कि वे सभी लोग ईराक में सही सलामत हैं, पर इन लोगों को वहां ले जाने वाले शख्स का दावा है कि उन सभी को उसके सामने ही आतंकियों ने मार दिया था।
जिस शख्स ने यह दावा किया है उसका नाम हरजीत मसीह है। बटला में रहने वाले इस शख्स को पुलिस ने विदेश मंत्रालय के कहने पर गिरफ्तार किया था। लापता लोगों के परिवारवालों ने हरजीत पर आरोप लगाए हैं कि वह ही उन लोगों को इराक लेकर गया था। परिवारवालों ने अपनी शिकायत में यह भी कहा है कि हरजीत ने विदेश भेजने के बदले 1.5-2 लाख रुपए लिए थे। हरजीत भी इराक में ही काम करता था। विदेश मंत्रालय ने हरजीत के साथ उसके एक रिश्तेदार राजबीर को भी पकड़ने को कहा है। परिवारवालों को लगता है कि हरजीत और राजबीर ने मिलकर उन लोगों को आईएस को बेच दिया।
हालांकि, पकड़े जाने के बाद हरजीत ने बताया था कि उसके सामने ही आईएस के आतंकियों ने सभी लोगों को मार दिया था। उसके मुताबिक, वह किसी तरह भागने में कामयाब हो गया था। उसके एक गोली लगने का निशान अब तक है। हरजीत की इस बात पर परिवारवाले भरोसा करना भी चाहें तो विदेश मंत्रालय उन्हें करने नहीं देता। सुषमा स्वराज ने सभी लोगों से कहा है कि उनके सगे-संबंधी इराक में जिंदा हैं और ठीक हैं। सुषमा उन्हें सही सलामत लाने का वादा भी करती हैं। अमृतसर से लापता मनजिंदर सिंह की बहन गुरपिंदर सिंह कहती हैं, ‘जब भी मैं सुषमा स्वराज से हरजीत के बारे में कहती हूं तो वह बोलती हैं कि मुझ से उसके बारे में बात मत करो। तुम्हें उसपर भरोसा है या मुझपर।’
वहीं, अपनी सफाई में हरजीत का कहना है, ‘मेरे खिलाफ मानव तस्करी का आरोप कैसे लग सकता है। सभी लोग अपने परिवारवालों को पैसा भेजते थे। सोशल मीडिया पर फोटो पोस्ट करते थे। तस्करी करके ले जाए गए लोगों को सैलरी नहीं मिलती है।’
फिलहाल हरजीत और राजबीर विदेश मंत्रालय की निगरानी में हैं। मंत्रालय का कहना है कि उन्हें जान का खतरा हो सकता है। वहीं, दूसरी तरफ 39 लोगों के परिवारवालों को 2 साल बाद भी समझ नहीं आ रहा कि उनके भाई, पति, बेटा जिंदा है या नहीं।

कैराना मामले में आया एक नया मोड़, राजनीतिक लाभ के लिए भाजपा सांसद करा रहे थे सांप्रदायिक ध्रुवीकरण !!

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NewBuzzIndia:

उत्तर प्रदेश के कैराना मामले में डीआईजी एके राघव ने डीआईजी मुख्यालय को एक रिपोर्ट भेजी है जिसने इस पूरे मामले में एक नया मोड़ दे दिया है। इस रिपोर्ट में कई खुलासे हुए हैं। इसमें कहा गया है कि, कथित पलायन करने वाले हिंदुओं की लिस्ट बनाने वाले भाजपा सांसद हुकुम सिंह ने ये सब सिर्फ इसलिए किया क्योंकि वो यूपी चुनाव में अपनी बेटी को लड़वाना चाहते हैं, जिसके लिए वो अपनी बेटी को जीत दिलाने के लिए साम्प्रदायिक ध्रुवीकरण करवा रहे हैं।
ये ज्ञात हो की हुकुम सिंह ने ही एक लिस्ट जारी की थी जिसमे उन्होंने इस बात का ज़िक्र किया कि किसी विशेष समुदाय के डर और उनकी दहशत से भारी संख्या में हिंदुओं का वहां से पलायन हुआ है।

11 जून को डीजीपी हेडक्वार्टर को भेजी गई रिपोर्ट में डीआईजी ने बताया कि शामली जिले के कैराणा, झिंझाना, कांधला कस्बे में हिंदू और मुस्लिम दोनों समुदाय के लोग रहते हैं। यहां 85 फीसदी मुस्लिम और 15 फीसदी हिंदू आबादी है। आने वाले चुनाव में फायदा उठाने के लिए भाजपा और अन्य सहोयगी दल सांप्रदायिक माहौल बना रहे हैं। साथ ही रिपोर्ट में बड़ी सांप्रदायिक घटना की भी संभावना जताई है। रिपोर्ट में कहा गया है कि ये छोटी घटनाएं तुल देने की वजह से बड़ा रूप धारण कर सकती हैं।

जानिए वो 10 मुद्दें जिन पर मोदी कभी कुछ बोल ना पाए, सरकार भी रही बैकफुट पर

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NewBuzzIndia | Exclusive:

केंद्र में भाजपा सरकार के आने के पूर्व भाजपा ने अनेकों वादे किए। इन वादों में से मोदी सरकार ने कुछ पुरे किए तो वहीं बहुत से वादों पर चुप्पी साधी रखी है। इसी तरह प्रधानमन्त्री नरेंद्र मोदी ने भी कई मसलों पर कुछ नही कहा और बिलकुल चुप रहे।

हम आपको उन महत्वपूर्ण मुद्दों के बारे में बता रहे है जिन पर आवश्यक होने पर भी मोदी चुप रहे है-

1. राम मंदिर :-
भाजपा ने जब पहली बार राजनीती में जगह बनाई थी तब से राम मंदिर के मुद्दे को सबसे ऊपर उठाया था, पर अभी भी मोदी इस मुद्दे पर चुप है। और यह मुद्दा वैसा ही है जैसा पहले था।

2. धारा 370 :-
लोकसभा चुनाव के वक़्त मोदी के वादों में धारा 370 सबसे ऊपर था, पर अब मोदी इससे यू-टर्न लेते हुए दिखाई दे रहे है।

3. JNU मुद्दा :-
यह एक ऐसा मुद्दा था जिसने सरकार की जड़े हिला कर रख दी, पर फिर भी मोदी इससे दूर ही रहे।

4. व्यापम :-
यह भाजपा सरकार के सबसे बड़े घोटालों में से एक है, जिसमे कई लोगों की जान तक चली गयी, यह मुद्दा अभी भी नही सुलझा है। इस पर भी मोदी ने कोई रिएक्शन नही दिया।

5. काला धन :-
भाजपा को जीत दिलाने का यह सबसे बड़ा हथियार था, जिसमे विदेशो में जमा काला धन वापस लाने की बात कही गयी थी, पर अब तक ऐसा कुछ भी नही हुआ।

6. अख़लाक़ :-
अख़लाक़ एक ऐसा मुद्दा बन गया जिसमे देश में सहिष्णुता और असहिष्णुता के बीच जंग छिड़ गयी, पर इससे भी मोदी दूर भागते दिखे।

7. महंगाई:
वादों पर ध्यान दिया जाए तो मंहगाई को कम करने की बात कही गयी थी, पर फिलहाल स्थिति इसके बिलकुल विपरीत है।

8. चीन:
लोकसभा चुनाव के वक़्त, प्रचार के महत्वपूर्ण मुद्दों में चीन का मुद्दा अहम था। लगातार चीन का भारत के ज़मीन पर कब्ज़ा, अरुणांचल प्रदेश के कई हिस्सों को अपना कहना जैसे कई मुद्दे थे जिनपर उम्मीद की जा रही थी कि मोदी सरकार का रुख सख्त होगा। पर जैसे जैसे दिन ढले, इन मुद्दों को ठंडे बस्ते में डाल के भूल गयी सरकार।

9. डिग्री विवाद:
केजरीवाल के द्वारा उछाला गया  मोदी की डिग्री का विवाद, इस पर भी मोदी कभी खुलकर सामने नही आये।

10. पत्नी:
यह मुद्दा मोदी के निजी जीवन का है। मोदी ने कभी सामने आकर अपनी पत्नी का नाम उजागर नही किया।

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प्रधानमंत्री मोदी की गुगली से बौखलाया हाफ़िज़ सईद, दिया ड्रोन उड़ाने की धमकी

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भारत-अमेरिका की बढ़ती नजदीकियों से अब आतंकवादियों की बौखलाहट बढ़ने लगी हैं। आतंकवादी संगठन जमात उद-दावा प्रमुख और 2008 के मुंबई हमलों के साजिशकर्ता हाफिज सईद का कहना है कि अगर पाकिस्तानी सरजमीं में अमेरिका का कोई भी ड्रोन दिखता है तो उसे तुरंत मार गिराया जाए क्योंकि अमेरिका और भारत दोनों ही पाकिस्‍तान के खिलाफ दुश्‍मनी का भाव रखते हैं। उसने कहा कि भारत को अमेरिका का समर्थन हासिल है इसलिए अमेरिकी ड्रोन को पाक में नहीं घुसने देना चाहिए।

शुक्रवार की नमाज के बाद हाफिज ने भीड़ से कहा कि हम आर्मी चीफ से आग्रह करते हैं और वायुसेना प्रमुख से कहते हैं कि यह उनकी ड्यूटी है कि अगर कोई भी ड्रोन पाकिस्‍तानी सीमा में आता है तो वे उसे मार गिराएं और उसका माकूल जवाब दें।

बता दें कि अफगान तालिबान चीफ मुल्‍ला मंसूर को मारने के लिए अमेरिका ने पाकिस्‍तान की सरजमीं पर 21 मई को जो ड्रोन हमला किया था, उसके खिलाफ हाफिज का संगठन जमात उद-दावा पाकिस्‍तान के प्रमुख शहरों में विरोध प्रदर्शन करने वाला है। इस दौरान वो  भाषण भी देगा।

आइए जाने रमज़ान के आध्यात्मिक, शारारिक और मानसिक फायदे

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किसी भी धर्म का मुख्य उद्देश्य मनुष्य की भलाई और बेहतरी होती है। जीवन को एक अनुशासन और लयबद्ध तरीके से जीना, जिससे व्यक्ति को आत्मिक एवं शारारिक शांति हासिल करना ही प्राथमिकता होती है। यही कारण है कि सभी पंथों में इस सुकून, चैन और शांति को प्राप्त करने के राह को अलग अलग तरह से समझाया गया है।
आइए समझते हैं कि इस्लाम में रमज़ान का महीना किस तरह से आत्मा, मन और शारीर के लिए महत्वपूर्ण है।

रमजान इस्लाम का सबसे पवित्र और आध्यात्मिक और शारीरिक रूप से महत्वपूर्ण है क्योंकि इस महीने में मुसलमानों पर रोजा रखना फर्ज है जिसका अर्थ है कि सुबह से शाम तक हर खाने पीने के साथ हर अवैध काम से परहेज करना और शारीरिक और मांसिक रूप से नियंत्रण रखना है जो समाज और मानवता के लिए एक उपहार से कम नहीं है।

इस पवित्र महीने में रोजे रखना सभी बालिग और स्वस्थ्य लोगों के लिए वाजिब (अनिवार्य) बताया गया है। बीमार, बूढ़े, सफर कर रहे लोगों, गर्भवती महिलाओं और दूध पिलाने वाली माओं को रोजे रखने या ना रखने की आजादी दी गई है। मासिक धर्म से गुजर रही महिलाओं के लिए भी रोजा रखने की मनाही है। मासिक धर्म के खत्म होने के बाद रोजा रखना जरूरी है।

रोजा का अर्थ

रोजा का सही अर्थ सुबह से संध्या तक केवल खाने पीने को छोड़ देना नहीं है बलकि रोजा जिसे अरबी में सौम कहा जाता है का अर्थ रुकना है और अपनी इंद्रियों को नियंत्रण करना है। अर्थात पेट का रोजा जिसका अर्थ है कि रोजे के समय कुछ न खाये पिये और उसके पश्चात रिश्वत जैसे अवैध पैसे से खरीदा गया भोजन न करे, आंखों का रोज अर्थात किसी बहू बेटी को गंदी और हवस भरी नजर से न देखे, जुबान का रोजा अर्थात झूठ न बोले, किसी की बुराई न करे, किसी पर गलत आरोप न लगाए, किसी को बुरा भला न कहे, किसी को अपशब्द न कहे आदि, कान का रोजा अर्थात किसी की बुराई न सुने, हाथ पैर का रोजा अर्थात किसी का अधिकार न छीने और न ही पर अत्याचार करे। बलकि दूसरों का हाथ थामे और पीड़ितों की सहायता के लिए आगे बढ़े, तथा दिल और दिमाग में ईष्वर की श्रद्धा हो एंव अपनी भावनाओं पर अंकुश लगाए ताकि गलत रास्तों पर न जा सके।

इसी कारण इस महीने में इबादत का 70 गुना सवाब रखा गया है। इस प्रकार रोजा मानव जीवन की समृद्धि का एक मुख्य स्रोत बन जाएगा। इसी भावना को प्रदर्शित करने के लिए इस महीने में अफतार देने पर बल दिया गया है ताकि इस समय किसी के मन में अमीर गरीब, शक्तिशाली निर्बल, ऊंच नीच की भावना मिट जाए और सभी एक ही स्थान पर बैठ कर ईष्वर की इस नीति को समझ कर उच्च समाज की स्थापना कर सकें।

इस एक महीने में यदि सही रूप से रोजा रखा तो बाकी महीनों में भी वह इसी प्रकार का व्यवहार करेगा क्योंकि उसे इसकी आदत हो चुकी होगी क्योकि रोजा मनुष्य के संयम की परीक्षा है।

रोजा का आध्यात्मिक लाभ

रोजा न केवल मानव जीवन के लिए आध्यात्मिक रूप से लाभदायक है बलकि इस प्रकार का रोजा समाज की शांति और समृद्धि का कारण है।

रोजा द्वारा भावनाओं और हवस पर काबू पाया जा सकता है।

रोजा, अन्य लोगों के अधिकारों से हनन से बचाता है और दुसरों की सहायता के लिए प्रोत्साहित करता है।

रोजा द्वारा मन और मस्तिष्क पर नियंत्रण किया जा सकता है जिससे समाज शांति की ओर अग्रसर होगा।

रोजा का शारीरिक लाभ

पिछले युगों में रोजा को खास महत्व प्राप्त था और पाइथागोरस, सुकरात और इब्ने सीना जैसे हकीम रोजा द्वारा बहुत से रोगों का इलाज किया करते थे।

रूस के प्रसिद्ध विशेषज्ञ डॉक्टर एलेक्सी सोफ्रीन का कहना है कि साल भर निरंतर खाना उपयोग करने से मनुष्य के शरीर में कुछ ऐसे पदार्थ और ऊर्जा उत्पन्न हो जाते है जो बाद में हानिकारक एंव विषैला हो जाता है लेकिन रोजा रखने से शरीर उस आंत्रिक ऊर्जा का सेवन करता है जिसके कारण शरीर स्वस्थ हो जाता है और रोजा एक विशेष बायोलोजिक इलाज है।

रोजा डिप्रेशन का बेहतरीन इलाज है क्योंकि यह मनुष्य में आशा और आत्मविश्वास जगाता है।

रोजा पाचन तंत्र को आराम देता है जिससे अच्छा फिज़ियोलोजिक प्रभाव डालता है।

इसके अतिरिक्त भी विश्व के विख्यात विद्वानों ने रोजे पर शोध करके इसके सामाजिक, आध्यात्मिक और शारीरिक लाभों का व्याख्यान किया है।

रमजान मानता के लिए उपहार

यूंतो इस्लाम का अर्थ ही शांति है लेकिन इस्लामी कैलेंडर का रमजान महीना न केवल मुसलमानों के लिए बलकि कुल मानवता के लिए शांति का संदेश और समाज की समृद्धि को लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है और रोजा मानव के लिए सामाजिक, आध्यात्मिक और शारीरिक रूप से अत्यंत लाभदायक है और कुल मानव जाति के लिए एक उपहार से कम नहीं है क्योंकि इस महीने में लोगों को भावनाओं और हवस पर नियंत्रण करना और दूसरों की सहायता करना, दूसरों के अधिकारों का करने से परहेज करना, शारीरिक, मांसिक और आध्यात्मिक रूप से स्वस्थ रहने के गुर सिखाकर परीक्षा ली जाती है।

इसी कारण यदि धर्मों और सभ्यताओं का इतिहास खंगाला जाए तो बहुत से धर्मों में अलग अलग तरीके से रोजा का कांसेप्ट आपको अवश्य नजर आएगा जैसे युनान और रोम की सभ्यता एंव हिंदू, ईसाई और यहूदी धर्मों में विभिन्न प्रकार से रोजा और उपवास का विश्वास पाया जाता रहा है।मजान इस्लाम का सबसे पवित्र और आध्यात्मिक और शारीरिक रूप से महत्वपूर्ण है क्योंकि इस महीने में मुसलमानों पर रोजा रखना फर्ज है जिसका अर्थ है कि सुबह से शाम तक हर खाने पीने के साथ हर अवैध काम से परहेज करना और शारीरिक और मांसिक रूप से नियंत्रण रखना है जो समाज और मानवता के लिए एक उपहार से कम नहीं है।

इस पवित्र महीने में रोजे रखना सभी बालिग और स्वस्थ्य लोगों के लिए वाजिब (अनिवार्य) बताया गया है। बीमार, बूढ़े, सफर कर रहे लोगों, गर्भवती महिलाओं और दूध पिलाने वाली माओं को रोजे रखने या ना रखने की आजादी दी गई है। मासिक धर्म से गुजर रही महिलाओं के लिए भी रोजा रखने की मनाही है। मासिक धर्म के खत्म होने के बाद रोजा रखना जरूरी है।

रोजा का अर्थ

रोजा का सही अर्थ सुबह से संध्या तक केवल खाने पीने को छोड़ देना नहीं है बलकि रोजा जिसे अरबी में सौम कहा जाता है का अर्थ रुकना है और अपनी इंद्रियों को नियंत्रण करना है। अर्थात पेट का रोजा जिसका अर्थ है कि रोजे के समय कुछ न खाये पिये और उसके पश्चात रिश्वत जैसे अवैध पैसे से खरीदा गया भोजन न करे, आंखों का रोज अर्थात किसी बहू बेटी को गंदी और हवस भरी नजर से न देखे, जुबान का रोजा अर्थात झूठ न बोले, किसी की बुराई न करे, किसी पर गलत आरोप न लगाए, किसी को बुरा भला न कहे, किसी को अपशब्द न कहे आदि, कान का रोजा अर्थात किसी की बुराई न सुने, हाथ पैर का रोजा अर्थात किसी का अधिकार न छीने और न ही पर अत्याचार करे। बलकि दूसरों का हाथ थामे और पीड़ितों की सहायता के लिए आगे बढ़े, तथा दिल और दिमाग में ईष्वर की श्रद्धा हो एंव अपनी भावनाओं पर अंकुश लगाए ताकि गलत रास्तों पर न जा सके।

इसी कारण इस महीने में इबादत का 70 गुना सवाब रखा गया है। इस प्रकार रोजा मानव जीवन की समृद्धि का एक मुख्य स्रोत बन जाएगा। इसी भावना को प्रदर्शित करने के लिए इस महीने में अफतार देने पर बल दिया गया है ताकि इस समय किसी के मन में अमीर गरीब, शक्तिशाली निर्बल, ऊंच नीच की भावना मिट जाए और सभी एक ही स्थान पर बैठ कर ईष्वर की इस नीति को समझ कर उच्च समाज की स्थापना कर सकें।

इस एक महीने में यदि सही रूप से रोजा रखा तो बाकी महीनों में भी वह इसी प्रकार का व्यवहार करेगा क्योंकि उसे इसकी आदत हो चुकी होगी क्योकि रोजा मनुष्य के संयम की परीक्षा है।

रोजा का आध्यात्मिक लाभ

रोजा न केवल मानव जीवन के लिए आध्यात्मिक रूप से लाभदायक है बलकि इस प्रकार का रोजा समाज की शांति और समृद्धि का कारण है।

रोजा द्वारा भावनाओं और हवस पर काबू पाया जा सकता है।

रोजा, अन्य लोगों के अधिकारों से हनन से बचाता है और दुसरों की सहायता के लिए प्रोत्साहित करता है।

रोजा द्वारा मन और मस्तिष्क पर नियंत्रण किया जा सकता है जिससे समाज शांति की ओर अग्रसर होगा।

रोजा का शारीरिक लाभ

पिछले युगों में रोजा को खास महत्व प्राप्त था और पाइथागोरस, सुकरात और इब्ने सीना जैसे हकीम रोजा द्वारा बहुत से रोगों का इलाज किया करते थे।

रूस के प्रसिद्ध विशेषज्ञ डॉक्टर एलेक्सी सोफ्रीन का कहना है कि साल भर निरंतर खाना उपयोग करने से मनुष्य के शरीर में कुछ ऐसे पदार्थ और ऊर्जा उत्पन्न हो जाते है जो बाद में हानिकारक एंव विषैला हो जाता है लेकिन रोजा रखने से शरीर उस आंत्रिक ऊर्जा का सेवन करता है जिसके कारण शरीर स्वस्थ हो जाता है और रोजा एक विशेष बायोलोजिक इलाज है।

रोजा डिप्रेशन का बेहतरीन इलाज है क्योंकि यह मनुष्य में आशा और आत्मविश्वास जगाता है।

रोजा पाचन तंत्र को आराम देता है जिससे अच्छा फिज़ियोलोजिक प्रभाव डालता है।

इसके अतिरिक्त भी विश्व के विख्यात विद्वानों ने रोजे पर शोध करके इसके सामाजिक, आध्यात्मिक और शारीरिक लाभों का व्याख्यान किया है।

रमजान मानता के लिए उपहार

यूंतो इस्लाम का अर्थ ही शांति है लेकिन इस्लामी कैलेंडर का रमजान महीना न केवल मुसलमानों के लिए बलकि कुल मानवता के लिए शांति का संदेश और समाज की समृद्धि को लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है और रोजा मानव के लिए सामाजिक, आध्यात्मिक और शारीरिक रूप से अत्यंत लाभदायक है और कुल मानव जाति के लिए एक उपहार से कम नहीं है क्योंकि इस महीने में लोगों को भावनाओं और हवस पर नियंत्रण करना और दूसरों की सहायता करना, दूसरों के अधिकारों का करने से परहेज करना, शारीरिक, मांसिक और आध्यात्मिक रूप से स्वस्थ रहने के गुर सिखाकर परीक्षा ली जाती है।

इसी कारण यदि धर्मों और सभ्यताओं का इतिहास खंगाला जाए तो बहुत से धर्मों में अलग अलग तरीके से रोजा का कांसेप्ट आपको अवश्य नजर आएगा जैसे युनान और रोम की सभ्यता एंव हिंदू, ईसाई और यहूदी धर्मों में विभिन्न प्रकार से रोजा और उपवास का विश्वास पाया जाता रहा है।