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Regional Party of Bihar.

बिहार: अब विधायक की डिग्री आई घेरे में,12 वर्ष की उम्र में ग्रेजुएशन और 13 वर्ष में कर चुकी थी बी.एड.

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NewBuzzIndia:

बिहार आज कल लगातार अपने शिक्षा के बदहाल स्तर को ले कर देश भर में चर्चा का केंद्र बना हुआ है। अभी बिहार बोर्ड टॉपर्स फर्ज़ीवाड़े के कारण विवाद में घिरा हुआ है की एक और नयी मुसीबत सामने आ खड़ी हुई है। बिहार शिक्षा बोर्ड के पूर्व अध्यक्ष लालेश्वर प्रसाद तथा उनकी पत्नी उषा सिन्हा जो की जनता दल(यू) की पूर्व विधायक भी है सरकार के लिए नई फजीहत बन गए। उषा सिन्हा का शैक्षिक रिकॉर्ड उनके लिए समस्या का कारण बन गया है।

उषा सिंह ने 2010 में बिहार विधानसभा चुनाव के लिए उन्होंने जो हलफनामा दिया था, उसके अनुसार उन्होंने महज 8 वर्ष की उम्र में ही दसवीं पास कर लिया था, 10 वर्ष की उम्र में 12वीं पास, 12 वर्ष की उम्र में अपनी ग्रेजुएशन की डिग्री तो 13 वर्ष की उम्र में बीएड भी कर लिया था।

बिहार बोर्ड व विवि सूत्र बताते हैं कि जिस उम्र में ऊषा सिन्हा के उपरोक्त परीक्षाओं के उत्तीर्ण होने की बात कही जा रही है, वह कतई संभव नहीं है। इस बाबत बिहार बोर्ड के अधिकारी कुछ भी बोलने से कतरा रहे हैं, लेकिन उन्हें इस बात से इंकार नहीं कि अगर मामले की जांच हो तो उम्र या डिग्री का कोई नया घोटाला सामने आने की आशंका है। ऊषा सिन्हा फिलहाल फरार हैं, इसलिए इस बाबत उनका पक्ष ले पाना संभव नहीं हो सका।

जंगलराज रिटर्न्स: बिहार भाजपा सांसद को मिली ‘चाकू’ से मारने की धमकी, गृह मंत्रालय ने बढ़ाई सुरक्षा

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#newbuzzindia/औरंगाबाद । बिहार में नितीश सरकार के आने के बाद से लोगो और विपक्षी दलों ने ‘जंगलराज 2’ आने की बाते कही थी। अब यह बात लोगो को सच होती दिखाई दे रही है। कभी इंजीनियर की हत्या तो कभी पुलिसकर्मी की।

ताजा मामला बिहार के औरंगाबाद सांसद का है। औरंगाबाद सांसद सुशिल कुमार सिंह को एक फोन के जरिये चाकू से मारने की धमकी मिली है। फोन के तुरंत बाद ही सांसद ने एसपी से संपर्क करने की कोशिश भी की, पर फोन करने वाले का कुछ पता नही चला।

दरअसल, सांसद सुशील कुमार सिंह रात 7:30 बजे पटना एयरपोर्ट पर थे तभी उनके मोबाइल पर किसी ने फ़ोन किया। फ़ोन सांसद के अस्सिटेंट ने उठाया जिसके बाद फ़ोन करने वाले ने कहा की आप पंडित जी की मदद करते हैं आपको चाकू मार देंगे। इसके बाद कॉल कट गया। सांसद ने नंबर के मालिक के बारे में जानने के उद्देश्य से ट्रू कॉलर पर उक्त नंबर को डाला तो माओवादी नाम उभरा।

इसके बाद सांसद ने एसपी बाबू राम के सरकारी नंबर पर फ़ोन मिलाया लेकिन बात नहीं हो सकी। सांसद इसके बाद दिल्ली के लिए रवाना भी हो गए। विदित को सांसद सिंह पर खतरे को देखते हुए गृह मंत्रालय के निर्देश पर उन्हें सीआरपीएफ जवान उपलब्ध कराये गए हैं सुरक्षा श्रेणी बढ़ा दी गई है।

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बिहार: जानिए बिहार में कैसे बने फ़र्ज़ी टॉपर

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NewBuzzIndia:

बिहार के इंटरमीडिएट एग्जाम के रिजल्ट के बाद एक टीवी इंटरव्यू में आर्ट्स और विज्ञान विषय के टॉपरों का का पर्दाफाश हुआ है, इस मामले में हो रहे रोज़ नए खुलासों से बिहार शिक्षा बोर्ड की नींद हराम हो गई है। इस काण्ड में अभी तक पांच छात्रों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई है।  वही बिहार बोर्ड के अध्यक्ष लालकेश्वर सिंह और बिशुन राय कॉलेज के संचालक बच्चा राय अभी तक फरार हैं।

पुलिस लगातार अपने तफ़तीस में लगी हुई है। घोटाले और गिरफ्तारियों की कड़ियों को जोड़ कर मामले की तह तक पहुँचने की कोशिश की जा रही है। इस पुरे घटना की छानबीन करने के लिए एसआईटी का गठन किया गया है, जिसने हाजीपुर स्थित बिसुन राय कॉलेज में गुरुवार शाम छापामारी भी की।

वहीं टॉपरों को लेकर देश में अपनी तरह के इस पहले घोटाले के बीच बड़ा सवाल ये है कि आखिर इन छात्रों ने टॉप किया कैसे? क्या इसके लिए कुछ छात्रों को विशेष तौर पर नकल करवाई गई या फिर बोर्ड के सेंटर लगवाने में हेराफेरी की गई या इन सबसे इतर कोई अन्य तरीका अपनाया गया।

अभी तक की जांच में टॉप करवाने का जो सच सामने आया है वो थोड़ा चौंकाने वाला है। तो चलिए आपको तफशील से बताते हैं वो सच जिससे जुड़ा है टॉपर बनाने का वो खेल जिसने बिहार की पूरी माध्यमिक शिक्षा व्यवस्‍था पर कालिख पोत दी है।

आइए जाने कैसे होती थी कॉपियों की हेरा फेरी

परीक्षाओं में पास कराने या टॉप करने की हेराफेरी के जितने भी मामले सामने आते हैं उनमें ज्यादातर मामले नकल या सामूहिक नकल कराने के ही होते हैं। लेकिन बिहार में टॉप कराने के मामले में बिल्कुल अलग तरीका अपनाया गया जिससे कहीं पर भी शक की गुंजाइश न रहे और न ही चोरी पकड़ में आ सके।

असल में फर्जीवाड़े का यह सारा खेल बच्चा राय और बोर्ड अधिकारियों की शह पर खेला जाता था। बच्चा राय अपने कालेज विशुन राय कालेज का सेंटर अपनी मर्जी से लगवाता था। इसके बाद कॉपियां कहां चेक होनी हैं ये भी वह खुद ही तय करता था। परीक्षा होने के बाद जब सारी कॉपियां जांच होने के लिए केंद्र पर पहुंच जाती थी तब ये सारा खेल शुरू होता था।

सूत्रों के अनुसार जिन छात्रों को टॉप करवाना या नंबर अच्छे रखवाने होते थे उनकी कॉपियां बंडल में से ढूंढकर निकाल ली जाती ‌थी। फिर उन कॉपियों के ऊपर के पिन खोलकर अंदर के पेज निकाल लिए जाते थे, फ्रंट पेज पहले वाला ही रखा जाता था।

इसी बीच एक व्यक्ति या छात्र इत्‍मीनान से सही सवालों के जवाब खाली उत्तर पुस्तिका में लिखते थे जिसके ऊपर का पेज उतारकर वापस पुरानी वाली कॉपी के फ्रंट पेज के अंदर डाल दिया जाता था। यह सारा काम इतने शातिर तरीके से किया जाता था कि कॉपी से छेड़छाड़ का अंदाजा लगाना मुश्किल होता था।

बिहार: सरकार के आदेश पर मारे गए 250 नीलगाय, केंद्र के दो मंत्री आए आमने सामने

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NewBuzzIndia:

बिहार के मोकामा में हुए 250 से ज्यादा नीलगायों की हत्या ने एक अलग सियासी बवंडर उठा दिया है। केंद्र ने बिहार सरकार के आग्रह पर हैदराबाद से दो शार्प शूटरों को बिहार में भेजा है।

बिहार के मोकामा में करीब 250 नीलगायों की गोली मारकर हत्या के मामले में केंद्र के दो मंत्री आमने-सामने आ गए हैं। केंद्रीय महिला और बाल विकास मंत्री मेनका गांधी ने इसके लिए पर्यावरण मंत्री प्रकाश जावड़ेकर को जिम्मेदार ठहराया है। वहीं जावड़ेकर का कहना है कि राज्यों के आग्रह के बाद ही जानवरों को मारने का आदेश दिया गया है।

मेनका गांधी ने तल्ख लहजे में कहा कि बिहार में पहली बार इतना बड़ा नरसंहार (नीलगायों का) हुआ है। यहां कोई इस काम के लिए तैयार नहीं हुआ तो बाहर से लोगों को बुलाया गया। इन्हें मारने की जरूरत क्यों है। जंगली जानवरों को मारना शर्म की बात है। इस घिनौने काम के लिए क्यों इजाजत दी गई है।

प्रकाश जावड़ेकर ने मेनका के बयान पर कहा, ‘किसने क्या कहा उस पर मैं प्रतिक्रया नहीं देता। जब किसानों को नुकसान होता है. ..बहुत तकलीफ होती है। अगर राज्य सरकार प्रस्ताव भेजती है तो ही हम किसी विशेष कार्य के लिए साइंटिफिक मैनेजमेंट के लिए राज्य सरकार के प्रस्ताव को मंजूरी दी जाती है। ये केंद्र का कार्यक्रम नहीं है। यह पहले से बने कानून के हिसाब से हो रहा है।

मेनका ने कहा कि पर्यावरण मंत्रालय हर राज्य को लिख रहा है कि आप बताओ किसको मारना है। हम इजाजत दे देंगे। बंगाल में उन्होंने कह दिया कि हाथी को मारें। हिमाचल को कहा कि हाथी को मारें। गोवा में कह दिया कि मोर को। अब कोई जानवर नहीं छूटा। चांदपुर में इतना अनर्थ हो रहा है कि उन्होंने 53 जंगली सुअर मारे हैं। अभी और 50 की इजाजत दी है। इस घटना के लिए पर्यावरण मंत्रालय जिम्मेदार है।

पर्यावरण मंत्री प्रकाश जावड़ेकर ने कहा कि राज्य सरकार प्रस्ताव देती है तो हम राज्य सरकार को मंजूरी देते हैं। ये केंद्र सरकार का नहीं राज्य सरकार का काम है। इसके लिए पहले से ही कानून बना हुआ है।

बिहार में लौटा ‘जंगलराज-2’, बेख़ौफ़ हुए बदमाश, दिनदहाड़े उप-महापौर को मारी गोली

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#newbuzzindia/पटना । बिहार में नितीश सरकार के आने के बाद से ही जंगलराज फिर से आने की बाते कही जाने लगी थी। फिर धीरे धीरे इस बात में लोगो को सच्चाई नजर आने लगी, कभी इंजीनियर की हत्या तो कभी पुलिस वाले की।

ताजा मामला आरा नगर निगम का है। यहाँ के उप महापौर बसंत सिंह को बाइक सवार तीन बदमाशों ने गोली मार दी। उन्हें इलाज के लिए सदर अस्पताल में भर्ती कराया गया जहां से उन्हें पटना रेफर कर दिया गया है। यह घटना जनपद आरा के  नवादा थाना क्षेत्र में गुरुवार तड़के करीब 5 बजे हुयी।

बताया जा रहा है कि बसंत सिंह अपने निजी आवास से सुबह मॉर्निंग वॉक के लिए निकले ही थे कि तभी बाइक पर सवार तीन बदमाशों ने उन पर ताबड़तोड़ गोलियां बरसा दी। इस घटना में बसंत गंभीर रूप से घायल हो गए। स्थानीय लोगों ने बसंत को सदर अस्पताल में भर्ती करवाया जहां उनकी स्थिति को गंभीर देखते हुए डॉक्टरों ने उन्हें पटना रेफर कर दिया।

मिली जानकारी के अनुसार  दो दिन पहले जनता दरबार में शिकायत लेकर आए कुछ असामाजिक तत्वों ने इस घटना को अंजाम दिया है।  वहीं पुलिस ने अपराधियों के धर पकड़ के लिए छापेमारी शुरू कर दी है। घटना के बाद इलाके में तनाव का माहौल है।

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चारा घोटाला: गायब हुई चारा घोटाले से जुडी महत्वपूर्ण फाइलें, क्या नितीश बचा रहे हैं लालू को ?

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बिहार के चर्चित चारा घोटाले में जिसमे करोड़ों रुपयों की हेरा फेरी हुई थी, उसमें एक नया मोड़ आया है। इस घोटाले से जुडी पशु कई फाइलें जो की पशु संसाधन विभाग में राखी हुई थीं, चोरी हो गई हैं। मुकद्दमा दर्ज़ कर पुलिस ने छानबीन शुरू कर दी है। फाइलें पटना स्थित पशु एवं मत्स्य संसाधन विभाग में रखी हुई थी। इस मामले में मुख्य आरोपी राष्ट्रीय जनता दल के प्रमुख और बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री लालू प्रसाद यादव हैं, जिन्हें इस मामले में छह साल की सज़ा भी सुनाई जा चुकी है।

जानकारी के अनुसार पटना के ओल्ड सेक्रेटरिएट पुलिस स्टेशन में इस संबंध में मुकद्दमा दर्ज कराया गया है। विभागीय सूत्रों के अनुसार पटना सचिवालय स्थित कार्यालय से तीन अलमारियों में रखी महत्वपूर्ण फाइलें चोरी हो गई हैं। इनमें से अधिकतर चारा घोटाले और उसमें आरोपी बनाए गए लोगों के संबंध में थी।

बताया जा रहा है कि इनमें पशु डॉक्टरों और कर्मियों की संलिप्तता के सबूत थे। हालांकि इस संबंध में 16 मई को मुकद्दमा दर्ज कराया जा चुका है लेकिन मामले का खुलासा अभी हुआ है।

इस बीच, बीजेपी नेता नितिन नवीन ने नीतीश कुमार की अगुआई में चल रही महागठबंधन सरकार की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए हैं। उन्‍होंने पूछा है कि क्‍या आरजेडी चीफ लालू प्रसाद यादव को बचाने की कोशिश की जा रही है? उन्‍होंने कहा, ‘नीतीश कुमार को बताना चाहिए कि वह कैसे और क्‍यों लालू प्रसाद यादव को बचा रहे हैं? गायब हुईं फाइलें उनसे जुड़ी हुई थीं। नीतीश कुमार की हरकत से बिहार का भविष्‍य प्रभावित हो रहा है।’