Home Tags Manmohan Singh

Tag: Manmohan Singh

नरेंद्र मोदी बोले: पाकिस्तान हमारे जवानों को मार रहा है और केंद्र सरकार दर्शक बनी बैठी है ।

0

Newbuzzindia: उरी में पाकिस्तान द्वारा 17 जवानों के मारे जाने के बाद twitter पर नरेंद्र मोदी का एक ट्वीट ट्रेंड कर रहा है । इस ट्वीट में नरेंद्र मोदी ने कहा है कि –

“भारत इस समय बहुत ही विकट परिस्थियों से गुजर रहा है । चीन हमारी सीमा में घुसपैठ कर रहा है । पाकिस्तान हमारे जवानों को मार रहा है और केंद्र सरकार दर्शक बानी बैठी है ”

मोदी द्वारा किये गए इस ट्वीट को देखकर लोग परेशान है । हालाँकि ट्वीट में की गई बात तो सही है लेकिन मोदी अपनी ही सरकार पर हमला क्यों करेंगे ।

गौरतलब है कि ये ट्वीट नरेंद्र मोदी द्वारा 2013 में किया था । उस समय सत्ता में कांग्रेस थी और प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह थे । विपक्ष में भाजपा थी और नरेंद्र मोदी कांग्रेस पर हमला कर रहे थे ।

ये रहा नरेंद्र मोदी द्वारा 2013 में किया गया ट्वीट
image

सवाल उठता है कि अब तो सत्ता में भाजपा है और नरेंद्र मोदी प्रधानमंत्री मोदी है । पाकिस्तान हमला भी कर रहा है । जवान भी मारे जा रहे है और केंद्र सरकार अभी भी दर्शक बनी बैठी है ।

मोदी नहीं मनमोहन सिंह ने दिया था ‘अच्छे दिन’ का नारा, कभी नहीं आते ‘अच्छे दिन’: नितिन गडकरी

0

आखिरकार​ केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी ने माना कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का मशहूर ‘अच्छे दिन’ का नारा दरअसल पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने दिया था, लेकिन यह नारा अब मोदी सरकार की गर्दन का बोझ बन गया है। गडकरी ने यहां एक कार्यक्रम में कहा, अच्छे दिन मानने से होता है। दिल्ली में एक एनआरआई समारोह में मनमोहन सिंह ने कहा था कि अच्छे दिन आएंगे।

गडकरी ने कहा, अच्छे दिन कभी नहीं आते। अच्छे दिन के नारे गले में फंसी हड्डी हैं। पूर्व सांसद विजय दर्डा के एक सवाल के जवाब में मंत्री ने कहा, हमने केवल अच्छे दिन शब्दों का प्रयोग किया और इसे शाब्दिक अर्थ में नहीं लिया जाना चाहिए। इसका मतलब यह होना चाहिए कि प्रगति हो रही है।

केंद्रीय मंत्री ने कहा, जब पूछा गया कि अच्छे दिन कब आएंगे, तो सिंह ने जवाब दिया था – भविष्य में। मोदी जी ने यही बात कही और अब यह हमारी गर्दन का बोझ बन गया है। मोदी ने पिछले लोकसभा चुनाव के दौरान अच्छे दिन के नारे का खूब इस्तेमाल किया था।

गडकरी ने अपनी बात को समझाने के लिए एक उदहारण दिया की अगर किसी व्यक्ति के पास साइकिल है तो वह मोटरसाइकिल चाहेगा, फिर जब वह मोटरसाइकिल खरीद लेता है तो अगला लक्ष्य कार होती है। इसलिए किसी को कभी यह महसूस नहीं होता कि अच्छे दिन आ गये।

हमारे गले में फंसी हड्डी के तरह है अच्छे दिन का नारा : नितिन गडकरी

0

Newbuzzindia: केंद्रीय परिवहन मंत्री और बीजेपी के वरिष्ठ नेता नितिन गडकरी ने लोकसभा चुनावों के दौरान इस्तेमाल किए गए पार्टी के ‘अच्छे दिन’ के नारे से पल्ला झाड़ते हुए कहा कि यह हमारे गले में फंसी हड्डी है.

मुंबई में उद्योग जगत के एक कार्यक्रम के दौरान जब गडकरी से देश के हालात के बारे में पूछा गया कि अच्छे दिन कब आएंगे, तो गडकरी ने कहा कि अच्छे दिन कभी नहीं आते.

उन्होंने कहा कि यह बात असल में मनमोहन सिंह की छेड़ी हुई थी. प्रवासी भारतीयों के कार्यक्रम में तत्कालीन प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने कहा था कि अच्छे दिन आने के लिए इंतजार करना होगा. उसी के जवाब में मोदी जी ने कहा कि हमारी सरकार आएगी, तो अच्छे दिन आएंगे. गडकरी ने कहा कि यह बात उन्हें पीएम मोदी ने ही बताई.

गडकरी ने मीडिया को उनके बयान को गलत अंदाज में पेश न करने की हिदायत देते हुए यह भी कहा कि हमारा देश अतृप्त आत्माओं का महासागर है, यहां जिसके पास कुछ है, उसे और चाहिए. वही पूछता है कि अच्छे दिन कब आएंगे?

उल्लेखनीय है कि गत लोकसभा चुनाव में बीजेपी ने अपने चुनावी कैंपेन का पूरा जोर इस कैचलाइन पर ही टिका दिया था कि ‘अच्छे दिन’ आएंगे. केंद्र में नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में सरकार बनने के बाद ये सवाल बीजेपी के नेताओं से लगातार पूछे जाने लगे कि अच्छे दिन कब आएंगे?

मौजूदा आर्थिक हालात से निपटने के लिए मनमोहन सिंह जैसे अर्थशास्त्री की जरूरत..!

1

Newbuzzindia: जेडीयू ने शनिवार को कहा कि वैश्विक स्तर पर मौजूदा आर्थिक हालात की स्थिति में भारत को पूर्व प्रधानमंत्री जैसे अर्थशास्त्री की जरूरत है। जेडीयू ने कहा कि ब्रिटेन के यूरोपीय यूनियन (ईयू) से अलग होने से पैदा हुए आर्थिक हालात के खेवनहार मनमोहन सिंह जैसे अर्थशास्त्री ही हो सकते हैं।

जेडीयू नेता अजय आलोक ने न्यूज एजेंसी एएनआई से कहा, ‘एक तरीके से यह अच्छा है, अब भारत ब्रिटेन से सीधे सौदा कर सकेगा। हमारे बीच सैन्य संबंध सुधरेंगे। लेकिन ईयू के साथ ज्यादा फायदा था। इस फैसले से 800 भारतीय कंपनियों पर सीधा असर होगा।

यहां तक कि हमारे शेयर बाजार पर भी इसका प्रभाव पड़ा। उन्होंने कहा, ‘मुझे उम्मीद है कि हमारे वित्त मंत्री और मुख्य आर्थिक सलाहकार समझदारी से काम लेंगे। ऐसे समय में देश को मनमोहन सिंह जैसे अर्थशास्त्री की जरूरत होगी।’

बता दें कि शुक्रवार को हुए जनमत संग्रह में ब्रिटेन के 52 फीसदी लोगों ने ईयू छोड़ने के पक्ष में मतदान किया है। 2015-16 में भारत और ब्रिटेन के बीच द्विपक्षीय व्यापार 1400 करोड़ डॉलर का रहा। हालांकि ईयू के साथ द्विपक्षीय व्यापार में भारी गिरावट दर्ज की गई है।

वर्ष 2014-15 में ईयू और भारत के बीच 9850 करोड़ डॉलर का व्यापार हुआ था, जबकि 2015-16 में यह 8840 करोड़ डॉलर रहा।

जानिए मोदी के आगे क्यों फ़ीके पड़ जाते हैं दुनिया भर के दिग्गज नेता

0

NewBuzzIndia:

देश के अंदर चाहे कितने भी प्रधानमंत्री मोदी के आलोचक हो, पर इस बात पर तो विरोधियों को भी ऐतराज़ नहीं होगा की मोदी ने विश्व भर में भारत का पक्ष मज़बूती से रखा है। अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर भारत की छवि को सुधरने और सवारने में मोदी का अथक योगदान रहा है।

आज प्रधानमंत्री मोदी ने भारत को एक और कामयाबी दिलाई। बातचीत के बाद स्विट्जरलैंड सरकार भारत को NSG मेम्बरशिप दिलाने के लिए राजी हो गयी साथ ही कालेधन पर भी एक दूसरे के सहयोग पर सहमति बनी। प्रधानमंत्री मोदी केवल दो ही वर्षों में दुनिया के पावरफुल नेताओं में गिने जाने लगे हैं, मोदी जहाँ भी जाते हैं वहां पर अपनी छाप जरूर छोड़ते हैं इसके अलावा भारत को एक मजबूत देश की तरह पेश करते हैं।

यह कहना गलत नहीं होगा कि एक मजबूत प्रधानमंत्री की वजह से देश भी मजबूत दिखता है। अक्सर देखने में आता है कि दुनिया के ज्यादातर नेता जॉइंट प्रेस स्टेटमेंट में लिखा हुआ भाषण पढ़ते हैं लेकिन मोदी के मामले में ऐसा नहीं है। मोदी अक्सर दिल और दिमाग से बोलते हैं, चाहे वे यूएस की संसद को संबोधित करें, भारत की संसद को संबोधित करें, रैलियों में भाषण दें या राष्ट्र प्रमुखों के साथ जॉइंट प्रेस स्टेटमेंट जारी करें।
आपने देखा होगा कि लिखा हुआ भाषण पढने वाले नेता उतना प्रभाव नहीं छोड़ पाते जिनता प्रभाव बिना देखे बोलने वाले नेता छोड़ते हैं। हम पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह की आलोचना नहीं करना चाहते लेकिन वे हमेशा लिखा हुआ भाषण पढ़ते थे और भाषण पढ़ते वक्त एक बार भी ऊपर की तरफ नहीं देखते थे, इससे वे कम विदेश जाते थे, कब आते थे, किसी नेता से क्या बात करते थे, किसी देश से क्या समझौता करते थे, पता नहीं चल पाता था।

लेकिन मोदी के मामले में ऐसा नहीं है, वे जब भी बोलते हैं बिना देखे बोलते हैं और कॉन्फिडेंस के साथ बोलते हैं। आज स्विट्जरलैंड में जॉइंट प्रेस स्टेटमेंट जारी करते वक्त भी ऐसा ही हुआ। स्विट्जरलैंड के राष्ट्रपति जॉन स्नाइडर अम्मान ने लिखा हुआ भाषण पढ़ा जबकि वे अपने ही देश में बोल रहे थे लेकिन मोदी ने सीना तानकर, आँखों में आँखें डालकर बिना देखे हुए अपनी बात कही। मोदी की यही खूबियाँ उन्हें दुनिया में सबसे ताकतवर नेताओं में शुमार करती जा रही हैं। आप खुद वीडियो देखिये, समझ जाएंगे कि मोदी में कितना कांफिडेंस है।

मनमोहन सरकार की योजनाओं के सामने मोदी की योजनाएं नारों से ज्यादा नहीं !

0

Newbuzzindia: अगर हम मनमोहन सिंह सरकार को इस नजरिए से देखें तो हमें सूचना का अधिकार, भोजन का अधिकार, आधार, डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर, शिक्षा का अधिकार, रोजगार का अधिकार जैसे कानून याद आते हैं। 

इन कानूनों का उद्देश्य भी साफ था- ये गरीब लोगों को ध्यान में रखकर बनाए गए थे। मोदी के कामकाज में इसके प्रति फोकस नहीं दिखता।  हो सकता है कि समय के साथ वह आए, लेकिन अभी वह नहीं है।  मेक इन इंडिया और स्वच्छ भारत अभियान कोई कानूनी पहल नहीं है, बल्कि नारे हैं। विदेश नीति: यह काफी अजीब बात है कि इस मामले में विशेषज्ञों की राय और आम लोगों की राय में काफी अंतर है। 

जो लोग मोदी को पहले साल के चश्मे से देख रहे हैं, वे काफी प्रभावित हैं। प्रधानमंत्री उस दौर में दुनिया भर के कई देशों में काफी भव्य कार्यक्रमों में शरीक हुए थे, लोग बडे पैमाने पर उन्हें सुनने के लिए आए थे।  इसे विदेश नीति की कामयाबी के तौर पर देखा जाता था, लेकिन ऐसा था नहीं।

वास्तविकता यह है कि मोदी की व्यक्तिगत कूटनीति एक तरह से नाकाम रही है और पाकिस्तान को लेकर हमारी नीति ऐसी है जिसे शायद ही कोई विशेषज्ञ समझा पाए।

NewBuzzIndia से फेसबुक पे जुड़ने के लिए हमारे फेसबुक पेज को लाइक करें..
**Like us on facebook**
[wpdevart_like_box profile_id=”858179374289334″ connections=”show” width=”300″ height=”150″ header=”small” cover_photo=”show” locale=”en_US”]

अगस्ता वेस्टलैंड घोटाले में कांग्रेस की मुसीबतें बड़ी , दलाल ने लिया सोनिया गांधी का नाम !

1

Newbuzzindia: अगस्ता वेस्टलैंड वीवीआईपी हेलीकॉप्टर डील के मामले में इटली की अदालत के फैसले ने भारतीय राजनीतिक गलियारों में वाकयुद्ध छेड़ दिया। सदन में नि:सहाय सी लग रही भाजपा को इटली की अदालत ने जैसे राहत का पिटारा ही दे दिया।

पूरे मामले में कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी (फैसले में सिग्नोरा गांधी) का नाम उठा तो भाजपा ने इस मुद्दे को हाथों-हाथ कैश करने की कोशिश शुरू कर दी। मोर्चा भी नव निर्वाचित सदस्य सुब्रहमण्यम स्वामी को सौंपा गया।

भारतीय रक्षा मंत्रालय ने दूतावास से इटली के मिलान कोर्ट के फैसले की पूरी जानकारी मांग ली है। इटली के मिलान कोर्ट ऑफ अपील्स के फैसले के मुताबिक, 2010 में हुई वीवीआईपी हेलीकॉप्टर डील में जमकर भ्रष्टाचार हुआ। अदालत ने पूर्व वायुसेना प्रमुख एसपी त्यागी को भी इसमें शामिल बताया। पूरे मामले में दलाल क्रिस्टियन मिशेल का नाम सामने आया।

यह बताता है कि भारत में डील पूरी करने के लिए सोनिया गांधी का राजी होना जरूरी था। सोनिया एमआई 8 हेलिकॉप्टर में उडऩा पसंद नहीं करती। इस संबंध में मिशेल ने 15 मार्च 2008 को फिनमैकानिका के तत्कालीन सेल्स प्रमुख पीटर ह्यूलेट को पत्र भेजा। इसके अनुसार कुल 30 मिलियन यूरो रिश्वत दी गई।

क्या है पूरा मामला ?
वीवीआईपी लोगों के लिए फिनमैकानिका कंपनी से अगस्ता वेस्टलैंड हेलीकॉप्टर खरीदे जाने थे। भारत के पास पहले ही मिग-8 और मिग-17 विमान थे। साल 2012 में कंपनी को 12 अगस्ता वेस्टलैंड हेलीकॉप्टरों के ऑर्डर दिए गए। 2005 में सारी प्रक्रिया शुरू हुई और फरवरी 2010 में सौदा हो गया। 12 हेलीकॉप्टरों के लिए करीब 4,000 करोड़ रुपये देने की घोषणा। कंपनी ने नौ हेलीकॉप्टर नहीं भेजे केवल तीन ही भारत को सप्लाई किए।

इंटीग्रेटी क्लाज
यूपीए सरकार ने 2005 में इंटीग्रेटी क्लॉज लागू की थी। इसके तहत रक्षा सौदे में शामिल हर किसी को इस क्लॉज पर हस्ताक्षर करना होता था। इसमें बाकायदा लिखा था कि अगर सौदे में दलाल के हाथ होने का पता लगा तो डील रद्द हो जाएगी। पैसा वापस देकर कंपनी को ब्लैक लिस्टेड किया जाएगा। वीवीआईपी हेलीकाप्टर डील में इटली के दावों के बावजूद तीन दलाल सामने आए। तीनों पर आरोप था इन्होंने डील के लिए भारतीय अफसरों को 400 से 500 करोड़ रुपए की रिश्वत दी।

मनमोहन सिंह का भी आया नाम
इटली की कोर्ट के आर्डर में सोनिया गांधी, पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह, कांग्रेस नेता अहमद पटेल, ऑस्कर फर्नांडीस और पूर्व एनएसए एमके नारायणन का नाम। फैसले में यह भी कहा गया कि 12 हेलीकाप्टरों की इस डील को पूरा करवाने के लिए उस समय सोनिया गांधी के पॉलिटिकल सेक्रेटरी अहमद पटेल को 18 मिलियन डॉलर दिए गए थे (पेज संख्या 225)। कांग्रेस के टॉप लीडर्स को कुल 125 करोड़ रुपये रिश्वत के तौर पर मिले।

NewBuzzIndia से फेसबुक पे जुड़ने के लिए हमारे फेसबुक पेज को लाइक करें..
**Like us on facebook**
[wpdevart_like_box profile_id=”858179374289334″ connections=”show” width=”300″ height=”150″ header=”small” cover_photo=”show” locale=”en_US”]

पीएम मोदी के विदेश दौरों पर खर्च 134 करोड़ एयर इंडिया को नही चूका रही मोदी सरकार !

0

Newbuzzindia: एयर इंडिया का पीएम मोदी के ऑफिस पे 134 कड़ोड़ का बकाया है। ये जानकारी RTI के जवाब पर मिली है। ये सारा खर्चा पीएम के विदेश दौरों पे एयर इंडिया को हवाई सेवाए देने का है।

एयर इंडिया ने पीएम की सभी दौरों का कुल खर्चे का बिल पीएम ऑफिस को भेज दिया है लेकिन पीएमओ ने अभी बकाया नही चुकाया है।

पीएम के विदेशी दौरे पर RTI करने वाले लोकेश बत्रा ने कहा है कि एयर इंडिया को भुगतान में देरी से एयर इंडिया की हालत खस्ता है पीएमओ को एयर इंडिया का बकाया जल्दी दे देना चाहिये ताकि एयर इंडिया अपनी वितीय ज़रूरत को पूरा कर सके।

29 जनवरी 2016 को केंद्र सरकार ने पहले के पीएम मनमोहन सिंह के विदेशी दौरों का 147 कड़ोड़ का बकाया चुकाया था।

NewBuzzIndia से फेसबुक पे जुड़ने के लिए हमारे फेसबुक पेज को लाइक करें..
**Like us on facebook**
[wpdevart_like_box profile_id=”858179374289334″ connections=”show” width=”300″ height=”150″ header=”small” cover_photo=”show” locale=”en_US”]

ओबामा को भाए मोदी , जून में फिर बुलाया अमेरिका !

0

Newbuzzindia: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी इसी साल जून में अमेरिका के दौरे पर जा सकते हैं। अगर ऐसा होता है तो वो अपने दो साल के कार्यकाल में चौथी बार अमेरिका जाएंगे। इस बार पीएम मोदी वॉशिंगटन के स्टेट विजिट पर होंगे। ये दौरा दोनों देशों के बीच की द्विपक्षीय वार्ता के लिहाज से काफी अहम माना जा रहा है। अमेरिकी राष्ट्रपति बराक ओबामा ने इस मुलाकात को लेकर उत्सुकता जताई है।

स्टेट विजिट दो देशों के रिश्तों को मजबूत करने का सबसे अहम माना जाता है। इसके दौरान दोनों देशों के बीच दोस्ताना संबंधों को मजबूत करने के लिए पॉम्प, आधिकारिक डिनर और कई आयोजन किए जाते हैं।

जाहिर है कि पीएम मोदी के स्टेट विजिट से बराक ओबामा अपने कार्यकाल में भारत-अमेरिका के संबंधों को एक बेहतर मुकाम पर ले जाना चाहेंगे, क्योंकि यह राष्ट्रपति के तौर पर उनके कार्यकाल में किसी नेता की आखिरी स्टेट विजिट होगी। मिल रही जानकारी के मुताबिक, बराक ओबामा अपना कार्यकाल खत्म होने से पहले मोदी से मिलना चाहते थे।

पीएम मोदी और ओबामा की ये मुलाकात के अमेरिका के ‘एशिया फोकस’ और भारत की ‘लुक ईस्ट’ पॉलिसी पर चर्चा के लिहाज से बेहद खास होगी। बता दें इससे पहले स्टेट विजिट के तौर पर साल 2009 में मनमोहन सिंह अमेरिका गए थे।

ओबामा ने चीनी राष्ट्रपति हू जिंताओं का 2011 और शी जिनपिंग का 2015 में स्टेट विजिट के दौरान स्वागत किया था। इनके अलावा ब्रिटेन, फ्रांस, मैक्सिको और साउथ कोरिया के प्रमुख भी स्टेट विजिट पर जा चुके हैं।

NewBuzzIndia से फेसबुक पे जुड़ने के लिए हमारे फेसबुक पेज को लाइक करें..
**Like us on facebook**
[wpdevart_like_box profile_id=”858179374289334″ connections=”show” width=”300″ height=”150″ header=”small” cover_photo=”show” locale=”en_US”]

प्रधानमंत्री मोदी की सऊदी अरब यात्रा बिगड़ेगी पकिस्तान का खेल..

0

Newbuzzindia: भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की हालिया सऊदी अरब यात्रा ने पाकिस्तान का खेल खराब कर सकते हैं, ये मानना है अमरीकी विशेषज्ञ का। इस संबंध में एक शीर्ष अमरीकी विशेषज्ञ का कहना है कि इससे पाकिस्तान को परेशानी हो सकती है क्योंकि आर्थिक और रणनीतिक अवसर भारत को तेल समृद्ध खाड़ी देश के करीब ला रहे हैं।

अमरीकी थिंक टैंक इंडिया इनिशिएटिव आफ दी हडसन इंस्टीट्यूट की अपर्णा पांडे ने कहा, ‘‘सालों तक सऊदी अरब को एक प्रमुख सहयोगी और आर्थिक मददगार मानने वाले पाकिस्तान को अब लग सकता है कि वह अपने प्रतिद्वंद्वी भारत के हाथों अपने इस संरक्षक को खो रहा है। मोदी पिछले सप्ताह सरकारी यात्रा पर रियाद पहुंचे थे और इस यात्रा का राजनयिक महत्व था।’’

उन्होंने कहा कि मोदी की यात्रा और उनका गर्मजोशी से किया गया स्वागत पाकिस्तानी नेताओं को यह याद दिलाता है कि अंतर्राष्ट्रीय संबंध राष्ट्रीय हितों पर टिके होते हैं, केवल धर्म आधारित विचारधारा पर नहीं।’’

पांडे ने कहा, ‘‘आर्थिक और रणनीतिक मुद्दे भारत और सऊदी अरब को करीब ला रहे हैं, वैसे ही जैसे ये दोनों क्षेत्र भारत और अन्य देशों के संबंधों को आगे बढ़ा रहे हैं।’’  उन्होंने कहा कि पाकिस्तानी भारत और पाकिस्तान के बीच हमेशा संघर्ष को ही देखते हैं और एेसे में यह स्पष्ट रूप से भारत की जीत है।

इस यात्रा के दौरान शाह सलमान बिन अब्दुल अजीज ने मोदी को देश का सर्वोच्च नागरिक पुरस्कार ‘द किंग अब्दुल अजीज आर्डर’ प्रदान किया था। पांडे ने कहा कि सहायता के रूप में अरबों डालर देने और पाकिस्तानियों को बड़े पैमाने पर रोजगार देने के बावजूद सऊदी अरब ने कभी भी किसी पाकिस्तानी नेता को अपना सर्वोच्च नागरिक सम्मान प्रदान नहीं किया।

पांडे ने कहा कि वर्ष 2014-15 में 39.4 अरब डालर के द्विपक्षीय कारोबार के साथ भारत और सउदी अरब आर्थिक रूप से एक दूसरे के लिए काफी महत्वपूर्ण हो गए हैं। इसके विपरीत पाकिस्तान और सउदी अरब के बीच कारोबार मात्र 6.1 अरब डालर का है।  

भारत के लिए सउदी अरब उसके तेल आयात का मुख्य स्रोत है जो भारत की वार्षिक तेल मांग के पांचवें हिस्से की आपूर्ति करता है। उधर, सउदी अरब के लिए चीन, जापान, अमेरिका और दक्षिण कोरिया के बाद भारत उसका पांचवां सबसे बड़ा उपभोक्ता है। पांडे साथ ही कहती हैं कि पाकिस्तान इस विकास को एक खतरे के तौर पर देख सकता है ।   उन्होंने कहा, ‘‘ या यह भी हो सकता है कि वह भारत के प्रति अपनी धारणा को बदले और उन आर्थिक तथा रणनीतिक अवसरों का लाभ उठाए जिनके चलते भारत उसके पुराने मित्र का वांछित सहयोगी बन रहा है।’’ 

मोदी शनिवार को अपनी दो दिवसीय यात्रा पर सउदी अरब आए थे। वर्ष 1956 में जवाहरलाल नेहरू, 1982 में इंदिरा गांधी और वर्ष 2010 में मनमोहन सिंह के बाद मोदी सउदी अरब की यात्रा पर जाने वाले चौथे भारतीय प्रधानमंत्री हैं।

NewBuzzIndia से फेसबुक पे जुड़ने के लिए हमारे फेसबुक पेज को लाइक करें..
**Like us on facebook**
[wpdevart_like_box profile_id=”858179374289334″ connections=”show” width=”300″ height=”150″ header=”small” cover_photo=”show” locale=”en_US”]