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5 Points: कांग्रेस की कमान संभालने के बाद राहुल गांधी और सोनिया गांधी का भाषण !

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राहुल गांधी ने आज 16 दिसंबर की सुबह पूर्व कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी और पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह की मौजूदगी में कांग्रेस की कमान अपने हाँथ में ली। कांग्रेस अध्यक्ष पद संभालने के बाद राहुल गांधी के सामने कई चुनौतियां है और एक लंबी लड़ाई है। 
राहुल गांधी के सामने सभी बड़ी चुनौती है जनता के बीच एक बार फिर कांग्रेस के प्रति विश्वास पैदा करना, विपक्ष की सबसे बड़ी पार्टी के अध्यक्ष होने के नाते जनता से जुड़े मोडडे उठाना, पूरे विपक्ष को एकजुट करना और सरकार के खिलाफ मजबूती से खड़े रहना। ऐसे में अध्यक्ष बनने के बाद राहुल गांधी का पहला भाषण काफी महत्वपूर्ण हो जाता है।

राहुल के भाषण की प्रमुख 5 बातें –

  • देश में हिंसा का दौर लगातार जारी है, इससे देश की छवि खराब हो रही है..
  • एक बार आग लग जाती है तो उसे बुझाना बहुत मुश्किल होता है और यही हम भाजपा के लोगों को समझाने की कोशिश कर रहे हैं..
  • मैं युवाओं से कहना चाहता हूं कि हम हिंदुस्तान की सबसे पुरानी पार्टी को आने वाले समय में सबसे पुरानी युवा पार्टी बनाना चाहता हूं.. 
  • मैं कांग्रेस नेताओं और कार्यकर्ताओं को आश्वासन देना चाहता हूं कि आप सब मेरा परिवार हो..
  • बीजेपी के लोग हमें मिटाना चाहते है, लेकिन हम ऐसा नही सोचते, हम नफरत का मुकाबला नफरत से नही प्यार से करते है..

सोनिया गांधी के भाषण के 5 प्रमुख बातें-

  •  कांग्रेस अध्यक्ष निर्वाचित होने पर मैं राहुल को हार्दिक बधाई, शुभकामनाएं और आशीर्वाद देती हूं..
  • एक नया दौर, एक नये नेतृत्व की उम्मीद, राहुल गांधी आपके सामने है..
  • 20 साल पहले जब में राष्ट्रीय अध्यक्ष बानी तो में भी थोड़ी नर्वस थी पर धीरे धीरे मैं इस परिवार का हिस्सा बन गई..
  • मुझे इस देश की संस्कृति और विरासत इंदिरा गांधी से मिली है..
  • कांग्रेस पार्टी के लाखों कार्यकर्तागण इस पूरी यात्रा में मेरे हमसफर रहे हैं मैंने आपसे जो सीखा उसकी कोई तुलना नहीं हो सकती..
  • हमने समाज के हर तबके का प्रतिनिधित्व और विकास किया, हमने ऐसे कानून बनाये जो जनता के अधिकारों पर आधारित थे..
  • राजनीति में आने पर राहुल ने ऐसे भयंकर व्यक्तिगत हमले का सामना किया जिसने उसे और निडर इंसान बनाया..
  • आज इस जिम्मेदारी को छोड़ते हुए आप सभी कांग्रेसजनों और देश के नागरिकों द्वारा दिये गये असीम प्यार और विश्वास के लिये तहेदिल से शुक्रिया अदा करती हूं..

कांग्रेस की पूर्व अध्यक्ष सोनिया गांधी और वर्तमान अध्यक्ष राहुल गांधी के भाषण से के बातें साफ हो जाती है जैसे-

  • कांग्रेस पार्टी के इतिहास में यह सबसे बड़े बदलाव की शुरुआत है..
  • राहुल गांधी बहुत जल्द के बड़े फैसले लेने वाले है..
  • राहुल गांधी के नेतृत्व में कांग्रेस पार्टी नफरत की राजनीति से दूर रहेगी..
  • राहुल के अध्यक्ष बनने के बाद पार्टी में युवाओं को बेहतर मौका मिलेगा..
  • भाजपा से हटकर कांग्रेस में वरिष्ठ नेताओं को बराबर सम्मान मिलेगा..
  • बहुत जल्द राहुल गांधी अपनी नई टीम बनाएंगे जिसमे युवा और वरिष्ठ नेता दोनो शामिल रहेंगे..

प्रधानमंत्री मोदी गुजरात की जनता को भय के भंवर में फंसा कर रखना चाहते हैं : रविश कुमार

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क्या प्रधानमंत्री मोदी गिरिराज सिंह हो गए हैं
“पाकिस्तान के रिटायर्ड आर्मी जनरल अरशद रफ़ीक़ कहते हैं कि सोनिया गांधी के राजनीतिक सचिव अहमद पटेल को गुजरात का मुख्यमंत्री बनाया जाना चाहिए। पाकिस्तान का वरिष्ठ आर्मी अफसर गुजरात चुनावों में अपना दिमाग़ क्यों लगाएगा? पाकिस्तान का एक डेलिगेशन मणिशंकर अय्यर के घर मिला था, अगर दिन उन्होंने गुजरात के समाज का अपमान किया, गरीबों और मोदी का अपमान किया। क्या ये बातें चिंता पैदा नहीं करती हैं, सवाल खड़े नहीं करते हैं, कांग्रेस को जवाब देना चाहिए” 


अख़बारों में छपा है कि बनासकांठा में प्रधानमंत्री ने ऐसा कहा है। प्रधानमंत्री अब गुजरात के सामने अहमद पटेल का भूत खड़ा कर रहे हैं। गुजरात की जनता को भय के भंवर में फंसा कर रखना चाहते हैं ताकि वह बुनियादी सवालों को छोड़ अहमद पटेल के नाम पर डर जाए। क्यों डरना चाहिए अहमद पटेल से? क्या इसी इस्तमाल के लिए राज्यसभा में अहमद पटेल को जीतने दिया गया? अहमद पटेल बार बार कह चुके हैं कि वे मुख्यमंत्री पद के दावेदार नहीं हैं, कांग्रेस ने भी ऐसा नहीं कहा है। 
क्या प्रधानमंत्री गुजरात की जनता को मुसलमान के नाम पर डरा रहे हैं? यह प्रधानमंत्री की तरफ से खेला गया सांप्रदायिक कार्ड है।  काश उन्हें कोई बताए कि भारत की जनता ने उनका हर शौक पूरा किया है, अब उसे सांप्रदायिकता की आग में न धकेलें। काश कोई उन्हें याद दिलाए कि आपने ही 15 अगस्त को 2022 तक सांप्रदायिकता मिटाने का भाषण दिया है। कोई संकल्प वंकल्प किया है। 
भारत में एक ही मुस्लिम मुख्यमंत्री है, महबूबा मुफ़्ती, वह भी बीजेपी के समर्थन से हैं। । अब तो उनके भाई भी कैबिनेट में आ गए हैं। परिवारवाद? फिर बीजेपी और मोदी अहमद पटेल का भूत क्यों खड़ा कर रहे हैं? विस्तार से बताने की ज़रूरत नहीं है। 
प्रधानमंत्री जानते हैं कि शब्द ज़रूरी नहीं हैं, शब्दों को इस तरह सजाकर कहा जाए कि उनसे एक छवि बने। उन्होंने अपनी बात इस तरह से कही है कि सामान्य जनता के मन में यह छवि पैदा हो जाए कि गुजरात चुनावों में पाकिस्तान दखलंदाज़ी कर रहा है।
 

इंडियन एक्सप्रेस ने मणिशंकर अय्यर के घर हुई रात्रि भोज के बारे में विस्तार से छापा है। 6 दिसंबर को मणिशंकर अय्यर के घर पर पाकिस्तान के पूर्व विदेश मंत्री कसूरी के लिए रात्रि भोज हुआ था। पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह, पूर्व सेनाध्यक्ष दीपक कपूर, पूर्व विदेश मंत्री के नटवर सिंह, पूर्व राजनयिक टीसीए राघवन, शरत सभरवाल, के शंकर बाजपेयी, सलमान हैदर शामिल हुए थे। कसूरी अनंत नाम के एक थिंकटैंक के बुलावे पर भारत आए थे। भारत पाक संबंधों पर बोलने के लिए।
बीबीसी हिन्दी पर इस भोज में शामिल होने वाले पत्रकार प्रेम शंकर झा ने लिखा है कि सबको पता था कि कई लोग मणिशंकर अय्यर के यहां मिल रहे हैं। भोज के दौरान गुजरात चुनावों की कोई चर्च नहीं हुई, न ही अहमद पटेल का ज़िक्र हुआ। तो फिर प्रधानमंत्री को कहां से ये जानकारी मिली है?
कसूरी को यहां आने का वीज़ा भारत सरकार ने दिया होगा। वीज़ा क्यों दिया? जब पता चला तो कसूरी को अरेस्ट क्यों नहीं किया? क्या मोदी राज में इतना आसान हो गया है कि सत्तर पार और मुश्किल से चल फिर सकने वाले चंद लोग दिल्ली में जमा होकर तख़्ता पलटने की योजना बना लेंगे और  सुब्रमण्यण स्वामी ट्वीट करेंगे कि तख़्ता पलट की योजना तो नहीं? और इस योजना में भारत के ही पूर्व सेनाध्यक्ष और पूर्व प्रधानमंत्री शामिल होंगे? क्या भारत पाकिस्तान बन गया है?

 

पाकिस्तान से इतनी ही नफ़रत है तो शपथ ग्रहण समारोह में नवाज़ शरीफ़ को कौन बुलाया था, कौन अचानक बिना किसी योजना के पाकिस्तान पहुंच गया था? जवाब आप जानते हैं। मनमोहन सिंह तो अपने दस साल के कार्यकाल में एक बार भी पाकिस्तान नहीं गए। 
क्या प्रधानमंत्री को भी चुनाव आयोग की क्षमता पर शक होने लगा है? क्या उन्हें भी अमरीकी चुनावों की तरह हैक कर लिए जाने का अंदेशा हो रहा है? क्या उन्हें भी अब ईवीएम पर भरोसा नहीं है? फिर तो चुनाव रद्द करने की मांग करनी चाहिए। 
प्रधानमंत्री के इस बयान ने गिरिराज सिंह को ख़ुश कर दिया होगा। गिरिराज सिंह भले ही तीन साल में प्रमोट न हो सकें हो मगर उनका पाकिस्तान वाला जुमला उनसे प्रमोट होकर अमित शाह तक पहुंचा और अब अमित शाह से प्रमोट होकर प्रधानमंत्री मोदी तक पहुंच गया है। 
19-20 अप्रैल 2014, गूगल यही तारीख़ बता रहा है जब गिरिराज सिंह ने कहा था कि जो मोदी का विरोध करते हैं, पाकिस्तान चले जाएं। न्यू इंडिया में विरोधियों को पाकिस्तान से जोड़ने की शुरूआत गिरिराज सिंह ने ही की। 
उस वक्त देवघर के एस डी एम और रिटर्निंग अफसर जय ज्योति शर्मा ने गिरिराज सिंह के ख़िलाफ़ एफआईआर दर्ज कराई थी। चुनाव आचार संहिता के उल्लंघन के आरोप में। उसका क्या हुआ, कौन पूछे। चुनाव आयोग का हाल आप जानते हैं। चुनाव आयोग अब शेषण और के जे राव का आयोग नहीं रहा। 

 

2014 के एक साल बाद 2015 के चुनाव में बिहार में अमित शाह ने कहा था कि अगर मोदी हार गए तो पाकिस्तान में पटाखे छोड़े जाएंगे। मोदी हार भी गए मगर पाकिस्तान में पटाखे नहीं छोड़े गए।
गिरिराज सिंह और अमित शाह के बाद प्रधानमंत्री मोदी पाकिस्तान और अहमद पटेल के सहारे मुसलमान का भूत खड़ा कर रहे हैं। गिरिराज सिंह को बधाई। वे इस मामले में दो ताक़तवर नेताओं से भी सीनियर हो गए हैं।  
दोस्तों, आप चाहें जितने तर्क ले आइये मगर शक के नाम पर चल रही यह मुस्लिम विरोधी राजनीति सबको खोखला कर देगी। मुसलमान का डर दिखा कर हिन्दू नौजवानों को बर्बाद किया जा रहा है। उनसे कहा जा रहा है कि रोज़गार मत पूछो, पढ़ाई मत पूछो, अस्पताल मत पूछो, बस देखो कोई मुसलमान मुख्यमंत्री न बन जाए।  
लगातार हिन्दू नौजवानों की समग्र भारतीयता के बोध के दो टुकड़े किए जा रहे हैं। आख़िर सांप्रदायिकता की राजनीति किसे बर्बाद कर रही है? किसी आसमान से नहीं, आपके ही घरों से निकाल कर इस राजनीति के लिए लोग लाए जाने वाले हैं। सांप्रदायिकता आपको मानव बम में बदल देगी। नौजवानों को रोज़गार देने से अच्छा है उन्हें मानव बम में बदल दो। यही राजनीति चल रही है। 
अख़बारों ने भी छाप दिया है कि प्रधानमंत्री का इशारा कि गुजरात चुनावों में पाकिस्तान का हाथ है। अरे भाई गुजरात भारत में हैं, बर्मा में नहीं हैं। धानमंत्री वाक़ई कुछ भी बोलने लगे हैं। उन्हें लगता है कि लोगों ने अच्छा वक्ता मान लिया है इसलिए वे कुछ भी बोल सकते हैं।  

 

आदरणी प्रधानमंत्री मोदी, आप यह क्या कर रहे हैं? क्या प्रधानमंत्री जी आप गुजरात चुनाव हार रहे हैं? क्या  आप  गिरिराज सिंह हो गए हैं?

जिन भाषणों से दूसरों को हराया, उसी से हार रहे हैं मोदी : रविश कुमार

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2014 में प्रधानमंत्री मोदी के जा भाषण उनके विजय रथ का सारथी बना वही भाषण 2017 तक आते-आते उनका विरोधी हो गया है। अपने भाषणों से मात देने वाले प्रधानमंत्री अपने ही भाषणों में मात खा रहे हैं। कम बोलना अगर समस्या है तो बहुत ज़्यादा बोलना भी समस्या है। बोलना सबको अच्छा लगता है लेकिन कुछ भी बोल देना किसी को अच्छा नहीं लगता है। प्रधानमंत्री मोदी अपने भाषणों में कुछ भी बोलने लगे हैं। तीन साल पहले की बात है, प्रधानमंत्री के भाषणों के आगे कांग्रेस को बोलने का मौक़ा नहीं मिल पाता था, आज उन्हीं भाषणों ने कांग्रेस को बोलने का मौक़ा दे दिया है। राहुल गांधी ने कहा है कि बोलते बोलते प्रधानमंत्री के पास कुछ बचा नहीं है। सच्चाई ने उन्हें घेर लिया है इसलिए नरेंद्र मोदी जी अब नरेंद्र मोदी जी पर ही भाषण दे रहे हैं। किसने सोचा था कि मोदी का यह मज़बूत हथियार उन्हीं के ख़िलाफ़ इस्तमाल होने लगेगा।
2014 का साल अलग था। मनमोहन सिंह आकर्षक वक्ता नहीं थे और न ही आक्रामक। 2009 में मनमोहन सिंह के सामने भाजपा का कमज़ोर प्रधानमंत्री का नारा नहीं चला था, 2014 में मनमोहन सिंह के सामने भाजपा का मज़बूत प्रधानमंत्री का नारा चल गया। चला ही नहीं, आंधी-तूफ़ान में बदल गया। 2009 में मनमोहन सिंह के कमज़ोर प्रधानमंत्री के सामने ख़ुद को महामज़बूत होने का दावा करने वाले आडवाणी 2014 के बाद मनमोहन सिंह से भी कमज़ोर साबित हुए। आडवाणी की चुप्पी इस तरह की हो चुकी है जैसे उन्होंने कभी माइक और लाउडस्पीकर भी नहीं देखा हो। वक्त का पहिया कैसे घूमता है। नोटबंदी पर मनमोहन सिंह का बयान मोदी सरकार पर जा चिपका। वही मनमोहन सिंह कह रहे हैं कि ग़रीब तो मैं भी था मगर मैं नहीं चाहता कि देश मुझ पर तरस खाए।
प्रधानमंत्री मोदी लगातार अपनी पृष्ठभूमि को उभारते रहते हैं। ग़रीब का बेटा, चाय वाले का बेटा। बहुत आसानी से 12 साल तक देश के अमीर राज्यों में से एक गुजरात के मुख्यमंत्री होने के तमाम अनुभवों को खारिज कर देते हैं। ग़रीब का बेटा कहने के लिए जिस राजनीति का वह नेतृत्व कर रहे हैं उसमें कितना धन है, वैभव है, पैसे का प्रदर्शन है, सब जानते हैं। करोड़ों रुपये ख़र्च कर सभाओं की तैयारी होती है जहां जाकर प्रधानमंत्री ख़ुद को ग़रीब का बेटा बताते हैं। दुनिया के इतिहास का यह सबसे महंगा ग़रीबी का सर्टिफिकेट है।
फिर भी किसने सोचा था कि उनकी इस ग़रीबी का जवाब मनमोहन सिंह से आएगा जो ख़ुद भी बेहद ग़रीब परिवार के थे मगर अपनी प्रतिभा के दम पर दुनिया के बड़े विश्वविद्यालयों तक पहुंचे और प्रधानमंत्री भी हुए। मनमोहन सिंह अपनी पृष्ठभूमि पर बात नहीं करना चाहते, प्रधानमंत्री मोदी इसके बिना कोई भाषण ही नहीं देते हैं।
2014 के लोक सभा चुनाव में मोदी की जीत सिर्फ भाषण के कारण नहीं थी। भाषण भी बड़ा कारण था। लोगों को लगा कि कोई बोलने वाला नेता भी होना चाहिए, मोदी ने लोगों ने यह इच्छा पूरी कर दी। मगर प्रधानमंत्री कभी नहीं समझ पाए कि अच्छे वक्ता की चाह रखने वाले लोग अच्छे भाषण की भी चाह रखते होंगे। प्रधानमंत्री मोदी लगातार इस कसौटी पर फेल होते चले जा रहे हैं। कभी ख़ुद को नसीब वाला कहा तो कभी किसी का डीएनए ही ख़राब बता दिया। दिल्ली से लेकर बिहार तक में देखा था कि लोग कैसे एक अच्छे वक्ता के ख़राब भाषण से चिंतित थे। प्रधानमंत्री मोदी वक्ता बहुत अच्छे हैं मगर भाषण बहुत ख़राब देते हैं।
एक कद्दावर नेता के लिए चुनावी जीत ही सब नहीं होता है। आख़िर वे इतनी जीत का करेंगे क्या? एक दिन यही जीत उनके भाषणों पर मलबे की तरह पड़ी नज़र आएगी। लोगों का जीवन चुनावी जीत से नहीं बदलता है। अगर बदल पाए होते तो गुजरात में 22 साल का हिसाब दे रहे होते। बता रहे होते कि मैंने 50 लाख घर बनाने का दावा किया था, यह रही चाबी, सबको दे दिया है। बता रहे होते कि कैसे शिवराज सिंह चौहान से लेकर रमन सिंह की सरकारों ने शिक्षा और अस्पताल के अनुभव बदल दिए हैं। रोज़गार के मायने बदल दिए। किसी और न भी नहीं किए होंगे मगर क्या अब आप यह भी कह रहे हैं कि मैंने भी नहीं किए और मैं करूंगा भी नहीं। आप ही नहीं किसी भी दल के पास जीवन बदलने का आइडिया नहीं है। यह संकट आपके पास ज़्यादा है क्योंकि आप सबसे अधिक दावा करते हैं।
प्रधानमंत्री के भाषण में कुछ जवाब होने चाहिए जो नहीं होते हैं। वे बहुत आसानी से कह देते हैं कि कांग्रेस ने मुस्लिम आरक्षण के नाम पर मुसलमानों को ठगा है। ख़ुद नहीं बताते कि वे और उनकी पार्टी मुस्लिम आरक्षण का नाम सुनते ही किस तरह हंगामा कर देते हैं। विरोध करते हैं। कांग्रेस पर उनका हमला सही भी है मगर अपनी बात वो ग़ायब कर देते हैं। वे यह बात शायद मुसलमानों को बता रहे थे कि कांग्रेस ने उन्हें ठगा है। यूपी, हरियाणा और राजस्थान के जाट भी उनसे यही पूछ रहे हैं कि जाट आरक्षण पर हमसे किया गया वादा क्या हुआ। क्या भाजपा ने वैसे ही जाटों को ठगा है जैसे कांग्रेस ने मुसलमानों को ठगा है। महीने भर से गुजराती में भाषण दे रहे प्रधानमंत्री को अपने बोलने पर बहुत यकीन हो चुका है कि वे कुछ भी बोल देंगे, लोगों को सुनना पड़ेगा। इस तरह का गुमान के सी बोकाडिया और राज सिप्पी को होता था कि कोई सी भी पिक्चर बना देंगे, हिट हो जाएगी।
प्रधानमंत्री विपक्ष के गंभीर सवालों का जवाब कभी नहीं देते हैं। बेतुकी बातों को लेकर बवाल मचा देते हैं। सारे मंत्री जुट जाते हैं, आई टी सेल जुट जाता है और गोदी मीडिया के एंकर हफ्तों के लिए एंजेंडा सेट कर देते हैं। आज न कल प्रधानमंत्री मोदी को इस गोदी मीडिया से छुटकारा पाना ही होगा। कई बार वो अपनी ग़लतियों को तुरंत सुधार लेते हैं, गुजरात चुनावों के कारण उन्हें जीएसटी की हकीकत दिख गई, सुधार किया, उसी तरह किसी चुनावी मजबूरी के कारण ही प्रधानमंत्री को अपनी गोद से इस मीडिया को उठाकर फेंकना होगा। ऐसा होकर रहेगा वरना यह मीडिया एक दिन उनके भाषणों की तरह उन्हीं को निगलने लगेगा। कोई भी सक्रिय समाज मीडिया को सरकार की गोद में लंबे समय तक देखना बर्दाश्त नहीं कर सकता है। वह समाज उसे ही सहन नहीं करेगा जिसकी गोद में मीडिया तरह तरह के दबावों से बिठाया जाता है।
प्रधानमंत्री ने ख़ुद भी किस तरह की राजनीतिक भाषा का इस्तमाल किया है। उनके नेतृत्व में तीन साल से किस भाषा का इस्तमाल हो रहा है, वे चाहें तो किसी भी भाषाविद से अध्ययन करा सकते हैं। आई टी सेल और ट्रोल संस्कृति के ज़रिए जो हमले होते रहे, झूठ का प्रसार होता रहा, ये सब जानना हो तो उन्हें ज़्यादा मेहनत करने की ज़रूरत नहीं है। बस ऑल्ट न्यूज़ की वेबसाइट पर जाना है, काफी कुछ मिल जाएगा। उनके कार्यकाल का मूल्याकंन क्या सिर्फ चुनावी जीत से होगा या राजनीतिक संस्कृति से भी होगा।
इसी 15 अगस्त को प्रधानमंत्री ने कहा कि सांप्रदायिकता को मिटाना है लेकिन उनके भाषणों में मुग़ल, औरंगज़ेब या उनके प्रवक्ताओं की ज़ुबान पर खिलजी का ज़िक्र किस संदर्भ में आता है? सांप्रदायिकता की बुनियादी समझ रखने वाला भी इसका जवाब दे सकता है। वे बेहद चालाकी से सांप्रदायिक सोच को समर्थन देते हैं और सुविधा से ऐसी सोच का अपने हक़ में इस्तमाल करते हैं। क़ब्रिस्तान हो या औरंगज़ेब हो यह सारे उनकी शानदार जीत के पीछे मलबे के ढेर की तरह जमा है। वे चाहें तो टीवी खोल कर अपने प्रवक्ताओं की भाषा का भी अध्ययन कर सकते हैं।
विरोधी दलों ने वाक़ई उनके ख़िलाफ़ कई बार ख़राब भाषा का इस्तमाल किया है मगर क्या वे हर बार इसी से छूट लेते रहेंगे कि उन्हें ऐसा बोला गया है, क्या वे कभी इसका जवाब नहीं देंगे कि वे भी इसी तरह से बोलते रहें हैं? चुनावों के समय विरोधियों की सीडी बनवाना, स्टिंग करवाना यह सब आपके खिलाफ भी हुआ और आप भी दूसरों के खिलाफ खुलकर किए जा रहे हैं। कहीं कोई फुलस्टाप नहीं है। इसीलिए अब आप अलग से दिखने वाले नरेंद्र मोदी नहीं हैं। अब आप पहले से चली आ रही ख़राब राजनीतिक संस्कृति को आगे बढ़ाते रहने वाले नरेंद्र मोदी हैं। आप नरेंद्र मोदी को गाली दिए जाने को लेकर मुद्दा बनाने लगते हैं, मगर आपने या आपकी टीम ने नेहरू के साथ क्या किया है? क्या यह भी बताने की ज़रूरत होगी?
आपकी विश्वसनीयता या लोकप्रियता चाहे जितनी हो, आपके लोगों को भी पता है चुनाव आयोग से लेकर तमाम संस्थाओं की विश्वसनीयता बढ़ी नहीं है बल्कि पहले जैसी है या उससे भी घट गई है। सिर्फ आप ही नहीं, किसी भी राज्य में किसी भी नेता के सामने यही संकट है। संस्थाओं की विश्वसनीयता गिराते रहने से कोई नेता अपनी विश्वसनीयता के शिखर पर अनंत काल तक नहीं रह सकता है।
न्यूज़ 18 के चौपाल कार्यक्रम में संबित पात्रा कन्हैया से कह रहे थे कि आप वंदेमातरम नहीं बोलते हैं, कन्यैहा वंदेमातरम भी बोलते हैं, भारत की माता की जय भी बोलते हैं, फिर संबित से पूछते हैं कि अब आप बताओ गांधी को पूजते हैं या गोड्से को। संबित इस सवाल का जवाब नहीं नहीं देते हैं, कन्हैया लेनिन ज़िंदाबाद, स्टालिन मुर्दाबाद बोल रहे हैं, संबित जवाब नहीं देते हैं कि गांधी की पूजा करते हैं या गोड्स की पूजा करते हैं। अंत में बात इस पर ख़त्म होती है कि मोदी इस देश के बाप हैं।
मैं सन्न रह गया जब पात्रा ने कहा कि मोदी इस देश के बाप हैं। संबित को किसने कहा कि आप इस देश के बाप हैं। मुमकिन है आप भारत का कोई भी चुनाव नहीं हारें, लेकिन उन तमाम जीत से पहले और जीत के सामने मैं यह कहना चाहता हूं कि जनता इस देश की बाप है। आप इस देश के बाप नहीं है। इतनी सी बात संबित पात्रा को मालूम होनी चाहिए। इस देश में दरोगा, जांच एजेंसी के दम पर कोई भी कुछ करवा सकता है, यह पहले भी था और आपके राज में भी है, थाना पुलिस के दम पर दम भरना या भीड़ के दम पर दम भरना बहुत आसान है। इसे हासिल करना कोई बड़ी बात नहीं है।
मोहल्ले का दादा और देश का बाप ये सब क्या है। आपने 2014 में कहा था कि आप भारत के प्रधान सेवक हैं, तीन साल बाद 2017 में संबित पात्रा कह रहे हैं कि आप इस देश के बाप हैं। मजबूरी में कोई किसी को बाप बना लेता है, यह मुहावरा सबने सुना है। क्या संबित आपको मज़बूत नेता से मजबूरी का नेता बना रहे हैं? विरोधियों को कोई क्लिन चिट नहीं दे रहा है, मगर प्रधानमंत्री को सत्ता में बिठाने में लोगों ने क्या कोई कमी की है जिसका बदला ऐसी ख़राब राजनीतिक संस्कृति के ज़रिए लिया जा रहा है। प्रधानमंत्री चाहें तो अपने इन प्रवक्ताओं को कुछ दिन टीवी से दूर रखें, ये तो नेता हैं नहीं, जो नेता हैं, उन्हीं का प्रभाव कमज़ोर कर रहे हैं।
यह आपका प्रभाव ही है कि नतीजा आने से पहले कोई नहीं लिखता है कि आप हार सकते हैं। गुजरात और हिमाचल प्रदेश में हार हुई तो वही संपादक और एंकर वही लिखेंगे जो मैं नतीजा आने से पहले लिख रहा हूं। आप भले चाहें जितना चुनाव जीतें, लेकिन आप भी आसानी से देख सकते हैं कि आप अपने भाषणों में किस तरह हर दिन हार रहे हैं।

राहुल गांधी के तीखे सवालों से भाग पीएम मोदी पहुंचे पाकिस्तान ।

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वैसे तो प्रधानमंत्री मोदी को भाषण देने में महारथ हासिल है। भाषण के दौरान मोदी जी विरोधियों से हमलावर सवाल भी भी करते है और विरोधियों के सवाल के जोरदार जवाब भी देते है। पीएम मोदी का यह रूप हमने 2014 के लोकसभा चुनाव से लेकर यूपी चुनाव तक देखा लेकिन गुजरात चुनाव में पीएम मोदी का यह रूप कहीं गुमा गुमा सा लग रहा है। 
पिछले 3 साल में गुजरात मॉडल- गुजरात मॉडल बोल बोल कर प्रधानमंत्री मोदी ने केंद्र और कई राज्यों में सरकार बना ली लेकिन गुजरात में आते आते प्रधानमंत्री का गुजरात मॉडल कहीं खो गया है। गुजरात चुनाव में प्रधानमंत्री मोदी ने अभी तक गुजरात मॉडल की बात नही की है। गुजरात मॉडल छोड़ो पीएम मोदी यहां गुजरात के विकास की बात भी नही कर रहे है। 

विकास छोड़ पाकिस्तान पहुंच गए पीएम मोदी

कांग्रेस का कहना है कि विकास पागल हो गया है। कांग्रेस की बात कुछ हद तक सही भी लग रही है क्योंकि विकास आजकल शिक्षा, रोजगार और स्वास्थ की बात छोड़ कर हिन्दू-मुस्लिम और पाकिस्तान की बातें करने लगा है।

प्रधानमंत्री मोदी ने अपने भाषण के दौरान आरोप लगाया है कि पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह, कांग्रेसी नेता मणिशंकर अय्यर और एक पूर्व उपराष्ट्रपति की मुलाकात एक पाकिस्तानी अधिकारी से हुई है। उन्होंने कहा इस मुलाकात में क्या गुल खिलाए हैं यह नहीं पता ।

अपने घर में पीएम मोदी को क्यों पड़ी पाकिस्तान की जरूरत ?
ऐसे में सवाल उठता है कि प्रधानमंत्री मोदी को अपना घर जीतने के लिए पाकिस्तान की जरूरत क्यों पड़ी ? क्यों प्रधानमंत्री मोदी गुजरात में विकास की बातें नही कर रहे ? क्या प्रधानमंत्री मोदी को गुजरात की जनता पर भरोसा नही ?

इसका जवाब है राहुल गांधी!

दरअसल गुजरात चुनाव प्रचार में कांग्रेस और राहुल गांधी ने अपनी सारी रणनीति बदल दी है। सारे चुनावों में जहां बीजेपी कांग्रेस से सवाल करती थी वहीं इस चुनाव में सवाल करने का काम कांग्रेस कर रही है। कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी ने तो बाकायदा सवालों की एक सीरीज शुरू कर दी है। राहुल गांधी ने एक के बाद एक प्रधानमंत्री मोदी से 11 सवाल पूछ डाले। राहुल गांधी का एक एक सवाल प्रधानमंत्री मोदी के गुजरात मॉडल की पोल खोल रहा था।

यही कारण है कि प्रधानमंत्री मोदी ने इन 11 सवालों में से एक का जवाब भी नही दिया। क्या प्रधानमंत्री मोदी राहुल गांधी के तीखे सवालों से डर गए है ? क्या प्रधानमंत्री मोदी राहुल गांधी से हार गए है ?

गुजरात में मनमोहन सिंह दिलाएंगे कांग्रेस को जीत, 7 नवंबर को अहमदाबाद में..

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गुजरात विधानसभा चुनाव के लिए कांग्रेस अपना पूरा दम लगा रही है । कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी भी एक के बाद एक गुजरात के राजनैतिक दौरे कर रहे है । पाटीदार नेता हार्दिक पटेल भी खुलकर कांगफेस पार्टी के साथ आ गए है । वहीं युवा नेता जिग्नेश मेवानी भी कांग्रेस को समर्थन देंगे । 
भाजपा को एक के बाद एक कई झटके लग रहे है । जिसकी शुरुआत राज्यसभा चुनाव में अहमद पटेल की जीत से हुई । जीत के बाद से ही कांग्रेस कार्यकर्ताओं का मनोबल काफी मजबूत है । ओबीसी के सबसे बड़े नेता अल्पेश ठाकोर भी भाजपा को छोड़कर कांग्रेस पार्टी में शामिल हो गए है । 


पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह करेंगे गुजरात दौरा।

इसी कड़ी में भारत के पूर्व प्रधनमंत्री और विरिष्ट कांग्रेस नेता मनमोहन सिंह भी गुजरात का दौरा करने के लिए तैयार है । सूत्रों के अनुसार मनमोहन सिंह 7 नवंबर को गुजरात का दौरा करेंगे । इस दौरान वो अहमदाबाद और वड़ोदरा का दौरा करेंगे । 

इतना ही नहीं मनमोहन सिह गुजरात के व्यापारियों और बुद्धजीवियों के साथ बैठक कर नोटबंदी और जीएसटी की विस्तृत जानकारी देंगे तथा देश में मोदी सरकार द्वारा लागू की गयी नोटबंदी और जीएसटी से छोटे और माध्यम कारोबारियों तथा आम आदमी को हुए नुकसान का खुलासा करेंगे।

अशोक गहलोत ने की मनमोहन सिंह से मुलाकात।

सूत्रों ने कहा कि गुजरात कांग्रेस प्रभारी अशोक गहलोत ने पूर्व पीएम डा मनमोहन सिंह से दिल्ली जाकर मुलाकात की थी जिसके बाद उन्होंने 7 नवंबर को अपने गुजरात दौरे की स्वीकृति दे दी है।

सभी दलों को चौकाते हुए भाजपा ने घोषित किया राष्ट्रपति उम्मीदवार , कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी से की बात !

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राष्ट्रपति प्रणव मुखर्जी का कार्यकाल खत्म होने को है . ऐसे में सभी पार्टियों की नजर भाजपा की राष्ट्रपति पद के उम्मीदवार पर टिकी हुई थी . काफी सस्पेन्स के बाद आखिर भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह ने राष्ट्रपति पद के उम्मीदवार को नाम घोषित कर ही दिया .

भाजपा की ओर से राष्ट्रपति पद के उम्मीदवार है बिहार के राज्यपाल रामनाथ कोविंद . आपको बता दें कि रामनाथ कोविंद जाती से दलित है और दलित समाज में रामनाथ जी की अच्छी खासी पकड़ है . लोकतंत्र के सर्वोच्च पद के लिए भारतीय जनता पार्टी और एनडीए ने काफी समय से सभी दलों से चर्चा और विचार चालू किया था.

अमित शाह ने कहा कि वो एक दलित हैं, हमेशा संघर्ष करेंगे. बिहार राज्य के गवर्नर के रूप में अभी काम कर रहे हैं. रामनाथ जी हमेशा समाज, गरीबों, पिछड़ों, दलितों के साथ जुड़े रहे हैं. एक गरीब के घर में जन्म लेकर संघर्ष कर इतने ऊंचे मुकाम पर पहुंचे हैं. हमने आज उनका नाम तय किया है.

अमित शाह ने बताया कि नाम तय करने से पहले हमने देश के सभी राज्यों, पार्टियों और एनडीए के साथियों से चर्चा की है. उन्होंने कहा, ”पीएम ने स्वयं कांग्रेस अध्यक्षा सोनिया गांधी से बात की. पूर्व पीएम डॉक्टर मनमोहन सिंह जी से बात की. साथ ही वरिष्ठ नेताओं से बात की.”

अमित शाह ने कहा, ”हम आशा करते हैं कि दलित समाज से संघर्ष कर, गरीब के घर में जन्म लेकर इतने ऊंचे मकान पर पहुंचने वाले रामनाथ जी सर्वसमम्मत प्रत्याशी होंगे.”

मनमोहन सरकार द्वारा शुरू की गई #KochiMetro को मोदी सरकार बता रही अपनी उपलब्धि !

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फेसबुक और ट्विटर पर आज #KochiMetro की चर्चा जोरों पर है । भाजपा और मोदी समर्थक कोची मेट्रो के सफल उद्धघाटन का श्रेय प्रधानमंत्री को दे रहे है । भाजपा समर्थकों का कहना है कि कोची मेट्रो प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के प्रयासों का नतीजा है ।

वहीं कांग्रेस पार्टी ने भाजपा के इन सभी दावों की पोल खोल लार रख दी है । कांग्रेस ने बताया कि कोची मेट्रो का काम पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने शुरू किया था । लोगों का केजन है कि कोची मेट्रो मोदी सरकार की नही बल्कि मनमोहन सरकार की देन है ।

 

भाजपा सरकार के रही है कि कोची मेट्रो उसके प्रयासों का नतीजा है । वहीं केरल प्रदेश सरकार का कहना है कि कोची मेट्रो उसकी मेहनत का नतीजा है । लेकिन हम आपको सच्चाई बताते है । दरअसल कोची मेट्रो को कैबिनेट की मंजूरी जुलाई 2012 में मिली थी ।

PTI ( प्रेस ट्रस्ट ऑफ इंडिया ) के अनुसार मनमोहन सरकार ने जुलाई 2012 में कोची मेट्रो प्रोजेक्ट को कैबिनेट से मंजूरी दिलाई थी । कांग्रेस पार्टी ने भी अपने आधिकारिक ट्विटर अकाउंट से पीएम मोदी पर निशाना साधा। अपने ट्वीट में पार्टी ने लिखा- “श्री मोदी मनमोहन सरकार के कामों का श्रेय लेने की कोशिश करते हुए अपनी पुरानी आदतों से मजबूर।” पार्टी ने इस ट्वीट के साथ उन प्रॉजेक्ट्स की तस्वीरें ट्वीट की जिनका काम मनमोहन सरकार के कार्यकाल में शुरू हुआ था।

https://twitter.com/INCIndia/status/875941075839590402

शिवसेना का पीएम मोदी पर सीधा हमला, बोले बाथरूम छाप राजनीती करना बंद करें मोदी !

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Newbuzzindia: ​शिवसेना ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर तगड़ा हमला बोलते हुए उन्‍हें बाथरूम छाप राजनीति ना करने को कहा है। पार्टी के मुखपत्र ‘सामना’ में छपे लेख के जरिए पीएम पर पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह‍ के ऊपर राज्‍यसभा में ‘रेनकोट’ वाले बयान को निशाना बनाया गया है। इस लेख का टाइटल ‘बाथरूम छाप राजनीति यह टाला जाना चाहिए’ है। इसमें लिखा है कि प्रधानमंत्री के पद पर बैठे व्‍यक्ति को इस तरह की टिप्‍पणियां नहीं करनी चाहिए। बाथरूम में झुककर देखना किसी को भी शोभा नहीं देता। यह टाला जाना चाहिए। प्रधानमंत्री के उत्‍तर प्रदेश में चुनाव प्रचार के दौरान विपक्षी नेताओं की कुंडलियां निकालने के बयान पर भी ‘सामना’ में कटाक्ष किया गया है।

इसमें लिखा है, ”उत्‍तर प्रदेश की प्रचार सभा में मोदी ने ऐसी धमकी दी कि आप सभी की कुंडलियां हमारे पास हैं। इस पर अखिलेश यादव का जवाब ऐसा था कि गूगल पर सभी की कुंडलियां एक क्लिक पर मिलती है। उत्‍तर प्रदेश का चुनाव कितने निचले स्‍तर तक चला गया है इसका यह एक उत्‍तम नमूना है। इस तरह की कीचड़ फेंक में देश के प्रधानमंत्री या राज्‍य के मुख्‍यमंत्री को तो कम से कम शामिल नहीं होना चाहिए। दुर्भाग्‍य से लोकतंत्र के हमाम में सभी नंगे होने से प्रधानमंत्री और मुख्‍यमंत्री जैसे लोग भी कैसे दूर रहेंगे।”

‘सामना’ में लिखा है कि प्रधानमंत्री को दलगत राजनीति से दूर रहना चाहिए। जिस सरकारी कवच-कुंडल और सरकारी मशीनरी में वे घूमते हैं और बोलते हैं कि वह एक तरह का चुनावी भ्रष्‍टाचार है। भाजपा के उत्‍तर प्रदेश में खराब कानून-व्‍यवस्‍था के लिए सपा सरकार पर आरोपों पर भी निशाना साधा गया है। इसमें लिखा है कि सूबे में भाजपा के पास 70 सांसद हैं वे क्‍या कर रहे हैं। जिस तरह से मुंबई में शिवसैनिक लोगों की रक्षा को निकलते हैं वैसे ही उन्‍हें भी बाहर आना चाहिए। वहीं शिवसेना प्रमुख उद्धव ठाकरे मुंबई और ठाणे के निकाय चुनावों के प्रचार के दौरान भाजपा व पीएम मोदी पर हमले बोल रहे हैं। उन्‍होंने रैली के दौरान नोटबंदी का मामला उठाते हुए लोगों से कहा कि वे इस तरह से मतदान करें कि वह भाजपा पर सर्जिकल स्‍ट्राइक की तरह वार हो।

गौरतलब है कि मुंबई नगर निगम के चुनावों में भाजपा और शिवसेना अलग-अलग लड़ रहे हैं। दोनों के बीच सीटों को लेकर बात नहीं बनी थी। इसके बाद से शिवसेना के भाजपा पर तेवर तल्‍ख है। वह नोटबंदी और अच्‍छे दिन के नारे पर लगातार भाजपा पर करारे हमले बोल रही है। उद्धव ठाकरे तो कह चुके हैं कि मोदी सरकार ने नोटबंदी से जनता को परेशान किया है।

मनमोहन सिंह पर अभद्र  भाषा का इस्तेमाल करने पर Twitter में लोगों ने पीएम मोदी को बताया जाहिल ! #JaahilPMModi किया ट्रेंड

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Newbuzzindia : राज्यसभा में आज बहुत कुछ हुआ । एक ओर तो प्रधानमंत्री मोदी ने पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह का मजाक उड़ाते हुए कहा कि ” रेनकोट पहनकर बाथरूम में नहाना कोई मनमोहन सिंह से सीखे” वहीं दूसरी ओर पीएम मोदी के भाषण के दौरान रक्षा मंत्री मनोहर पर्रिकर पर नींद की सर्जिकल स्ट्राइक देखने को मिली । प्रधानमंत्री राज्यसभा में भाषण दे रहे थे और उनके पीछे बैठे रक्षामंत्री नींद की झपकियां ले रहे थे ।
पीएम मोदी की मनमोहन सिंह पर की गई इस टिपण्णी के बाद कांग्रेस ने पीएम को बायकॉट करने का ऐलान किया है । वहीं Twitter पर भी जानता ने पीएम मोदी को जमकर लताड़ा । Twitter पर लोगों ने पीएम मोदी को जाहिल बताते हुए #JaahilPMModi के साथ ढेरों ट्वीट किए । 

#JaahilPMModi twitter पर रात तक टॉप पे ट्रेंड किया । यह रहे कुछ मुख्य tweets…


https://twitter.com/i_me_my5elf/status/829322395957723137

65 करोड़ के घोटाले के आरोप है मोदी जी , देश मजाक नही जवाब मांग रहा है !

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Newbuzzindia : भ्रष्टाचार मुक्त भारत का अभियान चला रहे प्रधानमंत्री मोदी खुद भ्रष्टाचार के आरोपों से घिर गए है । राहुल गांधी और अरविन्द केजरीवाल सबूतों के साथ प्रधानमंत्री मोदी पर हमला बोल रहे है । वहीं प्रधानमंत्री मोदी संसद में जवाब देने के बजाय रैलियों में मजाक कर रहे है । इस सब के बीच पीएम मोदी के “भ्रष्टाचार मुक्त भारत” के अभियान पर नजर डालें तो एक कहावत याद आती है । 

  “नौ सौ चूहे खाय के बिल्ली हज को चली”

वैसे मुझे नही मालूम की बिल्ली ने चूहे खाए की नही खाए लेकिन अगर हज को जा रही है तो जवाब देने में क्या नुक्सान है । 

कुछ समय पहले दिल्ली के सीएम अरविन्द केजरीवाल ने हमारे फ़क़ीर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर 25 करोड़ की रिश्वत लेने के आरोप लगाए थे । इसके राहुल गांधी ने उसमे 40 करोड़ और जोड़ दिए । मैंने सोचा की एक फ़क़ीर के ऊपर इतने बड़े आरोप लगाना मूर्खता है । 

फिर मुझे याद आया की भाई यह फ़क़ीर तो गुजरती है और गुजरात के तो चायवाले के पास भी करोड़ों-अरबों निकल आते है । 

खैर मोदी जी आप राहुल गांधी का मजाक उड़ा लीजिये । आप अरविन्द केजरीवाल का मजाक उड़ा लीजिये । मोदी जी हम नही चाहते को जैसे भाजपा मनमोहन सिंह का मजाक उड़ाती थी वैसे जनता आपका मजाक उड़ाए । राहुल और केजरीवाल को ना सही पर देश को जवाब दे दीजिए । जनता जवाब चाहती है ।