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नोटेबंदी : मनमोहन सिंह ने किए मोदी सरकार पर 5 बड़े हमले ।

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Newbuzzindia : नोटेबंदी के मुद्दे पर पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह एक बार फिर आक्रामक हो गए है । मनमोहन सिंह ने नोटेबंदी से जुडी कई कमियां गिनाई है । जिनमे मनमोहन सिंह के मुख्य बयान है –

  • विमुद्रीकरण के पीछे यह गलतफहमी है कि ‘सारी नकदी काला धन है, और सारा काला धन नकदी के रूप में ही है’ 
  • मनमोहन सिंह ने कहा है कि “नेताओं और सरकारों को कमज़ोर वर्गों की परवाह करनी होगी, वो अपनी इस ज़िम्मेदारी से पीछे नहीं हट सकते । “
  • मनमोहन सिंह ने आगे कहा कि “मैंने कभी नहीं सोचा था कि एक दिन मैं अपने ही देशवासियों को पैसे के लिए अंतहीन लाइन में इंतजार करते देखूँगा । “
  • काले धन के खिलाफ लड़ाई सुनने में अच्छी लग सकती है, लेकिन इसमें एक भी ईमानदार भारतीय की जान नहीं जानी चाहिए ।
  • विमुद्रीकरण से आम आदमी की जीविका और उनकी बचत को उजाड़ना भीषण त्रासदी है ।


मोदी की तरह संसद ने नही भागे थे मनमोहन सिंह ,देश के सामने रखी थी अर्थव्यवस्था की असल तस्वीर !

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Newbuzzindia : संसद किसी भी लोकतान्त्रिक देश की व्यवस्था का एक प्रमुख अंग होता है. जिसका मुख्य उद्देश्य तो राष्ट्र और जनता के कल्याण के लिए नीतिगत नीतियों का निर्माण करना होता है. परंतु यह समूचे देश को जोड़ने का भी काम करती है. देशभर से विभिन्न धर्मों, जातियों और पंथों से आए प्रतिनिधियों के बीच संवाद स्थापित करने का काम करती है. देखा जाए तो संसद का प्रमुख कार्य ही यही है, यह देश की आवाम और उसके चुने हुए प्रतिनिधियों को ‘जनतंत्र’ से जोड़ती है. संसद इन चुने हुए प्रतिनिधियों को मौका देती है कि वह अपने-अपने क्षेत्र की जनता की समस्याओं को ‘जनतंत्र’ के रास्ते सत्ताधारियों तक पहुंच सके.

 

 

इस समय सियासी गलियारे में केवल एक ही चर्चा है आखिर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी नोटबंदी पर संसद में बयान क्यों नहीं दे रहे हैं? वह संसद में आने का साहस क्यों नहीं जुटा पा रहे हैं? इस नोटबंदी के फैसले के बाद एक बात जो निकल कर आयी है वो सरकार के लिए चिंता का विषय बन सकती है. वो यह है कि नोटबंदी के बाद समूचा विपक्ष एक साथ खड़ा हो गया है. जिसने सरकार की चिंता और बढ़ा दी है. सरकार को समझ नहीं आ रहा है कि आखिर विपक्ष का गतिरोध कैसे ख़त्म किया जाए.

 

अभी तक तो ऐसा ही लगता है कि ‘सरकार’ मोदी को विपक्ष के सामने नहीं खड़ा करेगी. लेकिन एक वक़्त ऐसा भी था जब लगातार संसद को बाधित किया जा रहा था. मामला डॉलर के मुकाबले रूपए के मूल्यांकन मे लगातार और तेजी से कम होने का था. उस समय बीजेपी विपक्ष में थी और वर्तमान वित्त मंत्री अरुण जेटली राज्यसभा में तत्कालीन विपक्ष के नेता थे.

 

अगस्त २९, २०१३ को विपक्ष की मांग को पूरा करते हुए तत्कालीन प्रधानमंत्री डॉ मनमोहन सिंह ने राज्यसभा में संसद (और उसके प्रतिनिधियों) को भरोसा दिया कि वह देश के आर्थिक हालात पर अगले दिन (यानि ३० अगस्त, २०१३) को विस्तार से अपनी बात रखेंगे. ३० अगस्त, २०१३ को हुआ भी ऐसा. डॉ मनमोहन सिंह ने रूपए की बिगड़ते हालात को देखते हुए कहा कि देश की अर्थव्यवस्था एक गंभीर आर्थिक संकट से जूझ रही है. हमारी सरकार रूपए और डॉलर के बीच संतुलन बैठाने के लिए हर कदम उठा रही है. उन्होंने संसद के पटल पर अपनी बात बिंदुवर तरीके से रखी.

 

याद रहे यह वही अरुण जेटली हैं जो उस समय के प्रधानमंत्री डॉ मनमोहन सिंह पर योजनबद्ध तरीके से हमला कर रहे थे और आज के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की ढाल बने हुए हैं। साथ ही देश के वित्त मंत्री भी है. उनका उस समय का बयान पढ़िए….

‘जेटली ने कहा अमेरिकी डॉलर के मुकाबले ‘रुपया’ 20 फीसदी गिर गया है और इसका मूल्य घट कर पहले से ही 68 के निशान को पार कर गया है. उन्होंने कहा कि लोगों के मन में ‘भय’ है कि रूपए और कितना गिरेगा? जेटली ने कहा यह दहशत की स्थिति है. उन्होंने कहा कि हम प्रधानमंत्री (मनमोहन सिंह) से पूछना चाहते हैं कि क्या उनके दिमाग में इस स्थिति से निपटने के लिए कोई हल है. उन्होंने कहा लोकतंत्र की शुरुआत प्रधानमंत्री से होती है. साथ ही उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री को देश और सदन को विश्वास में लेना चाहिए’

 

आज स्थिति बदल गयी है, जेटली सरकार में हैं और मनमोहन सिंह उसी सदन (राज्यसभा) में विपक्ष में बैठे हैं. विडम्बना देखिये आज जेटली देश और सदन को विश्वास मे लेने की बात नहीं कर रहे हैं। जबकि वह सत्ता मे हैं जिसके कारण उनकी ज़िम्मेदारी देश के प्रति और बढ़ जाती है। मसलन दूसरी तरफ प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी हैं जिनसे सदन जवाब मांग रहा है और उनके वक्तव्य का इंतज़ार कर रहा है. सरकार सुन नहीं रही और अरुण जेटली जो कल तक उसी सदन में (पूर्व) प्रधानमंत्री से किसी अहम् आर्थिक मुद्दे पर बयान दिलवाने की वकालत कर रहे थे, आज वह मूक बन कर (वर्तमान) प्रधानमंत्री का साथ दे रहे हैं. असल में राजनीति की यही बदसूरती है जिसका सत्ता और विपक्ष में ‘चरित्र’ बदल जाता है या फिर ऐसे गंभीर और अहम विषयों पर राजनीति पूरी तरह से ही ‘चरित्रहीन’ हो जाती है जिसका चित्रण करना बेहद मुश्किल होता  है

नोटबंदी : गरीबों पर भारी पड़ रहे है मोदी जी के 50 दिन – मनमोहन सिंह

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Newbuzzindia : नोटबंदी के मुद्दे पर आज पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने नरेंद्र मोदी सरकार पर तीखा हमला बोला है । मनमोहन सिंह ने राज्यसभा में बोलते हुए नोटबंदी के कारण गरीबों को हो रही परेशानियां गिनाई ।

गौरतलब है कि राज्यसभा में बुधवार को पूर्व प्रधानमंत्री मनमहोन सिंह ने कहा कि नोटबंदी के बाद लोगों को रही परेशानी और शिकायतों को संज्ञान में लेने की जरूरत है। 60-65 लोगों की मौत हो गई। क्या इस फैसले को हमारे देश के लोगों का करेंसी और बैंकिंग सिस्टम से विश्वास कम करने के लिए लिया गया है।

राज्यसभा स्पीकर उपराष्ट्रपति हामिद अंसारी ने सदन की कार्यवाही शुरू करने को कहा। इस पर सबसे पहले पूर्व प्रधानमंत्री डॉ. मनमोहन सिंह ने बोला। उन्होंने कहा…

–  प्रधानमंत्री ने 50 दिन इंतजार करने के लिए कहा। लेकिन, ये 50 दिन गरीबों के लिए काफी हानिकारक हो सकता है।
-क्या प्रधानमंत्री किसी ऐसे देश का नाम बता सकते हैं, जहां लोग पैसे जमा कर सकते हैं, लेकिन निकाल नहीं सकते।
– प्रधानमंत्री को कुछ रचनात्मक प्रस्ताव लाना चाहिए, जिसे इंप्लीमेंट किया जा सके।
– नोटबंदी लागू करने में बदइंतजामी हुई।
– नोटबंदी व्यवस्थित तरीक से की जा रही लूटपाट साबित हुई।
– हर दिन नए नियम बनाना ठीक नहीं है। प्रधानमंत्री कार्यालय नोटबंदी लागू करने में नाकामयाब रहा।

बताते चलें कि संसद के शीतकालीन सत्र में नोटबंदी पर हंगामे के बीच विपक्ष सदन की कार्यवाही में प्रधानमंत्री की मौजूदगी की मांग कर रहा था। इसके बाद गुरुवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी राज्यसभा में पहुंचे।

प्रधानमंत्री को सदन में मौजूद देख राज्यसभा में नेता प्रतिपक्ष गुलामनबी आजाद ने कहा कि यदि प्रधानमंत्री सदन में मौजूद रहेंगे तो विपक्ष नोटबंदी पर बहस के लिए तैयार है। इस पर वित्त मंत्री अरुण जेटली ने आश्वस्त किया कि प्रधानमंत्री सदन की कार्यवाही के दौरान मौजूद रहेंगे। विपक्ष बहस शुरू कर सकता है।

कांग्रेस की CWC बैठक में केंद्र पर भड़के राहुल, बोले-सत्ता के नशे में चूर हैं नरेंद्र मोदी !

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Newbuzzindia: कांग्रेस की वर्किंग कमिटी (कार्यकारिणी समिति)की मौजूदा राजनीतिक हालातों पर चर्चा के लिए संसद के शीतकालीन सत्र के पहले कांग्रेस ने आज बैठक बुलाई। बैठक में कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी ने केंद्र की मोदी सरकार को आड़े हाथों लेते हुए कहा कि सरकार सत्ता के नशे में चूर हो गई है, उसे आम जनता की कोई परवाह नहीं है।

बता दें कि तबीयत खराब होने के चलते कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी इस बैठक में हिस्सा नहीं ले रही हैं, उनकी जगह राहुल गांधी ने बैठक की अध्यक्षता की। बैठक में कांग्रेस मनमोहन सिंह, ऐके एंटनी, अहमद पटेल, दिग्विजय सिंह, मलिका अर्जुन खड़गे, अंबिका सोनी, बीके हरिप्रसाद और ग़ुलाम नबी आज़ाद समेत लगभग 21 मेंबर हिस्सा लिया।

कार्यकारिणी बैठक में राहुल के संबोधन के प्रमुख अंश
-मोदी सरकार में असहमति रखने वालों को चुप करा दिया जाता है।
-आम नागरिकों को राष्ट्रीय सुरक्षा की आड़ में सवाल पूछने के लिए धमकाया जा रहा है.
-टीवी चैनलों को सजा देते हुए बंद करवाया जा रहा है।
-लोकतंत्र काले दौर से गुजर रहा है।
-देश में अभिव्यक्ति का अधिकार छीना जा रहा है, हम इसका आने वाले संसद के सत्र में विरोध करेंगे।
-दलितों और आदिवासियों पर अत्याचार जारी है।
-सरकार ने जम्मू कश्मीर और पाकिस्तान के मुद्दे पर सभी हदें पार कीं, दशकों बाद इतनी मौतें हुई हैं।
– भाजपा जाति और धर्म के आधार पर चुनाव लड़ती है।
-यह निर्दयी सरकार हमारे जवानों को OROP नहीं दे रही है, उनकी विकलांगता पेंशन घटा रही है।

अब शहडोल उपचुनाव में कांग्रेस के लिए प्रचार करेंगे यह दिग्गज !

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Newbuzzindia : शहडोल उपचुनाव में अब कांग्रेस के लिए प्रचार करने के लिए राहुल गांधी , सोनिया गांधी और मनमोहन सिंह मैदान में आ गए है । इस बात से यह तो साफ़ है कि कांग्रेस नेतृत्व किसी भी तरह शहडोल उपचुनाव में जीत दर्ज करना चाहती है ।

कांग्रेस के सभी दिग्गज एकजुट होकर कर रहे है प्रचार ।
गौरतलब है कि कांग्रेस पार्टी के बाकी नेता पहले से ही शहडोल में डेरा डाले बैठे हुए है । इस समय कांग्रेस के सभी दिग्गज नेता शहडोल चुनाव में कांग्रेस का प्रचार कर रहे है । माहौल बनाने के लिए कांग्रेस के दिग्गज नेता पूर्व केंद्रीय मंत्री और सांसद कमलनाथ, कांतिलाल भूरिया, मोहन प्रकाश, प्रदेश अध्यक्ष अरूण यादव, राज्यसभा सांसद विवेक तन्खा समेत कई नेताओं की फौज सड़क पर उतरी।

2014 की मोदी लहर के पहले था कांग्रेस का कब्ज़ा

शहडोल सीट पर अब तक 16 लोकसभा चुनाव में 5 बार बीजेपी और 6 बार कांग्रेस की जीत हुई है । 2014 की मोदी लहर के पहले शहडोल सीट पर कांग्रेस पार्टी का कब्ज़ा था । कांग्रेस पार्टी की राजेश नादिनी सिंह शहडोल से सांसद थीं ।

विदेश नीति में कांग्रेस की कामयाबी को नही भुना पाई मोदी सरकार ।

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Newbuzzindia : जवाहरलाल नेहरू से लेकर मनमोहन सिंह तक कांग्रेस पार्टी की विदेश नीति दुनिया भर में कामयाब रही । रूस के साथ रिश्ते हो या मनमोहन सिंह द्वारा की गई nuclear deal हो । कांग्रेस पार्टी मोदी सरकार के मुकाबले ज्यादा कामयाब रही है ।

आर्थिक मंदी के दौर में जब अमेरिका समेत सभी देशों की अर्थव्यवस्था कमजोर हो गई थी । तब मनमोहन सिंह के नेतृत्व में भारत की अर्थव्यवस्था मजबूत रही ।

जवाहरलाल नेहरू के दौर में भारत ने दोनों रूस और अमेरिका से अच्छे रिश्ते बनाए रखे । यह वो समय था जब भारत का डंका पूरी दुनिया में बजता था । आज जो लोग मोदी की विदेश नीति की तारीफ करते नही थक रहे है , उन्हें जवाहरलाल नेहरू से लेकर मनमोहन सिंह की विदेश नीति पड़नी चाहिए ।

मोदी जी पाकिस्तान जाते है तो बदले में पठानकोट मिलता है । मोदी जी चीन जाते है तो वह पाकिस्तान के साथ चला जाता है । यहाँ तक की नेपाल और रूस जैसे हमारे पुराने दोस्त भी अब हमारे खिलाफ होते जा रहे है ।

इतने सब के बाद भी भक्त “मोदी-मोदी” करते नही थक रहे है । विदेश नीति के नाम पर अमेरिका-अमेरिका कर रहे है । मेक इन इंडिया की बात करने वाले मोदी जी अमेरिका में बने हथियारों का भंडार खरीद रहे है । दुगनी कीमत पर राफेल सौदा करते है और उनका निर्माण भी फ्रांस में करवाते है ।

नजर डाली जाए तो मोदी सरकार की विदेश नीति में कई विफलताएं है । जिनमें प्रमुख है –
* NSG
* राफेल सौदा
* पाकिस्तान समर्थित आतंकवाद
* पाकिस्तान-रूस सैन्याभ्यास
* चीन का पाकिस्तान को समर्थन

मोदी सरकार के आने के बाद भारत के सबसे भरोसेमंद और पुराने दोस्त रूस ने भी पाकिस्तान से नजदीकियां बड़ा ली है । रूस पाकिस्तान के साथ सैन्य अभ्यास कर रहा है । पाकिस्तान को हथियार बेच रहा है और आतंकवाद के मुद्दे पर पाकिस्तान के साथ खड़ा भी नजर आ रहा है । रूस के राष्ट्रपति पुतिन ने पाकिस्तान को सन्देश भेजते हुए कहा है कि ” रूस आतंकवाद के मुद्दे पर उसके साथ है”

मोदी भक्त मीडिया चाहे कुछ भी कहे लेकिन अगर आंकड़ों और तथ्यों पर नजर डाली जाए तो विदेश नीति के मुद्दे पर मोदी सरकार पूरी तरह फेल रही है ।

लेखक : रोहित गुप्ता
ईमेल   : rohit.newbuzzindia@gmail.com

ओबामा ने मनमोहन सिंह को दिया पहला स्थान , मोदी को नही मिली टॉप 50 में जगह ।

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Newbuzzindia: अमरीकी राष्ट्रपति बराक ओबामा का कार्यकाल ख़त्म हो रहा है और जाते जाते ओबामा कार्यकाल की यादगार तस्वीरें पीटे सौज़ा ने जारी की हैं. सौज़ा वाइट हाउस की मुख्य फोटोग्राफर हैं. ओबामा की आख़िरी ‘फॉर्मल स्टेट अराइवल सेरेमनी’ के दौरान उन्होंने इसे जारी किया.

वाइट हाउस के द्वारा ये एल्बम जारी किया गया है जिसमें 50 फ़ोटो हैं । भारत के भूतपूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह और उनकी पत्नी की तस्वीर इस एल्बम में सबसे पहले स्थान पर है। वहीं ओबामा के कई मुलाकात कर चुके प्रधानमंत्री मोदी को इस एल्बम में जगह नही मिली ।

इस एल्बम में राष्ट्रपति ओबामा के कार्यकाल की फ़ोटो हैं. उनके विदेशी दौरों को ध्यान में रखकर इस एल्बम को तैयार किया गया है.

गौरतलब है कि 8 नवम्बर को अमरीका में राष्ट्रपति चुनाव होने हैं जिसके बाद नए राष्ट्रपति की घोषणा हो जायेगी. अगले राष्ट्रपति के लिए डेमोक्रेट पार्टी की हिलेरी क्लिंटन और रिपब्लिकन उमीदवार डोनाल्ड ट्रम्प के बीच सीधी लड़ाई मानी जा रही है. नया राष्ट्रपति 20 जनवरी, 2017 से कार्यभार संभालेगा.
पीटे सौज़ा के इस एल्बम में मौजूदा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को जगह नहीं दी गयी है.

उत्तरप्रदेश चुनाव के पहले “सर्जिकल स्ट्राइक” का वीडियो सार्वजानिक करके राजनैतिक फायदा उठाना चाहती है मोदी सरकार..!

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Newbuzzindia: अरविन्द केजरीवाल का कहना है कि बौखलाए पाकिस्तान के प्रौपगैंडा का मुंहतोड़ जवाब दिया जाए। भारत सरकार भी सुबूत के साथ पाकिस्तान पर फिर सरजिलकल स्ट्राईक करे . और इसकी बड़ी वजह ये है कि पाकिस्तान इस मनोवैग्यानिक लड़ाई मे अभी थोड़ी सी बढ़त बनाए हुए है।

वो दुनिया भर के मीडिया को पाक के कब्जे वाले कश्मीर मे घुमा रहा है, ये बताने कि लिए कि देखो, कुछ नहीं हुआ। ऊपर से वो संयुक्त राष्ट्र के उस बयान को भी प्रस्तुत कर रहा है जिसमे UN ने LoC पर हुए सरजिकल हमले पर संदेह जताया गया है।

कांग्रेस नेता संजय निरूपम ने भी कहा है कि भारत सरकार असली सरजिकल स्ट्राईक करके LoC पार सारे टेरर अड्डे बर्बाद करे।

भारत के पास सुबूत है औऱ उसका मानना है कि वो सही वक्त औऱ समय पर इसे पेश करेगा। ये सही वक्त अगले 6 महीने मे कभी भी हो सकता है। क्योकि 6 महीने बाद यूपी के चुनाव हैं। बीजेपी को लग रहा है कि सरजिकल हमले के बाद वो मोदी के 56 इंच के सीने को REBRAND करके फिर पेश कर सकेगा।

ऊपर से पार्टी के महान नेता पहले से ही कैराना कैराना कर रहे हैं। उनका मानना है कि मुज्जफरनगर मे तवे की आंच बिल्कुल माकूल है। सिकाई मस्त होगी। वोट छप्पर फाड़ मिलेंगे।

अगड़ी जाती को देशभक्ती का डोज़ मिल गया है और वो खुश है। अब मुसलमान असमंजस मे सपा और बसपा मे दो फाड़ हो जाएगा। दलित और पिछड़ी जाति का वोटर भी सरजिकल स्ट्राईक मे बह ही जाएगा। ऐसा वो मान रही है क्योकि अच्छे दिन तो आए नहीं। अब अच्छे दिन से तो बीजेपी पिंड छुड़ा रही है क्योकि नितिन गडकरी जी की माने तो अच्छे दिन भी दरअसल मनमोहन सिंह का आईडिया था। लो कल्लो बात।

खैर ये बात तो हो गई सियासत की . मगर अब वापस आते हैं सुबूत पर। भारत सरकार को याद रखना होगा कि हमारा प्रस्तावित सुबूत एक ब्रहमास्त्र है। इसका इस्तेमाल सिर्फ एक बार हो सकता है। हम इसका इस्तेमाल जब भी करे, ऐसा करें कि पाकिस्तानी चारों खाने चित्त।

दोहरा दूं , ये एक ब्रहमास्त्र है और बीजेपी की संजीवनी। मै जानता हूं आप सोच रहे होगे कि क्यो मै रामायण वक्त के हथियारों का बार बार जिक्र क्यो कर रहा हूं। अब का करें भईया, मौजूदा सरकार और उसके होनहार ये प्रतीक आसानी से समझ जाते हैं। सोचा इन्ही की भाषा मे बात की जाए. लिहाज़ा आप भी इंतजार कीजिए।

सरकार पूरी सोच समझ के साथ ही कुछ करेगी क्योकि सच तो ये है कि ये सरजिकल स्ट्राईक सिर्फ और सिर्फ इसलिए ऐतिहासिक है क्योंकि भारत ने इसको सार्वजनिक तौर पर स्वीकार किया है। बस . ऐसे हमले पहले भी हुए हैं, जिसकी तज़दीक खुद पूर्व सेना प्रमुख बिक्रम सिंह कर चुके हैं। जनरल ने तो जनवरी 2013 का हवाला दिया था जिसमे 2 भारतीय सैनिको की शहादत के जवाब मे कई पाकिस्तानियों को मारा गया था।

पत्रकारों का काम है कि वो सवाल पूछें कि आखिर हमला कितना सफल रहा, निशाने पर कौन था, कितने आतंकी मारे गए? मगर माहौल ऐसा है कि ये सामान्य सवाल पूछने पर लोग देशद्रोही ठहरा देते हैं और वैसे भी अपनी सेना के दावे पर कौन सवाल कर सकता है।

ऊपर से मामला पाकिस्तान का भी है। सुबूत का विडियो सामने कब आएगा, ये एक राजनीतिक फैसला भी है। मुझे नहीं लगता कि मोदी सरकार को पाकिस्तान की चिंता है।

उनकी निगाह दरअसल पंजाब और यूपी के चुनावों पर होगी और फैसला भी उसी हिसाब से लिया जाएगा . सच तो ये ही कि सरजिकल स्ट्राईक को सार्वजनिक करने के पीछे भी यही मंशा है। मोदी एक निर्णायक नेता हैं , ये काल्पनिक नहीं , ये बात देश को समझाना जरूरी हो गया था।

और हां जरूरी ये भी है कि रक्षा मंत्री मनोहर परिक्कर, मनोहर कहानियां सुनाना बंद करें . आमिर खान के बारे मे उनके बयान तक तो ठीक था , अब वो ये भी कह रहे हैं कि सेना को हनुमान की तरह अपनी ताकत का अंदाज़ा नही था. क्योंकि सेना 2014 से पहले सो वहीं रही थी कि अपनी काबलियत का अंदाजा उन्हे अब जाकर हुआ , बिल्कुल वैसा ही जैसे लंका दहन करने से पहले हनुमान को जामवंत ने याद दिलाया था कि आपमे असंभव कर गुजरने की काबलियत है. सेना हनुमान सही , मगर आप मनोहरजी जामवंत कतई नहीं . रक्षा मंत्री हैं . बने रहें . पाकिस्तानी रंक्षा मंत्री के साथ बयानबाजी मे प्रतिस्पर्धा न करें . न भूलें , मौजूदा माहौल मे एक भारतीय सैनिक गलती से सीमा पार कर गया है , उसे वापस भी लाना है .

दिग्विजय सिंह ने पूर्व प्रधानमन्त्री मनमोहन सिंह का उड़ाया मजाक, मोदी पर लगाया था निशाना !

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Newbuzzindia: राजनीती में कभी कभी ऐसा भी हो जाता है जब कोई नेता जल्दबाजी या ज्यादा ही ख़ुशी के कारण कुछ ऐसा बोल देता है जिससे उसकी ही पार्टी उस पर हावी हो जाती है या जनता उसका मजाक उड़ाने लगती है।

ऐसा ही कुछ कांग्रेस के राष्ट्रीय महासचिव दिग्विजय सिंह के साथ हुआ। दिग्विजय सिंह ने एक ट्वीट किया जिसमें वो मोदी को निशाना बनाना चाहते थे। पर उनसे चुक हो गयी और मोदी के चक्कर में उन्होंने पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह का ही मजाक उड़ा दिया।

दरअसल दिग्विजय सिंह ने एक न्यूज़ वेबसाइट को ट्वीट किया था जिसमे मोदी से जुड़ी खबर थी। खबर के साथ साथ ही उन्होंने यह भी लिखा कि

Even Modi’s supporters disappointed with his speech, social media users said “sowed modi, reaped manmohan.”

मोदी के इस बयान से उनके प्रशंसक भी खुश नही है। सोशल मीडिया यूज़र्स उनके बारे में कह रहे है ‘बोया मोदी, उगा मनमोहन।’

जस्टिस काटजू ने मोदी सरकार को बताया हिजड़ा , पुछा कहां गई 56 इंच की छाती.?

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Newbuzzindia: भारतीय सुप्रीम कोर्ट के पूर्व न्यायधीश जस्टिस मार्कंडेय काटजू अपने बयानों के कारण अक्सर सुर्ख़ियों में रहते हैं।

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार काटजू ने अपने फेसबुक पेज पर लिखा, “उड़ी हमले के बाद से ही लोग लोग मुझसे ये लगातार पूछ रहे हैं कि भारत सरकार को पाकिस्तान को उड़ी हमले का कैसे मुँहतोड़ जवाब देना चाहिए, मैं बताता हूँ सरकार को क्या करना चाहिए। सरकार को “कड़ी निंदा” करना जारी रखना चाहिए क्योंकि इस काम में ये सारे हिजड़े बहुत माहिर हैं। लेकिन उसके बाद? वहाँ कुछ कार्रवाई भी होनी चाहिए। या कड़ी निंदा शब्द ही कार्रवाई हैं।”

एक अलग ट्वीट में काटजू ने कहा, “एक्शन मिस्टर मोदी एक्शन, सिर्फ बातें नहीं कारवाई भी कीजिये। दिखाइए अपना 56 इंच की छाती।

मोदी सरकार पर व्यंग्य कसते हुए काटजू ने आगे लिखा, “क्या हमारे महिला प्रतिनिधि ने संयुक्त राष्ट्र में उड़ी हमले पर पाकिस्तान कि कड़ी निंदा नहीं किया? और तब? गालियां, गंदी गालियाँ और न जाने क्या-क्या कहा गया, मिसाल के तौर पर बीसी, एमसी क्योंकि भारत में अपने पसंद के हिसाब से गालियां उपलब्ध है। और अगर आप अभी भी गालियों से संतुष्ट नहीं हैं तो आपको नितिन गडकरी से संपर्क करना चाहिए।

केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी पर हमला बोलते हुए काटजू ने कहा कि आप साबित कीजिये कि ‘मोदी सरकार मनमोहन सिंह सरकार जैसी पंगु नहीं है। हमें पाकिस्तान के खिलाफ एक सैन्य हड़ताल करना चाहिए या फिर भारत सिंधु नदी समझौता तोड़ देना चाहिए। एक्शन लीजिये गडकरी, एक्शन, एक्शन, यही हर भारतीय चाहता है न कि आपके बड़बोलापन।

गौरतलब है कि हाल ही में काटजू ने अमिताभ बच्चन को निशाने पर लिया था। उन्होंने 17 सितंबर को फेसबुक पेज पर अमिताभ को निशाने पर लेते हुए लिखा था, ‘अमिताभ बच्चन का दिमाग खाली है और चूंकि अधिकतर मीडियाकर्मी उनकी तारीफ करते नहीं अघाते, मुझे लगता है कि उनका भी दिमाग खाली है।’