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अस्पतालों में अब नहीं होनी चाहिए लापरवाही – डॉ• प्रभुराम चौधरी

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स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री(Health Minister) डॉ. प्रभुराम चौधरी(Dr.Prabhuram Chaudhary) ने आज मंडला जिला चिकित्सालय(Mandla district Hospital) का निरीक्षण करते हुये स्वास्थ्य सुविधाओं को बेहतर बनाने के निर्देश दिये। उन्होंने कहा कि स्वास्थ्य सेवाओं में लापरवाही कतई बर्दाश्त नहीं की जायेगी। लापरवाही पाये जाने पर हर स्तर पर जिम्मेदारी निर्धारित की जायेगी।

स्वास्थ्य मंत्री डॉ. चौधरी ने कहा कि प्रत्येक मरीज को समुचित उपचार प्रदान किया जाये। मरीजों को अनावश्यक रूप से रेफर न करें। मेटरनिटी वार्ड के निरीक्षण के दौरान स्वास्थ्य मंत्री डॉ. प्रभुराम चौधरी ने प्रसूतिओं को मिलने वाली सुविधाओं के संबंध में जानकारी प्राप्त की। उन्होंने संस्थागत प्रसव को प्रोत्साहित करने के निर्देश दिये।

गहन शिशु चिकित्सा कक्ष के निरीक्षण के दौरान उन्होंने अभिलेखों का निरीक्षण किया। उन्होंने कहा कि नवजात बच्चों के स्वास्थ्य का सतत् फालोअप लिया जाये। जिला चिकित्सालय के विभिन्न वार्डों का निरीक्षण किया और मरीज तथा उनकी परिजनों से उपचार एवं दवाईयों की उपलब्धता आदि के संबंध में चर्चा की। उन्होंने चिकित्सालय की पैथालॉजी का निरीक्षण किया।

स्वास्थ्य मंत्री डॉ. चौधरी ने पैथालॉजी में उपकरण एवं मशीनों का समुचित रखरखाव करने और कहा कि कोई भी मशीन बंद नहीं होनी चाहिये। उन्होंने स्टोर के अभिलेख का अवलोकन करते हुये दवाईयों की सतत् उपलब्धता बनाये रखने के निर्देश दिये। स्वास्थ्य मंत्री डॉ. चौधरी ने सोनोग्राफी कक्ष, एक्स-रे कक्ष एवं कोविड वार्ड का भी अवलोकन किया। उन्होंने निर्देशित किया कि स्वास्थ्य सुविधाओं के विस्तार के लिये समुचित प्रस्ताव तैयार करें।

कैबिनेट विस्तार से पहले इमरती देवी और गिर्राज दंडोतिया का इस्तीफा मंजूर

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मध्य प्रदेश में उपचुनाव (MP By-election) के नतीजों के बाद आज कैबिनेट का विस्तार (cabinet expansion) किया गया है। कैबिनेट विस्तार से पहले पूर्व मंत्री और सिंधिया समर्थक इमरती देवी (imarti devi) और गिर्राज दंडोतिया (girraj dandotia) का इस्तीफा मंजूर कर लिया गया है। इस मामले में राज्य सरकार ने नोटिफिकेशन जारी किया है।

मध्य प्रदेश में 28 सीटों पर उपचुनाव हारने के बाद शिवराज सरकार में शामिल दो मंत्रियों ने अपने पद से इस्तीफा नहीं दिया था। हार के बावजूद दोनों मंत्री पद पर बने हुए थे। जहां कार्यकाल पूरा होने के बाद दोनों नेताओं ने मंत्री पद से इस्तीफा दिया है और उनके इस्तीफे को स्वीकार कर लिया गया है।

मध्य प्रदेश में 28 विधानसभा सीटों पर उपचुनाव के नतीजे 10 नवंबर को घोषित हुए थे। उस समय शिवराज सरकार के तीन मंत्री बुरी तरह से हार गए थे। इसमें कैबिनेट मंत्री ऐंदल सिंह कंसाना के अलावा मंत्री इमरती देवी और गिर्राज दंडोतिया भी शामिल थे। उस समय कैबिनेट मंत्री ऐंदल सिंह कसाना ने अगले ही दिन मुख्यमंत्री को अपना इस्तीफा सौंप दिया था। उसे राज्यपाल आनंदीबेन पटेल द्वारा मंजूर भी कर लिया गया था लेकिन इमरती देवी और गिर्राज दंडोतिया ने इस्तीफा देने से मना कर दिया था।

इमरती देवी का कहना था कि प्रदेश में उनकी सरकार है। इसलिए वह मंत्री बनी रह सकती हैं। गिर्राज दंडोतिया ने कहा था कि उन्होंने मंत्री पद से इस्तीफा दे दिया है और वह मुख्यमंत्री सचिवालय में प्रक्रियाधीन है। जहां कार्यकाल पूरा होने के बाद दोनों नेताओं ने मंत्री पद से इस्तीफा दिया है और उनके इस्तीफे को स्वीकार कर लिया गया है।

विश्व हिन्दू परिषद का राम जन्म भूमि को लेके एक बड़ा एलान

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विश्व हिंदू परिषद ने राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट को सहायता प्रदान करने लिए हिंदू समाज से मौद्रिक प्रसाद एकत्र करने के दायरे का विस्तार करने का संकल्प लिया है | इसी सिलसिले में रायसेन के दीवान सिंह गोर ने 1 लाख 1 हज़ार की राशि मंदिर निर्माण हेतु प्रदान की औरअयोध्या में श्री राम जन्मभूमि मंदिर एवं अन्य सुविधाओं के निर्माण में योगदान के लिये 4,00,000 गांवों और 11 करोड़ परिवारों तक पहुंचने का लक्ष्य रखा गया था | VHP का एमपी के 50 हजार गांव तक पहुंचने का लक्ष्य है |

किन संस्थाओं का होगा योगदान ?

मंदिर निर्माण के लिए टाटा कंसलटेंसी सर्विस के इंजीनियर लार्सन एंड टूब्रो मंदिर निर्माण में लगे हुए हैं | इसके साथ ही आईआईटी मुंबई, आईआईटी दिल्ली, आईआईटी चेन्नई, आईआईटी गुवाहाटी, और सीबीआरआई रुड़की के इंजीनियर भी मंदिर निर्माण में अपना सहयोग देंगे | 2024 तक श्री राम लला की भव्य मूर्ति मुख्य मंदिर के गर्भ गृह में स्थापित हो जाएगी, जिसके बाद भक्तों को भगवान के मंदिर के दर्शन करने के लिए आमंत्रण किया जा सकेगा |

यह एक विचार है

विश्व हिंदू परिषद का कहना है कि यह सिर्फ एक आंदोलन नहीं है बल्कि संपूर्ण हिंदू समाज के कायाकल्प का एक सचेता प्रयास है | इस सोच और विचार के साथ इस भव्य मंदिर का निर्माण कार्य संपन्न होने जा रहा है |लक्ष्य प्राप्त करने के लिए राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र प्रांत उपाध्यक्ष पीतांबर राजदीप, प्रांत संगठन मंत्री खगेन्द्र भार्गव और अभियान प्रमुख मलखान सिंह राजपूत जैसे कई अधिकारी इस अभियान में शामिल हुए |

मध्यप्रदेश को फिर मिली एक राहत की सौगात

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मध्यप्रदेश में नए साल में एक किलोवाट विद्युत कनेक्शन वाले उपभोक्ताओं को बड़ी राहत मिली है। बिजली कंपनी ने अगस्त 2020 तक के बिजली बिल की बकाया राशि अब लंबे समय तक के लिए स्थगित कर दी है। 9 लाख उपभाक्ताओं से अधिक उपभोगताओं को इस आदेश का फायदा मिलेगा।

कोविड महामारी की वजह से पिछले साल कई उपभोक्ता नौकरी चले जाने और उद्योग धंधे बंद हो जाने की वजह से आर्थिक नुकसान झेल रहे थे। सरकार ने उन सभी को राहत पहुंचाने के लिए अगस्त 2020 तक और उससे पहले की महीने के बिजली बिल की राशि चुकाने से कुछ समय की राहत का स्थगन आदेश निकाला था। जिसे दो-दो महीने करके बढ़ाया जा रहा था, लेकिन अब एक बार फिर से स्थगन आदेश को बढ़ाया गया है।

बता दें जिन उपभोक्ताओं को यह राहत मिली है वह सभी 1 किलो वाट के कनेक्शन धारी उपभोक्ता हैं। इससे अधिक भार क्षमता वाले उपभोक्ताओं को पहले की तरह ही अपने सभी वर्तमान और पूर्व बिजली बिल जमा करने होंगे। इसके साथ ग्वालियर सिटी सर्किल में मध्य क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी, बिजली बिल की 550 करोड़ रुपए की राशि वसूलती है।

जिसमें से लगभग 300 करोड़ रुपये उन 1 किलोवाट कनेक्शन धारी उपभोक्ताओं के है। उनमें से ग्वालियर और भोपाल रीजन में ऐसे 9 लाख उपभोक्ता हैं, जबकि ग्वालियर शहर में ऐसे उपभोक्ताओं की संख्या एक लाख है। वहीं उर्जा मंत्री का कहना है कि एक किलो वाट कनेक्शन वाले उपभोक्ताओं के अगस्त 2020 और उससे पहले के महीनों के बकाया बिजली के बिल की वसूली को लेकर असमंजस की स्थिति बन रही थी। इसी कारणवश यह वसूली आगामी आदेश तक स्थगित कर दी गई है। सरकार जल्द ही ऐसे उपभोक्ताओं के हित में फैसला लेगी ताकि उन्हें राहत मिल सके।

शिवराज कैबिनेट का विस्तार: सिंधिया समर्थकों के साथ यह भी लेंगे शपथ

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मध्यप्रदेश के राज्य सरकार के कैबिनेट का विस्तार तय हो गया है। शिवराज की टीम में दो मंत्री शामिल किए जाएंगे। रविवार 3 जनवरी को दोपहर 12:30 बजे राजभवन में होगा शपथ सम्मारोह। मंत्रिमंडल विस्तार की सूचना मंत्रालय से राजभवन भेजी गई है और इसकी पुष्टि राजभवन ने कर दी है।

कैबिनेट विस्तार में सांसद ज्योतिरादित्य सिंधिया के समर्थक तुलसी सिलावट और गोविंद सिंह राजपूत के साथ मध्यप्रदेश के चीफ जस्टिस मोहम्मद रफीक भी शपथ लेंगे। मंत्रियों और नए मुख्य न्यायाधीश को शपथ दिलाने के लिए रविवार सुबह 11 बजे राज्यपाल आनंदीबेन पटेल भोपाल आएंगी।

उपचुनाव के परिणाम 10 नंवबर को आए थे। इसके बाद से शिवराज मंत्रिमंडल विस्तार का इंतजार किया जा रहा था। इसे लेकर मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान, प्रदेश अध्यक्ष वीडी शर्मा और ज्योतिरादित्य सिंधिया की चार दौर की बैठकें हुई। सूत्रों के अनुसार शुक्रवार सुबह ही राष्ट्रीय नेतृत्व की ओर से मंत्रिमंडल विस्तार की अनुमति मिली है। इसके बाद कार्यक्रम तय किया गया है।

तुलसी को जल संसाधन व गोविंद को परिवहन व राजस्व विभाग मिलेगा

मंत्रालय के सूत्रों ने बताया कि तुलसी सिलावट को जल संसाधन और गोविंद सिंह राजपूत को परिवहन व राजस्व विभाग मिलना लगभग तय है। शिवराज सरकार सत्ता में आने के बाद सिलावट और राजपूत को यही विभाग सौंपे गए थे। बीजेपी अब इन दोनों को अन्य विभाग देना चाहती थी, लेकिन राष्ट्रीय नेतृत्व और सिंधिया के बीच हुई सहमति के बाद दाेनों को एक बार फिर उन्हीं विभाग की जिम्मेदारी सौंपी जाएगी।

4 पद रह जाएंगे खाली

शिवराज कैबिनेट के 14 सदस्‍यों गोविंद सिंह राजपूत, तुलसीराम सिलावट, इमरती देवी, प्रद्युम्न सिंह तोमर, महेंद्र सिंह सिसोदिया, डॉ. प्रभुराम चौधरी, बिसाहूलाल सिंह, एदल सिंह कंषाना, हरदीप सिंह डंग, राज्यवर्धन सिंह दत्तीगांव, बृजेंद्र सिंह यादव, गिर्राज दंडौतिया, सुरेश धाकड़ और ओपीएस भदौरिया ने चुनाव लड़ा था। इसमें से इमरती देवी, एदल सिंह कंषाना और गिर्राज दंडोतिया चुनाव हार गए थे। इसमें से 2 तुलसी सिलावट और गोविंद सिंह राजपूत को छह माह का कार्यकाल पूरा होने पर चुनाव के दौरान ही मंत्री पद से इस्तीफा देना पड़ा था। अब दोनों को फिर से कैबिनेट में लिया जा रहा है। इसके बाद भी 4 पद खाली रह जाएंगे। यानी आगे भी कैबिनेट विस्तार होगा।

मध्यप्रदेश विधानसभा चुनाव : भाजपा की 177 सीटों पर 16 महिला उम्मीदवार

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प्रदेश में करीब 50 प्रतिशत महिला वोटर होने के बावजूद पार्टियां उन्हें तव्ज्जो नहीं दे रही है। एक ओर महिला सशक्तिकरण की बात करने वाली भारतीय जनता पार्टी मध्यप्रदेश चुनाव को लेकर पहली सूची में 177 में सिर्फ 16 महिलाओं उम्मीदवारों कोे जगह दी है।

शुक्रवार को भाजपा ने 230 विधानसभा सीटों में से 177 प्रत्याशियों के नाम की घोषणा की है, जिसमें 16 महिलाओं के नाम शामिल है। जहां 16 महिला उम्मीदवारों में से 7 अनुसूचित जनजाति(ST) और 9 सामान्य वर्ग से है। वहीं इस सूची में एक भी अनुसूचित जाति(SC) महिला उम्मीदवार का नाम शामिल नहीं है।

महिला उम्मीदवारों के नाम :

अनुसूचित जनजाति(ST) :

1. जैतपुर : मनीषा सिंह

2. मानपुर : मीना सिंह

3. सिहोरा : नंदिनी मरावी

4. नेपानगर : मंजू राजेंद्र दादू

5. मनावर : रंजना बघेल

6. घोड़ाडोंगरी : गीता बाई उइके

7. बैहर : अनुपमा नेताम

प्रदेश की 230 विधानसभा सीटों में अनुसूचित जनजाति(ST)  की प्रदेश में 47 सीटे हैं जिसमें 40 सीटों पर घोषणा की गई है। इन 40 सीटों में भाजपा ने सिर्फ 7 महिला उम्मीदवारों को जगह दी है। बाकी बची 7 सीटों में देखना होगा कि भाजपा कितने SC महिला उम्मीदवारों को उतारती है।

अनुसूचित जाति(SC) :

भाजपा की पहली सूची में फिलहाल किसी महिला SC उम्मीदवार का नाम नहीं है। प्रदेश में 230 विधानसभा सीटों में से 35 SC के लिए आरक्षित है। 29 सीटों पर घोषणा हो चुकी है, बाकि बची 6 सीटों पर देखना होगा कि कोई महिला उम्मीदवार को भाजपा जगह देती है या नहीं।

सामान्य वर्ग की महिला उम्मीदवार :

1.  बरगी : प्रतिभा सिंह

2. चचौरा : ममता मीना

3. छतरपुर :  अर्चना सिंह

4. मलहरा : ललिता यादव

5. देवास : गायत्री राजे पनवान

6. बुरहानपुर : अर्चना चिटनिस

7. धार : नीना वर्मा

8. सबलगढ़ : सरला रावत

9. शिवपुरी : यशोधरा राजे सिंधिया

कांग्रेस के पूर्व सांसद और दिग्विजय सिंह के करीबी प्रेमचंद गुड्डू भाजपा में शामिल

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congress leader premchandra guddu joining bjp in presense of kailash vijayvargiya and narottam mishra

कांग्रेस के पूर्व सांसद और दिग्विजय सिंह के करीबी माने जाने वाले प्रेमचंद गुड्डू भाजपा में शामिल हो गए हैं. आज शुक्रवार की शाम दिल्ली स्थित भाजपा कार्यालय में सदस्यता ली. गौर करने वाली बात है कि गुड्डू के सदस्यता लेने के दौरान केंद्रीय मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर, भाजपा महासचिव कैलाश विजयवर्गीय के साथ थावरचंद गहलोत भी मौजूद थे. बता दें कि उज्जैन जिले की घट्टिया सीट से गुड्डू और गहलोत चुनावी मैदान में आमने सामने रहते थे. 

सूत्रों की मानें तो प्रेमचंद गुड्डू कांग्रेस में साइड लाइन होने की वजह से पिछले कई दिनों से परेशान चल रहे थे. इसलिए उन्होंने भाजपा में शामिल होने का फैसला किया. प्रेमचंद गुड्डू उज्जैन से सांसद रह चुके हैं इसके बावजूद भी उज्जैन में नियुक्तियों के दौरान उन्हें नजरअंदाज किया गया. सभी पद कमलनाथ के करीबी को दे दिया गया. जिस वजह से गुड्डू काफी नाराज चल रहे थे. हालांकि इस मामले पर दिग्विजय सिंह ने गुड्डू का साथ भी दिया था लेकिन कमलनाथ ने पद देने से इंकार कर दिया. यही कारण है कि गुड्डू और कमलनाथ की बिलकुल नहीं बनती.

कैलाश विजयवर्गीय ने दिलाई सदस्यता

प्रेमचंद गुड्डू के भाजपा में शामिल होने के संकेत भाजपा के राष्‍ट्रीय महासचिव कैलाश विजयवर्गीय ने पहले ही दे दिया था. विजयवर्गीय ने एक टीवी चैनल को बताते हुए कहा था कि आज शाम तक बड़ा ‘धमाका’ करने वाले हैं, उनके इस ऐलान से कांग्रेस को झटका लगेगा. बता दें कि कैलाश विजयवर्गीय ने ही गुड्डू को सदस्य्ता दिलाई.

उज्जैन जिले की घट्टिया विधानसभा सीट से लड़ सकते हैं चुनाव

बहरहाल, प्रेमचंद गुड्डू का भाजपा में शामिल होने से इस बात का अंदाजा लगाया जा रहा है कि उज्जैन जिले की घट्टिया विधानसभा सीट से चुनाव लड़ सकते हैं. क्योंकि जैसे ही प्रेमचंद ने भाजपा में शामिल हुए वैसे ही भाजपा मीडिया प्रभारी लोकेंद्र पाराशर ने मीडिया से बात करते हुए बताया कि, ‘घट्टिया विधानसभा सीट से पहली सूची में उम्मीदवार का नाम त्रुटिवश जारी हो गया है. अभी इस सीट पर उम्मीदवार का निर्णय नहीं हुआ है. अगली सूची में इस विधानसभा क्षेत्र के लिए उम्मीदवार की घोषणा की जाएगी.’

मध्य प्रदेश विधानसभा चुनाव के लिए भाजपा ने जारी की पहली सूची

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मध्यप्रदेश विधानसभा चुनाव के लिए आखिरकार भाजपा ने अपने पत्ते खोल दिए हैं. बता दें कि भाजपा ने 177 प्रत्याशियों की अपनी पहली सूची जारी की है. शिवराज सिंह चौहान अपने पुरानी सीट बुधनी से ही लड़ेंगे.

  • देवास से सांसद मनोहर ऊंटवाल आगर से लड़ेंगे चुनाव
  •  मंत्री माया सिंह का टिकट कटा
  • मंदसौर- यशपालसिंह सिसोदिया
  • सुवासरा- राधेश्याम पाटीदार,
  • मनासा- माधव मारू
  • नीमच- दिलीप परिहार
  • जावद- ओमप्रकाश सकलेचा
  • मल्हारगढ़- जगदीश देवड़ा
  • जावरा- राजेन्द्र पांडेयके नाम
  • गरोठ, की घोषणा नहीं।

प्रत्याशियों की सूची

40 दिन 40 सवाल- ‘मामाजी , क्या विदेश यात्राओं में सिर्फ खर्च किया सरकारी कैश ? क्यों नही आया कोई विदेशी निवेश ?’

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40 दिन 40 सवाल पूछने के अभियान को लेकर कांग्रेस मध्यप्रदेश अध्यक्ष कमल नाथ ने शिवराज सरकार से तेरहवां सवाल पूछा है। तेरहवें सवाल में कमल नाथ ने पूछा, ‘मामाजी , क्या विदेश यात्राओं में सिर्फ खर्च किया सरकारी कैश ? क्यों नही आया कोई विदेशी निवेश ?’

सवाल नंबर तेरह –

मोदी जी की निगाह से देखिए मामा जी की विदेशी यात्राओं का कमाल,
निवेश में मध्यप्रदेश ठन ठन गोपाल ।
मामाजी , क्या विदेश यात्राओं में सिर्फ खर्च किया सरकारी कैश ?
क्यों नही आया कोई विदेशी निवेश ?

प्रत्यक्ष विदेशी निवेश का शिवराज ब्रांड झूठ ।

12 सालों से शिवराज जी देश विदेश में चमक-धमक के साथ इन्वेस्टर्स मीट कर रहे हैं। कहते हैं कि 40 लाख़ करोड़ रुपए के अनुबंध भी हुए हैं। सच क्या है? सच 23 जुलाई 2018 को लोकसभा में बताया गया।

1.वर्ष 2103-14 में भारत में कुल 24299.33 मिलियन डॉलर का विदेशी निवेश आया।

इसमें से केवल 118.85 मिलियन डॉलर (यानी 0.49%) का निवेश मध्यप्रदेश और छतीसगढ़ में आया। इतने में से पूरा भी मप्र में नहीं आया।

2.वर्ष 2014-15 में भारत में कुल 30930.50मिलियन डाॅलर का विदेशी निवेश आया। इसमें से केवल 100.13 मिलियन डाॅलर (यानी 0.32%) मप्र और छतीसगढ़ में आया।

3.वर्ष 2015-16 में भारत में कुल 4000000मिलियन डाॅलर का विदेशी निवेश भारत में आया। इसमें से केवल 80.02 मिलियन डाॅलर (यानी 0.20%) मध्यप्रदेश और छतीसगढ़ में आया।

4.वर्ष 2016-17में भारत में 43478.27मिलियन डाॅलर का विदेशी निवेश भारत में आया।

इसमें से केवल 76.10 मिलियन डाॅलर ही (यानी 0.17%) मध्यप्रदेश और छतीसगढ़ में आया।

5.वर्ष 2017-18 में भारत में कुल 44856.75 मिलियन डाॅलर का विदेशी निवेश आया। इसमें से केवल 28.16 मिलियन डाॅलर (यानी 0.06%) मध्यप्रदेश और छतीसगढ़ में आया।

शिवराज जी, सरकारी खज़ाने से विदेश यात्रायें करने के बाद भी कोई निवेश करने क्यों नहीं आया?
क्योंकि निवेशक शिवराज सरकार के भ्रष्टाचार से भयभीत रहे।

शिवराज ब्राँड झूठ
सबसे ज्यादा विदेशी निवेश कर्नाटक, तमिलनाडु, आँध्रप्रदेश में आया, जहाँ भाजपा की सरकारें नहीं हैं।

40 दिन 40 सवाल-
“मोदी सरकार के मुँह से जानिए,

मामा सरकार की बदहाली का हाल।”

कैलाश की निगाहें इंदौर लोकसभा पर तो कई दिग्गज हार के डर से हट रहे हैं पीछे

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मध्यप्रदेश भारतीय जनता पार्टी के कद्दावर नेता कैलाश विजयवर्गीय अपने दोनों हाथों में लड्डू रखने की रणनीति पर चल रहे हैं। विजयवर्गीय की निगाहें अगले साल होने वाले लोकसभा चुनाव पर लगी है। विजयवर्गीय इंदौर लोकसभा सीट से चुनाव लड़ना चाहते हैं। अभी लोकसभा अध्यक्ष इस क्षेत्र से सांसद हैं। सुमित्रा महाजन अपनी राजनीतिक पारी समाप्त करने से पहले बेटे मंदार महाजन को विधानसभा में भेजना चाहती हैं। कुछ ही समय यह तस्वीर साफ हो जाएगी कि कैलाश विजयवर्गीय और सुमित्रा महाजन के बेटे को पार्टी टिकट देती है या नहीं।

इंदौर की राजनीति में होगा बड़ा फेरबदल

राज्य में लगातार तीसरी बार भाजपा की सरकार बनना और उसका नेतृत्व शिवराज सिंह चौहान के हाथ में होना कैलाश विजयवर्गीय के लिए किसी भी स्थिति में अच्छे संकेत देने वाला नहीं रहा। कैलाश विजयवर्गीय को वर्ष 2008 के विधानसभा चुनाव में इंदौर-2 की अपनी परंपरागत सीट को छोड़ना पड़ी थी। यह सीट उन्होंने अपने सहयोगी रमेश मेंदोला के लिए छोड़ी थी। विजयवर्गीय महू चुनाव लड़ने के लिए चले गए थे। वे चुनाव जीते भी।

इसके बाद से ही मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान से उनकी दूरी बढ़ती गई। दूरी बढ़ने की बड़ी वजह पेंशन घोटाला रहा। इस घोटाले के लिए चौहान द्वारा बनाए गए आयोग की रिपोर्ट को अब तक विधानसभा के पटल पर नहीं रखा गया है। जबकि आयोग ने उन्हें क्लीन चिट दे दी है। बताया जाता है कि विजयवर्गीय ने मेंदोला को मंत्री बनावाने के लिए ही मंत्री पद छोड़ा था। विजयवर्गीय को पार्टी ने राष्ट्रीय महा सचिव बना दिया। विजयवर्गीय पर उनका बेटा आकाश विजयवर्गीय टिकट के लिए दबाव बना रहे हैं। पार्टी एक ही टिकट देने को तैयार बताई जाती है।

सूत्रों ने बताया कि विजयवर्गीय ने इंदौर से लोकसभा का टिकट देने की मांग भी पार्टी के सामने रखी है। अभी यह पूरी तरह साफ नहीं हुआ है कि आकाश विजयवर्गीय को महू से उम्मीदवार बनाया जाएगा या फिर इंदौर-दो से। इंदौर-दो से यदि आकाश को टिकट दी जाती है तो रमेश मेंदोला का भविष्य दांव पर होगा। सुमित्रा महाजन के बेटे को टिकट देने की स्थिति में परिवारवाद की चर्चा इंदौर की सड़कों पर भी सुनाई दे सकती है।

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सूर्यप्रकाश मीणा ने इज्जत बचाने लिखी चिट्ठी

कैलाश विजयवर्गीय के चुनाव न लड़ने के पीछे कारण और भी हैं। पार्टी में कई दिग्गज नेता अपने साथ-साथ अपने पुत्र-पुत्रियों के लिए भी टिकट मांग रहे हैं। इनमें पंचायत एवं ग्रामीण विकास मंत्री गोपाल भार्गव का नाम प्रमुख है। वे अपने बेटे अभिषेक के लिए देवरी से टिकट मांग रहे हैं। विजयवर्गीय फार्मूले को पार्टी ने यदि मान लिया तो कई नेताओं को अपने बेटों की खातिर घर बैठना पड़ेगा। राज्य में चौथी बार भाजपा की सरकार बनाने के लिए मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान की कोशिश नए चेहरों को टिकट देने की है। इसमें बड़ा फायदा उनका ही है। पार्टी में उनके कद का कोई नेता चुनौती देने वाला नहीं होगा।

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पिछले सप्ताह कैलाश विजयवर्गीय ने ही सार्वजनिक तौर पर कहा था कि अब नई पीढ़ी आगे आना चाहिए। उनका यह सुझाव कई नेताओं के लिए मुश्किल बन गया है। भाजपा में उथल-पुथल कई मोर्चों पर देखी जा रही है। राज्य के उद्यानिकी मंत्री सूर्यप्रकाश मीणा का एक पत्र सोशल मीडिया पर चल रहा है, जिसमें उन्होंने चुनाव न लड़ने की इच्छा प्रकट की है। पत्र मुख्यमंत्री को लिखा गया है। मीणा का टिकट काटे जाने की चर्चाएं काफी दिनों से चल रही थी। वे अपने दावेदारी को लेकर पार्टी कार्यालय में बड़े नेताओं से मिले थे।