Regional Party of Bihar, lead by Lalu Prasad Yadav.
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BJP विरोधी लालू प्रसाद का उमड़ा ‘स्मृति प्रेम’, आखिर क्या चाहते है लालू प्रसाद !
#Newbuzzindia/नई दिल्ली | कुछ दिनों पहले ही भाजपा की मोदी सरकार ने अपने कैबिनेट में फेरबदल के साथ विस्तार भी किया है। इसमें कुछ नए चेहरों को शामिल किया गया तो कुछ पुरानें चेहरों को बाहर का रास्ता भी देखना पड़ा। विस्तार में कुछ मंत्रियों के औहदे में गिरावट भी देखी गई। इस फेरबदल का सबसे ज्यादा प्रभाव पूर्व शिक्षा मंत्री स्मृति ईरानी पर माना जा रहा है। क्योंकि उनसे शिक्षा मंत्री का पद छीन कर उन्हें कपड़ा मंत्रालय दे दिया गया है।
मोदी सरकार के इस कदम से विपक्ष के साथ साथ दूसरे दल के नेताओं ने भी स्मृति ईरानी से सहानुभुति जताना शुरू कर दिया है। दो दिन पहले जब स्मृति ईरानी को लेकर जदयू प्रवक्ता अली अनवर अंसारी ने अभद्र टिपण्णी की तो आम आदमी नेता और शायर कुमार विश्वास स्मृति ईरानी के समर्थन में आ गए और अली अनवर को खरी खरी सुनाई।
स्मृति ईरानी के प्रति एक और बड़े नेता ने अपनी सहानुभूति जाहिर की है, जिससे राजनीति में हलचल मच गयी है। RJD सुप्रीमों लालू प्रसाद यादव भी स्मृति ईरानी के समर्थन में आ गए है और कहा की ” स्मृति ईरानी एक भद्र महिला है। हम उनका बहुत सम्मान करते हैं, वो भी हमारा बहुत सम्मान करती है।” लालू प्रसाद यादव ने यह भी कहा कि “कपड़ा मंत्रालय एक डूबा हुआ मंत्रालय है, अभी इस मंत्रालय में बहुत काम करना है, केन्द्र सरकार ने इस मंत्रालय को दुरुस्त करने के लिये ही उन्हें यहां भेजा है। मालूम हो कि लालू प्रसाद यादव ने ये बातें अपने पटना आवास पर कही।”
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बिहार: जानिए बिहार में कैसे बने फ़र्ज़ी टॉपर
NewBuzzIndia:
बिहार के इंटरमीडिएट एग्जाम के रिजल्ट के बाद एक टीवी इंटरव्यू में आर्ट्स और विज्ञान विषय के टॉपरों का का पर्दाफाश हुआ है, इस मामले में हो रहे रोज़ नए खुलासों से बिहार शिक्षा बोर्ड की नींद हराम हो गई है। इस काण्ड में अभी तक पांच छात्रों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई है। वही बिहार बोर्ड के अध्यक्ष लालकेश्वर सिंह और बिशुन राय कॉलेज के संचालक बच्चा राय अभी तक फरार हैं।
पुलिस लगातार अपने तफ़तीस में लगी हुई है। घोटाले और गिरफ्तारियों की कड़ियों को जोड़ कर मामले की तह तक पहुँचने की कोशिश की जा रही है। इस पुरे घटना की छानबीन करने के लिए एसआईटी का गठन किया गया है, जिसने हाजीपुर स्थित बिसुन राय कॉलेज में गुरुवार शाम छापामारी भी की।
वहीं टॉपरों को लेकर देश में अपनी तरह के इस पहले घोटाले के बीच बड़ा सवाल ये है कि आखिर इन छात्रों ने टॉप किया कैसे? क्या इसके लिए कुछ छात्रों को विशेष तौर पर नकल करवाई गई या फिर बोर्ड के सेंटर लगवाने में हेराफेरी की गई या इन सबसे इतर कोई अन्य तरीका अपनाया गया।
अभी तक की जांच में टॉप करवाने का जो सच सामने आया है वो थोड़ा चौंकाने वाला है। तो चलिए आपको तफशील से बताते हैं वो सच जिससे जुड़ा है टॉपर बनाने का वो खेल जिसने बिहार की पूरी माध्यमिक शिक्षा व्यवस्था पर कालिख पोत दी है।
आइए जाने कैसे होती थी कॉपियों की हेरा फेरी
परीक्षाओं में पास कराने या टॉप करने की हेराफेरी के जितने भी मामले सामने आते हैं उनमें ज्यादातर मामले नकल या सामूहिक नकल कराने के ही होते हैं। लेकिन बिहार में टॉप कराने के मामले में बिल्कुल अलग तरीका अपनाया गया जिससे कहीं पर भी शक की गुंजाइश न रहे और न ही चोरी पकड़ में आ सके।
असल में फर्जीवाड़े का यह सारा खेल बच्चा राय और बोर्ड अधिकारियों की शह पर खेला जाता था। बच्चा राय अपने कालेज विशुन राय कालेज का सेंटर अपनी मर्जी से लगवाता था। इसके बाद कॉपियां कहां चेक होनी हैं ये भी वह खुद ही तय करता था। परीक्षा होने के बाद जब सारी कॉपियां जांच होने के लिए केंद्र पर पहुंच जाती थी तब ये सारा खेल शुरू होता था।
सूत्रों के अनुसार जिन छात्रों को टॉप करवाना या नंबर अच्छे रखवाने होते थे उनकी कॉपियां बंडल में से ढूंढकर निकाल ली जाती थी। फिर उन कॉपियों के ऊपर के पिन खोलकर अंदर के पेज निकाल लिए जाते थे, फ्रंट पेज पहले वाला ही रखा जाता था।
इसी बीच एक व्यक्ति या छात्र इत्मीनान से सही सवालों के जवाब खाली उत्तर पुस्तिका में लिखते थे जिसके ऊपर का पेज उतारकर वापस पुरानी वाली कॉपी के फ्रंट पेज के अंदर डाल दिया जाता था। यह सारा काम इतने शातिर तरीके से किया जाता था कि कॉपी से छेड़छाड़ का अंदाजा लगाना मुश्किल होता था।
बिहार: सरकार के आदेश पर मारे गए 250 नीलगाय, केंद्र के दो मंत्री आए आमने सामने
NewBuzzIndia:
बिहार के मोकामा में हुए 250 से ज्यादा नीलगायों की हत्या ने एक अलग सियासी बवंडर उठा दिया है। केंद्र ने बिहार सरकार के आग्रह पर हैदराबाद से दो शार्प शूटरों को बिहार में भेजा है।
बिहार के मोकामा में करीब 250 नीलगायों की गोली मारकर हत्या के मामले में केंद्र के दो मंत्री आमने-सामने आ गए हैं। केंद्रीय महिला और बाल विकास मंत्री मेनका गांधी ने इसके लिए पर्यावरण मंत्री प्रकाश जावड़ेकर को जिम्मेदार ठहराया है। वहीं जावड़ेकर का कहना है कि राज्यों के आग्रह के बाद ही जानवरों को मारने का आदेश दिया गया है।
मेनका गांधी ने तल्ख लहजे में कहा कि बिहार में पहली बार इतना बड़ा नरसंहार (नीलगायों का) हुआ है। यहां कोई इस काम के लिए तैयार नहीं हुआ तो बाहर से लोगों को बुलाया गया। इन्हें मारने की जरूरत क्यों है। जंगली जानवरों को मारना शर्म की बात है। इस घिनौने काम के लिए क्यों इजाजत दी गई है।
प्रकाश जावड़ेकर ने मेनका के बयान पर कहा, ‘किसने क्या कहा उस पर मैं प्रतिक्रया नहीं देता। जब किसानों को नुकसान होता है. ..बहुत तकलीफ होती है। अगर राज्य सरकार प्रस्ताव भेजती है तो ही हम किसी विशेष कार्य के लिए साइंटिफिक मैनेजमेंट के लिए राज्य सरकार के प्रस्ताव को मंजूरी दी जाती है। ये केंद्र का कार्यक्रम नहीं है। यह पहले से बने कानून के हिसाब से हो रहा है।
मेनका ने कहा कि पर्यावरण मंत्रालय हर राज्य को लिख रहा है कि आप बताओ किसको मारना है। हम इजाजत दे देंगे। बंगाल में उन्होंने कह दिया कि हाथी को मारें। हिमाचल को कहा कि हाथी को मारें। गोवा में कह दिया कि मोर को। अब कोई जानवर नहीं छूटा। चांदपुर में इतना अनर्थ हो रहा है कि उन्होंने 53 जंगली सुअर मारे हैं। अभी और 50 की इजाजत दी है। इस घटना के लिए पर्यावरण मंत्रालय जिम्मेदार है।
पर्यावरण मंत्री प्रकाश जावड़ेकर ने कहा कि राज्य सरकार प्रस्ताव देती है तो हम राज्य सरकार को मंजूरी देते हैं। ये केंद्र सरकार का नहीं राज्य सरकार का काम है। इसके लिए पहले से ही कानून बना हुआ है।
चारा घोटाला: गायब हुई चारा घोटाले से जुडी महत्वपूर्ण फाइलें, क्या नितीश बचा रहे हैं लालू को ?
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बिहार के चर्चित चारा घोटाले में जिसमे करोड़ों रुपयों की हेरा फेरी हुई थी, उसमें एक नया मोड़ आया है। इस घोटाले से जुडी पशु कई फाइलें जो की पशु संसाधन विभाग में राखी हुई थीं, चोरी हो गई हैं। मुकद्दमा दर्ज़ कर पुलिस ने छानबीन शुरू कर दी है। फाइलें पटना स्थित पशु एवं मत्स्य संसाधन विभाग में रखी हुई थी। इस मामले में मुख्य आरोपी राष्ट्रीय जनता दल के प्रमुख और बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री लालू प्रसाद यादव हैं, जिन्हें इस मामले में छह साल की सज़ा भी सुनाई जा चुकी है।
जानकारी के अनुसार पटना के ओल्ड सेक्रेटरिएट पुलिस स्टेशन में इस संबंध में मुकद्दमा दर्ज कराया गया है। विभागीय सूत्रों के अनुसार पटना सचिवालय स्थित कार्यालय से तीन अलमारियों में रखी महत्वपूर्ण फाइलें चोरी हो गई हैं। इनमें से अधिकतर चारा घोटाले और उसमें आरोपी बनाए गए लोगों के संबंध में थी।
बताया जा रहा है कि इनमें पशु डॉक्टरों और कर्मियों की संलिप्तता के सबूत थे। हालांकि इस संबंध में 16 मई को मुकद्दमा दर्ज कराया जा चुका है लेकिन मामले का खुलासा अभी हुआ है।
इस बीच, बीजेपी नेता नितिन नवीन ने नीतीश कुमार की अगुआई में चल रही महागठबंधन सरकार की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए हैं। उन्होंने पूछा है कि क्या आरजेडी चीफ लालू प्रसाद यादव को बचाने की कोशिश की जा रही है? उन्होंने कहा, ‘नीतीश कुमार को बताना चाहिए कि वह कैसे और क्यों लालू प्रसाद यादव को बचा रहे हैं? गायब हुईं फाइलें उनसे जुड़ी हुई थीं। नीतीश कुमार की हरकत से बिहार का भविष्य प्रभावित हो रहा है।’