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बुधवार को भोपाल आएंगे ज्योतिरादित्य सिंधिया, कई अहम मुद्दों पर कर सकते हैं बैठक

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मध्य प्रदेश भारतीय जनता पार्टी में मची राजनीतिक हलचल के बीच भाजपा के राज्यसभा सांसद और दिग्गज नेता ज्योतिरादित्य सिंधिया बुधवार को भोपाल आएंगे इस दौरान वह कई अहम मुद्दों पर प्रदेश सरकार,मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान और भाजपा के कई वरिष्ठ नेताओं से मुलाकात कर सकते हैं।

सिंधिया का यह दौरा इसलिए भी अहम हो जाता है कि इस समय प्रदेश भाजपा में सब कुछ अच्छा नहीं चल रहा है बीते दिनों ही पार्टी के राष्ट्रीय महासचिव और बंगाल प्रभारी कैलाश विजयवर्गीय ने मध्य प्रदेश के गृह मंत्री नरोत्तम मिश्रा केंद्रीय मंत्री प्रहलाद सिंह पटेल से मुलाकात की थी जिसके कई सियासी मायने निकाले गए थे।

कल प्रदेश भाजपा अध्यक्ष विष्णु दत्त शर्मा ने भी अपने धुर विरोधी माने जाने वाले नए मंत्री नरोत्तम मिश्रा से मुलाकात की थी इस मुलाकात के भी कई सियासी मायने निकाले जा रहे हैं क्योंकि शर्मा और मिश्रा को एक दूसरे का प्रतिद्वंदी माना जाता रहा है लेकिन कल हुई 1 घंटे की मुलाकात के बाद समीकरण बदलते दिखाई दे रहे हैं।

राजनीतिक पंडितों की मानें तो प्रदेश भाजपा में सब कुछ ठीक नहीं चल रहा है निगम मंडलों की नियुक्तियों में भी फेंच फंसा हुआ है यही कारण है कि अब भाजपा संगठन इसे अपने स्तर पर निपटाने के लिए जुटी हुई है, कई लोग तो यह भी बताते हैं कि भाजपा के कुछ वरिष्ठ नेता शिवराज सिंह से खफा हैं और सब अपनी-अपनी गोटियां फिट करने में लगे हुए हैं।

आपको बता दें कि प्रदेश में भाजपा की सरकार बने सवा साल से ज्यादा का समय हो गया है लेकिन कुछेक नियुक्तियों को छोड़कर अभी भी निगम मंडलों की नियुक्तियां नहीं हुई है जिसके कारण सिंधिया समर्थक वह विधायक जो चुनाव हार गए थे उनमें भी रोष है इसके अलावा वह समर्थक भी परेशान हैं जो सिंधिया के कहने पर कांग्रेस छोड़कर भाजपा में सम्मिलित हो गए थे लेकिन आज तक अपना वह स्थान नहीं बना पाए जो कांग्रेस में हुआ करता था।

हनीट्रेप की ओरिजनल पेन ड्राइव मेरे पास अभी भी है : पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ

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सोनिया भारद्वाज की आत्महत्या मामले में घिरते विधायक उमंग सिंघार को बचाने अब प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष कमलनाथ सामने आ गये हैं। उन्होंने गुरूवार केा विधायक दल की वर्चुअल बैठक में कहा कि उमंग के खिलाफ बिना ठोक साक्ष्य के राजनीतिक विद्वेष से एफआईआर दर्ज की गई है। नाथ ने विधायकों से कहा कि कोई यह न भूले कि हनीट्रेप मामले की ओरिजनल पेन ड्राइव अभी भी मेरे पास है और उसके साथ कई पत्रकारों के पास भी।

कमलनाथ ने कहा कि सोनिया की मां और बेटा दोनों ने ही उमंग के खिलाफ बयान नहीं दिया है। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चैहान से भी उनकी बात हुयी है। कमलनाथ उमंग के मामले में शुक्रवार केा सीएम से मुलाकात भी करेंगे यह भी बैठक में बताया।

सोनिया आत्महत्या कांड में परिवार भले ही बयान नहीं दे रहा हो लेकिन उमंग के खिलाफ साक्ष्य पुलिस को मिलते जा रहे हैं। उमंग के खिलाफ कार्यवाही न हो इसे लेकर अब कांग्रेस ने दबाव बनाना प्रारंभ कर दिया है। कमलनाथ के बयान को भी उसी कड़ी से जोड़कर देखा जा रहा है।

मध्यप्रदेश में पत्रकारों का होगा मुफ्त में कोरोना का इलाज

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भोपाल: मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने पत्रकारों को फ्रंट लाइन वर्कर घोषित करने के बाद अब पत्रकार साथियों व उनके परिवार के हित में एक और महत्वपूर्ण निर्णय लिया है। मुख्यमंत्री ने पत्रकारों से बातचीत के दौरान कहा कि प्रदेश के मीडिया के सभी साथियों के कोरोना का इलाज सरकार कराएगी।

उन्होंने यह बताया कि मीडिया के प्रिंट, इलेक्ट्रॉनिक, डिजिटल के सभी सदस्य अधिमान्य और गैर अधिमान्य साथियों का कोरोना के इलाज की चिंता करने की आवश्यकता नही है, उनका इलाज मध्य प्रदेश सरकार करेगी।

इस योजना के बारे में बात करते हुए उन्होंने बताया कि इसमे प्रिंट, इलेक्ट्रॉनिक व डिजिटल के संपादकीय विभाग में कार्य कर रहे सभी पत्रकार, डेस्क में पदस्थ पत्रकार साथी, कैमरामैन, फोटोग्राफर सभी को शामिल किया जाएगा।

मीडिया के कार्य की सराहना करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि सभी मीडिया के साथी करोना महामारी के काल में जन जागृति का धर्म निभा रहे है और सरकार उनके साथ है। उन्होंने यह कहा कि शासकीय अस्पताल, अनुबंधित निजी अस्पताल में सभी के लिए मुफ़्त इलाज की सुविधा भी है। इसके साथ साथ अब हमारे प्रदेश भर के सभी मीडिया कर्मी और उनके परिवार को कोविड का उपचार सरकार कराएगी। ताकि पत्रकार साथी अपना और अपने परिवार का कोविड के संक्रमण होने पर आसानी से इलाज करा सकें।

मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान बेसहारा परिवारों और बच्चों को देंगे 5000 रुपयें पेंशन

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मध्य प्रदेश की शिवराज सरकार ने पीड़ित परिवारों को बड़ी राहत देने की घोषणा की है। सरकार ने बेसहारा परिवारों और बच्चों को हर महीने 5000 रुपये पेंशन देगी। इसके साथ ही बच्चों के लिए फ्री पढ़ाई की व्यवस्था करेगी।

उन्होंने कहा कि बच्चों को जीवन यापन के लिए परेशान ना होना पड़े। ऐसे सभी बच्चों के शिक्षा का नि:शुल्क प्रबंध किया जाएगा ताकि वह अपनी पढ़ाई लिखाई पूरी कर सकें। और साथ ही साथ ऐसे परिवार को फ्री में राशन दिया जाएगा।

सीएम ने कहा कि हमारी बहन कोई ऐसी है जो काम या नौकरी करना चाहती है तो उनको सरकार की गारंटी पर बिना ब्याज का ऋण काम या नौकरी के लिए उपलब्ध करवाया जाएगा। ताकि फिर से वह अपना काम जीवन यापन के लिए प्रारंभ कर सके।

उन्होंने कहा कि बच्चों को भी चिंता करने की जरूरत नहीं है वे प्रदेश के बच्चे है और प्रदेश उनकी चिंता करेगा। दरअसल एमपी में कई ऐसे बच्चे है जिनके माता-पिता का निधन कोरोना की वजह से हो गया है।

राजधानी भोपाल में 14 साल से कम उम्र के बच्चे हुए कोरोना संक्रमित

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मध्य प्रदेश में कोरोना की दूसरी लहर बच्चों के लिए भी घातक सिद्ध हो रही है। जानकरी के अनुसार दूसरी लहर में बड़ी संख्या में 14 साल से कम उम्र के बच्चे भी संक्रमित हुए है। अगर सिर्फ भोपाल में ही देखे तो 54000 मरीजों में 14 साल से कम उम्र के बच्चों की संख्या 2700 है।

दरअसल दूसरी लहर में बच्चों के संक्रमित होने से सरकार के भी कान भी खड़े हो गए है। ऐसा भी माना जा रहा है कि तीसरी लहर बच्चों के लिए और भी ज्यादा खतरनाक हो सकती है। रिपोर्ट्स के अनुसार तीसरी लहर में 50 प्रतिशत मरीज 14 साल से कम उम्र के बच्चे हो सकते हैं।

बता दे कि इस आपदा से निपटने के लिए सरकार ने खास तौर पर बच्चों के लिए अस्पतालों में आईसीयू बनाए जाने के निर्देश दे चुकी है। भोपाल के हमीदिया अस्पताल में बच्चों के लिए अलग से 50 बिस्तरों का आईसीयू बनाया जाएगा।

मध्यप्रदेश के शहडोल जिले में पुलिस ने दिखाई अपनी कठोरता,लात और घूसों से एक शख्स को पीटा

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मध्य प्रदेश के शहडोल से दिल दहला देने वाला वीडियो सामने आया है। उसमे पुलिसकर्मी एक शख्स को लात-घूंसों से पीटता हुआ दिखाई दे रहा है। यहीं नहीं बल्कि पुलिसकर्मी गमछे से शख्स का गला दबाकर उसे घसीटने की कोशिश कर रहा है।

दरअसल, ये मामला शहडोल जिले के पपौंध थाना क्षेत्र का है। ये वीडियो 5 से 6 दिन पुराना बताया जा रहा है। इस वीडियो में पुलिसकर्मी किसी शख्स की पिटाई करता नजर आ रहा है।

जानकरी के अनुसार शख्स का नाम सत्येंद्र कुमार द्विवेदी है। इस घटना के बाद पुलिस की बर्बरता की शिकायत करने सतेंद्र कई एसपी कार्यालय पहुंचा और अधिकारियों से मदद का गुहार लगाने लगा। बता दे कि वे गेंहू और दवा लेने बाजार निकला था।

इसी दौरान एक हेड कांस्टेबल ने सत्येंद्र से लॉकडाउन के दौरान बाहर निकलने का कारण पूछते हमला बोल दिया। इस मामले में पुलिस का कहना है कि सत्येंद्र लॉकडाउन का उल्लंघन कर रहा था। जिसके बाद सत्येंद्र के खिलाफ धारा 151 के तहत कार्रवाई की गई। बता दें कि सत्येंद्र के खिलाफ पहले से काफी मामले दर्ज है जिनमें से कई संगीन मामले भी हैं। 

मध्यप्रदेश कोरोना की तीसरी लहर से बच्चों और नवजातों को बचाने के लिए कितना है तैयार

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मध्य प्रदेश में तीसरी लहर की तैयारी की रूपरेखा बनाते हुए मंत्री विश्वास सारंग ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से प्रदेश के 13 शासकीय मेडिकल कॉलेज और उनके कोविड अस्पतालों के चिकित्सकों एवं चिकित्सा शिक्षा विभाग के आला अधिकारियों के साथ मंथन किया।

जानकरों की माने तो कोरोना की तीसरी लहर में नवजात शिशुओं एवं बच्चो के संक्रमित होने की संभावना को देखते हुये प्रदेश के मेडिकल कॉलेज के अस्पतालों में 360 बिस्तर के बच्चों के ICU की व्यवस्था की जा रही है। इसके साथ भोपाल के हमीदिया अस्पताल में 50 ICU की भी व्यवस्था की जा रही है।

मंत्री सारंग ने कहा कि कोरोना संक्रमण में नवजात शिशु एवं बच्चों के उपचार के लिए आवश्यक दवाइयां, इंजेक्शन, कंज्यूमेंबल्स आदि की उपलब्धता सुनिश्चित करने के निर्देश दे दिए हैं ।

बता दे कि 13 मेडिकल कॉलेज के अस्पतालों में 1000 ऑक्सीजन कंसंट्रेटर स्थापित किए जाएंगे। और 1000 ऑक्सीजन कंसंट्रेटर में से 15% को बैकअप रखते हुए 850 ऑक्सीजन बेड को सेंट्रल ऑक्सीजन सप्लाई से पृथक करते हुए ऑक्सीजन कंसंट्रेटर के माध्यम से संचालित किया जाएगा ।

दरअसल ऑक्सीजन कंसंट्रेटर को संचालित करने हेतु अस्पताल में बिजली के विद्युत भार का आकलन, इलेक्ट्रिक सेफ्टी एवं ऑडिट, प्रत्येक बेड पर पवार प्लग कनेक्शन आदि की व्यवस्था चुस्त दुरुस्त करने हेतु सभी डीन को निर्देश दिए गए ।

मध्यप्रदेश बनेगा ऑक्सीजन सप्लाई में आत्मनिर्भर

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मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान और केंद्रीय पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने रविवार बीना में बीओआरएल के निकट 1000 बिस्तर के अस्थायी कोविड अस्पताल का निरीक्षण किया और साथ ही मौके पर पूरे रोडमैप की समीक्षा भी की।

मुख्यमंत्री शिवराज सिंह ने कहा कि ये प्रदेश का पहला आक्सीजन सप्लाई आधारित अस्थाई अस्पताल है जहां पलंग तक डायरेक्ट ऑक्सीजन पाइप लाइन रहेगी।

इस दौरान सीएम ने कहा कि हमारा उद्देश्य आने वाले समय में मध्य प्रदेश में ऑक्सीजन की उपलब्धता के मामले में भी आत्मनिर्भर बनकर उभरे। उन्होंने यह भी कहा कि हमें कोरोना से हर मुकाबले के लिए तैयार रहना होगा। इस सिलसिले में ही बड़े ऑक्सीजन प्लांट की स्थापना भी की जा रही है।

हार पर बीजेपी मे हाहाकार, कमलनाथ का सरकार से सवाल हार के लिए कौन-कौन जिम्मेदार

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मध्य प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ ने दमोह के एसपी-कलेक्टर के ट्रांसफर पर सवाल उठाया है। उन्होंने सवाल उठाते हुए प्रदेश की सरकार से पूछा है कि क्या दमोह में बीजेपी को चुनाव जिताने की ज़िम्मेदारी वहाँ के कलेक्टर और एसपी को सौंपी गई थी ?

कमलनाथ ने कहा कि यदि दमोह कलेक्टर और एसपी ने अपने कर्त्तव्यों के निर्वहन और अपनी वर्दी का सम्मान करते हुये निष्पक्ष चुनाव कराये तो क्या सरकार उन्हें इस कर्तव्यपरायणता की सजा देगी ?  असफल होने के बाद अब प्रशासनिक अधिकारियों में आतंक पैदा करने के लिये कलेक्टर एवं एसपी को हटाया गया है। उन्होंने कहा कि दमोह चुनाव की पराजय का दूसरा शिकार बीजेपी के वरिष्ठ नेता जयंत मलैया एवं उनके पुत्र सिद्धार्थ मलैया को बनाया जा रहा है।

उन्होंने कहा यदि वास्तव में धनबल के साथ-साथ पूरी बीजेपी, पूरी सरकार, 22 मंत्री, कई विधायक और सांसद के दमोह में महीनों डेरा डालने के बाद भी यदि मलैया परिवार कांग्रेस को 17000 वोटों से जीत दिला सकते है तब उनके वर्चस्व और राजनीतिक कौशल को देखते हुये उन्हें तत्काल मध्यप्रदेश का मुख्यमंत्री बना देना चाहिये ?

उन्होंने आगे कहा, जबकि ये हार वास्तव में बीजेपी के हर उस नेता की है जो पूरे दो महीने दमोह में रहने के बाद भी अपने प्रत्याशी को जीत नहीं दिला सके। ये हार शिवराज की उस अनैतिक राजनीति की हार है जो ख़रीद-फ़रोख़्त से सत्ता हथियाने के लिये कुख्यात है।

दरअसल दमोह में बीजेपी की हार शिवराज सरकार के एक साल के कार्यकाल पर जनता का मत है। ये हार बताती है कि बीजेपी ने पिछले एक साल में प्रदेश को कैसी सरकार दी है।

अधिकारियों का दबाव नहीं झेल पाए भोपाल के टीकाकरण अधिकारी, दिया इस्तीफा

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भोपाल के जिला टीकाकरण अधिकारी डॉ कमलेश अहिरवार ने कार्य मे अत्यधिक दबाव के चलते अपने पद से इस्तीफा दे दिया है।

मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी भोपाल को लिखे पत्र में डॉक्टर अहिरवार ने लिखा कि वह कार्य का अत्यधिक दबाव नहीं झेल पा रहे हैं इस कारण वह अपने पद से इस्तीफा देते हैं हालांकि उनके इस्तीफे पर कई प्रकार के सवाल भी उठ रहे हैं।

सूत्रों की माने तो जिला टीकाकरण अधिकारी डॉ कमलेश अहिरवार पर स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों का एवं प्रशासनिक अधिकारियों का अत्यधिक दबाव है जिसके कारण वह इस्तीफा दिए हैं।

आपको बता दें इसके पहले भी इंदौर में प्रभारी सीएमएचओ और एक बीएमओ ने भी इस्तीफा दे दिया था हालांकि बाद में उन्होंने कलेक्टर पर आरोप भी लगाए थे और कलेक्टर के इस्तीफे की मांग करी थी जिसके बाद इंदौर के प्रभारी मंत्री तुलसीराम सिलावट और अन्य प्रशासनिक अधिकारियों के हस्तक्षेप से वह है पुनः काम पर वापस लौट आई है।