Home Tags Religious

Tag: Religious

The religious and spiritualism aspects of all religions.

सागर में धर्मांतरण का मामला आया सामने ! जांच में हुए बड़े खुलासे

0

मध्य प्रदेश के सागर में ईसाई मिशनरी सेंट फ्रांसिस सेवाधाम आश्रम से बच्चों का धर्म परिवर्तन करने का मामला सामने आया है। राष्ट्रीय बाल संरक्षण आयोग के अध्यक्ष प्रियंक कानूनगो ने इस मामले की जानकारी देते हुए कहा कि आश्रम में दाखिले के समय एक लड़की का नाम हिन्दू था और अब जब वह बालिग हो चुकी है तो उसका नाम क्रिश्चियन हो गया है।

बताया जा रहा है कि सेंट फ्रांसिस सेवा धाम आश्रम के खिलाफ राष्ट्रीय बाल संरक्षण आयोग को शिकायत मिली थी। जिसके बाद बाल संरक्षण आयोग की चार सदस्यों की टीम मंगलवार को सेवाधाम आश्रम पहुंची।

जांच के बाद बाल संरक्षण आयोग के अध्यक्ष ने बताया कि सेवाधाम की जांच में बहुत सी खामियां मिली। जिसमें आश्रम में तीन अलग-अलग प्रकार के संस्थान चालू मिले है। सबसे ज़्यादा अनिमितता बालक और बालिका छात्रवास में मिली है। एक ही छात्रावास में लड़के और लड़कियों को रखा गया था। साथ ही एक पंजीयन पर दो संस्थान चल रहे थे।

आगे कहा कि बाल गृह में बड़ी उम्र के बच्चे भी छोटे बच्चे के साथ रह रहे थे। बच्चे कई सालों से यहां रह रहे थे। इनके परिवार के संबंध में इनके पास कोई भी पुख्ता जानकारी नहीं है। एक बच्चे से उसके परिवार के बारे में पूछने पर उसके पास पूरी जानकारी थी और उसको अपने घर का पता भी मालूम था।

वहीं आश्रम के रजिस्टर में चेक करने पर पाया गया इस बच्चे से संबंधित कोई भी जानकारी इनके पास नहीं थी। बच्चों को कई वर्षों से यहां रखा गया है, जबकि बच्चों के मां-बाप को ढूंढ कर उनको उनके मां-बाप को सौंप देना चाहिए।

प्रियंक ने बताया कि सेंट फ्रांसिस सेवाधाम में विदेशों से डॉलर के रूप में उगाही की जानकारी मिली है। जो बच्चों की फोटो भेजकर स्पॉन्सरशिप के नाम पर लिए गए हैं। ऐसे दस्तावेज भी मिले जो न तो हिंदी में हैं और न ही अंग्रेजी में। कुछ मलयालम भाषा के हैं तो कुछ लैटिन भाषा में दस्तावेज मिले हैं।

इसके अलावा निरीक्षण के दौरान एक कमरे से शराब की बोतलें भी मिली हैं। खेती से होने वाली पैदावार व अनाज बच्चों के कमरे में ठूंसा गया था। यह जांच का विषय है कि इनसे कहीं बालश्रम तो नहीं कराया जा रहा।

हिन्दू महासभा ने की बुर्के पर बैन लगाने की मांग, सुप्रीम कोर्ट ने सुनाया बड़ा फैसला

0

सोमवार को सुप्रीम कोर्ट ने अखिल भारतीय हिंदू महासभा की याचिका को खारिज कर दिया जिसमें मुस्लिम महिलाओं को मस्जिदों में प्रवेश करने की अनुमति देने की मांग की गई थी। मुख्य न्यायाधीश रंजन गोगोई की अध्यक्षता वाली पीठ ने याचिका पर सुनवाई करते हुए कहा कि “एक मुस्लिम महिला को आने दें और इसे चुनौती दें। तब हम विचार करेंगे।”

बता दें कि यह याचिका हिंदू महासभा के केरल अध्यक्ष स्वामी देथाथरेया साईं स्वरूप नाथ ने दाखिल की थी। उन्होंने केरल उच्च न्यायालय के आदेश को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी थी जिसमें उनकी याचिका को खारिज कर दिया गया था।

याचिकाकर्ता ने कहा, “पुरुषों के साथ नमाज पढ़ने के लिए मस्जिद में मुस्लिम महिलाओं के प्रवेश से इंकार करना उनके साथ अन्याय है और उन्हें समानता के अधिकार से वंचित करता है जो आधुनिक समाज के लिए एक अपमान है।”

मस्जिद के साथ ही याचिकाकर्ता ने बुर्का पर भी प्रतिबंध लगाने की मांग की थी जिसे सुप्रीम कोर्ट ने खारिज कर दिया।

भाजपा सरकार नही चाहती राम मंदिर निर्माण काँग्रेस के पूर्व प्रधानमंत्री ने तैयार कर रखी थी मंदिर निर्माण की रूपरेखा: दिग्विजय सिंह

0

Newbuzzindia : कांग्रेस महासचिव दिग्विजय सिंह ने अयोध्या में राम मंदिर को लेकर बड़ा बयान दिया है। दिग्विजय सिंह ने कहा कि अयोध्या की विवादित जमीन पर कभी मस्जिद थी ही नहीं। उन्होंने कहा कि विश्व हिंदू परिषद ने जिसे मस्जिद बताकर गिराया था वो मंदिर था और इसके प्रमाण भी मिले है।

दिग्विजय सिंह ने कहा कि भाजपा मंदिर निर्माण कराना ही नहीं चाहती है। उन्होंने बताया कि 1996 में कांग्रेस सरकार बन जाती तो मंदिर निर्माण हो गया होता। पूर्व प्रधानमंत्री नरसिंम्हा राव ने राम मंदिर निर्माण की रूपरेखा तैयार कर ली थी।

इस मौके पर गौ-हत्या पर भी दिग्विजय सिंह ने बयान दिया। उन्होंने कहा कि कांग्रेस गौ-हत्या के खिलाफ है। वो चाहते है कि देशभर में गौ-हत्या बंद हो। लेकिन इस मामले में भाजपा का दोहरा चरित्र है। दिग्विजय ने कहा कि केरल में भाजपा नेता ने मतदाताओं से कहा है कि वो उन्हें जिता देंगे तो उनके लिए अच्छे बीफ की व्यवस्था की जाएगी। साथ ही उन्होंने कहा गोवा, अरूणाचल और मणिपुर में बीजेपी की सरकार है, तो फिर वहां गौ-हत्या क्यो हो रही है।
गोटेगांव में परमहंसी आश्रम पहुंचे एमपी के पूर्व सीएम दिग्विजय सिंह ने ईवीएम मशीन की निष्पक्षता पर खड़े किए सवाल करते हुए उसे भाजपा की साजिश बताया वही बैलेट पेपर से मतदान करने की वकालत की।

अनोखा मंदिर! यहां भगवान के दर्शन से डरते हैं लोग, करते हैं सिर्फ पीठ की पूजा

0

मंदिरों में देवी-देवताओं के दर्शन-पूजन की परंपरा तो सब जगह प्रचलित है, लेकिन उत्तराखंड में एक ऐसा भी मंदिर है जिसमें भगवान के चेहरे के बजाय उनकी पीठ के दर्शन किए जाते हैं। उत्तरकाशी के छोटे-से कस्बे नैटवाड़ में भगवान पोखूवीर का मंदिर है। इस इलाके में पोखूवीर को न्याय का देवता माना जाता है। लोगों की मान्यता है कि जो भी उनसे न्याय मांगता है, वे बिल्कुल सही और निष्पक्ष इंसाफ करते हैं, लेकिन उनके मुख के दर्शन नहीं किए जाते।

लोगों की आस्था इनसे गहराई तक जुड़ी है। पुराने समय में जब लोगों को निष्पक्ष न्याय नहीं मिलता था या जब वे न्याय प्रणाली को अपनाना पसंद नहीं करते थे, तो पोखूवीर से इसकी गुहार करते थे। लोगों का कहना है कि जो दोषी होता है, उसे पोखूवीर किसी भी रूप में दंड दे सकते हैं। 

यहां पोखूवीर से जुड़ी अनेक कथाएं भी प्रचलित हैं। कहा जाता है कि बहुत प्राचीन समय में जब किरिमर दानव ने इस इलाके में आतंक मचाया तो जनता की रक्षा के लिए राजा दुर्योधन ने उससे युद्ध किया। युद्ध में दानव हार गया और दुर्योधन ने उसकी गर्दन काटकर टोंस नदी में फेंक दी।

किरिमर दानव का सिर प्रवाह की दिशा के बजाय उलटा बहने लगा। जहां रूपिन और सूपिन नदी का संगम आता है, वहां ये नैटवाड़ में ये रुक गया। राजा दुर्योधन ने जब किरिमर दानव के सिर को देखा तो उसे नैटवाड़ में ही स्थापित कर दिया और यहीं उसका मंदिर बना दिया। आज यह पोखूवीर के नाम से जाना जाता है।

मंदिर से एक और कथा भी जुड़ी है। कहते हैं कि यह दानव नहीं बल्कि वभ्रूवाहन था। कृष्ण ने महाभारत के युद्ध से पूर्व ही उसका शीश काट दिया था। इस इलाके की खासियत है कि यहां कई स्थानों पर कौरवों की पूजा होती है। यहां तक कि दुर्योधन का मंदिर भी है। एक अन्य मंदिर में कर्ण की पूजा की जाती है।

दशहरा क्यों मनाया जाता है और क्या है उसका महत्व : डॉ सौरभ मालवीय

0

Newbuzzindia: भारत एक विशाल देश है. इसी भौगोलिक संरचना जितनी विशाल है, उतनी ही विशाल है इसकी संस्कृति. यह इस भारत की सांस्कृतिक विशेषता है ही है कि कोई भी पर्व समस्त भारत में एक जैसी श्रद्धा और विश्वास के साथ मनाया जाता है, भले ही उसे मनाने की विधि भिन्न हो. ऐसा ही एक पावन पर्व है दशहरा, जिसे विजयदशमी के नाम से भी जाना जाता है. दशहरा भारत का एक महत्वपूर्ण त्यौहार है. विश्व भर के हिन्दू इसे हर्षोल्लास के साथ मनाते हैं.

कब और क्यों मनाया जाता है दशहरा ?

यह अश्विन मास के शुक्ल पक्ष की दशमी तिथि को मनाया जाता है. इस दिन भगवान विष्णु के अवतार राम ने रावण का वध कर असत्य पर सत्य की विजय प्राप्त की थी. रावण भगवान राम की पत्नी सीता का अपहरण करके लंका ले गया था. भगवान राम देवी दुर्गा के भक्त थे, उन्होंने युद्ध के दौरान पहले नौ दिन तक मां दुर्गा की पूजा की और दसवें दिन रावण का वध कर अपनी पत्नी को मुक्त कराया. दशहरा वर्ष की तीन अत्यंत महत्वपूर्ण तिथियों में से एक है, जिनमें चैत्र शुक्ल की एवं कार्तिक शुक्ल की प्रतिपदा भी सम्मिलित है.

इस दिन लोग नया कार्य प्रारंभ करना अति शुभ माना जाता है. यह शक्ति की पूजा का पर्व है. इस दिन देवी दुर्गा की भी पूजा की जाती है. दशहरे के दिन नीलकंठ के दर्शन को बहुत ही शुभ माना जाता है. दशहरा नवरात्रि के बाद दसवें दिन मनाया जाता है.

कैसे मनाया जाता दशहरा ?

देशभर में दशहरे का उत्सव बहुत ही धूमधाम से मनाया जाता है. जगह-जगह मेले लगते हैं. दशहरे से पूर्व रामलीला का आयोजन किया जाता. इस दौरान नवरात्रि भी होती हैं. कहीं-कहीं रामलीला का मंचन होता है, तो कहीं जागरण होते हैं. दशहरे के दिन रावण के पुतले का दहन किया जाता है. इस दिन रावण, उसके भाई कुम्भकर्ण और पुत्र मेघनाद के पुतले जलाए जाते हैं. कलाकार राम, सीता और लक्ष्मण के रूप धारण करते हैं और अग्नि बाण इन पुतलों को मारते हैं. पुतलों में पटाखे भरे होते हैं, जिससे वे आग लगते ही जलने लगते हैं.

समस्त भारत के विभिन्न प्रदेशों में दशहरे का यह पर्व विभिन्न प्रकार से मनाया जाता है. आईए जानते है भारत में किस जगह कैसे मनाया जाता है दशहरा ?

कश्मीर में कैसे मनाया जाता है दशहरा ?

कश्मीर में नवरात्रि के नौ दिन माता रानी को समर्पित रहते हैं. इस दौरान लोग उपवास रखते हैं. एक परंपरा के अनुसार नौ दिनों तक लोग माता खीर भवानी के दर्शन करने के लिए जाते हैं. यह मंदिर एक झील के बीचोबीच स्थित है.

हिमाचल प्रदेश में कैसे मनाया जाता है दशहरा ?

हिमाचल प्रदेश के कुल्लू का दशहरा बहुतप्रसिद्ध है. रंग-बिरंगे वस्त्रों से सुसज्जित पहाड़ी लोग अपनी परंपरा के अनुसार अपने ग्रामीण देवता की शोभायात्रा निकालते हैं. इस दौरान वे तुरही, बिगुल, ढोल, नगाड़े आदि वाद्य बजाते हैं तथा नाचते-गाते चलते हैं. शोभायात्रा नगर के विभिन्न भागों में होती हुई मुख्य स्थान तक पहुंचती है. फिर ग्रामीण देवता रघुनाथजी की पूजा से दशहरे के उत्सव का शुभारंभ होता है. हिमाचल प्रदेश के साथ लगते पंजाब तथा हरियाणा में दशहरा पर नवरात्रि की धूम रहती है. लोग उपवास रखते हैं. रात में जागरण होता है. यहां भी रावण-दहन होता है और मेले लगते हैं.

बंगाल, ओडिशा एवं असम में कैसे मनाया जाता है दशहरा ?

बंगाल, ओडिशा एवं असम में दशहरा दुर्गा पूजा के रूप में मनाया जाता है.  बंगाल में पांच दिवसीय उत्सव मनाया जाता है. ओडिशा और असम में यह पर्व चार दिन तक चलता है. यहां भव्य पंडाल तैयार किए जाते हैं तथा उनमें देवी दुर्गा की मूर्तियां स्थापित की जाती हैं. देवी दुर्गा की पूजा-अर्चना की जाती है. दशमी के दिन विशेष पूजा का आयोजन किया जाता है. महिलाएं देवी के माथे पर सिंदूर चढ़ाती हैं. इसके पश्चात देवी प्रतिमाओं का विसर्जन किया जाता है. विसर्जन यात्रा में असंख्य लोग सम्मिलित होते हैं.

गुजरात में कैसे मनाया जाता है दशहरा ?

गुजरात में भी दशहरे के उत्सव के दौरान नवरात्रि की धूम रहती है. कुंआरी लड़कियां सर पर मिट्टी के रंगीन घड़े रखकर नृत्य करती हैं, जिसे गरबा कहा जाता है. पूजा-अर्चना और आरती के बाद डांडिया रास का आयोजन किया जाता है. महाराष्ट्र में भी नवरात्रि में नौ दिन मां दुर्गा की उपासना की जाती है तथा दसवें दिन विद्या की देवी सरस्वती की स्तुति की जाती है. इस दिन बच्चे आशीर्वाद प्राप्त करने के लिए मां सरस्वती के तांत्रिक चिह्नों की पूजा करते हैं.

 

तमिलनाडु, आंध्र प्रदेश एवं कर्नाटक में कैसे मनाया जाता है दशहरा ?

तमिलनाडु, आंध्र प्रदेश एवं कर्नाटक में दशहरे के उत्सव के दौरान लक्ष्मी, सरस्वती और दुर्गा की पूजा की जाती है. पहले तीन दिन धन और समृद्धि की देवी लक्ष्मी का पूजन होता है. दूसरे दिन कला एवं विद्या की देवी सरस्वती-की अर्चना की जाती है तथा और अंतिम दिन शक्ति की देवी दुर्गा की उपासना की जाती है. कर्नाटक के मैसूर का दशहरा बहुत प्रसिद्ध है. मैसूर में दशहरे के समय पूरे शहर की गलियों को प्रकाश से ससज्जित किया जाता है और हाथियों का शृंगार कर पूरे शहर में एक भव्य शोभायात्रा निकाली जाती है. इन द्रविड़ प्रदेशों में रावण का दहन का नहीं किया जाता.

 

छत्तीसगढ़ में कैसे मनाया जाता है दशहरा ?

छत्तीसगढ़ के बस्तर में भी दशहरा का बहुत ही अलग तरीके से मनाया जाता है. यहां इस दिन देवी दंतेश्वरी की आराधना की जाती है. दंतेश्वरी माता बस्तर अंचल के निवासियों की आराध्य देवी हैं, जो दुर्गा का ही रूप हैं. यहां यह त्यौहार 75 दिन यानी श्रावण मास की अमावस से आश्विन मास की शुक्ल त्रयोदशी तक चलता है. प्रथम दिन जिसे काछिन गादि कहते हैं, देवी से समारोह आरंभ करने की अनुमति ली जाती है. देवी कांटों की सेज पर विरजमान होती हैं, जिसे काछिन गादि कहा जाता है. यह कन्या एक अनुसूचित जाति की है, जिससे बस्तर के राजपरिवार के व्यक्ति अनुमति लेते हैं. बताया जाता है कि यह समारोह लगभग पंद्रहवीं शताब्दी में आरंभ हुआ था.

 

दशहरे का केवल धार्मिक महत्व ही नहीं है

काछिन गादि के बाद जोगी-बिठाई होती है, तदुपरांत भीतर रैनी (विजयदशमी) और बाहर रैनी (रथ-यात्रा) निकाली जाती है. अंत में मुरिया दरबार का आयोजन किया जाता है.इसका समापन अश्विन शुक्ल त्रयोदशी को ओहाड़ी पर्व से होता है.

दशहरे के दिन वनस्पतियों का पूजन किया जाता है. रावण दहन के पश्चात शमी नामक वृक्ष की पत्तियों को स्वर्ण पत्तियों के रूप में एक-दूसरे को ससम्मान प्रदान कर सुख-समृद्धि की कामना की जाती है.

इसके साथ ही अपराजिता (विष्णु-क्रांता) के पुष्प भगवान राम के चरणों में अर्पित किए जाते हैं. नीले रंग के पुष्प वाला यह पौधा भगवान विष्णु को प्रिय है.

दशहरे का केवल धार्मिक महत्व ही नहीं है, अपितु यह हमारी सांस्कृतिक एकता का भी प्रतीक है.

लेखक का परिचय                            

उत्तरप्रदेश के देवरिया जनपद के पटनेजी गांव में जन्मे डॊ. सौरभ मालवीय बचपन से ही सामाजिक परिवर्तन और राष्ट्र-निर्माण की तीव्र आकांक्षा के चलते सामाजिक संगठनों से जुड़े हुए है. जगतगुरु शंकराचार्य एवं डॊ. हेडगेवार की सांस्कृतिक चेतना और आचार्य चाणक्य की राजनीतिक दृष्टि से प्रभावित डॊ. मालवीय का सुस्पष्ट वैचारिक धरातल है. ‘सांस्कृतिक राष्ट्रवाद और मीडिया’ विषय पर आपने शोध किया है. आप का देश भर की विभिन्न पत्र-पत्रिकाओं एवं अंतर्जाल पर समसामयिक मुद्दों पर निरंतर लेखन जारी है. उत्कृष्ट कार्यों के लिए उन्हें अनेक पुरस्कारों से सम्मानित भी किया जा चुका है, जिनमें मोतीबीए नया मीडिया सम्मान,विष्णु प्रभाकर पत्रकारिता सम्मान और प्रवक्ता डॊट.कॊम सम्मान आदि सम्मिलित हैं. संप्रति- माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय, भोपाल में सहायक प्राध्यापक, जनसंचार विभाग के पद पर कार्यरत हैं.

मोबाइल-09907890614

ईमेल- malviya.sourabh@gmail.com

वेबसाइट- www.sourabhmalviya.com

राम मंन्दिर बनेगा तो ही होगी भाजपा की जीत, नही तो होगी हार : सुब्रमण्यम स्वामी

0

Newbuzzindia: राम मंदिर के मुद्दे पर भाजपा नेता सुब्रमण्यम स्वामी फिर सक्रिय हो गए है । सुब्रमण्यम स्वामी ने राम मंदिर के मुद्दे को फिर उठाया । सुब्रमण्यम स्वामी ने कहा कि भाजपा को हिंदुत्व के मुद्दे पर वापिस लौटने की जरुरत है ।

सुब्रमण्यम स्वामी ने कहा है कि उत्तरप्रदेश में अगर राम मंदिर बनेगा तभी भाजपा चुनाव जीत पाएगी । अगर उत्तरप्रदेश में राम मंदिर नही बनता है तो भाजपा की जीत मुश्किल है ।

भाजपा सांसद सुब्रमण्यम स्वामी अब अयोध्या में राम मंदिर निर्माण अभियान शुरू करेंगे। उन्होंने इस मामले में जल्द कुछ बड़ा करने की घोषणा की है। स्वामी ने कहा कि मंदिर बनेगा तो भाजपा भी जीतेगी।

इसलिए वह प्रधानमंत्री से विकास के साथ-साथ हिंदुत्व के मुद्दे को भी आगे ले जाने का अनुरोध करेंगे।

स्वामी ने कहा कि अयोध्या में राम मंदिर का निर्माण बेहद जरूरी है। इसलिए वह अब इस दिशा में जल्द ही कुछ बड़ा करेंगे। 

स्वामी ने कहा कि वह पहले ही कह चुके हैं कि नेशनल हेराल्ड, आरबीआई गवर्नर मामले के बाद वह खुद को राम मंदिर मुद्दे पर केंद्रित करेंगे।

उन्होंने इस दौरान पार्टी और सरकार को हिंदुत्व के मुद्दे पर मजबूती दिखाने का अनुरोध किया।

उन्होंने कहा कि वह खुद प्रधानमंत्री से विकास के साथ-साथ हिंदुत्व के मुद्दे को भी आगे बढ़ाने का अनुरोध करेंगे। 

भाजपा विधायक ने दी खुली धमकी, कहा ‘अगर बकरीद पर हमारी भावनाएं आहत हुई तो अंजाम बुरे होंगे।’

1

NewBuzzIndia: हमेशा विवादों में रहने वाले बीजेपी के विधायक टी राजा सिंह ने बकरीद आने पर सरकार और पुलिस प्रशासन को खुली चेतावनी दे दी है। राजा सिंह ने कहा है कि ‘हमारी धार्मिक भावनाओं का सम्मान न किया गया तो खतरनाक हालात पैदा हो सकते हैं।’ राजा सिंह ने ऐसा बकरीद के मौके पर कथित तौर से होने वाली बैलों की बलि का उल्लेख करते हुए ऐसा कहा।

एक वीडियो में उन्होंने कहा कि तेलंगाना सरकार और पुलिस सुप्रीम कोर्ट के आदेश का उल्लंघन कर रहे हैं। बता दें कि राजा सिंह इससे पहले बीफ खाने वालों पर हो रहे हमले को सही ठहराते हुए हमलावरों का समर्थन भी कर चुके हैं।

‘क्या खाना है’ के बाद ईश्वर भी तय कर रहा है संघ, कहा ‘ओणम पर महाबलि को पूजना गलत।’

0


NewBuzzIndia:   अगले सप्‍ताह केरल में ओणम मनाया जाना है। इससे ठीक पहले राष्‍ट्रीय स्‍वयंसेवक संघ(आरएसएस) की मैगजीन ने इस त्‍योहार को मनाए जाने के पीछे की वजह पर फिर से ध्‍यान देने को कहा है। आरएसएस के मलयालम मुखपत्र ‘केसरी’ के एक लेख में कहा गया है कि असुर राजा महाबली के बजाय ओणम में भगवान विष्‍णु के वामन अवतार को पूजना चाहिए। सरकारी संस्‍कृत कॉलेज के संस्‍कृत के प्रोफेसर उन्‍नीकृष्‍णन नंबूतिरि ने अपने लेख में लिखा कि पुराणों में बहुत कम ऐसे प्रमाण हैं जो यह सिद्ध करते हैं कि ओणम महाबली के स्‍वागत में मनाया जाता है। जिस तरह से महाबली को दिखाया जाता है उस तरह के उनके तोंद और लंबी मूंछे नहीं थी। हिंदी ऐक्‍य वेदी की प्रेसीडेंट केपी शशिकला ने कहा, “वामन विष्‍णु का अवतार थे। पुराणों में बताया गया है कि महाबली भी विष्‍णु की पूजा करते थे। इसलिए ओणम विष्‍णु की अनदेखी करने का अवसर नहीं है। उन्‍हें स्‍वतंत्रता सेनानी के रूप में देखना चाहिए जिन्‍होंने केरल को साम्राज्‍यवादी ताकत(महाबली) से आजाद कराया।”

 कांग्रेस नेता वीटी बलराम ने आरएसएस पर जबरदस्त हमला करते हुए कहा कि ओणम को नया रूप देना इस त्‍योहार को साम्‍प्रदायिक रंग देने का प्रयास है। ‘केसरी’ के इस महीने के कवर पर भी वामन अवतार की फोटो प्रकाशित की गई है। इस बारे में केरल भाजपा अध्‍यक्ष कुमानम राजशेखरन ने कहा कि केसरी में छपा यह लेख भाजपा या आरएसएस का आधिकारिक स्‍टैंड नहीं माना जा सकता।

बीफ मुद्दे पर भाजपा का दोमुंहा रवैया, भाजपा शासित प्रदेशों में सबसे ज्यादा बीफ का व्यवसाय

0

NewBuzzIndia: देश में बीफ को वैचारिक, राजनीतिक और धार्मिक मुद्दा बनाने वाली केंद्र का सत्तारूढ़ दल भाजपा अब अपने इसी मुद्दे पर विपक्ष के निशाने पर है। इस मुद्दे पर लगे RTI के मिले जवाब के वजह से भाजपा के लिए असहज स्थिति पैदा हो गई है। रिपोर्ट से पता चला है कि देश में डेढ़ हज़ार से भी ज्यादा बूचड़खानों में से ज्यादातर बूचड़खाने भाजपा शासित प्रदेशों में स्थित है। भारत मांस निर्यात करने वाला दुनिया का सबसे बड़ा देश बन गया है जबकि अपनी चुनावी कैंपेन में ‘गुलाबी क्रांति’ को लेकर खुद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी तत्कालीन मनमोहन सरकार को घेरते नजर आते थे।


मुंबई में अभी पर्युषण पर्व के वजह से मीट की दुकानों और इस व्यवसाय पर पाबंदी लगाई गई है। लेकिन महाराष्ट्र अभी देश का सबसे ज्यादा मांस उत्पादन वाला राज्य है। महाराष्ट्र में देश के सबसे ज्यादा बूचड़खाने चल रहे हैं। दिलचस्‍प बात यह है कि मांसाहार को लेकर नॉर्थ ईस्‍ट की ओर सबसे ज्यादा उंगलियां उठती हैं जबकि वहां सबसे कम स्‍लाटर हाउस हैं। जानकार इसे लेकर पार्टी और सरकार के रवैये पर सवाल उठा रहे हैं और इसे कथनी-करनी का अंतर करार देते हैं।


फरीदाबाद के सूचना अधिकार कार्यकर्ता रविंद्र चावला ने केंद्रीय कृषि मंत्रालय के पशुपालन, डेयरी और मत्‍स्‍य पालन विभाग में आरटीआई डालकर पूछा था कि किस राज्‍य में कितने स्‍लॉटर हाउस हैं। उनमें पशुओं के काटने के नियम क्‍या हैं। इसका जो जवाब आया वह हैरान करने वाला था। क्योंकि मांसाहार को भारतीय संस्कृति के खिलाफ बताने वाली भाजपा के शासन वाले राज्‍यों में सबसे ज्‍यादा स्‍लॉटर हाउस हैं। देश भर में कुल 1623 स्‍लॉटर हाउस बताए गए हैं जिनमें से 675 तो भाजपा के शासन वाले राज्‍यों में हैं। अकेले महाराष्ट्र में ही 316 कसाईखाने हैं। 285 इकाइयों के साथ यूपी दूसरे नंबर पर है लेकिन ऐसे टॉप टेन राज्यों में महाराष्ट्र को छोड़कर भाजपा शासित तीन और राज्य मध्यप्रदेश, छत्तीसगढ़ और पंजाब शामिल हैं।


हरियाणा के मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर सार्वजनिक रूप से बयान दे चुके हैं कि बीफ खाने वाले उनके राज्य में न आएं लेकिन 21 जिले वाले इस छोटे से राज्य में भी 36 बूचड़खाने चल रहे हैं। खुद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के गृह क्षेत्र गुजरात में भी 38 इकाइयों में पशुओं का मांस निकालने का काम किया जाता है। रवींद्र चावला का कहना है कि अपने आपको पशु प्रेमी बताने वाली पार्टी के शासन वाले राज्‍यों में सबसे ज्‍यादा स्‍लाटर हाउस की संख्‍या हैरान करती है। टॉप टेन राज्‍यों में चार भाजपा के ही हैं। दरअसल, सत्‍ता में बैठे लोगों की कथनी और करनी में भारी अंतर है।


सामाजिक कार्यों के लिए पदमश्री से सम्‍मानित ब्रह्म दत्त का कहना है कि हिंदुत्‍व के एजेंडे पर तो भाजपा सत्‍ता में आती है, कुर्सी मिलने के बाद बिजनेस हित देखती है इसीलिए वह कसाईखानों को बंद करने में नाकाम रही है। यह तो और ताज्‍जुब की बात है कि उनके शासन वाले राज्‍यों में स्‍लॉटर हाउस ज्‍यादा हैं जिनके संगठनों ने पशु वध को लेकर पूरे देश में हंगामा मचा रखा है।



समाज के ख़ास वर्ग से मुसलमानों को बचाने के लिए बनना चाहिए SC-ST एक्‍ट जैसा कानून !

0


Newbuzzindia: जिस तरह अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति को लोगो के उत्पीड़न से बचाने के लिए अनुसूचित जाति एवं जनजाति (उत्पीड़न रोकथाम) अधिनियम बनाया गया है उसी तरह मुसलामानों को समाज के एक खास वर्ग से बचाने के लिए भी एक एक्ट बनाना चाहिए, जिससे मुसलमान अपने आप को सुरक्षित महसूस करे। यह बात समाजवादी पार्टी के महाराष्ट्र के अध्यक्ष अबु आजमी ने कही है। 
आजमी ने कहा कि ‘उत्पीड़न रोकथाम अधिनियम की तर्ज पर एक ऐसा ही कानून मुसलमानों के लिए भी बनाया जाना चाहिए क्योंकि वे समाज के कुछ खास वर्ग के हाथों उत्पीड़न और उनकी अपमानजनक टिप्पणियों का सामना करते हैं।’
इसी दौरान उन्होंने मनसे प्रमुख राज ठाकरे पर भी निशाना साधा और उनके राज ठाकरे द्वारा कहे गए बयान का भी विरोध किया जिसमें उन्होंने कहा था कि अधिनियम रद्द कर दिया जाना चाहिए क्योंकि वह असंवैधानिक है।

आजमी ने यह भी कहा कि ‘मुसलमानों और धार्मिक प्रमुखों को आईएस की निंदा करनी चाहिए क्योंकि यह आतंकवादी संगठन इस्लाम के लिए धब्बा है और वह इस धर्म की छवि खराब कर रहा है।’