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मध्यप्रदेश की डायल 100 सेवा में हो रहा घोटाला, अधिकारियों के संरक्षण में नहीं हो पा रहा ठेका

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मध्यप्रदेश की पुलिसिंग व्यवस्था को सुचारू रूप से चलाने के लिए प्रदेश सरकार द्वारा Dial 100 योजना की शुरुआत की गई थी जिसका उद्देश्य पुलिस से मदद मांगने वालों को त्वरित उनकी जगह पर पहुँचकर उन्हें सहयोग करना था। लेकिन प्रदेश सरकार के अधिकारियों ने इसे भी अपनी कमाई का जरिया बना लिया है।

एक ऐसा ही मामला प्रदेश में Dial 100 का संचालन करने वाली कंपनी बीवीजी(BVG India Limited) को लेकर सामने आया है जिसमे प्रदेश सरकार के अधिकारियों ने कंपनी को ठेका की कार्यावधि पूर्ण होने के वावजूद भी अपने वित्तीय लाभ के लिए लगातार 14 महीने से एक्सटेंशन देकर रखा है।

आपको बता दें कि Dial 100 का संचालन करने वाली कंपनी BVG और प्रदेश सरकार के बीच 5 साल के लिए अनुबंध हुआ था जो 5 अप्रैल 2015 से लेकर 4 अप्रैल 2020 तक का था। जिसके बाद पुनः नए सिरे से टेंडर की प्रक्रिया होनी चाहिए थी लेकिन सरकार के भ्रष्टाचारी अधिकारियों ने कंपनी से सांठगांठ करके दोबारा टेंडर बुलाने की जगह इसी BVG को एक्सटेंशन दे दिया जो बीते 14 माह से चल रहा है।

अब ऐसे में सवाल यह है कि कंपनी जिसके पास प्रदेश की सुरक्षा से जुड़े मामले हैं उसे नियमविरुद्ध तरीके से किसके कहने पर संरक्षण दिया जा रहा है और कौन इस पैसे का बंदरबांट करके वित्तीय लाभ ले रहा है और प्रदेश सरकार को चूना लगा रहा है।

विवादों में रही है BVG India Limited

BVG कंपनी को जब से Dial 100 का ठेका मिला है तभी से वह विवादों से घिरी रही है। सरकार ने अपने अनुबंध में कंपनी से 1000 गाड़ियों की सेवा का एग्रीमेंट किया था लेकिन कंपनी के अधिकारियों ने प्रदेश सरकार के उच्च पदस्थ लोगों के साथ सांठगांठ करके सिर्फ 600 गाड़ी हीं मुहैया करवाई थी उसमें भी कई ऐसी गाड़ियां शामिल थी जो हमेशा खराब भी रही आती थी लेकिन प्रशासनिक दवाब के चलते कंपनी का कोई कुछ नही बिगाड़ पाया।

जयपुर में रिश्वत देते वायरल हुए थे BVG के प्रतिनिधि

BVG कम्पनी किस कदर भ्रस्टाचार में लिप्त इसकी एक बानगी बीते दिनों देखने को मिली थी जब इस कंपनी का प्रतिनिधि पड़ोसी राज्य राजस्थान के जयपुर में महापौर पति को 20 करोड़ की रिश्वत का सौदा करते हुए कैप्चर पकड़े थे और वीडियो जमकर वायरल हुआ था लेकिन इसके वावजूद भी प्रदेश में इस कंपनी को ब्लैकलिस्ट करने की हिम्मत मध्यप्रदेश सरकार ने नही दिखाई।

भ्रष्टाचार के खिलाफ लड़ाई की खुली पोल , मोदी के मंत्री ने किया 450 करोड़ का घोटाला !

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Newbuzzindia : भ्रष्टाचार के खिलाफ लड़ाई के नाम पर नोटेबंदी करने वाली मोदी सरकार के मंत्री पर 450 करोड़ के घोटाले के आरोप लगे है । दरअसल मोदी सरकार में मंत्री किरण रिजिजू पर 450 करोड़ के बड़े घोटाले के आरोप लगे है । 

गौरतलब है कि किरेन रिजिजू पेशे से कांट्रेक्टर उनके एक चचेरे भाई गोबोई रिजिजू और नीपको के चेयरमैन व प्रबंध निदेशक के नाम अरुणाचल प्रदेश में बन रही एक जलविद्युत परियोजना में करीब 450 करोड़ रुपए के भ्रष्टाचार के आरोप हैं

दिसंबर 2015 में गोबोई रिजिजू सतीश वर्मा से मिले थे और उनसे रोका गया भुगतान जारी करने का अनुरोध किया था.

वर्मा के यह कहने पर कि सही बिल मिलने तक भुगतान नहीं किया जाएगा, गोबोई रिजिजू ने उन्हें ऐसे किसी भी काम में मदद की पेशकश की थी जो उनके भाई किरण रिजिजू के जरिये हो सकता है. 

बड़ा खुलासा: मोदी ने प्रचार प्रसार में खर्च किये 1200 करोड़.!

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​Newbuzzindia: केंद्र की सत्तासीन नरेंद्र मोदी सरकार ने पिछले दो सालो में अपने प्रचार प्रसार में इतना पैसा खर्च कर दिया है कि अगर उसको किसी प्रदेश पर खर्च किया जाता तो उस प्रदेश की तकदीर बदल जाती।

RTI से मिली जानकारी के अनुसार ये खुलासा हुआ है कि 2.5 सालो में मोदी सरकार ने केवल अपने प्रचार प्रसार पर 1200 करोड़ रुपये से अधिक खर्च किया है।

सूचना का अधिकार (RTI) के जरिए यह जानकारी ग्रेटर नोएडा के आरटीआई एक्टिविस्ट रामवीर सिंह ने हासिल की है।

रामवीर ने सूचना और प्रसारण मंत्रालय से पूछा था कि मोदी सरकार के गठन से अगस्त 2016 तक विज्ञापनों पर कितना सरकारी धन खर्च हुआ है?

मंत्रालय की ओर से दी गई जानकारी में कहा गया कि सरकार ने ब्रॉडकास्ट, कम्युनिटी रेडियो, डिजिटल सिनेमा, इंटरनेट, दूरदर्शन, प्रोडक्शन, एसएमएस, टेलीकास्ट पर 12 अरब रुपये खर्च किए गये है।

सूचना मंत्रालय ने जो सूची RTI के माध्यम से प्रदान की है उसके मुख्य बिंदु निम्न है।

  1. 1 जून 2014 से 31 मार्च 2015 तक लगभग 4.48 अरब रुपये खर्च किए गए।
  2. 1 अप्रैल 2015 से 31 मार्च 2016 तक 5.42 अरब रुपये।
  3. 1 अप्रैल 2016 से 31 अगस्त 2016 तक 1.20 अरब रुपये खर्च किए जा चुके हैं।

अगर इन तीनों खर्चो को जोड़ दिया जाए तो ये कुल 11 अरब, 11 करोड़ 78 लाख रुपये होता है।

RTI से मिली जानकारी के बाद देश के प्रमुख विपक्षी दल सरकार पर हमलावर हो गए है और उन्होंने सरकार से इस खर्च का हिसाब माँगा है।