भोपाल में मौत के आंकड़ों पर बड़ा खेल कर रही है सरकार!

मध्यप्रदेश में कोरोना बेकाबू हो चुका है हालात यह हैं कि मरीज के बेहतर इलाज के लिए न तो सरकार के बेड की समुचित व्यवस्था है और न ही ऑक्सीजन सिलेंडर की यह आरोप हम नही प्रदेश की मुख्य विपक्षी पार्टी कांग्रेस लगा रही है।

मध्यप्रदेश विधानसभा में विपक्ष के नेता और प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ कई बार सार्वजनिक मंचों और ट्विटर के माध्यम से सरकार को कटघरे में खड़ा कर चुके हैं लेकिन उसके बाद भी सरकार को कोई फर्क नही पड़ रहा है।

मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान से जब दमोह में मीडिया वालों ने सवाल किया कि दमोह छोड़ पूरे प्रदेश में लॉकडाउन क्यों लगाया जा रहा है तो मुख्यमंत्री ने ऐसा जवाब दिया कि मीडिया वाले ही सन्न रह गए। मुख्यमंत्री ने कहा कि दमोह उनके अधिकार क्षेत्र में नही आता अभी वह इलेक्शन कमीशन के अंतर्गत है।

यही हाल राजधानी भोपाल के श्मशान घाटों का भी है जहाँ पर हालात इतने खराब हो चुके हैं कि अब तो मुर्दे जलाने तक की जगह नहीं बची है कई शमशान घाटों और कब्रिस्तान ने तो शासन प्रशासन से भी गुहार लगाई है कि उनके यहा न तो मुर्दा जलाने के लिए लकड़ी है न ही इतनी जगह की मुर्दा दफन किया जा सके।

कैसे खेल खेल रहा है प्रशासन?

राजधानी में रविवार का दिन जिलेवासियों के लिए कहर बनकर टूटा आज भोपाल में कोरोना से कुल मौते 66 हुई है जिसमे भदभदा विश्राम घाट में 39, सुभाष नगर विश्राम घाट में 23 और झदा कब्रिस्तान में 4 लोगों का कोरोना गाइड लाइन से अंतिम संस्कार किया गया है लेकिन मध्यप्रदेश शासन के स्वास्थय संचालनालय द्वारा जारी बुलेटिन में आज शाम 6 बजे तक भोपाल में सिर्फ 1 मौत होना बताया जा रहा है जबकि ये सभी 66 अंतिम संस्कार सुबह से शाम के बीच के ही हैं।

स्वास्थ्य विभाग का बुलेटिन जिसमे सिर्फ 1 मौत दर्शाई गई है।

राजधानी में 4 दिन में कोरोना हुई हैं इतनी मौत

भोपाल में बीते 4 दिनों में कोरोना गाइडलाइन द्वारा 208 लोगों का अंतिम संस्कार किया गया है जबकि शासन 8 मौते दर्शाने से भी कतरा रहा है।

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