​देश में पहली बार जारी हुआ ‘नोटा का घोषणापत्र’, लोगों को जागरूक करना लक्ष्य 

लखनऊ: उत्तर प्रदेश में दूसरे चरण का मतदान कल होना है इस बीच सभी सियासी दलों ने अपना अपना घोषणापत्र भी जनता के बीच पहुंचा दिया है जनता हर बार की तरह इस बार भी इन घोषणपत्रों को एक नजर देख रही है और अलग रख दे रही है तो कुछ उत्सुक नव युवा इन घोषणापत्रों को पढ़ रहे हैं और अपने साथियों से चर्चा कर रहे हैं।

इसी बीच राजधानी में एक अनोखा घोषणापत्र जारी हुआ है यह अनोखा इसलिए है क्योंकि ये किसी राजनैतिक दल का नही बल्कि नोट का है वही नोट जिसकी घोषणा 2013 में हो चुकी है लेकिन आज तक वो अपने अंजाम तक नहीं पहुँच पाया।

इस घोषणापत्र का शीर्षक ‘नोटा का घोषणापत्र’ है और इसकी पहली लाइन में ही नोटा का इतिहास लिखा गया है इसको लिखा है देश के युवा पत्रकार अनुराग सिंह ने.

जानिए क्या है नोटा?

नोटा एक ऐसा विकल्प है जो आपको चुनाव में खड़े किसी भी प्रत्याशी को न चुनने का अवसर देता है.

यह विकल्प ईवीएम मशीन में सबसे आखिरी में होता है जिसमें NONE OF THE ABOVE लिखा होता है.
इस घोषणापत्र को जारी करने वाले लोग खुद को ‘नोटा मित्र’ कहते हैं नोटा मित्र’ मंडली में राजधानी के रहने वाले टीचर, अधिवक्ता और पत्रकार तक जुड़े हुए हैं इस टीम ने पिछले साल लखनऊ में फैली मच्छर जनित बिमारी डेंगू के समय लोगों की मदद करने के साथ ही प्रशासन के खिलाफ भी मोर्चा खोला था।

मंडली के संयोजक के अरविंद शुक्ल हैं, जो पेशे से अंग्रेजी के अध्यापक हैं इन्होंने कुछ दिनों पहले हाईकोर्ट में नोटा के प्रचार-प्रसार को लेकर एक जनहित याचिका दायर की थी उन्होंने कहा कि ‘इस पर हाईकोर्ट ने चुनाव आयोग से जवाब मांगा था और सुप्रीम कोर्ट की गाइड लाइन को ध्यान में रखते हुए नोटा का प्रचार करने का आदेश दिया था।

पिछले साल राजधानी के मड़ियांव क्षेत्र में डेंगू फैल गया था जिसके कारण काफी लोगों की मौत हो गई, और कई मरीज काफी दिनों तक अस्पतालों में भर्ती रहे इससे व्याथित अरविन्द ने ये अभियान शुरू किया था जिसका उद्देश्य ऐसे जनप्रतिनिधियों को हटाना है जो जनता के काम नही आते इसीलिए उन्होंने ये अभियान शुरू किया जिससे लोगों के बीच में जागरूकता फैले।

spot_img

ताजा समाचार

Related Articles