शिवराज सिंह चौहान ने स्वर्णिम को छोड़कर समृद्ध मध्यप्रदेश को क्यों अपनाया ?

वर्ष 2018 के विधानसभा के आम चुनाव में मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान समृद्ध मध्यप्रदेश की परिकल्पना लेकर वोटरों के बीच जा रहे हैं। भारतीय जनता पार्टी के भोपाल स्थित मुख्यालय दीनदयाल परिसर से लगभग पचास रथों को राज्य भर में भेजा जा रहा है। रविवार को मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान इन रथों को हरी झंडी दिखाकर रवाना करेंगे। ये रथ पार्टी का प्रचार करेंगे और वोटरों से समृद्ध मध्यप्रदेश बनाने के लिए सुझाव भी लेंगे। शिवराज सिंह चौहान अब तक स्वर्णिम मध्यप्रदेश की बात करते रहे हैं। समृद्ध मध्यप्रदेश का नारा पार्टी बड़े नेताओं के गले भी नहीं उतर रहा है। स्वर्णिम और समृद्ध मध्यप्रदेश का फर्क भी लोग नहीं समझ पा रहे हैं।


वोटरों को लुभाने का नारा भी नहीं दे पाई है भाजपा


मध्यप्रदेश में भारतीय जनता पार्टी की सरकार को पंद्रह साल पूरे हो चुके हैं। पहली बार भारतीय जनता पार्टी इतने लंबे समय से राज्य की सत्ता को संभाल रही है। पंद्रह सालों की सरकार में तेरह साल से शिवराज सिंह चौहान राज्य के मुख्यमंत्री हैं। पार्टी उनके नेतृत्व में तीसरा चुनाव लड़ने जा रही है। तीसरे चुनाव की पूरी तैयारियां मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान खुद कर रहे हैं। उनके भरोसे के अफसरों और रणनीतिकारों ने इंवेट मेनेजमेंट कंपनियों के जरिए चुनाव प्रचार की रणनीति तैयार कर रही है। पंद्रह साल की सरकार के बाद भारतीय जनता पार्टी में ऐसे मुद्दों का अभाव साफ दिखाई दे रहा है,जो कि चौथी बार सरकार बनाने में मदद कर सकें। पार्टी ने चुनाव घोषणा पत्र तैयार करने की जिम्मेदारी पूर्व केन्द्रीय मंत्री विक्रम वर्मा को दी है। घोषणा पत्र को पार्टी ने दृष्टि पत्र का नाम दिया है। दृष्टि पत्र में समृद्ध मध्यप्रदेश खाका खींचा जाएगा। राज्य में एट्रोसिटी एक्ट के खिलाफ उभरे असंतोष के कारण पार्टी अनुसूचित जाति और जनजाति वर्ग को विशेष तव्वजों देने से बचने की कोशिश भी कर रही है। सामान्य वर्ग के लिए आर्थिक आधार पर योजनाओं का लाभ देने का वादा इस दृष्टि पत्र में किया जा सकता है। पिछले पांच सालों में शिवराज सिंह चौहान ने राज्य में कई नई योजनाएं शुरू की हैं। इनमें किसानों के लिए शुरू की गई भावातंर योजना प्रमुख है। इसके बाद भी किसान सरकार से नाराज है। कांगे्रस ने किसान वोटरों को लुभाने के लिए कर्ज मुक्ति का कार्ड खेला है।


बेरोजगारी का मुद्दा भी बड़ा रहा है भाजपा की मुश्किल


एक समद्ध राज्य की कल्पना में समाज के हर वर्ग को खुश होना चाहिए। महिलाओं को सुरक्षा और बेरोजगार को काम दिलाए बगैर समृद्ध राज्य नहीं बन सकता। कांगे्रस किसानों के अलावा बेरोजगारी और महिला सुरक्षा को भी चुनाव में भुनाने की कोशिश में लगी हुई है। राज्य का औद्योगिक विकास भी पंद्रह साल में उतना नहीं हुआ है जितना कि इंवेस्टर समिट में दावा किया गया था। अपवाद स्वरूप कुछ उद्योगों को छोड़ दिया जाए तो अधिकांश उद्योगपतियों ने एमओयू करने के बाद भी राज्य की ओर पलट कर नहीं देखा । सरकारी क्षेत्र की भर्तियों से जुड़े व्यापम घोटाले ने बेरोजगारी को समस्या को और भी गंभीर कर दिया था। सरकारी क्षेत्र का भ्रष्टाचार भी शिवराज सिंह चौहान की सरकार के लिए मुसीबत बना हुआ है। मजबूरन मुख्यमंत्री को निगेटिव कैंपेन के जरिए कांगे्रस पर हमला बोलना पड़ रहा है। मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान लगातार अपने भाषणों में दिग्विजय सिंह सरकार के कार्यकाल को याद दिला रहे हैं। राज्य में वर्ष 1993 से 2003 तक दिग्विजय सिंह के नेतृत्व वाली कांगे्रस सरकार थी। सड़क,बिजली और पानी की समस्या ने दिग्विजय सिंह को मिस्टर बंटाधार नाम दिला दिया। जबकि दलित एजेंडा के कारण उच्च वर्ग सरकार से नाराज थे। यही हालात अभी भी बने हुए हैं। एट्रोसिटी एक्ट के नए रूप से उच्च वर्ग गुस्से में है। उच्च वर्ग पिछले तीन चुनावों से लगातार भाजपा का साथ दे रहा था। उसकी नाराजगी से भी भाजपा चिंता में है।

Kamal Nath

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