Newbuzzindia : 8 नवंबर की वो रात तो आपको याद ही होगी जिसने देश की पूरी जनता को लाइन में लगा दिया था । पूरी जनता से मेरा मतलब आम जनता से है । अरबपति-करोड़पति और भ्रष्टाचारी इस लिस्ट में शामिल नही है । नरेंद्र मोदी का वो ऐतिहासिक भाषण भी आपको याद होगा जिसमें उन्होंने नोटबंदी की घोषणा की थी ।
नोटबंदी के 1 महीने बाद मुझे एक बात समझ नही आ रही है कि भ्रष्टाचार के खिलाफ शुरू हुई नोटबंदी आखिर नगद के खिलाफ “Cashless India Campaign” कब बन गई ? अगर आपको याद हो तो मोदी जी ने नोटबंदी की घोषणा करते वक़्त तीन बाते कही थी ।
- नोटबंदी से कालाधन वापिस आएगा ।
- नोटबंदी से आतंकवाद रुकेगा ।
- नोटबंदी से नकली नोट बनना रुक जाएंगे ।
नोटबंदी की घोषणा के वक़्त “Cashless India” का नाम दूर-दूर तक नही था ।
- नोटबंदी के पहले हफ्ते में ही लोगों के पास 2000 के असली नोट के पहले नकली नोट आ गए ।
- नोटबंदी से आतंकवाद तो रुका नही हमारे 20 जवान शहीद हो गए ।
- एक बात जरूर मोदी जी ने सही कही थी की कालाधन बाहर आएगा । कालाधन बाहर तो आया लेकिन फेयर एंड लवली लगाकर वह सफ़ेद हो गया।
अब नोटबंदी को 30 दिन से ज्यादा हो गए और मोदी सरकार के तीनों दावों की पोल खुल गई तो नरेंद्र मोदी “cashless india” नाम का नया लॉलीपाप लाए है ।
cashless india से मोदी जी अब जानलेवा नोटबंदी की नसबंदी करने में जुट गए है !
हमको यह समझना होगा की भारत से प्यार करने वाले राष्ट्रवादियों को अगर भारतवासियों की परेशानी नही दिख रही तो वह राष्ट्रवादी नही है । बैंक की लाइन में लगना देशभक्ति नही है और लाइन में मर रहे लोग शहीद नही है ।
