कमलनाथ सरकार ने प्रदेश के मीसा बंदी पेंशन योजना पर अस्थाई तौर पर बंद कर दिया है। सरकार मीसा बंदियों की जांच कराने के बाद इसे फिर से शुरू करेगी।
इस संबंध में आदेश 28 दिसंबर को जारी कर दिए गए हैं। आदेशानुसार सरकार मीसाबंदियों को मिलने वाली पेशन के संबंध में जांच करवाएगी। सरकार ऐसा लोगों को पेंशन की सूची से बाहर करेगी जो इसके सही पात्र नहीं है। कांग्रेस का आरोप है कि भाजपा सरकार ने अपने खास लोगों को उपकृत करने के लिए करोड़ों की फिजूलखर्ची की है। सरकार 75 करोड़ रुपये सालाना लुटा रही थी, इसको तुरंत बंद होना चाहिए।
गौरतलब है कि मध्यप्रदेश में फिलहाल 2000 से ज्यादा मीसाबंदी 25 हजार रुपए मासिक पेंशन ले रहे हैं। साल 2008 में शिवराज सरकार ने मीसा बंदियों को 3000 और 6000 पेंशन देने का प्रावधान किया। बाद में पेंशन राशि बढ़ाकर 10,000 रुपए की गई। साल 2017 में मीसा बंदियों की पेंशन राशि बढ़ाकर 25,000 रुपये की गई। इस पर सालाना करीब 75 करोड़ का खर्च आता है। इस रोक पर लोकतंत्र सेनानी संघ के प्रदेश अध्यक्ष तपन भौमिक का कहना है कि जांच की कोई बात है ही नहीं।यह बदले की भावना से फैसला लिया गया है। पेंशन रोकने के विरोध में कोर्ट का सहारा लेंगे।
बंद नहीं की पेंशन, भाजपा बेवजह राजनीति कर रही : सलूजा
प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष कमलनाथ के मीडिया समन्वयक नरेन्द्र सलूजा ने कहा है कि सरकार बने हुए सिर्फ 15 दिन हुए हैं। इतने कम समय में सरकार द्वारा लिये गये जनहितैषी निर्णयों से बौखलाकर भाजपाई जान बूझकर वंदे मातरम् और मीसाबंदियों के मामले को लेकर भ्रम फैला रहे हैं। ऐसे भाजपाईयों को पहले सामान्य प्रशासन विभाग का वह परिपत्र पढ़ना चाहिए जो मीसाबंदियों को लेकर जारी हुआ है। इसमें स्पष्ट लिखा है कि प्रदेश में लोकतंत्र सेनानी सम्मान निधि के भुगतान में बजट प्रावधान से अधिक व्यय की स्थितियां महालेखाकार के परीक्षण प्रतिवेदनों के माध्यम से संज्ञान में आई है। इस कारण लोक लेखा समिति के समक्ष विभाग को स्थिति स्पष्ट करने में कठिनाई आती है। शासन ने इस स्थिति की पुर्नरावृत्ति को रोकने के लिए लोकतंत्र सेनानी सम्मान निधि भुगतान की वर्तमान प्रक्रिया को और अधिक सटीक, पारदर्शी बनाये जाने की आवश्यकता बतायी है। शासन ने यह भी माना है कि लोकतंत्र सैनिकों का भौतिक सत्यापन कराया जाना भी आवश्यक है और इसके लिए पृथक से विस्तृत दिशा निर्देश जारी किये जाने का उल्लेख सामान्य प्रशासन विभाग के परिपत्र में है।
सलूजा ने कहा कि सरकार के परिपत्र में लोकतंत्र सेनानी सम्मान निधि बंद करने के बारे में कहीं कोई उल्लेख नहीं है। यह कार्यवाही होने के बाद सम्मान निधि राशि का वितरण किया जाएगा।
