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ABVP नेता तीन साल तक करता रहा बलात्कार, युवती ने महिला थाना में सुनाई आपबीती

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विद्यार्थी परिषद के पूर्व महानगर मंत्री के खिलाफ रेप का मामला दर्ज, यूथ कांग्रेस बोली- घिनौना चेहरा आया सामने

जबलपुर। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) की छात्र इकाई अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (ABVP) के एक बड़े नेता पर संगीन आरोप लगा है। खबर है कि जबलपुर के पूर्व महानगर मंत्री एक युवती का लगातार तीन साल तक बलात्कार करता रहा। एबीवीपी नेता से तंग आकर पीड़िता ने महिला थाने में जाकर अपनी पूरी आपबीती सुनाई है। मामला सामने आने के बाद यूथ कांग्रेस ने कहा है कि आरएसएस, बीजेपी और उससे जुड़े सभी संगठनों का घिनौना चेहरा यही है।

रिपोर्ट्स के मुताबिक एबीवीपी जबलपुर के पूर्व महानगर मंत्री शुभांग गोटिया ने एक युवती को अपने जाल में फंसा लिया। इसके बाद शादी का झांसा देकर तीन साल तक लगातार यौन शोषण करता रहा। इतना ही नहीं युवती ने जब शादी की बात की तो वो साफ इनकार कर दिया और अपने रसूख का हवाला देकर धमकी भी दी। 

युवती की शिकायत पर जबलपुर महिला थाने में आरोपी के खिलाफ विभिन्न धाराओं में मुकदमा दर्ज कर लिया है। मामला सामने आने के बाद यूथ कांग्रेस ने एबीवीपी को निशाने पर लिया है। मध्यप्रदेश यूथ कांग्रेस के मीडिया विभाग के अध्यक्ष विवेक त्रिपाठी ने कहा की, ‘आरएसएस, बीजेपी और एबीवीपी का यही असली चेहरा है। इनकी घिनौनी मानसिकता ने प्रदेश की माताओं बहनों का जीना हराम कर रखा है।’

त्रिपाठी ने कहा कि जबलपुर में संघ और उससे जुड़े संगठनों का दुष्कर्म करना आम हो गया है। आए दिन सत्ता के संरक्षण में ये लोग महिलाओं की इज्जत से खिलवाड़ करते हैं और शिकायत के बावजूद प्रशासन मूकदर्शक बनी रहती है। हम शुभांग गोटिया की 24 घंटे में गिरफ्तारी की मांग करते हैं। सरकार के दबाव में आकर पुलिस यदि आरोपी के खिलाफ कार्रवाई नहीं करेगी तो हम थाने और सड़कों पर आंदोलन को मजबूर हो जाएंगे।’

आरएसएस के मी टू के समर्थन में आने से अकबर की कुर्सी जाना तय

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पत्रकारिता से राजनीति में आए विदेश राज्य मंत्री एमजे अकबर की कुर्सी जाने की संभावनाएं बढ़ गईं हैं। राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ के वरिष्ठ पदाधिकारी दत्तात्रेय होसबोले ने ट्वीट पर एक महिला की पोस्ट शेयर की है। होसबोले ने लिखा मुझे अच्छा लगा,उसने जो महसूस किया था वह जाहिर किया। होसवोले राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ में संयुक्त सचिव हैं। होसेवोले की इस टिप्पणी से विदेश राज्य मंत्री एमजे अकबर की मुश्किलें बढ़ती दिखाई दे रहीं हैं।

अकबर इन दिनों विदेश प्रवास पर हैं। उनके कल तक भारत पहुंचने की संभावना है। मी टू की मुहिम के तहत फिल्म जगत कई नामी चेहरों का नया रूप सामने आया है। कई हस्तियों के खिलाफ पुलिस ने प्राथमिकी भी दर्ज की है। इनमें नाना पाटेकर भी हैं। फिल्म निदेशक सुभाष घई ने अपने ऊपर लगे यौन उत्पीड़न के आरोप पर कहा है कि वे अदालत में मानहानि का मामला दर्ज कराएंगे।

आंबेडकर का मानना था 10 साल के लिए हो आरक्षण,हर दस साल के लिए बढ़ाया जाता है:सुमित्रा महाजन

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लोकसभा स्पीकर सुमित्रा महाजन ने आरक्षण को लेकर बड़ी टिप्पणी की है। रांची में आयोजित एक कार्यक्रम में महाजन ने कहा कि आंबेडकर जी ने खुद कहा था कि आरक्षण की जरूरत महज 10 सालों के लिए है। उन्होंने 10 साल के भीतर समतामूलक समाज की कल्पना की थी। लेकिन, ऐसा नहीं हो सका। अब भी हम हर 10 साल पर इसे अगले 10 वर्षों के लिए बढ़ा देते हैं। उन्होंने कहा कि मुझे आरक्षण मिला, मैं कुछ जीवन में बन गया तो मैंने जीवन के कितने क्षण ऐसे बिताए सोचने में कि मैंने मेरे समाज को बांटा कितना है।

हमे ये सोचना बहुत जरूरी है कि क्या उसका फायदा है। क्या आरक्षण की यही कल्पना था। महाजन ने कहा कि समाज और देश में सामाजिक सौहार्द के लिए बाबा साहब भीमराव अंबेडकर के संदेश को मानना होगा और उनके रास्ते का अनुसरण करना होगा। छोटी जातियों में सुरक्षा की भावना होनी चाहिए आरक्षण को लेकर सुमित्रा महाजन ने कहा कि अगर किसी को दी हुई चीज को तुरंत छीना जाए तो विस्फोट हो सकता है। उन्होंने कहा कि सामाजिक स्थिति ठीक नहीं है, पहले एक वर्ग विशेष के साथ अन्याय किया गया तो इसका मतलब यह नहीं है कि दूसरे वर्ग के साथ भी अन्याय किया जाए। उन्होंने कहा कि हमे अन्याय की बराबरी नहीं करनी चाहिए। हमे लोगों को न्याय देना चाहिए, लोगों के मन में इस बात की भावना होनी चाहिए कि छोटी जातियों के साथ अन्याय नहीं होगा, उनपर अत्याचार नहीं किया जाएगा।

 

ये समय की मांग है अब लोग इस बात को बिना किसी पूर्वाग्रह या राजनीति से ऊपर उठकर सोचें कि आखिर वो कौन सी व्यवस्था हो सकती है जिसके जरिए सही माएने में जिन्हें फायदा नहीं मिला है वो लोग भी इस व्यवस्था का हिस्सा बनकर मूल धारा से जुड़ सकें। बता दें कि भविष्य का भारत कार्यक्रम में आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत ने कहा था कि आरक्षण के जरिए हम समाज के उन तबकों को मुख्यधारा में शामिल कर सकते हैं जो सदियों से पिछड़े हुए हैं।

फिर दरकिनार हुए अडवाणी, भाजपा के इस विरिष्ट नेता को संघ बनाना चाहता है राष्ट्रपति !

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Newbuzzindia : भारतीय जनता पार्टी जब पांच राज्यों के चुनावी महासमर में फंसी हुई है, तब उसके मातृ संगठन राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के शीर्ष नेता अगले राष्ट्रपति और उपराष्ट्रपति चुनाव की रणनीति का तानाबाना बुन रहे हैं। देश केअगले राष्ट्रपति के रूप में संघ की पहली पसंद भाजपा के वरिष्ठ नेता और पूर्व केंद्रीय मंत्री डा. मुरली मनोहर जोशी हैं। जबकि संघ उपराष्ट्रपति पद पर किसी दलित नेता को देखना चाहता है।

राष्ट्रपति भवन में जोशी और उपराष्ट्रपति निवास में किसी दलित को बिठाकर संघ नेतृत्व हिंदुओं के शीर्षस्थ समुदाय ब्राह्मणों और दलितों को एकजुट करके हिंदुत्व एकीकरण के एजेंडे को अगले आम चुनाव से पहले नई धार देना चाहता है। दलितों के जो तीन नाम चिह्नित किए गए हैं, उनमें केंद्रीय मंत्री थावरचंद गहलौत, महाराष्ट्र के भाजपा के राज्यसभा सांसद नरेंद्र जाधव और लोकसभा के सांसद उदित राज शामिल हैं।
संघ नेतृत्व का मानना है कि राष्ट्रपति  चुनाव में जीत के लिए जरूरी मतों के आंकड़े से एनडीए के पास अभी करीब 70 हजार मत मूल्य की कमी है। जरूरी बहुमत जुटाने के लिए भाजपा को एनडीए के बाहर के कुछ दलों के समर्थन की भी जरूरत होगी, अत: राष्ट्रपति पद के लिए ऐसे नाम को आगे किया जाए जिसकी योग्यता, अनुभव और वरिष्ठता निर्विवाद हो और आसानी से अन्य दलों का समर्थन जुटाया जा सके। 

संघ को यह आशंका भी है कि अगर किसी हल्के कद के व्यक्ति को आगे किया गया तो कांग्रेस और अन्य भाजपा विरोधी दल उपराष्ट्रपति हामिद अंसारी का नाम राष्ट्रपति पद के लिए आगे बढ़ाकर धर्मनिरपेक्षता का कार्ड खेलकर सरकार के लिए मुश्किल खड़ी कर सकते हैं। लाल कृष्ण आडवाणी की अपेक्षा मुरली मनोहर जोशी को संघ नेतृत्व अपने वैचारिक एजेंडे के ज्यादा करीब पाता है।

पूर्व आरएसएस प्रमुख ने बीजेपी को बताया राक्षस, बोले – मोदी सरकार ने संस्कृति का किया विनाश !

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Newbuzzindia : गोवा में अगले महीने से विधानसभा चुनाव होने जा रहे हैं। लेकिन चुनाव के नज़दीक आते ही बीजेपी की मुश्किलें बढ़ती नज़र आ रही हैं। अब गोवा के पूर्व आरएसएस प्रमुख सुभाष वेलिंगकर ने बीजेपी के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है।
हिन्दी न्यूज़ चैनल ‘आज तक’ से बातचीत में सुभाष ने बीजेपी को राक्षस बताते हुए कहा कि पार्टी ने गोवा और उसकी संस्कृति के साथ धोखा किया है। बीजेपी ने राज्य में सिर्फ संस्कृति का विनाश करने का काम किया है। उन्होंने कहा कि बीजेपी ने हमारी मातृभाषा कोंकणी को खत्म कर दिया। अब वह इसकी छवि बदलना चाहते हैं।
सुभाष ने बीजेपी मंत्री मनोहर पर्रिकर पर निशाना साधते हुए कहा कि जब पर्रिकर विपक्ष में थे तब वो कांग्रेस पर राज्य की भाषा को खत्म करने का आरोप लगाते थे लेकिन सत्ता में आने के बाद उन्होंने भी वही किया जो कांग्रेस कर रही थी। हमने बीजेपी पर विश्वास किया था, लेकिन उन्होंने हमारे साथ विश्वासघात किया है।
उन्होंने आगे कहा कि बाहर के लोग अब गोवा को सुअर, शराब और देह व्यापार के लिए जानते हैं। गोवा का संस्कृति पुर्तगाली संस्कृति नहीं है। लेकिन बीजेपी इसे अंग्रेजी सभ्यता से मिला हुआ बताती आई है। उन्होंने कहा कि राज्य की बड़ी आबादी ईसाई हैं, हम सिर्फ हिन्दू संस्कृति की बात नहीं करते बल्कि राज्य की बड़ी ईसाई आबादी भी यही सोचती है कि यहां की सियासी पार्टियों ने यहां की तहज़ीब को नुकसान पहुंचाया है।

बता दें कि सुभाष वेलिंगकर का संगठन ‘गोवा सुरक्षा मंच’ राज्य में बीजेपी के खिलाफ चुनाव लड़ेगा। सुभाष ने इसके लिए महाराष्ट्रवादी गोमंतक पार्टी और शिव सेना से गठबंधन करने का भी फैसला किया है।

आरएसएस और सिमी के बीच है कई समानताएं । जानें क्यों की जाती है दोनों की तुलना

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Newbuzzindia : भोपाल में हुए एनकाउंटर के बाद सिमी एक बार फिर सुरखिओं में आ गया है । कुछ लोग सिमी के बारे में जानते है और कुछ लोग सिमी के बारे में जानना चाहते है । जो लोग सिमी के बारे में नही जानते और जानना चाहते है वह मेरी तरह है । मैंने पहले भी कई बार सिमी का नाम सुना था पर ज्यादा कुछ नही जानता था । भोपाल में हुए एनकाउंटर के बाद मैंने सिमी के बारे में जानकारी पाने के लिए इंटरनेट का सहारा लिया । सिमी के बारे में पढ़ने के बाद मुझे ऐसी कई चीज़ें मालूम हुई जो में आपके साथ बाटना चाहता हूँ । सबसे पहले में आपको बताता हूँ की आखिर सिमी है क्या ?

सिमी यानी  “student islamik movement of india” है । सिमी के शुरुआत सन 25 अप्रैल 1977 को अलीगढ में हुई थी । कुछ लोगो का कहना है कि सिमी की शुरुआत इससे कई पहले 1961 में हो गई थी ।  अमेरिका में रहने वाले प्रोफेसर मोहम्मद अहमदुल्ला सिद्दकी को सिमी का संस्थापक बताया जाता है ।

यह तो हो गया सिमी का इतिहास । इसके बाद हम बात करेंगे सिमी की विचारधारा और लक्ष्य की । सिमी के बारे में ज्यादा जानकारी जुटाने के लिए मैंने सिमी से जुडी कई खबरें पढ़ी और सिमी से जुड़े कई लोगों के इंटरव्यू पढ़ें । मैंने कई जगह पर कई लोगों को सिमी की तुलना आरएसएस और बजरंग दल जैसे संगठनों से करते हुए देखा ।इन लोगों में राहुल गांधी और दिग्विजय जैसे बड़े नाम भी है ।  मैंने सोचा की सिमी तो एक आतंकी संगठन है तो फिर इसकी तुलना बजरंग दल और आरएसएस से करना कहाँ तक सही है ? मैंने सोचा क्या कांग्रेस नेता दिग्विजय सिंह पागल हो गए थे जो सिमी और बजरंग दल को एक जैसा बताते हुए दोनों पर प्रतिबंध लगवाना चाहते थे ।

इसके बाद सिमी में मेरी दिलचस्पी और बढ़ने लगी । मैंने सिमी और सिमी के बारे में पढ़ना चालू किया । पढ़ते-पढ़ते ऐसे कई तथ्य सामने आए जो सिमी को आरएसएस के सामान दर्शा रहे थे । अब में आपको आरएसएस और सिमी के बारे में अलग-अलग बताने की बजाय एक साथ बताता हूँ ।

दोनों ही सांप्रदायिक संगठन है ।
देखा जाए तो सिमी और आरएसएस दोनों ही सांप्रदायिक संगठन है । सिमी की विचारधारा इस्लाम और मुस्लिमों से जुडी है तो वहीं आरएसएस हिंदुत्व की विचारधारा पर काम करता है ।

हिन्दू राष्ट्र – मुस्लिम राष्ट्र
दोनों ही संगठनों की राष्ट्र को लेकर एक और समानता है । आरएसएस हिन्दू राष्ट्र की कल्पना करता है तो वहीं सिमी भारत को मुस्लिम राष्ट्र बनाना चाहता है ।

राम मंदिर – बाबरी मस्जिद की लड़ाई
अयोध्या में हुए विवाद में इन दोनों ही संगठनों का बड़ा हाथ रहा है । आरएसएस और उसके साहियोगी संगठन जहाँ बाबरी मस्जिद गिराकर राम मंदिर बनवाना चाहते थे । वहीं दूसरी ओर सिमी बाबरी मस्जिद गिराने का विरोध करता है और बाबरी मस्जिद की पुनः स्थापना चाहता है ।

दोनों पर लग चुका है बैन ।
महात्मा गांधी की हत्या के बाद सरदार वल्लभभाई पटेल ने आरएसएस पर बैन लगा दिया था । वहीं दूसरी ओर सिमी पर 2002 में भारत सरकार ने बैन लगा दिया था ।

दोनों पर लग चुका है आतंकवादी संगठन का ठप्पा
महात्मा गांधी की हत्या के बाद सन 1948 में आरएसएस को आतंकवादी संगठन बताते हुए गृहमंत्री सरदार वल्लभभाई पटेल ने बैन लगाया था । वहीं 2002 में कांग्रेस सरकार ने सिमी को आतंवादी संगठन मानते हुए बैन लगाया था ।

बैन के बाद दोनों ने खोली कई समर्थक संस्थाए
बैन लगने के बाद आरएसएस ने विश्व हिंदू परिषद् , विद्या भारती , बजरंग दल जैसे कई संगठनों की शुरुआत की । वहीं सिमी से बैन लगने के बाद इंडियन मुजाहिद्दीन नाम से नया संगठन शुरू किया था ।

दोनों करते सांकृतिक प्रसार का दावा
आरएसएस एक ओर कहता है कि वह युवाओं में हिन्दू संस्कृति को बढ़ावा देने पर काम करता है तो वहीं सिमी के अनुसार वह पश्चिमी सभ्यता के खिलाफ युवाओं में इस्लामिक संस्कृति को बढ़ावा देता है ।

आतंकी हमलों में आया नाम
सिमी जहाँ मालेगांव बम धमाका , दिल्ली सीरियल ब्लास्ट , मुम्बई ट्रैन ब्लास्ट और गुजरात बम धमाकों का आरोपी है । वहीं दूसरी ओर आरएसएस पर हैदराबाद की मक्का मस्जिद हमले, और 2007 के समझौता एक्सप्रेस बम ब्लास्ट, 2006 और 2008 में महाराष्ट्र के मालेगांव में हुए बम ब्लास्ट का आरोप है । सूत्र एबीपी न्यूज़

साम्प्रदायिकता फ़ैलाने और दंगे करवाने का आरोप
दोनों ही संगठनों पर साम्प्रदायिकता फ़ैलाने और दंगे करवाने जैसे आरोप समय समय पर लग चुके है । दोनों ही संगठन के सदस्य इन आरोपों के चलते कई बार जेल भी जा चुके है ।

इन सभी समानताओं को देखते और दिखाते हुए में किसी भी तरह से यह नही कहना चाहता हूँ की आरएसएस पर बन लगाया जाए या फिर सिमी से बैन हटाया जाए । में सिमी से तुलना करके आरएसएस को आतंकी संगठन नही बता रहा हूँ । वहीं सिमी की आरएसएस से तुलना करके में उसे देशभक्त संगठन भी नही मानता हूँ । में एक हिन्दू हूँ और हिन्दू संस्कृति और मेरा पूरा भरोसा है । में राष्ट्रवादी भी हूँ पर भक्तवादी नही ।

RSS के दस बड़े योगदान, जिसके लिए देश हमेशा रहेगा संघ का ‘आभारी’ !

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rss , आरएसएस

लोग अक्सर पूछते है कि आरएसएस का आजादी में योगदान क्या रहा ? आजादी के बाद से ही राष्ट्रीय स्वयंसेवक (आरएसएस) पर कर्ई तरह के आरोप लगते रहे है। आरएसएस को जहां एक तरफ तत्कालीन राजनीतिक शक्ति कांग्रेस ने पूरी तरह नकार दिया था। तो वहीं दुसरी तरफ बड़ी संख्या मे लोगों ने राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के कदम से कदम मिलाए। आरएसएस को शुरुआती दौर से ही हिन्दु संगठन होने के आरोपों का सामना करना पड़ा। आजादी के बाद से संघ को अपने अस्तित्व को बनाये रखने के लिए लगातार कढ़ी परीक्षा से गुजरना पड़ा।

इस जैसी अनेक चुनौतियों के बाद भी आज 7 से 8 दशक के बाद राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ भारत मे अद्वितीय स्थान पर बैठा हुआ है। अप्रत्यक्ष रुप से आज भारतीय राजनीति मे सक्रिय हो चुका है। जहां एक तरफ कांग्रेस, वामपंथी दल और समस्त विपक्षी पार्टियां आरएसएस को हर किसी किमत पर नीचा दिखाने और देश के एक वर्ग विशेष का विरोधी करार करने से नही थकती । वहीं ये सभी दल RSS के कुछ कामों पर हमेशा से बचती रही है। ये वो काम या योगदान है जिसे राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ ने बढ़ी ही देशभक्ति के साथ निभाया है। और मुसीबत मे देश का साथ दिया है। 

 

आरएसएस का आजादी में योगदान

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10. तो आइये हम आपकों बताते है कि आरएसएस के किन कामों पर कांग्रेस और सभी विपक्षी दल कभी कुछ नही बोल पाये और इन किन कामों के लिए देश हमेशा संघ का आभारी रहेगा-

विभाजन के समय सीमा पर निगरानी

संघ के स्वयंसेवकों ने आजादी के तुरंत बाद से ही अक्टूबर 1947 से सीमा पर निगरानी की। पाकिस्तानी सैनिकों की घुसपैठ पर स्वयंसेवकों ने भी सीमा पर लड़ाई की और शहीद हुए।

 

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गुजरात विधानसभा चुनाव: आरएसएस के सर्वे में भाजपा की करारी हार..!

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Newbuzzindia : आरएसएस ने हाल में गुजरात में सर्वे चुनावी सर्वे किया।  सर्वे में सामने आया की अगर इस समय गुजरात में वधान सभा चुनाव होते है तो भाजपा की करारी हार तय है । आरएसएस द्वारा किये गए सर्वे में भाजपा को 180 में से केवल 60-65 सीट ही मिलती दिखाई दे रही है । 

गौरतलब है कि दलित आंदोलन के बाद किये गए इस सर्वे को आनंदीबेन के इस्तीफ़ा से जोड़कर देखा जा रहा है । आपको बता दें कि ऊना में मृत गाय की खाल उतरने लार दलित युवकों की पिटाई के विरोध में पिछले  दो हफ़्तों से विरोध प्रदर्शन हो रहे है ।

इस सर्वे को आरएसएस के कुछ जमीनी प्रचारकों ने अंजाम दिया । ये वही प्रचारक है जो आरएसएस के लिए फीडबैक लाने का काम करते रहे है । सर्वे में खुलासा हुआ है कि हिंदुओं का झुकाव तो भाजपा की तरफ है लेकिन दलितों को भाजपा से दूर बताया जा रहा है । आरएसएस दलितों को हमेशा से ही हिन्दू ही मानता आया है और वह नही चाहता की दलित किसी दूसरी पार्टी का रुख करें ।

बताया जा रहा है कि सोमवार को गुजरात आरएसएस ने मुख्यमंत्री आनंदीबेन पटेल से मुलाकात कर इस सर्वे के बारे में बताया । जिसके बाद सीएम आनंदीबेन पटेल इस्तीफे के लिए राजी कर दिया । सर्वे के अनुसारी दलित अन्दोलर और पाटीदार आंदोलन के कारण भाजपा को कम से कम 18 विधानसभा सीटों पर नुक्सान झेलना पड़ सकता है ।

सर्वे के अनुसार आदिवासी भी सरकारी नौकरियों और जमीन आवंटन के लिए आंदोलन छेड़ सकते हैं । आरएसएस की एक और रिपोर्ट में कहा गया था कि बीजेपी को दिसंबर 2015 के पंचायती चुनावों में कम से कम 104 सीटों का नुकसान हुआ। इसकी वजह पाटीदारों का आंदोलन था। बीजेपी को शहरी इलाकों के मुकाबले ग्रामीण इलाकों में ज्यादा नुकसान हुआ था।

असम से लड़कियों की तस्करी करवा रहे है आरएसएस के 3 संगठन..!

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Newbuzzindia: एक ओर जहां भाजपा “बेटी बचाओ-बेटी पड़ाओ” का नारा दे रही है तो वहीं दूसरी ओर संघ और उसके 3 संगठन पर लड़कियों की तस्करी के आरोप लग रहे है । गौरतलब है की मुख्य विपक्षी पार्टी कांग्रेस के आरोप लगाया है की सभी कानूनों का घोर उल्लंघन करते हुए संघ परिवार के 3 संगठन असम की युवा आदिवासी लड़कियों की तस्करी कर रहे है । 
कांग्रेस पार्टी ने भाजपा  से सवाल किया है की क्या यह घटना प्रधानमंत्री मोदी के “बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ” योजना का हिस्सा है ?
कांग्रेस पार्टी की प्रवक्ता प्रियंका चतुर्वेदी ने संवाददाताओं से कहा, ‘संघ परिवार से संबद्ध तीन संस्थाएं – यथा राष्ट्र सेविका समिति, विद्या भारती एवं सेवा भारती द्वारा बेहतर शिक्षा के नाम पर असम की युवा आदिवासी लड़कियों की मानव तस्करी किया जाना पीड़ादायी, भद्दा और कठोर सच्चाई है।

महिला कांग्रेस प्रमुख शोभा ओझा ने कहा है विस्तृत जांच एवं दस्तावेजों से यह साबित होता है की किस प्रकार संघ परिवार ने बाल अधिकारों के बारे में भारतीय एवं अंतरराष्ट्रीय कानूनों का उल्लंघन करते हुए असम की 31 युवा आदिवासी लड़कियों की पंजाब एवं गुजरात में तस्करी की तथा उनके विचारों में परिवर्तन किया।


शिक्षा का भगवाकरण: नई शिक्षा नीति पर प्रकाश जावड़ेकर ने बंद कमरे में की आरएसएस के साथ बैठक..!

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Newbuzzindia:  शिक्षा में भगवाकरण के मुद्दे पर लगातार विरोधियों के निशाने पर रही भाजपा पर विरोधी फिर हमलावर हो गए है । खबर है की मानव संसाधन एवं विकास मंत्री प्रकाश जावड़ेकर ने बुधवार को आरएसएस के वरिष्ट अधिकारियों के साथ बंद कमरे में लंबी बैठक की । देश की नई शिक्षा नीति को लेकर हुई बातचीत में RSS से जुडे कई अन्‍य संस्‍थाओं के प्रतिनिधि भी मौजूद रहे ।

गौरतलब है की हाल ही में मानव संसाधन एवं विकास मंत्रालय की जिम्‍मेदारी संभालने के बाद से जावड़ेकर ने संघ से पहली बार औपचारिक रूप से बात की है । कयास लगाए जा रहे थे की स्मृति ईरानी से मंत्रालय लेकर प्रकाश जावड़ेकर को देने के बाद शिक्षा में संघ नीति को बढ़ावा मिलेगा । 

सूत्रों के अनुसार, जावड़ेकर ने गुजरात भवन में छह घंटे चली बैठक में विद्या भारती, अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद, राष्‍ट्रीय शैक्षिक महासंघ, भारतीय शिक्षण मंडल, संस्‍कृत भारती, शिक्षा बचाओ आंदोलन, विज्ञान भारती और इतिहास संकलन योजना के सदस्‍यों से गुफ्तगू की। बैठक में RSS के संयुक्‍त सचिव कृष्‍ण गोपाल, भाजपा अध्‍यक्ष अमित शाह और RSS के अखिल भारतीय संपर्क प्रमुख अनिरुद्ध देशपांडे भी मौजूद रहे।

द इंडियन एक्‍सप्रेस ने सूत्रों के हवाले से कहा है कि बैठक नई शिक्षा नीति पर संघ के इनपुट्स बांटने के लिए की गई थी। साथ ही ‘आधुनिक शिक्षा में राष्‍ट्रीयता, गर्व और प्राचीन भारतीय मूल्‍यों को समाहित करने’ की योजना भी बनाई गई। इससे पहले नई शिक्षा नीति को तैयार करने के लिए पूर्व कैबिनेट सेक्रेट्री टीएसआर सुब्रमण्‍यम की अध्‍यक्षता में बनाई गई कमेटी को 80,000 से ज्‍यादा सुझाव मिले थे। 

आरएसएस के एक पदाधिकारी के अनुसार, ”बैठक सरकार-संगठन मंच का एक हिस्‍सा थी जो मोदी सरकार के सत्‍ता में आने के बाद बना है। चूंकि जावड़ेकर मंत्रालय में नए हैं, इसलिए हमनें उन्‍हें जमीनी स्‍तर की चुनौतियों और शिक्षा क्षेत्र में जरूरी सुधारों से अवगत करा दिया है। सामाजिक न्‍याय मंत्री थवर चंद गहलोत और आदिवासी मामलों के मंत्री जुअल ओरम भी कुछ समय के लिए बैठक में थे, क्‍योंकि उनके मंत्रालय भी आदिवासियों, आरक्षित जातियों और पिछड़ी जातियों की शिक्षा से जुड़े हुए हैं।”