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‘हमे 10 साल बाद बोलने वाला प्रधानमंत्री मिला’- अमित शाह

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#newbuzzindia/कासगंज । उत्तरप्रदेश में 2017 में विधानसभा चुनाव आने वाले है। इसको लेकर भाजपा पूरी तरह सक्रिय हो चुकी है। उत्तरप्रदेश का चुनावी रण, अन्य राज्यों की तुलना में अधिक भयावक होगा। इसलिए अभी से ही बीजेपी ने चुनाव की रुपरेखा तैयार कर ली है।

बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह ने उत्तरप्रदेश में भाजपा का प्रभाव बनाना शुरू कर दिया है। अमित शाह ने उत्तरप्रदेश के कासगंज में एक रैली को संबोधित करते हुए राज्य सरकार और कांग्रेस को जमकर आड़े हाथो लिया साथ ही दोनों की कमियों को जनता को गिनाया भी।

अमित शाह ने कहा कि, ‘हमने एक ऐसा प्रधानमंत्री दिया है जो बोल सकता है। 10 साल बाद हमे ऐसा  प्रधानमन्त्री मिल पाया है। इसके पहले कांग्रेस ने ऐसा प्रधानमन्त्री दिया था जो यदि बोलता भी तो उसे या तो सोनिया गांधी सुन पाती या राहुल गांधी। जनता तक उनकी आवाज़ नही पहुच पाती थी।’

श्री शाह ने राज्य सरकार पर भी तंज कसते हुए कहा कि ‘अखिलेश बाबू ने 5 साल में क्या किया है ? क्या उन्होंने युवाओं को लैपटॉप देने का वादा पूरा किया या उत्तरप्रदेश में 24 घंटे बिजली मिलने लगी?’

इसी बीच शाह ने मोदी की तारीफ़ करते हुए कहा कि ‘मोदी यदि विदेश भी जाते है तो वहां की जनता उनका गर्मजोशी से स्वागत करती है। और इस बात की जानकारी पूरी दुनिया को मिलती है।’

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कांग्रेस के बुरे दिन हुए शुरू, फिर मिला झटका, राजस्थान प्रभारी गुरुदास कामत ने दिया इस्तीफा

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#newbuzzindia/जयपुर । एक ऐसा समय था जब कांग्रेस देश की सबसे मजबूत और दमदार पार्टी हुआ करती थी। 2014 के लोकसभा चुनाव के बाद से मानो कांग्रेस की जड़े ही हिल गयी हो। एक के बाद एक कांग्रेस को झटके लगते रहे, और लगातार कांग्रेस कमजोर पड़ती रही।

एक नया झटका हाल ही में कांग्रेस को लगा है, जिसने कांग्रेस को अंदर तक झकझोर दिया है। कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और राजस्थान के प्रभारी गुरुदास कामत ने अपने राजनैतिक जीवन से त्यागपत्र दे दिया है।

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आपको बता दे कि, कुछ दिन पहले ही कांग्रेस को छत्तीसगड़ में मुह की खानी पड़ी थी, वहां के सबसे दमदार नेता ने कांग्रेस से पल्ला झाड़ा था, तो उसी के बाद इस घटना से कांग्रेस पूरी तरह हिल चुकी है।

गुरुदास कामत, 44 साल से कांग्रेस में बने हुए थे, 10 पहले ही उन्होंने कांग्रेस सुप्रीमो सोनिया गांधी से मुलाकात की थी और इस्तीफा सौपा था, पर इस्तीफे पर कार्रवाई न होने से श्री कामत ने सन्यास की घोषणा कर दी।

वहीं इस मुद्दे पर ये भी कयास लगाए जा रहे है कि, कामत कांग्रेस से इसलिए भी पीछा छुड़ा रहे है कि राहुल गांधी को कांग्रेस की कमान सौपी जायेगी या कांग्रेस की बढ़ती कमजोरी भी एक कारन हो सकती है।

छत्तीसगढ़ में कांग्रेस को बड़ा झटका, अजीत जोगी के साथ 25,000 समर्थक छोड़ सकते है कांग्रेस !

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Newbuzzindia: अपने सबसे बुरे समय से गुजर रही कांग्रेस को एक और बड़ा झटका लगने वाला है । खबर है की छत्तीसगढ़ में कांग्रेस के वरिष्ट नेता एवं पूर्व मुख्यमंत्री अजीत जोगी कांग्रेस छोड़कर नई पार्टी बनाने का मन बना चुके है । साथ ही उनके साथ  छत्तीसगढ़ में कांग्रेस के 25000 समर्थक भी कांग्रेस को अलविदा कहने के मूड में है ।

गौरतलब है की छत्तीसगढ़ में कांग्रेस के पास अजीत जोगी ने बड़ा नेता मौजूद नही है । कहा जाता है की “छत्तीसगढ़ में जोगी ही कांग्रेस है और कांग्रेस ही जोगी है” । ऐसे में जोगी की नई पार्टी बनाने पर कांग्रेस को बड़ी मुसीबत का सामना करना पड़ सकता है ।

2018 में छत्तीसगढ़ में विधानसभा चुनाव होने है और ऐसे में बिना अजीत जोगी के कांग्रेस का चुनाव जातना ख़ासा मुश्कित हो जाएगा । अजीत जोगी ने इशारा दिया है कि वे कांग्रेस छोड़कर अपना क्षेत्रीय दल बनाएंगे ।

एक निजी चैनल से बात करते हुए जोगी ने कहा है की “मैं विधायक केंद्रित राजनीती नही करना चाहता। कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी को इस बारे में मैंने सब बता दिया है, अब दिल्ली अब नहीं जाऊंगा।’ उन्होंने कहा कि ‘मैं कोई भी बड़ा फैसला मारवाही की जनता से पूछ कर करता हूं। इसलिए मरवाही में एक बैठक बुलाकर अपने 1500 खास लोगों से सलाह लुंगा”

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राष्ट्रपति ने मोदी सरकार की स्वास्थ व्यस्था पर उठाए सवाल, बोले गाँव पर भी करे फोकस !

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Newbuzzindia: मोदी सरकार के कामकाज से खुश होकर अक्सर उनकी तारीफ करने वाले राष्ट्रपति प्रणव मुखर्जी ने शुक्रवार को मोदी सरकार की स्वाथ्य नीति पर सवाल खड़े किए। राष्ट्रपति प्रणव मुखर्जी ने कहा की मौजूदा स्वास्थ व्यस्था में काफी खामियां है । राष्ट्रपति ने  कहा की मौजूद सरकार का गाँवों को छोड़कर शहर पर ज्यादा फोकस है।

गौरतलब है की राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी शुक्रवार को शिमला के पीटरहॉफ में इंदिरा गांधी मेडिकल कॉलेज के दीक्षांत समारोह में बतौर मुख्यातिथि संबोधित कर रहे थे।

राष्ट्रपति ने आगे कहा की ग्रामीण क्षेत्रों में 75 प्रतिशत आबादी रहती है। ऐसे में गांवों पर अधिक ध्यान देने की जरूरत है। उन्होंने स्वास्थ्य संस्थानों में डॉक्टरों के साथ पैरामेडिकल स्टाफ की ज्यादा भर्ती करने की आवश्यकता पर जोर दिया। राष्ट्रपति ने बेहतर स्वास्थ्य सेवाओं के लिए केंद्र और राज्य सरकारों को तालमेल बनाकर काम करने का भी आह्वान किया।

प्रणब मुखर्जी शुक्रवार को शिमला के पीटरहॉफ में इंदिरा गांधी मेडिकल कॉलेज के दीक्षांत समारोह में बतौर मुख्यातिथि संबोधित कर रहे थे। राष्ट्रपति ने कहा कि भारत में सभी लोगों को एक समान स्वास्थ्य सुविधाएं प्रदान करने के लिए आधारभूत ढांचे को विकसित करने की आवश्यकता है।

ग्रामीण क्षेत्रों में चिकित्सकों की तैनाती महत्वपूर्ण पहलू है, जिसे केंद्र और राज्य सरकारों के स्तर पर देखने की जरूरत है। कई तरह के आधुनिक उपचार में पैरामेडिक्स भी सक्षम हैं।

तमाम चिकित्सा संस्थानों में डॉक्टरों की नियुक्ति के साथ इस वर्ग के कर्मचारियों की ज्यादा तैनाती करने की जरूरत है। उन्होंने चिकित्सकों का आह्वान किया कि वे देशसेवा की भावना से काम करते रहें। इस अवसर पर राज्यपाल आचार्य देवव्रत, मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह समेत कई गणमान्य लोग मौजूद रहे।

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शिवराज सरकार में नेहरू की तारीफ करना कलेक्टर को पड़ा महँगा, नौकरी से बेदखल !

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Newbuzzindia: भारत के प्रथम प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू की तारीफ करना कितना महँगा पड़ सकता है ये अजय सिंह गंगवार से बेहतर कौन बता सकता है । अजय सिंह गंगवार बड़वानी मध्यप्रदेश से कलेक्टर थे । कुछ ही दिनों पहले की बात है अजय सिंह ने अपने फेसबुक प्रोफाइल पर भारत के प्रथम प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू के समर्थन में एक पोस्ट किया था ।

अजय सिंह शायद ये भूल गए थे की वह भाजपा शाषित मध्यप्रदेश में कार्यरत है जहां मोदी की निंदा करने से बड़ा अपराध नेहरू और गांधी परिवार की तारीफ करना माना जाता है ।

गौरतलब है की आज शाम रात को ndtv के रविश कुमार ने भी इस मुद्दे को उठाते हुए भाजपा और शिवराज सरकार पर बड़ा हमला बोला है । रवीश ने इसे अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का हनन करार दिया है ।

“ज़रा ग़लतियां बता दीजिए जो नेहरू को नहीं करनी चाहिए थी. अगर उन्होंने 1947 में आपको हिंदू तालिबानी राष्ट्र बनने से रोका तो यह उनकी ग़लती थी, उन्होंने आईआईटी, इसरो, आईआईएसबी, आईआईएम, भेल, स्टील प्लांट, बांध, थर्मल पावर लाए ये उनकी ग़लती थी
               आसाराम और रामदेव जैसे इंटिलेक्चुअल्स की जगह साराभाई और होमी जहांगीर को सम्मान और काम करने का मौक़ा दिया ये उनकी ग़लती थी, उन्होंने देश में गौशाला और मंदिर की जगह यूनिवर्सिटी खोली ये भी उनकी घोर ग़लती थी”.

उपरोक्त बातें फ़ेसबुक पर लिखने के लिए मध्य प्रदेश के बड़वानी के जिला कलेक्टर अजय गंगवार को स्थानांतरित कर दिया गया है ।
ये है दुर्भाग्य आज देश का, ये हाल हुआ है 2 साल में कि अब किसी को बोलने के अधिकार से भी वंचित किया जायेगा और खासकर अगर वो सरकारी अधिकारी है तो ।

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प्रशांत किशोर ने मास्टर प्लान पर शुरू किया काम, जाने कैसे दिलाएंगे कांग्रेस को जीत !

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Newbuzzindia: चार राज्‍यों के चुनाव में बुरी तरह हार चुकी कांग्रेस अब उत्‍तर प्रदेश पर नजरें गड़ाए है। उत्‍तर प्रदेश में 2017 में विधानसभा चुनाव होने हैं। एक साल से भी कम वक्‍त में कांग्रेस को फिर से खड़ा करने के लिए उसके चुनावी रणनीतिकार प्रशांत किशोर इन दिनों लखनऊ में डेरा डाले हैं। जिलाध्‍यक्षों के साथ उनकी बैठकों का अगला दौर सोमवार, 23 मई से शुरू हो चुका है।

प्रशांत किशोर के काम करने के तरीके से यूपी कांग्रेस के कुछ नेताओं की बेचैनी बढ़ गई है। The Indian Express ने पता लगाया है कि किशोर और उनकी 100 सदस्‍यीय टीम कैसे उत्‍तर प्रदेश कांग्रेस कमेटी की विभिन्‍न इकाइयों को छान कर डेढ़ लाख समर्पित कार्यकर्ता चुन रही है।

प्रशांत जुलाई से प्रचार शुरू करने की योजना बना रहे हैं

हर विधानसभा क्षेत्र से करीब 300 कार्यकर्ताओं को चुना जाएगा, जो जमीन पर कांग्रेस के प्रचार में सबसे अहम साबित होंगे। प्रशांत जुलाई से प्रचार शुरू करने की योजना बना रहे हैं। साथ ही साथ, वह और उनकी टीम अलग-अलग समूहों, विभागों और इकाइयों से कांग्रेस नेताओं और कार्यकर्ताओं को एक मंच पर ला रही है ताकि वे अपने क्षेत्र की समस्‍याओं, जातिगत समीकरणों के बारे में बता सकें और सुझाव भी दे सकें।

अगले डेढ़ महीने की उनकी रणनीति के तीसरे हिस्‍से में उनकी टीम ऐसे परिवारों से मिलेगी जो लम्‍बे समय तक कांग्रेस से जुड़े थे, मगर किन्‍हीं कारणों की वजह से पार्टी से खुद को दूर कर लियाा है। पार्टी सूत्रों ने इस बात की पुष्टि की है कि किशोर ने इस काम को खत्‍म करने के लिए डेढ़ महीने का वक्‍त मांगा है और पार्टी का असली चुनाव प्रचार जुलाई से शुरू होगा। प्रशांत की टीम के पास एक काम है जो उन्‍हें इस महीने के अंत तक खत्‍म करना है। उन्‍हें हर विधानसभा सीट से कम से कम 30-35 हजार कार्यकर्ता चुनने हैं जिन्‍हें जून में लखनऊ लाया जाएगा और कांग्रेस उपाध्‍यक्ष राहुल गांधी उनसे बातचीत करेंगे।

पंजाब से इतर, उत्‍तर प्रदेश में प्रशांत को उत्‍तर प्रदेश कांग्रेस कमेटी ने अब तक मन मुताबिक तरीके से काम करने दिया है। यहां तक कि प्रशांत ने जिला स्‍तर से लेकर ब्‍लॉक और कांग्रेस की विभिन्‍न इकाइयों से सीधे बात की, ये सारा कार्यक्रम लखनऊ में उन्‍नाव से पूर्व कांग्रेस सांसद अन्‍नू टंडन के सहयोग से हुआ।

लेकिन इन सभी गतिविधियों के बीच, प्रशांत की अलग कार्यशैली ने कांगेस के नेताओं में बेचैनी जा दी है। किेशोर ने रोजमर्रा की बैठकों से इतर पार्टी के गिने-चुने नेताअों से अलग बात की, वे अक्‍सर राहुल गांधी से सीधा संपर्क होने की याद दिलाते हैं, अपने भाषणों में वे दावा करते हैं कि टिकट बांटने में भी अहम रोल अदा करेंगे।

मार्च में जब प्रशांत किशोर आधिकारिक रूप से कांग्रेस की चुनावी योजना का हिस्‍सा बने और राहुल गांधी द्वारा बुलाई गई उत्‍तर प्रदेश के वरिष्‍ठ नेताओं की बैठक में हिस्‍सा लिया, तो वे बहुत कम बोले। सभी को यह बताया गया कि किशोर 2017 के चुनावों के लिए एक चुनावी प्रचार अभियान बनाएंगे और पार्टी का घोषणा पत्र तैयार करने में मदद करेंगे। सभी नेताओं से प्रशांत को सहयोग करने को कहा गया।

जल्‍द ही, किशोर आल इंडिया कांग्रेस कमेटी के महासचिव मधुसूदन मिस्‍त्री और यूपी कांग्रेस अध्‍यक्ष निर्मल खत्री के साथ दिल्‍ली आए और 10 मार्च को कांग्रेस के करीब 140 जिलाध्‍यक्षों और नगर अध्‍यक्षों को दो काम सौंपे। पहला, सभी को हर विधानसभा क्षेत्र से कम से कम 20 समर्पित कार्यकर्ताओं के नाम, मोबाइल नंबर और फोटोग्राफ जुटाने को कहा गया।

यह काम मार्च अंत तक खत्‍म करना था, लेकिन अभी भी कुछ काम बाकी बचा हुआ है। दूसरा, उन्‍हें एक फॉर्म भरने को दिया गया जिसमें जिला इकाइयों से क्षेत्र में पार्टी और संगठन की कमियां और अच्‍छाइयां पूछी गई थीं। ये भी पूछा गया कि क्षेत्र में बीजेपी समेत अन्‍य पार्टियों के बेहतर प्रदर्शन करने के कारण भी पूछे। ये जानकारी भी मांगी गई कि उनके इलाके में कौन से मुद्दे उठाए जा सकते हैं। ज्‍यादातर पार्टी इकाइयों ने काम पूरा कर लिया है लेकिन रायबरेली, अमेठी और सुल्‍तानपुर को इस प्रकिया में शामिल नहीं किया गया।

इस दौरान किशोर की टीम को लखनऊ स्थित उत्‍तर प्रदेश कांग्रेस कार्यालय की छत पर एक कमरा दिया गया था। प्रशांत की टीम किसी नेता से बात नहीं करती। जल्‍द ही एक प्‍लान तैयार किया गया, जहां किशोर वरिष्‍ठ नेताओं की मौजूदगी में हर स्‍तर के कार्यकर्ताओं से मिलते।

पहले तय हुआ कि किशोर पार्टी के वरिष्‍ठ नेताओं के साथ पूरा यूपी घूमेंगे। लेकिन बाद में तय किया गया कि कार्यकर्ताओं और नेताओं को लखनऊ बुलाया जाएगा और बाकी नेता सिर्फ बैठक का इंतजाम करने में लगे रहे।

 

उत्तर प्रदेश में प्रियंका गांधी के आने से बढ़ेंगी भाजपा की मुसीबतें : बाबा रामदेव

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Newbuzzindia: योग गुरु रामदेव ने कहा कि अगर प्रियंका गांधी कांग्रेस नेतृत्व में आती हैं, तो बीजेपी वालों को ज्यादा मेहनत करनी होगी। साथ ही उन्होंने कहा कि कांग्रेस में किसको नेतृत्व करना है, यह उसे ही तय करना है।

साथ ही रामदेव ने कहा कि कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी ने उनके साथ जो किया, वह उसे इस जन्म में नहीं भुला सकते।

बता दें कि रामदेव का इशारा अन्ना हजारे के भ्रष्टाचार विरोधी आंदोलन के दौरान दिल्ली के रामलीला मैदान पर हुई पुलिस कार्रवाई की तरफ था।

शनिवार को राजधानी में आयोजित एक न्यूज़ चैनल के कार्यक्रम में रामदेव ने कांग्रेस नेतृत्व में बदलाव और प्रियंका गांधी की भूमिका के बारे में पूछे जाने पर कहा, ‘प्रियंका गांधी अगर कांग्रेस नेतृत्व में आती हैं, तो बीजेपी वालों को ज्यादा मेहनत करनी होगी।’

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5 राज्यों के विधानसभा चुनाव में कांग्रेस ने जीतीं 151 सीट तो भाजपा को मिली केवल 90 सीट !

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Newbuzzindia: असम, पश्चिम बंगाल, तमिलनाडु, केरल और पुडुचेरी में हुए विधानसभा चुनावों के नतीजों से साफ हो गया है कि कहां पर किसकी सरकार बनने जा रही है। जहां एक ओर असम में कमल खिल गया है, वहीं दूसरी ओर तमिलनाडु और पश्चिम बंगाल में सत्ताधारी पार्टी जीत गई हैं। पीएम मोदी ने भी ममता बनर्जी और जयललिता को फोन करके जीत की बधाई दी है।

वैसे तो चुनाव परिणाम आने के बाद से ही भाजपा में ख़ुशी की लहर दौड़ पड़ी है । असम में पहली बार भाजपा की सरकार बनी है । भाजपा के तमाम बड़े नेता कांग्रेस पर निशाना साध रहे है । कांग्रेस की ओर से भी सोनिया और राहुल गांधी ने चुनाव परिणाम के बाद हार स्वीकार की ।

लेकिन अगर आंकड़ो पर नजर डाली जाए और कांग्रेस और भाजपा में तुलना की जाए तो नतीजा कुछ और ही दिखाई देता है ।

5 राज्यों में हुए चुनाव में भाजपा को मिली कुल सीट है असम-86 + पश्चिम बंगाल-3 + तमिलनाडु-0 + केरल-1 + पॉन्डेचेरी-0 = कुल सीट-90

तो वहीं कांग्रेस ने असम-60 + पश्चिम बंगाल-44 + तमिलनाडु-8 + केरल-22 + पॉन्डेचेरी-17 = कुल सीट-151

असम में सरकार जाने के बाद भी कांग्रेस भाजपा से 61 सीट आगे दिखाई दे रही है । इन आंकडों को अगर 2019 के आम चुनावों के परपेक्ष में देखा जाए तो भाजपा और मोदी के लिए अच्छे संकेत नही है ।

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मंच पर आए रोबर्ट वाड्रा के रिश्तेदार , कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने किया विरोध !

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Newbuzzindia: मंगलवार को पुणे में महाराष्‍ट्र कांग्रेस के एक कार्यक्रम में कार्यकर्ताओं ने रॉबर्ट वाड्रा के रिश्‍तेदारों को मंच पर जगह देने पर नाराजगी जाहिर की। कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने महाराष्‍ट्र कांग्रेस के सचिव शहजाद पूनावाला और उनके भाई तहसीन के खिलाफ नारेबाजी की और उन्‍हें बोलने भी नहीं दिया।

इस दौरान सांसद व पूर्व मंत्री शशि थरूर भी मौजूद थे। शहजाद पूनावाला जैसे ही बोलने को खड़े हुए कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने नारेबाजी शुरू कर दी। गौरतलब है कि तहसीन की हाल ही में रॉबर्ट वाड्रा की कजन से शादी हुई है।

उन्‍होंने कहा कि रॉबर्ट वाड्रा से संबंध होने के कारण पूनावाला पार्टी के बड़े नेता नहीं बन सकते। आप लोगों का पार्टी में क्‍या योगदान है।

कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने सोनिया गांधी और राहुल गांधी के समर्थन में नारे लगाए। उन्‍होंने कहा कि कार्यक्रम से पहले स्‍थानीय नेताओं से बात नहीं की गई। साथ ही शहर नेता विश्‍वजीत कदम को इससे दूर रखा गया। लगातार नारेबाजी के बीच शहर कांग्रेस नेता रमेश बागवे ने माहौल को शांत करने की कोशिश की लेकिन कार्यकर्ता नहीं माने।

उन्‍होंने शहजाद पूनावाला को बोलने नहीं दिया।
इसके बाद शशि थरूर ने मोर्चा संभाला और कहा कि किसी नेता की अनदेखी नहीं की गई है। अगर कोई बात नहीं सुनना चाहता है तो वह यहां से जा सकता है। हालांकि शशि थरूर के भाषण के दौरान कार्यकर्ता शांत रहे।

लेकिन माइक जैसे ही तहसीन पूनावाला को दिया गया फिर से नारेबाजी शुरू हो गर्इ। बाद में कार्यकर्ताओं ने दोनों भाइयों के पोस्‍टर भी फाड़ दिए। स्‍थानीय नेताओं ने कहा कि इस तरह से नेतृत्‍व थोपा नहीं जा सकता।

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यूपी विधानसभा चुनाव : प्रशांत किशोर का मास्टर प्लान तैयार ! कामयाब हुए तो कांग्रेस की जीत पक्की ..

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Newbuzzindia: उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव में कांग्रेस की नैया पार करने का जिम्मा लेने वाले चुनावी रणनीतिकार प्रशांत किशोर (पीके) चाहते हैं, प्रदेश में कुर्मी और ब्राह्मण समाज के लोगों को पार्टी से जोड़ा जाए। पीके के जिम्मेदारी संभालने के बाद एक सुगबुगाहट भी तेजी से फैल रही है कि यूपी कांग्रेस में जल्द ही व्यपाक फेरबदल होने वाला है।

बीजेपी में ब्राह्मण अध्यक्ष को हटाए जाने के बाद ब्राह्मणों की नाराजगी को अपने पक्ष में भुनाने के लिए कांग्रेस उन्हें विकल्प देने जा रही है। यूपी कांग्रेस का नया चेहरा किसी ब्राह्मण को बनाए जाने की तैयारी है।

पीके की रणनीति है कि कुर्मी वोट बैंक के साथ अगर ब्राह्मण को भी पाले में कर लिया जाए तो कांग्रेस को यूपी में बड़ी सफलता हाथ लग सकती है। बीजेपी से नाराज ब्राह्मण प्रतिक्रियात्मक तौर पर कांग्रेस के साथ आ सकता है।

पीके अपने प्रबंधन के लिहाज से तीन ब्राह्मण नेताओं के नाम कांग्रेस हाईकमान को सुझाए हैं, लेकिन राहुल गांधी ने किसी नाम पर फिलहाल अपनी मुहर नहीं लगाई है।

पीके ने प्रदेश अध्यक्ष के लिए कमलापति त्रिपाठी के पौत्र राजेशपति त्रिपाठी, पूर्व केंद्रीय मंत्री जितिन प्रसाद और सांसद प्रमोद तिवारी के नाम अध्यक्ष पद के लिए सुझाए हैं। उनका मानना है कि विधानसभा चुनाव जीतने के लिए कांग्रेस को ब्राह्मणों में पैठ बनानी ही होगी।

प्रशांत का तर्क है कि ब्राह्मण समाज का बीजेपी से मोहभंग हो रहा है, लेकिन उसे बेहतर विकल्प नहीं मिलने के चलते वह सपा और बसपा की तरफ जाता रहा है। अगर कांग्रेस खुद को मजबूत विकल्प साबित करे तो ब्राह्मण समाज पार्टी से जुड़ सकता है।

विधानसभा के 2002 के चुनाव में 50 फीसदी ब्राह्मण मतदाता बीजेपी के साथ था, लेकिन 2007 में 44 और 2012 के विधानसभा चुनाव में 38 फीसदी मतदाता ही भगवा के साथ रह गया था। वर्ष 2017 में इसमें और कमी आने की प्रबल आशंका है। सन् 2012 के विधानसभा चुनाव में सपा-बसपा भी 19 फीसदी ब्राह्मण मतदाताओं के वोट पाने में सफल रहे।

पीके का मानना है कि अगर कांग्रेस मजबूत विकल्प साबित हुई तो मुस्लिम मतदाता भी सपा-बसपा से ज्यादा कांग्रेस से स्वाभाविक तौर पर जुड़ जाएगा। पर, पीके की दिक्कत यह है कि उनके हिस्से में अब तक जो दो जीतें आई हैं, वे प्रतिकूल परिस्थितियों में मिली हैं।

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