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Tag: Rajasthan
To battle outside, let’s end the one we’re seeing within: Gurjar reservation & Pulwama attacks
The nation has been drenched in mourning due to Pulwama attack. They are posting messages, planning candle walks, trying to collect funds for the family of the martyrs, etc. A fire has ignited in the hearts of us, the citizens of India, except few.
It’s the more than a week since Gurjar sat on the railway tracks.(source: https://www.amarujala.com/india-news/reservation-movement-in-rajasthan-continues-seventh-day-gujjar-leaders-to-take-decision-till-evening) Their demand is to get reservations. The state government kept it’s promise and gave them 5% reservation. Still they are immovable. The bill will take its own time to be approved the parliament as the total reservation is going to be more than 50% in Rajasthan. They demand it’s completion within 2 days.
We ‘Citizens of India’ can’t progress if we keep our individual insignificant matters ahead of the nation’s cause. Everyone conquered India just because of this factor. Gurjar are not new in this case. Keeping community before nation is their way of living.
We are already under the effects of terrorism. They are the enemies of the nation. What about the Gurjar who are not mourning and disrupting the lifeline of the nation? Who gave them the right to keep their community ahead of the nation’s cause? No matter how intense their situation is, it should not be greater than the Nation’s cause. They should stop their movement and let the government do its job.
We all know that united we stand and divide we fall. Right now, we have more important things to focus rather than deal with the reservation. Meanwhile, we appeal them to be sensitive and to keep the nation ahead of your community’s interest. Remember, reservations will exist only when we live.
राजस्थान विधानसभा उपचुनाव में कांग्रेस की बड़ी जीत, छुआ 100 का आंकड़ा
राजस्थान के रामगढ़ विधानसभा उपचुनाव में कांग्रेस की शाफिया जुबैर खां ने जोरदार प्रदर्शन करते हुए 12,228 वोटों से जीत हासिल कर ली है। इस जीत के साथ राजस्थान के विधानसभा में कांग्रेस के पास बहुमत के जादुई आंकड़े से महज एक सीट कम रह गई है। अभी तक कांग्रेस के पास 99 सीटें थीं जबकि सहयोगी आरएलडी के साथ एक सीट मिलाकर कांग्रेस ने यहां सरकार बनाई थी। इस जीत के बाद कांग्रेस के पास अब कांग्रेस के पास 100 सीटें हैं।
इस लिहाज से कांग्रेस के लिए रामगढ़ विधानसभा सीट शुरू से ही अहम मानी जा रही थी। यह जीत मुख्यमंत्री अशोक गहलोत के लिए भी खास है। वह अपनी पहली परीक्षा में पास हो गए हैं। अशोक गहलोत ने जीत पर कहा, ‘मैं खुश हूं कि लोगों ने सोच-विचारकर कदम उठाया है। उन्होंने सही फैसला किया है। मैं उन्हें धन्यवाद देता हूं और उनके प्रति आभार व्यक्त करता हूं। उन्होंने ऐसे समय में संदेश दिया है जब इसकी जरूरत थी। यह पार्टी को लोकसभा चुनाव के लिए प्रोत्साहित करेगा।’
इस सीट पर विधानसभा चुनाव के पहले बहुजन समाज पार्टी (बीएसपी) के उम्मीदवार प्रत्याशी लक्ष्मण सिंह के निधन के कारण चुनाव स्थगित कर दिए गए थे। रामगढ़ में कांग्रेस ने शाफिया जुबैर खां पर भरोसा जताया था, वहीं बीजेपी ने सुखवंत सिंह और बीएसपी ने जगत सिंह को मैदान में उतारा था। रामगढ़ में दूसरे नंबर पर बीजेपी रही। सुखवंत सिंह को 71,083 वोट मिले। लोकसभा चुनाव से पहले हुए इस आखिरी उपचुनाव को काफी अहम माना जा रहा था क्योंकि पिछले लोकसभा चुनाव में राजस्थान में बीजेपी को क्लीन स्वीप मिली थी।
10 बार कांग्रेस यहां से जीत चुकी है
कांग्रेस का मानना है कि इस मामले में बीजेपी और उसके स्थानीय नेता ज्ञानदेव आहूजा की काफी किरकरी हुई थी जो बीजेपी की हार की मुख्य वजह रही। जीत के बाद कांग्रेस की प्रत्याशी शाफिया खां ने मीडिया से कहा कि ध्रुवीकरण की राजनीति के चलते ही बीजेपी को यहां हार मिली है। उन्होंने कहा कि रकबर खान की हत्या के मामले में रामगढ़ को काफी बदनाम किया गया था। उन्होंने कहा, ‘लोगों को पता है कि हम काम करने में यकीन करते हैं।’
बीएसपी ने लगाई वोटों में सेंध
रामगढ़ में इस बार कांग्रेस, बीजेपी के साथ बीएसपी के प्रत्याशी के बीच भी मुकाबला था। बीएसपी के वजह से कांग्रेस को कुछ वोटों का नुकसान भी उठाना पड़ा। कांग्रेस का मानना है कि उनका वोटबैंक दलित भी है इस वजह से बीएसपी ने उनके वोटों पर सेंध लगाने का काम किया है वरना जीत का आंकड़ा और अधिक होता।
कांग्रेस का हौसला बुलंद
रामगढ़ में पलड़ा कांग्रेस का ही भारी रहा है। यहां अब तक 14 विधानसभा चुनावों में 10 बार कांग्रेस और 4 बार बीजेपी जीती है। बीजेपी के ज्ञानदेव आहूजा यहां से तीन बार विधायक रह चुके हैं। वहीं शाफिया के पति जुबैर खां भी इस सीट से 3 बार विधायक रह चुके हैं। रामगढ़ की इस जीत से अब आने वाले लोकसभा चुनाव के लिए कांग्रेस का हौसला और मजबूत हो गया है। अब कांग्रेस की निगाहें राज्य की 25 लोकसभा सीटों पर है।
Congress Minister Mamta Bhupesh puts caste before society in her latest speech
It seems like the ‘image rectification’ campaign of Congress is getting out of control and thus, becoming terrible. In the recent event, Rajasthan minister’s, Mamta Bhupesh’s, speech is creating tremors. In her speech, she puts ‘caste before the society’ for development.
Ms Bhupesh, who is the women and child development minister in the Rajasthan cabinet, made the remark while addressing a public event in Alwar district’s Reni town yesterday.
“My first duty will be to work towards development of people of my caste and then towards the larger society. I intend to work for everyone,” Ms Bhupesh said on Monday.
You can find the link of her video here:
Yogi Adityanath alters the origin of Lord Hanuman to Dalit
It’s quite unpredictable when a BJP leader would alter the historical and mythological facts to its advantage. This time, it’s Yogi Adityanath.
While addressing a rally in Alwar’s Malpura assembly seat, he changed the origin of Hanuman to his advantage. Shifting the politics to religion, the UP CM also said that “all of us must have a resolution like Lord Hanuman”. The manipulation of mythology was done to please the voters as the village comes under SC/ST area.
Candidate Ram Kishan is contesting elections from the constituency on behalf of the BJP. While requesting voters to vote for the party so they can bring about change, UP CM Adityanath said that we must have a ‘Bajrangi’ (one like Lord Hanuman) resolution in making the BJP candidate win in the area.
Praising Hanuman, Adityanath said that Hanuman himself is a resident of the forest, who is also a Dalit and is excluded from the society, as per the Indian folklore. He further said that the whole Indian community from “north to south and east to west”, is united, “thanks to Lord Hanuman”.
This is not the first time that Adityanath has tried to use Hanuman to seek votes. Earlier this month too, he had claimed that he was a Dalit tribal as he sought to forge a direct connection with voters in tribal dominated state of Chhattisgarh.
“Hunuman sabse bade adivasi hain, vanvasi hain…,” Yogi had said in the state, adding, “When Lord Ram was on vanvaas, he helped the local tribals from the terror of demons. Just like Ram did in Treta Yug, the BJP is also aiming to bring Ram Rajya in the state.”
Linking religion with politics is a tested warfare of BJP. In a previous rally, he said that fight between BJP’s “Bajrangbali” (Lord Hanuman) and Congress’ “Ali” in Madhya Pradesh. The aim was to polarise voters from extreme sides. He is flamboyantly displaying and manipulating his Hindutva side to gain electoral advantage for BJP. This incident is not uncommon.
ओवररेटेड चुनाव आयोग का औसत काम, सांप्रदायिक बहसों पर क्यों नहीं लगाता लगाम: रविश कुमार
छत्तीसगढ़ के दूसरे चरण के मतदान में 562 मशीनों के ख़राब होने की ख़बर छपी है। जिन्हें 15-20 मिनट में बदल देने का दावा किया गया है। चुनाव से पहले मशीनों की बक़ायदा चेकिंग होती है फिर भी इस तादाद में होने वाली गड़बड़ियाँ आयोग के पेशेवर होने को संदिग्ध करती है। क्या लोगों की कमी हैं या फिर कोई अन्य बात है। जबकि छत्तीसगढ़ में गुजरात में इस्तमाल की गई अत्याधुनिक थर्ड जनरेशन का M-3 श्रेणी की मशीनें लाई गईं। एक वीडियो चल रहा है जिसमें छत्तीसगढ़ के मंत्री बूथ के भीतर जाकर अगरबत्ती दिखा रहे हैं और नारियल फोड़ रहे हैं। मतदाता सूची से लेकर ईवीएम मशीनों के मामले में चुनाव आयोग का काम बेहद औसत है।
मतदान प्रतिशत के जश्न की आड़ में चुनाव आयोग के औसत कार्यों की लोक-समीक्षा नहीं हो पाती है। तरह तरह की तरकीबें निकाल कर प्रधानमंत्री आचार संहिता के साथ धूप-छांव का खेल खेल रहे हैं और आयोग अपना मुँह बायें फेर ले रहा है। आयोग के भीतर बैठे डरपोक अधिकारियों को यह समझना चाहिए कि वे प्रधानमंत्री की रैली की सुविधा देख कर प्रेस कांफ्रेंस कराने के लिए नहीं बैठे हैं।
टीवी की बहसों के ज़रिए सांप्रदायिक बातों को प्लेटफ़ार्म दिये जाने पर भी आयोग सुविधाजनक चुप्पी साध लेता है। क्या आयोग का काम रैलियों पर निगरानी रखना रह गया है? खुलेआम राजनीतिक प्रवक्ता सांप्रदायिक टोन में बात कर रहे हैं। एलान कर रहे हैं। टीवी की बहसें सांप्रदायिक हो गई हैं।यह सब चुनावी राज्यों में बकायदा सेट लगाकर हो रहा है। आयोग यह सब होने दे रहा है। यह बेहद शर्मनाक है। आयोग को अपनी ज़िम्मेदारियों का विस्तार करना चाहिए वरना आयुक्तों को बैठक कर इस संस्था को ही बंद कर दे।
यह एक नई चुनौती है। आख़िर आयोग ने खुद को इस चुनौती के लिए क्यों नहीं तैयार किया? क्या इसलिए कि हुज़ूर के आगे बोलती बंद हो जाती है। क्या आयोग ने न्यूज़ चैनलों के नियामक संस्थाओं से बात की, उन्हें नोटिस दिया कि चुनावी राज्यों में या उसके बाहर भी चुनाव के दौरान, टीवी की बहसों में सांप्रदायिक बातें नहीं होंगी। क्या मौजूदा आयोग को अपनी संस्था की विरासत की भी चिन्ता नहीं है? कैसे खुल कर चैनलों पर राजनीतिक दलों के प्रवक्ताओं को खुलकर हिन्दू मुस्लिम बातें करने की छूट दी जा रही है।
यह संस्था ओवररेटेड हो गई है। इसकी जवाबदेही को नए सिरे से व्याख्यायित करने की ज़रूरत है। यही कारण है कि अब लोग चुनाव आयोग के आयुक्त का नाम भी याद नहीं रखते हैं। आयुक्तों को सोचना चाहिए कि वहां बैठकर विरासत को बड़ा कर रहे हैं या छोटा कर रहे हैं। चुनाव का तमाशा बना रखा है। चुनाव का तमाशा तो बनता ही रहा है, आयोग अपना तमाशा क्यों बना रहा है।
नोट: इस लेख में व्यक्त विचार लेखक के निजी विचार है, newbuzzindia.com का इन विचारों से सहमत होना अनिवार्य नही है।
सट्टा बाजार: मध्यप्रदेश और राजस्थान में जीत रही कांग्रेस, छत्तीसगढ़ में कड़ा मुकाबला
मध्यप्रदेश विधानसभा चुनाव का माहौल अब और रोचक हो चुका है। न्यूज़ चैनल और अखबारों के सर्वे के बाद अब सट्टा बाजार में भी सत्ता बदलती नजर आ रही है। मीडिया में चल रही खबरों के अनुसार मध्यप्रदेश विधानसभा चुनाव के सट्टा बाजार में जहां पहले बीजेपी हावी थी तो वहीं अब कांग्रेस हावी दिख रही है।
मध्यप्रदेश में 2 हफ्ते के पहले जो सटोरी बीजेपी पे पैसा लगा रहे थे वही सटोरी अब कांग्रेस पर दांव लगा रहे है।
हिंदी अखबार टाइम्स ऑफ इंडिया के मुताबिक पिछले एक महीने से सट्टा बाजार में बीजेपी के ऊपर पैसा लगाया जा रहा था लेकिन अब यह पैसा कांग्रेस पर लग रहा है। एक महीने पहले अगर आप बीजेपी पर पैसा लगते तो आपको 10 हजार के 11 हजार रुपये मिलते। वहीं कांग्रेस पर 4400 रुपये लगाने पर आपको 10 हजार रुपये मिलते। मतलब सट्टा बाजार में बीजेपी के जीतने की उम्मीदें ज्यादा थी।
कांग्रेस को मिल रही 116 से ज्यादा सीटें
सट्टा बाजार की माने तो प्रदेश में कांग्रेस पूर्ण बहुमत के साथ सरकार बना रही है। कांग्रेस को 230 विधानसभा सीटों में से 116 से ज्यादा सीटें मिल रही है। वहीं बीजेपी को 102 के आस पास सीटें मिलती दिख रही है।
राजस्थान में कांग्रेस तो छत्तीसगढ़ में सेफ खेल रहा सट्टा बाजार
मध्यप्रदेश के एलावा राजस्थान विधानसभा चुनाव की बात करें तो सट्टा बाजार राजस्थान में भी कांग्रेस की सरकार बनवा रहा है। वहीं छत्तीसगढ़ में सट्टा बाजार सेफ खेल रहा है, मतलब दोनों ही पार्टियों में कड़ी टक्कर देखने को मिल रही है।
नोट: चुनावों में सट्टा लगाना देश मे गैरकानूनी है। पुलिस इसके लिए कई गंभीर कदम भी उठा रही है लेकिन इसके बाद भी चुनावों में लोग सट्टा बाजार में काफी सक्रिय रहते है।
Congress releases first list of candidates for Rajasthan Assembly Polls
Ending the friction between the party big-wigs, Ashok Gehlot and Sachin Pilot, Congress releases its list of 152 candidates for Rajasthan Polls. There was a news of rift between these stalwarts. The list denied all these speculations and fielded both of them. The poll will take place on December 7.
Ending the suspense over its candidates, the party fielded veteran leaders Ashok Gehlot from Sardarpura, while Sachin Pilot has been given a ticket from Tonk. Another stalwart, CP Joshi, has been fielded from Nathdwara.
In an attempt to placate competing factions in its Rajasthan unit, the Congress had decided to field both chief ministerial aspirants Gehlot and Pilot in the assembly elections. The rift between the state leaders was due to ambition of becoming the chief minister. The Congress high command had to intervene after a section in the party pressed that the Madhya Pradesh formula of not fielding top leadership be emulated in Rajasthan.
Gehlot tried to play down the rift within and said the party high command decides on who will lead the Congress. Thus, indicated that the hierarchy and the order from the high command would be followed. “We have said many times that whatever Rahul Gandhi decides on CM, we will abide by that. It’s a tradition for Congress in Rajasthan to not declare CM before elections,” he said.
The party also rewarded deserters such as Harish Meena and Habibur Rahman, who had switched over from the BJP. The turncoats are rewarded with seats to contest in the Assembly Polls. Habibur Rahman, MLA from Nagaur, joined the Congress on Wednesday. He quit BJP as they denied him a ticket. The same day, Dausa MP Harish Chandra Meena joined Congress. While Meena has been fielded from Deoli Unaira, Rahman has been given a ticket from Nagaur. Kanhaiyalal Jhanwar, who joined the Congress on Thursday night, was also given a ticket from Bikaner East.
The strife for power on 200 seats will take start from 7th December.
राजस्थान में एक और मंत्री ने छोड़ी भाजपा, पार्टी का झंडा जलाकर बोले बीजेपी मुर्दाबाद।
राजस्थान विधानसभा चुनाव को लेकर भाजपा ने आज अपनी पहली लिस्ट जारी कर दी है। लिस्ट में 131 विधानसभा सीटों पर भाजपा ने अपने प्रत्याशी घोषित किये है, जिसमे 23 मौजूद विधायकों के टिकट काटे गए है। टिकट कटने के बाद भाजपा के कई विधायक बगावत पर उतर गए है।
राजस्थान के वरिष्ठ बीजेपी नेता और वसुंधरा सरकार में कैबिनेट मंत्री सुरेंद्र गोयल ने मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। सुरेंद्र गोयल ने टिकट कटने के बाद राजस्थान में भाजपा को हराने की कसम खाते हुए भाजपा का झंडा जलाया और भाजपा मुर्दाबाद के नारे भी लगाए।
टिकट काटने पर गुस्साए सुरेंद्र गोयल ने कहा कि ‘मैंने बीजेपी के जिस वृक्ष को खड़ा किया है उसे उखाड़ कर फेंक दूंगा। जैतारण विधानसभा सीट पर मैंने भाजपा का कमाल खिलाया था पर अब में उस कमल को उखाड़ फेंकूँगा।”
जैतारण सीट से लगातार चार बार विधानसभा चुनाव जीत चुके सुरेंद्र गोयल को टिकट न मिलने से वहां के बीजेपी कार्यकार्य खासे नाराज है। सुरेंद्र ने कहा कि मैंने आज तक किसी भी भाजपा नेता की चापलूसी नही की इसलिए भाजपा नेतृत्व को लगता है कि मै संघ विरोधी हूं जिसके चलते मेरा टिकट काटा गया है।
सोशल वाणी: चुनाव प्रचार के लिए भाजपा ने गौमाता पर पोता भाजपा का झंडा।
मध्यप्रदेश में विधानसभा चुनाव का प्रचार शुरू हो गया है। ऐसे में चुनाव प्रचार में गौमाता भी उतर गयी है। दरअसल सोशल मीडिया पर भाजपा का प्रचार करते हुए गौमाता की यह तस्वीर जमकर वायरल हो रही है। तस्वीर में गौमाता पर किसी ने भाजपा का ध्वज बना दिया है। पता नही यह अचार संहिता का उल्लंघन है या नही पर लोगों ने इस तस्वीर को देख भाजपा को जमकर लताड़ लगाई।
ट्विटर यूज़र अंकित ने कमेंट में लिखा, “जिसने भी हमारी गौ-माता को पेंट से पोता है, जिसने भी इनपे ऐसा अत्याचार किया है उनको म.प्र की जनता लात मारके पाकिस्तान भेज देगी। भाजपा का गौमाता पे ऐसा अत्याचार नही सहेगा हिंदुस्तान।”वहीं सुमित ने कमेंट किया, “शरम आनी चाहिए, अपनी मां को ऐसे रंग कर शान जता रहे हैं। धिक्कार है।” वहीं एक ट्विटर यूज़र ने लिखा “क्यों गाया को नेता बना रहे हो उसे भगवान ही बने रहने दो।”
गाय माता को आप राजनैतिक वस्तु बना ही चुके हो , लेकिन यह सब करने की क्या ज़रूरत है ?
— Pankhuri Pathak (@pankhuripathak) November 10, 2018
इतनी बौखलाहट ?
[मध्य प्रदेश चुनाव की तस्वीर] pic.twitter.com/9rPEftuaJn
हर घर भाजपा ध्वज ?
रविवार को ट्विटर पर बीजेपी की राजस्थान इकाई ने #हर_घर_भाजपा_ध्वज ट्रेंड किया। मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे ने अपने ट्विटर अकाउंट पर लिखा “विकास का उजाला समाज के अंतिम छोर पर खड़े व्यक्ति तक सुनिश्चित तरीके से पहुंचाते हुए बीजेपी सरकार ने प्रदेश में विकास के नए कीर्तिमान स्थापित किये हैं। वहीं पूरे जोश और उत्साह के साथ राजस्थान की जनता ने एक बार फिर कमल खिलाने का मन बना लिया है।
#हर_घर_भाजपा_ध्वज”वसुंधरा राजे के एलावा भाजपा के और भी कई नेताओं ने ‘हर घर भाजपा ध्वज’ की बात करते हुए भाजपा सरकार की जमकर तारीफ की। वहीं कई लोगों ने इस हैशटैग पर बीजेपी को ट्रोल भी किया।संघमित्रा ने इस हैशटैग पर लिखा, “देखो यह बीजेपी और संघ वाले ‘हर घर भाजपा ध्वज की बात कर रहे है, यह कभी ‘हर घर तिरंगा ध्वज’ की बात नही करेंगे। बीजेपी और आरएसएस ने हमेशा अपने ध्वज को तिरंगे से ऊपर रखा है।”
फर्जी वोटर लिस्ट: सुप्रीम कोर्ट ने नहीं मानी वोटर लिस्ट में गड़बडी
वोटर लिस्ट में फर्जी वोटर होने का आरोप लगा रही कांग्रेस पार्टी को सुप्रीम कोर्ट से बड़ा झटाक लगा है। सुप्रीम कोर्ट ने कमलनाथ की याचिका खारिज कर दी है। कमलनाथ के अलावा राजस्थान प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष सचिन पायलट ने भी एक याचिका दायर की थी।
सुप्रीम कोर्ट जाने से पहले ही चुनाव आयोग ने कांग्रेस की शिकायत पर ही वोटर लिस्ट का पुनरीक्षण किया था। इस पुनरीक्षण में चौबीस लाख से अधिक ऐसे वोटरों के नाम हटाए गए थे जिनकी मृत्यु हो गई थी अथवा अन्य क्षेत्र में जाकर रहने लगे थे।
चुनाव आयोग का तर्क था कि नए स्थान पर वोटर लिस्ट में अपना नाम तो जुड़वा लेते हैं लेकिन, पुराने स्थान की लिस्ट से नाम नहीं कटवाते हैं। कांग्रेस ऐसे ही वोटरों का फर्जी बता रही थी। जबकि चुनाव आयोग लिस्ट में दोहराव मान रही थी। सुप्रीम कोर्ट में याचिका खरिज हो जाने के बाद अब कांग्रेस के लिए वोटर लिस्ट में संशोधन के सारे रास्ते बंद हो गए हैं।





