वोटर लिस्ट में फर्जी वोटर होने का आरोप लगा रही कांग्रेस पार्टी को सुप्रीम कोर्ट से बड़ा झटाक लगा है। सुप्रीम कोर्ट ने कमलनाथ की याचिका खारिज कर दी है। कमलनाथ के अलावा राजस्थान प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष सचिन पायलट ने भी एक याचिका दायर की थी।
सुप्रीम कोर्ट जाने से पहले ही चुनाव आयोग ने कांग्रेस की शिकायत पर ही वोटर लिस्ट का पुनरीक्षण किया था। इस पुनरीक्षण में चौबीस लाख से अधिक ऐसे वोटरों के नाम हटाए गए थे जिनकी मृत्यु हो गई थी अथवा अन्य क्षेत्र में जाकर रहने लगे थे।
चुनाव आयोग का तर्क था कि नए स्थान पर वोटर लिस्ट में अपना नाम तो जुड़वा लेते हैं लेकिन, पुराने स्थान की लिस्ट से नाम नहीं कटवाते हैं। कांग्रेस ऐसे ही वोटरों का फर्जी बता रही थी। जबकि चुनाव आयोग लिस्ट में दोहराव मान रही थी। सुप्रीम कोर्ट में याचिका खरिज हो जाने के बाद अब कांग्रेस के लिए वोटर लिस्ट में संशोधन के सारे रास्ते बंद हो गए हैं।
इस वर्ष की शारदीय नवरात्रि पर मां अंबे का आगमन नाव पर हो रहा है। नाव पर सवार मां अंबे मध्यप्रदेश सहित चार राज्यों में क्या कांग्रेस का सत्ता से वनवास समाप्त कर देगीं या फिर हाथी की उपेक्षा महंगी पड़ जाएगी। मां जगदंबा की वापसी भी इस बार हाथी पर बैठ कर हो रही है। मां अंबे का नाव पर आगमन पूरे देश के लिए अच्छे दिन आने का संकेत देने वाला है। क्या ये अच्छे दिन कांग्रेस की हिन्दी भाषी तीन राज्य मध्यप्रदेश,छत्तीसगढ़ और राजस्थान में सरकार में वापसी से आएंगे? कांग्रेस को इस सवाल का जवाब अपनी भक्ति के जरिए वोटर को खुश करके मिल सकता है। कांग्रेस को इन तीन राज्यों में अपने हाथ के कमाल पर ही भरोसा है। कांग्रेस ने अपनी नाव किनारे लगाने के लिए न तो साइकल की सवारी की है और न ही हाथी पर बैठने की हिम्मत दिखाई है।
मायावती और अखिलेश यादव को कांग्रेस ने किया है निराश
वैसे तो पिछले पांच विधानसभा चुनाव के लिए वोट डाले जाने का काम शारदीय नवरात्रि के बाद ही होता है। चुनाव लड़ने वाले उम्मीदवार इस मौके का उपयोग अपने चुनाव प्रचार के लिए करते हैं। इस वार की नवरात्रि पर जगदंबा नाव पर सवार होकर आ रहीं हैं। इस कारण राजनीतिक दलों के लिए यह नवरात्रि ज्यादा खास हैं। चुनाव वाले तीनों हिन्दी भाषी राज्यों में कांग्रेस और भाजपा के बीच सीधा मुकाबला होना तय माना जा रहा है। छत्तीसगढ़ में अजीत जोगी और मायावती मिलकर मुकाबला त्रिकोणीय बनाने का पूरा प्रयत्न कर रहे हैं। मायावती को अजीत जोगी का साथ कांग्रेस द्वारा हाथ आगे न बढ़ाए जाने के कारण लेना पड़ा है।
मायावती इस उम्मीद में थीं कि राष्ट्रीय स्तर पर कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी जो महागठबंधन तैयार करना चाहते हैं,वह तीन राज्यों के विधानसभा चुनाव में बसपा को साथ लिए बगैर नहीं बन सकता। मायावती इंतजार करतीं रहीं,कांग्रेस ने उनके प्रस्ताव को स्वीकार ही नहीं किया। प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष कमलनाथ कहते हैं कि मायावती वो सीटें चाहतीं थीं, जिन पर उन्हें हजार-दो हजार वोट ही पिछले चुनाव में मिले थे। दरअसल मायावती कांग्रेस के वोट के जरिए अपनी नाव पार लगाना चाहतीं थीं। कांग्रेस को लग रहा था कि इस गठबंधन से सत्ता मिल भी गई तो उसका रिमोट मायावती के हाथ में चला जाएगा।
अखिलेश यादव की उम्मीद भरी निगाहों को कांग्रेस ने अनदेखा कर दिया। अखिलेश यादव से कांग्रेस ने समझौते के संकेत तो दिए लेकिन, सहमति का जवाब नहीं भेजा। नतीजा समाजवादी पार्टी को अपनी नाव को बचाने के लिए अकेले ही चुनाव का चप्पू चलाना पड़ रहा है।
कांग्रेस को उम्मीद कि आरक्षित वर्ग और मुस्लिम के साथ लगेगी नाव पार
बसपा प्रमुख मायावती के हाथी को नाराज करने के बाद यह माना जा रहा है कि इससे कांग्रेस को नुकसान होगा। कांग्रेस एक बार फिर सत्ता में आने से चूक सकती है। इस तरह की अटकलों का आधार बसपा के प्रतिवद्ध वोट बैंक के कारण लगाया जा रहा है। राज्य में बसपा की ताकत निरंतर कम हो रही है। बसपा को पिछले चुनाव में सिर्फ चार सीटें ही मिलीं थीं। जबकि वह नौ सीटों पर दूसरे नंबर की पार्टी बनी थी। बसपा जिन सीटों पर नबंर दो पर रही थी ये श्योपुर,सुमावलीमुरैना,भिंड,महाराजपुर,पन्ना,रामपुर बघेलान,सेमरियादेबतालाव तथा रीवा विधानसभा सीट हैं।
पहले उत्तरप्रदेश के चुनाव फिर एट्रोसिटी एक्ट का सवर्णों द्वारा किए जा रहे विरोध के बाद कांग्रेस इस नतीजे पर पहुंची है कि अनुसूचित जाति वर्ग मायावती का साथ छोड़ रहा है। कांग्रेस का अनुमान है कि यह वर्ग भाजपा से नाराज है। इस कारण वह ऐसे दल को वोट देना चाहेगा जो सरकार बना सकता है। तीनों हिन्दी भाषी राज्यों में बसपा अकेले अपने दम पर सरकार बनाने की स्थिति में नहीं है।
राजस्थान में कांग्रेस को लग रहा है कि हर पांच साल में होने वाले सत्ता परिवर्तन में वोटर इस बार भाजपा को विपक्ष में बैठाएंगे। जबकि छत्तीसगढ़ में माया-जोगी के गठबंधन को अनुसूचित जाति-जनजाति वर्ग के वोटर अभी विश्वास करने की स्थिति में नहीं है। वहीं सपा की स्थिति तीनों ही राज्यों में सिर्फ सांकेतिक ही मानी जा रही है। कांग्रेस में यह डर भी देखने को मिल रहा है कि कहीं हाथी सत्ता आने के सपने को कुचल न दे?
कांग्रेस से चुनावी समझौते की बात न बन पाने के बाद अब समाजवादी पार्टी के प्रमुख अखिलेश यादव ने चुनाव लड़ने के इच्छुक नेताओं के लिए अपने दरवाजे खोल दिए हैं। सोमवार को खजुराहो में हुई बैठक के बाद अखिलेश यादव ने कहा कि जो भी मध्यप्रदेश के विधानसभा चुनाव मैदान में उतरने की इच्छा के साथ उनके पास आता है तो वे जरूर टिकट देंगे। अखिलेश यादव के इस बयान को कोंग्रेसियों के लिए एक संदेश माना जा रहा है। राज्य में पिछले चुनावों में भी कांग्रेस के कई बागी समाजवादी पार्टी अथवा बहुजन समाज पार्टी का टिकट लेकर चुनाव मैदान में उतरे थे। अखिलेश यादव की अपील के बाद यह उम्मीद भी जताई जा रही है कि बसपा प्रमुख मायावती भी इस तरह का एलान कर सकतीं हैं।
उल्लेखनीय है कि कांग्रेस लगातार यह दावा करती रही है कि मध्यप्रदेश में वह बसपा और सपा के अलावा समान विचारधारा वाले दलों से मिलकर चुनाव लड़ना चाहती है। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष कमलनाथ ने कई बार कहा कि उनकी बसपा और सपा से समझौते की बातचीत चल रही है। लेकिन, कांग्रेस और सपा के बीच कोई अधिकृत टेबल टॉक नहीं हुई। अखिलेश यादव की समाजवादी पार्टी का कोई बड़ा जनाधार राज्य में नहीं है। सपा ने अपना जनाधार बढ़ाने की गंभीर कोशिश भी कभी नहीं की। जबकि मध्यप्रदेश में तीसरे दल की जरूरत लगातार महसूस की जाती रही है। बहुजन समाज पार्टी में हमेशा ही विवाद के हालात रहे हैं। फूल सिंह बरैया के पार्टी छोड़ने के बाद बसपा की स्थिति कमजोर हुई है। बसपा ने भाजपा-कांग्रेस से नाराज नेताओं को टिकट देकर उनके निजी वोट बैंक का लाभ उठाया है।
मध्यप्रदेश की मतदाता सूची में कथित गड़बड़ी मामले में निर्वाचन आयोग ने कांग्रेस नेता कमलनाथ पर फर्जी सूची उच्चतम न्यायालय में पेश करने का गुरुुवार को आरोप लगाया। आयोग ने न्यायमूर्ति ए के सिकरी और न्यायमूर्ति अशोक भूषण की पीठ के समक्ष दावा किया कि आयोग की छवि खराब करने और मनमाफिक आदेश के लिए श्री कमलनाथ ने फर्जी मतदाता सूची सौंपे हैं। आयोग ने कहा कि कांग्रेस द्वारा उसकी वेबसाइट में मौजूद मतदाता सूची में हेर-फेर कर नयी सूची शीर्ष अदालत के समक्ष पेश किया गया है। जिसके लिए मध्य प्रदेश कांग्रेस पर फर्जी सबूत पेश करके न्यायालय को गुमराह करने का मुकदमा चलाया जाना चाहिए।
न्यायालय ने आयोग के इस दावे पर कड़ा ऐतराज जताते हुए आगाह किया कि वह (न्यायालय) उस कंपनी को तलब करेगा, जिसने मतदाताओं के आंकड़े सार्वजनिक किये और फर्जीवाड़े का खुलासा किया। खंडपीठ ने आयोग की ओर से पेश हो रहे वरिष्ठ अधिवक्ता विकास सिंह को मुख्य चुनाव आयुक्त ओ पी रावत से यह पता करने को कहा कि क्या उन्हें इस तरह का कोई दस्तावेज (फर्जी मतदाता सूची) सौंपा गया है, या इसे सीधे अदालत को दिया गया है।
श्री कमलनाथ की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल ने दलील दी कि संबंधित डाटा पब्लिक डोमेन में है और इसमें कुछ भी गलत नहीं है।याचिकाकर्ता ने इसे श्री रावत को भी सौंपा है। मामले की अगली सुनवाई आठ अक्टूबर को होगी।
चुनाव आयोग भ्रमित करने का काम कर रहा है:कमलनाथ
प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष कमलनाथ ने अपने ऊपर लगे आरोपों के खिलाफ पीसीसी में मीडिया से चर्चा करते हुए कहा कि चुनाव आयोग भ्रमित करने का काम कर रहा है। आज विश्व में चुनाव आयोग की साख। हम भी चुनाव आयोग को निष्पक्षता के लिये मदद कर रहे है। हमने जो शिकायत की थी वो 18 जनवरी की मतदाता सूची के आधार पर की थी। 31 जुलाई को उन्होंने जो सूची प्रकाशित की उसमें 24 लाख नाम हटायें गये। जब हमारी शिकायत ग़लत थी तो क्यों नाम हटायें ? हमने सीडी सार्वजनिक तौर पर उन्हें सौंपी। हमने चुनाव आयोग से माँग की थी कि हमें मतदाता सूची text प्रारूप में दी जाये लेकिन हमें image प्रारूप में दी गयी। जबकि राजस्थान को text प्रारूप में दी गयी। text प्रारूप में देने से हमें डूप्लिकेट वोटर्स पकड़ने में आसानी होती। हमने शिकायत भी डूप्लिकेट वोटर्स को लेकर ही की थी। हमारी माँग के बावजूद हमें यह सूची नहीं दी गयी। चुनाव आयोग यह बताये क्यों नहीं दी गयी ? हमने 3 जून को मिलकर सारे प्रमाण सौंपे ।
डीज़ल – पेट्रोल पर कटौती चुनावी कटौती
कमलनाथ ने कहा कि डीज़ल – पेट्रोल पर इतनी दरवृद्धि के बावजूद मामूली कटौती की। क्यों वेट कम नहीं कर रही सरकार ? मतदान समाप्ति पश्चात यह दर फिर 100 तक पहुँच जायेगी। चुनाव तक इस तरह की घोषणाएँ जारी रहेगी।
मतदाता सूची के दस्तावेजों को लेकर घिरे कमलनाथ, सुप्रीम कोर्ट ने दिए जांच के आदेश
फर्जी मतदाता सूची के आरोप को लेकर सुप्रीम कोर्ट पहुंचे कांग्रेस प्रदेशाध्यक्ष कमलनाथ अब इसी मामले को लेकर घिरते नजर आ रहे हैं। दरअसल, इस प्रकरण में नाथ के दस्तावेजों पर चुनाव आयोग ने आपत्ति जताते हुए इन्हें फर्जी करार दिया है। इस पर कोर्ट ने आयोग को उसे सौंपे गए दस्तावेजों की जांच कर रिपोर्ट सोमवार तक तलब की है।
क्या था मामला?
कांग्रेस प्रदेशाध्यक्ष श्री कमलनाथ ने बीते माह सुप्रीम कोर्ट में एक याचिका दायर कर मप्र की मतदाता सूची में गड़बड़ी का आरोप लगाया था। इसी तारतम्य में उन्होंने कुछ दस्तावेज भी याचिका के साथ पेश किए थे। बताया जाता है,कि चुनाव आयोग ने अपने जवाब में इन दस्तावेजों को असत्य करार देते हुए याचिकाकर्ता पर फर्जी दस्तावेजों के सहारे अपने हक में आदेश लेने की कोशिश करने का आरोप लगाया। गुरुवार को कमलनाथ की याचिका का विरोध करते हुए चुनाव आयोग के वकील विकास सिंह ने कहा कि मतदाता सूची अपडेट करना आयोग का वैधानिक कर्तव्य है।
हालांकि, कमलनाथ की ओर से अधिवक्ता कपिल सिब्बल व विवेक तन्खा ने आरोपों का जोरदार विरोध करते हुए कहा,कि जो दस्तावेज उन्होंने चुनाव आयोग को ज्ञापन के साथ सौंपे, वे सार्वजनिक हैं। विवाद उठने पर सुप्रीम कोर्ट ने चुनाव आयोग से कमलनाथ के दावे की जांच करने को कहा है। कोर्ट ने आयोग से कहा है कि वह जांच करके सोमवार तक बताए कि क्या यही दस्तावेज कमलनाथ की ओर से उसको भी दिए गए थे। यह आदेश न्यायमूर्ति एके सीकरी की अध्यक्षता वाली पीठ ने कमलनाथ की याचिका पर सुनवाई के दौरान दिया।
कांग्रेस के मित्रों को हमारी हर एक संवैधानिक संस्थाओं से हमेशा शिकायत रहती है कि वह स्वतंत्र रूप से काम करती हैं और उनके हिसाब से नहीं चलतीं! शायद पिछले 70 साल के हैंगओवर में वो यह भूल गए हैं कि भारत लोकतांत्रिक देश है।
मंदसौर में राहुल गांधी की रैली में शामिल होने के लिए बड़ी संख्या में किसान पहुंचे हैं। किसानों में शिवराज सरकार को लेकर काफी गुस्सा देखा जा रहा है। राहुल गांधी की रैली को लेकर राज्य सरकार और केंद्र सरकार सतर्क हो गयी है। किसान आंदोलन पर काबू करने के लिए सरकार ने भारी पुलिस बल तैनात कर दिया है।
सरकार को उखाड़ फेंकने तक शांत नही होंगे किसान।
मध्यप्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष कमलनाथ ने शिवराज सरकार पर हमला बोलते हुए कहा है कि ‘शिवराज सरकार को उखाड़ फेंकने तक किसानों का गुस्सा शांत नहीं होगा। पूरी शिवराज सरकार मंदसौर के पीपल्यामंडी में कांग्रेस द्वारा आयोजित ‘किसान समृद्धि संकल्प सभा’ को रोकने में आखरी समय तक लगी रही, उसके बावजूद लाखों किसान नाकेबंदी को ध्वस्त कर सभास्थल पहुंच गए हैं।किसानों का यह आक्रोश इस सरकार को उखाड़ फेकने तक शांत नहीं होग।”
मृतक किसानों के परिजन से मिले राहुल गांधी
मंदसौर में सभास्थल पर पहुंचने के बाद कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने गोलीकांड में मारे गए किसानों को श्रद्धांजलि दी। मंदसौर में पिछले साल कई मांगों को लेकर प्रदर्शन कर रहे किसानों पर पुलिस ने फायरिंग कर दी थी, जिसमें कन्हैया लाल पाटीदार, सत्यनारायण ठांगर, अभिषेक पाटीदार, बबलू, घनश्याम धाकड़ और चिंतामन पाटिदार की मौत हो गई थी। मंदसौर गोलीकांड की आज पहली बरसी है।
कांग्रेस के राष्ट्रीय महासचिव कमलनाथ ने कहा है कि मंदसौर गोलीकांड मे मृत किसानों की लाशों पर मुख्यमंत्री शिवराजसिंह चौहान बोली लगा रहे है। यह बहुत ही शर्म की बात है।
मुख्यमंत्री ने पहले पांच लाख रू देने की घोषणा की फिर दस लाख रू और फिर एक करोड रू देने की बात करने लगे। उन्होने कहा इस गोलीकांड के लिए मुख्यमंत्री खुद जिम्मेदार हैं और उन्हे तत्काल इस्तीफा देना चाहिए।
उन्होने कहा ऱाहुल गांधी को मंदसौर और नीमच जाने की अभी अनुमति नहीं मिली है। हम सभी वहा जाएंगे। किसानों के दुःख दर्द मे शामिल होंगे। पुलिसकर्मियों ने ही गोली चलाई है,यह साबित हो चुका है।हम किसानों के साथ है। उनकी मांगों का सर्मथन करते है।
मप्र सरकार की नीति किसान विरोधी है, सबसे ज्यादा अपमान किसानों का मप्र ही हुआ है। सरकार गलत बयान देकर लोगों को गुमराह कर रहै है। नीमच जाने वाला था, लेकिन जिला प्रशासन ने अनुमति नही दी गई। जैसे ही अनुमति मिलेगी जल्द वहा के लिए रवाना हो जाऊँगा।देश का किसान किसी दल से नही जुड़ा है। असमाजिक तत्व पर यह आरोप लगा रहे है। यह लोग बीजेपी से जुड़े ही लोग है