कानूनी भेद भाव क्यों ? जिन गुनाहों में ‘आप’ नेताओं को सजा मिली, उन्ही आरोपो में भाजपा नेता बाहर क्यों

NewBuzzIndia:   दिल्ली की सत्ताधारी आम आदमी पार्टी के कुछ विधायक जेल में हैं, कुछ जमानत पर हैं और कुछ पर कभी भी जेल में जाने का खतरा बना हुआ है। ‘आप’ के कुछ विधायक जैसे कि महेंद्र यादव और अखिलेश त्रिपाठी को दंगा भड़काने और सरकारी कर्मचारियों को उनकी ड्यूटी निभाने से रोकने के आरोप में गिरफ्तार किया गया था। मध्य प्रदेश के मंडला से बीजेपी सांसद फग्गन सिंह कुलस्ते जिन्हें कि हालिया मंत्रिमंडल विस्तार में प्रधानमंत्री मोदी ने केंद्रीय राज्य मंत्री बना दिया, पर भी दंगा भड़काने, घातक हथियार रखने, जबरन रोकने और तमाम अन्य आरोप हैं। Association for Democratic Reforms  की रिपोर्ट से इस बात की जानकारी मिलती है। उनके बारे में ADR का विश्लेषण उनके ताजा शपथ ग्रहण के दौरान दिए गए हलफनामे पर आधारित है।

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वही फ़र्ज़ी डिग्री के विवाद में ‘आप’ के पूर्व विधायक जितेंद्र सिंह तोमर पर कानून का डंडा चला और उन्हें अपने पद से इस्तीफा दे कर कानूनी दाव पेंच का सामना करना पड़ा। वही भाजपा सरकार की पूर्व मानव संसाधन विकास मंत्री और वर्त्तमान में कपड़ा मंत्री स्मृति ज़ुबिन ईरानी भी अपने फ़र्ज़ी डिग्री के मामले में विरोधियों की पसंदीदा बनी रही। अब तक तो यह भी साफ़ नहीं हो पाया है कि उन्होंने 12वीं के बाद अपनी पढ़ाई की भी या नहीं, लेकिन ना सरकार को इनपर दिक्कत हुई ना ये मामला कोर्ट कचहरी के दरवाज़े तक पहुँच सका। डिग्री की कुछ ऐसी ही दुविधा प्रधानमंत्री मोदी के साथ भी है। जब ये विवाद गर्माया तो मज़बूरन प्रधानमंत्री की स्नातकोत्तर की एक डिग्री सार्वजनिक की गई पर इस बात का जवाब आज तक नहीं दिया जा सका कि 1960 के आस पास में कंप्यूटर और प्रिंटर से निकाली गई डिग्री उनके पास कैसे आई जबकि तब विश्वविद्यालयों में कंप्यूटर आया तक नहीं था।

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