कर्नाटक की रणनीति इस समय राष्ट्रीय पटल पर छाई हुई है। चुनाव परिणामों में किसी भी पार्टी को बहुमत न मिलने के कारण गेंद अब गवर्नर के पाले में आ गयी है। एक तरफ 104 सीटों के साथ भाजपा है तो दूसरी तरफ है 117 विधायकों के समर्थन के साथ कांग्रेस और जेडीएस गठबंधन। दोनो दल बारी बारी गवर्नर से मुलाकात कर चुके है। भाजपा जहां बहुतमत साबित करने के लिए 2 दिन का समय मांग रही थी तो वहीं कांग्रेस और जेडीएस ने 117 विधायकों के हस्ताक्षर वाला समर्थन पत्र गवर्नर को सौंप दिया है।
गवर्नर वाजुभाई पटेल से मिलने के बाद जेडीएस विधायक दल के नेता एचडी कुमारास्वामी ने कहा, “हमने कांग्रेस-जेडीएस के सभी विधायकों के साथ राज्यपाल से मुलाकात कर सरकार बनाने का दावा पेश किया है। हमने उन्हें 117 विधायकों के समर्थन का पत्र भी सौंपा है। राज्यपाल ने हमें आश्वासन दिया है कि वे कानूनी राय लेने के बाद इस मामले में अपना फैसला लेंगे।”
We have submitted the necessary documents which show that we have the numbers required to form the government. He (Governor of Karnataka) promised he will consider according to the Constitution: HD Kumaraswamy after meeting Karnataka Governor #Karnataka pic.twitter.com/jLzTl4JF0W
— ANI (@ANI) May 16, 2018
ऐसे में जनता के बीच एक सवाल उठ रहा है कि आखिर गवर्नर पहले किस पार्टी को सरकार बनाने का मौका देते है। जानकारों के अनुसार गवर्नर को बिना देर करे पहले कांग्रेस और जेडीएस गठबंधन को बहुमत साबित करने का मौका देना चाहिए।
कांग्रेस- जेडीएस गठबंधन के पास है पर्याप्त बहुमत है। गठबंधन के पास 117 विधायकों का समर्थन है। गठबंधन ने 117 विधायकों के हस्ताक्षर वाला समर्थन पत्र राज्यपाल को सौंप दिया है। कांग्रेस और जेडीएस ने सभी विधायकों को लेकर बैठक की और गवर्नर से मिलने की कोशिश भी की। हालांकि गवर्नर ने उन्हें इस बात की इजाजत नही दी।
अगर गवर्नर भाजपा को बहुमत साबित करने का मौका देते है तो उनके फैसले पर कई सवाल उठेंगे क्योंकि कर्नाटक से पहले कुछ ऐसी ही स्तिथि गोआ, मणिपुर और नागालैंड में बनी थी। जहां कांग्रेस सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी थी। इन राज्यों में भाजपा ने अन्य छेत्रिय दलों के साथ गठबंधन बनाया था। जिसके बाद पहले भाजपा को बहुमत साबित करने का मौका दिया गया।
अगर इन तीनों राज्यों में हुए निर्णय को सही माना जाए तो कर्नाटक में कांग्रेस और जेडी(एस) गठबंधन को सरकार बनाने का मौका पहले मिलना चाहिए।
