राम नगरी चित्रकूट में आज कमल मुरझाया हुआ दिख रहा है। यहाँ हुए विधानसभा उपचुनाव में कांग्रेस प्रत्याशी ने बीजेपी उम्मीदवार को 22000 वोटों के बड़े अंतर से हराया। चित्रकूट चुनाव में कांग्रेस की जीत इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि अगले साल के अंत तक मध्यप्रदेश और छत्तीसगढ़ में विधानसभा चुनाव होने है। ऐसे में चित्रकूट चुनाव को सेमी फाइनल के तौर पर देखा जा रहा है।
इन कारणों से जीती कांग्रेस
केंद्रऔर राज्य दोनो की सत्ता में बैठी भाजपा को चित्रकूट में हार का सामना क्यों करना पड़ा ? देखें राम की नगरी में भाजपा के हर के 5 प्रमुख कारण
गुटबाजी का शिकार हुई बीजेपी
शंकर दयाल त्रिपाठी के बीजेपी प्रत्याशी बनाए जाने के बाद से ही पार्टी गुजबाजी का शिकार हुई। बीजेपी के स्थानीय नेता भी एक साथ काम करने में नाकाम रहे। मध्यप्रदेश में जिस गुजबाजी ने कांग्रेस की लुटिया डुबोई थी उसी गुजबाजी का शिकार चित्रकूट में बीजेपी हुई।
कांग्रेस का गढ़ रहा है चित्रकूट
चित्रकूट हमेशा से ही कांग्रेस का गढ़ रहा है । इसके पहले चित्रकूट विधायक प्रेम सिंह भी कांग्रेस पार्टी से ही थे। चित्रकूट में हमेशा से ही कांग्रेस का वोटबैंक मजबूत रहा है।
असंतुष्ट नेता आए कांग्रेस के साथ
चित्रकूट में कांग्रेस सभी असंतुष्ट नेताओं को अपने साथ लाने में कामयाब रही। चित्रकूट चुनाव में कांग्रेस के वरिष्ठ नेताओं ने कांग्रेस सहित बाकी पार्टियों के असंतुष्ट नेताओं को भी अपने साथ शामिल किया। इन असंतुष्ट नेताओं में बीजेपी की पूर्व जिला पंचायत अध्यक्ष भी शामिल है।
परिवार का फायदा
कांग्रेस प्रत्याशी नीलांशु चतुर्वेदी को सबसे बड़ा फायदा उनके परिवार का मिला। मौजूदा समय में नीलांशु चतुर्वेदी की बहन कांग्रेस ने जिला पंचायत अध्यक्ष है। इसके सातग ही नीलांशु खुद भी जिला पंचायत अध्यक्ष रह चुके है।
छत्रिय वोट आए कांग्रेस के साथ
आम तौर पर चित्रकूट में चुनाव ब्राह्मण बनाम छत्रिय रहा है लेकिन इस बार बीजेपी कांग्रेस दोनो ने ब्राह्मण प्रत्याशी उतारे थे। जिसके कारण ब्राह्मण वोट दोनों पार्टियों में बट गए। जिसके बाद पूर्व विधायक प्रेम सिंह की मौत के कारण छत्रिय वोट सहानुभूति के कारण कांग्रेस के पाले में आ गए।
