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Jab after three months of recovery says government

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The health ministry has introduced new guidelines of vaccination for those who have recovered from corona virus on Wednesday. According to the recent advisory of the central government, infected person can take their jab 3 months after their recovery.

The ministry said that they had accepted the recommendations of the National Expert Group on Vaccine Administration for COVID-19 (NEGVAC). “These recommendations have been based on the evolving situation of the COVID-19 pandemic and emerging global scientific evidence and experience,” the union health ministry added.

It has also been told that the second dose of Covid vaccine should be delayed by three months for anyone contracting the disease after their first dose. As there was no fixed gap for taking a vaccine in such situations. Individual physicians recommended a gap of two or four weeks depending on the condition of the patient.

Since the National Technical Advisory Group on Immunisation (NTAGI) had recommended that those who tested positive for Covid-19 should defer vaccination for six months after recovery, last week.

Nevertheless, the Centre has announced the changes that a jab can be taken 3 months after recovering from Covid-19 as well as it is recommended for all lactating women.

मध्यप्रदेश में स्थगित हुआ वैक्सीनशन, ये हैं वजह

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मध्य प्रदेश में वैक्सीन की कमी के चलते सरकार ने 45 से ज्यादा उम्र वालों का टीकाकरण स्थगित कर दिया है। हालांकि पहला डोज ले चुके 45+ को ही टीके का दूसरा डोज लगाया जाएगा।

बता दे कि इंदौर प्रशासन ने आज और शनिवार को वैक्सीनेशन नहीं करने का फैसला लिया है। बता दे कि कोविशील्ड वैक्सीन की कमी को देखते हुए टीकाकरण नहीं होगा। सिर्फ कोवैक्सीन का दूसरा डोज ही लगेगा। वहीं शहर में 18+ को आज से 28 केंद्रों पर टिका लगेगा।

वहीं जिन लोगों ने कोविशील्ड वैक्सीन का पहला डोज लगवाया है उनको अब 42 दिन बाद ही वैक्सीन का दूसरा डोज लगाया जाएगा। दरअसल कोविशील्ड को लेकर यह फैसला ब्रिटेन की स्टडी के आधार पर लिया गया है। जानकरी के अनुसार वैक्सीन का दूसरा डोज 6 से 8 हफ्ते में लगाने पर उसकी प्रभावशीलता 90% तक हो जाती है जबकि कम समय अंतराल पर 60 से 70 फ़ीसदी ही रहता है। अभी वैक्सीन का दूसरा डोज 28 से 42 दिन के बीच लग रहा था।

अस्पताल में भर्ती होने के लिए अब कोरोना की रिपोर्ट की ज़रूरत नहीं

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कोरोना को लेकर अब सरकार ने नई गाइडलाइन बनाई गई है। अब मरीजों को अस्पताल में भर्ती करवाए जाने के लिए कोविड-19 की पॉजिटिव रिपोर्ट की जरूरत नहीं होगी।

बता दे कि केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने कोविड रोगियों को अस्पताल में भर्ती किए जाने की राष्ट्रीय नीति में बदलाव किया है। अब कोविड वायरस से संक्रमित किसी भी व्यक्ति को अस्पताल में भर्ती करने के लिए पॉजिटिव सर्टिफिकेट की जरूरत नहीं होगी। पहले अस्पतालों में भर्ती करवाने के लिए कोविड की पॉजिटिव रिपोर्ट या फिर सीटी-स्कैन की जरूरत होती थी।

दरअसल गंभीर मामले वाले मरीज को केस की गंभीरता के मुताबिक संदिग्ध वॉर्ड सीसीसी, डीसीएचसी और डीएचसी में भर्ती किया जाएगा। किसी भी मरीज को किसी भी वजह से सेवाएं देने से मना नहीं किया जाएगा। उसके साथ ऑक्सीजन या आवश्यक दवाएं जैसी दवाएं शामिल है।

इस नीति के मुताबिक किसी भी मरीज को उस शहर में जहां अस्पताल स्थित है वैध पहचान पत्र न उपलब्ध करा पाने में सक्षम न होने पर प्रवेश देने से मना नहीं किया जाएगा। अब अस्पताल में प्रवेश जरूरत के आधार पर दिया जाएगा।

कोरोना की तीसरी लहर आना तय, विजयराघवन ने कहीं ये बात

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केंद्र सरकार के प्रमुख वैज्ञानिक सलाहकार के विजयराघवन ने कोरोना की तीसरी लहर को लेकर बड़ी बात कही है। बता दे हर शाम होने वाली प्रेस कांफ्रेंस में स्वास्थ्य मंत्रालय के संयुक्त सचिव लव अग्रवाल के साथ मौजूद विजयराघवन ने कहा कि कोरोना की तीसरी लहर का आना तय है।

उन्होंने कहा कि जिस तरह से कोरोना संक्रमण बढ़ रहा है उसे देखते हुए ये कहा जा सकता है कि तीसरी लहर आएगी। लेकिन ये स्पष्ट नहीं कह सकते कि यह कितनी ख़तरनाक होगी और कब आएगी। साथ ही साथ उन्होंने चेतावनी देते हुए कहा कि हमें तीसरी लहर के लिए तैयार रहना चाहिए।

उन्होंने कहा कि वैक्सीनेशन कोरोना के इस नए वेरिएंट के ख़िलाफ़ भी असरदार है। कोरोना का नया वेरिएंट पूरी दुनिया में पैदा होगा और भारत में भी लेकिन जिस वेरिएंट के कारण संक्रमण बढ़ रहा है वो कम भी होगा।

उन्होंने ये भी कहा कि भारत और पूरी दुनिया के वैज्ञानिक इस प्रकार के वैरिएंट्स को पहले से ही पहचानने और उनके खिलाफ कारगर दावा बनाने में काम कर रहे है।

मध्यप्रदेश में 18 साल के ऊपर के लिए वैक्सीनशन की शुरुवात में देखी गयी अव्यवस्था

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मध्य प्रदेश में अव्यवस्थाओं के बीच बुधवार से 18 से 45 साल के उम्र के लोगों के लिए वैक्सीनेशन की शुरुआत हो गई है। वहीं स्वास्थ्य विभाग की लापरवाहियों की वजह से सेंटर में पहुंचे लोगों को परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।

दरअसल वैक्सीनेशन के लिए रजिस्ट्रेशन करा चुके 18 साल और उससे ऊपर वाले लोग बड़ी संख्या में वैक्सीनेशन सेंटर पहुंचे। बता दे आज सिर्फ 100 लोगों को टीका लगाया जाएगा। लापरवाही का आलम यहां तक था कि डेढ़ घंटे में सिर्फ एक ही व्यक्ति को वैक्सीन लग पाई।

उधर जेपी अस्पताल का वैक्सीनेशन सेंटर बंद होने के कारण 45 साल से ज्यादा उम्र वाले भी लोग भी 18 साल वाले के कैम्प में पहुंच गए।

आज स्मार्ट सिटी में होने वाले वैक्सिनेशन के लिए वैक्सीन की टीम दोपहर 3 बजे के बाद पहुंचने की संभावना है। वैक्सिनेशन से शेष रहे पत्रकार अपना वैसिनेशन करवाने के लिए निर्धारित समय पर जा कर लगवा सकते है।

टीकाकरण अभियान के लिए डॉक्टरों ने दिया ये सुझाव, कहा सिर्फ टीका लगवाना ज़रूरी है

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देश में युवाओं के लिए टीकाकरण अभियान शुरू होने जा रहा है। लेकिन युवाओं के मन में टीके को लेकर कई तरह के संशय है। कई डॉक्टरों ने बताया कि मौजूद स्थिति से उबरने के लिए टीकाकरण ही एकमात्र विकल्प है। कोविशील्ड, कोवैक्सीन और स्पूतनिक-वी तीनों ही टीके पूरी तरह सुरक्षित हैं।

बता दे कि मौजूदा हालात को देखे तो जो भी टीका उपलब्ध हो हमे वहीं लगवा लेना चाहिए, क्योंकि अब चुनने का समय नहीं है। जहां तक टीके के प्रभाव की बात है, वह कम और ज्यादा हो सकता है पर वह व्यक्ति क्षमता पर निर्भर करता है।

टीका लगवाने के बाद हल्के लक्षण जैसे बुखार, इंजेक्शन वाले स्थान पर दर्द और शरीर में दर्द जैसी समस्या हो सकती है और ये स्वाभाविक है। किसी को थोड़ी ज्यादा परेशानी हो सकती है और किसी को बिल्कुल परेशानी नहीं होगी। ऐसे में छोटे बच्चे को जब टीका लगाया जाता है तो उसे भी इस तरह की परेशानी होती है और ये घबराने वाली बात नहीं है।

सुप्रीम कोर्ट ने इस समय को कहा ‘राष्ट्रीय आपातकाल’ , केंद्र सरकार से मांगा है जवाब

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कोरोना संकट पर सुप्रीम कोर्ट सख्त, देश में इमरजेंसी जैसे हालात

देश में फैले कोरोना संक्रमण(Corona) पर सुप्रीम कोर्ट(Supreem Court) ने सख्त टिप्पणी की है SC ने कहा कि देश मे इमरजेंसी जैसे हालात हो गए हैं।

देश के बिगड़ते हालात पर सर्वोच्च न्यायालय ने स्व संज्ञान लेते हुए केंद्र सरकार को नोटिस भी जारी किया है। कोर्ट ने मोदी सरकार से पूछा है कि ऑक्सीजन सप्लाई को लेकर केंद्र के पास क्या प्लान है।

सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र को ऐसे समय में नोटिस जारी किया है जब दिल्ली हाईकोर्ट,मध्यप्रदेश हाईकोर्ट ने बेड़ों की कमी,ऑक्सीजन की कमी को लेकर राज्य और केंद्र सरकारों को बुरी तरह लताड़ लगा चुके हैं।

भारत के मुख्य न्यायाधीश(CJI) एस ए बोबड़े की अध्यक्षता वाली सुप्रीम कोर्ट की तीन न्यायधीशों की पीठ ने सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता को कोविड-19 पर राष्ट्रीय स्तर की योजना बनाकर पेश करने के लिए कहा है।

कोर्ट ने केंद्र के वकील को दिए दिशानिर्देशों में कहा है कि आप केंद्र की तरफ से ऑक्सीजन की आपूर्ति, आवश्यक दवाओं की आपूर्ति, वैक्सीनशन का तरीका और राज्यों में लॉकडाउन के फैसले पर अपना जवाब पेश करे। सुप्रीम कोर्ट अब इस मामले की अगली सुनवाई 23 अप्रैल को करेगी।

आपको बता दें कि सुप्रीम कोर्ट ने कोरोना से मचे हाहाकार पर ऐसे समय टिप्पणी की है जब कल ही दिल्ली हाईकोर्ट ने ऑक्सीजन की कमी को लेकर केंद्र सरकार को बुरी तरह लताड़ा था। कल देर शाम एक याचिका पर सुनवाई के दौरान उच्च न्यायालय ने स्पष्ट कहा कि केंद्र चाहे भीख मांगे, उधार ले या चोरी करे, बस ऑक्सीजन लाकर दे। न्यायालय ने केंद्र को फटकार लगाते हुए कहा कि हम ऑक्सिजन की कमी से इस तरह लोगों को मरता नहीं देख सकते।

मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री ने की बड़ी घोषणा, कहा सभी को मुफ्त में लगेगी वैक्सीन

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 मध्य प्रदेश में कोरोना के हालात देखते हुए सरकार ने ऐलान किया है कि राज्य में 1 मई से 18 या इससे अधिक उम्र के सभी लोगों को मुफ्त कोरोना टीका लगाया जाएगा। मुख्यमंत्री की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट बैठक में इस फैसले पर मुहर लगाई गई है। इससे पहले बीजेपी शासित उत्तर प्रदेश और असम सरकार ने सभी को मुफ्त कोरोना टीका लगाने का ऐलान किया है।

बता दे कि 19 अप्रैल को केंद्र सरकार ने घोषणा की कि 1 मई से 18 और इससे अधिक उम्र के लोगों को भी कोरोना का टीका लगाया जाएगा। राज्य सरकारों और प्राइवटे अस्पतालों को भी उत्पादकों से वैक्सीन खरीद की छूट दी गई है। ऐसे में केंद्र सरकार की ओर से जारी आदेश के मुताबिक, वैक्सीन कंपनियां 50 फीसदी आपूर्ति केंद्र सरकार को देंगी तो 50 फीसदी राज्य सरकारों और खुले बाजार में बेचने की छूट दी गई है।

दरअसल सीमर इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया ने कहा कि राज्य सरकारों को कंपनी 400 रुपए प्रति डोज के हिसाब से टीका देगी वहीं निजी अस्पतालों को 600 रुपए प्रति डोज के हिसाब से आपूर्ति की जाएगी। इस बीच कई राज्य सरकारों ने सभी को मुफ्त करोना टीका देने का ऐलान किया है।

कोरोना वैक्सीन को लेकर भारत की बॉयोटेक कंपनी ने कही ये बड़ी बात

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देश मे बढ़ते कोरोना संक्रमण के मद्देनजर सरकार ने 18 साल के अधिक उम्र के लोगों को वैक्सीन लगाने का फैसला किया है। लेकिन अब वैक्सीन की उत्पादन क्षमता पर सवाल उठाया जा रहा है। ऐसे में भारत बायोटेक की तरफ से बयान आया है कि साल में कोवैक्सीन की 70 करोड़ खुराक बढ़ाई जा सकती है।

कंपनी ने बताया कि भारत बायोटेक कम समय में कोवैक्सीन बनाने की क्षमता का विस्तार करने में सक्षम है। इसका मुख्य कारण विशेष रूप से डिज़ाइन किये गए BSL-3 सुविधाओं की उपलब्धता है। कंपनी ने यह भी कहा कि टीका निर्माण में क्षमता विस्तार एक लंबी प्रक्रिया है। जिसके लिए कई करोड़ रुपये और कई वर्षों के निवेश की आवश्यकता होती है।

बता दें कि कोवैक्सीन को दुनिया के कई देशों में आपातकालीन इस्तेमाल की मंजूरी मिली है। इसके साथ ही 60 के करीब देशों में बातचीत जारी है। मैक्सिको, फिलीपींस, ईरान, पैराग्वे, ग्वाटेमाला, निकारागुआ, गुयाना, वेनेजुएला, बोत्सवाना, जिम्बाब्वे सहित कई अन्य देशों में आपातकालीन इस्तेमाल की मंजूरी मिली है।

Vaccination for all above 18 in phase 3.

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New Delhi:  Every youth above 18 years of age will get covid-19 vaccine in phase 3 from May 1. The government of india has made the above announcement on Monday evening after the prime minister Narendra Modi held a meeting with country’s top doctors.

The central government has decided to liberalises India’s vaccination strategy as the nation amidst a surging second wave of coronavirus. After this decision to liberalize and accelerate of Phase 3 strategy of COVID-19 vaccination, all adult would get vaccinated at their nearest vaccination center.

The government not only reduces the age for vaccination but also allowed states to get additional vaccine doses directly from the manufacturers.
Vaccine manufacturers can supply 50 per cent of their monthly Central Drugs Laboratory (CDL) released doses to the central government and after that they are free to supply the remaining 50% doses to state governments and in the open market.

The 50-50 division between government and non-government channels would be applicable on all vaccines manufactured with in the country. This 50-50 rule, however, will not apply on the imported vaccines. Manufacturers of imported vaccines are free to sell doses directly to states and private authority.

Manufacturers would have to make an advance declaration of prices for the 50 percent vaccines supplied to state governments and in open market, before May 1. Vaccines in government centres continued to be free of cost and for previous categories – health workers, frontline workers and those above 45.