किसानों का प्रदर्शन पूरे भारत मे अब उर्ग हो चुका है। मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान(Shivraj Singh Chauhan) ने भी किसानों के खिलाफ प्रशासन को लगा दिया है। भोपाल(Bhopal) में धरने पर बैठे किसानों को शुक्रवार देर रात पुलिस ने हटा दिया। पुलिस ने मौजूदा जगह पहुच कर टेंट और माइक भी हटवा दिए। विजय कुमार जो अखिल भारतीय क्रांतिकारी किसान सभा मध्यप्रदेश के संयोजक है उन्होंने बताया कि , किसान आंदोलन के समर्थन में भोपाल के करोंद कृषि उपज मंडी के गेट के सामने संयुक्त किसान मोर्चा के नेतृत्व में चल रहे शांतिपूर्ण धरने को आधीरात में बलपूर्वक हटाया गया है
उन्होंने बताया कि यह कार्यवाही इस सरकार के किसान विरोधी चेहरे को उजागर करती है। भाजपा की इस तानाशाही की हम सभी निंदा करते हैं। अपने आप को किसान बताने वाले मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान किसानों को विरोध दर्ज कराने का अधिकार भी नहीं दे रहे हैं।
बताया जा रहा है कि धरने में सीहोर, विदिशा, रायसेन और भोपाल संभाग के किसान संगठन बैठे थे। उसके अलावा जिला स्तर पर भी प्रदर्शन जारी है। बड़ी बात यह है कि 26 जनवरी को विरोध में किसान अपना विरोध दर्ज करने के लिए परेड निकालेगी और इसमें ट्रैक्टर और बाइक रहेंग ।
किसान संगठनों ने भोपाल में 21 जनवरी की रात धरना शुरू किया था, लेकिन यह धरना 48 घंटे भी नहीं चला और पुलिस ने इसे बर्बरता से हटा दिया। यह भी अभी साफ नही हुआ है कि इस किसान आंदोलन के लिए संगठन के अध्यक्ष ने कलेक्टर से अनुमति ली थी या नहीं।
